गृह मंत्रालय ने अमरनाथ यात्रा के लिए समीक्षा बैठक की
नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर में आगामी अमरनाथ यात्रा की व्यापक सुरक्षा समीक्षा की और किसी भी आतंकी गतिविधि से निपटने और आपदाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए अंतर-एजेंसी समन्वय और ड्रोन, श्वान और हवाई-सर्वेक्षण दलों के उपयोग पर जोर दिया। सरकारी सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि नॉर्थ ब्लॉक में हुई बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने की, जिसमें सीआरपीएफ, बीएसएफ और आईटीबीपी जैसे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के वरिष्ठ अधिकारी और खुफिया विभाग, सेना के अधिकारियों के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर पुलिस और प्रशासन तथा अमरनाथ श्राइन बोर्ड के अधिकारी मौजूद थे। बासठ दिवसीय वार्षिक तीर्थयात्रा एक जुलाई से शुरू होकर 31 अगस्त तक चलेगी।
बैठक में सुरक्षा ग्रिड की अंतिम रूपरेखा की समीक्षा की गई और इस बात पर जोर दिया गया कि सभी खतरों को ध्यान में रखते हुए अंतर-एजेंसी समन्वय त्रुटि रहित होना चाहिए। सूत्रों ने कहा कि यात्रा मार्गों को सुरक्षित करने के पारंपरिक तरीकों के अलावा, ड्रोन के उपयोग को भी रेखांकित किया गया है। उनके मुताबिक, साथ ही प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदा की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए गुफा मंदिर के आसपास समेत सभी स्थानों पर खोज और बचाव श्वानों का भी उपयोग किए जाने पर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के श्वानों की एक टीम पहले ही तैनात कर दी गई है, ताकि कुत्तों को ऊंचाई और ठंडे मौसम के अनुकूल बनाया जा सके। सूत्रों ने कहा कि विशेषज्ञों की एक टीम और एनडीआरएफ हिमनद झील के फटने से आने वाली बाढ़ (जीएलओएफ) या अचानक से सैलाब आने जैसी स्थिति को लेकर प्रारंभिक चेतावनी देने के लिए ऊपरी इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करेगी। इस बार सुरक्षा तंत्र में एक बड़ा बदलाव किया गया है और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के स्थान पर गुफा मंदिर में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के कर्मियों की तैनाती की गई है। अधिकारियों ने कहा कि आईटीबीपी ऊंचाई पर बचाव अभियान चलाने में माहिर है और इसलिए, उसे इस बार गुफा मंदिर में यह काम सौंपा गया है। सीआरपीएफ दशकों से दक्षिण कश्मीर हिमालय में 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित गुफा मंदिर और रास्ते में आने वाले कुछ महत्वपूर्ण तीर्थ शिविरों की सुरक्षा कर रही थी। सीआरपीएफ अब गुफा मंदिर की सीढ़ियों के नीचे मौजूद रहेगी, जबकि आईटीबीपी और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) लगभग आधा दर्जन शिविरों की सुरक्षा करेंगे।









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