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 कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक

0- टिकाउ एवं सतत खेती को दिया जाए बढ़ावा - श्रीमती निगार
0- संभाग आयुक्त और सातों जिले के कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ भी हुए शामिल
0- बीज निगम प्रक्षेत्र रूआबांधा में नील हरित काई उत्पादन का किया अवलोकन 
दुर्ग. क्षेत्रीय कृषि प्रसार एवं प्रशिक्षण संस्थान, रूआबांधा दुर्ग के प्रशिक्षण हॉल में आज कृषि उत्पादन आयुक्त एवं प्रमुख सचिव कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग श्रीमती शहला निगार की अध्यक्षता में दुर्ग संभाग की रबी 2025-26 की प्रगति एवं खरीफ 2026 की कार्यक्रम निर्धारण संबंधी संभागीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। उक्त बैठक में संभाग आयुक्त श्री एस.एन. राठौर, संचालक कृषि श्री राहुल देव, एमडी मार्कफेड श्री जितेन्द्र शुक्ला, प्रबंध संचालक बीज निगम श्री अजय अग्रवाल, संचालक उद्यानिकी श्री लोकेश चन्द्राकर, प्रबंध संचालक मण्डी बोर्ड श्री महेन्द्र सवन्नी, प्रबंध संचालक बीज प्रमाणीकरण श्री अश्वनी बंजारा, अपर संचालक कृषि श्री सी.बी. लोण्डेकर, उप सचिव कृषि श्री विकास मिश्रा, महाप्रबंधक बीज निगम श्री विनोद वर्मा तथा कलेक्टर दुर्ग श्री अभिजीत सिंह सहित संभाग के अन्य जिले के कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ भी सम्मिलित हुए।   
बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती निगार ने रबी 2025-26 में दुर्ग संभाग के दलहन, तिलहन क्षेत्र विस्तार में उल्लेखनीय वृद्धि के लिए सराहना किया। उन्होंने आने वाले वर्षों में ग्रीष्मकालीन धान को हतोत्साहित कर दलहन, तिलहन, मक्का एवं अन्य फसलों के रकबा को बढ़ाने के निर्देश दियेे। आगामी खरीफ 2026 में धान के स्थान पर अन्य उपयुक्त वैकल्पिक फसल जैसे सुगंधित धान, अरहर, मक्का, सोयाबीन, कपास, साग-सब्जी इत्यादि फसलों को प्रोत्साहित करते हुए सभी जिले में न्यूनतम धान की एक निर्यात योग्य विशिष्ट गुण/सुगंधित किस्म का क्लस्टर में अधिक से अधिक क्षेत्र विस्तार करने के निर्देश दिये।
समीक्षा के दौरान अवगत कराया गया कि पी.एम. आशा योजनांतर्गत दलहन, तिलहन खरीदी में राज्य के अन्य संभाग की तुलना में दुर्ग संभाग में सर्वाधिक लगभग 60,000 क्विंटल उपार्जन किया गया है। कृषि उत्पादन आयुक्त ने किसानों के मांग के आधार पर पी.एम. आशा योजना के पंजीयन तिथि में वृद्धि की जानकारी देते हुए किसानों के अधिक से अधिक उपार्जन करने तथा समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिये।
बैठक में उर्वरकों के समान एवं संतुलित वितरण सुनिश्चित करने के लिए आगामी खरीफ 2026 हेतु लागू की जाने वाली नवीन ई-उर्वरक वितरण प्रणाली के संबंध में व्यापक चर्चा किया गया। नवीन ई-उर्वरक वितरण प्रणाली में एग्रीस्टेक में पंजीकृत रकबा एवं फसल के आधार पर उर्वरक का वितरण किया जायेगा।  कृषि उत्पादन आयुक्त द्वारा जिला कलेक्टर्स से सभी किसानों का एग्रीस्टेक में तत्काल पंजीयन कराने की अपेक्षा की गयी।
बैठक में मुख्य रूप से टिकाउ एवं सतत् खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया ताकि फसल उत्पादकता एवं मृदा की उर्वरकता बनी रहे व रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हो। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान इकाई द्वारा उर्वरकों के सस्ते एवं आसान वैकल्पिक उपाय हरी खाद, नील हरित काई, जैव उर्वरक, नैनों उर्वरकों के विषेष रूप से प्रस्तुतीकरण दिया गया, जिस पर कृषि उत्पादन आयुक्त द्वारा सभी जिला कलेक्टर से इसका व्यापक प्रचार-प्रसार कर इसे बढ़ावा देने हेतु निर्देशित किया गया। साथ ही डी.ए.पी. के वैकल्पिक उर्वरकों जैसे- नैनो डी.ए.पी., एन.पी.के., एस.एस.पी., टी.एस.पी. इत्यादि वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग पर जोर दिया गया।
नील हरित काई धान फसल में नाइट्रोजन का बहुत अच्छा वैकल्पिक स्त्रोत है। बीज निगम के प्रक्षेत्र रूआबांधा, दुर्ग में उपलब्ध 40 पक्के टांके में से प्रथम चरण में 5 पक्के टांके में नील हरित काई का उत्पादन किया जा रहा है। इस संबंध में कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा किये जा रहे कार्याे की सराहना की गयी। कृषि उत्पादन आयुक्त एवं राज्य स्तरीय अधिकारियों द्वारा इसका अवलोकन किया गया एवं नील हरित काई उत्पादन की संपूर्ण प्रक्रिया की जानकारी लेते हुए नये टांके में उत्पादन हेतु कल्चर डाला गया। उत्पादित नील हरित काई का उपयोग चयनित किसानों के खेतों में प्रगुणन पश्चात् धान के खेतों में किया जाएगा।
समीक्षा बैठक में सभी जिलों से जिले की आवश्यकता अनुसार फसल एवं किस्म अनुसार प्रमाणित बीज में आत्मनिर्भर होने के लिए कार्यक्रम तैयार करने के निर्देश दिये गये, जिसमें न्यूनतम 40 प्रतिशत 10 वर्ष के भीतर की किस्मों का समावेश हो। आगामी खरीफ 2026 में विकसित कृषि संकल्प अभियान की तैयारी, कृषि आदानों के गुण नियंत्रण हेतु प्रभावी कार्यवाही, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजनांतर्गत पात्र समस्त हितग्राहियों के एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन, लक्ष्य अनुसार केसीसी अंतर्गत दलहन तिलहन, उद्यानिकी फसलों के ऋण वितरण, ऑयल पॉम के क्षेत्र विस्तार इत्यादि महत्वपूर्ण बिंदुओं पर समीक्षा की गयी। बैठक में संयुक्त संचालक कृषि श्री आर.एल. धुरंधर एवं श्रीमती गोपिका बघेल, उप संचालक कृषि श्रीमती प्रीति तिवारी एवं श्री संदीप भोई, बीज प्रबंधक श्री एस.के. बेहरा एवं प्रक्षेत्र प्रबंधक श्री जयन्त लोध एवं कृषि व संबंधित विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित थे। 
 

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