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भारत हर आपदा का सामना करते हुए आगे बढ़ रहा है : प्रधानमंत्री मोदी

नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि दुनिया जिस गंभीर स्थिति से गुजर रही है, वह बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि 1.4 अरब भारतीयों के एकजुट प्रयासों से देश हर आपदा का सामना करते हुए आगे बढ़ रहा है। 'टीवी9 नेटवर्क समिट' को संबोधित करते हुए मोदी ने यह भी कहा कि युद्ध की मौजूदा परिस्थितियों में भी, दुनिया भर के कई देश भारत की नीति और रणनीति एवं उसकी ताकत को देखकर आश्चर्यचकित हैं। उन्होंने कहा, ''आज दुनिया जिन गंभीर परिस्थितियों से गुजर रही है, वे बेहद चिंताजनक हैं।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि आज जब दुनिया संघर्षों में उलझी हुई है और उनका प्रभाव विश्व भर में दिखाई दे रहा है, ऐसे में भारत और दुनिया पर चर्चा करना अत्यंत प्रासंगिक हो जाता है। उन्होंने कहा, "कोविड-19 महामारी के बाद भी चुनौतियां लगातार बढ़ती ही जा रही हैं। ऐसा कोई वर्ष नहीं बीता, जिसने भारत और भारतीयों की परीक्षा न ली हो। लेकिन 1.4 अरब भारतीयों के एकजुट प्रयासों से भारत हर आपदा का सामना करते हुए आगे बढ़ रहा है।" मोदी ने कहा कि पिछले 23 दिनों में जब से पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू हुआ है, भारत ने रिश्ते बनाने, निर्णय लेने और संकट से निपटने में उल्लेखनीय क्षमता का प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा, ''ऐसे समय में जब दुनिया कई गुटों में बंटी हुई है, भारत ने खाड़ी देशों से लेकर पश्चिमी देशों तक और 'ग्लोबल साउथ' से लेकर अपने पड़ोसियों तक असाधारण पुल बनाने में कामयाबी हासिल की है। आज भारत सभी के लिए एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में खड़ा है।'' 'ग्लोबल साउथ' का इस्तेमाल दुनिया के विकासशील या कम विकसित देशों के लिए किया जाता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और चुनौतियों को टालने के बजाय उनका डटकर सामना कर रहा है। उन्होंने कहा, ''लोग अक्सर पूछते हैं कि हम किसके पक्ष में हैं। मेरा जवाब है कि हम भारत के साथ खड़े हैं। हम भारत के हितों के साथ खड़े हैं। हम शांति और संवाद के साथ खड़े हैं।'' पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) शासन का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि जब राजनीति में व्यक्तिगत हित हावी हो जाते हैं, तो लोग देश के भविष्य के बजाय अपने भविष्य पर ध्यान केंद्रित करते हैं। उन्होंने कहा, ''2004 से 2014 के बीच क्या हुआ? कांग्रेस शासन के दौरान, भारत को पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा। कांग्रेस ने राष्ट्र कल्याण को प्राथमिकता देने के बजाय सत्ता बनाए रखने को प्राथमिकता दी।'' मोदी ने कहा कि उस समय सरकार ने 1.48 लाख करोड़ रुपये के तेल बांड जारी किए थे। उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वीकार किया था कि इस फैसले से आने वाली पीढ़ियों पर वित्तीय बोझ पड़ेगा।

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