दिव्यांग लोगों के लिए नीति मसौदे में बजट आवंटन, निगरानी तंत्र होना चाहिए : एनजीओ
नयी दिल्ली। एक दिव्यांग अधिकार समूह ने दिव्यांग लोगों के लिए राष्ट्रीय नीति के मसौदे पर नाखुशी व्यक्त करते हुए कहा कि बजट और निगरानी तंत्र के बिना महज नीति दस्तावेज होना पर्याप्त नहीं होगा। ‘नेशनल प्लेटफॉर्म फॉर द राइट्स ऑफ द डिसेबल्ड' (एनपीआरडी) ने कहा कि मसौदा नीति में नए दिशा निर्देशों और पहल को शुरू करने की एक असली कोशिश गायब नजर आती है। दिव्यांगता के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देना, वास्तविक समय के आधार पर सूचना देने के लिए गतिशील डेटाबेस लाना और बेहतर आयुष अनुसंधान तथा इस क्षेत्र की समस्याओं को हल करना मसौदा नीति की मुख्य विशेषताएं हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के तहत दिव्यांग लोगों के सशक्तिकरण के विभाग ने नौ जुलाई तक विभिन्न पक्षकारों से मसौदा नीति पर टिप्पणियां मांगी हैं। एनपीआरडी ने कहा कि मसौदा नीति के प्रमुख हिस्से उसी बात को दोहराते हैं, जो पहले ही दिव्यांग लोगों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन तथा दिव्यांग लोगों के अधिकार कानून, 2016 (आरपीडी एक्ट) में कहा गया है। एनपीआरडी ने कहा कि मसौदा नीति में गरीबी और दिव्यांगता के बीच संबंध को माना गया है लेकिन गरीबी उन्मूलन के लिए कोई ठोस कदम का सुझाव नहीं दिया गया है। एनपीआरडी ने कहा कि आरपीडी एक्ट के विभिन्न प्रावधानों का क्रियान्वयन धीमा रहा है।









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