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 छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को आवश्यकतानुसार संसाधन उपलब्ध कराने तथा कृषि में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध-कृषि मंत्री रामविचार

0- “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत मंत्री श्री नेताम ने किया वृक्षारोपण 
दुर्ग. महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय दुर्ग द्वारा “खेत बचाओ अभियान- स्वस्थ मिट्टी, सशक्त किसान, समृद्ध भारत” विषय पर विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, सांकरा (पाटन) में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम उपस्थित रहे। कृषि मंत्री श्री नेताम ने इस अभियान का विधिवत शुभारंभ करते हुए “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत वृक्षारोपण किया।
विशिष्ट अतिथि के रूप में दुर्ग लोकसभा सांसद श्री विजय बघेल, महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रवि आर. सक्सेना, जितेन्द्र वर्मा, सभापति नीलम राजेश चंद्राकर, सरपंच रवि सिगौर, हर्षा लोकमणी चंद्राकर, दिलीप साहू, कमलेश चंद्राकर सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं किसान उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने “जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान” के उद्घोष के साथ अपने संबोधन की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा संचालित “खेत बचाओ, पर्यावरण बचाओ” अभियान वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से भूमि की उर्वरता प्रभावित हो रही है तथा इसका प्रतिकूल प्रभाव मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। आज अनेक बीमारियां बढ़ रही हैं, जिसका एक प्रमुख कारण दूषित पर्यावरण एवं असंतुलित कृषि पद्धति है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक एवं जैविक खेती की ओर अग्रसर होने का आह्वान करते हुए कहा कि मिट्टी परीक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा जल संरक्षण के माध्यम से कृषि को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को आवश्यकतानुसार संसाधन उपलब्ध कराने तथा कृषि में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यदि हम अधिक से अधिक पौधे लगाते हैं तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ पर्यावरण और पर्याप्त ऑक्सीजन उपलब्ध होगी। उन्होंने वर्ष 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए भूमि एवं पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।
सांसद श्री विजय बघेल ने कहा कि किसानों के हित में रासायनिक खेती के साथ-साथ जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण का संस्कार हमें बचपन से परिवार और समाज से मिलता है। जल, जंगल, जमीन और जीव-जंतु एक-दूसरे पर आश्रित हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “एक पेड़ मां के नाम” अभियान का उल्लेख करते हुए उन्होंने सभी नागरिकों से अधिकाधिक पौधे लगाने एवं जल संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक घर में वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके। 
कार्यक्रम के दौरान कृषि एवं उद्यानिकी से संबंधित विभिन्न प्रदर्शनी स्टॉल लगाए गए, जिनका कृषि मंत्री रामविचार नेताम एवं सांसद विजय बघेल ने अवलोकन किया। इस अवसर पर किसानों को  कृषि किट का वितरण भी किया गया। तत्पश्चात “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अंतर्गत अतिथियों एवं उपस्थित जनसमुदाय द्वारा पौधरोपण किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, कृषि वैज्ञानिक, विश्वविद्यालय के अधिकारी-कर्मचारी, भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने पर्यावरण संरक्षण, भूमि संरक्षण एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
कुलपति प्रो. रवि आर. सक्सेना ने कहा कि विश्वविद्यालय पर्यावरण संरक्षण एवं भूमि संरक्षण के क्षेत्र में लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि गत वर्ष 600 पौधों का रोपण किया गया था, जबकि इस वर्ष 800 पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कार्यक्रम का स्वागत भाषण महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. अमित दीक्षित ने दिया।
 

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