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स्विस बैंकों में जमा भारतीय धन 2025 में आठ प्रतिशत गिरकर 36,793 करोड़ रुपये परः एसएनबी

नयी दिल्ली/ ज्यूरिख। स्विस बैंकों में जमा भारतीय धन वर्ष 2025 में आठ प्रतिशत से अधिक घटकर 3.25 अरब स्विस फ्रैंक (करीब 36,793 करोड़ रुपये) रह गया। यह गिरावट स्थानीय शाखाओं और अन्य बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थानों के माध्यम से रखी गई राशि में कमी के कारण हुई। स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी) की तरफ से बृहस्पतिवार को जारी वार्षिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। इन आंकड़ों के मुताबिक, कुल जमा राशि में गिरावट आने के बावजूद व्यक्तिगत और संस्थागत ग्राहकों के खातों में जमा धन 50 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 52.4 करोड़ स्विस फ्रैंक (करीब 6,000 करोड़ रुपये) हो गया। हालांकि, कुल राशि में इन जमाओं की हिस्सेदारी लगभग 16 प्रतिशत ही रही। कुल धनराशि का बड़ा हिस्सा 'बैंकों को देय राशि' के रूप में रहा, जो अन्य बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों के जरिये रखी गई थी। यह राशि पिछले साल करीब 15 प्रतिशत घटकर 2.6 अरब स्विस फ्रैंक रही। इससे पहले वर्ष 2024 में स्विस बैंकों में जमा कुल भारतीय धन तिगुना होकर 3.5 अरब स्विस फ्रैंक हो गया था, जो 2021 के बाद का उच्चतम स्तर था। वर्ष 2021 में यह आंकड़ा 14 साल के उच्चतम स्तर 3.83 अरब स्विस फ्रैंक पर था। ये बैंकों की तरफ से स्विस नेशनल बैंक को दी गई सूचनाओं पर आधारित आंकड़े हैं। ये स्विट्जरलैंड में भारतीयों के पास मौजूद कथित काले धन की बहुचर्चित मात्रा को नहीं दर्शाते हैं। इन आंकड़ों में वह धन भी शामिल नहीं होता जो भारतीयों, प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) या अन्य लोगों द्वारा स्विस बैंकों में तीसरे देशों की इकाइयों के नाम पर रखा गया हो। एसएनबी के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 के अंत में मौजूद कुल 325.05 करोड़ स्विस फ्रैंक की देनदारियों में से 52.4 करोड़ स्विस फ्रैंक ग्राहक जमा, 2.6 अरब स्विस फ्रैंक अन्य बैंकों के जरिये, 1.86 करोड़ स्विस फ्रैंक विश्वस्त संस्था या ट्रस्ट के जरिये और 10.57 करोड़ स्विस फ्रैंक बॉन्ड एवं प्रतिभूतियों जैसे अन्य वित्तीय साधनों के रूप में थे। एसएनबी के आंकड़ों के अनुसार, स्विस बैंकों में भारतीयों की कुल जमा राशि वर्ष 2006 में करीब 6.5 अरब स्विस फ्रैंक के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई थी। इसके बाद इसमें अधिकांश समय गिरावट का रुख रहा। हालांकि 2011, 2013, 2017, 2020, 2021, 2022, 2023 और 2024 जैसे कुछ वर्षों में इसमें वृद्धि दर्ज की गई। एसएनबी ने स्पष्ट किया कि ये आंकड़े बैंकों द्वारा रिपोर्ट की गई कुल देनदारियों को दर्शाते हैं और इन्हें स्विस बैंकों में कथित काले धन का प्रत्यक्ष संकेतक नहीं माना जा सकता। साथ ही, इनमें तीसरे देशों की इकाइयों के नाम पर रखे गए धन को शामिल नहीं किया जाता। अंतरराष्ट्रीय निपटान बैंक (बीआईएस) के 'लोकेशनल बैंकिंग स्टैटिस्टिक्स' के मुताबिक, स्विस बैंकों में भारतीय व्यक्तियों के जमा धन में 2025 के दौरान 20 प्रतिशत बढ़कर 8.97 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब 780 करोड़ रुपये) हो गया। स्विट्जरलैंड और भारत के बीच 2018 से कर मामलों में स्वत: सूचना आदान-प्रदान व्यवस्था लागू है, जिसके तहत स्विस वित्तीय संस्थानों में खाताधारकों से जुड़ी विस्तृत जानकारी हर साल भारतीय कर अधिकारियों के साथ साझा की जाती है। वैश्विक स्तर पर स्विस बैंकों में विदेशी ग्राहकों की कुल जमा राशि 2025 में करीब आठ प्रतिशत घटकर 1.05 लाख करोड़ स्विस फ्रैंक रही। देशवार आंकड़ों में स्विस बैंकों में मौजूद विदेशी ग्राहकों के धन के मामले में ब्रिटेन 192 अरब स्विस फ्रैंक के साथ शीर्ष पर रहा, जबकि अमेरिका (75 अरब स्विस फ्रैंक) और फ्रांस (63 अरब स्विस फ्रैंक) क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। हालांकि, भारत वर्ष 2024 के 48वें स्थान से सुधरकर 2025 में 46वें स्थान पर पहुंच गया।
पाकिस्तान की जमा राशि 27.2 करोड़ स्विस फ्रैंक से घटकर 25.7 करोड़ स्विस फ्रैंक रह गई, जबकि बांग्लादेश की जमा राशि 43 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी के साथ 84.2 करोड़ स्विस फ्रैंक पहुंच गई। रैंकिंग में बांग्लादेश 81वें स्थान पर रहा जबकि पाकिस्तान 108वें स्थान पर है।

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