मोदी के कार्यकाल में भारत बना वैश्विक प्रौद्योगिकी भागीदार,अमेरिका-चीन को कर रहा निर्यात: वैष्णव
नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल में देश एक भरोसेमंद प्रौद्योगिकी मूल्य श्रृंखला भागीदार के रूप में उभरा है और अब देश अमेरिका तथा चीन तक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का निर्यात कर रहा है। मंत्री ने कहा कि भारत में सेमीकंडक्टर उत्पादन के लिए सबसे पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के समय से प्रयास किए गए और उनके बाद इंदिरा गांधी से लेकर राजीव गांधी तक यह प्रयास जारी रहे, लेकिन ''सफलता'' मोदी सरकार के दौरान मिली। वैष्णव ने कहा, '' हम अगले स्तर पर जा रहे हैं, जहां हम घटकों का विनिर्माण शुरू कर रहे हैं। पिछले वर्ष एक अच्छी बात यह हुई कि हमने करीब 35,000 करोड़ रुपये के घटकों का निर्यात चीन को किया। कुछ बहुत जटिल इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद, जैसे रेलवे प्रोपल्शन को हमने फ्रांस, जर्मनी, इटली और अमेरिका को निर्यात किया।'' उन्होंने कहा कि 2014 में स्मार्टफोन का शुद्ध आयातक रहने वाला भारत अब इन उपकरणों का निर्यातक बन गया है। मंत्री ने कहा कि 2025 में स्मार्टफोन 30 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात के साथ भारत की शीर्ष निर्यात श्रेणी बन गए हैं। वैष्णव ने कहा कि कैलेंडर वर्ष 2025 में इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुएं निर्यात की तीसरी सबसे बड़ी श्रेणी के रूप में उभरी हैं और मोबाइल फोन सबसे बड़ा एकल निर्यात उत्पाद बनकर सामने आया है। उन्होंने कहा, '' परंपरागत रूप से पहले डीजल, उसके बाद रत्न एवं आभूषण, फिर परिधान तथा इंजीनियरिंग आते थे। इसका मतलब है कि आज देश को एक भरोसेमंद मूल्य श्रृंखला भागीदार के रूप में स्वीकार किया जा रहा है। ऐसा देश जो उच्च गुणवत्ता का विनिर्माण कर सकता है, भरोसेमंद उत्पाद तैयार कर सकता है और सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी उपयुक्त है।'' मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए ''20 वर्ष का दृष्टिकोण'' तैयार किया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की शुरुआती रणनीति सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए बुनियादी ढांचे को सुरक्षित करने पर केंद्रित थी। वैष्णव ने कहा, ''यह वह चीज है जिसका सपना हमारे देश ने 1962 में ही देखा था। इसके लिए लगातार प्रधानमंत्रियों जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और मनमोहन सिंह ने प्रयास किए। अंततः प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में इस कार्यक्रम के केंद्रित क्रियान्वयन के कारण हमें सफलता मिली।'' उन्होंने कहा कि इंडिया सेमीकॉन मिशन (आईएसएम) के पहले चरण में सरकार लगभग 48 स्टार्टअप को प्रौद्योगिकी उत्पादों पर काम करने के लिए जोड़ सकी। वैष्णव ने कहा, ''आईएसएम 2.0 में 'डिजाइन' सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। दूसरी सबसे बड़ी प्राथमिकता सेमीकंडक्टर विनिर्माण में उपयोग होने वाली मशीनें होंगी। हम उपकरण विनिर्माताओं को भारत लाने पर गंभीरता से काम करेंगे ताकि वे यहां उपकरणों का डिजाइन एवं विनिर्माण दोनों कर सकें।'' उन्होंने कहा कि आईएसएम 2.0 में चिप विनिर्माण के लिए उपयोग होने वाले जटिल रसायनों एवं गैसों के स्वदेशी उत्पादन पर भी ध्यान दिया जाएगा। मंत्री ने कहा, '' निश्चित रूप से हम और अधिक फैब (चिप विनिर्माण संयंत्र) और एटीएमपी (चिप पैकेजिंग) इकाइयां जोड़ेंगे। सेमीकंडक्टर मिशन के पहले संस्करण में प्रतिभा विकास में जो प्रगति हुई है उसे आगे बढ़ाया जाएगा।'' वैष्णव ने कहा कि अब भारत के इंजीनियरिंग कॉलेज में अत्याधुनिक उपकरण और सेमीकंडक्टर डिजाइन उपकरण उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने चार वर्षों की छोटी अवधि में सेमीकंडक्टर परिवेश के लिए लगभग 75,000 छात्रों को प्रशिक्षित किया है, जबकि लक्ष्य 10 वर्षों में 80,000 का था। केंद्रीय मंत्री ने कहा, '' हम यह 80,000 का लक्ष्य पांच वर्ष में ही हासिल कर लेंगे।''


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