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वक्फ (संशोधन) विधेयक लोकसभा में पेश, जेपीसी को भेजा; विपक्षी दलों ने लगाया मुसलमानों को निशाना बनाने का आरोप

 नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने गुरुवार को वक्फ (संशोधन) विधेयक लोक सभा में पेश किया। विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने जहां इसे संविधान विरोधी बताया और मुसलमानों को निशाना बनाने के मकसद से लाने का आरोप लगाया। वहीं सत्ताधारी राजग गठबंधन में महत्त्वपूर्ण घटक तेदेपा और जदयू ने इसका समर्थन किया। यह विधेयक बाद में दोनों सदनों की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेज दिया गया।
लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि संयुक्त संसदीय समिति बनाने के लिए वह सभी दलों के नेताओं से बात करेंगे। 18वीं लोक सभा में पहली बार किसी विधेयक को जेपीसी के पास भेजा गया है।लोक सभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक पेश करने वाले केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि इसमें प्रस्तावित संशोधन 1995 के वक्फ कानून की कमियों को दूर करेगा और वक्फ बोर्ड को बंधनों से मुक्त करेगा। अभी कई मामलों को देखकर ऐसा लगता है कि यह माफिया की गिरफ्त में पहुंच गया है।
वक्फ (संशोधन) विधेयक में वक्फ अधिनियम, 1995 का नाम बदलकर ‘एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तीकरण, दक्षता और विकास अधिनियम, 1995’ करने का भी प्रावधान है, जिसके जरिये सरकार का इरादा पूरी व्यवस्था में सुधार करने का है, ताकि आम मुसलमानों को न्याय मिल सके और यह उनके हित में काम कर सके। रीजीजू ने कहा कि प्रस्तावित संशोधनों में हितधारकों को इसके आदेशों को उच्च अदालतों में चुनौती देने की शक्ति प्रदान करता है, जिसका प्रावधान वक्फ कानून (1995) में नहीं था।
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रीजीजू ने कहा कि विधेयक में किसी की धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा है तथा संविधान के किसी भी अनुच्छेद का उल्लंघन नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, ‘वक्फ संशोधन पहली बार सदन में पेश नहीं किया गया है। आजादी के बाद सबसे पहले 1954 में यह विधेयक लाया गया। इसके बाद कई संशोधन किए गए।’
रीजीजू ने कहा कि व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श के बाद यह संशोधन विधेयक लाया गया है जिससे मुस्लिम महिलाओं और बच्चों का कल्याण होगा। उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के समय बनी सच्चर समिति और एक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का उल्लेख किया और कहा कि इनकी सिफारिशों के आधार पर यह विधेयक लाया गया। वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 वक्फ बोर्ड में मुस्लिम महिलाओं और गैर मुसलमानों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करता है।
विपक्षी दलों ने वक्फ संशोधन विधेयक को लोक सभा में पेश किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि यह संविधान और संघवाद पर हमला है तथा अल्पसंख्यकों के खिलाफ है। कांग्रेस सांसद के सी वेणुगोपाल ने कहा कि यह विधेयक संविधान पर हमला है। उन्होंने सवाल किया, ‘उच्चतम न्यायालय के आदेश से अयोध्या में मंदिर बोर्ड का गठन किया गया। क्या कोई गैर हिंदू इसका सदस्य हो सकता है। फिर वक्फ परिषद में गैर मुस्लिम सदस्य की बात क्यों की जा रही है?’
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि यह बहुत सोची समझी राजनीति के तहत हो रहा है। विधेयक में सारी ताकत जिला अधिकारी को देने की बात कही गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यह सरकार दरगाह, मस्जिद और वक्फ संपत्तियों को अपने नियंत्रण में लेना चाहती है।उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार मुसलमानों की दुश्मन है, उसका सबूत यह विधेयक है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि सदन में संविधान की धज्जियां उड़ाने का काम किया जा रहा है।उन्होंने दावा किया कि ‘डीएम राज’ लाकर वक्फ संपत्तियों को तितर-बितर करने की साजिश हो रही है। प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के दोनों गुटों-अशरद मदनी व महमूद मदनी और जमात-ए-इस्लामी हिंद ने इस विधेयक का विरोध करते हुए इसे ‘धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप’ करार दिया तथा सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए।

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