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- -राजस्व, वन और पुलिस विभाग की संयुक्त कार्रवाई में ट्रक व क्रेन जब्त, फर्जी वन मुहर का हुआ खुलासारायपुर। रेंगाखार तहसील के ग्राम भीमभौरी में आम के पेड़ों की अवैध कटाई और लकड़ी के अवैध परिवहन के मामले में जिला प्रशासन ने त्वरित और सख्त कार्रवाई की है। राजस्व, वन एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए लकड़ी से भरा एक ट्रक और एक क्रेन जब्त कर पुलिस की सुपुर्दगी में सौंप दिया है।जानकारी के अनुसार, नायब तहसीलदार श्री प्रेमनारायण साहू को ग्राम भीमभौरी में अवैध वृक्ष कटाई की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही वे राजस्व अमले के साथ मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान खसरा क्रमांक 108 में 12 आम के पेड़ अवैध रूप से कटे हुए पाए गए। कटी हुई लकड़ी को परिवहन के लिए तैयार किया जा रहा था।निरीक्षण के दौरान लकड़ी पर वन विभाग की मुहर लगी दिखाई दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग को बुलाया गया। मौके पर पहुंचे डिप्टी रेंजर श्री भूपेंद्र कुमार ने जांच की, जिसमें यह मुहर फर्जी पाई गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि अवैध लकड़ी को वैध दिखाने के लिए वन विभाग की नकली सील का उपयोग किया गया था।प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला कि कटे हुए आम के लट्ठों को मध्य प्रदेश के इंदौर भेजने की तैयारी थी। प्रशासन की समय पर कार्रवाई से अवैध परिवहन को रोक दिया गया।वन विभाग, राजस्व विभाग, पुलिस और स्थानीय ग्रामीणों की मौजूदगी में पंचनामा तैयार कर जब्ती की कार्रवाई की गई। मामले की विस्तृत जांच जारी है। अवैध वृक्ष कटाई, फर्जी सील के उपयोग और लकड़ी तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और अवैध वृक्ष कटाई तथा लकड़ी तस्करी पर रोक लगाने के लिए आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
- -राज्य में 30 जून की स्थिति में 13.16 लाख मीट्रिक टन से अधिक खाद का भण्डारण-किसानों को नहीं होगी डीएपी की कमी, छत्तीसगढ़ को माह जुलाई में 46,500 टन डीएपी सप्लाई की आपूर्ति प्राप्त-पिछले साल की तुलना में भंडारण 1.08 लाख मीट्रिक टन अधिक- लगभग 7.28 लाख मीट्रिक टन का किसानों को हो चुका है वितरण, गत वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि-प्रदेश में 5.88 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरकों का शेष भण्डार उपलब्ध-वर्तमान में उपलब्ध शेष भण्डार आगामी मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त, यह सरकार की दूरदर्शी योजना एवं मजबूत आपूर्ति प्रबंधन का परिचायकरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को समय पर कृषि आदान उपलब्ध कराने के अपने संकल्प पर लगातार प्रभावी ढंग से कार्य कर रही है। खरीफ वर्ष 2026 के लिए 30 जून तक की स्थिति में 13 लाख 16 हजार 506 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण किया जा चुका है। यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री की पहल पर छत्तीसगढ़ को माह जुलाई में 46,500 टन डीएपी सप्लाई की आपूर्ति प्राप्त हुई है, जो सामान्य से अधिक है। इससे अब किसानों के लिए पर्याप्त डीएपी उपलब्ध हो सकेगा। बता दंे कि अब तक भंडारित कुल रासायनिक खाद पिछले साल इसी अवधि में भंडारित रासायनिक खाद की तुलना में 1.08 लाख मीट्रिक टन अधिक है।वहीं प्रदेश में रासायनिक उर्वरकों के भण्डारण और वितरण की स्थिति यह दर्शाती है कि सरकार ने खेती के मौसम से पहले ही किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने की मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित की है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण खाद उपलब्ध कराना केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि किसान परिवारों की समृद्धि और प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।बता दें कि केन्द्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के लिए खरीफ वर्ष 2026 में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके विरुद्ध 30 जून की स्थिति में 13 लाख 16 हजार 506 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण किया जा चुका है। इनमें यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी तथा एसएसपी जैसे सभी प्रमुख उर्वरक शामिल हैं। यह स्थिति इस बात का प्रमाण है कि किसानों को बुआई के दौरान खाद की उपलब्धता में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए सरकार ने पहले से व्यापक तैयारी की है।उल्लेखनीय है कि प्रदेश के किसानों को अभी तक 7 लाख 27 हजार 833 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है। यह वितरण किसानों की वास्तविक मांग के अनुरूप लगातार किया जा रहा है। साथ ही प्रदेश में 5 लाख 88 हजार 673 मीट्रिक टन उर्वरकों का शेष भण्डार उपलब्ध है, जिससे आगामी दिनों में भी किसानों को निर्बाध रूप से खाद उपलब्ध कराई जा सकेगी।यदि गत वर्ष की समान अवधि से तुलना करें तो इस वर्ष की उपलब्धियां और भी उत्साहजनक हैं। 30 जून 2025 तक प्रदेश में 12 लाख 25 हजार 929 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण हुआ था, जबकि इस वर्ष यह बढ़कर 13 लाख 16 हजार 506 मीट्रिक टन हो गया है। अर्थात लगभग 90 हजार 577 मीट्रिक टन अधिक खाद का भण्डारण सुनिश्चित किया गया है।इसी प्रकार, गत वर्ष 30 जून तक 7 लाख 66 हजार 161 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया गया था। इस वर्ष अब तक लगभग 7.28 लाख मीट्रिक टन खाद किसानों तक पहुंच चुकी है। प्रदेश में वर्तमान में उपलब्ध 5.88 लाख मीट्रिक टन से अधिक का शेष भण्डार आगामी मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है और यह सरकार की दूरदर्शी योजना एवं मजबूत आपूर्ति प्रबंधन का परिचायक है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के किसी भी किसान को खाद के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। यही कारण है कि राज्य सरकार खाद की उपलब्धता, भण्डारण, परिवहन एवं वितरण की सतत निगरानी कर रही है, जिससे खरीफ सीजन में किसानों को समय पर आवश्यक उर्वरक उपलब्ध हो रहे हैं।
- - मीडिया प्रतिनिधियों को मिला हरिद्वार कुंभ का आमंत्रणरायपुर /उत्तराखंड के मुख्यमंत्री निवास (देहरादून) में आज छत्तीसगढ़ के मीडिया प्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों की उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से एक अत्यंत गरिमामय और सौजन्य भेंट हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री धामी ने छत्तीसगढ़ की मीडिया टीम और अधिकारियों के साथ अपने अनुभव साझा किए और उत्तराखंड के बहुआयामी विकास, सांस्कृतिक धरोहर तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किए जा रहे अभूतपूर्व कार्यों की जानकारी दी।'विकास भी, विरासत भी': क्षेत्रीय प्राधिकरणों से संवर रहा है उत्तराखंडमीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार "विकास भी, विरासत भी" के मूल मंत्र पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि नैनीताल, गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों के लिए अलग-अलग विकास प्राधिकरणों का गठन कर उनके विकास के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य इन क्षेत्रों का संतुलित सामाजिक, आर्थिक और नैसर्गिक विकास करना है, ताकि यहां की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखते हुए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जा सके।उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री धामी ने जोर देकर कहा कि उत्तराखंड ऋषियों, मुनियों और संतों की पावन तपोस्थली है। इस देवभूमि की आध्यात्मिक पहचान को संभालना हम सभी का परम दायित्व है। उन्होंने नैसर्गिक संपदा (प्राकृतिक संसाधनों) के संरक्षण पर विशेष बल दिया, ताकि भविष्य में आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और समृद्ध पर्यावरण संजोकर रखा जा सके।लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत करने में छत्तीसगढ़ सरकार की भूमिका अनुकरणीयसंवाद के दौरान मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की दूरगामी सोच की जमकर सराहना की। उन्होंने सीएम श्री साय की मंशानुरूप इस महत्वपूर्ण भ्रमण कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह और संयुक्त सचिव सह आयुक्त जनसंपर्क श्री रजत बंसल को विशेष रूप से बधाई दी।श्री धामी ने इस बात को रेखांकित किया कि देश के लोकतंत्र के चौथे स्तंभ (मीडिया) की स्वतंत्रता को अक्षुण्ण रखने और पत्रकार कल्याण से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी राज्य रहा है। अधिकारियों के कुशल नेतृत्व में ऐसे अंतर्राज्यीय भ्रमणों से दोनों राज्यों के बीच वैचारिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को एक नया आयाम मिलता है।अगले वर्ष हरिद्वार कुंभ के लिए विशेष आमंत्रणभेंट के सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने छत्तीसगढ़ के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों के मीडिया दल को अगले वर्ष हरिद्वार में आयोजित होने वाले भव्य महाकुंभ के लिए सस्नेह आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री श्री धामी ने एक बड़ा दृष्टिकोण साझा करते हुए कहा कि कुंभ के पावन अवसर पर देश के सभी राज्यों के मीडिया प्रतिनिधियों को एक-एक अवसर दिया जाना चाहिए।मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि इस पहल से देश भर की मीडिया देवभूमि की पावन तपोभूमि, आध्यात्मिक ऊर्जा और वहां की विश्वस्तरीय व्यवस्थाओं को अपनी आँखों से देख सकेगी और इन अद्भुत अनुभवों को अपने-अपने राज्यों की जनता तक पहुँचा सकेगी।एक अनूठा संगमछत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, खनिज व नैसर्गिक संपदा और उत्तराखंड की हिमालयी दिव्यता व आध्यात्मिक चेतना के बीच हुआ यह संवाद आने वाले समय में अंतर्राज्यीय समन्वय और राष्ट्रीय एकता का एक बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरेगा।इस भ्रमण दल में मुख्यमंत्री श्री धामी से मिलने वालों में दुर्ग,रायपुर,कोरबा,जगदलपुर,बिलासपुर,राजनांदगांव,कोरिया और धमतरी जिले के मीडिया प्रतिनिधी और छत्तीसगढ़ जनसंपर्क संचालनालय के अधिकारियों के साथ उत्तराखंड के सूचना एवं जनसंपर्क के निदेशक श्री बंशीधर तिवारी,मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री पांडे,संयुक्त संचालक श्री के.एस. चौहान सहित संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
- -महंगी कोचिंग की चिंता खत्म: जिला प्रशासन की इस मुहिम से संवरेंगे सैकड़ों होनहारों के सपने, बेसिक फाउंडेशन मजबूत करने पर जोररायपुर। धमतरी जिले के प्रतिभाशाली और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं के सपनों को अब संसाधनों की कमी नहीं रोक पाएगी। जिला प्रशासन ने एक बेहद सराहनीय और दूरदर्शी कदम उठाते हुए बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय (BCS कॉलेज) में "पहल" कार्यक्रम का शुभारंभ किया है। इस विशेष योजना के तहत जिले के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए पूरी तरह निःशुल्क (Free) कोचिंग दी जाएगी। इस अवसर पर विद्यार्थियों के सही मार्गदर्शन के लिए 'युवा' नामक एक विशेष पुस्तक का विमोचन भी किया गया।कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए धमतरी कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने इसे युवाओं के भविष्य निर्माण के लिए एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने छात्र-छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य उन होनहार युवाओं को आगे बढ़ने के समान अवसर देना है, जो आर्थिक तंगी के कारण महंगी कोचिंग संस्थानों का खर्च नहीं उठा पाते। इस निःशुल्क कोचिंग के जरिए विद्यार्थियों का बेसिक फाउंडेशन मजबूत होगा, जिससे वे हर प्रतियोगी परीक्षा में सफलता का परचम लहरा सकेंगे।कलेक्टर ने बदलते कॉम्पिटिशन के इस दौर में सफलता के लिए नियमित अध्ययन, कड़े अनुशासन और सही मार्गदर्शन को सबसे जरूरी चाबी बताया और छात्र-छात्राओं से पूरी लगन के साथ मेहनत करने की अपील की। प्रशासन की यह मुहिम केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि छात्रों की पूरी तैयारी को व्यवस्थित और परिणामोन्मुख बनाने के लिए एक मुकम्मल खाका तैयार किया गया है।कोचिंग में शामिल होने वाले सभी विद्यार्थियों को बेहतरीन बुक्स और स्टडी मटेरियल मुफ्त दिया जाएगा। तैयारी के स्तर को जांचने और उसमें सुधार करने के लिए समय-समय पर टेस्ट आयोजित किए जाएंगे। छात्रों के प्रदर्शन की निरंतर समीक्षा की जाएगी, ताकि उनकी कमजोरियों को पहचान कर उन्हें समय पर सुधारा जा सके। इस भव्य शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, बीसीएस कॉलेज के प्राचार्य, उप संचालक पंचायत, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास, सहायक संचालक कौशल विकास, युवाओं को प्रशिक्षित करने वाले जिले के युवा मार्गदर्शक सहित महाविद्यालय के प्राध्यापक और भारी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।जिला प्रशासन की इस अनूठी 'पहल' से धमतरी के सैकड़ों युवाओं को न सिर्फ एक बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलेगा, बल्कि सरकारी सेवा में जाकर देश-प्रदेश की सेवा करने के उनके सपनों को एक नई और मजबूत उड़ान मिल सकेगी।
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*बैंकों को आवेदन बढ़ाने एवं लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण पर दिया जोर*
रायपुर/ कलेक्टर डॉ गौरव सिंह के निर्देशानुसार प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन एवं प्रगति की समीक्षा के लिए जिला पंचायत सीईओ श्री कुमार बिश्वरंजन की अध्यक्षता में वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से बैठक आयोजित की गई। जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित बैठक में सीएसपीडीसीएल के अधिकारियों एवं जिले के सभी बैंकों के नोडल अधिकारियों ने सहभागिता की।बैठक में योजना की बैंकवार प्रगति की समीक्षा की गई। सीईओ श्री बिश्वरंजन ने सभी बैंकों को स्वयं स्रोत आवेदनों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बैंक अधिक से अधिक पात्र हितग्राहियों तक पहुंच बनाकर आवेदन प्राप्त करें तथा योजना के प्रचार प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाएं।जिला पंचायत सीईओ ने सभी बैंकों को प्रगति में सुधार लाने, लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने तथा स्वीकृति प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही सभी संबंधित अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर योजना के निर्धारित लक्ष्यों की समयबद्ध पूर्ति सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।जिला पंचायत सीईओ ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। इसके सफल क्रियान्वयन के लिए सभी संबंधित विभाग एवं बैंक गंभीरता एवं सक्रियता के साथ कार्य करें।इस अवसर पर एलडीएम श्री मोहम्मद मोफिज सहित अन्य अधिकारी वीसी के माध्यम से जुड़ें रहे। -
*दिव्यांग श्री नंद किशोर टंडन को मिली बैटरी चालित ट्राइसायकल, आवागमन हुआ सुगम*
रायपुर/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में संचालित मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जा रहा है। इसी क्रम में दिव्यांग श्री नंद किशोर टंडन को बैटरी चालित ट्राइसायकल उपलब्ध कराकर उनकी आवागमन सम्बन्धी समस्या का समाधान किया गया।विकासखंड आरंग के ग्राम निवारी के निवासी श्री टंडन 80 प्रतिशत दिव्यांग हैं जिसके कारण उन्हें दैनिक आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। अपनी समस्या के समाधान के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत प्राप्त होने के बाद समाज कल्याण विभाग द्वारा प्रकरण का परीक्षण कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करते हुए उन्हें बैटरी चालित ट्राइसायकल प्रदान की गई।बैटरी चालित ट्राइसायकल मिलने से अब श्री टंडन के लिए दैनिक आवागमन तथा अन्य आवश्यक कार्यों का संचालन पहले की अपेक्षा अधिक सहज हो गया है। इससे उनकी आत्मनिर्भरता बढ़ी है और जीवन की गुणवत्ता में भी सकारात्मक सुधार आया है।श्री टंडन ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से उनकी समस्या का त्वरित निराकरण हुआ, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली। - -नैनो यूरिया अपनाकर श्री गजानंद सिंह सिदार ने बढ़ाया उत्पादन और घटाई लागतसक्ती । कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का बढ़ता उपयोग किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रहा है। नैनो उर्वरकों के उपयोग से किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर खेती को अधिक लाभकारी बना रहे हैं। जिला सक्ती के विकासखंड सक्ती अंतर्गत ग्राम अचानकपुर के प्रगतिशील किसान श्री गजानंद सिंह सिदार इसका प्रेरणादायक उदाहरण हैं। श्री गजानंद सिंह सिदार ने पिछले वर्ष से अपनी धान की फसल में नैनो यूरिया का उपयोग शुरू किया। आधुनिक कृषि तकनीक पर विश्वास करते हुए उन्होंने पारंपरिक उर्वरकों के साथ नैनो यूरिया को अपनाया, जिसके सकारात्मक परिणाम उन्हें प्राप्त हुए। उनका कहना है कि नैनो यूरिया के उपयोग से फसल की वृद्धि बेहतर हुई तथा धान की अच्छी गुणवत्ता प्राप्त हुईं, जिससे उत्पादन में वृद्धि हुई। उन्होंने बताया कि नैनो यूरिया के उपयोग से रासायनिक उर्वरकों पर होने वाला खर्च भी कम हुआ, जिससे खेती की लागत घटी और आर्थिक लाभ बढ़ा। बेहतर परिणाम मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और वे क्षेत्र के अन्य किसानों को भी नैनो यूरिया अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। श्री गजानंद सिंह सिदार का मानना है कि आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग कर किसान उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खेती की लागत को भी नियंत्रित कर सकते हैं। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री एवं जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया।
- -धान की खेती रोपा पद्धति के बजाय सीधी बुवाई पर दे विशेष जोर-डीएसआर तकनीक से 20 प्रतिशत पानी की होती है बचत, प्रति एकड़ लगभग 5,000 रुपये की लागत कम आती है तथा फसल 12 से 15 दिन पहले हो जाती है तैयार-उच्चहन भूमि में दलहनी-तिलहनी अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, सोयाबीन जैसी फसलों की खेती अपनाने की सलाहरायपुर। खरीफ सीजन 2026 में अल-नीनो के संभावित प्रभाव के कारण मानसून के देर से आने, जल्दी समाप्त होने तथा फसल अवधि के दौरान लंबे अंतराल तक वर्षा नहीं होने (खण्ड वर्षा) एवम् अल्प की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के किसानों के लिए सामान्य आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की है। इस कार्ययोजना का उद्देश्य कम वर्षा की स्थिति में भी किसानों की फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, उत्पादन बनाए रखना तथा खेती की लागत कम करना है।कृषि विभाग द्वारा किसानों को कम एवं मध्यम अवधि में पकने वाली फसलों एवं किस्मों का चयन करने की सलाह दी गई है, ताकि वर्षा की अनिश्चितता का प्रभाव कम किया जा सके। धान की खेती में रोपा पद्धति के बजाय धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) को प्राथमिकता देने पर विशेष जोर दिया गया है। इस तकनीक से 20 प्रतिशत पानी की बचत होती है, प्रति एकड़ लगभग 5,000 रुपये की लागत कम आती है तथा फसल 12 से 15 दिन पहले तैयार हो जाती है।राज्य सरकार ने किसानों को वर्षा शुरू होने से पहले खेतों एवं मेड़ों की सफाई, समय पर जुताई तथा खेतों में मेडबंदी कर वर्षा जल संरक्षण सुनिश्चित करने की सलाह दी है, ताकि उपलब्ध जल का अधिकतम उपयोग किया जा सके। कम वर्षा की संभावना को देखते हुए उच्चहन भूमि में धान के स्थान पर अरहर, मूंग एवं उड़द जैसी दलहनी तथा मूंगफली, तिल, रामतिल एवं सोयाबीन जैसी तिलहनी फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी गई है। ये फसलें अपेक्षाकृत कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देने में सक्षम मानी जाती हैं, जिससे किसानों का जोखिम कम हो सकता है। फसलों की कतार पद्धति से बुवाई पर भी बल दिया गया है। इससे खरपतवार नियंत्रण, नमी संरक्षण तथा पौधों की जड़ों का बेहतर विकास होता है, जिससे सूखे की स्थिति में भी फसल अपेक्षाकृत सुरक्षित रहती है।किसानों को बुवाई से पहले बीज उपचार अनिवार्य रूप से करने की सलाह दी गई है। इसके तहत कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज, थायमेथोक्साम-इमिडाक्लोप्रिड 1.5 मिलीलीटर प्रति किलोग्राम बीज तथा धान के लिए एजोस्थिरिलम, अन्य फसलों के लिए एजोटोबेक्टर और दलहनी फसलों के लिए राइजोबियम (10 मिलीलीटर प्रति किलोग्राम बीज) के उपयोग की सलाह दी गई है। यदि 15 जुलाई तक अंकुरण नहीं होता है, तो किसानों को पुनः बुवाई करते समय सामान्य बीज दर की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक बीज उपयोग करने की सलाह दी गई है। साथ ही जुलाई के अंत तक मूंग एवं उड़द की बुवाई तथा अगस्त में तिल, सूरजमुखी एवं मध्यम अवधि वाली अरहर की बुवाई करने का सुझाव दिया गया है।कम वर्षा की स्थिति में उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया है। नत्रजन उर्वरकों का सीमित उपयोग करते हुए 2 प्रतिशत यूरिया घोल का पर्णीय छिड़काव अथवा प्रति एकड़ 2 बोतल नैनो यूरिया का उपयोग अधिक लाभकारी रहेगा। वहीं दलहनी एवं तिलहनी फसलों में बुवाई के लगभग एक माह बाद 2 प्रतिशत डीएपी घोल के पर्णीय छिड़काव करने को कहा गया है।सरकार ने गांवों में नालों पर सीमेंट की बोरियों में रेत भरकर अस्थायी बांध बनाने, डबरियों, तालाबों एवं कुओं में वर्षा जल संग्रह करने तथा आवश्यकता पड़ने पर इस संचित जल का जीवन रक्षक सिंचाई के रूप में उपयोग करने की सलाह दी है। साथ ही किसानों से मौसम पूर्वानुमान के आधार पर कृषि कार्य करने, ड्रिप एवं स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को अपनाने तथा फसल विविधीकरण के माध्यम से खेती के जोखिम को कम करने की अपील की गई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि खरीफ 2026 में वर्षा सामान्य से कम रहती है, तो किसानों के लिए कम अवधि वाली धान की किस्मों के साथ-साथ अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, तिल, रामतिल और सोयाबीन जैसी दलहनी एवं तिलहनी फसलें अपेक्षाकृत अधिक लाभकारी विकल्प साबित हो सकती हैं। राज्य सरकार ने किसानों से कृषि संबंधी किसी भी कठिनाई की स्थिति में निकटस्थ कृषि महाविद्यालय, अनुसंधान केन्द्र, कृषि विज्ञान केन्द्र एवं कृषि विभाग से संपर्क कर वैज्ञानिक सलाह लेने की अपील की है।
- -डिजिटल सेवा से मिली सुविधाजनक, पारदर्शी और समयबद्ध सेवामुंगेली । शासन की डिजिटल सेवाएं अब आम नागरिकों के लिए सुविधाजनक, पारदर्शी और समयबद्ध सेवा का सशक्त माध्यम बन रही हैं। मुंगेली के लोक सेवा केंद्र (तहसील कार्यालय परिसर) में संचालित सेवा सेतु पोर्टल ने एक छात्रा के भविष्य को समय पर नई दिशा देने का कार्य किया। सुरीघाट निवासी राजेश्वरी निषाद को स्कूल में प्रवेश (एडमिशन) के लिए आय प्रमाण पत्र की आवश्यकता थी। प्रमाण पत्र नहीं मिलने की चिंता से परिवार परेशान था और प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका बनी हुई थी।इसी दौरान राजेश्वरी के पिता श्री भगवत निषाद लोक सेवा केंद्र पहुंचे। वहां मौजूद सेवा सेतु के कर्मचारियों ने आवश्यक दस्तावेजों की जांच कर ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड किए। आवेदन का त्वरित निराकरण करते हुए महज दो दिनों के भीतर आय प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। समय पर प्रमाण पत्र मिलने से राजेश्वरी का प्रवेश बिना किसी बाधा के पूरा हो सका। परिवार ने सेवा सेतु की त्वरित, पारदर्शी एवं नागरिक हितैषी कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए जिला प्रशासन और लोक सेवा केंद्र के प्रति आभार व्यक्त किया।गौरतलब है कि सेवा सेतु के माध्यम से नागरिकों को आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र सहित अनेक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और निर्धारित समय-सीमा में सेवाओं का लाभ आसानी से मिल रहा है। डिजिटल इंडिया की परिकल्पना को साकार करते हुए सेवा सेतु आम नागरिकों तक सरल, पारदर्शी और त्वरित सेवाएं पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन रहा है। यह पहल न केवल समय की बचत कर रही है, बल्कि शासन और नागरिकों के बीच विश्वास को भी मजबूत बना रही है।
- -अल्प वर्षा की हर चुनौती से निपटने के लिए सरकार पूरी तरह तैयार : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय-खाद-बीज की पर्याप्त उपलब्धता, जल संरक्षण, वैज्ञानिक खेती और ग्रामीण रोजगार पर विशेष जोर-वीबी-जी राम जी योजना के माध्यम से जल सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती-छत्तीसगढ़ को 46 हजार टन से अधिक डीएपी (DAP) की आपूर्ति प्राप्तरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में खरीफ सीजन-2026 के दौरान संभावित अल्प वर्षा की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग तथा विकसित भारत-बीवी-जी राम जी योजना की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। बैठक में मौसम की संभावित स्थिति, खाद एवं बीज की उपलब्धता, जल संरक्षण, सिंचाई प्रबंधन, वैज्ञानिक खेती तथा ग्रामीण रोजगार से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसानों के हित सर्वोपरि हैं और किसी भी परिस्थिति में उन्हें खाद, बीज, तकनीकी मार्गदर्शन अथवा आवश्यक संसाधनों की कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विभाग समन्वित रूप से कार्य करते हुए प्रत्येक जिले के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार रखें।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा से उन्होंने छत्तीसगढ़ के किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप अतिरिक्त डीएपी उर्वरक उपलब्ध कराने का आग्रह किया था। इसके सकारात्मक परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ को 46 हजार टन से अधिक डीएपी (DAP) की आपूर्ति प्राप्त हुई है, जो सामान्य से अधिक है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध होगा तथा खरीफ सीजन की तैयारियों में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि धान की फसल के लिए आवश्यक सिंचाई जल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। विशेष रूप से वर्षा आधारित क्षेत्रों में जल स्रोतों का वैज्ञानिक प्रबंधन किया जाए ताकि आवश्यकता पड़ने पर किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।उन्होंने कृषि विभाग को निर्देशित किया कि किसानों को कम एवं मध्यम अवधि में पकने वाली धान की किस्मों, डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर), कतार पद्धति से बुवाई, बीज उपचार, नमी संरक्षण तथा वैज्ञानिक खेती की आधुनिक तकनीकों के प्रति व्यापक रूप से जागरूक किया जाए। साथ ही उच्च भूमि वाले क्षेत्रों में दलहन एवं तिलहन फसलों का रकबा बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, जिससे किसानों को बेहतर आय के अवसर प्राप्त हों और कृषि जोखिम कम हो।मुख्यमंत्री श्री साय ने किसानों से अपील की कि वे कृषि संबंधी किसी भी प्रकार की समस्या अथवा तकनीकी सलाह के लिए कृषि महाविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों, अनुसंधान संस्थानों तथा कृषि विभाग के विशेषज्ञों से संपर्क करें और वैज्ञानिक खेती को अपनाएं। उन्होंने अमानक बीज एवं उर्वरकों की बिक्री तथा कालाबाजारी पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश देते हुए कहा कि किसानों के साथ किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।बैठक में बताया गया कि राज्य में खाद एवं बीज का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है तथा सभी जिलों में समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं कर ली गई हैं। बैठक में बताया गया कि अर्ली वेरायटी के धान बीज बीज निगम के माध्यम से किसानों को उपलब्ध कराने की संपूर्ण तैयारी पूरी कर ली गई है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि संभावित अल्प वर्षा जैसी परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए जल संरक्षण को जनभागीदारी का अभियान बनाया जाएगा। उन्होंने 'मोर गांव मोर पानी' अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश देते हुए वर्षा जल संरक्षण, खेत तालाब, जल संरचनाओं के निर्माण तथा भूजल संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने को कहा।उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आकाशीय बिजली जैसी प्राकृतिक आपदाओं से किसानों की सुरक्षा के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा विकसित 'सचेत', 'दामिनी' और 'मेघदूत' मोबाइल एप का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि समय पर मौसम संबंधी जानकारी किसानों तक पहुंच सके। साथ ही सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को उचित दर पर खरपतवारनाशक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, जिससे उत्पादन लागत कम हो और फसल सुरक्षित रह सके।वीबी-जी राम जी योजना बनेगी जल सुरक्षा और ग्रामीण समृद्धि का मजबूत आधारबैठक में बताया गया कि 1 जुलाई 2026 से योजना का क्रियान्वयन प्रारंभ हो चुका है। योजना के अंतर्गत अब ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। मजदूरी दर 300 रुपये प्रतिदिन निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत जल संरक्षण, जल सुरक्षा, जल संरचनाओं के निर्माण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने निर्देश दिए कि वीबी-जी राम जी योजना के माध्यम से ऐसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाए, जिनसे एक ओर ग्रामीणों को निरंतर रोजगार प्राप्त हो और दूसरी ओर प्रदेश की जल सुरक्षा मजबूत हो। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण में किया गया प्रत्येक प्रयास आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा का आधार बनेगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों और ग्रामीण परिवारों के हितों की रक्षा, कृषि उत्पादन को सुरक्षित रखने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर समयबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कृषि विश्वविद्यालय द्वारा नियमित रूप से जारी किए जाने वाले बुलेटिनों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए एक प्रभावी जनजागरूकता अभियान तैयार किया जाए, ताकि यह जानकारी किसानों तक जमीनी स्तर पर पहुँचे। साथ ही सोशल मीडिया एवं पारंपरिक मीडिया के माध्यम से भी इनका व्यापक प्रसार सुनिश्चित किया जाए।बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, कृषि संचालक श्री राहुल देव, विकसित भारत वीबी - जीरामजी योजना के आयुक्त श्री तारणप्रकाश सिन्हा, भारत मौसम विज्ञान विभाग की विशेषज्ञ श्रीमती गायत्री वानी, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान सेवाओं के निदेशक श्री विवेक कुमार त्रिपाठी सहित कृषि, मौसम एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
- -लैलूंगा की भगवती चंद्रा को मिला उज्ज्वला योजना का गैस कनेक्शनरायपुर। मुख्यमंत्री की जनकेंद्रित सुशासन व्यवस्था के तहत संचालित सीएम हेल्पलाइन 1076 आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम बन रही है। रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड में दर्ज एक शिकायत का शीघ्र निराकरण करते हुए पात्र हितग्राही को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया गया। लैलूंगा नगर के संत कबीर वार्ड क्रमांक-7 निवासी श्री धनेश्वर ने अपनी पत्नी श्रीमती भगवती चंद्रा के नाम पर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद भी गैस कनेक्शन प्राप्त नहीं होने पर उन्होंने अपनी समस्या के समाधान के लिए सीएम हेल्पलाइन 1076 में शिकायत दर्ज कराई।शिकायत प्राप्त होते ही जिला खाद्य नियंत्रक कार्यालय तथा संबंधित खाद्य निरीक्षक द्वारा मामले की गंभीरता से जांच की गई। जांच में पाया गया कि आवेदिका के नाम पर उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गैस कनेक्शन स्वीकृत हो चुका था, किंतु तकनीकी एवं प्रक्रियागत कारणों से उसका लाभ हितग्राही तक नहीं पहुँच पाया था। मामले की पुष्टि होने के बाद खाद्य विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पात्रतानुसार हितग्राही को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया। इसके साथ ही शिकायत का संतोषजनक निराकरण कर प्रकरण का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया। गैस कनेक्शन प्राप्त होने के बाद हितग्राही श्री धनेश्वर ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री, जिला प्रशासन एवं खाद्य विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से उनकी समस्या का समयबद्ध समाधान हुआ और उन्हें शासन की योजना का लाभ सहज रूप से प्राप्त हो सका। यह प्रकरण दर्शाता है कि सीएम हेल्पलाइन 1076 शासन और आमजन के बीच प्रभावी संवाद का सशक्त माध्यम बन चुकी है। जिला प्रशासन द्वारा शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निराकरण की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे पात्र हितग्राहियों तक शासन की योजनाओं का लाभ पारदर्शी और प्रभावी ढंग से पहुँच रहा है।
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*अब तक 1 लाख 40 हजार से अधिक बच्चों की हो चुकी स्क्रीनिंग*
रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार, जिला प्रशासन रायपुर द्वारा बच्चों के स्वास्थय को प्राथमिकता देते हुए चलाई जा रही योजना “प्रोजेक्ट धड़कन” के अंतर्गत ज़िले भर में विशेष स्वास्थय शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इस अभिनव पहल का उद्देश्य है - बच्चों में जन्मजात हृदय रोग की समय रहते पहचान कर उन्हें बेहतर और निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराना।कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन तथा श्री सत्य साई हॉस्पिटल के सहयोग से धरसीवां टीम बी द्वारा शासकीय प्राथमिक शाला बेंदरी, आंगनबाड़ी केन्द्र बंधवापारा, अर्बन टीम डी द्वारा आंगनबाड़ी केन्द्र 1, 11 एवं 12 रांवाभाठा, तिल्दा टीम बी द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र सड्डू में बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। पूरे जिले में आज कुल 881 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई।इस प्रोजेक्ट के तहत अब तक जिले में कुल 1 लाख 41 हजार 1 सौ 09 बच्चों की स्क्रीनिंग, 14 बच्चों का मेडिकल उपचार व प्रबंधन एवं 18 बच्चों का निःशुल्क ऑपरेशन किया जा चुका है। -
“प्रोजेक्ट आओ बाँटें खुशियाँ” के तहत शासकीय कर्मचारी बच्चों संग साझा कर रहे हैं खुशियाँ
रायपुर/ जिले में शासकीय कर्मचारियों के जन्मदिन अब केवल व्यक्तिगत आयोजन नहीं रह गए हैं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम बनते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशानुसार प्रधानमंत्री पोषण शक्ति योजना और न्योता भोज के अंतर्गत संचालित “प्रोजेक्ट आओ बाँटें खुशियाँ” का उद्देश्य ही है - खुशियों को बाँटना, और इस पहल को शासकीय कर्मचारी पूरे उत्साह के साथ अपना रहे हैं।इसी क्रम में स्टाफ नर्स सुश्री सुष्मिता मसीह ने आंगनबाड़ी केंद्र-5 रानी दुर्गावती वार्ड में विद्यार्थियों के साथ जन्मदिवस के अवसर पर बच्चों के साथ केक काटकर, फल और पौष्टिक आहार वितरित कर इस दिन को विशेष बनाया। -
*सीईओ जिला पंचायत ने कम उपलब्धि वाले विकासखंडों को नोटिस जारी करने के दिए निर्देश*
रायपुर। कलेक्टर डॉ गौरव सिंह के निर्देशानुसार जिला पंचायत सीईओ श्री कुमार बिश्वरंजन की अध्यक्षता में दिनांक 3 जुलाई 2026 को स्वास्थ्य विभाग एवं महिला बाल विकास विभाग की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की गई।समीक्षा के दौरान कम उपलब्धि वाले विकासखंडों को नोटिस जारी करने के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देशित किया गया। मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने कहा कि आगामी बैठक में पूर्व बैठक की उपलब्धि एवं वर्तमान उपलब्धि दोनों को प्रस्तुत किया जाए।बैठक में सभी संबंधित नोडल अधिकारी एवं खंड चिकित्सा अधिकारी को राष्ट्रीय कार्यक्रमों में शत प्रतिशत उपलब्धि हासिल करने के लिए कार्य योजना तैयार कर कार्य करने के निर्देश दिए गए। गैर संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम में जिले की उपलब्धि कम होने पर टीम बनाकर कार्य पूर्ण करने को कहा गया।निजी चिकित्सालयों से लंबित एंट्री को पूर्ण करने तथा तकनीकी सहयोग के लिए भ्रमण कर प्रशिक्षण आयोजित करने के निर्देश दिए गए। भवन विहीन संस्थाओं की जानकारी प्रस्तुत करने को भी कहा गया।सभी रिक्त पदों पर भर्ती तत्काल पूर्ण करने के लिए जिला कार्यक्रम प्रबंधक को आदेशित किया गया। जननी सुरक्षा योजना एवं प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत एचआरपी महिलाओं को दी जाने वाली प्रावधान राशि का भुगतान समय सीमा में करने के निर्देश दिए गए।जननी पोर्टल पर गर्भवती महिलाओं की एंट्री, यूवीन पोर्टल पर टीकाकरण की एंट्री, वेलनेस गतिविधियों की एंट्री सहित समस्त ऑनलाइन एंट्री समय सीमा पर पूर्ण करने को कहा गया। पोषण पुनर्वास केंद्र तिल्दा में बेड ऑक्यूपेंसी रेट कम होने पर महिला बाल विकास विभाग तिल्दा के सीडीपीओ को लाइन लिस्ट अनुसार एनआरसी में बच्चे भेजने के निर्देश दिए गए।आयुष्मान भारत योजना के तहत लंबित हितग्राहियों की दैनिक समीक्षा करते हुए शत प्रतिशत आयुष्मान एवं वय वंदना कार्ड बनाए जाने के निर्देश दिए गए।इस अवसर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास सुश्री शैल ठाकुर, डीपीएम श्री मनीष कुमार मेजरवार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। - -नियमित आर्थिक सहायता से परिवार की जरूरतें हो रहीं पूरी, महिलाओं को मिल रहा सशक्तिकरण का नया आधारसक्ती । महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा संचालित महतारी वंदन योजना जिले की हजारों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। योजना के तहत प्रतिमाह मिलने वाली सहायता राशि महिलाओं को आर्थिक संबल प्रदान करने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ा रही है। विकासखंड सक्ती अंतर्गत ग्राम किरारी निवासी श्रीमती सुनीता श्रीवास इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। वे बताती हैं कि पहले छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए भी उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि उनके लिए महत्वपूर्ण सहारा बन गई है। इस सहायता से वे अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ बच्चों के पालन-पोषण में भी सहयोग कर पा रही हैं। श्रीमती सुनीता श्रीवास के अनुसार योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता ने उन्हें अपने खर्चों का बेहतर प्रबंधन करने तथा परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम बनाया है। उनका मानना है कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को आत्मविश्वास, सम्मान और आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि योजना की नियमित राशि महिलाओं को परिवार की जिम्मेदारियों में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित कर रही है। श्रीमती सुनीता श्रीवास ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक सराहनीय पहल है। इससे महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार हो रहा है और वे आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से अग्रसर हो रही हैं।
- -वन विभाग की अभिनव पहल बनी लोगों के लिए सुरक्षा कवचरायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन विभाग आधुनिक तकनीक का उपयोग कर वन्यजीव संरक्षण और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार प्रभावी कार्य कर रहा है। इसी कड़ी में शुरू किया गया एआई आधारित 'एलीफेंट अलर्ट सिस्टम' हाथी-मानव संघर्ष को कम करने में बड़ी सफलता साबित हुआ है। इस अभिनव पहल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है और प्रतिष्ठित एमआईटी टेक्नोलॉजी रिव्यू ने भी इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया है।हाथी प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग थर्मल सेंसर युक्त इन्फ्रारेड ड्रोन की मदद से दिन-रात हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रहा है। घने जंगल और अंधेरे में भी यह तकनीक हाथियों का सटीक पता लगा लेती है। जैसे ही हाथियों का दल किसी गांव की ओर बढ़ता है, नियंत्रण कक्ष से ग्रामीणों और वन अमले को एसएमएस, फोन कॉल और व्हाट्सएप के माध्यम से तुरंत सूचना भेज दी जाती है।इस व्यवस्था के माध्यम से लगभग 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को पहले ही सतर्क कर दिया जाता है। सूचना मिलते ही ग्रामीण सुरक्षित स्थानों पर पहुंच जाते हैं। वहीं वन विभाग की टीम भी समय पर मौके पर पहुंचकर हाथियों को जंगल की ओर वापस भेजने का प्रयास करती है। इससे हाथी-मानव संघर्ष की घटनाओं में कमी आई है और जनहानि का खतरा भी घटा है।वन विभाग की इस पहल से ग्रामीणों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है। साथ ही हाथियों के संरक्षण को भी नई मजबूती मिली है। आधुनिक तकनीक और त्वरित सूचना प्रणाली के कारण वन्यजीवों तथा लोगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हुआ है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ का यह नवाचार आज देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है। एआई आधारित एलीफेंट अलर्ट सिस्टम यह साबित करता है कि आधुनिक तकनीक, प्रभावी प्रशासन और जनभागीदारी के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा भी सफलतापूर्वक सुनिश्चित की जा सकती है। आज यह पहल छत्तीसगढ़ को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में नई पहचान दिला रही है।
- -पीएम जनमन आवास योजना से पीव्हीटीजी परिवारों को मिल रहा सुरक्षित आवास-एतवा राम के वर्षों पुराने पक्के मकान का हुआ सपना साकारबलरामपुर । प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजाति समुदायों को विभिन्न प्रकार की शासकीय योजनाओं से लाभान्वित किया जा रहा है। पीएम जनमन आवास योजना विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय के जीवन में न केवल सुधार ला रहा है, बल्कि पक्के मकान के सपनों को भी साकार कर रहा है।जिले के विकासखंड राजपुर के ग्राम पंचायत चांची के निवासी श्री एतवा राम ने बताया कि वे अपने परिवार के साथ वर्षों से कच्चे मकान में रह रहे थे। उनका परिवार रोजी मजदूरी कर जीवन यापन करता है। उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के कारण पक्का मकान बनाना उनके लिए चुनौती था। बरसात में टपकती छत, सर्दियों की ठिठुरन और गर्मियों की तपन उनके परिवार के लिए हमेशा की मजबूरी बनी रही। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनके पक्के घर का सपना साकार नहीं हो पा रहा था। उन्हें प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के अंतर्गत आवास की स्वीकृति मिली। समय पर राशि और सामग्री उपलब्ध होने से उनका मकान बनकर तैयार हुआ और आज वे अपने परिवार के साथ सुरक्षित पक्के घर में रह रहे हैं। श्री एतवा राम कहते हैं कि नए घर ने मुझे जीवन की सबसे बड़ी खुशी दी है। अब मेरा परिवार मौसम की मार से सुरक्षित है।उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना का उद्देश्य विशेष पिछड़ी जनजातीय परिवारों को पक्का और सुरक्षित घर उपलब्ध कराना है। इस योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को आर्थिक सहायता दी जाती है, ताकि वे अपना घर स्वयं बना सकें और गरिमामय जीवन जी सकें।
- -पक्का घर, रोजगार और सम्मान के साथ मुख्यधारा में लौटे, बने आत्मनिर्भर जीवन की मिसालरायपुर । सुकमा जिले में शासन की पुनर्वास नीति और जनकल्याणकारी योजनाएं लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। कोंटा विकासखंड के ग्राम पंचायत पोलमपल्ली के निवासी मड़कम भीमा इसकी प्रेरक मिसाल हैं। उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास और लोकतंत्र की मुख्यधारा को अपनाया। जिला प्रशासन और सुरक्षा बलों के सहयोग से आज वे सम्मान के साथ सामान्य जीवन जी रहे हैं।मुख्यधारा में लौटने के बाद जिला प्रशासन ने मड़कम भीमा को विभिन्न शासकीय योजनाओं से जोड़ा। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत उन्हें पक्का घर बनाने के लिए आर्थिक सहायता मिली। अब उनका परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक घर में रह रहा है। इस योजना ने उनके जीवन में स्थिरता और भविष्य के प्रति नया विश्वास पैदा किया।मड़कम भीमा को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत रोजगार भी उपलब्ध कराया गया। उन्होंने गांव के विकास कार्यों में मेहनत से काम किया और मजदूरी की राशि सीधे उनके बैंक खाते में प्राप्त हुई। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और आत्मविश्वास भी बढ़ा।आज मड़कम भीमा अपने परिवार के साथ सम्मानपूर्वक जीवन जी रहे हैं। वे मानते हैं कि शासकीय योजनाओं और जिला प्रशासन के सहयोग ने उन्हें नई पहचान और नया जीवन दिया है। अब वे विकास की राह पर आगे बढ़ते हुए अपने परिवार का बेहतर भविष्य बना रहे हैं।मड़कम भीमा की सफलता की कहानी बताती है कि शासन की पुनर्वास नीति और जनकल्याणकारी योजनाएं लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रही हैं। यह कहानी युवाओं को संदेश देती है कि हिंसा का रास्ता छोड़कर शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता का मार्ग अपनाने से जीवन में नई शुरुआत संभव है। शासन समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले प्रत्येक व्यक्ति के साथ मजबूती से खड़ा है।
- -मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया में आवेदन के बाद त्वरित कार्रवाई, मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना से मिला संबलरायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील पहल से गंभीर श्वसन रोग से पीड़ित सरगुजा जिले की मासूम रेणुका खलखो के उपचार का रास्ता आसान हो गया है। मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया में परिजनों द्वारा सहायता के लिए आवेदन प्रस्तुत किए जाने के बाद मुख्यमंत्री ने मामले पर तत्काल संज्ञान लेते हुए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके फलस्वरूप मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत उपचार के लिए 95 हजार 500 रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अनुशंसा पर राज्य नोडल एजेंसी द्वारा जारी स्वीकृति आदेश के अनुसार यह राशि झारखंड के रांची स्थित रानी हॉस्पिटल में मासूम के श्वसन संबंधी गंभीर बीमारी के उपचार के लिए प्रदान की गई है।आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए यह सहायता बड़ी राहत लेकर आई है। समय पर मिली आर्थिक मदद से अब रेणुका का बेहतर उपचार संभव हो सकेगा। परिजनों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस सहयोग से उन्हें अपनी बच्ची के इलाज की नई उम्मीद मिली है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना गंभीर एवं आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए जीवनरक्षक सहायता का प्रभावी माध्यम बन रही है। इस योजना के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को समय पर आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे उपचार में आर्थिक बाधाएं दूर हो रही हैं।उल्लेखनीय है कि बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी केंद्र बनकर उभरा है। यहां प्राप्त आवेदनों पर प्राथमिकता के साथ कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। स्वास्थ्य सहायता सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक शीघ्र पहुंचाने की व्यवस्था से जरूरतमंद परिवारों को समय पर राहत मिल रही है और शासन के प्रति उनका विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।
- -राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम से 15 वर्षीय माड़कम हुंगा का हुआ निःशुल्क उपचार, परिवार को मिली बड़ी राहतरायपुर। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत संचालित 'चिरायु' दल दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाकर उनके जीवन में नई उम्मीद जगा रहा है। बीजापुर जिले के उसूर विकासखंड के ग्राम मीनागट्टा (पामेड) निवासी 15 वर्षीय माड़कम हुंगा की कहानी इस योजना की सफलता का प्रेरक उदाहरण है।जन्म से थी गंभीर समस्यामाड़कम हुंगा जन्म से ही कटे होंठ और तालु (क्लेफ्ट लिप एवं पैलेट) की समस्या से पीड़ित था। इस कारण उसे भोजन करने, साफ बोलने और सामान्य जीवन जीने में काफी परेशानी होती थी। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसका इलाज कराना संभव नहीं था।स्कूल में जांच के दौरान हुई पहचानआरबीएसके के 'चिरायु' दल ने स्कूल में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान माड़कम हुंगा की पहचान की। इसके बाद आवश्यक दस्तावेज तैयार कर उसे बेहतर इलाज के लिए तुरंत रायपुर रेफर किया गया।निःशुल्क सर्जरी से मिली नई जिंदगी25 जून 2026 को माड़कम हुंगा को रायपुर के एक विशेषज्ञ अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने उसकी सफल प्लास्टिक सर्जरी की। उपचार के बाद उसके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ और 30 जून 2026 को उसे स्वस्थ होकर अस्पताल से छुट्टी मिल गई।इलाज का पूरा खर्च शासन ने उठायाराष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सर्जरी, जांच, दवाइयां, रायपुर तक आने-जाने की व्यवस्था तथा उपचार के दौरान रहने और भोजन सहित पूरा खर्च शासन द्वारा वहन किया गया। इससे परिवार पर किसी भी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ा।नई मुस्कान, नया आत्मविश्वासआज माड़कम हुंगा पहले की तुलना में बेहतर जीवन जी रहा है। अब उसे भोजन करने और बोलने में पहले जैसी कठिनाई नहीं होती। उसके चेहरे पर लौटी मुस्कान और बढ़ा आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि शासन की स्वास्थ्य योजनाएं जरूरतमंद बच्चों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रही हैं।राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) का 'चिरायु' दल दूरस्थ अंचलों के बच्चों तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाकर उन्हें स्वस्थ, सुरक्षित और बेहतर भविष्य देने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। यह पहल बच्चों और उनके परिवारों के लिए नई उम्मीद का आधार बन रही है।
- -डीएमएफ से 13 विकास कार्यों के लिए 35.77 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति-शिक्षा, कौशल विकास, कृषि अधोसंरचना और ग्रामीण सड़कों को मिलेगी नई मजबूती-पुस्तकालय, आईटीआई उन्नयन, कृषि विपणन सुविधाओं और सड़क निर्माण से बढ़ेगा ग्रामीण विकासरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व तथा वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के विशेष प्रयासों से रायगढ़ जिले के खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को लगातार गति मिल रही है। इसी क्रम में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से 35 करोड़ 76 लाख 94 हजार रुपये की लागत के 13 महत्वपूर्ण विकास कार्यों को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इन कार्यों से धरमजयगढ़, लैलूंगा, घरघोड़ा और तमनार विकासखंडों में शिक्षा, कौशल विकास, कृषि अधोसंरचना तथा ग्रामीण संपर्क व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।डीएमएफ निधि के माध्यम से स्वीकृत इन परियोजनाओं का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों के विद्यार्थियों, युवाओं, किसानों और ग्रामीण परिवारों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इन विकास कार्यों से क्षेत्र में सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।तमनार, घरघोड़ा, लैलूंगा एवं धरमजयगढ़ विकासखंडों में पुस्तकालय भवन निर्माण तथा अन्य संबंधित कार्यों के लिए 6 करोड़ 39 लाख 64 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है। आधुनिक अध्ययन संसाधनों से युक्त इन पुस्तकालयों से ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन का वातावरण मिलेगा।स्थानीय युवाओं को बेहतर तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासकीय आईटीआई घरघोड़ा के भवन के जीर्णोद्धार के लिए 1 करोड़ 56 लाख 30 हजार रुपये तथा शासकीय आईटीआई धरमजयगढ़ के भवन के उन्नयन हेतु 82 लाख 86 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे प्रशिक्षण सुविधाएं और अधिक सुदृढ़ होंगी तथा युवाओं के लिए रोजगारपरक कौशल विकास के नए अवसर उपलब्ध होंगे।तमनार विकासखंड में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 1 करोड़ 21 लाख 81 हजार रुपये की लागत से व्यावसायिक परिसर तथा 1 करोड़ 5 लाख 20 हजार रुपये की लागत से बाजार शेड यार्ड का निर्माण किया जाएगा। इन परियोजनाओं से किसानों को कृषि उत्पादों के भंडारण, विपणन और व्यापार के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।धरमजयगढ़, लैलूंगा, घरघोड़ा एवं तमनार विकासखंडों में लगभग 24 करोड़ 73 लाख रुपये की लागत से आठ महत्वपूर्ण सड़क निर्माण कार्यों को स्वीकृति दी गई है। इनमें पीपराही-डीपापारा, सुबरा-कटकलिया, कोंडकेल-गेरूपानी, ढाप-भवानीपुर, किलकिला-उड़ीसा बॉर्डर, बरमुड़ा-उकारीपाली, टेरम-छिरभौंना तथा बाम्हनबहरी-पुलाईआंट मार्ग शामिल हैं। इन सड़कों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुगम होगा, कृषि उत्पादों के परिवहन में सुविधा मिलेगी तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। इन सभी परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल एवं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) को कार्य एजेंसी नियुक्त किया गया है। जिला प्रशासन ने सभी निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप 365 दिनों के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग एवं गुणवत्ता परीक्षण भी सुनिश्चित किया जाएगा।
- -ई-भर्ती पोर्टल के माध्यम से 14 जुलाई तक किए जा सकेंगे आवेदनरायपुर । गरियाबंद जिला के मैनपुर अंतर्गत एकीकृत बाल विकास परियोजना के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों में आंगनबाड़ी सहायिका के रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। आंगनबाड़ी सहायिका के 04 रिक्त पद है। जिनमें सेक्टर मैनपुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत भाठीगढ़ के आंगनबाड़ी केन्द्र उपरपारा मे सहायिका के 01 पद, ग्राम पंचायत खजूरपदर के आंगनबाड़ी केन्द्र मांझीपारा में 01 पद, ग्राम पंचायत दबनई के आंगनबाड़ी केन्द्र धोबीपारा मे सहायिका के 01 पद एवं ग्राम पंचायत तुहामेटा के आंगनबाड़ी केन्द्र खजरायन मे सहायिका के 01 पद हेतु आवेदन आमंत्रित किया गया है। आवेदन प्रक्रिया ई-भर्ती पोर्टल के माध्यम से 14 जुलाई 2026 तक प्रारंभ रहेगी। भर्ती से संबंधित जानकारी पोर्टल के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है।
- रायपुर। छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल में पंजीकृत श्रमिकों को अपने श्रमिक कार्ड में दर्ज जानकारी का समय-समय पर सत्यापन कर आवश्यक सुधार कराने की सलाह दी गई है। यदि श्रमिक कार्ड में नाम (हिंदी एवं अंग्रेजी), जन्म तिथि, लिंग, मोबाइल नंबर अथवा पूर्ण पते से संबंधित किसी भी प्रकार की त्रुटि है, तो उसे तत्काल संशोधित कराना चाहिए, ताकि भविष्य में शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अधिकारियों ने बताया कि श्रमिक कार्ड में संशोधन का कार्य के लिए मात्र 20 रुपये का निर्धारित सेवा शुल्क लिया जाएगा। इसके लिए श्रमिकों को आधार कार्ड की मूल प्रति तथा सहमति पत्र के साथ आवेदन प्रस्तुत करना होगा। सभी दस्तावेज स्पष्ट एवं पठनीय होना आवश्यक है।श्रम विभाग ने पंजीकृत श्रमिकों से अपील की है कि वे समय रहते अपने श्रमिक कार्ड की जानकारी अपडेट कराएं। सही एवं अद्यतन जानकारी न केवल विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में सहायक होगी, बल्कि भविष्य में किसी भी प्रकार की तकनीकी अथवा प्रशासनिक समस्या से भी बचाएगी। सही जानकारी, सही अधिकार और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने के लिए श्रमिकों से अपने श्रमिक कार्ड का सत्यापन एवं आवश्यक संशोधन शीघ्र कराने का आग्रह किया गया है।
- -केसीसी, रूपे कार्ड एवं माइक्रो एटीएम का वितरण, मॉडल पैक्स का कराया गया भ्रमण-वृक्षारोपण और स्वच्छता अभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश-4 जुलाई को कुनकुरी में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का होगा आयोजनरायपुर । सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार की स्थापना के पांच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में जशपुर जिले में 29 जून से 6 जुलाई 2026 तक सहकारी सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न जनहितकारी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। भारत सरकार एवं राज्य शासन के निर्देशानुसार आयोजित इस सप्ताह का उद्देश्य सहकारिता आंदोलन को सशक्त बनाना, किसानों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ना तथा सहकारी संस्थाओं की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाना है।सहकारी सप्ताह के तहत 2 जुलाई को जिले की प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान किसानों एवं समिति सदस्यों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), रूपे केसीसी कार्ड तथा माइक्रो एटीएम कार्ड वितरित किए गए। इससे किसानों को बैंकिंग सेवाओं तक आसान पहुंच, डिजिटल भुगतान की सुविधा तथा कृषि कार्यों के लिए वित्तीय सेवाओं का लाभ अधिक सुगमता से मिल सकेगा।कार्यक्रम के दौरान किसानों, जनप्रतिनिधियों एवं समिति सदस्यों को मॉडल पैक्स का भ्रमण भी कराया गया। उन्हें सहकारी समितियों की आधुनिक कार्यप्रणाली, डिजिटल सेवाओं, कृषि ऋण वितरण, उर्वरक एवं बीज उपलब्धता सहित विभिन्न नवाचारों की जानकारी दी गई, जिससे वे सहकारिता की नई व्यवस्थाओं से परिचित हो सकें।3 जुलाई को जिलेभर की सहकारी समितियों में वृक्षारोपण एवं स्वच्छता अभियान आयोजित कर पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता का संदेश दिया गया। अभियान में समिति पदाधिकारियों, कर्मचारियों एवं किसानों ने सक्रिय भागीदारी निभाते हुए अधिक से अधिक पौधे लगाने और स्वच्छ वातावरण बनाए रखने का संकल्प लिया।सहकारी सप्ताह की अगली कड़ी में 4 जुलाई को पैक्स कुनकुरी के अंतर्गत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुनकुरी स्थित जनऔषधि केंद्र में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया जाएगा। शिविर में नागरिकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा आवश्यक स्वास्थ्य परामर्श एवं मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।सहकारी सप्ताह के दौरान आयोजित ये गतिविधियां किसानों और आम नागरिकों को आधुनिक सेवाओं से जोड़ने, सहकारिता संस्थाओं को मजबूत बनाने तथा सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही हैं। साथ ही, इन कार्यक्रमों के माध्यम से शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का भी प्रयास किया जा रहा है।
- बलौदाबाजार । राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा शुक्रवार को जिला प्रवास के दौरान विकासखंड बलौदाबाजार के ग्राम पंचायत देवरी पहुंचे। उन्होंने यहां 44 लाख रुपये की लागत से तीन विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया। इसमें ग्राम देवरी में 20 लाख की लागत से निर्मित चेक डेम और 16 लाख की लागत से बने महतारी सदन भवन का लोकार्पण शामिल है। इसके साथ ही 8 लाख रुपये की लागत से शेड निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा की राज्य सरकार गांवों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। चेक डेम से क्षेत्र में जल स्तर बढ़ेगा और किसानों को सिंचाई की सुविधा मिलेगी। महतारी सदन महिलाओं के स्वावलंबन और सामुदायिक गतिविधियों का केंद्र बनेगा। हमारी सरकार समग्र विकास के लिये प्रतिबद्ध है। गांव-गांव में लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचने से हर तरफ खुशहाली और समृद्धि दिखाई दे रही है। इस अवसर चतद जिला पंचायत अध्यक्ष आकांक्षा जायसवाल, बलौदाबाजार जनपद अध्यक्ष सुलोचना यादव, उपाध्यक्ष सुमन योगेश वर्मा, सभापति चंद्रशेखर ध्रुव सरपंच सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे।





















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