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- -उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राशि स्वीकृति का परिपत्र जारी*बिलासपुर/ राज्य शासन ने जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ से लाहौद मार्ग के डोंगाकोहरौद बस्ती में सड़क निर्माण के लिए 6 करोड़ 5 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं। इस राशि से 4.34 किमी सड़क का निर्माण किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राज्य शासन ने मंत्रालय से राशि स्वीकृति के संबंध में प्रमुख अभियंता को परिपत्र जारी कर दिया है।उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कार्य में प्रयुक्त की जाने वाली सामग्रियों एवं संपूर्ण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं। किसी भी स्तर पर कार्य की गुणवत्ता में कमी पाये जाने पर उत्तरदायित्व का निर्धारण करते हुए नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।लोक निर्माण विभाग ने प्रमुख अभियंता को कार्य की निविदा समय-सीमा में करने, निर्माण कार्य प्राक्कलन व कार्य संपादित करने में मितव्ययिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने निर्माण एजेंसी से अनुबंधित समय-सीमा में काम पूर्ण किया जाना सुनिश्चित कराने को कहा है।कार्य पूर्ण किये जाने के लिए अनावश्यक समय-सीमा वृद्धि नहीं किए जाने के भी निर्देश विभाग ने दिए हैं। अपरिहार्य एवं नियंत्रण से बाहर मान्य कारणों के आधार पर ही सक्षम अधिकारी द्वारा समय-सीमा में वृद्धि की जा सकेगी।
- भिलाई। नगर पालिक निगम भिलाई के आयुक्त राजीव कुमार पांडेय का स्थानांतरण अपर आयुक्त, उच्च शिक्षा विभाग, नवा रायपुर के पद पर होने पर निगम परिवार द्वारा एक भव्य एवं भावपूर्ण विदाई समारोह का आयोजन किया गया। होटल अमित पार्क इंटरनेशनल, भिलाई में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में अधिकारियों और कर्मचारियों ने नम आंखों से अपने लोकप्रिय आयुक्त को विदाई दी।अधिकारियों के विशेष आग्रह और स्नेहपूर्ण निवेदन पर निगम आयुक्त अपने सपरिवार एवं बच्चों के साथ कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। विदाई समारोह के दौरान पूरा माहौल काफी भावुक नजर आया। उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों ने निगम आयुक्त के कार्यकाल के दौरान किए गए विकास कार्यों, उनके कुशल मार्गदर्शन और सौम्य व्यवहार को याद किया। कार्यक्रम के दौरान सभी वक्ताओं ने उनके उच्च व्यक्तित्व, कुशल प्रशासन, कार्य के प्रति समर्पण, बेहतर कार्यशैली एवं तत्काल निर्णय लेने की क्षमता सहित कई खूबियों को याद किये ।निगम आयुक्त सभी अधिकारियों के विशेष कार्यों को याद करते हुए कहा कि सभी बेहतर कार्य करते हैं। जो भी बड़ी परियोजना संचालित है उसे ज़िम्मेदारी से निर्वहन करते हुए पूर्ण करने की जिम्मेदारी दिये हैं जिससे संपूर्ण शहर वासियों को आने वाले समय में लाभ मिले । निगम आयुक्त प्रधानमंत्री आवास योजना, निर्माणाधीन स्विमिंग पूल, नालंदा परिसर, हॉर्स राइडिंग, स्केटिंग ट्रैक, रेलवे किनारे बायपास रोड जैसे अन्य बड़ी परियोजना को याद किये । उन्होंने कार्य के दौरान जनप्रतिनिधियों, शहरवासियों एवं अधिकारी व कर्मचारियों के साथ अनजाने में गलती के लिए खेद प्रकट किये।इस अवसर पर भिलाई निगम के तमाम वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य अभियंता अजीत कुमार तिग्गा, उपायुक्त डी के कोसरिया, जोन आयुक्त अमरनाथ दुबे, येशा लहरे, कुलदीप गुप्ता, कार्यपालन अभियंता संजय अग्रवाल, संजय वर्मा, अनिल सिंह, नितेश मेश्राम, लेखाधिकारी चन्द्रभूषण साहू, स्वास्थ्य अधिकारी जावेद अली, उद्यान सह जनसंपर्क अधिकारी तिलेश्वर साहू, राजस्व अधिकारी जे पी तिवारी, सहायक अभियंता श्वेता वर्मा, श्वेता माहेश्वर, चंद्रकांत साहू, बसंत साहू, वरिष्ठ स्वच्छता निरीक्षक के के सिंह, अनिल मेश्राम, दौलत चंद्राकार, शंकर सुवन मरकाम, पुरुषोत्तम सिन्हा एवं अशोक देवांगन सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी शामिल रहे। सभी ने निगम आयुक्त को स्मृति चिन्ह भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य और नवीन दायित्वों के लिए शुभकामनाएं दीं।
- भिलाईनगर। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की अधिकारी सुश्री सुरूचि सिंह ने सोमवार को नगर पालिक निगम भिलाई के आयुक्त के रूप में विधिवत पदभार ग्रहण कर लिया। राज्य शासन द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश के तहत उन्हें नगर पालिक निगम भिलाई का नया आयुक्त नियुक्त किया गया है। इससे पूर्व वे जिला पंचायत राजनांदगांव की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के रूप में अपनी सेवाएं दे रही थीं।नगर निगम मुख्यालय पहुंचने पर निगम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सुश्री सिंह का आत्मीय स्वागत किया। आयुक्त सुश्री सुरूचि सिंह का शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र नागरिक तक पारदर्शिता एवं गुणवत्ता के साथ पहुंचाना उनकी प्राथमिकता होगी। पदभार ग्रहण के दौरान निगम के सभी विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने नवपदस्थ आयुक्त का स्वागत करते हुए उन्हें निगम की वर्तमान परियोजनाओं एवं विभिन्न विभागों की प्रगति से अवगत कराया। राज्य शासन द्वारा हाल ही में किए गए प्रशासनिक फेरबदल के अंतर्गत आईएएस अधिकारी सुश्री सुरूचि सिंह को नगर पालिक निगम भिलाई का आयुक्त नियुक्त किया गया है। उनके प्रशासनिक अनुभव एवं कार्यकुशलता से भिलाई नगर निगम में विकास कार्यों को नई दिशा एवं गति मिलेगी।
- -447 लोगों का निःशुल्क उपचार, आयुष्मान और वय वंदन कार्ड का भी मिला लाभरायपुर । ग्रामीण और सुदूर इलाकों में आयोजित होने वाले निःशुल्क मेगा मेडिकल कैंप (Mega Medical Camps) आर्थिक रूप से कमजोर और दूरदराज के मरीजों के लिए एक वरदान साबित होते हैं l ये शिविर गाँव के दरवाजे तक उच्च-स्तरीय चिकित्सा, विशेषज्ञ परामर्श, मुफ्त दवाइयाँ और गंभीर बीमारियों की प्रारंभिक जाँच सीधे पहुँचाकर ग्रामीणों को बड़ी राहत देते हैं lसुदूर वनांचल के सुकमा जिले के दूरस्थ ग्राम पंचायत गादीरास में जिला प्रशासन की पहल से आयोजित निःशुल्क मेगा मेडिकल कैंप ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत साबित हुआ। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व और जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में कलेक्टर श्री अमित कुमार की विशेष पहल पर आयोजित इस शिविर में 447 ग्रामीणों को विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं और निःशुल्क स्वास्थ्य जांच का लाभ मिला। शिविर में आंध्र प्रदेश के ग्रेट ईस्टर्न मेडिकल स्कूल एंड हॉस्पिटल, रागोलू-श्रीकाकुलम के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने जिला स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर मरीजों की जांच और उपचार किया। मेडिसिन, जनरल सर्जरी, बाल रोग और हड्डी रोग विशेषज्ञों ने प्रत्येक मरीज का परीक्षण कर आवश्यक सलाह दी। मेडिकल कैंप में सभी मरीजों को निःशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। साथ ही ब्लड प्रेशर, शुगर, ईसीजी और 2डी-ईको जैसी महत्वपूर्ण जांचें भी बिना किसी शुल्क के की गईं। इससे दूरस्थ क्षेत्र के लोगों को बेहतर इलाज के साथ आर्थिक राहत भी मिली।जांच के दौरान गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को आगे के उपचार के लिए उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया गया। इनमें 12 अस्थि रोग, 10 शिशु रोग और 27 जनरल सर्जरी के मरीज शामिल हैं। जिला प्रशासन ने इन मरीजों के आवागमन के लिए निःशुल्क बस सुविधा भी उपलब्ध कराई, ताकि इलाज में किसी प्रकार की परेशानी न हो। शिविर के दौरान पात्र हितग्राहियों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी दिया गया। कुल 62 आयुष्मान कार्ड और 10 वय वंदन कार्ड वितरित किए गए, जिससे जरूरतमंद परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिलेगा।गादीरास में आयोजित यह निःशुल्क मेगा मेडिकल कैंप इस बात का उदाहरण है कि जिला प्रशासन स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं, निःशुल्क जांच, दवाइयां, रेफरल सुविधा और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर मिलने से ग्रामीणों में खुशी और विश्वास दोनों बढ़े हैं। यह पहल दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में एक सफल और प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है।
- -प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) से साकार हुआ श्री श्यामसिंह चंद्रवंशी का वर्षों पुराना सपनारायपुर । बरसों तक दूसरों के लिए ईंट-पत्थरों से सपनों का घर खड़ा करने वाले श्री श्यामसिंह चंद्रवंशी के मन में भी एक छोटा-सा सपना पलता था। एक ऐसा पक्का घर, जिसमें उनका परिवार सुरक्षित और सम्मान के साथ रह सके। मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले के विकासखंड मोहला के ग्राम गुहाटोला निवासी श्री श्यामसिंह खेती के साथ राजमिस्त्री का काम कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। सीमित आय के कारण उनका परिवार वर्षों तक कच्चे मकान में रहने को विवश था। बरसात के दिनों में टपकती छत, तेज हवाओं का डर और हर मौसम में परिवार की सुरक्षा की चिंता उनके जीवन का हिस्सा बन चुकी थी। ऐसे कठिन समय में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) उनके जीवन में उम्मीद की नई किरण बनकर आई। योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता ने उस सपने को आकार देना शुरू किया, जिसे वे वर्षों से अपने मन में संजोए हुए थे। सबसे अच्छी बात यह रही कि एक मिस्त्री होने के नाते उन्होंने अपना घर किसी और से नहीं, बल्कि अपने ही हाथों से तैयार किया।उन्होंने बताया कि मैं वर्षों से दूसरों के लिए पक्के मकान बनाता आया हूँ। जब भी किसी का घर तैयार करता था, तब मन में यही इच्छा होती थी कि एक दिन मेरा भी अपना पक्का घर हो। प्रधानमंत्री आवास योजना ने मेरा यह सपना सच कर दिया। आज मैंने अपने हाथों से अपने परिवार के लिए सुरक्षित और मजबूत घर बनाया है। उनके लिए यह एक मकान नहीं था, बल्कि वर्षों के संघर्ष, मेहनत और उम्मीदों का साकार रूप था। अब उनका परिवार नए पक्के मकान में सम्मान और सुरक्षा के साथ रह रहा है। बारिश की रातों में छत टपकने का डर नहीं है, और तेज हवाओं के साथ घर टूटने की चिंता भी खत्म हो गई है। बच्चों को सुरक्षित वातावरण मिला है, जहाँ वे निश्चिंत होकर पढ़ाई कर सकते हैं। परिवार के चेहरों पर जो सुकून दिखाई देता है, वह शासकीय योजना की वास्तविक सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है। श्री चंद्रवंशी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहते हैं कि यह योजना गरीब परिवारों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही है।
- -पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन से किसानों को मिली बड़ी राहतरायपुर। पैडी ट्रांसप्लांटर (धान रोपने वाली मशीन) का उपयोग खेतों में धान की रोपाई के लिए किया जाता है स यह मशीन पौधों को सही दूरी और समान गहराई पर मिट्टी में लगाती है, जिससे मजदूरों की भारी बचत होती है और पैदावार में 10-20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की जाती है।बालोद जिले में आधुनिक कृषि तकनीकों का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। पारंपरिक खेती के तरीकों में बदलाव की यह तस्वीर गुण्डरदेही विकासखंड के ग्राम पंचायत भरदाकला में साफ दिख रही है। यहां के सरपंच श्री क्रांति भूषण साहू ने अपने खेतों में पैडी ट्रांसप्लांटर यानी धान रोपने वाली मशीन का उपयोग शुरू कर क्षेत्र के किसानों के लिए नई राह दिखाई है।लगभग 35 से 40 एकड़ भूमि पर खेती करने वाले श्री साहू ने इस वर्ष 10 से 12 एकड़ रकबे में पैडी ट्रांसप्लांटर के माध्यम से धान की रोपाई की। उनका कहना है कि पहले मजदूरों से रोपाई कराने में 20 से 25 दिन लग जाते थे। मशीन से यह काम बेहद कम समय में और ज्यादा सटीकता से हो गया। मशीन से पौधे एक निश्चित दूरी और सीधी कतारों में रोपे जाते हैं। इससे फसल की बढ़वार बेहतर होती है और बाद में निंदाई-गुड़ाई में भी आसानी होती है। कृषि सीजन में मजदूरों की किल्लत एक बड़ी समस्या है। ऐसे में यह तकनीक किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है।श्री साहू के अनुसार नर्सरी के लिए ट्रे और अन्य संसाधनों पर शुरुआत में थोड़ा अतिरिक्त खर्च आता है, लेकिन बड़े पैमाने पर खेती के लिए यह तकनीक लंबे समय में काफी किफायती है। उन्होंने कहा, आने वाले समय में मजदूरों की समस्या और समय की कमी को देखते हुए खेती में मशीनीकरण ही एकमात्र विकल्प है। धान रोपाई के लिए पैडी ट्रांसप्लांटर सबसे बेहतरीन और लाभकारी तरीका है।इस आधुनिक बदलाव से न सिर्फ किसानों की मेहनत कम हुई है, बल्कि समय पर रोपाई होने से पैदावार बढ़ने की भी उम्मीद है। कृषि विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन में क्षेत्र के अन्य किसान भी अब इस तकनीक को समझकर अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।
- -कृषि यंत्रीकरण योजना से आधुनिक और लाभकारी खेती की ओर बढ़े किसान के कदमरायपुर ।आधुनिक दौर में खेती-किसानी को उन्नत और मुनाफे का सौदा बनाने में कृषि यंत्रों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो चुकी है। राज्य शासन की कृषि यंत्रीकरण योजना आज छोटे और मझोले किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। इसका एक जीवंत उदाहरण विकासखण्ड बिलाईगढ़ के ग्राम गधाभाटा में देखने को मिला है, जहाँ के प्रगतिशील कृषक तिहारूराम चंद्रा पिता जगनथिया का खुद का ट्रैक्टर खरीदने का सपना साकार हुआ है।ग्राम झुमका में आयोजित भव्य सुशासन शिविर में प्रभारी मंत्री श्री टंकराम वर्मा के करकमलों से तिहारूराम को उनके नए ट्रैक्टर की चाबी सौंपी गई। ट्रैक्टर का 9.40 लाख रूपए की कुल लागत पर तिहारूराम को राज्य शासन की ओर से 4 लाख रूपए का भारी शासकीय अनुदान प्राप्त हुआ है। इस पर तिहारूराम ने कहा कि कम जमीन और सीमित साधनों के कारण पहले समय पर खेती का काम पूरा करना एक बड़ी चुनौती थी। भारी-भरकम किराए पर ट्रैक्टर लेना पड़ता था। लेकिन सरकार की इस योजना और 4 लाख रुपए की बड़ी छूट ने मेरी राह आसान कर दी। अब मैं न सिर्फ समय पर अपनी खेती कर सकूंगा, बल्कि खेती को अधिक आधुनिक और लाभकारी भी बना पाऊंगा। सुशासन तिहार के अंतर्गत आयोजित इन शिविरों में कृषि विभाग द्वारा श्वन स्टॉप सेंटरश् के रूप में स्टाल लगाए गए थे। यहाँ आमजन की समस्याओं के त्वरित निराकरण के साथ-साथ शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र हितग्राहियों तक पहुँचाया गया।शिविर के दौरान विभाग को कुल 575 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें 545 मांग संबंधी और 30 शिकायत संबंधी मामले थे। विभाग ने संवेदनशीलता और मुस्तैदी दिखाते हुए रिकॉर्ड समय में 572 आवेदनों (544 मांग व 28 शिकायत) का सफलतापूर्वक निराकरण कर सुशासन की मिसाल पेश की।ट्रैक्टर वितरण के साथ ही विभाग द्वारा शिविर में उपस्थित किसानों को उन्नत एवं वैज्ञानिक खेती से जोड़ने के लिए नीम आधारित कीटनाशक, हरित खाद, प्रमाणित बीज और विभिन्न लघु कृषि यंत्रों का वितरण भी किया गया।उप संचालक कृषि, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारियों और ग्रामीण कृषि विकास अधिकारियों की टीम ने किसानों को चौपाल लगाकर केंद्र व राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। इनमें मुख्य रूप से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना एवं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना,सॉइल हेल्थ कार्ड योजना और एग्री स्टैक पंजीयन,प्राकृतिक व जैविक खेती मिशन तथा परंपरागत कृषि विकास योजना,दलहन-तिलहन प्रोत्साहन कार्यक्रम और हरित खाद का उपयोग शामिल है।जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ में कृषि विभाग का यह महाअभियान न केवल किसानों की समस्याओं के प्रभावी समाधान का जरिया बना, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीकों से जोड़कर आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। यह पूरी मुहिम सुशासन, जनभागीदारी और किसान कल्याण का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरी है।
- -"मोर गांव मोर पानी" अभियान की बड़ी सफलता, बरदर में करोड़ों लीटर वर्षा जल संरक्षण और महिलाओं के लिए स्थायी आजीविका का नया अध्यायरायपुर। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के खड़गवां विकासखंड अंतर्गत ग्राम बरदर प्रकृति संरक्षण, जल संवर्धन और ग्रामीण आजीविका का एक उत्कृष्ट एवं प्रेरणादायी मॉडल बनकर उभर रहा है। राज्य शासन के महत्वाकांक्षी "मोर गांव मोर पानी" महा अभियान के तहत यहां 52 एकड़ क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण, जल सुरक्षा और आजीविका संवर्धन को एक साथ जोड़ते हुए ऐसा समग्र विकास मॉडल तैयार किया जा रहा है, जो आने वाले समय में जिले ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लिए अनुकरणीय उदाहरण बनेगा। इस पहल के अंतर्गत 30 एकड़ क्षेत्र में विभिन्न वैज्ञानिक जल संरक्षण एवं भूजल संवर्धन संरचनाओं का निर्माण किया गया है, जिससे प्रत्येक वर्ष करोड़ों लीटर वर्षा जल का संचयन और भूजल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित होगी। वहीं शेष 22 एकड़ क्षेत्र में दो हजार से अधिक उन्नत फलदार एवं औषधीय पौधों का रोपण कर फलोद्यान विकसित किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने के साथ दर्जनों महिला स्व-सहायता समूहों को स्थायी रोजगार एवं नियमित आय का अवसर प्राप्त होगा।ग्राम बरदर में जल संरक्षण को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विकसित किया गया है। सात एकड़ क्षेत्र में 30×40 मॉडल के तहत 240 संरचनाओं का निर्माण किया गया है, जिनके माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 40 लाख लीटर वर्षा जल का संग्रहण एवं भूजल रिचार्ज संभव होगा। इसके साथ ही 1800 मीटर लंबाई में जल अवशोषण ट्रेंच एवं सीपीटी संरचनाओं का निर्माण किया गया है, जिनसे प्रतिवर्ष लगभग 60 लाख लीटर जल भूमि में समाहित होगा। पांच एकड़ क्षेत्र में 5000 कंटूर ट्रेंच तैयार किए गए हैं, जिनकी क्षमता लगभग 70 लाख लीटर वर्षा जल के संरक्षण एवं भूजल पुनर्भरण की है। इन संरचनाओं के माध्यम से वर्षा जल का बहाव नियंत्रित होगा, मिट्टी का कटाव रुकेगा, भूजल स्तर में सुधार होगा तथा भविष्य में सिंचाई एवं पेयजल की उपलब्धता भी बेहतर होगी।गांव में जल संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए लगभग पांच लाख रुपये की लागत से 40 बोल्डर चेक डेम बनाए गए हैं। इसके अलावा 1.80 लाख रुपये की लागत से दो गेबियन संरचनाओं का निर्माण किया गया है, जो बरसाती जलधाराओं को नियंत्रित कर जल संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। क्षेत्र में 19 लाख रुपये की लागत से एक पक्का चेक डेम भी निर्मित किया गया है, जिससे लगभग 15 एकड़ कृषि भूमि को वर्षभर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी तथा 12 कृषक परिवारों के साथ उद्यान विभाग की नर्सरी को भी पर्याप्त जल मिलेगा। इसी प्रकार 16 लाख रुपये की लागत से एक अर्दन चेक डेम का निर्माण किया गया है, जिससे लगभग 10 एकड़ भूमि सिंचित होगी और पांच कृषक परिवार सीधे लाभान्वित होंगे। इन सभी संरचनाओं के कारण वर्षा जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होगा तथा क्षेत्र में कृषि उत्पादन और हरित आवरण दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी ग्राम बरदर तेजी से आगे बढ़ रहा है। विगत वर्ष यहां तीन एकड़ क्षेत्र में 500 पौधों का सफल वृक्षारोपण कर उनका संरक्षण किया गया था। इस वर्ष इस अभियान को और व्यापक रूप देते हुए उद्यान विभाग द्वारा 22 एकड़ क्षेत्र में दो हजार से अधिक फलदार एवं औषधीय पौधों का रोपण किया जा रहा है। इसके साथ ही नर्सरी विकास का कार्य भी किया जा रहा है, जिससे भविष्य में पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित होने के साथ स्थानीय लोगों को बागवानी के नए अवसर प्राप्त होंगे। विकसित हो रहा यह फलोद्यान केवल हरित क्षेत्र बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके माध्यम से दर्जनों महिलाओं को स्थायी रोजगार, नियमित आय और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा। फल उत्पादन, पौधों के रखरखाव, नर्सरी प्रबंधन और प्रसंस्करण जैसी गतिविधियों से महिला स्व-सहायता समूहों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और ग्रामीण परिवारों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।ग्राम बरदर में विकसित हो रहा यह समेकित मॉडल जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, भूजल संवर्धन, कृषि विकास और महिला सशक्तिकरण का अद्भुत संगम है। कलेक्टर सुश्री संतन देवी जांगड़े के मार्गदर्शन में तैयार किया जा रहा यह प्रयास प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ ग्रामीण विकास की नई दिशा तय कर रहा है। आने वाले वर्षों में यह मॉडल न केवल जल संकट से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, बल्कि हरित विकास, टिकाऊ कृषि, महिला आजीविका और ग्रामीण समृद्धि का सशक्त उदाहरण बनकर एमसीबी जिले की नई पहचान स्थापित करेगा।
- -केवल पौधे लगाना नहीं, उन्हें जीवित रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी : मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी-स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल और सुरक्षित पर्यावरण आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी-31 जुलाई तक वृक्षारोपण लक्ष्य पूरा करने और 15 अगस्त तक गुणवत्तापूर्ण पौधरोपण पर जोर-हर उद्योग में 33 प्रतिशत ग्रीन बेल्ट, प्रति हेक्टेयर 2,500 पौधे तथा देशी प्रजातियों के वृक्ष लगाने के निर्देशरायपुर / राज्य में मानसून-2026 के दौरान औद्योगिक इकाइयों द्वारा संचालित वृक्षारोपण कार्यक्रमों की समीक्षा के लिए आज आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी की मुख्य आतिथ्य में बेबीलॉन कैपिटल, रायपुर में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य की प्रमुख मीडियम एवं लार्ज स्केल औद्योगिक इकाइयों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, आवास एवं पर्यावरण विभाग तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों ने भाग लिया।बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार विकसित भारत-2047 के विजन के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। राज्य सरकार निवेश-अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है, लेकिन पर्यावरणीय मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल लक्ष्य पूरा करने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों का जीवित रहना सबसे महत्वपूर्ण है। सही समय पर, उपयुक्त प्रजाति के स्वस्थ पौधों का रोपण तथा उनकी नियमित देखभाल और सिंचाई सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने उद्योगों से पीपल, शिरीष, नीम, आम, कटहल सहित स्थानीय एवं दीर्घायु प्रजातियों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी 'मन की बात' कार्यक्रम में मियावाकी पद्धति जैसी आधुनिक वृक्षारोपण तकनीकों का उल्लेख किया है और ऐसे नवाचारों को अपनाने से हरित आवरण तेजी से बढ़ाया जा सकता है।मंत्री श्री चौधरी ने सभी उद्योगों से अपने परिसर तथा आसपास हरित वातावरण विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने निर्देश दिए कि 31 जुलाई तक वृक्षारोपण का निर्धारित लक्ष्य पूरा किया जाए तथा 15 अगस्त तक गुणवत्तापूर्ण पौधरोपण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाएगी तथा पोर्टल पर समयबद्ध प्रविष्टि अनिवार्य होगी।उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल और सुरक्षित पर्यावरण आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उद्योगों को उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरणीय उत्तरदायित्व का भी पूरी गंभीरता से पालन करना चाहिए। उन्होंने उद्योगों से अपने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के माध्यम से भी व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाने तथा अधिकाधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया।मंत्री श्री चौधरी ने बताया कि नवा रायपुर को "पीपल सिटी" के रूप में विकसित करने की दिशा में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। शहर में पूर्व में लगाए गए लगभग 70 हजार पौधों के अतिरिक्त आगामी पांच वर्षों में एक लाख से अधिक पीपल के पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।उन्होंने बताया कि नवा रायपुर की पहचान बन चुकी सेंध (Sendh) लेक का गहरीकरण एवं सौंदर्यीकरण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। इससे लगभग 12 लाख घन मीटर अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता विकसित होगी तथा झील का क्षेत्रफल भी बढ़ेगा। झील के मध्य स्थित लगभग तीन एकड़ के द्वीप पर मियावाकी पद्धति से लगभग 25 हजार पौधे लगाए गए हैं, जिससे प्रवासी पक्षियों के लिए प्राकृतिक "बर्ड आइलैंड" (ईको-हब) विकसित किया जा रहा है।आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अध्यक्ष श्री अंकित आनंद ने कहा कि पिछले एक वर्ष में मंडल ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक लगभग 22 लाख पौधों का रोपण किया जा चुका है, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 90 प्रतिशत है। इस वर्ष पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों को ही अंतिम माना जाएगा तथा सभी उद्योगों को समय पर ऑनलाइन प्रविष्टि सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 25 लाख पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है, जो उद्योगों की सक्रिय सहभागिता से 30 लाख से अधिक तक पहुंच सकता है।सचिव श्री आनंद ने बताया कि 320 से अधिक उद्योगों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली के माध्यम से निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। प्रारंभिक चरण में नियमों के उल्लंघन पर नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन मंडल का उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि प्रदूषण कम करते हुए पर्यावरणीय अनुपालन सुनिश्चित करना है। उन्होंने उद्योगों से पुनर्चक्रित (रिसाइकिल) जल के अधिकतम उपयोग तथा देशी एवं पर्यावरण-अनुकूल वृक्ष प्रजातियों के रोपण पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के सदस्य सचिव श्री राजू अगसिमनी ने उद्योगों को निर्देश दिए कि प्रत्येक हेक्टेयर में न्यूनतम 2,500 पौधे लगाए जाएं तथा त्रि-स्तरीय (थ्री-लेयर) पौधरोपण के माध्यम से सघन ग्रीन बेल्ट विकसित की जाए। सभी औद्योगिक इकाइयों को अपने परिसर के कम से कम 33 प्रतिशत क्षेत्र में हरित क्षेत्र विकसित करने, केवल स्वीकृत पौध प्रजातियों का रोपण करने तथा पौधों की सिंचाई के लिए पुनर्चक्रित जल का उपयोग करने के निर्देश दिए गए।उन्होंने सभी उद्योगों को ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (एनालाइजर) 24 घंटे संचालित रखने तथा प्रत्येक तीन माह में उसका नियमित कैलिब्रेशन कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण अभियान की सफलता का वास्तविक पैमाना लगाए गए पौधों की संख्या नहीं, बल्कि उनका संरक्षण और जीवित रहना है।बैठक में राज्य की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों के प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट एवं डायरेक्टर स्तर के प्रतिनिधि, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी तथा विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
- -पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत छूट का दिख रहा सकारात्मक प्रभाव-महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी, 50.14 करोड़ रुपये का मिला प्रत्यक्ष लाभ- महिलाओं का संपत्ति स्वामित्व बढ़ाना सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में बड़ा कदम: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव सायरायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और संपत्ति स्वामित्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू की गई पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत छूट की पहल के उत्साहजनक परिणाम सामने आ रहे हैं। पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के आंकड़ों के अनुसार महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।विभाग द्वारा 06 मई 2026 से 30 जून 2026 की अवधि का पिछले वर्ष की समान अवधि से तुलनात्मक विश्लेषण करने पर पाया गया कि वर्ष 2025 में महिलाओं के पक्ष में पंजीकृत विक्रय विलेखों की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2026 में बढ़कर 41 प्रतिशत हो गई है। इसी अवधि में महिलाओं के नाम पंजीकृत दस्तावेजों की संख्या 14,668 से बढ़कर 21,292 हो गई, जो लगभग 45 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है।राज्य के लगभग 75 प्रतिशत जिलों में महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में 20 प्रतिशत से अधिक वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। जांजगीर-चांपा, बलोद, कोरिया, रायपुर तथा कांकेर सहित अनेक जिलों में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिली है।महिलाओं को प्रदान की गई पंजीयन शुल्क में छूट के परिणामस्वरूप इस अवधि में नागरिकों को लगभग 50.14 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ है। इससे न केवल महिलाओं के नाम पर संपत्ति स्वामित्व को बढ़ावा मिला है, बल्कि परिवारों को भी आर्थिक राहत मिली है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहित करने के लिए पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट का निर्णय इसी सोच का परिणाम है। संपत्ति पर महिलाओं का स्वामित्व उन्हें आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ परिवार और समाज में अधिक सम्मान एवं निर्णय लेने की क्षमता भी प्रदान करता है।मुख्यमंत्री ने कहा कि इस निर्णय से बड़ी संख्या में परिवार लाभान्वित हुए हैं और महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हमारी सरकार ऐसी नीतियों को लगातार बढ़ावा दे रही है, जो महिलाओं को आत्मनिर्भर, सशक्त और विकास यात्रा की समान भागीदार बनाएं।वित्त एवं वाणिज्यिक कर (पंजीयन) मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में हुई यह उल्लेखनीय वृद्धि केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का संकेत है। जब किसी महिला के नाम संपत्ति होती है, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है, परिवार में उसकी निर्णयात्मक भूमिका सुदृढ़ होती है और आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं को विकास प्रक्रिया के केंद्र में रखकर कार्य कर रही है। पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत छूट का उद्देश्य केवल आर्थिक राहत देना नहीं, बल्कि महिलाओं को संपत्ति स्वामित्व से जोड़कर उन्हें वास्तविक अर्थों में सशक्त बनाना है। प्रारंभिक परिणाम बताते हैं कि यह पहल अपने उद्देश्य की दिशा में प्रभावी सिद्ध हो रही है।मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार नागरिक-केंद्रित, पारदर्शी एवं समावेशी पंजीयन व्यवस्था के निर्माण के लिए निरंतर सुधार कर रही है। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग द्वारा किए जा रहे सुधारों एवं प्रोत्साहनात्मक उपायों का उद्देश्य नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना तथा शासन की योजनाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना है।
- रायपुर । बलौदाबाजार जिले का प्रसिद्ध सिद्धखोल जलप्रपात इन दिनों पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है। वन विभाग के मार्गदर्शन में स्थानीय संयुक्त वन प्रबंधन समिति कुकरीकोना द्वारा यहां संचालित किए जा रहे ईको-टूरिज्म प्रबंधन ने न केवल वनों और पर्यावरण के संरक्षण की एक नई मिसाल पेश की है, बल्कि स्थानीय आदिवासी व ग्रामीण परिवारों के लिए आजीविका का एक सशक्त माध्यम भी बनकर उभरा है।कुकरीकोना समिति द्वारा स्थानीय ग्रामीण युवाओं को जोड़कर एक 'पर्यटन समूह' का गठन किया गया है। ये प्रशिक्षित युवा जलप्रपात क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों का मार्गदर्शन करते हैं तथा मानसून के दौरान जलप्रपात के समीप चिन्हित संवेदनशील एवं खतरनाक स्थलों पर मुस्तैद रहकर सैलानियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं। आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए समिति के काउंटर पर प्राथमिक चिकित्सा किट की भी पुख्ता व्यवस्था की गई है।सिद्धखोल के संवेदनशील वनक्षेत्र को पूरी तरह स्वच्छ और प्लास्टिक-मुक्त बनाए रखने के लिए कुकरीकोना समिति द्वारा कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। प्रवेश द्वार पर पानी की प्लास्टिक बोतलों के लिए ₹50 का रिफंडेबल चार्ज लिया जाएगा, जिसे पर्यटकों द्वारा बोतल सुरक्षित वापस लाने पर तुरंत लौटा दिया जाएगा। पूरे परिसर में स्थानीय बांस से बने कूड़ेदान स्थापित करने का निर्णय लिया गया हैं। साथ ही, समिति की महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा पर्यटकों को रियायती दरों पर जूट,कपड़े के थैले और दोना-पत्तल उपलब्ध कराए जाएँगे ।प्रत्येक सोमवार को वन अमले और समिति के सदस्यों द्वारा संयुक्त रूप से पूरे पर्यटन मार्ग में "स्वच्छता श्रमदान" चलाकर संपूर्ण कचरे का सुरक्षित निपटान किया जाएगा।*पर्यटकों की सुविधा हेतु शुल्क प्रणाली का सरलीकरण*- समिति द्वारा पर्यटकों को सुगम और किफायती अनुभव देने के लिए प्रवेश शुल्क प्रणाली में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। पूर्व में ली जाने वाली ₹20 (दोपहिया) एवं ₹30 (चार पहिया) वाहन-आधारित पृथक पार्किंग फीस को पूर्णतः समाप्त कर दिया गया है। अब इसके स्थान पर केवल ₹10 प्रति व्यक्ति का एकल प्रवेश शुल्क लागू किया गया है। ईको-टूरिज्म के इस सफल मॉडल से कुकरीकोना गाँव के दर्जनों परिवारों को सीधे तौर पर रोजगार मिला है। इको पर्यटन से समिति के लाभांश और ग्रामीणों की दैनिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे ग्रामीणों का वनों के प्रति जुड़ाव और बढ़ा है।
- -भारतीय आदिम जाति सेवक संघ के छत्तीसगढ़ राज्य बोर्ड के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्रीरायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास के जनदर्शन हॉल में आयोजित भारतीय आदिम जाति सेवक संघ के छत्तीसगढ़ राज्य बोर्ड के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने नवनियुक्त पदाधिकारियों एवं सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और छत्तीसगढ़ में जनजातीय विकास को अभूतपूर्व गति मिली है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संघ का नवगठित राज्य बोर्ड आदिवासी समाज के उत्थान, उनके अधिकारों की रक्षा तथा सामाजिक विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।कार्यक्रम में भारतीय आदिम जाति सेवक संघ के अध्यक्ष श्री प्रकाश कुमार उइके, श्रीमती कौशल्या साय, श्री राजेश मालवीय, श्री कुंवर जितेंद्र नरसिंह राणा सहित संघ के सदस्यगण एवं विभिन्न राज्यों से आए पदाधिकारी उपस्थित थे।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ जनजातीय बहुल राज्य है, जहां विशेष पिछड़ी जनजातियों सहित अनेक जनजातीय समुदाय अपनी समृद्ध परंपराओं, संस्कृति और जीवन मूल्यों के साथ निवास करते हैं। ऐसे राज्य में भारतीय आदिम जाति सेवक संघ के छत्तीसगढ़ राज्य बोर्ड का गठन अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संघ का इतिहास गौरवपूर्ण रहा है और यह संस्था लंबे समय से देशभर में आदिवासी समाज के कल्याण एवं उत्थान के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है।मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय आदिम जाति सेवक संघ की ऐतिहासिक भूमिका का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद इसके प्रथम अध्यक्ष रहे, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री श्री मोरारजी देसाई ने भी इस प्रतिष्ठित संस्था का नेतृत्व किया। उन्होंने नवनियुक्त राज्य बोर्ड के सभी सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए देश के विभिन्न राज्यों से आए संघ के पदाधिकारियों का छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर आत्मीय स्वागत किया।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य कर रही है। आज बस्तर क्षेत्र विकास के नए युग में प्रवेश कर चुका है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, विद्युत, संचार और अन्य मूलभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। पर्यटन के क्षेत्र में भी बस्तर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। यहां की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और परंपराओं को जानने-समझने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं तथा स्थानीय होमस्टे में ठहरकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना रहे हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत चार दशकों में बस्तर के अनेक क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से वंचित रहे और लगभग 400 गांवों का विधिवत सर्वेक्षण तक नहीं हो पाया था। वर्तमान सरकार ने इन गांवों का सर्वे कर विकास कार्यों को गति दी है। उन्होंने बताया कि नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत 500 से अधिक गांवों तक सड़क, पेयजल सहित अन्य बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई गई हैं। इन क्षेत्रों में लोगों के राशन कार्ड बनाए जा रहे हैं, नई उचित मूल्य की दुकानों का संचालन प्रारंभ हुआ है तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी तेजी से लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर योजना के अंतर्गत घर-घर जाकर स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है, ताकि दूरस्थ अंचलों में रहने वाले लोगों को समय पर उपचार और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। इसके साथ ही बस्तर मुन्ने कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है, जिसका अर्थ है 'अग्रणी बस्तर'। इस पहल के माध्यम से सुदूर वनांचलों तक शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और जीवन मूल्यों का संरक्षण करते हुए उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आजीविका और आर्थिक अवसरों से जोड़ना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय आदिम जाति सेवक संघ का छत्तीसगढ़ राज्य बोर्ड समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ते हुए जनजातीय विकास के प्रयासों को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान करेगा।
- -रायपुर प्रेस क्लब के "हमर पहुना" कार्यक्रम में पहुंचे प्रख्यात कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर,-सनातन, शिक्षा और सामाजिक मूल्यों पर रखे विचार-सनातन बोर्ड से लेकर सदन में 50 सीटों तक, देवकीनंदन ठाकुर के बड़े बयान--विश्वगुरु बनना है तो संस्कारों की ओर लौटना होगा: देवकीनंदन ठाकुर-युवा, शिक्षा और सनातन पर खुलकर बोले देवकीनंदन ठाकुर-चरित्र निर्माण ही राष्ट्र निर्माण का आधार: देवकीनंदन ठाकुररायपुर । रायपुर प्रेस क्लब के लोकप्रिय संवाद कार्यक्रम "हमर पहुना" के अंतर्गत प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु एवं कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने पत्रकारों से संवाद किया। इस अवसर पर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी, महासचिव गौरव शर्मा, उपाध्यक्ष दिलीप साहू कोषाध्यक्ष दिनेश यदु ,संयुक्त निवेदिता साहू एवं भूपेश जांगड़े ने उनका पुष्पगुच्छ एवं स्मृति-चिन्ह भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। कार्यक्रम में कथा आयोजक योगेश अग्रवाल भी उपस्थित रहे।पत्रकारों से चर्चा के दौरान देवकीनंदन ठाकुर ने युवाओं के नैतिक और सांस्कृतिक मार्गदर्शन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को भारतीय संस्कृति, गीता और महाभारत जैसे ग्रंथों का अध्ययन कराया जाना चाहिए, जिससे उनमें चरित्र, सत्यनिष्ठा और जीवन मूल्यों का विकास हो सके। उन्होंने कहा कि परिवार और समाज को बच्चों में संस्कार आधारित शिक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।उन्होंने कहा कि समाज में बढ़ती हिंसा, अपराध और पारिवारिक विघटन जैसी घटनाएं चिंताजनक हैं तथा इनसे बचाव के लिए नैतिक शिक्षा और चरित्र निर्माण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप भारतीय सामाजिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता है।देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि देश में "सनातन बोर्ड" के गठन की आवश्यकता है, जिससे मंदिरों, गुरुकुलों और सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जा सके। उन्होंने कहा कि मंदिरों की आय का उपयोग धर्म, शिक्षा और समाजहित के कार्यों में अधिक प्रभावी ढंग से किया जाना चाहिए। उन्होंने गौ संरक्षण, संस्कारयुक्त शिक्षा और भारतीय परंपराओं को बढ़ावा देने की भी आवश्यकता बताई।शिक्षा व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि विद्यालयों में बच्चों को केवल आधुनिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और भारतीय संस्कृति का ज्ञान भी दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को बॉलीवुड गीतों की बजाय सावित्री, सीता, रानी लक्ष्मीबाई जैसे प्रेरणादायी चरित्रों से परिचित कराया जाना चाहिए। उनके अनुसार गुरु और शिक्षकों की भूमिका केवल शिक्षा देने तक सीमित नहीं बल्कि चरित्र निर्माण की भी होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि सनातन धर्म सत्य, संयम और सदाचार का संदेश देता है। उनके अनुसार नशामुक्त जीवन, सत्य बोलना और नैतिक आचरण ही धार्मिक जीवन का आधार है। उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपने आचरण से राष्ट्र और संस्कृति को मजबूत बनाने का प्रयास करना चाहिए।धर्मांतरण के विषय पर उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा किसी पर धर्म परिवर्तन का दबाव नहीं बनाती तथा उन्होंने विभिन्न माध्यमों से होने वाले धर्मांतरण पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारतीय युवाओं को गीता का अध्ययन करना चाहिए ताकि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत और जीवन मूल्यों को बेहतर ढंग से समझ सकें।राजनीतिक व्यवस्था पर अपनी राय व्यक्त करते हुए देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि संसद और विधानसभाओं में धर्माचरण एवं नैतिक मूल्यों का पालन करने वाले लोगों की संख्या बढ़नी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे धर्माचार्यों के लिए 50 सीटें आरक्षित किए जाने पर विचार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए सार्वजनिक जीवन में चरित्र, नैतिकता और सांस्कृतिक मूल्यों को सर्वोच्च स्थान मिलना चाहिए। इस संदर्भ में उन्होंने लिव-इन रिलेशनशिप का विरोध दोहराया तथा वेश्यावृत्ति और समलैंगिकता से जुड़े वर्तमान कानूनी प्रावधानों पर अपनी असहमति व्यक्त करते हुए कहा कि इन विषयों पर समाज को गंभीरता से विचार करना चाहिए।राम मंदिर से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मौन को लेकर उनका व्यक्तिगत मानना है कि भविष्य में कोई बड़ा निर्णय सामने आ सकता है।रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी ने कहा कि "हमर पहुना" कार्यक्रम का उद्देश्य समाज, संस्कृति, साहित्य, शिक्षा और सार्वजनिक जीवन से जुड़े विशिष्ट व्यक्तित्वों को पत्रकारों के बीच संवाद के लिए आमंत्रित करना है, जिससे समसामयिक विषयों पर सार्थक चर्चा हो सके। उन्होंने देवकीनंदन ठाकुर का रायपुर प्रेस क्लब आगमन पर आभार व्यक्त किया।इस अवसर पर आध्यात्मिक गुरु एवं कथावाचक श्री देवकीनंदन ठाकुर जी का वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत शर्मा ,ठाकुर राम साहू, परमानंद वर्मा , संदीप पुराणिक ,राजेश मिश्रा ,मनीष वोरा, सुशील अग्रवाल, विजय मिश्रा,विजय श्रीवास्तव ,शकुंतला तरार , जावेद खान , के पी शुक्ला , कमलाकांत , व्यास पाठक, विनय घाटगे , विद्याभूषण ने स्वागत एवं अभिनंदन किया,।
- रायपुर । छत्तीसगढ़ में कुपोषण मुक्ति का संकल्प अब एक जन-आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। मुख्यमंत्री के मंशानुरूप और कलेक्टर के कुशल मार्गदर्शन में जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की संयुक्त पहल ने सारंगढ़ विकासखंड में उम्मीद की एक नई किरण जगाई है।हाल ही में आयोजित एक विशेष स्वास्थ्य शिविर के माध्यम से न केवल 30 कुपोषित बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, बल्कि उनके पूर्ण रूप से स्वस्थ होने तक की जिम्मेदारी भी उठाई गई है। यह कहानी शासकीय संकल्प और सामाजिक सहभागिता के उस बेहतरीन समन्वय की है, जो राज्य के लिए एक मिसाल बन रही है।अक्सर उत्सवों को औपचारिकताओं में मनाया जाता है, लेकिन आईएमए की जिला इकाई ने इस बार 'चिकित्सक दिवस' (Doctors' Day) को सेवा की नई परिभाषा दी। आईएमए के जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने ग्राम छुहीपाली के 15 कुपोषित बच्चों को गोद लेने का संवेदनशील निर्णय लिया। इन बच्चों के संपूर्ण इलाज, आवश्यक दवाइयों और विशेष पोषण आहार का पूरा खर्च अब एसोसिएशन द्वारा वहन किया जाएगा। शुक्रवार को सारंगढ़ विकासखंड में आयोजित इस विशेष शिविर में ग्राम छुहीपाली के 15 बच्चों सहित कुल 30 कुपोषित बच्चों की गहन स्वास्थ्य जांच की गई। जिला चिकित्सालय की शिशु रोग विशेषज्ञ ने बच्चों का बारीकी से परीक्षण किया। जांच के दौरान जिन बच्चों में गंभीर कुपोषण (SAM) के लक्षण पाए गए, उन्हें तत्काल पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में भर्ती कराने की सलाह दी गई, ताकि उन्हें चौबीसों घंटे चिकित्सकीय देखरेख मिल सके। यह अभियान केवल एक दिन के शिविर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए एक मुस्तैद फॉलो-अप प्लान तैयार किया गया है।स्थानीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हर सप्ताह बच्चों के वजन और शारीरिक वृद्धि (Growth Monitoring) की कड़ाई से निगरानी करेंगी। ठीक एक महीने बाद स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और आईएमए की संयुक्त टीम दोबारा बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करेगी, ताकि यह देखा जा सके कि बच्चों की सेहत में कितना सुधार हुआ है। कुपोषण के खिलाफ यह लड़ाई केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है। जब डॉक्टर्स और प्रशासन हाथ मिला लें, तो कोई भी बच्चा अस्वस्थ नहीं रहेगा।इस मानवीय पहल को जमीन पर उतारने में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO), ईएनटी विशेषज्ञ, जन औषधि केंद्र व आशा निकेतन के संचालक और एकीकृत बाल विकास परियोजना अधिकारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- रायपुर ।उप मुख्यमंत्री तथा कांकेर जिले के प्रभारी मंत्री श्री अरुण साव ने अपने कांकेर प्रवास के दौरान सरोना में नवनिर्मित तहसील कार्यालय भवन का लोकार्पण किया। उन्होंने कार्यालय के विभिन्न कक्षों का अवलोकन कर परिसर में पौधारोपण भी किया। सांसद श्री भोजराज नाग और विधायक श्री आशाराम नेताम भी इस दौरान उपस्थित थे।लोक निर्माण विभाग द्वारा 63 लाख 81 हजार रुपए की लागत से तहसील कार्यालय के नए भवन का निर्माण किया गया है। इस सर्वसुविधायुक्त भवन में 10 कक्ष हैं जहां विभिन्न शाखाओं का संचालन किया जाएगा। छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती शालिनी राजपूत, कांकेर जिला पंचायत की उपाध्यक्ष श्रीमती तारा ठाकुर, नगर पालिका के अध्यक्ष श्री अरुण कौशिक और जिला पंचायत के सी.ई.ओ. श्री हरेश मण्डावी सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक भी लोकार्पण कार्यक्रम में मौजूद थे।
- -ग्राम पंचायत जुंगेरा में वर्षों पुरानी मांग हुई पूरी, बुनियादी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण से बढ़ेगा ग्रामीणों का जीवन स्तररायपुर। ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करते हुए विकसित भारत जी राम जी के तहत प्रदेश के गांवों में विकास कार्यों को गति मिल रही है। इसी कड़ी में बालोद जिले की ग्राम पंचायत जुंगेरा में वर्षों से चली आ रही जलभराव की समस्या के समाधान के लिए पक्की नाली का निर्माण कराया जा रहा है। इस कार्य के पूरा होने से बरसात के दौरान जलजमाव, गंदगी और आवागमन की परेशानी से ग्रामीणों को स्थायी राहत मिलेगी, वहीं गांव में स्वच्छता और बेहतर जल निकासी व्यवस्था भी सुनिश्चित होगी।ग्राम पंचायत जुंगेरा की सरपंच श्रीमती नीलम कोठारी ने बताया कि गांव में लंबे समय से कच्ची नाली होने के कारण बरसात के दिनों में पानी गलियों और घरों तक पहुंच जाता था। इससे लोगों का जनजीवन प्रभावित होने के साथ घरेलू सामानों को भी नुकसान उठाना पड़ता था। पंचायत द्वारा कई वर्षों से इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे थे, जो अब साकार हो रहे हैं।उन्होंने कहा कि पक्की नाली के निर्माण से न केवल जल निकासी की व्यवस्था बेहतर होगी, बल्कि गांव में स्वच्छ वातावरण का निर्माण होगा और लोगों का जीवन भी अधिक सुविधाजनक बनेगा। ग्रामीणों में इस विकास कार्य को लेकर उत्साह का माहौल है। उनका कहना है कि वर्षों पुरानी समस्या का समाधान होने से बरसात के मौसम में होने वाली परेशानियों से हमेशा के लिए राहत मिलेगी।सरपंच श्रीमती नीलम कोठारी ने ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी सोच और विकासोन्मुखी नीतियों के कारण आज गांवों में ऐसे स्थायी और जनहितकारी विकास कार्य तेजी से धरातल पर उतर रहे हैं, जिससे ग्रामीणों के जीवन की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो रहा है।
- -29वीं किस्त से लाभान्वित हुईं हेमा सारथीरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित शासन की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बन रही है। योजना की 29वीं किस्त जारी होने के साथ ही जिले की हजारों महिलाओं की तरह जनपद पंचायत सूरजपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत ऊँचडीह की निवासी श्रीमती हेमा सारथी के खाते में भी एक हजार रुपये की सहायता राशि अंतरित की गई।श्रीमती हेमा सारथी ने बताया कि उन्हें प्रतिमाह योजना की राशि सीधे उनके बैंक खाते में प्राप्त होती है। मोबाइल पर राशि जमा होने का संदेश मिलते ही उन्हें आत्मविश्वास और संतोष का अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि पहले अपनी छोटी-छोटी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उन्हें परिवार के अन्य सदस्यों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब योजना से प्राप्त राशि से वे अपनी व्यक्तिगत आवश्यकताओं को स्वयं पूरा कर पा रही हैं।उन्होंने बताया कि नियमित आर्थिक सहायता मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और परिवार में उनकी सहभागिता भी अधिक सशक्त हुई है। योजना से प्राप्त राशि उनके लिए आर्थिक संबल साबित हो रही है तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में निरंतर प्रेरित कर रही है।श्रीमती हेमा सारथी ने कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना से महिलाओं को सम्मानपूर्वक अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करने का अवसर मिल रहा है तथा वे आत्मनिर्भरता की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रही हैं।
- -नक्सल हमले में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक विनोद चौबे के साथ 28 जवान हुए थे शहीद-वीर जवानों की शहादत और देश सेवा में दिए गए सर्वोच्च बलिदान के परिणामस्वरूप आज जिला पूर्णतः नक्सल मुक्त, क्षेत्र में शांति स्थापितरायपुर। 12 जुलाई 2009 को अविभाजित राजनांदगांव जिले के थाना मानपुर अंतर्गत कोरकोट्टी में नक्सलियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव स्वर्गीय श्री विनोद चौबे सहित कुल 29 जवान माओवादियों के हमले में शहीद हो गए थे।वीर शहीदों की सर्वोच्च शहादत को सम्मान देने आज 12 जुलाई 2026 को उनकी शहादत की 17 वीं पुण्यतिथि पर मोहला मानपुर अम्बागढ़ चौकी जिले के रक्षित केंद्र मोहला स्थित अमर जवान प्रतिमा स्थल पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। श्रद्धांजलि सभा में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नम्रता सिंह, कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री वाय.पी. सिंह, द्वितीय कमान अधिकारी आईटीबीपी 44 वीं वाहिनी पानाबरस श्री शरत कुमार त्रिपाठी, जिला पुलिस बल मोहला के अधिकारी, जवानों एवं जनप्रतिनिधियों ने पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान डीआरजी, आईटीबीपी एवं जिला पुलिस बल के अधिकारी-कर्मचारी तथा मोहला के ग्रामवासी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पत्रकार श्री अतुल कुमार श्रीवास्तव द्वारा 12 जुलाई 2009 को घटित कोरकोट्टी नक्सल अभियान में देश सेवा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सपूतों को समर्पित लेख 'कोरकोट्टी' का विमोचन कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री वाय.पी. सिंह एवं उपस्थित जनप्रतिनिधियों तथा अधिकारियों द्वारा किया गया। वीर शहीदों की स्मृति में रक्षित केंद्र मोहला में रक्तदान शिविर का आयोजन भी किया गया।
- रायपुर ।ढलती उम्र की लाचारी और अभावों के गहरे अंधकार में डूबा एक जीवन, जहाँ हर आती हुई बरसात सुकून के बजाय डर और बेचैनी लेकर आती थी। बस्तर जिले के जनपद पंचायत जगदलपुर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कुरन्दी में रहने वाली 72 वर्षीय बुजुर्ग महिला सोनामनी प्रभु के लिए जिंदगी सालों से एक दर्दनाक इम्तिहान बनी हुई थी।एक गरीब किसान परिवार में जन्मीं और ताउम्र मजदूरी की भट्टी में जलकर अपना पेट पालने वाली इस बेबस बुजुर्ग के पास सिर छुपाने के लिए केवल एक जर्जर, छोटी सी झोपड़ी थी। जब भी आसमान में काले बादल घिरते, सोनामनी का दिल कांप उठता था, क्योंकि छत से लगातार टपकता पानी उनके आंसुओं से मिल जाता था और कच्चा फर्श कीचड़ में तब्दील होकर नीचे दलदल जैसा गीला हो जाता था। उस हाड़ कँपाने वाली ठंड और सीलन भरे माहौल में, उम्र के इस आखिरी पड़ाव पर भूख और लाचारी से जूझना एक ऐसी मर्मान्तक पीड़ा थी, जिसे सोनामनी ने सालों तक खामोशी से सहा है। लेकिन नियति के इस क्रूर चक्र के बीच, 'प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)' उनके जीवन में दुखों के पहाड़ को चीरकर उम्मीद की एक नई किरण बनकर आई और उन्हें इस अंतहीन पीड़ा से हमेशा के लिए मुक्ति मिल गई।सोनामनी को इस जीवनदायिनी योजना की जानकारी स्थानीय ग्राम पंचायत के माध्यम से प्राप्त हुई थी। जब उन्होंने पंचायत की 02 कमरों वाली आवास सूची में अपना नाम शामिल होने की जानकारी मिली तो बरसों से कुचली हुई उनकी उम्मीदों को जैसे नए पंख मिल गए और उन्होंने बिना देर किए तुरंत अपना आवेदन जमा कर दिया, जिसके बाद उन्हें योजना के तहत कुल एक लाख 20 हजार रूपए की राशि स्वीकृत की गई। यह राशि उन्हें तीन अलग-अलग किस्तों में सुचारू रूप से प्राप्त हुई।निर्माण कार्य को बेहतर ढंग से पूरा करने के लिए आवास की कुल लागत एक लाख 45 हजार रूपए आई। स्वीकृत राशि के अतिरिक्त आवश्यक 25 हजार रूपए की वित्तीय व्यवस्था करने के लिए सोनामनी ने खुद और अपने परिवार के सदस्यों के साथ आवास निर्माण में मजदूरी का कार्य किया, जिसके तहत उन्हें मनरेगा से पूरे 90 दिनों का मजदूरी भुगतान प्राप्त हुआ। इसने उनकी अतिरिक्त आर्थिक जरूरत को बेहद आत्मनिर्भर तरीके से पूरा कर दिया। इस पूरे निर्माण कार्य की सबसे बड़ी विशेषता इसका शानदार प्रशासनिक समन्वय रहा। सामान्यतः ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण के दौरान सामग्री की उपलब्धता या तकनीकी अड़चनों का सामना करना पड़ता है, लेकिन यहाँ जनपद पंचायत स्तर पर तकनीकी सहायक, विकासखंड समन्वयक एवं ग्राम पंचायत सचिव ने लाभार्थी को पूरा सहयोग दिया।अधिकारियों की इस सक्रियता के चलते न सिर्फ तकनीकी मार्गदर्शन मिला, बल्कि निर्माण सामग्री भी न्यूनतम दरों पर उपलब्ध कराई गई, जिससे यह पक्का मकान बिना किसी व्यवधान के अत्यंत शीघ्रता से पूर्ण हो सका। आज सोनामनी अपने दो रूम, एक किचन और एक कमरे वाले नए पक्के मकान में बेहद खुश हैं और बारिश व धूप से पूरी तरह सुरक्षित जीवन यापन कर रही हैं। वर्षों के आंसुओं के बाद उनकी आँखों में आज जो मुस्कान है, उसके साथ उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार का कोटि-कोटि आभार व्यक्त किया है और अपने सपने के घरौंदे को साकार करने में सहयोग देने वालों के प्रति कृतज्ञता प्रकट की है।
- रायपुर । छत्तीसगढ़ शासन की डिजिटल पहल 'एग्रीस्टेक किसान पंजीयन' बस्तर अंचल के किसानों के लिए खेती-किसानी को सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने का एक बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। शुरुआत में तकनीकी दिक्कतों के कारण कुछ किसानों को पंजीयन में परेशानी जरूर हुई, लेकिन नारायणपुर जिला प्रशासन और राजस्व विभाग की तत्परता ने इस चुनौती को एक मिसाल में बदल दिया। प्रशासन की संवेदनशीलता के कारण अब अंदरूनी क्षेत्रों के किसान बिना किसी बाधा के समय पर खाद-बीज और अन्य कृषि सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं।ग्राम कुकड़ाझोर के निवासी किसान बीरसिंह पिता माहरू के लिए इस साल का खरीफ सीजन शुरुआत में चिंताओं भरा था। तकनीकी कारणों से उनका एग्रीस्टेक पंजीयन नहीं हो पा रहा था, जिसकी वजह से उन्हें सहकारी समिति से खाद और बीज मिलने में दिक्कत आ रही थी। खेती का समय निकला जा रहा था और बीरसिंह लगातार प्रयासों के बाद भी तकनीकी त्रुटि के कारण पंजीयन नहीं करा पा रहे थे।परेशान होकर बीरसिंह ने नारायणपुर तहसील कार्यालय का दरवाजा खटखटाया।अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल तकनीकी विशेषज्ञों से जांच कराकर त्रुटियों को दूर किया। कुछ ही समय में बीरसिंह का पंजीयन सफलतापूर्वक पूर्ण हो गया। श्री बीरसिंह ने कहा कि अगर प्रशासन समय पर मेरी मदद नहीं करता, तो इस साल मेरी पूरी खेती पिछड़ जाती। अधिकारियों की त्वरित पहल से मेरी चिंता दूर हो गई और अब मुझे समय पर खाद-बीज मिल गया है। यह राहत केवल बीरसिंह तक सीमित नहीं रही। डिजिटल पंजीयन की इस सुलभता का लाभ जिले के अन्य किसानों को भी मिला। ग्राम बोरण्ड के किसान वीरू भी इसी तरह की तकनीकी समस्या से जूझ रहे थे, जिसका प्रशासन ने त्वरित निराकरण किया। इसी तरह ग्राम कोचवाही के किसान सगराम पोटाई का पंजीयन भी प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण कराया गया, जिससे उन्हें समय पर कृषि इनपुट (खाद-बीज) मिल सका।एग्रीस्टेक जैसी आधुनिक डिजिटल व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य बिचौलियों को खत्म करना और सीधे किसानों तक लाभ पहुंचाना है। नारायणपुर जिले में तकनीकी समस्याओं का जिस तेजी से समाधान किया गया, वह यह साबित करता है कि यदि प्रशासन और किसानों के बीच बेहतर समन्वय हो, तो सुदूर वनांचल क्षेत्रों में भी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ जमीनी स्तर पर पहुँचाया जा सकता है।प्रशासन की इस मुस्तैदी से न केवल नारायणपुर के किसानों का डिजिटल प्रणालियों पर भरोसा बढ़ा है, बल्कि बस्तर में खेती को अधिक सशक्त, सरल और लाभकारी बनाने का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है।
- -कलेक्टर ने परीक्षा केन्द्रों का किया औचक निरीक्षणराजनांदगांव । छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा सूबेदार, उप निरीक्षक संवर्ग एवं प्लाटून कमांडर (प्रारंभिक) परीक्षा 2024 का जिले के विभिन्न परीक्षा केन्द्रों में आयोजन किया गया। कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने परीक्षा केन्द्रों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कलेक्टर ने निरीक्षण के दौरान परीक्षा केन्द्रों में अभ्यर्थियों के प्रवेश, पहचान सत्यापन, बैठक व्यवस्था, पेयजल, विद्युत, स्वच्छता एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। उन्होंने केन्द्राध्यक्षों एवं परीक्षा ड्यूटी में तैनात अधिकारियों को आयोग के दिशा-निर्देशों का पूर्णत: पालन करते हुए परीक्षा को निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने निर्देशित किया।कलेक्टर ने परीक्षा केन्द्रों में गोपनीयता बनाए रखने, प्रतिबंधित सामग्री पर प्रभावी निगरानी रखने तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता पर तत्काल नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी सतर्कता एवं निष्पक्षता के साथ करें, जिससे परीक्षा सुचारू रूप से संपन्न हो सके।उल्लेखनीय है कि जिले में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा सूबेदार, उप निरीक्षक संवर्ग एवं प्लाटून कमांडर (प्रारंभिक) परीक्षा 2024 का जिले के 7 परीक्षा केन्द्रों में सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक आयोजित की गई। जिला प्रशासन द्वारा परीक्षा के सफल संचालन हेतु सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूर्व से ही सुनिश्चित की गई थी।
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- आदर्श कृषि उपज मंडी राजनांदगांव प्रदेश की प्रमुख मंडियों में से एक : विधानसभा अध्यक्ष
- आदर्श कृषि उपज मंडी में किसानों और व्यापारियों की सुविधा के लिए आधुनिक व्यवस्थाएं उपलब्ध
- विकास कार्यों की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा
- फसल विविधीकरण को अपनाएं किसान
राजनांदगांव । विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने आज आदर्श कृषि उपज मंडी प्रांगण राजनांदगांव में 20 करोड़ 1 लाख 67 हजार रूपए की लागत के विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया। इस अवसर पर कृषि विकास एवं किसान कल्याण, आदिम जाति विकास, जैव प्रौद्योगिकी, मछली पालन एवं पशुधन विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम तथा सांसद श्री संतोष पाण्डेय विशेष रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम में आदर्श कृषि उपज मंडी समिति राजनांदगांव की मंडी निधि से 2 करोड़ 39 लाख 17 हजार रूपए के विकास कार्यों का लोकार्पण किया गया। वहीं राजनांदगांव विकासखंड की ग्राम पंचायतों में विभिन्न मदों से स्वीकृत 16 करोड़ 32 लाख 98 हजार रूपए की लागत के 181 विकास कार्यों का भूमिपूजन तथा 9 ग्राम पंचायतों में 1 करोड़ 29 लाख 52 हजार रूपए की लागत से निर्मित 18 विकास कार्यों का लोकार्पण किया गया। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह एवं मंत्री श्री रामविचार नेताम ने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से 13 क्लस्टर की 51 ग्राम पंचायतों के सरपंचों से संवाद कर विभिन्न विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी ली तथा आवश्यक निर्देश दिए। कार्यक्रम में धान की जगह अन्य फसल लेने वाले किसानों को अरहर और सोयाबीन बीज वितरण किया गया। अंत्योदय स्वरोजगार योजना अंतर्गत मिनीमाता महिला स्वसहायता समूह पेण्ड्री को व्यवसाय संचालित करने के लिए 1 लाख 10 हजार रूपए का चेक वितरण किया गया।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि मंडी निधि का उपयोग ग्रामीण अधोसंरचना के विकास में अधिक से अधिक किया जाना चाहिए, ताकि गांवों में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार हो और ग्रामीणों को इसका सीधा लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि आदर्श कृषि उपज मंडी राजनांदगांव प्रदेश की प्रमुख मंडियों में से एक है, जहां किसानों और व्यापारियों की सुविधा के लिए आधुनिक व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। यहां मॉल, सिनेमा, विश्राम गृह, बैंक, पोस्ट ऑफिस, धर्मकांटा, अनाज एवं सब्जी मंडी जैसी अनेक सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध हैं। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सिंह ने कहा कि राजनांदगांव के किसान फसल विविधीकरण की दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। धान के साथ-साथ मक्का एवं सोयाबीन जैसी कम पानी वाली फसलों की खेती अपनाने से किसानों की आय बढ़ेगी और जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि पंचायत भवन, सीसी रोड, सार्वजनिक भवन, खेल मैदान, बाउंड्री वॉल सहित अन्य निर्माण कार्य ग्रामीणों की सुविधा के लिए किए जा रहे हैं। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों से कहा कि विकास कार्यों की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य टिकाऊ एवं मानक अनुरूप होने चाहिए ताकि नागरिकों को लंबे समय तक उनका लाभ मिल सके।
कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ कृषि को टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि लगभग 20 करोड़ रूपए से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन जिले के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान खेती-किसानी और समृद्ध लोक संस्कृति से है, इसलिए इसे संरक्षित और अधिक समृद्ध बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने कहा। धान के साथ-साथ कम पानी और कम लागत वाली फसलों को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। अत्यधिक धान उत्पादन के कारण भू-जल स्तर में गिरावट, जल स्रोतों पर बढ़ते दबाव तथा रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरता और पर्यावरण प्रभावित हो रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के मार्गदर्शन में किसानों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार धान के स्थान पर अन्य फसलें लेने वाले किसानों को 15 हजार रूपए प्रति एकड़ आदान सहायता प्रदान कर रही है, ताकि किसान फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित हों।
मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि किसानों को खेती के साथ पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन, बकरी पालन, मुर्गी पालन एवं उद्यानिकी जैसी कृषि आधारित गतिविधियों को भी अपनाना चाहिए, जिससे उनकी आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित हों। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग की योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार कर किसानों को लाभान्वित किया जाए। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों को कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों के उत्कृष्ट मॉडल के रूप में विकसित करने कहा। यहां आधुनिक कृषि तकनीकों, जैविक खेती, डेयरी, मत्स्य पालन, उद्यानिकी तथा अन्य कृषि आधारित गतिविधियों का प्रदर्शन किया जाए, ताकि किसान नई तकनीकों को देखकर उन्हें अपने खेतों में अपनाने के लिए प्रेरित हों। उन्होंने कहा कि किसानों की सहभागिता और शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में कृषि और अधिक समृद्ध होगी तथा किसानों की आय में निरंतर वृद्धि होगी।
सांसद श्री संतोष पाण्डेय ने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए लगातार लोकार्पण, भूमि पूजन व शिलान्यास कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा विकसित भारत-जीरामजी (वीबी-जीरामजी) योजना के तहत ग्रामीण श्रमिकों को 125 दिनों का काम मिलेगा और ग्रामीण श्रमिकों को 300 रूपए की दर से भुगतान किया जाएगा। इस योजना के तहत ग्रामों में पौधरोपण, जल संरक्षण सहित अन्य कार्य किया जा सकता है। वीबी-जीरामजी योजना के तहत ग्राम के सरपंच, पंच, पटेल एवं ग्रामीण मिलकर गांव के विकास के लिए निर्णय ले सकेंगे। उन्होंने किसानों को ग्रीष्म काल में धान की खेती नहीं करने कहा। उन्होंने जल संरक्षण को बढ़ावा देने कहा। उन्होंने कहा कि किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। उन्होंने किसानों से देश के राजस्व को अन्य देशों में जाने से रोकने तथा देश को कृषि उत्पादन क्षेत्र में स्वावलंबी बनाने के लिए धान के साथ दलहन, तिलहन सहित अन्य फसल लेने कहा।
जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण वैष्णव ने कहा कि राज्य सरकार के नेतृत्व में राजनांदगांव जिले की ग्राम पंचायतों में विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों में विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन से ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा और जनसामान्य को इसका सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि गांवों में सड़क, भवन एवं अन्य अधोसंरचनात्मक सुविधाओं के विकास के साथ-साथ शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। किसान, महिलाएं एवं ग्रामीण परिवार विभिन्न योजनाओं से सशक्त हो रहे हैं और ग्राम पंचायतें आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों एवं ग्राम पंचायतों को विकास कार्यों के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ग्राम पंचायतों का समग्र विकास ही विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत की मजबूत नींव है।
सीईओ जिला पंचायत सुश्री सुरूचि सिंह ने कार्यक्रम के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर अध्यक्ष छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल श्री नीलू शर्मा, जिला सहकारी केन्द्र बैंक मार्यादित के अध्यक्ष श्री सचिन बघेल, जनपद पंचायत राजनांदगांव की अध्यक्ष श्रीमती प्रतिमा चंद्राकर, अध्यक्ष राजगामी संपदा न्यास श्रीमती पूर्णिमा साहू, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती किरण साहू, श्री खूबचंद पारख, श्री कोमल सिंह राजपूत, श्री संतोष अग्रवाल, श्री रमेश पटेल, श्री सौरभ कोठारी, श्री राजेश श्यामकर, वनमंडलाधिकारी श्री आयुष जैन, अपर कलेक्टर श्री सीएल मारकण्डेय सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, किसान उपस्थित थे। पूर्व सांसद श्री अभिषेक सिंह ग्राम पंचायत कोपेडीह से वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से जुड़े रहे। - -अंशधारी सदस्यता से किसानों की भागीदारी होगी और मजबूत : उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा-भोरमदेव शक्कर कारखाना में 4 हजार 691 किसानों को मिला अंशधारी सदस्यता का अधिकार-भोरमदेव शक्कर कारखाना से जुड़ी किसानों की वर्षों पुरानी मांग हुई पूरीरायपुर । भोरमदेव सहकारी शक्कर उत्पादक कारखाना से जुड़े 4 हजार 691 गन्ना उत्पादक किसानों के लिए रविवार ऐतिहासिक दिन बन गया। वर्षों से अंशधारी सदस्य बनने की प्रतीक्षा कर रहे इन किसानों को नवीन अंशधारी सदस्य बनाते हुए उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने शेयर प्रमाण पत्र वितरित किए गए। कवर्धा के पीजी कॉलेज डोम में आयोजित कृषक संगोष्ठी एवं प्रमाण पत्र वितरण समारोह में उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने किसानों को प्रमाण पत्र सौंपते हुए कहा कि यह पहल किसानों को सहकारिता की मजबूत भागीदारी से जोड़ते हुए उनकी आय बढ़ाने और क्षेत्र में गन्ना उत्पादन को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि भोरमदेव शक्कर कारखाना में गन्ना बेचने वाले ऐसे 4 हजार 691 किसानों को आज शेयर प्रमाण पत्र दिए गए, जो अब तक अंशधारी सदस्य नहीं थे। उन्होंने कहा कि इन किसानों ने बिना शेयरधारक बने भी फैक्ट्री को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसी योगदान को सम्मान देते हुए उन्हें आज कारखाना का अंशधारी सदस्य बनाया गया है। उन्होंने बताया कि पिछले पेराई सत्र में फैक्ट्री में 2 लाख 55 हजार 818 मीट्रिक टन गन्ने की पेराई हुई थी। वर्तमान में फैक्ट्री के लगभग 23 हजार शेयरधारक हैं। वहीं, 4,691 गैर-अंशधारी किसानों ने भी गन्ना विक्रय किया था। इन्हीं किसानों को अब शेयर प्रमाण पत्र देकर कारखाना की सदस्यता प्रदान की गई है।उप मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फैक्ट्री किसानों की अपनी फैक्ट्री है और इसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी किसानों की है। उन्होंने कहा कि यदि किसान संकल्प लेकर इस वर्ष साढ़े चार लाख मीट्रिक टन गन्ने की आपूर्ति करेंगे, तो फैक्ट्री और मजबूत होगी। इससे किसानों को एफआरपी का समय पर भुगतान, बेहतर रिकवरी और भविष्य में अधिक लाभांश मिलने की संभावना भी बढ़ेगी। उन्होंने गन्ना बोनस बढ़ाने के लिए भी सकारात्मक प्रयास किए जाने की बात कही।उप मुख्यमंत्री ने किसानों से अधिक से अधिक गन्ना उत्पादन करने, नए किसानों को अनुबंध के लिए प्रेरित करने और फैक्ट्री को मजबूत बनाने में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि नवीन अंशधारी सदस्य बनने से किसानों को अब भोरमदेव सहकारी शक्कर उत्पादक कारखाना में नियमित रूप से गन्ना विक्रय करने के साथ-साथ अंशधारी सदस्यों को मिलने वाली अन्य सुविधाओं का भी लाभ मिल सकेगा। वहीं, कारखाना को भी गन्ना पेराई के लक्ष्य की पूर्ति के लिए पर्याप्त गन्ना उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी, जिससे भविष्य में उत्पादन क्षमता और संचालन को और मजबूती मिलेगी l प्राकृतिक खेती पर जोर देते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती के तीन प्रमुख स्वरूप रासायनिक, जैविक और प्राकृतिक खेती हैं। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती में रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता नहीं होती और छत्तीसगढ़ के कई क्षेत्रों में इसके सफल प्रयोग हो रहे हैं। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक एवं जैविक खेती की ओर बढ़ने का आह्वान किया ताकि उनके उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सकें।श्री शर्मा ने बताया कि जैविक उत्पादों के निर्यात के लिए आवश्यक एनपीओपी प्रमाणन की जानकारी किसानों को उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 17, 18 और 19 जुलाई को कवर्धा विधायक कार्यालय में विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया जाएगा। उन्होंने किसानों से इस अवसर का लाभ उठाने की अपील करते हुए कहा कि कबीरधाम के कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा। क्षेत्र के गन्ना उत्पादक किसानों द्वारा लंबे समय से नए अंशधारी सदस्य बनाए जाने की मांग की जा रही थी। इस मांग को ध्यान में रखते हुए उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कारखाना प्रबंधन को योजना तैयार करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद जिला प्रशासन, कारखाना प्रबंधन, क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों तथा जिले के दोनों किसान संघों के प्रतिनिधियों ने मिलकर कार्ययोजना तैयार की। इसी योजना के तहत पेराई सत्र 2025-26 में गैर-अंशधारी किसानों से भी गन्ने की खरीदी की गई और उन्हें नवीन अंशधारी सदस्य बनाने का निर्णय लिया गया।कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ कृषक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष श्री सुरेश चंद्रवंशी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, उपाध्यक्ष श्री कैलाश चंद्रवंशी सहित कारखाने के प्रबंध संचालक श्री जी.एस. शर्मा, महाप्रबंधक श्री अंकित मरकाम, किसान संघों के प्रतिनिधिगण, कारखाना के अंशधारी सदस्य, कृषकगण अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।
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राजनांदगांव । विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने राजनांदगांव प्रवास के दौरान स्पीकर हाऊस में 30 जरूरत मंद व्यक्तियों एवं संस्थाओं को 13 लाख 5 हजार रूपए की सहायता राशि केे चेक का वितरण किया। जिसके अंतर्गत वार्ड नंबर 5 मोतीपुर निवासी चंचल निर्मलकर को उच्च शिक्षा अध्ययन के लिए 25 हजार रूपए, वार्ड नंबर 32 तेलीपारा निवासी मोहम्मद शमिम बदगुजर को मुस्लिम सामुहिक विवाह कार्यक्रम के लिए 1 लाख रूपए, वार्ड नंबर 39 कौरिनभांठा निवासी गोविंद चिन्दा को बुढ़ा देव मूर्ति स्थापना के लिए 1 लाख रूपए, वार्ड नंबर 42 बसंतपुर निवासी अजू राम साहू को ब्रेन हेमरेज के उपचार के लिए 1 लाख रूपए, ग्राम सोमनी निवासी सरोज निषाद, ईश्वर दास व पन्ना लाल को आकाशी बिजली से उनके आश्रित की मृत्यु होने पर 50-50 हजार रूपए वार्ड नंबर 31 जनता कॉलोनी निवासी सागर सोनी को ब्रेन स्ट्रोक के उपचार के लिए 50 हजार रूपए, वार्ड नंबर 31 लखोनी निवासी चुरामन मंडावी को इलाज के लिए 50 हजार रूपए, ग्राम भंवरमरा निवासी मनसूख दास साहू को कैंसर के इलाज के लिए 50 हजार रूपए, ग्राम देवादा निवासी जितेश्वर प्रसाद को दुर्घटना ऑपरेशन के लिए 50 हजार रूपए, वार्ड नंबर 35 चौखडिय़ा पारा निवासी डॉली साहू को जेनेटिक बीमारी के इलाज के लिए 50 हजार रूपए, वार्ड नंबर 38 बसंतपुर निवासी शोभा देवांगन को कैंसर के इलाज के लिए 50 हजार रूपए, वार्ड नंबर 50 सिंगदई मोहारा निवासी टीकम प्रजापति को कैसर के इलाज के लिए 50 हजार रूपए, वार्ड नंबर 51 हरदी निवासी खेमलाल को हैदराबाद में ऑख का आपरेशन के लिए 50 हजार रूपए, ग्राम बरगा निवासी तीरख कुमार को सड़क दुर्घटना में उपचार के लिए 50 हजार रूपए, राजनांदगांव निवासी जम्मन देवांगन को हनुमान जन्मोत्सव के लिए 50 हजार रूपए, ग्राम धामनसरा के नव स्टार फैंन नवयुवक मंडल धामनसरा को बर्तन के लिए 40 हजार रूपए, वार्ड नंबर 22 सहदेव नगर निवासी संगीता वैष्णव को पुत्र की मृत्यु होने पर 25 हजार रूपए, बसंतपुर निवासी झम्मन साहू को आगजनी से हानि होने पर 30 हजार रूपए, वार्ड नंबर 22 सहदेव नगर के श्री सेवा समिति सहदेव नगर राजनांदगांव को वाद्ययंत्र के लिए 30 हजार रूपए, ग्राम गठुला निवासी कुन्दन साहू को क्रिकेट प्रतियोगिता के लिए 25 हजार रूपए, ग्राम जंगलपुर निवासी रोशन साहू को पति की मृत्यु होन पर बच्चों की शिक्षा के लिए 20 हजार रूपए, वार्ड नंबर 42 बसंतपुर निवासी राम कुमार निर्मलकर को हृदय रोग की उपचार के लिए 20 हजार रूपए, ग्राम बाटगांव निवासी चंदू लाल शाह को सड़क दुर्घटना में आश्रित की मृत्यु होने पर 20 हजार रूपए, राहुल नगर निवासी ममता कोलहाटाकार को हृदय रोग के उपचार के लिए 20 हजार रूपए, गया नगर दुर्ग निवासी संतोष यादव को पति के टीबी के इलाज के लिए 30 हजार रूपए, ग्राम इंद्रावानी निवासी गौरी टांडेकर को नौ माह के बच्चे का मल द्वार ऑपरेशन के लिए 30 हजार रूपए, ग्राम खुटेरी निवासी झम्मनलाल यादव को प्लेट लेट के उपचार के लिए 20 हजार रूपए, ग्राम भंवरमरा निवासी हेमचंद पटेल को दुर्घटना के उपचार के लिए 25 हजार रूपए सहायता राशि केे चेक का वितरण किया।
- रायपुर ।छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वन विभाग ने मुस्तैदी दिखाते हुए रिकॉर्ड समय में तेंदूपत्ता संग्रहण का भुगतान पूरा कर लिया है। अब तक जिले के 42 हजार 178 संग्राहकों के बैंक खातों में कुल 40.72 करोड़ रुपये की राशि सीधे (Direct Benefit Transfer - DBT) ट्रांसफर की जा चुकी है।वन विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में सुकमा जिले के कुल 46 हजार 620 तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए कुल 46.04 करोड़ रुपये के भुगतान का प्रावधान किया गया है। विभागीय तत्परता के चलते इसमें से 88.45 प्रतिशत राशि का भुगतान 11 जुलाई तक सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। जिला प्रशासन और वन विभाग का लक्ष्य है कि शेष बचे पात्र संग्राहकों के खातों में भी जुलाई माह के अंत तक शत-प्रतिशत राशि जमा करा दी जाए। सुकमा के जिला वन मंडलाधिकारी (DFO) श्री अक्षय भोंसले ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष जिले में कुल 83 हजार 710 मानक बोरा तेंदूपत्ता का संग्रहण किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरी भुगतान प्रक्रिया को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से अंजाम दिया गया है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है और पूरी पारदर्शिता के साथ राशि सीधे ग्रामीणों के खातों में पहुंची है।तेंदूपत्ता से होने वाली यह आय सुकमा के वनाश्रित और ग्रामीण परिवारों की आजीविका का सबसे महत्वपूर्ण आधार है। मानसून के इस सीजन में समय पर पैसा मिलने से स्थानीय ग्रामीणों को बेहद मदद मिल रही है। ग्रामीण परिवार खरीफ की फसल के लिए समय पर उन्नत बीज, उर्वरक (खाद) और आवश्यक कृषि उपकरण खरीद पा रहे हैं। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के कारण इस राशि से बच्चों की स्कूल फीस, किताबें, कॉपियां और यूनिफॉर्म (गणवेश) जैसी जरूरी आवश्यकताएं आसानी से पूरी हो रही हैं। करोड़ों रुपये की राशि सीधे ग्रामीण क्षेत्र में पहुंचने से सुकमा के स्थानीय बाजारों और छोटे कारोबारियों के व्यापार को भी जबरदस्त बढ़ावा मिला है।वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बचे हुए हितग्राहियों के दस्तावेजों का सत्यापन कर भुगतान प्रक्रिया को तेजी से अंतिम रूप दिया जा रहा है। समयबद्ध और पारदर्शी व्यवस्था से शासन के प्रति वनांचल के ग्रामीणों का विश्वास और मजबूत हुआ है।



























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