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डबरी के गहरीकरण से बदली बाबूनाथ की खेती की तस्वीर, सब्जी उत्पादन और मछली पालन से बढ़े आजीविका के अवसर

-कभी सिंचाई के लिए पानी की कमी से जूझते थे बाबूनाथ, अब डबरी में संग्रहित पानी से कर रहे साग-सब्जियों की खेती
-सब्जी उत्पादन से पूरी हो रहीं परिवार की जरूरतें, बिक्री से निकल रहा खेती का खर्च
-डबरी में मछली पालन से मिला अतिरिक्त आजीविका का साधन, जल संरक्षण से खेती-किसानी को मिला नया संबल
रायपुर / कभी सिंचाई के लिए पानी की कमी से परेशान रहने वाले सरगुजा जिले के किसान श्री बाबूनाथ के लिए आज उनकी डबरी आजीविका का महत्वपूर्ण आधार बन गई है। डबरी के गहरीकरण और मरम्मत से जल संग्रहण क्षमता बेहतर हुई तो खेतों में साग-सब्जियों की खेती करना आसान हो गया। अब वे डबरी में संग्रहित पानी से सब्जियां उगा रहे हैं। इससे परिवार की घरेलू जरूरतें पूरी हो रही हैं और अतिरिक्त सब्जियों की बिक्री से खेती का खर्च भी निकल रहा है। इतना ही नहीं, डबरी में मछली पालन से उन्हें आजीविका का एक और साधन मिला है।अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम ससकालो निवासी किसान बाबूनाथ की यह कहानी बताती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण और सिंचाई सुविधाओं का विकास किसानों के जीवन में कितना महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। ग्रामीण रोजगार योजना के अंतर्गत डबरी के गहरीकरण एवं मरम्मत कार्य से उन्हें खेती के लिए पानी का भरोसेमंद साधन मिला है। अब वे उपलब्ध जल का उपयोग सब्जी उत्पादन के साथ मछली पालन में भी कर रहे हैं।
बाबूनाथ बताते हैं कि पहले सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने से खेती-किसानी में परेशानी होती थी। विशेष रूप से साग-सब्जियों की खेती के लिए पानी की नियमित उपलब्धता जरूरी थी, लेकिन सीमित जल संसाधनों के कारण खेती के अवसर प्रभावित होते थे।ग्रामीण रोजगार योजना के अंतर्गत उनकी डबरी का गहरीकरण एवं मरम्मत कार्य कराया गया। इससे डबरी में पानी संग्रहित करने की क्षमता बेहतर हुई और सिंचाई के लिए जल उपलब्ध होने लगा।
अब बाबूनाथ इसी पानी का उपयोग खेतों में साग-सब्जियों की सिंचाई के लिए कर रहे हैं। पानी की उपलब्धता बढ़ने से खेती करना पहले की तुलना में आसान हुआ है। डबरी उनके लिए जल संरक्षण के साथ कृषि कार्यों का महत्वपूर्ण साधन बन गई है।डबरी में पानी उपलब्ध होने से बाबूनाथ अब साग-भाजी और अन्य सब्जियों की खेती कर पा रहे हैं। इससे परिवार को घर में ही ताजी सब्जियां उपलब्ध हो रही हैं और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बाजार पर निर्भरता भी कम हुई है।वे बताते हैं कि घरेलू उपयोग के बाद बचने वाली सब्जियों को बाजार में बेचते हैं। इसके लिए वे स्वयं बाजार जाते हैं और आवश्यकता पड़ने पर परिवार के अन्य सदस्यों की मदद भी लेते हैं।
सब्जियों की बिक्री से होने वाली आमदनी खेती से जुड़े खर्चों को पूरा करने में मददगार बन रही है। इस तरह डबरी से मिली सिंचाई सुविधा ने परिवार की घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ आर्थिक राहत भी प्रदान की है।बाबूनाथ का कहना है कि पहले पानी की कमी के कारण साग-सब्जियों की खेती में कठिनाई होती थी, लेकिन अब डबरी में पानी रहने से वे नियमित रूप से सब्जियां उगा पा रहे हैं।
डबरी के गहरीकरण के बाद उसमें मछली बीज भी डाले गए हैं। इससे बाबूनाथ को खेती के साथ मछली पालन का अवसर मिला है।अब डबरी का उपयोग केवल सिंचाई के लिए नहीं, बल्कि मछली पालन जैसी आजीविका गतिविधि के लिए भी किया जा रहा है। इससे उपलब्ध जल संसाधन का बेहतर उपयोग हो रहा है और परिवार के लिए आय के अतिरिक्त अवसर विकसित हुए हैं।
बाबूनाथ बताते हैं कि डबरी से उन्हें कई तरह के लाभ मिल रहे हैं। एक ओर इसके पानी से साग-सब्जियों की खेती हो रही है, वहीं दूसरी ओर मछली पालन से भी परिवार को लाभ मिल रहा है।इस प्रकार डबरी का गहरीकरण उनके लिए केवल जल संरक्षण का कार्य नहीं रहा, बल्कि खेती-किसानी और आजीविका को मजबूत बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।
अपने जीवन में आए बदलाव को साझा करते हुए बाबूनाथ कहते हैं, “मेरी डबरी का गहरीकरण कराया गया है। उसमें मछली भी डाली गई है। अब डबरी के पानी से साग-सब्जी उगाता हूं। घर में खाने-पीने के लिए सब्जियां मिल जाती हैं। सब्जी से खेती का खर्च भी निकल रहा है। डबरी से सिंचाई का अच्छा साधन मिल गया है। इससे मुझे बहुत फायदा हुआ है।”बाबूनाथ का कहना है कि डबरी के गहरीकरण से किसानों को खेती के लिए पानी उपलब्ध होने के साथ अन्य आजीविका गतिविधियों से जुड़ने का अवसर भी मिलता है। जल संग्रहण की बेहतर व्यवस्था से खेती में आने वाली परेशानियां कम होती हैं।
बाबूनाथ ने डबरी के गहरीकरण एवं मरम्मत कार्य से मिली सिंचाई सुविधा के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।उन्होंने कहा कि डबरी की मरम्मत से उन्हें खेती-किसानी के लिए पानी का महत्वपूर्ण साधन मिला है। अब वे साग-सब्जियों की खेती कर पा रहे हैं और मछली पालन से भी लाभ मिल रहा है।
बाबूनाथ की कहानी ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण और आजीविका संवर्धन के बीच महत्वपूर्ण संबंध को सामने लाती है। डबरी के गहरीकरण से जल संग्रहण क्षमता बेहतर हुई, जिससे सिंचाई की सुविधा बढ़ी और खेती के नए अवसर उपलब्ध हुए।
आज बाबूनाथ अपनी डबरी के पानी से सब्जियां उगाकर परिवार की जरूरतें पूरी कर रहे हैं। अतिरिक्त उत्पादन की बिक्री से खेती का खर्च निकाल रहे हैं और मछली पालन के माध्यम से आजीविका के अन्य अवसरों का लाभ भी उठा रहे हैं।
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत बाबूनाथ की यह कहानी दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण से जुड़े छोटे-छोटे कार्य भी किसानों के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकते हैं। डबरी का गहरीकरण उनके लिए केवल पानी संग्रहित करने की व्यवस्था नहीं, बल्कि खेती में आत्मनिर्भरता, परिवार की आर्थिक मजबूती और बेहतर भविष्य की उम्मीद का आधार बन गया है।

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