स्वरोजगार को मिली नई उड़ान, पीएम स्वनिधि योजना से बढ़ा आत्मविश्वास
-पीएम स्वनिधि योजना से बदली जिंदगी, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े हितग्राही
महासमुन्द / प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना जिले के छोटे व्यापारियों, रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं एवं स्वरोजगार से जुड़े लोगों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बन रही है। योजना के तहत आसान ऋण सुविधा उपलब्ध होने से हितग्राहियों को अपने व्यवसाय को विस्तार देने, आय बढ़ाने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है। जिले के अनेक लाभार्थी इस योजना का लाभ लेकर अपने कारोबार को नई पहचान दे रहे हैं तथा अपने परिवार के बेहतर भविष्य का निर्माण कर रहे हैं।
योजना से लाभान्वित हितग्राही महासमुन्द के वार्ड क्रमांक 7 की निवासी श्रीमती राधा औसर बताती हैं कि उन्होंने अंडा विक्रय के छोटे से व्यवसाय से अपनी आजीविका की शुरुआत की थी। सीमित संसाधनों के कारण व्यवसाय का विस्तार करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था, लेकिन पीएम स्वनिधि योजना से प्राप्त ऋण ने उनकी राह आसान कर दी। उन्होंने अपने कारोबार को बड़े स्तर पर विकसित किया और बढ़ती आय के साथ साड़ी व्यवसाय भी शुरू कर दिया। आज वे आत्मविश्वास के साथ अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही हैं। इसी तरह श्रीमती मंजुला शर्मा ने भी योजना का लाभ उठाकर अपने व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। वे बताती हैं कि योजना से प्राप्त आर्थिक सहायता ने उन्हें अपने कार्य को व्यवस्थित और विस्तारित करने में मदद की, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई और जीवन स्तर बेहतर हुआ।
भलेसर निवासी श्री गोप कुमार तांडे ने बताया कि पीएम स्वनिधि योजना से प्राप्त राशि का उपयोग उन्होंने अपने तीन बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए किया। सीमित आय के बावजूद उन्होंने बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता दी और योजना से मिली सहायता ने उनके इस सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज उनके बच्चे बेहतर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जो परिवार के उज्ज्वल भविष्य की नींव बन रही है।
महासमुन्द की दिव्यांग हितग्राही सविता निषाद भी इस योजना से लाभान्वित होने वाली प्रेरणादायक व्यक्तित्व हैं। सविता बताती हैं कि पहले वे केवल चूड़ी विक्रय का छोटा व्यवसाय करती थीं, लेकिन पीएम स्वनिधि योजना से प्राप्त सहायता ने उन्हें अपने व्यवसाय को नई दिशा देने का अवसर प्रदान किया। उन्होंने चूड़ी व्यवसाय के साथ-साथ केक निर्माण एवं विक्रय का कार्य भी शुरू किया। इससे उनकी आय में वृद्धि हुई और वे आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनीं।













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