14.85 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का शिकार हुए बुजुर्ग दंपति ने कहा: पुलिस को नहीं बताना बड़ी गलती
नयी दिल्ली/ डिजिटल अरेस्ट' की वजह से 14.85 करोड़ रुपये गंवा चुके दिल्ली के रहने वाले बुजुर्ग दपंति ओम तनेजा और उनकी पत्नी को यही मलाल है कि उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना नहीं दी। ओम तनेजा (81) और पेशे से डॉक्टर उनकी पत्नी इंदिरा (77) को साइबर ठगों ने दूरसंचार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारी बनकर कॉल किया और करीब 15 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट' रखा। दक्षिण दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में रहने वाले बुजुर्ग दंपति ने रविवार को कहा कि पुलिस को अपनी आपबीती न बताना एक गंभीर गलती थी।
ओम तनेजा ने बताया, साइबर ठगों ने हमें बार-बार गिरफ्तारी और गंभीर परिणामों की धमकी दी।'' पुलिस ने बताया कि यह धोखाधड़ी 24 दिसंबर से 9 जनवरी के बीच की गई और इस दौरान दंपति को लगातार ऑडियो और वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर किया गया और सत्यापन के नाम पर कई बैंक खातों में बड़ी रकम अंतरण करने के लिए दबाव डाला गया। इस मामले में ई-प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और दिल्ली पुलिस की साइबर अपराध शाखा ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने बताया कि यह दंपति दशकों तक अमेरिका में काम करने के बाद भारत लौट आए थे और 2016 से ग्रेटर कैलाश में रह रहे थे। उनके बच्चे विदेश में बसे हुए हैं। आरोपियों ने दंपति के एकांतवास, उम्र और चिकित्सा मुद्दों जैसी परिस्थितियों का फायदा उठाकर उन्हें डराया-धमकाया।
इंदिरा तनेजा ने बताया कि 24 दिसंबर को दोपहर के आसपास उन्हें एक ऑडियो कॉल आया, जिसमें एक व्यक्ति ने खुद को भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राइ) का अधिकारी बताया। उन्होंने बताया, ‘‘कॉल करने वाले ने मुझे बताया कि मेरा टेलीफोन नंबर बंद किया जा रहा है क्योंकि उससे अश्लील कॉल आ रहे थे और 26 लोगों ने शिकायत दर्ज कराई है।'' इंदिरा के मुताबिक साइबर अपराधियों ने हम पर धनशोधन में शामिल होने का भी आरोप लगाया। इंदिरा के मुताबिक उन्होंने फोन करने वाले को बताया कि जिस नंबर का जिक्र किया जा रहा है वह उनका नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘इसके बावजूद, उसने कहा कि मेरे खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं और महाराष्ट्र में प्राथमिकी दर्ज की गई है।'' फोन करने वाले ने यह भी दावा किया कि मामला मुंबई के कोलाबा पुलिस थाने को स्थानांतरित किया जा रहा है एवं इसके तुरंत बाद कॉल को वीडियो कॉल में तब्दील कर दिया। बुजुर्ग महिला ने बताया, ‘‘स्क्रीन पर विक्रांत सिंह राजपूत नाम का एक व्यक्ति पुलिस की वर्दी पहने हुए दिखाई दिया। मुझे उसके पीछे पुलिस का चिह्न भी दिखाई दिया। उसने मुझसे कहा कि मैं धनशोधन में संलिप्त हूं।'' इंदिरा ने बताया कि उस व्यक्ति ने दावा किया कि मुंबई में केनेरा बैंक की एक शाखा में उनके नाम से एक बैंक खाता खोला गया था और उस खाते से भारी मात्रा में धनराशि का लेन-देन हुआ है। उन्होंने बताया कि उसने मुझे नरेश गोयल नाम के एक व्यक्ति की तस्वीर दिखाई और पूछा कि क्या मैं उसे जानती हूं। मैंने उससे कहा कि मैंने इस व्यक्ति को अपने जीवन में कभी नहीं देखा। इंदिरा ने कहा कि जालसाजों ने बार-बार दावा किया कि कथित बैंक खाता खोलते समय उसके उंगलियों के निशान और अंगूठे के निशान लिए गए थे और इस बात पर जोर दिया कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। महिला ने बताया, उन्होंने कहा कि 500 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है और चूंकि मैं देश की सेवा करने के लिए अमेरिका से लौटी हूं, इसलिए यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बन गया है।'' आरोपी ने उन्हें तुरंत मुंबई आने के लिए कहा और चेतावनी दी कि गिरफ्तारी अपरिहार्य है। इसके बाद तनेजा दंपति को सत्यापन के लिए अपने बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर करने का निर्देश दिया गया।
महिला ने बताया, वे लगातार पैसे की मांग करते रहे - 2 करोड़ रुपये, 2.1 करोड़ रुपये, 2.5 करोड़ रुपये। फोन या वीडियो कॉल लगभग पूरे दिन चालू रहे। 24 दिसंबर की दोपहर से लेकर 9 जनवरी की सुबह तक मुझे डिजिटल रूप से गिरफ्तार कर लिया गया था।'' पुलिस के मुताबिक ठगों ने दंपति को यह भी सिखाया कि संदेह से बचने के लिए बैंक अधिकारियों को क्या बताना है। उन्होंने दंपति को निर्देश दिया कि वे बताएं कि राशि निवेश की जा रही है या किसी संस्था के न्यासी बन रहे हैं। कभी उन्होंने चेक जमा करने का विवरण भेजा, तो कभी चेक की तस्वीरें। कुल मिलाकर, दंपति ने आठ बार धन हस्तांतरण किया। दिल्ली के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के पूर्व छात्र ओम तनेजा ने संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका की संघीय सरकार के साथ काम करने सहित 48 वर्षों तक अमेरिका में काम किया।








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