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  नेशनल लोक अदालत में कुल 440015 मामले निराकृत तथा अवार्ड राशि 351470458 रूपए रही

 दुर्ग, / राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देशानुसार एवं छ.ग. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के मार्गदर्शन में तथा डॉ. प्रज्ञा पचौरी, प्रधान जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के निर्देशन में जिला न्यायालय एवं तहसील व्यवहार न्यायालय में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिसके तहत जिला न्यायालय दुर्ग, कुटुम्ब न्यायालय, दुर्ग, व्यवहार न्यायालय भिलाई-3 व्यवहार न्यायालय पाटन एवं व्यवहार न्यायालय धमधा तथा किशोर न्याय बोर्ड, श्रम न्यायालय, स्थायी लोक अदालत (जनोपयोगी सेवाएँ), राजस्व न्यायालय एवं उपभोक्ता फोरम दुर्ग में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया।
नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ मॉ सरस्वती के तैलचित्र पर डॉ. प्रज्ञा पचौरी प्रधान जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग द्वारा माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवल कर प्रातः 10.30 बजे किया गया। शुभारंभ कार्यक्रम में श्रीमती गिरिजा देवी मेरावी, प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय दुर्ग के अलावा जिला अधिवक्ता संघ, दुर्ग की अध्यक्ष सुश्री नीता जैन एवं अन्य पदाधिकारीगण, न्यायाधीशगण, अधिवक्तागण तथा विभिन्न बैंक के प्रबंधक उपस्थित रहे।
नेशनल लोक अदालत में कुल 35 खण्डपीठ का गठन किया गया। परिवार न्यायालय दुर्ग हेतु 03 खण्डपीठ, जिला न्यायालय दुर्ग हेतु 27, तहसील व्यवहार न्यायालय भिलाई-3 में 01 खण्डपीठ, तहसील व्यवहार न्यायालय पाटन हेतु 01 खण्डपीठ, तहसील व्यवहार न्यायालय धमधा में 01 खण्डपीठ, किशोर न्याय बोर्ड हेतु 01 तथा स्थायी लोक अदालत (जनोपयोगी सेवाएँ) दुर्ग के लिए 01 खण्डपीठ का गठन किया गया। इसके अतिरिक्त राजस्व न्यायालय में भी प्रकरण का निराकरण हेतु खण्डपीठ का गठन किया गया था।
उक्त नेशनल लोक अदालत में राजीनामा योग्य दाण्डिक सिविल परिवार, मोटर दुर्घटना दावा से संबंधित प्रकरण रखे गये तथा उनका निराकरण आपसी सुलह, समझौते के आधार पर किया गया। इसके अलावा बैकिंग/वित्तीय संस्था, विद्युत एवं दूरसंचार से संबंधित प्री-लिटिगेशन प्रकरणों (विवाद पूर्व प्रकरण) का निराकरण भी किया गया। लोक अदालत में दोनों पक्षकारों के आपसी राजीनामा से प्रकरण का शीघ्र निराकरण होता है, इसमें न तो किसी की हार होती है न ही किसी की जीत होती है।
आज आयोजित नेशनल लोक अदालत के अवसर पर कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, दुर्ग के सहयोग से जिला न्यायालय परिसर दुर्ग में आने वाले पक्षकारों के  स्वास्थ्य जाँच/ परीक्षण हेतु एक दिवसीय निःशुल्क स्वास्थ्य जाँच शिविर का आयोजन किया गया जिसमें उक्त विभाग/ कार्यालय की ओर से डॉ. चंचल चिकित्सा अधिकारी एवं अन्य सहायक कर्मचारियों द्वारा सेवाएं प्रदान की गयी। उक्त आयोजित निःशुल्क स्वास्थ्य जाँच शिविर में कोर्ट भ्रमण के दौरान पक्षकारों व बैंक प्रबंधकों से रू-ब-रू होते हुए माननीय जिला न्यायाधीश डॉ. प्रज्ञा पचौरी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा स्वास्थ्य की जाँच परीक्षण कराया गया इसके अलावा स्वास्थ्य जाँच शिविरष् में अन्य न्यायिक अधिकारीगण, अधिवक्त्तागण एवं बड़ी संख्या में आमजनों के द्वारा अपने स्वास्थ्य की जांच / परीक्षण कराया गया और बहुतायत संख्या में लोग लाभांवित हुए हैं। इसके अलावा जनसाधारण / आमजनों / पक्षकारों के लिए निःशुल्क भोजन की व्यवस्था गुरुद्वारा-शहीद बाबादीप सिंह व श्री गुरूसिंह सभा गुरुद्वारा के सहयोग से जिला न्यायालय परिसर में किया गया था जहां बहुतायत संख्या में आमजनों द्वारा निःशुल्क भोजन ग्रहण किया गया ।
वर्ष 2024 के चतुर्थ एवं अंतिम नेशनल लोक अदालत में कुल 18596 न्यायालयीन प्रकरण तथा कुल 421419 प्री-लिटिगेशन प्रकरण निराकृत हुए जिनमें कुल समझौता राशि 351470458 रूपये रहा। इनमें बैंक के प्रीलिटिगेशन के कुल 46, विद्युत के कुल 329, बीएसएनएल के 97 मामले निराकृत हुए जिनमें कुल समझौता राशि लगभग 6244074 रही है। इसी कम में लंबित निराकृत हुए प्रकरण में 773 दाण्डिक प्रकरण, क्लेम के 63 प्रकरण, पारिवारिक मामलें के 128 चेक अनादरण के 1021 मामलें, व्यवहार वाद के 42 मामलें श्रम न्यायालय के कुल 57 मामलें तथा स्थायी लोक अदालत (जनोपयोगी सेवाएँ) दुर्ग के कुल 3004 मामलें निराकृत हुए।
उक्त नेशनल लोक अदालत में निराकृत प्रकरण के कुछ महत्वपूर्ण प्रकरण निम्नानुसार रहे -
पति के मृत्यु उपरांत पत्नि को मोटर दुर्घटना दावा के तहत क्षतिपूर्ति अवार्ड मिला 60,00,000/ रूपये
मामला खंडपीठ क्र. 02 के पीठासीन अधिकारी श्री शेख अशरफ प्रथम मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण दुर्ग के न्यायालय का है जिसमें श्रीमती आर. भाग्य लक्ष्मी व अन्य विरूद्ध उत्तम साहू व अन्य के मामले में आवेदकगण द्वारा मृतक आर. कोटेश्वर की मृत्यु के परिणाम स्वरूप क्षतिपूर्ति राशि प्राप्त करने आवेदन प्रस्तुत किया गया था जिसमें माननीय न्यायालय के समझाईश उपरांत अनावेदक क्र. 3 नेशनल इंश्योरेंस बीमा कंपनी एवं आवेदकगण के मध्य राजीनामा होने से मामला समाप्त हुआ जिसके फलस्वरूप 60,00,000/ रूपये की राशि का क्षतिपूर्ति अवार्ड पारित किया गया तथा आवेदकगण को उक्त राशि का चेक भी प्रदान किया गया ।
रिश्तेदारों के आपसी राजीनामा से आपराधिक मामला हुआ समाप्त-
मामला खंडपीठ क्र. 10 के पीठासीन अधिकारी श्री जनार्दन खरे, न्यायिक मजिस्टेट प्रथम श्रेणी दुर्ग के न्यायालय का है, जिसमें शासन विरूद्ध कामता प्रसाद में अभियुक्त कामता प्रसाद के विरूद्ध धारा 451, 323, 294 एवं 506 भाग दो के तहत अपराध पंजीबद्ध हुआ था जो साक्ष्य स्तर पर लंबित था। आरोपी और प्रार्थी आपस में रिश्तेदार थें। नेशनल लोक अदालत में न्यायालय के द्वारा समझाईश दिये जाने से उभयपक्ष अभियुक्त एवं प्रार्थी के द्वारा आपसी राजीनामा से मामला समाप्त किया गया तथा दोनों रिश्तेदार आपस में पुनः मिलकर राजीखुशी से घर वापस गए।
पड़ोसियों में स्थापित हुआ मधुर संबंध -
मामला खंडपीठ क्र. 17 के पीठासीन अधिकारी सुश्री श्वेता पटेल, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दुर्ग के न्यायालय का है, जिसमें अभियुक्तगण राजेश एवं दुर्गेश दोनों सहोदर हैं, जिनकी पड़ोसी प्रार्थिया मीना सोनी है जिसकी किराने की दुकान है। उक्त दुकान बंद होने उपरांत शराब के नशे में आकर प्रार्थीया से गाली-गलौच करने लगे तथा दुकान खोलकर सामान देने की जिद करने लगे। फलस्वरूप प्रार्थी मीना द्वारा थाने में रिपोर्ट लिखायी गयी। उक्त मामला आज नेशनल लोक अदालत में रखा गया था। जिसमें माननीय न्यायालय द्वारा समझाईश दिये जाने से अभियुक्तगण एवं प्रार्थिया, दोनों पड़ोसियों के द्वारा आपसी राजीनामा कर पुनः मधुर संबंध स्थापित करते हुए मामला समाप्त किया गया।
देवर-ननद-भाभी के मध्य पुनर्स्थापित हुआ मधुर संबंध -
मामला खंडपीठ क्र. 21 के पीठासीन अधिकारी सुश्री पायल टोप्नो, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दुर्ग के न्यायालय का है, जिसमें प्रार्थिया शिफा बानो के घर कागज मांगने आयी उन्हीं की ननंद व देवर के द्वारा प्रार्थिया से मारपीट एवं गाली-गलौच किया गया। तत्संबंध में आपराधिक मामला दर्ज होने से न्यायालय के समक्ष प्रकरण प्रस्तुत होने पर समझाईश दिये जाने पर उभयपक्ष दोनों रिश्तेदारों के द्वारा प्रकरण में हंॅसी खुशी राजीनामा करते हुए लोक अदालत के ध्येय वाक्य लोक अदालत का सार न किसी की जीत न किसी की हार को साकार किया।
आपराधिक काउंटर प्रकरण में राजीनामा के माध्यम से हुआ मामला समाप्त -
मामला खंडपीठ क्र. 13 के पीठासीन अधिकारी श्री भगवान दास पनिका, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दुर्ग के न्यायालय का है, जिसमें अभियुक्त एवं प्रार्थिया दोनों के द्वारा एक-दुसरे के विरूद्ध काउंटर मामले दर्ज हुए थे। उक्त मामले में प्रार्थिया महिला, जोकि गर्भवती थी, को पुताई करने के लिए मना करने पर आरोपीगण व प्रार्थिया दोनों के मध्यम हाथ मुक्के से मारपीट हुई। घटना के संबंध में उभयपक्षों के द्वारा एक-दूसरे के विरूद्ध काउंटर प्रकरण दर्ज कराया गया। आज लोक अदालत में उभयपक्ष के उपस्थित होने पर प्रार्थिया तथा आरोपीगण को माननीय न्यायालय द्वारा समझाईश दिये जाने से एक-दूसरे के विरूद्ध आपराधिक प्रकरण आपसी राजीनामा के आधार पर समाप्त करते हुए उभयपक्ष राजीखुशी दुबारा ऐसी घटना घटित नहीं करेंगे ऐसी कसम लेते हुए अपने अपने घर चले गए।
विडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से हैदराबाद में उपस्थित प्रतिवादी से हुआ राजीनामा -
मामला खंडपीठ क्र. 20 के पीठासीन अधिकारी श्री रवि कुमार कश्यप न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दुर्ग के न्यायालय का है, जिसमें आज नेशनल लोक अदालत में वादी स्वयं उपस्थित होकर प्रतिवादी से राशि प्राप्त किया जाना व्यक्त करते हुए मामला समाप्त करने निवेदन किया गया। चूंकि प्रतिवादी भोजराज के हैदराबाद में होने से राजीनामा की संभावनाएं नाममात्र थीं किन्तु आज आयोजित नेशनल लोक अदालत में वीडियो कान्फ्रेंसिंग सुविधा से प्रतिवादी भोजराज से संपर्क स्थापित कर प्रतिवादी की उपस्थिति लेते हुए प्रकरण में वादी एवं प्रतिवादी के मध्य राजीनामा के तहत मामला समाप्त हुआ। उक्त प्रकरण में प्रतिवादी को न्यायालय तक आने की आवश्यकता नहीं पड़ी जो न्यायालय द्वारा, माननीय सर्वाेच्च न्यायालय के ई-कोर्ट मिशन अंतर्गत प्रदत्त कम्प्यूटर एवं तकनीकों का पूर्ण रूपेण प्रयोग करते हुए उक्त मिशन की सफलता दर्शाता है।
दाम्पत्य जीवन हुआ फिर से खुशहाल -
मेरावी मामला कुटुम्ब न्यायालय के खंडपीठ क्र. 01 पीठासीन अधिकारी श्रीमती गिरिजा देवी प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय दुर्ग के न्यायालय का है, जिसमें आवेदिका अपने एवं अपने अल्पायु बच्चों के लिए अनावेदक के विरूद्ध भरण पोषण का मामला प्रस्तुत किया था। आवेदिका एवं अनावेदक का विवाह 29 जून 2012 में हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न हुआ था जिनके दाम्पत्य संबंधों से एक पुत्री एवं एक पुत्र का जन्म हुआ, जो वर्तमान में आवेदिका के साथ रह रहे है। आवेदिका के गर्भवती होने पर अनावेदक, आवेदिका को मायके में छोड़कर ठेकेदारी करने के लिए केरल चला गया। अनावेदक शराब पीकर आवेदिका के मायके आकर आवेदिका से मारपीट कर उसे प्रताड़ित करता था, आवेदिका बच्चों के भविष्य को देखते हुए सबकुछ सहते रही किन्तु अनावेदक के व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं होने से सामाजिक बैठक पंचायत करायी गयी, तब भी अनावेदक के व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं आया। अनावेदक, आवेदकगण का भरण पोषण नहीं करने और बच्चों की पढ़ाई लिखाई पर कोई खर्च एवं ध्यान नहीं देने तथा आवेदकगण के पास जीविकोपार्जन का संकट पैदा हो जाने से आवेदिका ने अनावेदक के विरूद्ध भरण पोषण का मामला कुटुम्ब न्यायलय के समक्ष प्रस्तुत किया है।
न्यायालय के द्वारा नेशनल लोक अदालत के अवसर पर पक्षकारों के मध्य सुलह कार्यवाही कराये जाने पर सुलह समझाईश पश्चात् उभयपक्ष पुरानी बातों को भूलकर साथ-साथ रहकर दाम्पत्य जीवन व्यतीत करने को तैयार होकर मामला समाप्त कर आवेदिका एवं अनावेदक दोनों अवयस्क बच्चों सहित राजी-खुशी से घर चले गये इस प्रकार सुलहवार्ता सफल रही। इस प्रकार नेशनल लोक अदालत के माध्यम से एक बिखरे हुए परिवार को फिर से एक किया गया, जिससे लोक अदालत का सिद्धांत-लोक अदालत का सार, न किसी की जीत, न किसी की हार पूर्ण हुई।
10 वर्ष से बिखरा हुआ परिवार फिर से हुआ खुशहाल -
मामला कुटुम्ब न्यायालय के खंडपीठ क्र. 01 पीठासीन अधिकारी श्रीमती गिरिजा देवी मेरावी, प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय दुर्ग के न्यायालय का है, जिसमें आवेदिका ने अनावेदक के विरूद्ध देय भरण पोषण राशि में वृद्धि करने का मामला प्रस्तुत की थी। आवेदिका एवं अनावेदक लगभग 10 वर्षों से पृथक-पृथक निवासरत थे। आवेदिका एवं अनावेदक के दाम्पत्य संसर्ग से एक पुत्र उका जन्म हुआ जो आवेदिका के साथ रहता था। आवेदिका पूर्व में देय भरण-पोषण राशि में वृद्धि करने हेतू मामला प्रस्तुत किया गया। पक्षकारों के मध्य सुलह कार्यवाही कराये जाने पर उभयपक्ष पुरानी बातों को भूलकर, जो 10 वर्ष से पृथक-पृथक रह रहे थे, पुरानी बातों को भूलकर साथ-साथ रहकर साम्पत्य जीवन व्यतीत करने तैयार हो गये। इस प्रकार सुलह वार्ता सफल रही, मामला समाप्त हुआ। और उभयपक्ष अपने पुत्र सहित राजीखुशी घर चले गए। इस प्रकार एक बिखरा हुआ परिवार फिर से एक हुआ।
आंधप्रदेश में उपस्थित प्रार्थी के द्वारा विडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से आपराधिक मामले में किया गया राजीनामा -
मामला तहसील व्यवहार न्यायालय भिलाई-03 के खंडपीठ कमांक 01 के पीठासीन अधिकारी सुश्री अमिता जायसवाल, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, भिलाई-03 के न्यायालय का है, जिसमें जितेन्द्र महानंद के द्वारा धारा- 294, 323, 506 भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत अभियुक्त दिनेश दुर्गा के विरूद्ध प्रथम सूचना दर्ज कराया गया था। आहत प्रार्थी जितेन्द्र के आंध्रप्रदेश में होने के कारण आज दिनांक को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जितेन्द्र महानंद की उपस्थिति सुनिश्चित करते हुए माननीय न्यायालय द्वारा राजीनामा की समझाईश दी गई जिस पर उभयपक्षों के द्वारा राजीनामा के माध्यम से प्रकरण को समाप्त किया गया। उभयपक्षों द्वारा मामला विडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से समाप्त होने पर माननीय न्यायालय का आभार व्यक्त किया गया। जिससे राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की मंशा न्याय आपके द्वार पूर्ण हुई।
इसी खंडपीठ के एक अन्य मामले में आहत दिलीप भारती, अंजनी भारती व शिवम भारती के द्वारा सत्या भारती के विरूद्ध धारा- 294, 323, 506 भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराया गया था। प्रकरण में दिलीप भारती, अंजनी भारती के द्वारा प्रकरण का शमन कर लिया गया था। प्रकरण में विचारण शिवम भारती के लिए अभियुक्तगण का हो रहा था। शिवम भारती गरियाबंद जेल में निरूद्ध है। आज दिनांक को विडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से शिवम भारती की उपस्थिति सुनिश्चित की गई उसे राजीनामा के महत्व की जानकारी दी गई तब उसके द्वारा राजीनामा किये जाने की सहमति दी गई जिसके आधार पर प्रकरण का नेशनल लोक अदालत में निराकरण किया गया ।

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