राष्ट्रपति के बंगाल दौरे में प्रोटोकॉल का उल्लंघन : भाजपा सदस्य ने की कार्रवाई की मांग
नयी दिल्ली. राज्यसभा में बुधवार को भारतीय जनता पार्टी के एक सदस्य ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हालिया पश्चिम बंगाल दौरे में हुए कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन को लेकर क्षोभ व्यक्त करते हुए सरकार से मांग की कि राज्य सरकार के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए अन्यथा आने वाले समय में कोई और राज्य इसकी पुनरावृत्ति कर सकता है। शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए भाजपा के बाबू राम निषाद ने कहा कि पश्चिम बंगाल में हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की यात्रा के दौरान जो प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ वह चूक नहीं बल्कि एक संवैधानिक अपराध है। उन्होंने कहा ''यह विषय राष्ट्रपति की गरिमा और संविधान के सम्मान से संबंधित है। जब एक राज्य सरकार जानबूझकर देश के सर्वोच्च पद की अवहेलना करती है तो वह यह कैसे भूल जाती है कि उसने खुद संविधान की शपथ ली है।'' निषाद ने जब यह मुद्दा उठाया तब तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने हंगामा किया। दूसरी ओर भाजपा सदस्यों ने उनका पुरजोर विरोध किया। निषाद ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 52 से 62 तक राष्ट्रपति के पद की व्याख्या की गई है। उन्होंने कहा कि बंगाल सरकार का यह आचरण अनुच्छेद 256 और 257 का भी उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि इस तरह के उल्लंघन की स्थिति के लिए विशेष कानून बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई राज्य सरकार जानबूझकर राष्ट्रपति या संवैधानिक प्रमुख का अपमान करती है तो उसे संवैधानिक विफलता मान कर ऐसी सरकार के खिलाफ संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत कार्रवाई की व्यवस्था होनी चाहिए, उसके विवेकाधीन अनुदानों में कटौती का प्रावधान होना चाहिए और उसके संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर अभी पश्चिम बंगाल सरकार पर कार्रवाई नहीं की गई तो अन्य राज्य सरकारें भी ऐसा कर सकती हैं। उन्होंने कहा ''संविधान सर्वोपरि है और राष्ट्रपति पद 140 करोड़ भारतीयों के गौरव का प्रतीक है।'' राष्ट्रपति की सात मार्च की बंगाल यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक वहां मौजूद नहीं थे। नियमों के अनुसार, जब राष्ट्रपति किसी राज्य के दौरे पर जाती हैं, तो मुख्यमंत्री और राज्य के शीर्ष अधिकारियों का वहां मौजूद होना प्रोटोकॉल का हिस्सा होता है।









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