जन्मशती पर रफ़ी की स्मृति में राग मंजरी ने सजाई सुरों की महफ़िल
टी सहदेव
भिलाई नगर। दुर्ग-भिलाई की उभरती म्यूजिकल संस्था 'राग मंजरी' ने शनिवार को सिविक सेंटर में हिंदी सिनेमा के श्रेष्ठतम पार्श्व गायक मोहम्मद रफ़ी की जन्मशती के अवसर पर एक शानदार कार्यक्रम 'रागांजलि' का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में संस्था के गायकों ने रफ़ी साहब के अमर गीतों की प्रस्तुति देकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। भारतीय संगीत के स्वर्णिम युग के कभी तिरोहित नहीं होने वाले सितारे मोहम्मद रफ़ी की गायकी की सादगी, मधुरता और भावपूर्ण अदायगी ने उन्हें हर दिल का अजीज बना दिया। उनकी जन्मशती पर आयोजित इस कार्यक्रम में उनकी कला, व्यक्तित्व और विरासत को नमन किया गया।
'राग मंजरी' के गायकों जगदीश बामनिया, ऋषभ साहू, सुमन जोशी, जीवनंदन वर्मा, तपननाथ, सुरेश बारसागढ़े, वंदना देशमुख, तामेश्वर साहू, प्रमोद ताम्रकार, पवन भुआर्य में से ज्यादातर गायक दुर्ग में संचालित संगीत महाविद्यालय 'नवीन शासकीय संगीत महाविद्यालय दुर्ग के विद्यार्थी हैं। कार्यक्रम का आरंभ सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इसके बाद 'राग मंजरी' के गायकों ने रफ़ी साहब के कई सुपरहिट गीत जैसे 'ये चाँद सा रोशन चेहरा', 'एहसान तेरा होगा मुझ पर', 'है दुनिया उसी की, जमाना उसी का', 'चाहूंगा मैं तुझे सांझ सवेरे', 'पुकारता चला हूँ मैं', और गजल 'रंग और नूर की बारात किसे पेश करूँ' गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस अवसर पर रफ़ी साहब के छत्तीसगढ़ी में गाये गीतों को याद करते हुए 'राग मंजरी' के गायकों ने छत्तीसगढ़ी फिल्म 'घर-द्वार' के गीत 'गोन्दा फूलगे मोर राजा', 'सुन सुन मोर मया के पीरा के' आदि गाकर उपस्थित श्रोताओं को भावुक कर दिया। सिविक सेंटर में उपस्थित संगीत प्रेमी श्रोताओं ने गानों के साथ झूमते हुए और साथ साथ गाते हुए इस कार्यक्रम को खूब सराहा। कई गानों पर 'वंस मोर' की आवाज भी आई और कुछ श्रोताओं ने अपनी ओर से कुछ गानों की फरमाइश भी की। कार्यक्रम की समाप्ति पर श्रोताओं ने इस तरह के कार्यक्रमों को लगातार करते रहने का आग्रह भी किया।
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