गृह मंत्री अमित शाह ने नाबार्ड से अगले 25 वर्षों के लिए कृषि क्षेत्र और ग्रामीण विकास के वित्तपोषण के लक्ष्य तय करने को कहा
नई दिल्ली। केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक नाबार्ड ग्रामीण बैंकिंग को सुलभ बनाकर ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और समृद्धि सुनिश्चित कर रहा है।श्री शाह ने नई दिल्ली में नाबार्ड के 42वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जिस देश की 65 प्रतिशत से अधिक आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, उसकी कल्पना नाबार्ड जैसी संस्था के बिना नहीं की जा सकती। सहकारिता मंत्री ने कहा कि पिछले चार दशकों से नाबार्ड इस देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे, कृषि और सहकारी संस्थानों की रीढ़ साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि यह डेढ़ दशक से भी अधिक समय से स्वयं सहायता समूहों का आधार रहा है। श्री शाह ने कहा कि गांव आत्मनिर्भर हो रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आत्मा कृषि की पूरी दुनिया में पहचान बन रही है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से गांव के हर व्यक्ति, विशेषकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें आत्मसम्मान के साथ समाज में उचित स्थान दिलाने में नाबार्ड की बहुत बड़ी भूमिका है। सहकारिता मंत्री ने कहा कि नाबार्ड ने पुनर्वित्त और पूंजी निर्माण के काम को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया है।
उन्होंने कहा कि पूंजी निर्माण के लिए नाबार्ड के माध्यम से अब तक आठ लाख करोड़ रुपये ग्रामीण अर्थव्यवस्था में खर्च किए जा चुके हैं। श्री शाह ने कहा कि कृषि क्षेत्र की विभिन्न जरूरतों को पूरा करने के लिए नाबार्ड ने ग्रामीण कृषि अर्थव्यवस्था में 12 लाख करोड़ रुपये का पुनर्वित्तपोषण किया है। उन्होंने कहा कि नाबार्ड ने 42 वर्षों में 14 प्रतिशत की विकास दर के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में 20 लाख करोड़ रुपये के पुनर्वित्तपोषण का काम किया है। इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए उन्होंने कहा कि देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सहकारी प्रणाली में वित्त व्यवस्था को मजबूत करने तथा ग्रामीण बुनियादी ढांचे को बढ़ाने का काम आजादी के अमृत काल में नाबार्ड के अलावा कोई नहीं कर सकता। सहकारिता मंत्री ने कहा, नाबार्ड ने एक करोड़ स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता प्रदान की है। उन्होंने कहा कि यह पूरी दुनिया में माइक्रोफाइनेंसिंग का सबसे बड़ा कार्यक्रम है और देश ने नाबार्ड के माध्यम से यह उपलब्धि हासिल की है।







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