नए आयामों के कारण युद्ध अब जटिल हो गए हैं: राजनाथ
नागपुर. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को नागपुर में कहा कि युद्ध बहुत जटिल हो गए हैं और अब ये केवल सीमाओं तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि ऊर्जा, व्यापार, शुल्क, आपूर्ति शृंखला, प्रौद्योगिकी और सूचना भी इनके नए आयामों का हिस्सा हैं। यहां सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड में मध्यम क्षमता वाले गोला-बारूद संयंत्र के उद्घाटन समारोह में एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब रक्षा उत्पादन केवल सार्वजनिक क्षेत्र तक सीमित था और निजी क्षेत्र की भागीदारी के बारे में किसी ने कभी सोचा भी नहीं था। इस अवसर पर, सिंह ने सोलर समूह द्वारा निर्मित ‘गाइडेड पिनाका रॉकेट' की पहली खेप को आर्मेनिया के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र के पास क्षमता और संभावना तो थी, लेकिन उसकी भागीदारी उस स्तर पर नहीं थी जितनी होनी चाहिए थी। सिंह ने कहा कि जब देश ‘आत्मनिर्भरता' की दिशा में कदम बढ़ा रहा था तब निजी क्षेत्र के रक्षा उत्पादन को लेकर चुनौतियां और संदेह थे, लेकिन वर्तमान सरकार ने नीतियों में बदलाव लाकर और प्रक्रियाओं को सरल बनाकर इस क्षेत्र के लिए द्वार खोल दिए, क्योंकि सरकार को निजी क्षेत्र की क्षमता पर पूरा भरोसा था। उन्होंने कहा, ‘‘इससे गुणवत्ता में सुधार, समयबद्ध कार्य निष्पादन में वृद्धि और उत्पादकता एवं वितरण में भी तेजी आई है। हमारे रक्षा तंत्र में काफी सुधार हुआ है। निजी रक्षा क्षेत्र में वैज्ञानिक सोच और प्रौद्योगिकी आधारित दृष्टिकोण का विकास जिस प्रकार हुआ है वह अत्यंत सराहनीय है।'' केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अनुसंधान एवं विकास के मामले में निजी क्षेत्र अब सार्वजनिक क्षेत्र से आगे निकल चुका है। सिंह ने कहा कि भारत एक प्रमुख हथियार निर्यातक बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि गोला-बारूद की आपूर्ति में कमी महसूस की गई, लेकिन सरकार इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता लेकर आई है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल की गई पिनाका मिसाइलों और नागास्त्र ड्रोन जैसी विभिन्न रक्षा उत्पादन क्षमताओं के लिए सोलर समूह की सराहना की। सिंह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि भारत गोला-बारूद उत्पादन का वैश्विक केंद्र बने। उन्होंने कहा, ‘‘युद्ध बहुत जटिल होते जा रहे हैं और उनकी तीव्रता भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में युद्ध की तैयारी युद्धस्तर पर होनी चाहिए। युद्ध का स्वरूप बहुत तेजी से बदल रहा है। नए तरीके सामने आ रहे हैं जो पारंपरिक युद्ध में कभी नहीं थे।'' रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘युद्ध अब सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा असर आम जनता पर पड़ता है। ऊर्जा, व्यापार, शुल्क, आपूर्ति श्रृंखला, प्रौद्योगिकी और सूचना अब संघर्ष के नए आयाम बन गए हैं।'' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन बदलावों के मद्देनजर, देश की सीमा सुरक्षा, हथियारों, हार्डवेयर और रक्षा औद्योगिक विनिर्माण को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। सिंह ने कहा, “युद्ध का स्वरूप चाहे जो भी हो, इस समय की सबसे बड़ी आवश्यकता एक मजबूत रक्षा औद्योगिक आधार निजी क्षेत्र द्वारा अनुसंधान और विकास तथा उत्पादन है। सरकार चाहती है कि रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में निजी क्षेत्र का योगदान उत्पादन का कम से कम 50 प्रतिशत हो।” सिंह ने बताया कि घरेलू रक्षा उत्पादन 2014 के 46,000 करोड़ रुपये से बढ़कर अब 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक का हो गया है, जिसमें निजी क्षेत्र का योगदान 30,000 करोड़ रुपये है। सिंह ने कहा कि रक्षा निर्यात 10 साल पहले मात्र 1000 करोड़ रुपये का था, लेकिन अब यह बढ़कर 25,000 करोड़ रुपये का हो गया है और सरकार का लक्ष्य 2029 से 2030 तक इसे 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। उन्होंने सोलर ग्रुप द्वारा विकसित की जा रही भार्गवास्त्र ड्रोन-रोधी प्रणाली की भी प्रशंसा की जो सूक्ष्म मिसाइलों पर आधारित एक शक्तिशाली प्रणाली है और जिसका सफल परीक्षण हो चुका है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि मध्यम क्षमता वाला गोला-बारूद (23 मिलीमीटर से 40 मिलीमीटर) पैदल सेना, बख्तरबंद वाहनों, नौसैनिक तोप प्रणालियों और विमानों में लगाई जाने वाली युद्ध सामग्री की रीढ़ है तथा वर्तमान में इस महत्वपूर्ण गोला-बारूद का एक बड़ा हिस्सा आयात किया जाता है। नागपुर दौरे के दौरान सिंह ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से उनके आवास पर मुलाकात की।

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