मैं किसी प्रधानमंत्री की आलोचना नहीं करता हूं चाहे वह किसी भी राजनीतिक पार्टी को हो : राजनाथ सिंह
जोधपुर. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को कहा कि वह किसी प्रधानमंत्री की आलोचना नहीं करते हैं, चाहे वह किसी भी राजनीतिक पार्टी से हो क्योंकि वह मानता हैं कि प्रधानमंत्री कोई व्यक्ति नहीं बल्कि संस्था होता है और उसका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र देश में समान नागरिक संहिता लागू करने की बात करता है तो राजनीतिक विरोधियों द्वारा सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की जाती है। यहां शेरगढ में केन्द्र सरकार के नौ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए सिंह ने दावा किया कि प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) ने भ्रष्टाचार को कम करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने जो मजबूरी व्यक्त की थी उसको प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) ने चुनौती के रूप में स्वीकार किया और आज 100 पैसा दिल्ली से चलता है तो 100 का 100 पैसा ही आपकी जेब में पहुंचता है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने भ्रष्टाचार को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की थी… लाचारी व्यक्त करते हुए कहा था,‘‘क्या करें देश में भ्रष्टाचार इतना अधिक है कि मैं ऊपर से 100 पैसा भेजता हूं लेकिन लोगो की जेब तक पहुंचते पहुंचते बामुश्किल 15 पैसे पहुंच पाता है और 85 पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ जाता है।'' उन्होंने कहा, ‘‘मैं राजीव गांधी की आलोचना नहीं कर रहा.. मैं किसी प्रधानमंत्री की आलोचना नहीं करता हूं चाहे वह किसी भी राजनीतिक पार्टी को हो क्योंकि मैं मानता हूं प्रधानमंत्री व्यक्ति नहीं , संस्था होता है। चाहे वह किसी भी पार्टी का क्यों ना हो, उसका सम्मान किया जाना चाहिए।'' भाजपा नेता ने कहा, “हम वही करने जा रहे हैं जो संविधान निर्माताओं ने संविधान में लिखा है… नीति -निर्देशक सिद्धांतों में, हम वही लागू करने जा रहे हैं, हम उनका वादा पूरा करने जा रहे हैं, हम पर आरोप क्यों लगाया जा रहा है?” उन्होंने कहा, “क्या पंडित जवाहरलाल नेहरू संविधान सभा में नहीं थे? क्या वल्लभ भाई पटेल और बाबा साहब भीमराव अंबेडकर वहां नहीं थे? मोदी को बदनाम क्यों किया जा रहा है?” उन्होंने कहा, ‘‘ अगर कोई यह चाहता उसे यह आजादी मिल जाये कि जितनी मर्जी, उतनी शादी कर ले, तो यह भारत में नहीं होगा।'' सिंह ने कहा कि महिलाओं का सम्मान हमारी प्रतिबद्धता है चाहे वो किसी भी जाति पंथ धर्म की हो।

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