1.6 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने परिणाम के बाद की सेवाओं के लिए आवेदन किया: सीबीएसई
नयी दिल्ली. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने सोमवार को कहा कि अधिसूचित आवेदन अवधि के दौरान उसका, परिणाम के बाद की सेवाओं का पोर्टल पूरी तरह से काम कर रहा था और 1.6 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने 3.8 लाख से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं के लिए सफलतापूर्वक आवेदन किए। सीबीएसई ने 'एक्स' पर एक बयान में कहा कि सरकारी तकनीकी एजेंसियों और आईआईटी की टीम की देखरेख में, अधिसूचित अवधि 2 से 7 जून तक सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन 'विंडो' पूरी तरह से चालू थी। सीबीएसई ने कहा, ''उपरोक्त आवेदन अवधि के दौरान, 1.6 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने 3.8 लाख से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं से संबंधित अनुरोध सफलतापूर्वक प्रस्तुत किए, जो अभ्यर्थियों द्वारा सेवाओं के व्यापक उपयोग को दर्शाता है।'' बोर्ड ने कहा कि परिचालन अवधि के दौरान दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों और साइबर खतरों को रोकने के लिए साइबर सुरक्षा टीम ने प्रणाली की लगातार निगरानी की। इसने यह भी कहा कि सीबीएसई की टीम ने हेल्प डेस्क और शिकायत निवारण चैनल के माध्यम से छात्रों को सहायता प्रदान की। यह स्पष्टीकरण 'पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज पोर्टल' के कामकाज के संबंध में मीडिया की कुछ खबरों और सोशल मीडिया पोस्ट के बीच आया है। कुछ छात्रों और अभिभावकों द्वारा उठाई गई चिंताओं का समाधान करते हुए, सीबीएसई ने कहा कि "रोल नंबर नहीं मिला" संदेश केवल तभी प्रदर्शित होता है जब कोई अभ्यर्थी परिणाम के बाद की सेवाओं के पहले चरण की प्रक्रिया- उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी आवेदन विंडो - में सफलतापूर्वक आवेदन नहीं किया होता है। बोर्ड ने कहा, '' सीबीएसई ने 'पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज पोर्टल' के कामकाज को लेकर कुछ खबरों और सोशल मीडिया पोस्ट का संज्ञान लिया है। कुछ छात्रों और अभिभावकों की शंकाओं को दूर करने के लिए यह सूचित किया जाता है कि 'रोल नंबर नहीं मिला' संदेश तब प्रदर्शित होता है जब किसी अभ्यर्थी ने पोस्ट-रिजल्ट सेवाओं की पहली चरण प्रक्रिया, अर्थात उत्तर पुस्तिका की फोटोकॉपी आवेदन विंडो में, सफलतापूर्वक आवेदन नहीं किया होता है।'' बोर्ड ने कहा, ''जैसा कि पहले स्पष्ट रूप से बताया गया था, केवल वही अभ्यर्थी जिन्होंने पिछले चरण (उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी) में अपनी स्कैन की हुई उत्तर पुस्तिकाओं के लिए आवेदन किया था, वे ही अगले चरण-अवलोकित समस्याओं का सत्यापन और उत्तरों के पुनर्मूल्यांकन-का लाभ लेने के पात्र थे।'' सीबीएसई उस समय विवादों में घिर गया जब कक्षा 12 के कुछ छात्रों ने दावा किया कि बोर्ड द्वारा अपलोड की गई उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई प्रतियां उनकी लिखावट से मेल नहीं खातीं, जिससे ओएसएम प्रणाली में संभावित विसंगतियों के बारे में चिंताएं बढ़ गईं।









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