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कृषि के क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों का सामना करने हेतु डिजीटलीकरण आवश्यक

 *कृषि में घटते संसाधनों, बढ़ती खाद्यान्न मांग तथा जलवायु परिवर्तन पर कृषि अर्थशास्त्रियों ने जताई चिंता*

 

*_कृषि अर्थशास्त्र अनुसंधान संघ का तीन दिवसीय 32वां वार्षिक सम्मेलन प्रारंभ_*

रायपुर/ इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में आज कृषि अर्थशास्त्र अनुसंधान संघ, नई दिल्ली का ‘‘उच्च, सतत और समावेशी विकास के लिए कृषि का डिजीटलीकरण’’ विषय पर तीन दिवसीय 32वां वार्षिक सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। इस सम्मेलन में देश भर के प्रमुख कृषि अर्थशास्त्री, नीति निर्माता एवं शोधकर्ता शामिल हुए। सम्मेलन में भारत में आगामी दो दशकों में कृषि क्षेत्र के सामने आने वाली महत्वर्पूण चुनौतियों पर विचार मंथन किया गया और घटते संसाधनों तथा बढ़ती हुई उत्पादन मांगों के युग में कृषि में डिजीटलीकरण को बढ़ावा देने तथा नवाचार एवं तकनीकी आधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनाने पर जोर दिया गया। सम्मेलन में विशेषज्ञों द्वारा कहा गया कि भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण होने तक देश को अपनी बढ़ती जनसंख्या की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अभूतपूर्व दबावों को सामना करना पड़ेगा। जल, जंगल और जमीन जैसे प्राकृतिक संसाधनों तथा जैव विविधता पर बढ़ते दबाव और उत्पादन मांगों के तेजी से बढ़ने के पूर्वानुमान के साथ कृषि क्षेत्र को इस अंतर को स्थायी रूप से पाटने के लिए परिवर्तनकारी रणनीति अपनाना होगा। शुभारंभ समारोह के मुख्य अतिथि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल थे तथा अध्यक्षता कृषि अर्थशास्त्र अनुसंधान संघ के अध्यक्ष डॉ. पी.के. जोशी ने की।
शुभारंभ समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. गिरीश चंदेल ने आने वाले समय में संसाधनों की घटती उपलब्धता, बढ़ती जनसंख्या के दबाव तथा जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने के लिए कृषि के क्षेत्र में डिजीटलीकरण को बढ़ावा देने तथा नवाचारी प्रयास किये जाने की आवश्यकता जताई। डॉ. चंदेल ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय में इस तरह के महत्वपूर्ण सम्मेलन का आयोजन यहां के शिक्षकों, वैज्ञानिकों तथा विद्यार्थियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस सम्मेलन में सार्थक चर्चा होगी तथा महत्वर्पूण अनुशंसाएं प्राप्त होंगी। शुभारंभ समारोह के अध्यक्ष डॉ. पी.के जोशी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में जिस तेजी से विज्ञान ने तरक्की की है और तकनीकी विकास के करण जीवन के हर क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन आया है, उस अनुपात में कृषि क्षेत्र में परिवर्तन दिखाई नहीं देते। हामरे पूर्वजों और हमारी पीढ़ी के बीच खेती करने के तौर तरीकों में ज्यादा अंतर देखने को नहीं मिलता। उन्होंने कृषि के क्षेत्र में क्रांतिकारी प्रौद्योगिकी विकास करने पर जोर दिया।
शुभारंभ समारोह को सम्मेलन को इंडियन सोसायटी ऑफ एग्रीकल्चरल इकोनॉमिक्स के अध्यक्ष डॉ. डी.के. मरोठिया, सम्मेलन अध्यक्ष डॉ. प्रताप एस. बिरथल, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड, छत्तीसगढ़ डॉ. ज्ञानेन्द्र मणि, कृषि अर्थशास्त्र अनुसंधान संघ के सचिव अंजनी कुमार, राष्ट्रीय जैविक स्ट्रैस प्रबंधन संस्थान, बरौंडा, रायपुर के निदेशक डॉ. पी.के. घोष ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा निर्मित एल्यूमिनी पोर्टल ‘‘यूनी एल्यूमिनी’’ का लोकार्पण किया गया। विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित नवीन प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया। समारोह में कृषि महाविद्यालय रायपुर के अधिष्ठाता डॉ. जी.के. दास, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के संचालक अनुसंधान डॉ. वी.के. त्रिपाठी भी उपस्थित थे। आभार प्रदर्शन सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ. हुलास पाठक द्वारा किया गया। 

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