सियान गुड़ी में आध्यात्म और सामयिक विषयों पर बहस
- बुजुर्ग ने कहा- रावण ज्ञानी पर अहंकार में किया माता सीता का अपहरण
- रोचक पहेलियों के दिए बुजुर्गों ने जवाब, जीवन में हो राम जैसा व्यवहार
रायपुर। वरिष्ठ नागरिकों के सियान गुड़ी में आध्यात्म और वर्तमान परिदृश्य को लेकर जोरदार चर्चा हुई। चर्चा में भगवान राम, रावण, कृष्ण, महर्षि वाल्मिकी और वर्तमान पर बुजुर्गों ने खुलकर विचार रखे। वहीं रोचक पहेलियों का जवाब भी बुजुर्गों ने उत्सुकता के साथ दिया।
समाज कल्याण विभाग की ओर से अनुदानित और महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित सियान गुड़ी के प्रभारी और महाराष्ट्र मंडल के मुख्य समन्वयक श्याम सुंदर खंगन ने बताया परिचय के दौरान लखनलाल साहू ने बताया कि वे घर पर अकेले रहते हैं। वहीं अन्य बुजुर्गों ने बताया कि वे परिवार के साथ रहते हैं, पर दोपहर में अकेले होने के कारण वे यहां आते हैं। खंगन ने बुजुर्गों से कहा कि यह सिर्फ पुरुषों के लिए नहीं, अपितु महिलाओं के लिए भी है। उन्होंने सभी से अपनी पत्नियों को भी लाने की आग्रह किया।
आध्यात्मिक चर्चा के दौरान कैलाश अग्रवाल ने कहा कि रावण के आगे विद्वान जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन क्या वह वाकई में ज्ञानी थे, अगर थे तो आखिर क्यों उन्होंने माता सीता का अपहरण किया। दरअसल उन्होंने अहंकार में आकर सीता माता का अपहरण किया था।
महर्षि वाल्मिकी के बारे में कहते हुए अग्रवाल ने कहा कि राम नाम की महिमा कितनी अपार है कि मरा-मरा कहते हुए डाकू रत्नाकर महर्षि वाल्मिकी बन गया और रामायण जैसे महाग्रंथ की रचना कर डाली। उन्होंने कहा कि जीवन में हमारा व्यवहार राम की तरह होना चाहिए।
सियान गुड़ी आने वाले लखनलाल साहू ने बताया कि वह अकेले रहते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चे आजकल किसी की बात नहीं सुनते। बच्चे ही क्या, कोई किसी का कहना मानता नहीं है। बच्चों ने किसी भी चीज की मांग की और वह नहीं पूरी हुई, तो वह मारपीट पर उतर आते हैं। मां-बाप के ऊपर हाथ उठाते है। हमें समाज को इस दिशा में जाने से रोकने का प्रयास करना होगा।
बुजुर्ग केके पाठक ने एक बहस के दौरान भावनाओं में बहकरर कहा कि प्रधानमंत्री गो हत्या बंद करने को लेकर संसद में बिल क्यों नहीं लाते। दूसरे वरिष्ठ नागरिक ने कहा कि भाषणों में कहना, वादा करना आसान होता है। परंतु जब किसी पद पर हम बैठते हैं, तब योजना और कार्य को धरातल में उतारना उतना ही मुश्किल होता है। सामने बैठकर किसी को भी बोल सकते हैं कि ऐसा नहीं किया, वैसा नहीं किया। यह करना चाहिए था, वह नहीं। लेकिन इसमें कितनी परेशानी होती है, यह वही जान सकते हैं, जो उससे जूझ रहे होते हैं। इस अवसर पर आध्यात्मिक समिति की समन्वयक आस्था काले, सह समिति मालती मिश्रा और सभासद अभय काले उपस्थित रहे।







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