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 फसलों को खरपतवार से होने वाले नुकसान को नियंत्रित करने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने बनाई रणनीति

-कृषि विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय खरपतवार प्रबंधन अनुसंधान परियोजना की तीन दिवसीय वार्षिक बैठक का समापन हुआ
 रायपुर, । इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में आयोजित अखिल भारतीय समन्वित खरपतवार प्रबंधन अनुसंधान परियोजना की त्रिदिवसीय 33वीं वार्षिक समीक्षा बैठक का गुरुवार को यहां समापन हुआ। बैठक के तृतीय दिवस में उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधियों एवं विशेषज्ञों के साथ विशेष संवाद सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान खरपतवार प्रबंधन से संबंधित आधुनिक तकनीकों, कृषि उपयोगी उत्पादों, नवाचारों एवं अनुसंधान आधारित समाधान पर विस्तृत चर्चा की गई। उद्योग प्रतिनिधियों ने कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों के उपयोग, प्रभावी खरपतवार नियंत्रण उपायों तथा किसानों तक उन्नत तकनीक पहुंचाने के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। इस तीन दिवसीय समीक्षा बैठक में कृषि वैज्ञानिकों ने विभिन्न फसलों को हानि पहुंचाने वाले खरपतवारों के प्रभावी नियंत्रण की विभिन्न विधियों पर सारगर्भित चर्चा की तथा फसलों को इनसे होने वाले नुकसान को न्यूनतम करने हेतु मंथन किया। इस दौरान विभिन्न रासायनिक खरपतवारनाशकों से मिट्टी, जल एवं पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों पर भी चर्चा की गई और इसे रोकने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया। हानिकारक हर्बिसाइड के उपयोग को सीमित करते हुए खरपतवार प्रबंधन की वैकल्पिक विधियों को प्रोत्साहन देने पर जोर दिया गया।
उल्लेखनीय है कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में आगामी 12 से 14 मई 2026 तक अखिल भारतीय समन्वित खरपतवार प्रबंधन अनुसंधान परियोजना” की 33वीं वार्षिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस तीन दिवसीय बैठक का उद्घाटन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के उप महानिदेशक (NRM) डॉ. ए. के. नायक द्वारा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में किया गया। यह परियोजना देश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों में फसलों में खरपतवार नियंत्रण पर अनुसंधान तथा नवीनतम तकनीकांे के विकास एवं उनके किसानों के बीच प्रसार हेतु भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा जबलपुर स्थित खरपतवार अनुसंधान निदेशालय के माध्यम से चलाई जा रही है। 
इस समीक्षा बैठक में देश भर के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालय में संचालित 17 प्रमुख केंद्रों,  तथा 7 स्वयंसेवी केंद्रों में खरपतवार अनुसंधान में लगे कार्यरत वैज्ञानिकों के अलावा राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (SAU), ICAR संस्थानों तथा हर्बीसाइड उद्योगों लगभग 100 वैज्ञानिकों के शामिल हुए। समीक्षा बैठक के दौरान वर्ष 2025-26 में किए गए अनुसंधान कार्यों एवं विस्तार गतिविधियों की प्रमुख उपलब्धियों की समीक्षा की गई तथा आगामी दो वर्षों के लिए तकनीकी कार्यक्रम पर गहन विचार विमर्श करते हुए अंतिम रूप दिया गया। 
 

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