ब्रेकिंग न्यूज़

 सेवा की कहानी: पति के निधन के बाद अकेली रह गईं भुइरी बाई, प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला सुरक्षित आशियाना

-कभी कच्चे मकान में परेशानियों के बीच गुजरता था जीवन, पक्के घर ने दी सुरक्षा और सुकून
-पति के नाम से स्वीकृत हुआ था आवास, उनके निधन के बाद पक्का मकान बना भुइरी बाई के जीवन का बड़ा सहारा
-उज्ज्वला योजना से रसोई गैस की सुविधा ने आसान किया दैनिक जीवन, बोलीं—अपने दम पर घर बनाना संभव नहीं था, सरकार ने पूरा किया सपना
रायपुर / जीवनसाथी का साथ छूटने के बाद अकेले जीवन गुजारना आसान नहीं होता। ऐसे में सिर पर सुरक्षित छत और रोजमर्रा की बुनियादी सुविधाएं किसी बड़े सहारे से कम नहीं होतीं। सरगुजा जिले की श्रीमती भुइरी बाई के जीवन में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण ने ऐसा ही बदलाव लाया है। कभी पति के साथ कच्चे मकान में अनेक परेशानियों के बीच रहने वाली भुइरी बाई आज अपने पक्के घर में सुरक्षित और सुकून भरा जीवन बिता रही हैं। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से मिली रसोई गैस की सुविधा ने उनके दैनिक जीवन को भी आसान बनाया है।
भुइरी बाई की यह कहानी केवल एक पक्का मकान मिलने की नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में सुरक्षित आशियाने के सहारे जीवन को आगे बढ़ाने की है। पति के निधन के बाद अकेली रह गईं भुइरी बाई के लिए पक्का घर आज सुरक्षा, सुविधा और सम्मान का आधार बन गया है।
भुइरी बाई बताती हैं कि पहले वे अपने पति स्वर्गीय श्री कांशीराम के साथ कच्चे मकान में रहती थीं। मकान की स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण उन्हें अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और सीमित संसाधनों के कारण अपने खर्च पर पक्का मकान बनवाना संभव नहीं था।
इसी बीच उनके पति के नाम से प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत आवास स्वीकृत हुआ। इससे परिवार में पक्के घर की उम्मीद जगी, लेकिन आवास स्वीकृत होने के बाद उनके पति का निधन हो गया। जीवनसाथी के गुजर जाने से भुइरी बाई अकेली रह गईं।ऐसी कठिन परिस्थितियों में पक्का आवास उनके जीवन का महत्वपूर्ण सहारा बना। अब वे अपने पक्के मकान में रह रही हैं। कच्चे घर की परेशानियों से राहत मिलने के साथ उन्हें सुरक्षित और सुविधाजनक आवास उपलब्ध हुआ है।
भुइरी बाई बताती हैं कि पहले कच्चे मकान में रहने के दौरान कई तरह की दिक्कतें होती थीं। आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे अपनी बचत से पक्का मकान बनवा सकें। पति के निधन के बाद अकेले जीवन गुजारते हुए घर की सुरक्षा और सुविधाओं का महत्व उनके लिए और बढ़ गया।प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से पक्का मकान मिलने के बाद अब उन्हें पहले जैसी आवास संबंधी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता। अपने घर में सुरक्षित रहने की सुविधा ने उनके जीवन में सुकून और आत्मविश्वास बढ़ाया है।
पक्के आवास के साथ भुइरी बाई को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के माध्यम से रसोई गैस की सुविधा भी मिली है। अब वे गैस चूल्हे पर भोजन तैयार करती हैं, जिससे रोजमर्रा के घरेलू कामों में सहूलियत हो रही है।
अकेले रहने के कारण घर की सभी जिम्मेदारियां भुइरी बाई स्वयं संभालती हैं। ऐसे में रसोई गैस की सुविधा उनके लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित हो रही है। पक्का घर और रसोई गैस जैसी सुविधाओं ने उनके दैनिक जीवन को पहले की तुलना में अधिक आसान बनाया है।
अपने जीवन में आए बदलाव को साझा करते हुए भुइरी बाई भावुक होकर कहती हैं, “पहले कच्चे मकान में रहती थी, तब बहुत दिक्कत होती थी। मेरे पति के नाम से आवास निकला था, लेकिन बाद में उनका निधन हो गया। अब मैं अकेले रहती हूं। मेरी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि अपने पैसे से पक्का मकान बनवा सकूं। सरकार ने अच्छा घर बनाकर दिया है। अब घर में अच्छी सुविधा है और गैस पर खाना भी बनाती हूं।”
भुइरी बाई के लिए पक्का मकान वर्षों पुरानी इच्छा पूरी होने जैसा है। उनका कहना है कि आवास मिलने से उन्हें बड़ी राहत मिली है। अब वे अपने घर में अधिक सुरक्षित और संतुष्ट महसूस करती हैं।
भुइरी बाई ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के माध्यम से पक्का मकान और उज्ज्वला योजना से रसोई गैस की सुविधा मिलने पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण स्वयं पक्का घर बनाना संभव नहीं था। शासन की सहायता से उनका सपना पूरा हुआ है और अब वे अपने पक्के मकान में बेहतर सुविधाओं के साथ जीवन बिता रही हैं।भुइरी बाई की कहानी बताती है कि जरूरतमंद परिवारों के लिए पक्का आवास केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का महत्वपूर्ण आधार भी है। विशेष रूप से अकेले जीवन गुजार रही महिलाओं के लिए आवास और रसोई गैस जैसी बुनियादी सुविधाएं दैनिक जीवन की कठिनाइयों को कम करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं।
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सामने आई भुइरी बाई की यह कहानी जनकल्याणकारी योजनाओं से जीवन में आए बदलाव का उदाहरण है। पति के निधन के बाद अकेली रह गईं भुइरी बाई के लिए पक्के घर की छत आज केवल मौसम से सुरक्षा नहीं, बल्कि जीवन में सुकून, सम्मान और भविष्य के प्रति भरोसे का सहारा बन गई है।

Related Post

Leave A Comment

Don’t worry ! Your email address will not be published. Required fields are marked (*).

Chhattisgarh Aaj

Chhattisgarh Aaj News

Today News

Today News Hindi

Latest News India

Today Breaking News Headlines News
the news in hindi
Latest News, Breaking News Today
breaking news in india today live, latest news today, india news, breaking news in india today in english