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भारत ने युद्ध प्रभावित यूक्रेन से अपने छात्रों को निकालकर वैश्विक उदाहरण प्रस्तुत किया: कोविंद

नयी दिल्ली. पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को कहा कि भारत ने यूक्रेन से अपने छात्रों को निकालकर विश्व के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत किया है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दोनों देशों (रूस तथा यूक्रेन) के साथ 24 घंटे के युद्धविराम के लिए बातचीत करने के बाद ऐसा संभव हो सका। यहां पांचवें डॉ. राजाराम जयपुरिया स्मारक व्याख्यान में कोविंद ने कहा कि भारत विश्वगुरु बनने की राह पर है और उन्होंने युवाओं से इसमें योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कई उदाहरण भी दिए कि कैसे भारत ने खुद को वैश्विक शक्ति साबित किया है, जिसमें हाल में विधायिका में महिलाओं को आरक्षण देने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम भी शामिल है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बारे में बात करते हुए कोविंद ने कहा कि हर किसी को उम्मीद थी कि यह एक या दो महीने में खत्म हो जाएगा, यही वजह है कि कई भारतीय छात्र युद्धग्रस्त यूक्रेन में फंस गए। कोविंद ने कहा, ‘‘जब छह-आठ महीने बीत गए, तो स्थिति ऐसी हो गई कि गुजारा करना मुश्किल हो गया। छात्रों के अभिभावकों की चिंता पर सरकार ने गौर किया। मैं जानबूझकर यह उदाहरण दे रहा हूं, मैं उस समय राष्ट्रपति भवन में था।'' उन्होंने कहा, ‘‘मैंने पूछा कि इतने सारे भारतीय छात्र यूक्रेन क्यों जाते हैं। मुझे बताया गया कि वहां मेडिकल की पढ़ाई सस्ती है। हमारे छात्र फंस गए, अगर उन्हें कुछ हो जाता तो सरकार जिम्मेदार होती। यह हालांकि सरकार की जिम्मेदारी नहीं थी, माता-पिता ने उन्हें वहां भेजा था, लेकिन सरकार को दोषी ठहराया जाता।'' कोविंद ने कहा, ‘‘हमारी सरकार ने एक उदाहरण पेश किया है।'' उन्होंने कहा कि भारत ने खुद को एक वैश्विक ताकत साबित किया है और दोनों देशों (रूस और यूक्रेन) से 24 घंटे के लिए युद्ध विराम के लिए बात की है। उन्होंने कहा, ‘‘दोनों बड़े देश हैं। यदि कोई अन्य देश हस्तक्षेप करता तो क्या वे सहमत होते? नहीं।''
 कोविंद ने दावा किया, ‘‘हमारे प्रधानमंत्री ने रूस और यूक्रेन से बात की और शुक्र है कि दोनों सहमत हो गए। चौबीस घंटे के लिए युद्ध रुक गया।'' उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका, पाकिस्तान और चीन जैसे अन्य देशों के छात्र भी फंसे हुए हैं, लेकिन उनकी सरकारें उन्हें निकाल नहीं पा रही हैं। कोविंद ने कहा कि भारत सरकार ने अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, पिछड़े वर्गों और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘महिला शक्ति वंदन अधिनियम एक प्रगतिशील कानून है...जब अमेरिका को आजादी मिली, तो महिलाओं को लंबे समय तक मतदान का अधिकार नहीं था। भारत में, जिस दिन हमने संविधान अपनाया, उसी दिन हमने महिलाओं के मतदान के अधिकार को मान्यता दे दी थी।'' यूपीआई भुगतान को एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए उन्होंने बताया कि वैश्विक यूपीआई लेनदेन का 46 प्रतिशत भारत में होता है। उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया में कहीं भी डिजिटल भुगतान इस पैमाने पर नहीं है।'' कोविंद ने कहा कि भारतीय रुपये का मूल्य बढ़ रहा है और अब रुपये का इस्तेमाल कम से कम 10 देशों में मुद्रा के रूप में किया जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘हम उम्मीद कर सकते हैं कि जल्द ही भारतीय रुपये को डॉलर और पाउंड की तरह स्वीकार्यता मिलेगी।'' पूर्व राष्ट्रपति ने अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख किया और बताया कि भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश है। उन्होंने मंगल मिशन का भी उल्लेख किया। कोविंद ने युवाओं से 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने के प्रयास में शामिल होने का आग्रह किया।

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