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 गुजरात विधानसभा ने सात घंटे की बहस के बाद यूसीसी विधेयक को मंजूरी दी

गांधीनगर. गुजरात विधानसभा ने मंगलवार को सात घंटे से अधिक चली बहस के बाद समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पर अपनी मुहर लगा दी। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे समानता सुनिश्चित करने के लिए एक ऐतिहासिक सुधार बताया, जबकि कांग्रेस ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है और 'मुस्लिम विरोधी' है। इस विधेयक में धर्म से परे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और सहजीवन को विनियमित करने के लिए एक समान कानूनी ढांचे का प्रावधान है। 
विपक्षी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) के विरोध और इसे चयन समिति को भेजे जाने की मांग के बीच विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने राज्य द्वारा नियुक्त एक समिति द्वारा यूसीसी के कार्यान्वयन पर दाखिल अंतिम रिपोर्ट के एक सप्ताह बाद मंगलवार सुबह इस विधेयक को सदन में पेश किया। इस विधेयक के पारित होने के साथ ही भाजपा शासित गुजरात, उत्तराखंड के बाद यूसीसी पारित करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। उत्तराखंड फरवरी 2024 में यूसीसी विधेयक पारित करने वाला पहला राज्य बना था।
गुजरात समान नागरिक संहिता- 2026' नाम से प्रस्तावित कानून पूरे राज्य के साथ-साथ गुजरात की सीमा से बाहर रहने वाले गुजरातियों पर पर भी लागू होगा। विधेयक में हालांकि स्पष्ट किया गया है कि प्रस्तावित प्रावधान अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के सदस्यों और कुछ ऐसे समूहों पर लागू नहीं होगी जिनके पारंपरिक अधिकार संविधान के तहत संरक्षित हैं। विधेयक के 'उद्देश्य और कारण' में कहा गया है कि संहिता का उद्देश्य एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है। अन्य प्रावधानों के अलावा, इसमें सहजीवन (लिव-इन रिलेशनशिप) के पंजीकरण के साथ-साथ औपचारिक घोषणा के माध्यम से उन्हें समाप्त करने का प्रावधान भी है। 
इस विधेयक में बहुविवाह पर भी रोक लगाई गई है, जिसका अर्थ है कि कोई व्यक्ति अपने जीवनसाथी के जीवित रहते दूसरी शादी नहीं कर सकता। इसमें कहा गया है कि किसी विवाह को संहिता के तहत तभी वैध माना जाएगा जब विवाह के समय दोनों पक्षों में से किसी का भी जीवित जीवनसाथी न हो। कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक शैलेश परमार ने इसका विरोध करते हुए कहा,''आपने 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए जल्दबाजी में यह विधेयक पेश किया है। हम मांग करते हैं कि इसे विधानसभा की स्थायी समिति को भेजा जाए।'' कांग्रेस के एक अन्य वरिष्ठ विधायक अमित चावड़ा ने आरोप लगाया कि यह विधेयक संवैधानिक गारंटी का उल्लंघन करता है। कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला ने इस विधेयक को 'मुस्लिम विरोधी' करार दिया।
 

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