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 अखिल भारतीय तेलुगु नाट्योत्सव का रंगारंग समापन

 
'मलिसंध्या' सर्वश्रेष्ठ घोषित, 'कर्मा' द्वितीय और 'इदि कथा कादु' तृतीय 
- अभिनेता मुरली मोहन का आत्मीय अभिनंदन 
- जालारी लोक नृत्य ने किया मंत्रमुग्ध 
 टी सहदेव
भिलाई नगर। एसएनजी विद्याभवन में आयोजित अखिल भारतीय तेलुगु नाट्योत्सव के तीसरे और अंतिम दिन मंगलवार को नाटिका 'मलिसंध्या' को सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया, जबकि 'कर्मा' को द्वितीय और 'इदि कथा कादु' को तृतीय स्थान हासिल हुआ। स्मरणीय है कि आंध्र प्रदेश के मंजे हुए रंगमंचीय कलाकारों ने नाटिकाओं 'केरटालु', 'कर्मा', 'मलिसंध्या', 'चौकीदार', 'इदि कथा कादु' तथा 'नेरस्तलु' का मंचन किया था। नाट्य प्रतियोगिता में जी कल्याणी नायडू तथा के सत्यप्रकाश ने जज की भूमिका निभाई। 
 अभिनेता मुरली मोहन का आत्मीय अभिनंदन 
कलांजलि और पीएमकेएम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित नाट्योत्सव का रंगारंग समापन खचाखच भरे ऑडिटोरियम में हुआ। इस अवसर पर पुरस्कार वितरण समारोह के वो यादगार लम्हे भी आए, जब तेलुगु फिल्मों के मशहूर अभिनेता, निर्माता, राजनीतिज्ञ एवं बिजनेस एक्जीक्यूटिव डॉ मुरली मोहन ने अपनी मौजूदगी दर्ज की। इस मौके पर उनका आत्मीय अभिनंदन किया गया। उत्सव में रंगमंच के दिग्गज कलाकार, निर्देशक, लेखक और मेकअप मैन सीएच रामबाबू को सम्मान-पत्र, शॉल, श्रीफल भेंटकर उनका सम्मान भी किया गया, वहीं उनकी धर्मपत्नी यशोदा अपने सम्मान से भावुक भी दिखीं। सम्मान-पत्र अकमु नायडू ने पढ़ा। 
 'इदि कथा कादु' एवं 'नेरस्तुलु' का मंचन' 
इससे पहले दर्शकों की भारी भीड़ के बीच डेविड राजू के निर्देशन में बनी नाटिका 'इदि कथा कादु' (यह कहानी नहीं) को वैशाखी क्रिएशन्स के कलाकारों ने मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। इस नाटिका में यह दिखाया गया कि चिटफंड कंपनी के फरार होने के बाद परिवार किस तरह तबाह हो जाते हैं। वहीं टी बापन्ना शास्त्री के निर्देशन में एक और नाटिका 'नेरस्तुलु' (अपराधी) सहृदय आर्ट्स के कलाकारों ने अभिनीत की। जिसमें सास-बहू के दो पाटों के बीच पिसते व्यक्ति की व्यथा को दिखाया गया।
 जालारी लोक नृत्य ने किया मंत्रमुग्ध 
संगीतमय कार्यक्रम में भिलाई की तिरुमला महिला मंडली के कलाकारों एम रेखा राव, जी सरिता, के अन्नू, पी लक्ष्मी, बी पूजा तथा एम तारा ने फिल्मी गानों की धुन पर ग्रुप डान्स पेश किया, तो दूसरी ओर एम तरुणा ने शास्त्रीय नृत्य के जरिये अपना कौशल दिखाया। यह उत्सव छत्तीसगढ़ अग्निकुल क्षत्रिय महिला सेवा समिति द्वारा प्रस्तुत अम्मावारु जालारी लोक नृत्य के लिए भी याद रखा जाएगा, जिसे पारंपरिक वेशभूषा में आर कलावती, आर कविता तथा एस प्रभावती ने बेहतरीन ढंग से पेश किया। 
 

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