राष्ट्रपति मुर्मु का स्वतंत्रता दिवस संबोधन प्रेरणादायी और विचारोत्तेजक: प्रधानमंत्री मोदी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के राष्ट्र के नाम संबोधन को प्रेरणादायी और विचारोत्तेजक बताया। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि राष्ट्रपति के विचार देश की शक्ति और प्रत्येक भारतीय की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का संदेश सभी देशवासियों को विकसित भारत के निर्माण के लिए नए संकल्प और दृढ़ता के साथ काम करने की प्रेरणा देता है।
स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को किया नमन
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को नमन किया। उन्होंने राष्ट्र-निर्माण में नागरिकों की भूमिका, विभाजन की त्रासदी, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और पिछले एक दशक से अधिक समय में देश में हुए विकास का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 1947 को भारत पराधीनता की बेड़ियों से मुक्त हुआ और इसके बाद स्वतंत्र भारत की नियति के निर्माता देशवासी बने।
राष्ट्र-निर्माण में नागरिकों की भूमिका अहम
राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों, श्रमिकों और किसानों समेत राष्ट्र-निर्माण में योगदान दे रहे सभी नागरिकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत अपनी समृद्ध विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों को अपनाते हुए आधुनिक विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है।
‘वयं राष्ट्रे जागृयाम’ का दिया संदेश
द्रौपदी मुर्मु ने अपने संबोधन में वैदिक संदेश ‘वयं राष्ट्रे जागृयाम’ का उल्लेख किया। उन्होंने नागरिकों से राष्ट्र के प्रति सदैव जागरूक रहने और देश के विकास में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की प्रगति केवल सरकार के प्रयासों से नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी से संभव है।
विभाजन की त्रासदी और पटेल के योगदान को किया याद
राष्ट्रपति ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक हिंसा के कारण लाखों लोगों को विस्थापन और पीड़ा झेलनी पड़ी। उन्होंने स्वतंत्रता के समय 550 से अधिक रियासतों के भारत में एकीकरण की चुनौती और सरदार वल्लभभाई पटेल के महत्वपूर्ण योगदान को भी याद किया।
साधारण पृष्ठभूमि से असाधारण उपलब्धियों तक
द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि आज साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले लोग विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण योगदान दे रहे हैं। यह इस विश्वास को मजबूत करता है कि आज के भारत में हर व्यक्ति बड़े सपने देख सकता है और उन्हें पूरा भी कर सकता है। उन्होंने इसे देश में अवसरों के विस्तार और लोकतांत्रिक व्यवस्था की ताकत का प्रतीक बताया।
समावेशी विकास पर राष्ट्रपति ने दिया जोर
राष्ट्रपति मुर्मु ने पिछले एक दशक से अधिक समय में हुए समावेशी विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने विरासत और विकास के समन्वय को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि विकास में बाधक रहे कई पुराने अवरोधों को दूर किया गया है और विभिन्न वर्गों तक विकास का लाभ पहुंचाने के प्रयास किए गए हैं।
25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर
द्रौपदी मुर्मु ने बताया कि देश में 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सफलता मिली है। प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत करीब 59 करोड़ खाताधारक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े हैं, जिनमें 32 करोड़ से अधिक महिलाएं हैं। वहीं, करीब 80 करोड़ लोगों के लिए मुफ्त राशन की व्यवस्था के जरिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।
विकसित भारत के संकल्प को नई ऊर्जा
प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति के संबोधन को ऐसे समय में महत्वपूर्ण बताया, जब देश 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्र-निर्माण और विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के विचार देश की सामूहिक शक्ति, उपलब्धियों और नागरिकों की आकांक्षाओं को सामने रखते हैं तथा विकसित भारत के निर्माण के लिए प्रत्येक देशवासी को नए संकल्प के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। (

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