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वित्तवर्ष 2025-26 में दिसंबर तक 1.82 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत रक्षा अनुबंध किये गए : सरकार

 नयी दिल्ली. रक्षा मंत्रालय ने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए चालू वित्तवर्ष 2025-26 में दिसंबर के अंत तक 1.82 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं। सरकार ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। सरकार के मुताबिक रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने जनवरी 2025 से देश की रक्षा तैयारियों को बढ़ाने के लिए 3.84 लाख करोड़ रुपये से अधिक के पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जिसमें स्वदेशीकरण के माध्यम से आधुनिकीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया है। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 की समीक्षा और संशोधन, रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को प्रोत्साहन, मित्र देशों के साथ बेहतर जुड़ाव, भारत मैत्री शक्ति सहित रक्षा ऋण और रक्षा प्रतिष्ठानों के निकट प्रतिबंधित दूरी मानदंडों का युक्तिकरण प्रगति पर हैं।'' बयान में कहा गया कि इसके अलावा, निर्यात प्रोत्साहन निकाय का गठन, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) में गुणवत्ता आश्वासन 4.0 और उद्योग 4.0 का कार्यान्वयन और रक्षा उपकरणों के लिए एक राष्ट्रीय एकीकृत परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना ‘‘प्रगति पर है''। रक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2025 को ‘‘सुधारों का वर्ष'' घोषित किया था।

 
बयान में कहा गया कि रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में,मंत्रालय ने तीन सेनाओं के समन्वय को मजबूत करने, रक्षा तैयारियों को बढ़ाने, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और कल्याणकारी वितरण तंत्र में सुधार लाने के उद्देश्य से व्यापक सुधारों को लागू करने में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है। बयान के मुताबिक मंत्रालय में किए गए ये सुधार, एक आधुनिक, एकीकृत और भविष्य के लिए तैयार रक्षा प्रणाली के निर्माण की दिशा में ‘‘संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण'' को दर्शाते हैं। इसमें कहा गया, ‘‘रक्षा अधिग्रहण परिषद ने जनवरी 2025 से देश की रक्षा तैयारियों को बढ़ाने के लिए कुल 3.84 लाख करोड़ रुपये से अधिक के पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जिसमें स्वदेशीकरण के माध्यम से आधुनिकीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया है।'' बयान के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2025-26 में, दिसंबर 2025 के अंत तक, मंत्रालय ने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए 1.82 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं। मंत्रालय ने बताया कि उसने दिसंबर 2025 के अंत तक पूंजी अधिग्रहण बजट के तहत 80 प्रतिशत (लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये) व्यय कर लिया है। इस आवंटन का उपयोग सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण पर किया जा रहा है। बयान के मुताबिक, ‘‘रक्षा मंत्रालय का कुल पूंजीगत व्यय भी 76 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिसमें पूंजी अधिग्रहण के अलावा बुनियादी ढांचे, भूमि, अनुसंधान और विकास आदि पर किया गया व्यय शामिल है।'' सरकार ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने और आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित करने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई गई है। इसमें रक्षा विनिर्माण लाइसेंसों को सुव्यवस्थित करना, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की क्षमताओं का आकलन करना और रक्षा खरीद में मांग-आपूर्ति विश्लेषण को बढ़ाने के लिए बाजार खुफिया रिपोर्ट तैयार करना शामिल है। मंत्रालय ने कहा कि संयुक्त संचालन नियंत्रण केंद्र की स्थापना, सशस्त्र बलों के लिए दृष्टिकोण 2047 का प्रकाशन, भविष्य संचालन विश्लेषण समूह का गठन, संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देना और एकीकृत क्षमता विकास योजना को अंतिम रूप देना ‘‘कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं''। इसमें कहा गया है कि इस दिशा में उठाए गए कदम ऑपरेशन सिंदूर की योजना और क्रियान्वयन के दौरान फलदायी साबित हुए। मंत्रालय ने कहा कि युद्ध और नेतृत्व पदों में महिलाओं की भूमिकाओं का विस्तार, सैन्य पर्यटन को बढ़ावा देना और परिचालन बुनियादी ढांचे और आवास के लिए एक दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने का काम पूरा हो चुका है।

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