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हाइपरसोनिक ब्रह्मोस में भारत की बड़ी छलांग, अमेरिकी ट्रेड डील से निवेश और रोजगार को रफ्तार

 नई दिल्ली। भारत-अमेरिका ट्रेड डील होने से भारत को हर क्षेत्र में फायदा होने की बात कही जा रही है। विशेषज्ञ इसे देश के विकास में एक बड़ा मील का पत्थर बता रहे हैं। ब्रह्मोस एयरोस्पेस के पूर्व प्रमुख और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ए. शिवथनु पिल्लै ने कहा कि भारत तेजी से रक्षा और आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसकी बड़ी वजह देश में बनी (स्वदेशी) हाइपरसोनिक तकनीक और तेजी से बढ़ता अंतरिक्ष क्षेत्र है।

कोयंबटूर में मीडिया से बात करते हुए डॉ. पिल्लै ने बताया कि भारत अब सामान्य मिसाइल तकनीक से आगे बढ़कर ‘सुपर ब्रह्मोस’ पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि अभी ब्रह्मोस मिसाइल की गति मैक-3 है, लेकिन लक्ष्य इसे मैक-7 जैसी हाइपरसोनिक गति तक ले जाना है। उन्होंने समझाया कि गति जितनी ज्यादा होगी, मिसाइल की ताकत उतनी ही ज्यादा होगी। इतनी तेज मिसाइल को दुश्मन का रक्षा तंत्र पकड़ नहीं पाएगा। भारत ने पहले ही 1,000 सेकंड तक हाइपरसोनिक तकनीक का सफल परीक्षण कर लिया है, जिससे वह दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल हो गया है।
डॉ. पिल्लै ने कहा कि फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल देने के बाद कई अन्य देशों ने भी इसमें रुचि दिखाई है। उन्होंने बताया कि ‘सिंधुरा ऑपरेशन’ में ब्रह्मोस की सफलता के बाद इसकी मांग और बढ़ी है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि भारतीय सेना को जो ब्रह्मोस दी जाती है, वह निर्यात की जाने वाली मिसाइलों से ज्यादा उन्नत होती है। उन्होंने सरकार द्वारा रिसर्च और डेवलपमेंट (आरएंडडी) पर बढ़ाए गए खर्च और एएमसीए जैसे स्वदेशी फाइटर जेट प्रोजेक्ट की भी तारीफ की।
डॉ. पिल्लै ने आगे कहा कि भारत इस समय दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और जल्द ही जर्मनी को पीछे छोड़कर तीसरे स्थान पर पहुंच सकता है। गगनयान मिशन के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि पहले बिना इंसान वाले मिशन भेजे जाएंगे, जिनमें एक रोबोट लड़की होगी, जिससे अंतरिक्ष से वापसी और सुरक्षा की जांच की जाएगी। उसके बाद प्रशिक्षित अंतरिक्ष यात्रियों को भेजा जाएगा।
उन्होंने बताया कि भारत में अब करीब 400 अंतरिक्ष स्टार्टअप काम कर रहे हैं, जैसे अग्निकुल और स्काईरूट। ये इसरो के प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि उसके सहयोगी हैं और सैटेलाइट व रॉकेट की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद कर रहे हैं।
डॉ. पिल्लै ने कहा कि वे 40 साल तक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के साथ जुड़े रहे और आज भी भारत उनके दिखाए रास्ते पर चलकर एक विकसित देश बनने की ओर बढ़ रहा है।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने भी भारत-अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह कदम दोनों देशों के लोगों, उद्योगों और रोजगार सृजन के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक नीतियों की तारीफ करते हुए कहा कि भारत की नीतियां आज दुनिया के लिए मिसाल बन गई हैं। चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति का भारत पर भरोसा इस रिश्ते को और मजबूत करता है। इस समझौते से व्यापार में स्थिरता आएगी, निवेशकों को भरोसा मिलेगा और सप्लाई चेन मजबूत होंगी।
उन्होंने बताया कि यह समझौता सिर्फ टैरिफ घटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे उद्योग, तकनीक और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार और उद्योग के बीच भरोसे और साझेदारी से देश में बड़े सुधार हुए हैं और भारतीय उद्योग अब वैश्विक स्तर पर मजबूत भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
वहीं, विदेश मामलों के विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र के. देओलंकर ने कहा कि हम इस पूरे मामले को भारत की जीत के रूप में देखते हैं। अप्रैल 2025 में डोनाल्ड ट्रम्प ने 50 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा की थी, जिसमें से 25 प्रतिशत टैरिफ रूस से तेल खरीदने के कारण भारत को दंडित करने के लिए लगाया गया था। भारत अभी भी रूस से तेल खरीदता है, लेकिन अब यह कम हो गया है। उन्होंने कहा कि यह उन्होंने एकतरफा रूप से घोषित किया था और अब उन्होंने इसे एकतरफा रूप से वापस भी ले लिया है।
देओलंकर ने कहा कि अब भारत को मुख्य रूप से पांच क्षेत्रों में लाभ दिखाई देता है। इनमें पहला क्षेत्र ऑटो उद्योग है, जिसमें ऑटो पार्ट्स और ऑटो कंपोनेंट्स अहम हैं। दूसरा क्षेत्र रत्न और आभूषण है। तीसरा क्षेत्र वस्त्र और चमड़ा है, और चौथा क्षेत्र कृषि, मत्स्य पालन और डेयरी उत्पाद है। ये चारों मुख्य क्षेत्र श्रम प्रधान हैं, जहां एमएसएमई की बहुत बड़ी भूमिका है।
उन्होंने आगे कहा कि इस डील से भारत को विशेष रूप से वस्त्रों के क्षेत्र में लाभ होगा, जिनमें कालीन, चादरें, तकिए के कवर और पर्दे शामिल हैं, और इनकी पहले की तरह आपूर्ति फिर से शुरू हो जाएगी। वहीं, भारत को एक बार फिर अमेरिका में बड़ा बाजार मिलेगा। यही सबसे बड़ा फायदा होगा। इसके अलावा, राजकोट चैंबर ऑफ कॉमर्स के सेक्रेटरी पार्थ गणात्रा ने इस महत्वपूर्ण डील पर अपनी राय देते हुए कहा कि अमेरिका के साथ हुए इस व्यापार समझौते से राजकोट, सौराष्ट्र समेत राज्य भर के उद्योगों को नई संजीवनी मिलेगी।
उन्होंने कहा कि पहले 25 प्रतिशत टैरिफ होने के चलते निर्यात में लगभग 35 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। अब टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत होने से एक्सपोर्ट को फिर से गति मिलेगी। उन्होंने बात करते हुए कहा कि टैरिफ बढ़ने के दौरान उद्योगपतियों ने अन्य देशों में भी एक्सपोर्ट करना शुरू कर दिया था। अब अमेरिका में राहत मिलने से और अन्य नए बाजार जुड़ने से निर्यात में भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि इस डील से खास तौर पर कृषि उपकरण, फार्मास्यूटिकल्स, मसाला, मशीन पार्ट जैसे चीजों का एक्सपोर्ट बढ़ेगा और इन्हें बढ़ावा मिलेगा। साथ ही इससे स्थानीय स्तर पर भी रोजगार बढ़ेगा।(

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