29 अगस्त को होगी धमधागढ़ विरासत यात्रा
छै आगर छै कोरी तरिया और बूढ़ा नरवा की अनोखी जल विरासत से रूबरू होंगे प्रतिभागी
धमधा। धर्मधाम गौरवगाथा समिति, धमधा द्वारा आयोजित धमधागढ़ विरासत यात्रा (हेरिटेज वॉक) का आयोजन 29 अगस्त, शनिवार को किया गया है। पुरखौती विरासत यात्रा के नाम से आयोजित यह विशेष भ्रमण धमधा की प्राचीन जल विरासत तथा पारंपरिक जल प्रबंधन प्रणाली पर केंद्रित होगा। यात्रा का आयोजन सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक किया जाएगा।
विरासत यात्रा के दौरान प्रतिभागियों को धमधा के प्रसिद्ध “छै आगर छै कोरी तरिया” अर्थात 126 तालाबों की श्रृंखला तथा इन्हें जल से जोड़ने वाले ऐतिहासिक बूढ़ा नरवा की अनोखी व्यवस्था को करीब से समझने का अवसर मिलेगा। यात्रा का प्रमुख आकर्षण लगभग 50 लबालब भरे तालाबों का एक साथ विहंगम दृश्य होगा। प्रतिभागी उस बूढ़ा नरवा को भी देखेंगे, जो खेतों से वर्षाजल को एकत्रित कर उसे तालाबों तक पहुँचाने वाली पारंपरिक जल प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बताया जाएगा कि किस प्रकार यह जल तंत्र लगभग 20 तालाबों तक पानी पहुँचाने में भूमिका निभाता है।
धर्मधाम गौरवगाथा समिति के अनुसार, यह केवल पर्यटन या भ्रमण का आयोजन नहीं, बल्कि धमधा की प्राचीन जल संरचनाओं, उनके निर्माण की तकनीक और स्थानीय समाज-जीवन से उनके संबंध को समझने का प्रयास है। यात्रा के दौरान यह जानने का प्रयास किया जाएगा कि 126 तालाबों की श्रृंखला किस प्रकार विकसित हुई, बूढ़ा नरवा का निर्माण कब और किस उद्देश्य से हुआ तथा खेतों से तालाबों तक पानी पहुँचाने की पारंपरिक तकनीक कैसे काम करती थी। साथ ही इस जल तंत्र के धमधा की खेती, समाज और संस्कृति पर पड़े प्रभाव तथा वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता पर भी चर्चा होगी।
इस पुरखौती विरासत यात्रा के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने रूचि दिखाई है। इसमें रायपुर, भिलाई दुर्ग के प्रोफेसर, शोधार्थी व पर्यटक शामिल होगे।

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