कृत्रिम गर्भाधान करवाकर घनाराम यादव कर रहे रोजाना लगभग 1 क्विंटल दूध उत्पादन
0- डेयरी व्यवसाय हुआ सक्षम, आर्थिक स्थिति में हुआ सुधार
रायपुर. पारंपरिक पशु पालन कर दूध उत्पादन करने वाले श्री घनाराम यादव आज शासन के कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम के जरिए रोजाना लगभग 1 क्विंटल दूध का उत्पादन कर रहे हैं, जिससे न केवल उनका मुनाफा बढ़ा है बल्कि शहर में दूध की मांग की पूर्ति करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। श्री यादव जिले के डगनिया क्षेत्र में निवारत हैं। उनके पास गाय एवं भैंस दोनों थीं, लेकिन उनकी नस्ल उन्नत नहीं थी, जिसके कारण दूध उत्पादन कम होता था जबकि उनके पालन-पोषण में खर्च उतना ही था। दूध विक्रय से आय कम होने के कारण उनके परिवार का जीवन संघर्षों से भर गया।
इस दौरान पशुधन विकास विभाग के डॉक्टर और एवीएफओ उनके डेयरी आए और शासन के महत्वपूर्ण कार्यक्रम कृत्रिम गर्भाधान से नस्ल सुधार और इसके आर्थिक उन्नति के बारे में जानकारी दी एवं गाय- भैंस के गर्भाधान कराने की सलाह दी। शुरूआत में श्री यादव को इस पर विश्वास नहीं हुआ लेकिन अधिकारियों द्वारा समझाने और इसके लाभ बताने पर वे कृत्रिम गर्भाधान कराने के लिए तैयार हो गए एवं उच्च नस्ल वाले गाय एवं भैंस के वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान कराना शुरू किया।
इस तकनीक से प्राप्त उन्नत बछड़े और दुग्धोत्पादन में उन्हें उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली। अब वे अपने सभी पशुओं में सुनियोजित अंतराल में कृत्रिम गर्भाधान कराने लगे। इसके पश्चात् उन्होंने रोजाना लगभग 1 क्विंटल दूध उत्पादन प्राप्त किया। इसके विक्रय से होने वाली आय से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति काफी सुदृढ़ हुई है एवं दूध वितरण के लिए उन्होंने एक मोटर-सायकिल भी ली।
इस बीच उन्हें किसान क्रेडिट कार्ड की जानकारी दी गई। इसके तहत उन्होंने लगभग 2 वर्ष पहले 1 लाख 60 हजार रूपए केसीसी ऋण लिया। इस राशि का उपयोग उन्होंने अपने डेयरी व्यवसाय को और सक्षम बनाने में किया और निर्धारित समय पर ऋण का भुगतान कर उचित छूट का भी लाभ प्राप्त किया।
आज श्री यादव अपने व्यवसाय और आर्थिक विकास से बहुत प्रसन्न हैं जिसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त किया।












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