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 राज्योत्सव  - कृषि विभाग द्वारा कृषक पाठशाला एवं  जिला स्तरीय किसान मेला का किया गया आयोजन

 - कृषकों को लघु धान्य फसल में कोदो, कुटकी, रागी तथा धान की अन्य सुगंधित किस्में जवा फुल, दुबराज के संबंध में दी गई जानकारी
- आर्गेनिक फूड प्लाजा रही लोगों की पसंदीदा जगह
- मिलेट्स के व्यंजन रहे खास
- व्यंजन रागी एवं कोदो की इडली, खीर, भाखरबड़ी मुर्कु, सीताफल जामुन के आईसक्रीम, बेल, अंबाड़ी की हर्बल शरबत रहे उपलब्ध

राजनांदगांव  । छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर जिला मुख्यालय के पद्मश्री गोविन्दराम निर्मलकर ऑडिटोरियम गौरव पथ राजनांदगांव में राज्योत्सव के अवसर पर मंगलवार को  कृषि विभाग द्वारा कृषक पाठशाला एवं जिला स्तरीय किसान मेला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आर्गेनिक फूड प्लाजा जैविक उत्पाद प्रदर्शनी सह विक्रय केन्द्र का स्टॉल विशेष रहा। कृषि विभाग के आर्गेनिक फूड प्लाजा में लोगों ने लघु धान्य फसलों से बने रागी इडली, कोदो खीर, बाजरे का लड्डू एवं अन्य व्यंजनों का आनंद लिया। फूड प्लाजा में व्यंजन रागी एवं कोदो की इडली, खीर,  रागी लड्डू, सेव, चकली, भाकरबड़ी, चलोनी, भाखरबड़ी मुर्कु, सीताफल व जामुन के आईसक्रीम, बेल, अंबाड़ी की हर्बल शरबत उपलब्ध रहे। इस अवसर पर कृषकों को लघु धान्य फसल में कोदो, कुटकी, रागी तथा धान की अन्य सुगंधित किस्में जवा फुल, दुबराज, बौना दुबराज, काला नमक किरण धान, जीरा फूल, विष्णुभोग, जवा फुल, बासमती धान, श्यामलाल धान, बादशाह भोग, ब्लेक राईस, लौंग फुल सुगंधित, राम जीरा, कुबरी मोहर, सुगंधित पार्वती चिन्नौर, अम्बे मोहर, सुगंधित तिल कस्तुरी, राधा तिलक, राम लक्ष्मण (जुड़वा चावल), दुधेर साल, केरा फुल, परी, गंगा बाली, गौरी माला, एंजल 1307, काली कोयली, कोथाम्बरी, कबीर साल, गरीब साल, गठूवन, सुगंधित बासरे के संबंध में जानकारी दी गई और प्रदर्शित भी किया गया। इसके साथ ही किसानों को कोदो कुटकी से बने विभिन्न व्यंजन कोदो की खीर, रागी की इडली, बाजरे का लड्डू, सीताफल की आइसक्रीम बनाने की विधि बताई गई तथा किसानों ने इसका स्वाद लिया।
कृषक पाठशाला में उप संचालक कृषि श्री नागेश्वर लाल पाण्डेय ने किसानों से बात की और उन्हें रबी फसल तथा धान के बदले कम पानी की आवश्यकता वाली फसल लेने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके साथ ही कोदो आम चावल, कोदो दलिया, कुटकी खिचड़ी, कुटकी लड्डू, कुटकी चावल, कोदो कुटकी की इडली, रागी लड्डू, रागी का हलवा, रागी कांजी, रागी का पराठा जैसे अन्य व्यंजन बनाने की विधि बताई गई। किसानों को जैविक खेती, जैविक खेती के मुख्य घटक, जैविक खाद, जैव उर्वरक, मिट्टी परीक्षण, रबी फसलों की उत्पादन तकनीक के संबंध में विस्तृत जानकारी दी  गई। उप संचालक कृषि श्री नागेश्वर लाल पाण्डेय ने बताया कि राजनांदगांव जिले में कृषि विकास के साथ विपुल उत्पादन वाली फसलें एवं किस्मों की खेती का क्षेत्र विस्तार दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। विपुल उत्पादन वाली उन्नत एवं हाईब्रिड किस्मों के अधिक उपयोग से रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों के उपयोग में वृद्धि हुई है, जिसका दुष्प्रभाव मानव पशुधन एवं अन्य जीव जन्तुओं पर हुआ है। भूमि की भौतिक एवं जैविक दशा निरंतर खराब होने से इसके सुधार हेतु एकमात्र उपाय जैविक खेती है। भोज्य श्रृंखला में विषाक्त तत्वों की वृद्धि से जीवनशैली से संबंधित मधुमेह, किडनी विकार, आस्टियोपोरोसिस कार्डियों वैस्कुलर, अल्सर एवं कैंसर जैसी घातक बीमारियों के मरीजों की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी हुई है। आधुनिक कृषि ने उत्पादकता एवं उत्पादन में वृद्धि के साथ पोषक तत्वों से भरपूर गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उत्पादन की दिशा में कृषकों को लाभान्वित करने हेतु जैविक खेती मिशन योजना संचालित है।
गौरतलब है कि जैविक खेती मिशन के अंतर्गत प्रचलित धान के स्थान पर कम जल एवं रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक एवं जेनेटिविली मोडीफाईड आर्गेनिज्म के उपयोग को हतोत्साहित करने की वैज्ञानिक पद्धतियों के संबंध में कृषकों को तकनीकी ज्ञान प्रदान किया जाता है। वर्मी कम्पोस्ट, नाडेप, जैव उर्वरक, राईजोबियम, एजेटोवैक्टर, एजीस्प्रिलम, माईकोराईजा, पीएसबी, जेडएसबी एवं केएमबी जैसी जैविक खादों का उपयोग हानिकारक कीटनाशक, नींदानाशकों के स्थान पर जैविक विधियों से कृषि उत्पादन की तकनीक का कृषक प्रशिक्षण शैक्षणिक भ्रमण संगोष्ठी एवं किसान मेला के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया जाता है। निरोधक किस्मों का उपयोग, कृषिगत विधियां, जैविक कीटनाशकों का उपयोग करके कीटव्याधी नियंत्रण के उपायों की जानकारी दी जाती है। आधुनिक जीवनशैली में रासायनयुक्त प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की खपत में दिन प्रतिदिन बढ़ोत्तरी हो रही है, जिसके फलस्वरूप जीवनशैली की बीमारियों का दुष्प्रभाव मानव जीवन को प्रभावित कर रहा है। प्रदर्शनी में कृषि, उद्यानिकी, वानिकी उत्पादों से निर्मित मिलेट बेस्ड प्रसंस्कृत उत्पाद खाद्य महिला कृषक अभिरूचि समूह (आत्मा) द्वारा विपणन श्रृंखला को अपनाकर आय सृजन के रूप में उद्यम विकास को प्रदर्शित किया गया। साथ ही बताया गया कि कृषि के क्षेत्र में स्थायी विकास हेतु जलसंरक्षण, जलसंवर्धन, प्रकृति संरक्षण एवं पर्यावरण हितैषी गतिविधियों को अपनाना महती आवश्यकता है। इस अवसर पर सांसद प्रतिनिधि श्री बिसेसर साहू, श्री कोमल सिंह राजपूत, प्रगतिशील कृषक श्री खेमलाल देवांगन, श्री अलखराम चंद्राकर एवं बड़ी संख्या में कृषक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान मंच संचालक श्रीमती सुषमा शुक्ला ने किया।

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