सेवा और सभी का कल्याण है भारत का धर्म : मोहन भागवत
खरगोन (मध्यप्रदेश). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह सेवा, कर्म और सामूहिक कल्याण की भावना का प्रतीक है। जिले के कसरावद में स्थित लेपा गांव में एक कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि भारतीय परंपरा उपकार करने में नहीं, बल्कि सेवा की भावना में निहित है और दूसरों की सेवा करना भारत का धर्म है। संघ की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार सरसंघचालक ने कहा, ''हमारे यहां चैरिटी नहीं, अपितु सेवा है। जीवन में सेवा के जो भी अवसर मिलें, सेवा करना चाहिये। सेवा से हमारी शुद्धि होती है। जिसके पास जो हो, वो देना चाहिये।'' उन्होंने कहा कि दूसरों के दुखों को नजरअंदाज करते हुए खुशी का आनंद लेना मानवीय संवेदनशीलता के खिलाफ है और समाज के दर्द को कम करना भारत का अंतर्निहित स्वभाव है एवं इसी आधार पर भारत ने दुनिया को धर्म का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि पराधीनता के दौर में भी भारत का यह चरित्र नहीं बदला।

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