मन बुद्धि की शरणागति से ही भगवान की प्राप्ति संभव - सुश्री धामेश्वरी देवीजी
-11 दिवसीय दिव्य आध्यात्मिक प्रवचन श्रृंखला का आयोजन दिनांक 20 दिसम्बर तक रोज शाम 6 से रात 8 बजे तक होगा
भिलाई।, बडा दशहरा मैदान रिसाली सेक्टर में चल रही दिव्य आध्यात्मिक प्रवचन श्रृंखला के चैथे दिन जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की प्रचारिका सुश्री धामेश्वरी देवीजी ने बताया कि भगवान की कृपा प्राप्त करने के लिए वेदों में एक शर्त बतायी गयी है। वह शर्त तुलसीदास, सुरदास, मीरा, कबीर, नानक, तुकाराम आदि अनेक महापुरुषों ने पूरी कर दी इसलिए उन्हें भगवत्प्राप्ति हो गयी, लेकिन हम लोगों ने शर्त को पूरा नही किया, इसलिए अनादिकाल से चैरासी लाख योनियों में भटक रहे है। वह शर्त है - भगवद् शरणागति। यदि कोई भगवान की शरण में चला जाये तो फिर उसे कुछ करना ही नही है। गीता भी कहती है- ‘‘मामेकं शरणं ब्रज‘‘, अर्थात् केवल ईश्वर की शरणागति ही करनी है। लेकिन हमने अनादिकाल से संसार को अपना माना, संसारी रिश्तेदारों को अपना माना, संसार में सुख माना इसीलिए हमारी मन बुद्धि की शरणागति भगवान में न होकर संसार के सामान, रिश्तेदार, नातेदार आदि में हो जाती है। हम यह नही जानते कि संसार की वस्तुओं से जो सुख हमे मिलता है वह क्षणिक होता है और शीघ्र ही नष्ट भी हो जाता है। इसके विपरीत भगवान का सुख भूमा होता है, अर्थात् वह कभी नष्ट नही होता और प्रतिक्षण बढ़ता जाता है। शरणागति भी मन को करनी है, इंद्रियों की भक्ति से काम नही चलेगा, उसका परिणाम सदैव शून्य ही आएगा। इसलिए हमें बार बार मन बुद्धि में इस बात को बिठाना होगा कि केवल भगवान में ही वास्तविक सुख है, संसार में सुख नही है। इसका बार बार अभ्यास करना होगा। संसार से मन हटाना और भगवान में मन लगाना, निरंतर इसी का अभ्यास करना होगा, तभी वास्तविक शरणागति और भगवान की प्राप्ति हो सकेगी। इसी के साथ श्री युगल सरकार की आरती के साथ समापन हुआ। 11 दिवसीय दिव्य आध्यात्मिक प्रवचन श्रृंखला का आयोजन दिनांक 20 दिसम्बर 2024 तक रोज शाम 6 से रात 8 बजे तक होगा।










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