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जिलाधिकारियों को अधिकार दिये जाने के बाद से गोद लेने के 2250 आदेश जारी

नयी दिल्ली.  किशोर न्याय अधिनियम के संशोधित नियम पिछले साल सितंबर में लागू होने के बाद से गोद लेने के कुल 2,250 आदेश जारी किए गए हैं। यह जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी। अधिकारी ने कहा कि संशोधित किशोर न्याय अधिनियम के लागू होने के समय गोद लेने के 997 मामले अदालतों में लंबित थे। संशोधित कानून के अनुसार, गोद लेने के आदेश जारी करने का काम अदालतों के बजाय जिलाधिकारियों को सौंपा गया है। अधिनियम के अनुसार जिलाधिकारी जिला बाल संरक्षण इकाइयों, बाल कल्याण समितियों, किशोर न्याय बोर्ड, विशेष किशोर पुलिस इकाइयों, बाल देखभाल संस्थानों आदि के कामकाज का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन करेंगे। ऐसी चिंताएं रही हैं कि जिलाधिकारियों को जिम्मेदारी देने से विलंब होगा क्योंकि उन पर पहले से ही काम का बोझ ज्यादा है। जनवरी में, बम्बई उच्च न्यायालय ने गोद लेने से लंबित मामलों को अदालतों से जिलाधिकारियों को हस्तांतरित करने पर अंतरिम रोक लगा दी थी और अदालतों को निर्देश दिया था कि वे ऐसे मामलों की सुनवाई जारी रखें। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि उसने गोद लिये जाने पर रोक नहीं लगायी है और इससे संबंधित सभी प्रक्रियाएं वैसे ही जारी रहनी चाहिए जब वे किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2021 से पहले थी। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि वास्तव में प्रक्रिया और अधिक सुव्यवस्थित हो गई है। अधिकारी ने कहा कि महाराष्ट्र में, 350 मामले विशेष गोद लेने वाली एजेंसियों और बाल कल्याण समितियों के पास अस्पष्टता को लेकर लंबित हैं कि उन्हें जिलाधिकारी को सौंपा जाना चाहिए या अदालतों को। अधिकारी के मुताबिक, संशोधित अधिनियम के लागू होने के बाद से अब तक गोद लेने के कुल 2,250 आदेश जारी किए जा चुके हैं।

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