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- रायपुर / छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह आज बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के अपने एक दिवसीय प्रवास पर भाटापारा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने शहर को एक बड़ी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक सौगात देते हुए छत्तीसगढ़ महतारी और देश के वीर सपूत शहीद श्रीकृष्ण गजानन खोण्डे की भव्य प्रतिमाओं का अनावरण किया। शहीद को नमन करते हुए डॉ. रमन सिंह ने कहा कि शहीद श्रीकृष्ण गजानन खोण्डे की यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों और युवाओं के लिए राष्ट्रसेवा की प्रेरणा बनेगी। देश उनके सर्वाेच्च बलिदान को कभी नहीं भूल सकता।इस गरिमामय समारोह में राज्य के राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल समेत कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस संवेदनशील अवसर पर विधानसभाध्यक्ष डॉ. सिंह ने शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट के परिजनों (पुत्री प्रिया खोण्डे और भाई प्रभाकर खोण्डे) से बेहद आत्मीयता के साथ मुलाकात की और उनका कुशलक्षेम जाना।अपने प्रवास के दौरान डॉ. रमन सिंह सबसे पहले छत्तीसगढ़ महतारी चौक पहुंचे, जहां उन्होंने नवनिर्मित छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा का अनावरण किया। विधानसभा अध्यक्ष ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर एवं पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर राज्य की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके पश्चात विधानसभा अध्यक्ष भाटापारा स्थित शहीद श्रीकृष्ण गजानन खोण्डे परिसर पहुंचे। वहां उन्होंने वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में देश के लिए अपना सर्वाेच्च बलिदान देने वाले वीर फ्लाइट लेफ्टिनेंट शहीद श्रीकृष्ण गजानन खोण्डे की प्रतिमा का अनावरण किया। इस ऐतिहासिक गरिमामय कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंहदेव, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष श्री केदारनाथ गुप्ता, पूर्व विधायक श्री शिवरतन शर्मा और डॉ. सनम जांगड़े उपस्थित थे। स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों में जिला पंचायत अध्यक्ष आकांक्षा जायसवाल, नगर पालिका अध्यक्ष अश्वनी शर्मा, जनप्रतिनिधिगणों के साथ-साथ बलौदाबाजार कलेक्टर कुलदीप शर्मा, पुलिस अधीक्षक ओपी शर्मा और भारी संख्या में नगरवासी मौजूद रहे।
- बिलासपुर / अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर 21 जून 2026 को बिलासपुर के बी.आर. यादव स्मृति राज्य स्तरीय खेल परिसर, बहतराई इंडोर स्टेडियम में जिला स्तरीय योग कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष का विषय “योगा फॉर हेल्दी एजिंग” रखा गया है। कार्यक्रम के अंतर्गत प्रातः 7 बजे से सामूहिक योगाभ्यास एवं विभिन्न योग आसनों का प्रदर्शन किया जाएगा।कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल के मार्गदर्शन में कार्यक्रम की तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं। आयोजन की व्यापकता को देखते हुए विभिन्न विभागों को आवश्यक व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सौंपी गई है। लोक निर्माण विभाग, नगर निगम, विद्युत विभाग, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, उद्यानिकी विभाग, खाद्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, खेल एवं युवा कल्याण विभाग तथा आयुष विभाग सहित अन्य विभाग समन्वित रूप से आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं।जिले के सभी जनपद पंचायतों, नगरीय निकायों तथा शैक्षणिक संस्थानों में भी योग दिवस के आयोजन के निर्देश दिए गए हैं। योग दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए पौधरोपण, बीज वितरण, स्वच्छता अभियान एवं पर्यावरण जागरूकता गतिविधियों का भी आयोजन किया जाएगा। विद्यार्थियों, स्काउट-गाइड, राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस), राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) तथा अन्य सामाजिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है।आयोजन स्थल पर प्रतिभागियों के लिए आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिकित्सकों एवं चिकित्सा दलों की तैनाती की जाएगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता प्रदान की जा सके।योग दिवस की तैयारियों की समीक्षा के लिए 16 जून को कलेक्टर की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें संबंधित विभागों के अधिकारियों एवं जिले में योग के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल होंगे।जिला प्रशासन ने नागरिकों से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश जन-जन तक पहुंचाने की अपील की है।
- - प्रजनन काल में मछलियों के संरक्षण हेतु बंद ऋतु घोषितदुर्ग / वर्षा ऋतु में मछलियों की वंश वृद्धि (प्रजनन) को दृष्टिगत रखते हुये उन्हें संरक्षण देने हेतु राज्य में छत्तीसगढ़ नदीय मत्स्योद्योग अधिनियम-1972 की धारा-3 उपधारा-2 (दो) के तहत् 16 जून से 15 अगस्त तक की अवधि को ’’बंद ऋतु (क्लोज सीजन)’’ के रूप में घोषित किया गया है।उप संचालक मत्स्य सुश्री सीमा चन्द्रवंशी से मिली जानकारी अनुसार जिले के सभी तालाबों एवं जल स्त्रोतों में जिनका संबंध नदी नालों से नहीं है, के अतिरिक्त जलाशयों में किये जा रहे केज कल्चर को छोड़कर, सभी प्रकार के जल संसाधनों में 16 जून से 15 अगस्त 2026 तक मत्स्याखेट कार्य पूर्णतः निषिद्ध रहेगा। इन नियमों का उल्लंघन करने पर छत्तीसगढ़ मत्स्य क्षेत्र (संशोधित) अधिनियम के नियम-3 (5) के अंतर्गत अपराध सिद्ध होने पर एक वर्ष का कारावास अथवा 10,000 रूपये का जुर्माना अथवा दोनो एक साथ होने का प्रावधान है। उक्त नियम केवल छोटे तालाब या अन्य जल स्त्रोत जिनका संबंध किसी नदी नाले से नहीं है, के अतिरिक्त जलाशयों में किये जा रहे केज कल्चर में लागू नहीं होगें।
- दुर्ग / प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार के 12 वर्ष के सफल और गौरवशाली कार्यकाल के उपलक्ष्य में सम्पूर्ण प्रदेश के साथ-साथ जिले में भी ’विश्वास के, विकास के, जनकल्याण के’ कार्यक्रम के तहत विभिन्न आयोजन किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में, आम जनता को सरकार की नीतियों, विकास कार्यों और उपलब्धियों से रू-ब-रू कराने के उद्देश्य से राजेन्द्र पार्क दुर्ग में भव्य तीन दिवसीय छायाचित्र (फोटो) प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रदर्शनी 18 जून 2026 से 20 जून 2026 तक प्रतिदिन पूर्वाह्न 10.00 बजे से लेकर रात्रि 10.00 बजे तक आम जनता के लिए खुली रहेगी। इस विशेष छायाचित्र प्रदर्शनी में सरकार द्वारा विगत वर्षों में देश व प्रदेश के विकास और समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने के लिए चलाई जा रही प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं को आकर्षक चित्रों व जीवंत वृत्तांतों के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। प्रदर्शनी में मुख्य रूप से आयुष्मान भारत, आयुष्मान वय वंदना योजना, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, पीएम स्वनिधि, प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना जैसी मील का पत्थर साबित होने वाली योजनाओं के क्रियान्वयन और उनके सफल हितग्राहियों की प्रेरक कहानियों को रेखांकित किया जाएगा। इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करना और विगत 12 वर्षों में हुए उल्लेखनीय व ऐतिहासिक कार्यों की झलक दिखाना है। जिले के सभी नागरिकों, प्रबुद्धजनों और छात्र-छात्राओं से इस तीन दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी का अवलोकन करने और शासकीय योजनाओं की जानकारी प्राप्त करने की अपील की गई है।
- - कार्यक्रम अंतर्गत जिले में 18 जून से तीन दिवसीय शिविरों में होगा योजनाओं का पंजीयन और त्वरित निराकरणदुर्ग / प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार के 12 वर्ष के सफल कार्यकाल के उपलक्ष्य में सम्पूर्ण प्रदेश में ’विश्वास के, विकास के, जनकल्याण के’ कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में, आम जनता को केन्द्र एवं राज्य सरकार की समस्त जनकल्याणकारी एवं हितग्राहीमूलक योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से जिले के प्रत्येक राजस्व अनुविभाग स्तर पर तीन दिवसीय वृहद पंजीकरण शिविरों का आयोजन 18 जून 2026 से 20 जून 2026 तक किया जाना सुनिश्चित किया गया है। इसके सफल क्रियान्वयन हेतु कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने शिविरों के माध्यम से मुख्य रूप से सरकारी योजनाओं के लिए नए पंजीकरण, त्रुटि सुधार और आम जनता की समस्याओं का मौके पर ही त्वरित निवारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए है। शिविरों के सुचारू संचालन और सफल क्रियान्वयन के लिए उन्होंने जिले के चारों राजस्व अनुविभागों में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की है। जिसके अनुसार, दुर्ग अनुविभाग के लिए एसडीएम श्री हरवंश सिंह मिरी, धमधा के लिए एसडीएम श्री सोनाल डेविड, पाटन के लिए एसडीएम श्री लवकेश ध्रुव तथा भिलाई-3 अनुविभाग के लिए एसडीएम श्री महेश सिंह राजपूत को नोडल अधिकारी बनाया गया है। साथ ही सभी नोडल अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में शिविरों के आयोजन से पूर्व ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में कोटवारों के माध्यम से मुनादी कराएं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस तीन दिवसीय विशेष अभियान के दौरान विभिन्न महत्वपूर्ण योजनाओं जैसे आयुष्मान भारत, आयुष्मान वय वंदना, पीएम सूर्यघर, पीएम स्वनिधि, प्रधानमंत्री आवास योजना, जलजीवन मिशन, पीएम कौशल विकास योजना और विभिन्न पेंशन योजनाओं के अंतर्गत नए हितग्राहियों का मौके पर ही पंजीयन किया जाएगा तथा उन्हें सुविधाओं का लाभ दिया जाएगा। नोडल अधिकारियों को अपने अनुविभाग के अंतर्गत आने वाले संबंधित विभागों की ड्यूटी आदेश जारी करने और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी इस संबंध में अनिवार्य रूप से सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं। शिविर स्थलों पर टेंट, पेयजल और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए जिले के सभी नगर पालिक निगमों के आयुक्तों, जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों और नगर पालिका/नगर पंचायत के मुख्य अधिकारियों को भी जिम्मेदारी सौंप दी गई है। यह आदेश तत्काल प्रभावशील हो गया है।
- -जल संसाधन विभाग ने जारी किया अलर्टबिलासपुर /आगामी वर्षाकाल के दौरान आवश्यकता होने पर मिनीमाता बांगो बांध माचाडोली एवं हसदेव बराज दर्री से नदी में जल प्रवाहित किया जाएगा। सर्वसाधारण एवं कार्य एजेंसियों को सूचित किया जाता है कि बांध से नीचे, हसदेव नदी के किनारे, बाढ़ क्षेत्र में स्थापित चल-अचल संपत्ति सुरक्षित स्थानों पर ले जावें। बाढ़ क्षेत्र में स्थापित खनिज खदान, ठेकेदार, औद्योगिक इकाईयों, संस्थानों आदि को भी सूचित किया जाता है कि वह अपनी परिसंपत्तियों को बाढ़ क्षेत्र से बाहर कर लेवें। अकस्मात बाढ़ से होने वाली किसी भी प्रकार की क्षति के लिए जल संसाधन विभाग उत्तरदायी नहीं होगा।बाढ़ क्षेत्रों में आने वाले संभावित ग्रामों में बांगो, लेपरा, नुनिया, कछार, कोनकोना, पोड़ीउपरोड़ा, चर्रा, पाराघाट, छिनमेर, सिरकीकला, केरा, पाथा, सिलियारीपारा, तिलसाभाटा, हथमार, छिर्रापारा, डग्गुपारा, करमीपारा, जुनापारा, लोरीडांड, टुंगमुड़ा, तिलाईडांड, नवागांव, झोरा, कौराघाट, पोड़ीखोहा, डोंगाघाट, धनगांव, लोटलोटा, नर्मदा, औराकछार, झाबू, सोनगुड़ा, नवागांव, स्याहीमुड़ी, जेलगांव, चारपारा, खैराभावना, बलरामपुर, भलपहरी, जोगीपाली, कोहड़िया, राताखार, गेवराघाट, इमलीडुग्गू, कुदुरमाल, बरीडीह, मोहरा, देवरी, चिचोली, कटबितला, झीका, ढिठोली, सहित अन्य गांव शामिल हैं।
- बिलासपुर /कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि महाविद्यालय एवं कृषि विभाग बिलासपुर के संयुक्त तत्वाधान में 17 जून को सवेरे 11 बजे से एक दिवसीय जैविक कृषि कार्यशाला का आयोजन कृषि महाविद्यालय बिलासपुर के ऑडिटोरियम में किया जाएगा। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में उप मुख्यमंत्री श्री अरूण साव एवं दूसरे सत्र में केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। कार्यक्रम में जिले के लगभग 400 किसान कार्यशाला में शामिल होंगे।
- बिलासपुर /शासकीय नवीन पिछड़ा वर्ग बालक क्रीड़ा परिसर में वर्ष 2026-27 में प्रवेश के लिए खिलाड़ियों के चयन हेतु प्रवेश परीक्षा 24 जून 2026 को सवेरे 8 बजे से स्व. बीआर यादव राज्य खेल प्रशिक्षण केंद्र बहतराई में आयोजित की जाएगी। चयन सूची 27 जून 2026 को जारी करने के पश्चात प्रवेश की कार्यवाही की जाएगी। खेल परिसर में एथलेटिक्स, फुटबॉल, कबड्डी एवं स्विमिंग विधाओं में प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इस वर्ष कुल 35 खिलाड़ियों का चयन किया जाएगा।प्रवेश के लिए आवेदक की आयु 31 दिसंबर 2026 की स्थिति में 14 वर्ष से कम हो वे सब जूनियर वर्ग में एवं 18 वर्ष से कम आयु के आवेदक वरिष्ठ वर्ग से क्रीड़ा परिसर की चयन परीक्षा में शामिल हो सकते है। इच्छुक अभ्यर्थियों को विभिन्न शारीरिक दक्षता एवं खेल परीक्षणों से गुजरना होगा। चयन प्रक्रिया में 50 मीटर एवं 100 मीटर दौड़, ऊँची कूद, शटल रेस (4×10 मी.), स्टैंडिंग ब्राड जंप, गतिशील स्फूर्ति परीक्षण, अपर बॉडी बेंडिंग, पुश अप, लेग रेसिंग, सिट-अप एवं 400 मीटर एवं 800 मीटर दौड़ शामिल हैं।चयनित खिलाड़ियों के लिए नवीन पिछड़ा वर्ग बालक खेल परिसर, बिलासपुर में निःशुल्क आवास, भोजन, खेल प्रशिक्षण एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए राज्य खेल प्रशिक्षण केंद्र बहतराई स्थित मैदान, जिला खेल परिसर स्थित मैदान एवं स्विमिंग पूल का उपयोग किया जाएगा। इसके अतिरिक्त आवासीय व्यवस्था, खेल किट, ट्रैक सूट, मोजे, जूते, भोजन तथा विभिन्न खेल सामग्री भी निःशुल्क प्रदान की जाएगी।
- - दुर्ग जिले के पांच गांवों में सामुदायिक मध्यस्थता कार्यक्रम प्रारंभदुर्ग / राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नाल्सा), नई दिल्ली द्वारा जारी “मुकदमे-मुक्त ग्रामीण भारत की दिशा में सामुदायिक मध्यस्थता” मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी), 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा जिले के पांच ग्रामों घुघसीडीह, ननकट्ठी, अरसनारा, निकुम एवं कुथरेल का चयन किया गया है।इस अभिनव पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले छोटे-छोटे सामाजिक, पारिवारिक, पड़ोसी, भूमि एवं अन्य सामुदायिक विवादों का न्यायालय पहुंचने से पूर्व ही आपसी संवाद, सहमति एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में निराकरण सुनिश्चित करना है। सामुदायिक मध्यस्थता की इस व्यवस्था से न केवल न्यायालयों में लंबित मामलों के बोझ को कम करने में सहायता मिलेगी, बल्कि गांवों में सामाजिक समरसता, भाईचारा एवं आपसी विश्वास को भी मजबूती प्राप्त होगी।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा चिन्हांकित इन ग्रामों में सामुदायिक मध्यस्थता तंत्र को सुदृढ़ बनाने हेतु विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम, प्रशिक्षण कार्यशालाएं एवं संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके अंतर्गत स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों, पैरामलीगल वालंटियर्स, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा ग्रामीण नागरिकों को मध्यस्थता की प्रक्रिया एवं उसके लाभों से अवगत कराया जाएगा।सामुदायिक मध्यस्थता एक ऐसी वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली है, जिसमें पक्षकारों की स्वैच्छिक सहभागिता एवं आपसी सहमति के आधार पर विवादों का समाधान किया जाता है। यह प्रक्रिया सरल, त्वरित, कम खर्चीली तथा संबंधों को बनाए रखने वाली व्यवस्था के रूप में ग्रामीण समाज के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग ने जिले के नागरिकों से अपील की गई है कि वे विवादों के समाधान हेतु संवाद एवं मध्यस्थता की संस्कृति को अपनाएं तथा ग्राम स्तर पर शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण के निर्माण में सक्रिय सहभागिता निभाएं। यह पहल वाद-मुक्त ग्रामीण भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न्याय तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के साथ-साथ ग्रामीण समाज में स्थायी शांति एवं सामाजिक एकता को बढ़ावा देगी।
- दुर्ग ।बाल सक्षम नीति 2022 के अंतर्गत 1 जून से 30 जून 2026 तक सड़क जैसी परिस्थितियों में जीवनयापन कर रहे बच्चों के स्थायी रेस्क्यू एवं पुनर्वास के उद्देश्य से जिले के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों में अभियान चलाकर सड़क पर रहने, घूमने तथा भिक्षावृत्ति, बाल श्रम में संलग्न बच्चों की पहचान कर उन्हें संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पुनर्वास सेवाओं से जोड़ने की दिशा में आवश्यक कार्यवाही की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं बेहतर भविष्य उपलब्ध कराना है। इसी कड़ी में आज जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री राजकुमार जांबुलकर एवं जिला महिला बाल विकास अधिकारी अजय कुमार साहू (महिला एवं बाल विकास विभाग) के नेतृत्व में आईसीपीएस एवं चाइल्ड लाइन की संयुक्त टीम द्वारा बाल सक्षम नीति 2022 के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, मार्केट और आस-पास के स्थानों पर बाल सक्षम नीति 2022 के विषय में सभी नागरिकों को जागरूक किया गया। साथ ही किसी प्रकार के आपात समय मे बालक /बालिका की सुरक्षा व सुरक्षित रेस्क्यू सहायता हेतु टोल फ्री नंबर 1098/112 मे कॉल करने की जानकारी प्रदान की गई।
- दुर्ग / दुर्ग संभाग में खेत बचाओ अभियान अंतर्गत ग्राम खैरझिटी में विगत दिनों आयोजित कार्यक्रम में किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य जाँच कराने, नील हरित शैवाल, हरी खाद, जैव उर्वरक, जीवामृत आदि जैविक खादों तथा जैविक कीटनाशकों के उपयोग से टिकाउ खेती करने की सलाह दी गई। डी.ए.पी. उर्वरक के स्थान पर एस.एस.पी. व टी.एस.पी. नैनो डी.ए.पी. के उपयोग कर कम लागत में अधिक उत्पादन लेने की समझाइश दी गई।संयुक्त संचालक कृषि श्रीमती गोपिका गबेल से प्राप्त जानकारी अनुसार विगत खरीफ में धान फसल लेने वाले ऐसे कृषक, जिन्हांेने आगामी खरीफ में धान के स्थान पर अन्य खरीफ फसल लेने हेतु एकीकृत किसान पोर्टल एवं एग्रीस्टेक पर पंजीयन के पश्चात् डिजिटल क्रॉप सर्वे के रकबे में पुष्टि उपरांत मान्य रकबे पर राज्य शासन द्वारा किसान के खाते में नगद 15 हजार रुपए प्रति एकड़ आदान सहायता राशि दिए जाने के निर्णय एवं खरीफ वर्ष 2026 में दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास की फसल लेने वाले कृषको को एकीकृत किसान पोर्टल एवं एग्रीस्टेक पर पंजीयन के पश्चात् डिजिटल क्रॉप सर्वे के रकबे में पुष्टि उपरांत मान्य रकबे पर राज्य शासन द्वारा किसान के खाते में नगद 10 हजार रूपए प्रति एकड़ आदान सहायता राशि से किसानों को अवगत कराते हुए, उन्हें उच्चहन धनहा खेतों के मेड़ पार को समतल कर दलहन, तिलहन, मक्का फसल लगाने हेतु अपील की गई। प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान योजना के तहत सरकार द्वारा खरीफ 2026 में भी दलहन व तिलहन की समर्थन मूल्य पर खरीदी की जाएगी। इसकी जानकारी भी किसानो को दी गई। साथ ही समस्त मैदानी अमलों की जिला मुख्यालय में बैठक लेकर विभागीय योजनाओं एवं गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा की गई। तथा खरीफ 2026 हेतु किसानो की मांग अनुरूप गुणवत्ता युक्त खाद-बीज एवं अन्य कृषि आदानो की समय में उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु सहकारी समितियों मे पर्याप्त मात्रा में भंडारण एवं निर्धारित मूल्य पर त्वरित वितरण करने के निर्देश दिये गये।विभागीय योजना अंतर्गत उन्नत कृषि तकनीकी से संबंधित फसल प्रदर्शनो के आयोजन हेतु समय-सीमा में उपयुक्त किसानो और प्रदर्शन प्रक्षेत्र का चयन करने तथा गुणवत्तापूर्ण आदान सामग्री की व्यवस्था करने निर्देशित किया गया। योजना के प्रावधान अनुसार फसल प्रदर्शनो का आयोजन नहीं किये जाने संबंधी शिकायत प्राप्त होने पर संबंधितो के विरूद्ध नियमानुसार कठोर कार्यवाही के लिये तैयार रहने संचेत किया गया। श्रीमती गबेल द्वारा सभी जिले के उपसंचालक कृषि और प्रक्रिया प्रभारी (बीज निगम) को किसानों की मांग अनुसार दलहन, तिलहन के बीज उपलब्ध कराने निर्देशित किया गया है।इस वर्ष अलनीनो प्रभाव के कारण वर्षा में कमी को देखते हुए वैकल्पिक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश सभी जिला उपसंचालक कृषि को दिए गए। अल्प वर्षा के दृष्टिगत शीघ्र और मध्यम अवधि के धान के किस्मो को बढ़ावा देने, धान के नमक घोल से बीज शोधन कर पुष्ट बीज का चयन करने, बीज को फफूंदनाशी और जैव उर्वरको से बीजोपचार करके बुआई करने, नैनो डी.ए.पी. से बीज उपचार या रोपा के जड़ का उपचार, धान फसलो की कतार विधि से सीधी बोनी, दलहन-तिलहन के रिज-फरो विधि से बोनी को बढ़ावा देने के निर्देश समस्त मैदानी अमलो को दिया गया। सूखे की स्थिति को ध्यान में रखते हुये विभिन्न तकनीको के माध्यम से वर्षा जल का संरक्षण ओर भू-जल संवर्धन हेतु जागरूता लाने निर्देशित किया गया। खेत के मेंडो पर अरहर, तिल और कडुवे पत्तो वाले पेड़-पौधो को लगाकर वानस्पतिक अवरोध तैयार कराने की समझास दी गई ताकि एक खेत से दूसरे खेत में कीट व्याधि के प्रसार को कम किया जा सके।
- दुर्ग / आगामी मानसून 2026 को देखते हुए बाढ़ आदि नैसर्गिक विपत्तियों से निपटने हेतु छत्तीसगढ़ शासन, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के निर्देश के परिपालन में कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने जिला, अनुभाग व तहसील स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की हैं। साथ ही जिला कार्यालय दुर्ग के कक्ष क्रमांक 30 में बाढ़ नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गई है, जिसका दूरभाष नं. 0788-2320601 है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला स्तर पर अपर कलेक्टर श्री वीरेन्द्र सिंह को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। अनुविभाग स्तर पर दुर्ग के अनुविभागीय अधिकारी (रा.) श्री हरवंश मिरी, धमधा के अनुविभागीय अधिकारी (रा.) श्री सोनल डेविड, भिलाई-03 के अनुविभागीय अधिकारी (रा.) श्री महेश सिंह राजपूत और पाटन के अनुविभागीय अधिकारी (रा.) श्री लवकेश ध्रुव को जिम्मेदारी दी गई है। इसी क्रम में तहसील स्तर पर तहसीलदार दुर्ग श्री प्रफुल्ल कुमार गुप्ता, तहसीलदार धमधा श्रीमती मीना साहू, तहसीलदार पाटन श्री पवन ठाकुर, तहसीलदार अहिवारा श्री राधेश्याम वर्मा, तहसीलदार बोरी श्री टी.एस. खरे और तहसीलदार भिलाई-03 श्री रवि विश्वकर्मा को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
- -सीएम हेल्पलाइन, सुशासन तिहार तथा समय-सीमा के प्रकरणों की हुई विभागवार समीक्षाबालोद। कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने कहा कि विभिन्न विभागों में आमजनों से प्राप्त हो रहे आवेदनों का गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करें। जिससे कि जिलेवासियों की समस्याओं का त्वरित निराकरण हो सके। कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने सोमवार को संयुक्त जिला कार्यालय के सभाकक्ष में साप्ताहिक समय-सीमा की बैठक लेकर जिला स्तरीय अधिकारियों को इस संबंध में दिशा-निर्देश दिए हैं। बैठक में आमजनों की शिकायतों का समयबद्ध निराकरण करने हेतु शुरू किए गए सीएम हेल्पलाइन के जिले में बेहतर क्रियान्वयन हेतु सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करने के साथ ही सीएम हेल्पलाइन के क्रियान्वयन के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी, अपर कलेक्टर श्री चंद्रकांत कौशिक एवं श्री अजय किशोर लकरा, संयुक्त कलेक्टर श्रीमती मधुहर्ष, डिप्टी कलेक्टर श्री आशीष पेंद्रो सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।बैठक में बताया गया कि सीएम हेल्पलाइन पोर्टल के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को शासन के विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और सेवाओं का निर्धारित समयावधि में लाभ उपलब्ध कराने के साथ-साथ प्राप्त आवेदनों एवं शिकायतों का गुणवत्तायुक्त ढंग से निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। सीएम हेल्पलाइन सेंटर सप्ताह के सातों दिन एवं 24 घण्टा संचालित रहेगा। इसके माध्यम से प्रदेश का कोई भी नागरिक टोल फ्री नंबर 1076 एवं 18002333300 के अलावा वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप और व्हाट्सएप जैसे आधुनिक माध्यमों में से किसी भी एक माध्यम से किसी भी समय आसानी से अपना शिकायत दर्ज करा सकते हैं। सीएम पोर्टल में शिकायत दर्ज होने के साथ ही उन्हें एक विशिष्ट पहचान संख्या मिलेगी। जिसके माध्यम से शिकायतकर्ता को उनके शिकायत से संबंधित विभाग, अधिकारी के पास लंबित होने की जानकारी तथा कार्यवाही की प्रक्रिया के अलावा समाधान में लगने वाले समय आदि से संबंधित संपूर्ण जानकारी प्राप्त हो जाएगी। समय-सीमा की बैठक में सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों के निराकरण की विभागवार समीक्षा की गई तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी आवेदनों का निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में समय-सीमा के लंबित प्रकरणों, सीएम जनदर्शन, कलेक्टर जनदर्शन, पीजीएन अंतर्गत लंबित प्रकरणों की समीक्षा की गई।
- कलेक्टर ने आमजनों को सीड बाल प्रदान कर अभियान का किया शुभारंभबालोद ।बालोद को हरा-भरा बनाने जिला प्रशासन की अनूठी पहल मिशन अंकुर की शुरूआत सोमवार को संयुक्त जिला कार्यालय के जनदर्शन कक्ष में कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने की। उन्होंने जनदर्शन में पहुॅचे लोगों से मुलाकात कर उन्हें सीड बाल प्रदान कर खाली जगहों में सीड बाल फेंकने प्रोत्साहित भी किया। शुभारंभ अवसर पर पुलिस अधीक्षक श्री योगेश पटेल, दुर्ग वनमंडल के वनमंडलाधिकारी श्री दीपेश कपिल, जिला पंचायत के सीईओ श्री सुनील चंद्रवंशी, अपर कलेक्टर श्री चंद्रकांत कौशिक, श्री अजय किशोर लकरा, संयुक्त कलेक्टर श्रीमती मधुहर्ष सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद थे।सीड बॉल मिट्टी, खाद और विभिन्न उपयोगी वृक्षों के बीजों को मिलाकर बनाई गई एक छोटी सी गेंद होती है। इसे रोपने के लिए गड्ढा खोदने की आवश्यकता नहीं होती। इसे हाई ट्रेंच, जंगल, खाली जमीनों, पहाड़ियों या बंजर इलाकों में फेंक दिया जाता है। मानसून की बारिश पड़ते ही यह अंकुरित होकर एक पौधे का रूप ले लेती है।मिशन अंकुर के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के लिए स्थानीय प्रजातियां (जैसे- नीम, पीपल, बरगद, मुनगा, करंज, कटहल, इमली आदि) के बीजो का उपयोग कर सीड बाॅल का निर्माण किया जा रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) अंतर्गत स्व-सहायता समूह के सदस्यों के द्वारा 02 लाख 50 हजार नग एवं वन विभाग के द्वारा 01 लाख नग कुल 03 लाख 50 हजार नग सीड बाॅल बनाया गया है।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने पानी के महत्व की जानकारी दी तथा पानी का सदुपयोग करने प्रेरित किया तथा पानी के संरक्षण एवं संवर्द्धन हेतु सोखता गढ्ढा, रैन वाटर हार्वेस्टिंग बनाने हेतु प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि विगत वर्ष सभी के सहयोग से जिले में 03 लाख 50 हजार से अधिक पौधों का रोपण किया गया। इस वर्ष भी जिले को हरभरा बनाने की सोंच को आगे बढ़ाते हुए 02 लाख 25 हजार से अधिक टेंªच का निर्माण किया गया है। उन्होंने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि हमारे पास विभिन्न फलों जैसे- नीम, पीपल, बरगद, मुनगा, करंज, कटहल, इमली आदि के बीज रहते हैं, उसे हमें सुखाना है और मिट्टी से लपेट कर एक सीड बाल का रूप देना है, तथा खाली स्थानों पर उसे फेंकना है। जिससे वह बाल बारिश के पानी को सोखकर अंकुरित हो सकेगा और पौधे का रूप ले पाएगा। उन्होंने स्वसहायता समूह की दीदीयों को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके सहयोग से सीड बाल तैयार किया गया है। कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने जनदर्शन में पहुंचे लोगों को सीड बाल प्रदान कर उन्हें जिले को हरभरा बनाने मंे अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने प्रोत्साहित भी किया।शुभारंभ कार्यक्रम को पुलिस अधीक्षक श्री योगेश पटेल और दुर्ग वनमंडल के वनमंडलाधिकारी श्री दीपेश कपिल ने भी संबोधित कर लोगों को पेड़ का महत्व बताते हुए सीड बाल के माध्यम से जिले को हराभरा बनाने प्रोत्साहित किया। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी ने बताया कि हम दो तरह से पेड़ उगा सकते हैं। जिसमें एक तरीका है पौधे लगाना, तो वहीं दुसरा तरीका है फलों के बीज को सीड बाल बनाकर रोपना, जिससे वह बारिश के पानी में अंकुरित होकर पौधे और पेड़ का रूप ले लेता है। इस अवसर पर बिहान दीदी और जनदर्शन में पहुंचे लोग मौजूद थे।
- भिलाईनगर। शहर को प्लास्टिक मुक्त बनाने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नगर पालिक निगम भिलाई द्वारा सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में निगम आयुक्त राजीव कुमार पाण्डेय के निर्देश पर जोन-1 स्वास्थ्य विभाग की टीम ने वार्ड क्रमांक 10 लक्ष्मी नगर क्षेत्र में विशेष अभियान चलाया।प्लास्टिक मुक्त अभियान के दौरान फल ठेलों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अनुज्ञप्ति लाइसेंस की जांच की गई तथा सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर चालानी कार्रवाई की गई। निरीक्षण में कुल 15 प्रतिष्ठान/ठेलों पर नियमों का उल्लंघन पाया गया, जिन पर जुर्माना लगाया गया। कई फल ठेलों पर सिंगल यूज प्लास्टिक पाए जाने पर 50 से 100 रुपए तक का जुर्माना लगाया गया। कुल 11 फल/सब्जी ठेलों पर सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग के लिए चालान किया गया। एक जूते वाले एवं एक रेडीमेड दुकान पर अनुज्ञप्ति लाइसेंस न होने/नियम उल्लंघन के कारण 500- 500 रुपए का जुर्माना लगाया गया। सोनू चौहान, किशन, राहुल सोनकर, विक्की, छोटू सोनकर, सुजीत, सुनील, जोगिंदर, उमेश साह, लगन देवी, अजय, गणेश सहित अन्य दुकानदारों पर कार्रवाई की गई। अभियान के दौरान कुल 2120 रुपए की राशि चालानी कार्रवाई के रूप में वसूली गई। नगर निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शहर को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। नगर पालिक निगम भिलाई की टीम ने नागरिकों और व्यापारियों से अपील की है कि वे सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग बंद कर पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करें।
- एमसीबी/ जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) द्वारा शिक्षित बेरोजगार युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 19 जून 2026 (दिन- शुक्रवार) को रोजगार मेला/प्लेसमेंट कैंप का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन प्रातः 11:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक जिला रोजगार कार्यालय, मनेन्द्रगढ़ में आयोजित होगा। रोजगार मेले में विभिन्न निजी कंपनियों द्वारा भर्ती की जाएगी। इसमें Parisharam Human Resources Pvt. Ltd. द्वारा मीटर इंस्टॉलेशन पद हेतु 100 रिक्तियां (वेतन 15,000 से 20,000 रुपये), LIC अंबिकापुर द्वारा इंश्योरेंस एडवाइजर पद हेतु 50 रिक्तियां (कमीशन आधारित), Little Millennium Pre School मनेन्द्रगढ़ द्वारा टीचर पद हेतु 3 रिक्तियां (वेतन 5,000 से 6,000 रुपये) तथाAlekh Public School सिरौली द्वारा सिक्योरिटी गार्ड पद हेतु 1 रिक्ति उपलब्ध है।प्लेसमेंट कैंप पूर्णतः निःशुल्क है। इच्छुक अभ्यर्थियों को https://erojgar.cg.gov.in अथवा CG Rojgar Panjiyan App के माध्यम से पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। अभ्यर्थियों को अपने साथ शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता प्रमाण-पत्र, निवास प्रमाण-पत्र, रोजगार कार्यालय का जीवित पंजीयन प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड तथा पासपोर्ट साइज फोटो लेकर निर्धारित तिथि एवं स्थान पर उपस्थित होना होगा।
- रायपुर। बदलते तकनीकी दौर में महिला उद्यमियों को आधुनिक साधनों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। नवा बिहान क्लस्टर में आयोजित डिजिटल साक्षरता कार्यशाला ने महिलाओं को ऑनलाइन विपणन, ब्रांड निर्माण और इंटरनेट आधारित व्यापार की नई संभावनाओं से परिचित कराया गया।कार्यशाला का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं और महिला संचालित सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को आधुनिक विपणन तकनीकों की जानकारी देकर उनके उत्पादों की बाजार पहुंच बढ़ाना था। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को उत्पाद पहचान निर्माण, आकर्षक पैकेजिंग, लेबलिंग, गुणवत्ता प्रमाणन, ऑनलाइन विक्रय मंचों तथा बाजार से जुड़ने के विभिन्न तरीकों की व्यवहारिक जानकारी दी।वसुंधरा यादव ने कहा कि महिला उद्यमिता केवल आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की भी मजबूत आधारशिला है। उन्होंने महिलाओं को तकनीकी ज्ञान का अधिकाधिक उपयोग कर अपने व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया।कार्यशाला में सफल महिला उद्यमियों के अनुभव साझा किए गए और प्रतिभागियों को ग्राहक नेटवर्क विकसित करने, ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग बढ़ाने तथा व्यवसाय विस्तार की रणनीतियों पर मार्गदर्शन दिया गया। विशेषज्ञों ने सरकारी सहायता, अनुदान योजनाओं और विपणन सहयोग कार्यक्रमों की भी जानकारी दी गई, जिससे महिलाएं अपने उद्यमों को और मजबूत बना सकें।जिले के विभिन्न क्षेत्रों से शामिल करीब 30 महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों की प्रतिनिधियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी और प्रेरणादायक बताया। प्रतिभागियों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम महिलाओं को स्थानीय बाजार से आगे बढ़कर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद करेंगे।
- -प्रति एकड़ 6.50 लाख रुपये तक शुद्ध लाभरायपुर ।छत्तीसगढ़ में कृषि नवाचार और उद्यानिकी फसलों के विस्तार का असर अब धरातल पर स्पष्ट दिखाई देने लगा है। महासमुंद जिले के विकासखंड महासमुंद अंतर्गत ग्राम लोहारडीह निवासी प्रगतिशील किसान क्रांति कुमार चंद्राकर ने पारंपरिक धान खेती से आगे बढ़कर ग्राफ्टेड बैंगन की आधुनिक खेती अपनाकर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उनकी यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत आय वृद्धि का उदाहरण है, बल्कि राज्य में कृषि विविधीकरण और तकनीक आधारित खेती की दिशा में एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभरी है। एम.टेक. तक शिक्षित श्री चंद्राकर पूर्व में अपनी 1.46 हेक्टेयर सिंचित भूमि पर मुख्यतः धान की खेती करते थे। परंतु अधिक जल उपयोग, बढ़ती उत्पादन लागत तथा सीमित लाभ के कारण उन्हें अपेक्षित आर्थिक परिणाम प्राप्त नहीं हो रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कृषि में नवाचार और उद्यानिकी फसलों की ओर रुख करने का निर्णय लिया।वर्ष 2025-26 में उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत संचालित ग्राफ्टेड बैंगन एवं टमाटर सीडलिंग प्रदर्शन कार्यक्रम में सहभागिता की। इस योजना के तहत उन्हें 30 हजार रुपये की डीबीटी आधारित अनुदान सहायता प्राप्त हुई, जिससे उन्हें तकनीकी खेती अपनाने में प्रारंभिक सहयोग मिला। तकनीकी मार्गदर्शन के अनुरूप उन्होंने अपने खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली एवं मल्चिंग तकनीक का उपयोग करते हुए ग्राफ्टेड बैंगन की खेती प्रारंभ की। आधुनिक कृषि तकनीकों के समन्वित उपयोग से न केवल उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई, बल्कि फसल की गुणवत्ता और बाजार में उसकी स्वीकार्यता भी बेहतर हुई।किसान चंद्राकर के अनुसार, पारंपरिक धान खेती से उन्हें लगभग 35 हजार रुपये का सीमित लाभ प्राप्त होता था, जबकि ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से प्रति एकड़ लगभग 400 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त हुआ। औसतन 25 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक्री के परिणामस्वरूप कुल आय में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई। सभी कृषि लागतों,जिसमें श्रम, इनपुट सामग्री एवं अन्य व्यय शामिल है,को घटाने के पश्चात उन्हें प्रति एकड़ लगभग 6.50 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि यदि किसान पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीक और उच्च मूल्य वाली फसलों को अपनाएं, तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। उनकी सफलता के बाद क्षेत्र के अन्य किसान भी उद्यानिकी फसलों, विशेषकर ग्राफ्टेड सब्जियों, ड्रिप सिंचाई एवं मल्चिंग जैसी तकनीकों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। यह बदलाव जिले में कृषि विविधीकरण और जल संरक्षण आधारित खेती को नई दिशा प्रदान कर रहा है। कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकार के प्रदर्शन कार्यक्रमों से किसानों में तकनीकी जागरूकता बढ़ रही है और छत्तीसगढ़ में कृषि को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाने की दिशा में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है।
- -अब तक जिले की 46 ऐतिहासिक पाण्डुलिपियां पोर्टल पर दर्जरायपुर। राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। अभियान का प्रथम चरण 15 जून को पूर्ण हो गया है। इस दौरान सरगुजा जिले में प्राचीन ज्ञान, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण एवं दुर्लभ पाण्डुलिपियां प्रकाश में आई हैं, जिनका डिजिटलीकरण और दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत अम्बिकापुर नगर में दो संरक्षकों के पास संरक्षित महत्वपूर्ण पाण्डुलिपियों का सर्वेक्षण किया गया। बिलासपुर चौक निवासी डॉ. सुधीर पाठक के संग्रह में संवत् 1866 में लिखित वनदुर्गा महात्म्य की एक दुर्लभ पाण्डुलिपि प्राप्त हुई। इसके साथ ही तत्कालीन सरगुजा महाराज को संबोधित भूमि संबंधी एक आवेदन पत्र भी मिला, जो स्वतंत्रता पूर्व काल का बताया गया है। डॉ. पाठक ने जानकारी दी कि यह पत्र उनके पूर्वजों द्वारा लिखा गया था और वर्षों से सुरक्षित रखा गया है।अम्बिकापुर नगर में वनदुर्गा पर आधारित कई महत्वपूर्ण पाण्डुलिपियां पूर्व में भी प्राप्त हो चुकी हैं, जो क्षेत्र की समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाती हैं। पाण्डुलिपियों का अवलोकन करते हुए नगर निगम आयुक्त श्री डी.एन. कश्यप ने कहा कि यह अभियान हमारी प्राचीन ज्ञान-संपदा को संरक्षित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। इससे वर्तमान और भावी पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और ऐतिहासिक धरोहरों को समझने का अवसर मिलेगा। सर्वेक्षण के दौरान संयुक्त कलेक्टर श्रीमती शारदा अग्रवाल एवं जिला समिति सदस्य श्रीश मिश्र उपस्थित रहे। श्रीमती अग्रवाल ने स्वयं पाण्डुलिपियों के डिजिटल अपलोड की प्रक्रिया में सहभागिता निभाई। इसी क्रम में बाबूपारा निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता श्री वेणुधर सिंह के पास महामाया विजयोत्सव वंदना नामक एक महत्वपूर्ण पाण्डुलिपि प्राप्त हुई। इस पाण्डुलिपि में महाराज रघुनाथ शरण सिंह देव तथा महाराज रामानुज शरण सिंह देव बहादुर की विरुदावली का उल्लेख मिलता है। हालांकि इसके लेखक और लेखन काल का स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं है।अपलोडिंग प्रक्रिया के दौरान जिला समिति सदस्य श्रीश मिश्र ने बताया कि राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत देशभर में अब तक एक करोड़ आठ लाख से अधिक पाण्डुलिपियों का जियो-टैगिंग और दस्तावेजीकरण किया जा चुका है। वहीं सरगुजा जिले में 13 संरक्षकों के पास सुरक्षित 46 पाण्डुलिपियों को ज्ञानभारतम पोर्टल पर सफलतापूर्वक अपलोड किया गया है। सर्वेयर श्री गौरव पाठक द्वारा नगर निगम आयुक्त श्री डी.एन. कश्यप एवं संयुक्त कलेक्टर श्रीमती शारदा अग्रवाल की उपस्थिति में पाण्डुलिपियों के डिजिटलीकरण और अपलोडिंग का कार्य संपन्न कराया गया। यह अभियान देश की अमूल्य सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और बौद्धिक धरोहर के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में सामने आया है।
- -नवीन तहसील एवं अनुविभागीय कार्यालय भवनों से नागरिकों को मिल रही बेहतर राजस्व सेवाएंरायपुर। कोरबा जिले में राजस्व प्रशासन को अधिक सक्षम एवं जनोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत नवीन तहसील एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय भवनों का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल, कोरबा द्वारा निर्मित इन आधुनिक भवनों में अधिकांश स्थानों पर नियमित कार्यालयीन कार्य प्रारंभ हो चुके हैं, जिससे प्रशासनिक सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पर्यावरण एवं अधोसंरचना मद के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2023-24 में कोरबा जिले के लिए 5 नवीन तहसील कार्यालय भवन तथा 1 अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय भवन के निर्माण हेतु कुल 4 करोड़ 3 लाख 63 हजार रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई थी। इस स्वीकृति के अंतर्गत भैंसमा, बरपाली, दीपका, पसान एवं अजगरबहार में नवीन तहसील कार्यालय भवन तथा पाली में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय भवन का निर्माण कराया गया है।वर्तमान में भैंसमा, बरपाली, दीपका, पसान तथा पाली स्थित नवीन भवनों में नियमित रूप से कार्यालयीन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इन भवनों के उपयोग में आने से अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बेहतर कार्य वातावरण प्राप्त हुआ है, वहीं आम नागरिकों को राजस्व संबंधी सेवाएं अधिक व्यवस्थित, सुगम और सुविधाजनक रूप से उपलब्ध हो रही हैं। अजगरबहार तहसील कार्यालय भवन का निर्माण कार्य भी पूर्ण हो चुका है। वर्तमान में विद्युत कनेक्शन से संबंधित औपचारिकताएं प्रक्रियाधीन हैं। विद्युत लाइन जोड़ने एवं भवन हस्तांतरण की प्रक्रिया पूर्ण होते ही वहां भी कार्यालयीन कार्य प्रारंभ कर दिए जाएंगे, जिससे क्षेत्रवासियों को स्थानीय स्तर पर राजस्व सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य संपादित कर प्रशासनिक अधोसंरचना के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया गया है। नवीन कार्यालय भवनों के संचालन से जिले की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूती मिली है तथा शासकीय सेवाओं की दक्षता एवं प्रभावशीलता में वृद्धि हुई है। साथ ही नागरिकों को उनके निकटतम क्षेत्र में राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हुई है।
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-समय पर पहचान और बेहतर रेफरल व्यवस्था से रोगियों को मिलेंगी अधिक समग्र स्वास्थ्य सेवाएं
रायपुर । स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा PATH एवं The Bristol Myers Squibb Foundation के सहयोग से टीबी एवं फेफड़ों के कैंसर की प्रारंभिक जांच सेवाओं के एकीकरण विषय पर राज्य स्तरीय बैठक का आयोजन रायपुर में किया गया। बैठक का उद्देश्य टीबी कार्यक्रम के अंतर्गत उपलब्ध जांच एवं निदान तंत्र का प्रभावी उपयोग करते हुए फेफड़ों के कैंसर की शीघ्र पहचान एवं देखभाल सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करना था।बैठक में राज्य क्षय अधिकारी एवं उप संचालक (एनसीडी) डॉ. संजीव मेश्राम तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, रायपुर डॉ. मिथलेश चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर एवं बिलासपुर के प्रतिनिधियों, जिला स्वास्थ्य अधिकारियों तथा टीबी एवं गैर-संचारी रोग ( NCD ) के क्षेत्र में कार्यरत विभिन्न विकास सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।बैठक के दौरान PATH के उप निदेशक डॉ. अजय पाटले ने टीबी एवं फेफड़ों के कैंसर की प्रारंभिक जांच एवं देखभाल सेवाओं के आकलन से प्राप्त प्रमुख निष्कर्षों को प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि टीबी कार्यक्रम के अंतर्गत उपलब्ध स्क्रीनिंग एवं डायग्नोस्टिक व्यवस्थाओं का उपयोग फेफड़ों के कैंसर की शीघ्र पहचान को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।अपने संबोधन में डॉ. संजीव मेश्राम ने समय पर जांच, शीघ्र पहचान एवं प्रभावी रेफरल व्यवस्था के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों, चिकित्सा महाविद्यालयों और कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर टीबी एवं फेफड़ों के कैंसर की प्रारंभिक जांच सेवाओं का एकीकरण किया जा सकता है, जिससे रोगियों को अधिक समग्र, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी।बैठक के दौरान प्रतिभागियों ने विभिन्न सुझाव एवं अनुशंसाएं साझा कीं। इन सुझावों के आधार पर छत्तीसगढ़ में टीबी एवं फेफड़ों के कैंसर की प्रारंभिक जांच एवं देखभाल सेवाओं के एकीकृत मॉडल को विकसित करने की दिशा में आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। विशेषज्ञों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस पहल से दोनों रोगों की समय पर पहचान, बेहतर उपचार प्रबंधन तथा रोगियों के स्वास्थ्य परिणामों में उल्लेखनीय सुधार संभव होगा। - -मक्का उत्पादन, जैविक खाद और आधुनिक तकनीकों का समन्वय बन रहा सफलता की नई पहचानरायपुर ।छत्तीसगढ़ में कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने के लिए किसान अब फसल विविधीकरण, जैविक पोषण प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपना रहे हैं। राज्य शासन और कृषि विभाग द्वारा प्रोत्साहित वैज्ञानिक खेती की पद्धतियां किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन और अधिक आय अर्जित करने का अवसर प्रदान कर रही हैं। इसके सकारात्मक परिणाम प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में देखने को मिल रहे हैं। सरगुजा जिले के ग्राम सरगांवा के प्रगतिशील किसान श्री बिराज विश्वास ने फसल विविधीकरण और नैनो उर्वरकों के उपयोग के माध्यम से खेती में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। उन्होंने पारंपरिक खेती की पद्धति में बदलाव करते हुए पिछले चार वर्षों से धान के स्थान पर मक्का उत्पादन को अपनाया है। आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग से वे अपनी कृषि भूमि में वर्षभर उत्पादन लेकर बेहतर आर्थिक लाभ अर्जित कर रहे हैं।श्री बिराज विश्वास का मानना है कि फसल विविधीकरण किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। मक्का उत्पादन के साथ-साथ वे सब्जी खेती भी कर रहे हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। आधुनिक कृषि यंत्रों, उन्नत बीजों और वैज्ञानिक खेती की पद्धतियों के उपयोग से उत्पादन लागत में कमी आई है तथा उत्पादकता में वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि भूमि की उर्वरता बनाए रखने के लिए वे जैविक खादों का अधिक उपयोग करते हैं। गोबर खाद एवं अन्य जैविक स्रोतों के साथ नैनो उर्वरकों का प्रयोग फसलों को आवश्यक पोषण उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध हो रहा है। नैनो उर्वरकों के उपयोग से पोषक तत्व सीधे पौधों तक पहुंचते हैं, जिससे उनकी उपयोग दक्षता बढ़ती है और फसलों को बेहतर वृद्धि के लिए आवश्यक पोषण प्राप्त होता है।कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नैनो उर्वरक खेती की लागत कम करने, पोषक तत्वों के प्रभावी उपयोग को बढ़ाने तथा पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वहीं फसल विविधीकरण किसानों को बाजार आधारित उत्पादन और जोखिम प्रबंधन के बेहतर अवसर उपलब्ध करा रहा है। राज्य सरकार द्वारा किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, फसल विविधीकरण, जैविक खेती तथा नैनो उर्वरकों के उपयोग के लिए निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को नई तकनीकों से जोड़ा जा रहा है, जिससे कृषि क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। श्री बिराज विश्वास जैसे प्रगतिशील किसानों की सफलता यह दर्शाती है कि वैज्ञानिक खेती, नवाचार और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर कृषि को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और भविष्य उन्मुख बनाया जा सकता है। उनकी पहल आज अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।
- रायपुर ।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार द्वारा जनता की समस्याओं के त्वरित और संवेदनशील निराकरण के लिए शुरू किया गया ‘सुशासन तिहार’ कइयों की जिंदगी में नई उम्मीद की किरण लेकर आ रहा है। ऐसा ही एक मानवीय और प्रेरक उदाहरण सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले से सामने आया है, जहाँ जिला प्रशासन की तत्परता से बरमकेला ब्लॉक के ग्राम पंचायत लिमपाली निवासी संतराम चौहान के जीवन की एक बड़ी बाधा दूर हो गई है। संतराम चौहान पिछले कई वर्षों से पैरालिसिस (लकवा) जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। पूरी तरह बिस्तर पर आश्रित होने के कारण उनके पास आजीविका का कोई साधन नहीं था। विडंबना यह थी कि आधार कार्ड अपडेट न होने की वजह से वे पिछले चार सालों से विभिन्न शासकीय कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित थे। शारीरिक अक्षमता के कारण उनका आधार केंद्र तक पहुँच पाना पूरी तरह असंभव था।संतराम के परिवार के लिए ग्राम झाल में आयोजित श्सुशासन तिहारश् एक वरदान साबित हुआ। परिवार ने शिविर में अपनी इस लाचारी को साझा करते हुए आवेदन प्रस्तुत किया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सारंगढ़-बिलाईगढ़ की कलेक्टर ने तत्काल कड़े निर्देश जारी किए। कलेक्टर के निर्देश पर ई-गवर्नेंस की टीम बिना किसी देरी के आवश्यक बायोमेट्रिक उपकरणों और पूरे सेटअप के साथ सीधे संतराम चौहान के घर पहुँच गई।संतराम के घर पहुँचे ई-गवर्नेंस टीम के सदस्य अगस्ती भोई ने बताया कि यह कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण था। पैरालिसिस के गंभीर असर के कारण संतराम के फिंगरप्रिंट और आँखों के स्कैन (डेमोग्राफिक व बायोमेट्रिक अपडेट) लेने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। कई प्रयासों के बाद अंततः टीम को सफलता मिली। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्र में नेटवर्क की कमी ने भी परीक्षा ली, लेकिन टीम की प्रतिबद्धता के आगे हर बाधा छोटी साबित हुई।जिला प्रशासन ने इस मौके पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि राज्य सरकार के मंशानुरूप बुजुर्गों, दिव्यांगों और शारीरिक रूप से अक्षम नागरिकों के लिए श्घर पहुँच सेवाश् सुनिश्चित की जा रही है, ताकि समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को भी उसका हक मिल सके। अब आधार अपडेट होने से संतराम चौहान के लिए शासकीय योजनाओं के द्वार खुल गए हैं। इस संवेदनशील पहल के लिए संतराम के परिवार ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन का सहृदय आभार व्यक्त किया है।
- -बस्तर में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में 17 जोड़े बंधे परिणय सूत्र में-टाऊन हाल में आयोजित कार्यक्रम में विधायक किरण सिंह देव ने नव विवाहितों को दिया आशीर्वादरायपुर ।मुख्यमंत्री कन्या विवाह' राज्य सरकार द्वारा चलाई जाने वाली एक कल्याणकारी योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य गरीब, निराश्रित, और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की शादी के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। यह योजना मुख्य रूप से सामूहिक विवाह के माध्यम से सम्पन्न होती है, जिससे गरीब परिवारों पर विवाह का भारी आर्थिक बोझ कम हो सके और फिजूलखर्ची पर रोक लगे।जगदलपुर स्थित पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी सभागार (टाउन हॉल) में सोमवार को मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत एक भव्य और गरिमामय सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर मंत्रोच्चार और शहनाई की गूंज के बीच कुल 17 जोड़े सदा-सदा के लिए एक-दूसरे के साथ दाम्पत्य सूत्र में बंध गए। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव ने नवविवाहित जोड़ों के ऊपर अक्षत और पुष्प वर्षा कर उन्हें सुखी और समृद्ध दांपत्य जीवन का आशीर्वाद दिया।इस विवाह समारोह की सबसे अनूठी और गौरवशाली विशेषता यह रही कि इसमें पुनर्वासित 2 विशेष जोड़े भी शामिल हुए। नारायणपुर जिले में आत्मसमर्पण करने वाले इन पूर्व नक्सली दंपत्तियों में पिलसाय सलाम संग सिरबत्ती और पतिराम संग मनाय कश्यप शामिल हैं, जिन्होंने गृहस्थ जीवन अपनाकर समाज की मुख्यधारा में आगे बढ़ने का संकल्प लिया। विधायक श्री किरण सिंह देव ने इन जोड़ों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत ऐसे कदमों से बस्तर में शांति और खुशहाली के एक नए युग की शुरुआत हो रही है।विवाह समारोह को संबोधित करते हुए जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की महत्ता पर प्रकाश डाला और कहा कि बेटियो का विवाह सबसे महत्वपूर्ण कार्य होता है। हमारी संवेदनशील सरकार के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं महिला बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी रजवाड़े जी के नेतृत्व में पूरे प्रदेश में सामूहिक कन्या विवाह योजना के तहत विवाह हो रहा है। इस योजना के माध्यम से गरीब और जरूरतमंद परिवारों की बेटियों का सम्मानपूर्ण विवाह कराना समाज का सबसे पुनीत कार्य है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिलती है।विधायक श्री देव ने कहा कि आज विवाह के बंधन में बंधे सभी 17 जोड़े एक सशक्त समाज और समृद्ध राष्ट्र के निर्माण में अपनी सहभागिता देंगे। इसके साथ ही यह योजना गरीब बेटियों के विवाह में होने वाले आर्थिक बोझ को कम कर समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि विगत दिनों प्रदेश के विधायक बेमेतरा ने मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना में विवाह कर सभी को इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरणा दी।इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री रूपसिंह मंडावी, नगर निगम सभापति श्री खेमसिंह देवांगन, जनपद अध्यक्ष श्री पदलाम नाग, उपाध्यक्ष श्री पुरुषोत्तम कश्यप, पुलिस अधीक्षक श्री शलभ सिन्हा सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, नवविवाहित जोड़ों के परिजन तथा बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने वर-वधू को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
- - बस्तर संभाग सहित 10 जिलों के संवेदनशील क्षेत्रों में 16.20 लाख लोगों की होगी जांच, 2063 सर्वे दल पहुंचेंगे घर-घररायपुर ।कभी मलेरिया के सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में गिने जाने वाले बस्तर अंचल की तस्वीर अब तेजी से बदल रही है। जिन गांवों में एक समय बरसात का मौसम आते ही मलेरिया का खतरा बढ़ जाता था, वहां अब लगातार चल रहे स्वास्थ्य अभियानों के कारण संक्रमण दर में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की जा रही है। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ सरकार एक बार फिर व्यापक तैयारी के साथ ‘मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान’ के 14वें चरण की शुरुआत 15 जून से की गई । इस अभियान के माध्यम से न केवल संभावित संक्रमित व्यक्तियों की पहचान की जाएगी, बल्कि मलेरिया उन्मूलन की दिशा में अब तक मिली सफलता को और आगे बढ़ाने का प्रयास भी किया जाएगा।राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित यह अभियान इस बार बस्तर संभाग के सातों जिलों-बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, कांकेर और कोंडागांव के साथ-साथ गरियाबंद, कबीरधाम तथा खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के संवेदनशील ग्रामों में संचालित किया जा रहा है । अभियान के तहत राज्य के 36 विकासखंडों के 697 उप स्वास्थ्य केंद्रों के अंतर्गत आने वाले 2476 गांवों में व्यापक सर्वेक्षण किया जाएगा तथा लगभग 16.20 लाख लोगों की मलेरिया जांच का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।दरअसल, छत्तीसगढ़ ने पिछले एक दशक में मलेरिया नियंत्रण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। वर्ष 2015 में बस्तर संभाग का वार्षिक परजीवी सूचकांक (एपीआई) 27.40 था, जो वर्ष 2025 में घटकर 6.98 पर पहुंच गया है। इसी अवधि में राज्य का एपीआई 5.21 से घटकर 0.90 हो गया है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2015 की तुलना में वर्ष 2025 में मलेरिया के कुल प्रकरणों में 80.09 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। यह उपलब्धि निरंतर चलाए गए चरणबद्ध अभियानों, घर-घर पहुंचकर जांच करने की रणनीति और समय पर उपचार उपलब्ध कराने के प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है।जनवरी 2026 में संचालित अभियान के 13वें चरण के परिणाम भी उत्साहजनक रहे हैं। उस चरण में मलेरिया धनात्मकता दर 4.60 प्रतिशत से घटकर मात्र 0.48 प्रतिशत रह गई। विशेषज्ञों के अनुसार यह कमी इस बात का संकेत है कि समुदाय आधारित निगरानी और सक्रिय रोगी खोज की रणनीति प्रभावी रूप से काम कर रही है।अभियान के 14वें चरण को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक स्तर पर तैयारी की है। कुल 2063 सर्वे दलों का गठन किया गया है, जो गांव-गांव और घर-घर पहुंचकर बुखार से पीड़ित व्यक्तियों की पहचान करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर त्वरित जांच किट के माध्यम से मलेरिया की जांच की जाएगी और संक्रमित पाए जाने वाले व्यक्तियों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही लोगों को मलेरिया से बचाव, मच्छर नियंत्रण तथा समय पर जांच और उपचार के प्रति जागरूक भी किया जाएगा।इस बार अभियान में बच्चों और किशोरों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसके लिए 4420 स्कूलों, 346 छात्रावासों, 591 आश्रमों, 77 पोटाकेबिनों तथा 334 अर्धसैनिक बल शिविरों में अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है। इन संस्थानों में रहने वाले विद्यार्थियों, कर्मचारियों और अन्य लोगों की जांच कर संक्रमण की प्रारंभिक अवस्था में ही पहचान सुनिश्चित की जाएगी, ताकि बीमारी के प्रसार को रोका जा सके। मलेरिया के खिलाफ लड़ाई केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समुदाय की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि अभियान के दौरान सर्वे दलों को स्थानीय स्तर पर जनसहयोग प्राप्त हो, इसके लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि सर्वे दल उनके गांव या घर पहुंचे तो वे जांच में सहयोग करें तथा बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत जांच कराएं।



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