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 नैतिक मूल्यों पर आधारित पुष्पा की पुस्तक  'फ्रॉम प्रिंसिपल्स टू प्रैक्टिस' का विमोचन

 
 
-टी सहदेव
भिलाई नगर। बीएसपी के एसएमएस-3 विभाग की जीएम पुष्पा एंब्रोस की पहली पुस्तक 'फ्रॉम प्रिंसिपल्स टू प्रैक्टिस' का शुक्रवार को स्टील क्लब में विमोचन किया गया। अंग्रेजी में लिखी गई इस पुस्तक का विमोचन इसी प्लांट के पूर्व एमडी वीके अरोरा ने किया। पुस्तक का हिंदी में अनुवाद भी शुरू हो चुका है। कैमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री प्राप्त कर चुकीं लेखिका पुष्पा एंब्रोस ने पुस्तक में वास्तविक दुनिया के उदाहरणों का उल्लेख करते हुए नैतिक रूप से किस तरह कार्यस्थल का निर्माण किया जाना चाहिए, उसका सटीकता से विश्लेषण किया है। पुस्तक का प्रकाशन अध्ययन बुक्स, नई दिल्ली ने किया।
पुस्तक लिखने की प्रेरणा मां से मिली 
इस मौके पर अरोरा के अलावा फादर जॉन जेवियर, ओए के महासचिव परविंदर सिंह, पूर्व सीजीएम राजीव श्रीवास्तव, पत्रकार एवं लेखक ज़किर हुसैन तथा फादर साबू ने लेखिका के व्यक्तित्व और कृतित्व पर अपने विचार भी रखे। विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए लेखिका ने कहा कि उन्हें पुस्तक लिखने की प्रेरणा मां से मिली। उन्होंने शुरुआत में अपने अच्छे-बुरे अनुभवों को लिखा। करीब बीस पन्ने लिखने के बाद उन्हें लगा कि इसे यहीं छोड़ देना चाहिए, क्योंकि वे जॉब में हैं। इसी बीच उनकी माता गुजर गईं और उन्होंने लिखने का विचार त्याग दिया। फॉदर जॉन ने उन्हें सलाह दी कि वे दिवंगत मां को श्रद्धांजलि देने के रूप में लेखन जारी रखें। उन्होंने दोबारा लिखना शुरू किया, इस तरह यह पुस्तक पूर्ण हुई।
पंद्रह आलेखों का संग्रह 
पुस्तक में कार्यस्थल पर नैतिकता, नैतिक नेतृत्व, नैतिक संस्कृति का निर्माण, नैतिक संचार, कार्यस्थल संबंध और नैतिकता, नैतिकता और प्रौद्योगिकी समेत 15 आलेखों का संग्रह किया गया है, जिनमें उल्लेखित सभी उदाहरण जीवंत हैं। अपनी पुस्तक का जिक्र करते हुए लेखिका ने बताया कि इसमें उन्हीं बातों को शामिल किया गया है, जो कहीं न कहीं घटी हैं। पुस्तक में उन सभी पहलुओं को शामिल किया गया है, जो ऑर्गनाइजेशन को सुचारू और सफलतापूर्वक चलाने में कारगर हों। सैद्धांतिक रूप से संस्था कैसी होनी चाहिए, उसका प्रभावी तरीके से विश्लेषण पुस्तक को पठनीय बना देता है।
मूल्यांकन में निष्पक्षता पर जोर 
लेखिका ने बिना लागलपेट के कहा कि हम बच्चों को बड़े-बड़े सपने दिखाते हैं, पर उन्हें साकार करने में हमसे चूक हो जाती है। इसकी वजह है, बच्चों के मूल्यांकन में सत्यनिष्ठा और निष्पक्षता की कमी। कभी-कभी ऐसा भी देखने को मिला है कि कार्यक्षेत्र में पैदा हुए आपसी मतभेदों का साया रिपोर्टिंग पर भी पड़ता है। उनका कहना है कि भले ही मतभिन्नता हो, मगर रिपोर्टिंग निष्पक्ष और पेशेवर होनी चाहिए। हमारा नेतृत्व कैसा हो, इसके लिए उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ की मिसाल भी दी कि कैसे वे कंपनी की नीतियों और कार्य संस्कृति को स्वयं पर भी लागू करते हैं। समारोह में तालियों की गड़-गड़ाहट के बीच सीईडी के मंडा गुरुनाथ ने फिल्मी नगमे भी पेश किए। संचालन एलडीसीपी के महाप्रबंधक वीरेंद्र ओगले ने किया। 
 
 

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