जम्मू-कश्मीर आरक्षण-संशोधन और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन-संशोधन विधेयक राज्य के पिछड़े वर्गों के लिए फायदेमंद साबित होंगे- गृहमंत्री
नई दिल्ली। लोकसभा में जम्मू-कश्मीर आरक्षण-संशोधन विधेयक-2023 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन-संशोधन विधेयक-2023 पर चर्चा के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य उन लोगों को न्याय देना है जिनकी पिछले 70 वर्षों से अनदेखी की गई है। उन्होंने कहा कि समाज के वंचित लोगों को उनके अधिकार दिये जाने चाहिए। श्री अमित शाह ने कहा कि श्री नरेन्द्र मोदी कश्मीरी विस्थापितों सहित समाज के सभी वर्गों का कल्याण चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यह विधेयक जम्मू-कश्मीर के सामाजिक और आर्थिक तथा शैक्षिक रूप से पिछडे लोगों के लिए लाभप्रद साबित होगा।
गृहमंत्री ने कहा कि यदि वोट बैंक की राजनीति को छोडकर शुरूआत में ही आतंकवाद की समस्या से निपट लिया जाता तो कश्मीरी पंडितों को घाटी छोडकर नहीं जाना पडता। उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को खत्म करने पर है। श्री अमित शाह ने कहा कि वहां आतंकवाद के कारण अब तक 45 हजार लोगों की जान गई है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में आतंकवाद के कारण नागरिकों की मृत्यु के मामलों में 70 प्रतिशत और सुरक्षा बलों के कर्मियों की मृत्यु के मामलों में 62 प्रतिशत की गिरावट आई है।
श्री अमित शाह ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की दो बडी गलतियों के कारण जम्मू-कश्मीर को काफी नुकसान उठाना पडा। पहला, जब भारतीय सेनाएं जीत रही थीं तब उन्होंने संघर्ष विराम की घोषणा कर दी और दूसरा कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में उठाया। श्री अमित शाह ने कहा कि यदि नेहरूजी ने सही कदम उठाया होता तो पाकिस्तानी कब्जे वाला कश्मीर भारत का अंग होता। उन्होंने कहा कि ये एक एतिहासिक गलती है।
गृहमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पिछडे वर्गों के कल्याण के लिए अथक रूप से कार्य करते रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाया कि उसने देश के पिछडे वर्गों के लिए कुछ नहीं किया। श्री अमित शाह ने कहा कि पिछडा वर्ग आयोग को 70 वर्षों तक संवैधानिक मान्यता नहीं दी गई लेकिन मोदी सरकार ने इसे संवैधानिक मान्यता प्रदान की। विपक्षी सदस्य गृहमंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं हुए और वे सदन से बाहर चले गये।








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