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भारत हमेशा से एक हिंदू राष्ट्र रहा है, आरएसएस इसे नहीं बना रहा है: होसबाले

नयी दिल्ली.  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शीर्ष पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबाले ने कहा है कि आरएसएस हिंदू राष्ट्र का निर्माण नहीं कर रहा है क्योंकि भारत हमेशा से ही एक हिंदू राष्ट्र रहा है। उन्होंने कहा कि गैर-हिंदू अलग नहीं हैं, क्योंकि सभी के पूर्वज और डीएनए एक ही है। आरएसएस के सरकार्यवाह (महासचिव) होसबाले ने  कहा, ''यहां ब्रिटिश राज था, है ना? ब्रिटिश राज था... तब भी, यह एक हिंदू राष्ट्र था। यह ब्रिटिश राष्ट्र नहीं था।'' उन्होंने कहा कि देश में कई धार्मिक समूह हैं, जिन्हें अक्सर अल्पसंख्यक के रूप में वर्णित किया जाता है और उनमें से कोई भी द्वितीय श्रेणी का नागरिक नहीं है। होसबाले ने कहा, ''आरएसएस के भीतर भी ऐसे कई लोग हैं जो इन धार्मिक समूहों से आते हैं और संघ स्वयंसेवक हैं। वे हमारे लिए दिखावे की वस्तु नहीं हैं।'' उनसे पूछा गया कि जब आरएसएस हिंदुत्व या हिंदू राष्ट्र की बात करता है तो संघ अल्पसंख्यकों को कैसे आश्वस्त करेगा कि वे भारत में सुरक्षित हैं। होसबाले ने कहा कि आरएसएस की स्थापना के 100 साल बाद से ये सवाल अनगिनत बार पूछे जा चुके हैं। उन्होंने कहा, ''जब लोग कहते हैं कि डर है, तो मैं पूछता हूं कि क्या हुआ है? क्या मुसलमानों की संख्या कम हो गई है?'' उन्होंने कहा, ''क्या उन्हें भागना पड़ा? क्या उनके साथ द्वितीय श्रेणी के नागरिकों जैसा व्यवहार किया जाता है?'' होसबाले ने अपनी बात को पुष्ट करने के लिए महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे भाजपा शासित राज्यों का उदाहरण दिया। उन्होंने पूछा कि क्या सरकारी योजनाएं अन्य धर्मों के लोगों तक नहीं पहुंच रही हैं?
मुस्लिम और विपक्षी नेताओं का हालांकि कहना है कि आरएसएस समर्थित भाजपा के 2014 में सत्ता में आने के बाद से अल्पसंख्यक समुदाय खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। वे इसके लिए कथित गो-तस्करी के मामलों में भीड़ द्वारा पीट-पीट कर की गई हत्या के मामलों, धर्मांतरण, 'लव जिहाद' और रोजमर्रा के भेदभाव के आरोपों का हवाला देते हैं। होसबाले ने कहा कि इन सवालों को बार-बार उठाने से अल्पसंख्यक समुदायों में अनावश्यक रूप से भय पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा, ''जब राष्ट्रीयता एक है और हमारे पूर्वज एक हैं, तो हम उन्हें अलग नहीं मानते। जो लोग मानते हैं कि दुनिया एक परिवार है, वे दूसरे धर्म के लोगों से कैसे भेदभाव कर सकते हैं? बिल्कुल नहीं। वह भी सिर्फ इसलिए कि कोई दूसरे धर्म का पालन करता है।'' होसबाले ने कहा कि आरएसएस अल्पसंख्यक समुदायों के नेताओं के साथ निरंतर संवाद करता रहता है। उन्होंने कहा, ''आरएसएस में हम कहते हैं कि भारत में धार्मिक अल्पसंख्यक की यह अवधारणा ही ठोस आधार पर टिकी नहीं है। जब हम कहते हैं कि हम सब एक हैं, एक ही लोग हैं, एक ही वंश के हैं, एक ही डीएनए के हैं, तो अल्पसंख्यक होने का सवाल ही नहीं उठता।'' उन्होंने कहा, ''पूजा का तरीका बदलने मात्र से आपकी राष्ट्रीयता नहीं बदल जाती। हमारा यही मानना ​​है।'' आरएसएस नेता ने कहा कि राष्ट्र-राज्य की अवधारणा पर भारत के शिक्षाविदों और बौद्धिक जगत के बीच व्यापक बहस और समझ होनी चाहिए।

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