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- रायपुर। छत्तीसगढ़ में महिलाओं के सशक्तिकरण और लघु वनोपज आधारित आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में एक अभिनव पहल के तहत जशपुर जिले में तीन दिवसीय स्टोरी टेलिंग कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। वन मंडल जशपुर, जिला लघु वनोपज संघ मर्यादित एवं फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी के संयुक्त तत्वावधान में 24 से 26 अप्रैल तक जिला मुख्यालय स्थित निर्वाणा होटल में आयोजित इस कार्यशाला में विभिन्न विकासखंडों की स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने सक्रिय भागीदारी निभाईकार्यशाला में कुनकुरी, बगीचा, जशपुर, पत्थलगांव, कांसाबेल और सन्ना विकासखंडों के वन धन विकास केंद्रों से जुड़ी महिलाओं को अपने अनुभव, संघर्ष और सफलता की कहानियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं में आत्मविश्वास विकसित करना तथा जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के प्रति जागरूकता को जन-जन तक पहुंचाना रहा।प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को नवरस और पांच ज्ञानेंद्रियों के समुचित उपयोग के माध्यम से कहानी कहने की कला को जीवंत और प्रभावशाली बनाने के गुर सिखाए। व्यावहारिक अभ्यास, समूह चर्चा और प्रस्तुतीकरण के जरिए महिलाओं की संप्रेषण क्षमता को मजबूत किया गया।कार्यशाला के अंतिम दिन प्रतिभागियों ने अपनी स्वयं की तैयार कहानियों का प्रस्तुतीकरण किया, जिसमें उनके जीवन अनुभव, स्थानीय परंपराएं और वन संसाधनों के प्रति संवेदनशीलता स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई। प्रतिभागियों ने इस पहल को अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक बताया।यह कार्यशाला न केवल महिलाओं के अभिव्यक्ति कौशल और आत्मविश्वास को बढ़ाने में सफल रही, बल्कि सामुदायिक स्तर पर प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सतत उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण साबित हुई। वन विभाग ने बताया कि भविष्य में भी इस प्रकार के नवाचारपूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर किया जाएगा।
- -मनरेगा के तहत बने चेक डैम से किसानों को सालभर सिंचाई, आय और रोजगार में वृद्धिरायपुर। छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देते हुए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास अब जमीनी स्तर पर सकारात्मक परिणाम देने लगे हैं। विशेष रूप से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत निर्मित चेक डैम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ किसानों के जीवन में स्थायी बदलाव ला रहे हैं।छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देते हुए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास अब जमीनी स्तर पर सकारात्मक परिणाम देने लगे हैं। विशेष रूप से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत निर्मित चेक डैम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ किसानों के जीवन में स्थायी बदलाव ला रहे हैं।इसी कड़ी में बलरामपुर जिले के जनपद पंचायत राजपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत बदौली एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है, जहां चेक डैम निर्माण ने जल संकट से जूझ रहे गांव को जल समृद्ध और आत्मनिर्भर बना दिया है।पहले बदौली गांव के किसान पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थे। बारिश की अनिश्चितता के कारण फसल उत्पादन प्रभावित होता था और गर्मी के मौसम में जल संकट के चलते खेती करना मुश्किल हो जाता था। कई किसानों को आजीविका के लिए पलायन करना पड़ता था।लेकिन मनरेगा के तहत चेक डैम निर्माण के बाद अब गांव में जल का प्रभावी संग्रहण होने लगा है। इससे न केवल भू-जल स्तर में वृद्धि हुई है, बल्कि कुओं और हैंडपंपों में भी सालभर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है।चेक डैम से सीधे तौर पर 20 से 25 किसानों को सालभर सिंचाई की सुविधा मिल रही है। परिणामस्वरूप किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ-साथ सब्जियों एवं नगदी फसलों की खेती भी कर रहे हैं। पहले जहां एक फसल पर निर्भरता थी, अब दो से तीन फसलें लेकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर रहे हैं।गांव के किसान श्री ईश्वर और श्री कपिल बताते हैं कि चेक डैम बनने के बाद खेती आसान हो गई है और अब वे आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए भी प्रेरित हो रहे हैं। खेती में बढ़ी उत्पादकता ने न केवल उनकी आय बढ़ाई है, बल्कि उनके जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव लाया है।चेक डैम निर्माण से गांव में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। मनरेगा के तहत स्थानीय स्तर पर काम मिलने से ग्रामीणों को अपने ही गांव में रोजगार मिला, जिससे पलायन में कमी आई है।राज्य में जल संरक्षण की इस तरह की पहलें ग्रामीण विकास के नए आयाम स्थापित कर रही हैं। बदौली जैसे गांव इस बात का प्रमाण हैं कि यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और जनभागीदारी सुनिश्चित हो, तो ग्रामीण क्षेत्र आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकते हैं।
- -पानी की किल्लत झेलने वाले गांव में अब हर घर नल कनेक्शनरायपुर ।जल जीवन मिशन से गांवों की तस्वीर बदल रही है। इसने ग्रामीणों, खासकर महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला दिया है। हर साल पानी की किल्लत झेलने वाले गांवों में भी अब मिशन की बदौलत नल से हर घर स्वच्छ पेयजल पहुंच रहा है। राजनांदगांव के डोंगरगढ़ विकासखंड के दूरस्थ वनांचल गांव घीकुड़िया में जल जीवन मिशन के तहत सोलर आधारित जल आपूर्ति की व्यवस्था ने गांव की सूरत बदल दी है।जल जीवन मिशन से घीकुड़िया में अब हर घर तक शुद्ध पेयजल की पहुंच सुनिश्चित हो गई है। इससे ग्रामीणों के जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है। मिशन के अंतर्गत गांव में पानी टंकी का निर्माण, पाइपलाइन बिछाने तथा नल कनेक्शन के माध्यम से प्रत्येक घर तक जल पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। इस सुविधा से महिलाओं को काफी राहत मिली है, जिन्हें पहले पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। अब उन्हें पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता और वे अपने अन्य कार्यों पर ज्यादा ध्यान दे पा रही हैं।घीकुड़िया में जल आपूर्ति की नई व्यवस्था से बच्चों की दिनचर्या में भी सार्थक बदलाव आया है। पहले जहां पानी लाने में समय व्यतीत होता था, वहीं अब बच्चे पढ़ाई और अन्य गतिविधियों में अधिक समय दे पा रहे हैं। साथ ही गांव में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ी है, जिससे जलजनित बीमारियों में भी कमी आई है। ग्रामीणों ने पानी की महत्ता को समझते हुए हर घर नल के साथ जिम्मेदारी भी निभानी शुरू कर दी है। जल संरक्षण और स्वच्छता को लेकर गांव में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।जल जीवन मिशन से जल की आपूर्ति शुरू होने के पहले गर्मी के मौसम में गांव में पानी की भारी किल्लत रहती थी। एक-एक बाल्टी पानी के लिए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ता था, जिससे समय की बर्बादी और स्वास्थ्य समस्याएं होती थीं, लेकिन अब जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन से घीकुड़िया के हर घर तक नियमित रूप से शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो रहा है।
- -जलवायु परिवर्तन कार्य योजना हेतु गठित स्टियरिंग समिति की बैठक सम्पन्नरायपुर। मुख्य सचिव श्री विकासशील ने कहा कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने और ग्राम पंचायतवार कार्ययोजना बनाएं। राज्य में जलवायु परिवर्तन कार्यक्रमों के लिए सीएसआर मद की उपलब्ध राशि का उपयोग करना प्रस्तावित करें। छत्तीसगढ़ राज्य की जलवायु परिवर्तन पर कार्य योजना के लिए गठित स्टियरिंग समिति की बैठक आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केन्द्र, राज्य की जलवायु परिवर्तन पर कार्य योजना, राज्य में जलवायु परिवर्तन विषयक कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और राज्य जलवायु परिवर्तन प्राधिकरण के गठन और राज्य में कार्बन क्रेडिट आधारित कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के संबंध में विचार-विमर्श किया गया। विभागीय सचिवों से जलवायु परिवर्तन पर कार्ययोजना के क्रियान्वयन से संबंधित विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा ने जलवायु परिवर्तन की पृष्ठ भूमि, जलवायु परिवर्तन के कारक और छत्तीसगढ़ राज्य में भी जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभाव के संबंध में जानकारी दी। बैठक में पीसीसीएफ श्री श्रीनिवास राव, एपीसीसीएफ श्री सुनील मिश्रा शामिल हुए।छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केन्द्र के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में जलवायु परिवर्तन से संबंधित विविध कार्य किये जा रहें हैं। इनमें मुख्यतः वृक्षारोपण कार्य किये जा रहें हैं। एक पेड़ माँ के नाम योजना के तहत् करीब 7 करोड़ पौधारोपण किया जा चुका है। किसान वृ़क्ष मित्र योजना के तहत् 3 करोड़ 68 लाख वृक्षारोपण किया गया। अधिकारियों ने बताया कि आई.एस.एफ.आर. 2025 के अनुसार राज्य के वन एवं वृक्ष-आवरण में सर्वाधिक वृद्धि 683 किलोमीटर किया गया है, जो देश में प्रथम स्थान पर रहा है। राज्य में जलवायु परिवर्तन के तहत ई-वाहनों के चालन के लिए जन-सामान्य को प्रेरित किया जा रहा है। किसानों को सोलर पम्प वितरित किये जा रहे हैं।अधिकारियों ने बताया कि राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्ष 2025-2026 में लगभग 55 हजार 50 हेक्टेयर भूमि पर जैविक खेती की गई। राज्य में 300 से अधिक बांधों की हाईड्रोलॉजिकल प्लानिंग के साथ 24 वृहद एवं मध्यम जलाशयों का सेडिमेंटेशन सर्वे पूर्ण किया जा चुका है। राज्य में जलवायु परिवर्तन ज्ञान केन्द्र निर्मित किए जाने के लिए अधिकारियों ने अपने विचार रखें।बैठक में जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना के क्रियान्वयन के संबंध में कृषि एवं किसान कल्याण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन, नगरीय प्रशासन, परिवहन, वाणिज्य एवं उद्योग, खनिज, ऊर्जा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, महिला एवं बाल विकास और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों अपने-अपने विभाग की जानकारी प्रस्तुत की।बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंस से आयोजित इस बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, विधि एवं विद्यायी विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती सुषमा सावंत, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, खनिज संसाधन एवं मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी.दयानंद, नगरीय प्रशासन विकास विभाग एवं मुख्यमंत्री के सचिव श्री बसवराजु एस., वाणिज एवं उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, परिवहन विभाग के सचिव श्री एस.प्रकाश, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की विशेष सचिव सुश्री इफ्फत आरा सहित राज्य योजना आयोग, नाबार्ड, सेंटर फॉर एन्वायरमेंट एजुकेशन, इंडियन इंस्टयूट ऑफ साइंस और कृषि मौसम विज्ञान विभाग, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अधिकारी सहित राज्य शासन के विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए।
- रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में टिकाऊ और जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में जशपुर जिले में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के उद्देश्य से हरी खाद के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है।कृषि विभाग द्वारा जिले के सभी विकासखंडों में इस वर्ष 600 हेक्टेयर क्षेत्र में हरी खाद का प्रदर्शन किया जा रहा है। किसानों से अपील की गई है कि वे कृषि विभाग के मैदानी अमले से संपर्क कर हरी खाद तकनीक अपनाएं, जिससे मिट्टी की सेहत में सुधार के साथ दीर्घकालीन उत्पादकता सुनिश्चित हो सके।हरी खाद के अंतर्गत ढेंचा, सनई, मूंग, उड़द और बरसीम जैसी फसलों को खेत में उगाकर 40 से 50 दिन बाद जुताई कर मिट्टी में मिला दिया जाता है। इसके पश्चात 2 से 3 सप्ताह बाद मुख्य फसल की बुवाई की जाती है। यह प्रक्रिया मिट्टी में प्राकृतिक पोषक तत्वों की पूर्ति करती है।हरी खाद के उपयोग से मिट्टी में नाइट्रोजन, पोटाश एवं अन्य आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है, साथ ही जैविक पदार्थों में वृद्धि होती है। इससे मिट्टी की जलधारण क्षमता बेहतर होती है और भूमि भुरभुरी एवं अधिक उपजाऊ बनती है। हरी खाद अपनाने से रासायनिक उर्वरकों, विशेषकर यूरिया, की आवश्यकता में कमी आती है।विशेषज्ञों के अनुसार, हरी खाद का उपयोग कम लागत में अधिक लाभ देने वाला उपाय है, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक है। राज्य सरकार द्वारा इस दिशा में किए जा रहे प्रयास किसानों को आत्मनिर्भर और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।
- रायपुर । छत्तीसगढ़ में समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित “छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम” की योजनाएं आज हजारों दिव्यांगजनों के जीवन में उम्मीद की नई किरण बनकर उभर रही हैं। राज्य सरकार की संवेदनशील पहल और सशक्त क्रियान्वयन ने दिव्यांगजनों को न केवल आर्थिक संबल दिया है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर भी प्रदान किया है।रायपुर की श्रीमती गिरजा जलक्षेत्री इस बदलाव की जीवंत मिसाल हैं। 60 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद उन्होंने अपने आत्मविश्वास और शासन की योजना के सहारे अपने जीवन को नई दिशा दी। वर्ष 2017 में निगम से 1 लाख 75 हजार रुपये का ऋण लेकर उन्होंने ई-रिक्शा संचालन शुरू किया। कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने निरंतर परिश्रम किया और समय पर ऋण चुकाकर 25 प्रतिशत अनुदान का लाभ भी प्राप्त किया।श्रीमती गिरजा जलक्षेत्री यहीं नहीं रुकीं उन्होंने आगे बढ़ते हुए 2 लाख 75 हजार रुपये का अतिरिक्त ऋण लेकर अपने कार्य का विस्तार किया। आज वे रायपुर के कोर्ट परिसर में चाय एवं नाश्ता केंद्र संचालित कर रही हैं। यह केंद्र सिर्फ उनका व्यवसाय नहीं, बल्कि कई अन्य दिव्यांगजनों के लिए रोजगार का माध्यम बन चुका है। वर्तमान में लगभग 10 दिव्यांगजन उनके साथ कार्य कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं।राज्य सरकार की इस योजना के तहत दिव्यांगजनों को 10 हजार रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक का ऋण अत्यंत रियायती ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। महिला हितग्राहियों के लिए 5 प्रतिशत और पुरुषों के लिए 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर निर्धारित है। साथ ही, समय पर ऋण अदायगी करने पर 25 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान, इस योजना को और अधिक प्रभावी बनाता है।इस योजना के माध्यम से राज्यभर में दिव्यांगजन किराना दुकान, सिलाई-कढ़ाई, फैंसी स्टोर, सायकल रिपेयरिंग, चाय-नाश्ता केंद्र जैसे अनेक छोटे-छोटे व्यवसाय स्थापित कर रहे हैं। इससे वे न केवल अपनी आजीविका चला रहे हैं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर रहे हैं।रायपुर जिले में अब तक 187 से अधिक दिव्यांगजनों को इस योजना का लाभ मिल चुका है, जो इस पहल की सफलता को दर्शाता है। छत्तीसगढ़ आज समावेशी विकास की दिशा में एक मजबूत उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है, जहां हर वर्ग को आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।
- -उपार्जन केंद्रों पर बढ़ी किसानों की भीड़रायपुर। प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) 2018 में शुरू की गई एक प्रमुख सरकारी योजना है। इसका उद्देश्य दलहन, तिलहन किसानों को उनकी उपज का लाभकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सुनिश्चित करना है। यह योजना मूल्य अस्थिरता को कम कर किसानों की आय की रक्षा करती है। प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) के तहत छत्तीसगढ के धमतरी जिले में चना खरीदी का कार्य अब अपने अंतिम और निर्णायक चरण की ओर बढ़ रहा है। राज्य में सर्वाधिक चना उत्पादक जिले के रूप में अपनी धाक जमा चुके धमतरी में, अब उपार्जन केंद्रों पर किसानों की चहल-पहल और भी बढ़ गई है।जिले की 76 हजार क्विंटल की शानदार उपलब्धि के बाद, कृषि विभाग अब शेष 24 हजार क्विंटल के लक्ष्य को पूरा करने के लिए मिशन मोड पर है। राज्य स्तरीय कृषि अधिकारियों का मानना है कि धमतरी जिले द्वारा अपनाई गई पारदर्शी पंजीकरण और त्वरित भुगतान की प्रणाली (DBT) अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी है। प्रशासन की सक्रियता से किसानों को प्राथमिकता मिल रही है। जिले के 11 खरीदी केंद्रों पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है।कलेक्टर ने उपार्जन केंद्रों पर नोडल अधिकारियों की तैनाती बढ़ा दी है, ताकि तौल से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया में कहीं कोई बाधा न आए। इसके साथ ही उन्होंने परिवहन में तेजी लाने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए हैं। खरीदी गई उपज को जल्द से जल्द गोदामों तक पहुँचाने के लिए परिवहन की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है, जिससे केंद्रों पर किसानों को अपनी बारी का इंतजार न करना पड़े। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि उपज लेकर आने वाले किसी भी किसान को निराश होकर न लौटना पड़े।उपार्जन केंद्रों पर मौजूद किसानों का कहना है कि समर्थन मूल्य पर त्वरित भुगतान मिलने से उन्हें रबी की कटाई के बाद के खर्चों को संभालने में बहुत मदद मिल रही है। समय पर मिल रहे इस आर्थिक संबल के कारण किसानों का रुझान अब अन्य फसलों की तुलना में दलहन उत्पादन की ओर अधिक बढ़ रहा है। यह योजना न केवल किसानों को सही दाम दिलाती है, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को भी नियंत्रित करती है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अगले कुछ दिनों में शेष लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी संसाधन झोंक दिए जाएंगे। प्रशासनिक स्तर पर किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने संबंधित उपार्जन केंद्रों के नोडल अधिकारियों से संपर्क बनाए रखें ताकि खरीदी प्रक्रिया सुगमता से संपन्न हो सके।
- - निर्माण कार्यों में बढ़ रही ‘साईं बाबा समूह’ की आजीविकारायपुर । छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, जिसे ष्बिहानष् के नाम से जाना जाता है, ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी कम करने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का एक प्रमुख कार्यक्रम है। यह भारत सरकार के दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का छत्तीसगढ़ में क्रियान्वयन कर रहा है। ग्रामीण गरीब परिवारों, विशेषकर महिलाओं के लिए स्थायी और विविध स्व-रोजगार के अवसर पैदा करना ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके।छत्तीसगढ़ में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाली ‘बिहान’ (छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन) योजना महिलाओं के जीवन में सामाजिक और आर्थिक बदलाव का बड़ा माध्यम बन रही है। सरगुजा जिले में सहारा आजीविका क्लस्टर के उदयपुर विकासखंड के डाड़गांव की रहने वाली सकीना की कहानी आज अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। जो सकीना कभी बैंक जाने के नाम से घबराती थीं, वे आज स्वयं सहायता समूह के माध्यम से न केवल अपना व्यवसाय संचालित कर रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं।अभिसरण का कमालः डीएमएफ मद से मिली मिक्सर मशीनशासन की विभिन्न योजनाओं के आपसी समन्वय से जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव आ रहे हैं। इसी कड़ी में जिला प्रशासन की पहल पर डीएमएफ मद से सीमेंट मिक्सर मशीनें समूहों प्रदान की गई हैं। इन्ही में से एक मशीन ‘रामगढ़’ ग्राम संगठन के ‘साईं बाबा समूह’ को मिली, जिसकी सदस्य सकीना हैं। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्र में उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहयोग और प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।निर्माण कार्यों में बढ़ी भागीदारी, बढ़ी आमदनीसकीना ने बताया कि उन्होंने अपनी आजीविका विस्तार के लिए समूह से 60,000 का ऋण लिया था। समूह को मिली मिक्सर मशीन और शटरिंग प्लेट्स अब उनकी आय का मुख्य जरिया बन गई हैं। वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहे प्रधानमंत्री आवास निर्माण कार्यों के लिए उनकी मिक्सर मशीन और शटरिंग प्लेट्स की भारी मांग है। उन्होंने बताया कि ट्रांसपोर्टिंग और अन्य खर्चे निकालकर समूह से अब तक 6,000 से 7,000 की प्रतिदिन की कमाई हो रही है।आत्मविश्वास से भरा सफरः बैंक जाने की हिचकिचाहट हुई खत्मसकीना अपनी सफलता का श्रेय बिहान योजना को देते हुए कहती हैं, पहले मुझे बैंक जाने में भी डर लगता था, लेकिन समूह से जुड़ने के बाद मैं जागरूक और सक्रिय हो गई हूँ। अब मुझे किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं है, मैं खुद सक्षम हूँ। अब मैं दूसरी दीदियों को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती हूँ।बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींवसकीना की आर्थिक मजबूती का सीधा असर उनके परिवार पर पड़ा है। उनकी बेटी अब कॉलेज में है और बेटा हाई स्कूल की पढ़ाई कर रहा है। सकीना का कहना है कि आर्थिक स्वतंत्रता मिलने से अब बच्चों की पढ़ाई-लिखाई बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चल रही है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उनकी वार्षिक आय 1 लाख रुपये से अधिक करने का प्रयास किया जा रहा है।योजना के लिए शासन का जताया आभारसकीना ने अपनी इस सफलता और आत्मनिर्भरता के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की इन योजनाओं ने ग्रामीण महिलाओं को केवल काम ही नहीं दिया, बल्कि समाज में एक सम्मानित पहचान भी दी है।
- -कबीरधाम जिले की बेटियों की शिक्षा को मिली नई उड़ान, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने दी आर्थिक सहायतारायपुर । कबीरधाम जिले में बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उप मुख्यमंत्री व कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा ने आर्थिक सहायता प्रदान कर एक प्रेरणादायक पहल की है। उन्होंने जरूरतमंद छात्राओं की पढ़ाई में सहयोग करते हुए ग्राम हरमो निवासी भारती साहू को 2 लाख रुपए तथा ग्राम चिल्फी निवासी रंजना झारिया को 25 हजार रुपए की राशि प्रदान की। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के निर्देश पर उक्त राशि के चेक प्रदान किए गए। इस अवसर पर श्री नरेन्द्र मानिकपुरी, श्री अमर कुर्रे, श्री ओमकार साहू, श्री लोकचंद साहू, श्री मिलू साहू उपस्थित रहे।इस दौरान रंजना झारिया ने बताया कि उनके पिता के निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई थी, जिसके कारण उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई थी। उन्होंने कहा कि जब उन्हें जानकारी मिली कि उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा जरूरतमंदों की मदद करते हैं, तब उन्होंने उनसे संपर्क कर अपनी समस्या बताई। उनकी स्थिति को समझते हुए श्री शर्मा ने 25 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की। रंजना ने बताया कि इस सहायता से वह अब दोबारा नर्सिंग की पढ़ाई शुरू कर सकेंगी और अपने भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगी। उन्होंने इसके लिए उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह मदद उनके जीवन में नई उम्मीद लेकर आई है।
- -खस की जड़ों से माला, तोरण, हाथ का पंखा सहित सात प्रकार की आकर्षक कलाकृतियांरायपुर ।खस की सुगंधित जड़ों से शिल्प कला कृतियां और उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण एक पारंपरिक और पर्यावरण-अनुकूल कौशल है, जो ग्रामीण कारीगरों, विशेष रूप से महिलाओं को सशक्त बनाता है। खस की जड़ों को साफ करके, सुखाकर और कभी-कभी भिगोकर (लचीलापन बढ़ाने के लिए) उपयोग किया जाता है। छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड (वन विभाग) द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल की गई। 25-26 अप्रैल को बोर्ड कार्यालय के सभागार में खस (वेटीवर) की सुगंधित जड़ों से शिल्प कला कृतियां और उत्पाद बनाने का दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया।इस प्रशिक्षण का उद्देश्य धमतरी जिले में नदी किनारे खस की खेती कर रही महिला स्व-सहायता समूहों की आय बढ़ाना है। प्रशिक्षण में कुरूद विकासखंड के तीन गांवों के चार महिला स्व सहायता समूहों की सदस्य शामिल हुईं। इनमें ग्राम नारी से अन्नपूर्णा और जय मां सरस्वती समूह, ग्राम परखंदा से धान का कटोरा उत्पादन समिति तथा ग्राम मदरौद से वंदना महिला स्व सहायता समूह की महिलाएं शामिल रहीं। प्रशिक्षण के माध्यम से खस की जड़ों से मैट (चटाई), परदे, टोकरियाँ, पेन स्टैंड, छोटे बक्से, सजावटी सामान और ज्वेलरी जैसे उत्पाद बनाए जाते हैं।प्रशिक्षण देने के लिए तमिलनाडु के मदुरै से विशेषज्ञ प्रशिक्षक श्रीमती निर्मला और श्री शन्वगम को आमंत्रित किया गया। श्रीमती निर्मला ने महिलाओं को खस की जड़ों से माला, तोरण, हाथ का पंखा सहित सात प्रकार की आकर्षक कलाकृतियां बनाना सिखाया। कार्यक्रम के दौरान बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने प्रशिक्षणार्थियों से मुलाकात कर उनके द्वारा बनाई गई कलाकृतियों का अवलोकन किया और उनका उत्साह बढ़ाया। उन्होंने बताया कि धमतरी में नदी किनारे खस की खेती का मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत हो चुका है और इसे आगे पूरे प्रदेश में लागू करने की योजना बनाई जा रही है।बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जे.ए.सी.एस. राव ने जानकारी दी कि वर्ष 2026 में बस्तर क्षेत्र की शबरी और इंद्रावती नदी के किनारे भी खस की खेती के इस मॉडल को विकसित किया जा रहा है, जिसे आगे अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार दिया जाएगा। खस से बने उत्पाद न केवल सुगंधित होते हैं, बल्कि प्राकृतिक रूप से ठंडक देने वाले और एंटी-टर्माइट (दीमक रोधी) गुण वाले भी होते हैं। प्रशिक्षक श्रीमती निर्मला ने बताया कि खस से बने उत्पादों की बाजार में काफी मांग है। खस की माला, तोरण और अन्य छोटे उत्पाद अच्छी कीमत पर बिकते हैं। इन उत्पादों की खासियत उनकी सुगंध और आकर्षक डिजाइन है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिला विकास केंद्रों के माध्यम से भी यह हुनर सिखाया जाता है। यह कौशल महिलाओं और कारीगरों को रोजगार के नए अवसर प्रदान करता है।प्रशिक्षण में शामिल महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने बोर्ड के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर औषधीय पौधों की खेती के सलाहकार श्री डी.के.एस. चौहान तथा धमतरी जिले के समन्वयक श्री फकीर राम कोसरिया सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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-संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के विद्यार्थियों को मिलेगी सुविधा
रायपुर। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज लोकभवन में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ की नई बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह पहल छात्रों और स्टाफ के लिए परिवहन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से की गई है।इस वाहन के माध्यम से विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को कला, संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए विभिन्न स्थानों तक आवागमन में सुविधा मिलेगी। इससे विद्यार्थियों को अपने प्रतिभा प्रदर्शन के लिए बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। यह कदम विश्वविद्यालय के सुचारू संचालन और छात्रों की यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए उठाया गया है।राज्यपाल श्री डेका ने वाहन के सदुपयोग, नियमित रखरखाव और विद्यार्थियों के हित में प्रभावी उपयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे संसाधन संस्थानों की शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को नई गति देते हैं। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. लवली शर्मा सहित विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। - अम्बिकापुर । उपसंचालक रोजगार ने बताया कि जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र अम्बिकापुर के द्वारा 28 अप्रैल 2026 को प्रातः 11:00 बजे से सायं 4:00 बजे तक जिला स्तरीय रोजगार मेला का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें विभिन्न क्षेत्र के निजी नियोजक विभिन्न तकनीकी एवं गैर तकनीकी लगभग 335 पदों पर साक्षात्कार के लिए उपस्थित रहेंगे। जिला स्तरीय रोजगार मेला पूर्णतः निःशुल्क है। नियुक्ति की शर्तों के लिए नियोजक स्वयं जिम्मेदार होंगे। कार्यालय की भूमिका इस पूरी प्रक्रिया में सिर्फ सुविधाप्रदाता के रूप में होगी। जिले के इच्छुक ऐसे समस्त आवेदक जो रोजगार मेला में भाग लेना चाहते है, अपने साथ शैक्षणिक योग्यता की अंकसूची, निवास प्रमाण पत्र, पासपोर्ट साईज के फोटो के साथ 28 अप्रैल 2026 दिन को प्रातः 11:00 बजे से सायं 04:00 बजे तक जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र गंगापुर अम्बिकापुर में आयोजित जिला स्तरीय रोजगार मेला में उपस्थित होकर रोजगार के अवसर का लाभ प्राप्त कर सकते है। जिला स्तरीय रोजगार मेला हेतु सरगुजा संभाग के समस्त शिक्षित युवाओं को रोजगार मेला में सहभागिता हेतु ऑनलाईन पोर्टल www.erojar.cg.gov.in एवं छत्तीसगढ़ रोजगार एप पर अपना रोजगार पंजीयन, रोजगार मेले हेतु पंजीयन दोनों ही आवश्यक है। अतः ऐसे आवेदक जिन्होंने ऑनलाईन पोर्टल ई-रोजगार पर अपना पंजीयन नहीं करवाया है, वे विभागीय पोर्टल पर अपना पंजीयन करवा सकते हैं।
- अम्बिकापुर। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि आगामी 30 अप्रैल को पूरे देश में आयुष्मान भारत दिवस मनाया जाएगा। जिसके अंतर्गत आयुष्मान भारत कार्ड निर्माण हेतु जिले में तीनदिवसीय शिविर आयोजित किया जाएगा। यह शिविर 28 अप्रैल, 29 अप्रैल एवं 30 अप्रैल को लगाया जाएगा, जिसमें लोगों का आयुष्मान भारत कार्ड बनाया जाएगा तथा योजना के लाभ के बारे में बताया जाएगा। जिले में कुल लक्ष्य 922111 के विरूद्ध में 842431 कार्ड निर्माण किया जा चुका है। हितग्राही अपना राशन कार्ड, आधार कार्ड लेकर अपने नजदीकी पंचायत भवन, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं उप स्वास्थ्य केन्द्र में जाकर निःशुल्क कार्ड बनवा सकते हैं। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत बीपीएल परिवार को 05 लाख एवं एपीएल परिवार को प्रति वर्ष 50 हजार रूपये का मुफ्त इलाज की सुविधा प्रदान करता है। आयुष्मान वय वंदना के तहत 70 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को 05 लाख तक का मुफ्त इलाज की सुविधा प्रदान करता है। मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत गंभीर बीमारियों लिवर प्रत्यारोपण, किडनी प्रत्यारोपण फेफड़ा प्रत्यारोपण, हृदय रोग, कैंसर, एप्लास्टिक अमीनिया, एसिड अटैक के उपचार के लिए 25 लाख तक की मुफ्त उपचार की सुविधा उपलब्ध है।
- -मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में प्रदेश ने रचा नया कीर्तिमानरायपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत श्रमिकों के ई-के वाय सी कार्य में छत्तीसगढ़ ने पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 97.11 प्रतिशत सक्रिय श्रमिकों का ई-के वाय सी पूर्ण कर लिया गया है, जो राष्ट्रीय स्तर पर सर्वाधिक है। खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ ने केरलम, त्रिपुरा, मिजोरम जैसे छोटे राज्यों तथा कर्नाटक, तमिलनाडु जैसे बड़े राज्यों को भी पछाड़कर यह उपलब्धि हासिल की है।महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ;मनरेगा के तहत श्रमिकों की ई.केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया को पूरा करने में छत्तीसगढ़ ने देश भर में अग्रणी स्थान हासिल किया है। प्रदेश में लगभग 56.87 लाख से ज्यादा मजदूरों की डिजिटल वेरिफिकेशन (e-KYC) पूरी की गई है जो भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित करती है। यह डिजिटल प्रक्रिया फर्जी जॉब कार्डों को हटाने और सीधे वास्तविक लाभार्थियों के बैंक खातों में मजदूरी पहुंचाने में मदद कर रही है।यह उपलब्धि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के कुशल मार्गदर्शन एवं उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा के सतत नेतृत्व, मॉनिटरिंग और प्रभावी रणनीति का परिणाम है। राज्य में योजनाबद्ध ढंग से अभियान चलाकर ई-के वाय सी की प्रक्रिया को तेज किया गया, जिससे बड़ी संख्या में श्रमिकों को समयबद्ध रूप से इससे जोड़ा जा सका।रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में कुल 58 लाख से अधिक सक्रिय श्रमिकों में से 56 लाख से अधिक का ई-के वाय सी सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है। यह उपलब्धि न केवल प्रशासनिक दक्षता को दर्शाती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार गरीब और श्रमिक वर्ग के हितों के संरक्षण एवं उन्हें योजनाओं का पारदर्शी लाभ दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। ई-के वाय सी के माध्यम से श्रमिकों को समय पर भुगतान एवं योजनाओं का सीधा लाभ सुनिश्चित हो रहा है।उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्राम स्तर पर कार्यरत टीमों के समन्वित प्रयास का परिणाम है। उन्होंने बताया कि ई-के वाय सी से न केवल फर्जीवाड़े पर रोक लगी है, बल्कि वास्तविक हितग्राहियों तक लाभ पहुंचाने में भी पारदर्शिता आई है। श्री शर्मा ने सभी संबंधित अधिकारियों को बधाई देते हुए निर्देशित किया कि शेष लंबित प्रकरणों को भी शीघ्र पूर्ण कर प्रदेश को 100 प्रतिशत e-KYC (ई - के वाय सी) लक्ष्य की ओर अग्रसर किया जाए।प्रदेश में चलाए गए विशेष अभियान, ग्राम पंचायत स्तर पर जनजागरूकता और तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग से यह सफलता हासिल हुई है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को डिजिटल गवर्नेंस और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करती है।
- रायपुर । राज्यपाल रमेन डेका से आज लोक भवन में छत्तीसगढ़ शासन के चीफ इंस्पेक्टर ऑफ फैक्ट्रीज श्री हिम शिखर गुप्ता ने मुलाकात की। भेंट के दौरान राज्यपाल श्री डेका ने कारखानों में होने वाली औद्योगिक दुर्घटनाओं को रोकने और श्रमिकों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।राज्यपाल ने निर्देश दिए कि कारखानों में सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन हो, मशीनों की नियमित जांच की जाए तथा कर्मचारियों को समय-समय पर सुरक्षा प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा व्यवस्था की लगातार मॉनिटरिंग की जाए, ताकि संभावित दुर्घटनाओं को समय रहते रोका जा सके और श्रमिकों के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण तैयार हो।
- रायपुर । राज्यपाल श्री रमेन डेका से आज लोकभवन में 64 अंतर्राष्ट्रीय पदक विजेता पैरा आर्मरेसलर श्री श्रीमंत झा ने सौजन्य भेंट की। उन्होंने हाल ही में नार्वे के ईदफ्योर्ड में आयोजित हुए पैरा आर्मरेसलिंग कप 2026 प्रतियोगिता में 85 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीत कर देश का नाम रोशन किया है।छत्तीसगढ़ के भिलाई के निवासी श्रीमंत झा एक प्रसिद्ध भारतीय पैरा-आर्मरेसलर (विकलांग कुश्ती खिलाड़ी) हैं, जिन्होंने नॉर्वे पैरा-आर्म रेसलिंग कप 2026 में 85 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम रौशन किया है। वे एशिया नंबर-1 और वर्ल्ड नंबर-3 के रूप में पहचान रखते हैं और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अब तक 64 से अधिक पदक जीत चुके हैं। श्री झा ने राज्यपाल को अपनी उपलब्धियों की जानकारी दी। श्री डेका ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी तथा उनका सम्मान किया।
- -टी सहदेवभिलाई नगर। तालपुरी बी ब्लॉक रेसिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के चुनाव में स्वाभिमान पैनल के सुनील चौरसिया ने एकता पैनल के कुबेर राम देशमुख को पराजित कर अध्यक्ष पद अपने नाम कर लिया है। वहीं महासचिव पद पर टाई होने के कारण टॉस किया गया, जिसमें एकता पैनल के रवींद्र कुमार दत्ता विजयी घोषित किए गए। इस दो कोणीय मुकाबले में स्वाभिमान पैनल की झोली में चार पद, जबकि एकता पैनल की झोली में तीन पद आए। इस चुनाव में सिंगल वोट को अवैध घोषित करने के कारण विवाद की स्थिति रही। वैसे आमतौर पर सिंगल वोट को मान्य करने का चलन रहा है। सिंगल वोट को वैधता मिलती तो परणामों में उलटफेर हो सकता था।भीषण गर्मी में भी बंपर वोटिंगरविवार को सुबह आठ बजे से दोपहर तीन बजे तक हुए मतदान में भीषण गर्मी के बावजूद 83 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। यह चुनाव एक अध्यक्ष, दो उपाध्यक्षों, एक महासचिव, दो उप महासचिवों एवं एक कोषाध्यक्ष पद के लिए था। एसोसिएशन के अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में उतरे कुबेर राम देशमुख और सुनील चौरसिया के बीच एकतरफा मुकाबला देखने को मिला। जहां चौरसिया के पक्ष में 214 मत पड़े, वहीं देशमुख को 148 मतों से तसल्ली करनी पड़ी। उपाध्यक्ष पद पर अपनी किस्मत आजमा रहे स्वाभिमान पैनल के डॉ लक्षप्रद को 159 तथा एकता पैनल के जितेंद्र सिंह को 145 मत मिले। दोनों ही विजेता घोषित किए गए, जबकि दूसरी ओर इसी पद पर एकता पैनल के महेश विश्वकर्मा (142) तथा स्वाभिमान पैनल के भीमराव फुसे (134) को हार का सामना करना पड़ा।महासचिव पद का फैसला टॉस सेमहासचिव पद पर रवींद्र कुमार दत्ता और के आर देशमुख के बीच हार-जीत का फैसला सिक्का उछालकर किया गया, जिसमें दत्ता विजयी हुए। दत्ता और देशमुख को 145-145 मत मिले, इस पद के लिए खड़े एक स्वतंत्र प्रत्याशी रूपेंद्र कुमार वर्मा को महज 64 मत ही मिले। उप महासचिव पद पर दोनों पैनलों के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। इन पदों पर स्वाभिमान पैनल की महिला प्रत्याशी पायल सिंह पवार और एकता पैनल के उम्मीदवार श्यामलाल साहू ने जीत हासिल की। पायल को 170 वोट, जबकि साहू को 153 वोट मिले। दूसरी ओर स्वाभिमान पैनल के सत्यनारायण महाराणा के पक्ष में151मत तथा एकता पैनल के टी सहदेव के पक्ष में 129 मत पड़े। टी सहदेव ने अपने पक्ष में भारी संख्या में पड़े सिंगल वोटों को चुनाव अधिकारी द्वारा अवैध घोषित करने के कारण अपना तीव्र विरोध जताया। कोषाध्यक्ष पद का नतीजा स्वाभिमान पैनल के पक्ष में आया। स्वाभिमान पैनल के रामनारायण साहू को 204 और अमल कुमार दास को 158 वोट मिले।टेंट लगाने और रैली को लेकर विवादक्लबहाउस में चुनाव को लेकर सुबह से ही काफी गहमागहमी रही। वोटिंग से लेकर मतगणना तक भीड़ जुटी रही। इस चुनाव में 439 लोगों को ही मताधिकार प्राप्त था। इससे पहले मतदान की पूर्व संध्या पर टेंट लगाने को लेकर विवाद की स्थिति रही। स्वाभिमान पैनल का टेंट मतदान केंद्र के ठीक सामने ठीक था, जबकि एकता पैनल का टेंट मतदान केंद्र से काफी दूर था। जिसे लेकर एकता पैनल ने चुनाव अधिकारी संदीप नंदनवार के सामने अपना विरोध दर्ज किया था। इसके अलावा स्वाभिमान पैनल द्वारा मतदान की पूर्व संध्या पर चुनावी रैली निकाली गई, जिस पर भी एकता पैनल ने कड़ी आपत्ति दर्ज की।
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*12 हजार से अधिक पुस्तकें दान दी जा चुकी है*
*आप भी इस पहल से जुड़कर ज्ञान के दान में बनें भागीदार*रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन द्वारा संचालित स्मृति पुस्तकालय योजना जनभागीदारी का प्रेरक उदाहरण बनती जा रही है। इस पहल के माध्यम से लोग स्वेच्छा से पुस्तकें और इलेक्ट्रोनिक्स गैजेट दान कर युवाओं के उज्ज्वल भविष्य निर्माण में योगदान दे रहे हैं।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में इस सराहनीय योगदान की सराहना करते हुए सहायक लेखाधिकारी सुश्री स्वाति देवांगन को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया| सुश्री देवांगन ने यूपीएससी, पीएससी एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के नोट्स सहित अन्य विषयों की 300 से अधिक पुस्तकें जिला प्रशासन को दान कीं।सुश्री देवांगन ने बताया कि उन्हें इस योजना की जानकारी विभागीय बैठक के माध्यम से मिली। उन्होंने कहा कि समाज के लिए कुछ सकारात्मक करने की भावना से उन्होंने पुस्तक दान का निर्णय लिया। उन्हें खुशी है कि इन पुस्तकों से जरूरतमंद विद्यार्थियों को पढ़ने और आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।उल्लेखनीय है कि स्मृति पुस्तकालय योजना के तहत अब तक 12 हज़ार पुस्तकें और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स दान किए जा चुके हैं। इन संसाधनों का लाभ लेकर अनेक विद्यार्थी अपनी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को नई दिशा दे रहे हैं।जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे भी इस पुनीत पहल से जुड़कर ज्ञान के दान में भागीदार बनें और युवाओं के सपनों को साकार करने में सहयोग दें। पुस्तक अथवा इलेक्ट्रॉनिक गैजेट दान करने के इच्छुक नागरिक श्री प्रभात सक्सेना (94060 49000) एवं श्री केदार पटेल (94255 02970) से संपर्क कर सकते हैं।इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री टंकराम वर्मा, सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक श्री अनुज शर्मा, विधायक श्री इंद्र कुमार साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल, कलेक्टर डॉ गौरव सिंह, जिला पंचायत सीईओ श्री कुमार बिश्वरंजन सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे। -
*मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा - बच्चों के पढ़ाई में मिलेगी मदद*
रायपुर/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने हेतु अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च 2026 को शुरू की गई ‘लक्ष्मी सखी मिलेट कार्ट’ योजना से महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। इस योजना के तहत महिलाएं मिलेट्स से बने स्वस्थ व्यंजन आम लोगों को परोसकर रोजगार प्राप्त कर रही हैं।राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कौशल्या विहार निवासी श्रीमती सी. राजेश्वरी राव को मिलेट कार्ट प्रदान किया।श्रीमती राजेश्वरी ने बताया कि वे पहले अपने समृद्धि महिला स्व सहायता समूह के माध्यम से ग्रामोद्योग विभाग के अंतर्गत विभिन्न कार्य करती थीं। महिला एवं बाल विकास विभाग की इस योजना की जानकारी मिलने पर उन्होंने आवेदन किया। आज मुख्यमंत्री के हाथों मिलेट कार्ट मिलने पर उन्होंने छत्तीसगढ़ शासन एवं जिला प्रशासन का धन्यवाद किया।राजेश्वरी ने कहा कि इस योजना से उन्हें बहुत लाभ हुआ है और वे बेहद खुश हैं। मिलेट कार्ट से होने वाली आमदनी से वे अपना घर चला सकेंगी और बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी उठा पाएंगी।उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार की इस पहल से महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं ‘लक्ष्मी सखी मिलेट कार्ट’ के जरिए आत्मनिर्भर बन रही हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से पात्र SHG महिलाओं को आधुनिक फूड कार्ट उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिनमें कोदो, कुटकी, रागी जैसे स्थानीय मिलेट्स से बने पौष्टिक व्यंजन बेचे जा रहे हैं।इन कार्ट्स पर रागी डोसा, कोदो इडली, ज्वार उपमा, मिलेट कुकीज जैसे हेल्दी फूड विकल्प उपलब्ध कराए जा रहे हैं। विभाग द्वारा महिलाओं को स्वच्छता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाता है।इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार देकर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और प्रदेश के पारंपरिक मोटे अनाज को बढ़ावा देकर लोगों को सेहतमंद भोजन का विकल्प देना है। हितग्राही महिलाओं को इस कार्ट से प्रतिदिन 500 से 1500 रुपये तक की आमदनी हो रही है। -
*-परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल, गैजेट्स और ज्वेलरी पूर्णतः प्रतिबंधित, नियमों का उल्लंघन करने पर होगी सख्त कार्रवाई*
दुर्ग / कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आगामी 3 मई को होने वाली नीट (एनईईटी) परीक्षा की तैयारियों की समीक्षा हेतु जिला समन्वयकों और केंद्र अधीक्षकों की बैठक ली। बैठक के दौरान कलेक्टर श्री सिंह ने परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए । उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षा केंद्र के भीतर किसी भी प्रकार की अनैतिक गतिविधियों को रोकने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएं और अभ्यर्थियों की गहन जांच (सिक्योरिटी फ्रिस्किंग) सुनिश्चित की जाए। अभ्यर्थियों को किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए रिपोर्टिंग समय से कम से कम 2 घंटे पहले केंद्र पर पहुंचने की सलाह दी गई है। बैठक में परीक्षा केंद्र के भीतर वर्जित वस्तुओं की विस्तृत सूची साझा करते हुए अवगत कराया गया कि किसी भी परिस्थिति में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे मोबाइल फोन, ब्लूटूथ डिवाइस, इयरफोन, पेजर, स्मार्ट वॉच, कैलकुलेटर और पेन ड्राइव ले जाना सख्त मना है। इसके अतिरिक्त, स्टेशनरी मदों में ज्यामिति या पेंसिल बॉक्स, प्लास्टिक पाउच, लिखने के पैड, स्केल, इरेज़र और किसी भी प्रकार की लिखित सामग्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। व्यक्तिगत सामान जैसे वॉलेट, हैंडबैग, बेल्ट, टोपी, बड़े चश्मे और किसी भी प्रकार के आभूषण या धातु की वस्तुएं पहनकर आने की अनुमति नहीं होगी। परीक्षार्थियों को यह भी सूचित किया गया है कि वे अपने साथ पेन न लाएं, परीक्षा केंद्र पर पारदर्शी पेन उपलब्ध कराए जाएंगे। खाद्य पदार्थ और पानी की बोतलें (पारदर्शी बोतल को छोड़कर) भी प्रतिबंधित हैं। कलेक्टर ने कहा कि यदि कोई अभ्यर्थी इन प्रतिबंधित वस्तुओं के साथ पाया जाए, तो उसे 'अनफेयर मीन्स' (अनुचित साधन) का दोषी मानते हुए उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। -
*-नक्शा बटांकन और भू-अर्जन मुआवजा भुगतान में तत्परता लाने तहसीलदारों को सौंपी मैदानी निरीक्षण की जिम्मेदारी*
*-स्वामित्व योजना की प्रगति की समीक्षा**-राजस्व प्रकरणों के निराकरण में देरी पर जताई नाराजगी, लापरवाही पर नोटिस जारी करने के दिए निर्देश**-कोटवारी भूमि की बिक्री पर लगेगा पूर्णतः प्रतिबंधदुर्ग/ कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में राजस्व अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में उन्होंने अविवादित नामांतरण एवं अविवादित बटवारा(खाता विभाजन), विवादित नामांतरण एवं विवादित बटवारा, सीमांकन प्रकरण, व्यपवर्तन प्रकरण एवं आटो डायवर्सन, कोटवारी भूमि विक्रय पर सिविल वाद दायर, स्वामित्व योजना, भारतमाला व रेल अधिनियिम के तहत भू-अर्जन के लंबित प्ररकण, भू-आबंटन, जाति प्रमाण पत्र, राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4, डीसीएस सर्वेयरों के मानदेय भुगतान, कोर्स रजिस्ट्रेशन, राजस्व पखवाड़ा में प्राप्त आवेदनों के निराकरण, ई-डिस्ट्रिक्ट लोक सेवा गारंटी, अभिलेख शुद्धता, नजूल राजस्व प्रकरणों व नक्शा बटांकन की विस्तृत समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।बैठक में जिले में कोटवारी भूमि के अवैध विक्रय की जानकारी ली। कुल 90 प्रकरणों में से 89 मामलों में सिविल वाद दायर किया जाना है, अब तक 32 मामलों में वाद दायर किया गया है। 57 प्रकरण अभी लंबित हैं। कलेक्टर ने लंबित मामलों में तेजी लाने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए हैं। इसके साथ ही कलेक्टर ने जिले के सभी तहसीलदारों को निर्देशित किया है कि वे कोटवारी भूमि के सभी खसरा नंबरों की ग्रामवार सूची तैयार कर उपलब्ध कराएं। इस सूची के आधार पर पंजीयक द्वारा इन जमीनों के रजिस्ट्रेशन पर रोक (ब्लॉक) लगाई जाएगी, ताकि भविष्य में अवैध विक्रय पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके। अविवादित नामांतरण प्रकरणों के निराकरण में राजस्व न्यायालयों में निराकरण प्रतिशत 92.42 प्रतिशत दर्ज किया गया है। 16646 प्रकरणों में से 15385 का निराकरण किया है और 1237 प्रकरण अभी लंबित है। वहीं समय सीमा के बाहर 115 प्रकरण दर्ज किए गए हैं, जिन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। कई प्रकरण तकनीकी समस्याओं के कारण लंबित हैं। इस पर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन समस्याओं के समाधान के लिए पत्र तैयार कर उच्च स्तर पर प्रेषित किया जाए, ताकि लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित हो सके। हालिया समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने लंबित और समय सीमा से बाहर प्रकरणों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।कलेक्टर ने कहा कि ऐसे प्रकरण जो समय सीमा के बाहर हैं और जिनमें पटवारी द्वारा अभिलेख दुरुस्ती नहीं किए जाने के कारण मामले लंबित दिख रहे हैं, उन्हें गंभीरता से लिया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि इस तरह की लापरवाही के लिए संबंधित पटवारियों को नोटिस जारी किया जाए। जिले में सीमांकन से जुड़े प्रकरणों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर श्री सिंह ने अधिकारियों को लंबित मामलों के शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए। बैठक बताया गया कि कुल 1,242 प्रकरणों में से 1,080 का निराकरण किया जा चुका है। वहीं 162 प्रकरण अभी लंबित हैं और 65 मामले समय सीमा के बाहर दर्ज किए गए हैं। कलेक्टर ने इन आंकड़ों पर नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे फील्ड में जाकर लंबित और समय सीमा से बाहर प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द निराकरण सुनिश्चित करें। सीमांकन जैसे महत्वपूर्ण मामलों में देरी से आम नागरिकों को परेशानी होती है।कलेक्टर श्री सिंह ने सीमांकन से जुड़े प्रकरणों की समीक्षा की। कुल 1242 मामलों में से 1080 का निराकरण किया गया है। वहीं 162 प्रकरण लंबित और 65 समय सीमा के बाहर दर्ज है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को फील्ड में जाकर समय सीमा से बाहर और लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने को कहा। उन्होंने स्वामित्व योजना की प्रगति की जानकारी ली। जिले के 381 गांवों में ड्रोन सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है। 379 गांवों में आबादी भूमि के मैप-2 और मैप-3 प्राप्त हो चुके हैं। वहीं 106 गांवों में अंतिम प्रकाशन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और 273 गांवों में कार्य अभी प्रगति पर है। कलेक्टर ने अंतिम प्रकाशन के लिए शेष ग्रामों को शीघ्र करने को कहा, ताकि आगामी शिविर में वितरण का कार्य किया जा सके। कलेक्टर श्री सिंह ने भूमि-आबंटन के प्रकरणों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कहा शासकीय विभागों से भूमि आबंटन हेतु प्राप्त आवेदन को प्राथमिकता के साथ निपटाएं। कलेक्टर ने नक्शा बटांकन के कार्यों के सबंध में तहसीलदारों को निर्देशित किया कि मैदानी क्षेत्रों का निरीक्षण कर जमीन की वस्तुस्थिति जांच की जाए एवं नक्शा बटांकन किया जाना भी सुनिश्चित किया जाए। इसके अलावा उन्होंने भू-अर्जन के लंबित प्रकरणों एवं मुआवजा भुगतान, भारतमाला परियोजना, राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 के प्रकरणों का भी त्वरित निराकरण करने निर्देश दिए, जिससे प्रभावित लोगों को मुआवजा प्रदान करने में किसी भी प्रकार का विलंब न हो। कलेक्टर श्री सिंह ने जाति प्रमाण पत्र के लंबित प्रकरणों को गंभीरता के साथ शीघ्र निराकृत करने के निर्देश दिए।बैठक में एडीएम श्री विरेन्द्र सिंह, अपर कलेक्टर श्रीमती योगिता देवांगन, संयुक्त कलेक्टर री हरवंश मिरी, संयुक्त कलेक्टर श्रीमती सिल्ली थॉमस, एसडीएम श्री लवकेश धु्रव, श्री सोनाल डेविड, श्री महेश राजपूत, डिप्टी कलेक्टर श्री उत्तम धु्रव सहित सभी तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार, एएसएलआर उपस्थित थे। -
दुर्ग। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार से केबिनेट मंत्री गजेन्द्र यादव लौट आए हैं। वे आज सोमवार को दुर्ग के गंजपारा स्थित कार्यालय में दोपहर 12 बजे से जनदर्शन के लिए बैठेंगे, जहां वे कार्यकर्ताओं एवं आम नागरिकों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं सुनेंगे और निराकरण हेतु आवश्यक निर्देश देंगे।
मंत्री कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते 15 दिनों से शिक्षा, ग्रामोद्योग एवं विधि-विधायी मंत्री गजेन्द्र यादव पार्टी के निर्देशानुसार पश्चिम बंगाल के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में सक्रिय रहे। इस दौरान उन्होंने चुनावी जनसंपर्क, रोड शो एवं केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी की सभाओं को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने मतदाताओं से सघन संपर्क कर भाजपा के पक्ष में मतदान का आह्वान किया तथा बंगाल में भयमुक्त एवं सुशासन की सरकार बनाने के संकल्प को मजबूत किये। साथ ही, स्थानीय कार्यकर्ताओं में उत्साह एवं ऊर्जा का संचार किये।बंगाल प्रवास से लौटने पर आज दुर्ग के भाजपा कार्यकर्ताओं ने रायपुर विमानतल पर उनका भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में युवा मोर्चा एवं मंडल स्तर के कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने पूरे उत्साह और जोश के साथ मंत्री गजेन्द्र यादव का स्वागत कर उनके नेतृत्व पर विश्वास व्यक्त किये। -
- शिविर में बच्चों को आध्यात्म के प्रति जागरूक करने और पारंपरिक खेलों से जोड़ने का होगा अभिनव प्रयास
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति की ओर से एक मई से 30 मई तक तक ग्रीष्मकालीन बाल संस्कार शिविर लगाया जा रहा है। हर साल ऑनलाइन मोड पर लगने वाला यह शिविर इस वर्ष वीकएंड पर ऑफलाइन भी होगा। यानी बाल संस्कार शिविर सोमवार से गुरुवार तक ऑनलाइन चलेगा, तो शुक्रवार व शनिवार को ऑफलाइन होगा और सभी शिविरार्थी बच्चे सुबह सात से आठ बजे महाराष्ट्र मंडल परिसर में जुटेंगे और शिविर को एंजॉय करेंगे।
आध्यात्मिक समिति की समन्वयक आस्था काले ने बताया कि अपने बच्चों को आध्यात्म और संस्कारों से जोड़ने का यह अभिभावकों के पास अच्छा अवसर है। इस संदर्भ में 22 अप्रैल को आध्यात्मिक समिति की ऑनलाइन बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा भी सुनिश्चित की गई। आस्था के अनुसार अगर बच्चों को अपने पारंपरिक खेलों से परिचित कराते हुए उससे जोड़ना है, तो आपको शिविर को ऑफलाइन मोड पर लाना ही होगा। हम शुक्रवार और शनिवार को शिविर में बच्चों को पिट्टूल, बिल्लस, पोशमपा, छुपन छुपाई, रेस टीप जैसे खेल भी खिलाएंगे। इसके अलावा बच्चों को नाटक की बुनियादी सीख दी जाएगी। फायरलेस कुकिंग के माध्यम से भी बच्चों को परिस्थितियों से जूझना सिखाया जाएगा।आध्यात्म समिति प्रमुख आकांक्षा गद्रे ने बताया कि ऑनलाइन शिविर सुबह सात से आठ बजे लगेगा। इसमें बच्चों को दैनंदिनी के स्तोत्र, गणपति स्तोत्र, अथर्व शीर्ष पाठ, राम रक्षा स्त्रोत, हनुमान चालीसा, विष्णु सहस्त्र नाम, गीता का 12वां और 15वां अध्याय सहित विविध मंत्रोच्चार सिखाएं व याद कराए जाएंगे। इसके साथ ही इन मंत्रों का अर्थ भी बच्चों को बताया जाएगा। इसके अलावा उन्हें शिक्षाप्रद कहानियां, सामान्य ज्ञान, पहेलियां बताई जाएंगी। सम सामयिक विषयों पर भी बच्चों से चर्चा की जाएगी। वहीं व्यायाम, योग, ड्राइंग, पेंटिंग, संगीत जैसे सेगमेंट से बच्चों को शिविर से जोड़ा जाएगा।आध्यात्म समिति प्रमुख सृष्टि दंडवते के अनुसार शुक्रवार और शनिवार को महाराष्ट्र मंडल परिसर में लगने वाले ऑफलाइन शिविर में बच्चों को ब्रेन गेम, खेल-खेल में योग, पेड़- पौधे लगाने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। शिविर के प्रत्येक सेगमेंट के लिए अलग- अलग प्रशिक्षक अथवा प्रशिक्षिकाओं की व्यवस्था की गई है। सृष्टि ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन मोड पर शिविर से जुड़ने वाले शहर से बाहर के बच्चों के लिए शुक्रवार और शनिवार को भी ऑनलाइन शिविर से जुड़ने की सुविधा होगी। उन्हें ऐसी प्रशिक्षक का सानिध्य भी मिलेगा, जो शहर के बाहर ऑनलाइन शिविर में अपनी सेवाएं दे रहे होंगे। सृष्टि के अनुसार बृहन्महाराष्ट्र मंडल के राष्ट्रीय प्रमुख कार्यवाह शेखर राव साहेब अमीन और छत्तीसगढ़ कार्यवाह सुबोध टोले के माध्यम से ऑनलाइन शिविर को लेकर बड़े पैमाने पर प्रचार- प्रसार किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक बच्चे इस शिविर से लाभान्वित हो सके। -
-21 गायिकाओं की सुरीला सफर ‘अभी ना जाओ छोडकर’ से शुरू होकर ‘जीते हैं शान से...’ तक रहेगा जारी
रायपुर। 12 अप्रैल को फिल्म इंडस्ट्री की सुप्रसिद्ध गायिका आशा भोसले के निधन के करीब पखवाड़े भर बाद महाराष्ट्र मंडल का म्युजिकल ग्रुप संगीतमय कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि देने जा रहा है। 29 अप्रैल, बुधवार को शाम सात बजे आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में 21 महिला सभासद गायिकाएं आशा भोसले के चुनिंदा 21 गानों की सुमधुर प्रस्तुति देकर उन्हें श्रद्धसुमन अर्पित करेंगी।
कार्यक्रम की संयोजक भारती पलोसकर ने बताया कि कार्यक्रम में उन्हीं गायिकाओें के गाने सुनने का अवसर मिलेगा, जो पहले से ही लाइव म्युजिक अथवा कोराओके माध्यम से अपनी आवाज का जादू बिखेरते रहे हैं। इतना तो तय है कि भारतीय फिल्मों की वर्सिटाइल सिंगर आशा भोसले को श्रद्धांजलि देने का यह संगीतमय सिलसिला ‘अभी न जाओ छोड़कर’ से शुरू होकर ‘दम मारो दम मिट जाए गम, ‘ये मेरा दिल प्यार का दिवाना’, दो लफ्जों की है दिल की कहानी या है मोहब्बत या है जुबानी से होते हुए ‘… जीते हैं शान से, मरते हैं शान से’ तक जाकर ही थमेगा। भारती के अनुसार कार्यक्रम में संगीतप्रेमियों को हर दशक और प्रत्येक एरा के चुने हुए बेहतरीन गानों को एंजॉय करने का मौका मिलेगा।कार्यक्रम की सह संयोजक अंकिता किरवई ने जानकारी दी है कि आशा भोसले के गानों को अपनी मौलिक आवाज में हम तक पहुंचाने वाली महाराष्ट्र मंडल की गायिकाओं में भारती पलसोदकर, देविका देशपांडे, स्वाति जोशी, वैशाली जोशी, प्रीति केसकर, अंकिता किरवई, मंजरी बक्षी, साक्षी जोशी, अंजलि कान्हे, सुमिता रायजादा, रुक्मणी रामटेके, प्रगति ओगले, सुरेखा पाटिल, अस्मिता कुसरे, निशा देव, स्मिता राजे, अनुभा झा, सुप्रिया शेष, पूजा सिंग, आरती दीप शामिल हैं। आशीष गुप्ता, रंजन मोड़क सहित अनेक संगीत के क्षेत्र से जुड़े सदस्यों का सहयोग भी कार्यक्रम में मिलेगा।अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने कहा कि संगीतमय कार्यक्रम के रूप में यह महाराष्ट्र मंडल का पहला प्रयोगात्मक प्रयास है। हमें विश्वास है कि फिल्मी गानों को पसंद करने और आमतौर पर सुनने वाले संगीतप्रेमी दर्शक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जुटेंगे। जिससे हर आयुवर्ग की गायिकाओं को प्रोत्साहन की ऊर्जा मिलेगी। मंडल के अनेक रंगसाधकों ने भी 29 अप्रैल के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दर्शकों से पहुंचने की अपील की है, ताकि भविष्य में भी ऐसे संगीतमय आयोजन जारी रहें। -
0 अध्यक्ष काले का आग्रह- समसामयिक विषय पर आधारित नाटक मराठी के साथ हिंदी में भी मंचित करें, ताकि इसका संदेश पहुंचे अधिकाधिक लोगों तक
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल में वरिष्ठ रंगसाधकों ने एक बार फिर सम सामयिक ज्वंलत विषय पर आधारित नाटक ‘सेलिबेशन’ को मंचित करने की तैयारी शुरू कर दी है। सन् 2003 को प्रशांत दलवी द्वारा मराठी में लिखे गए इस नाटक का वाचन रंगसाधक- निर्देशक प्रसन्न विजय निमोणकर ने प्रिया प्रशांत बक्षी के साथ किया, तो कक्ष में बैठे तमाम कलाकार स्तब्ध रहे गए। कुछ की तो आंखें नम थीं। कोई भी कलाकार कुछ कहने की स्थिति में नहीं था।दो अंकों वाले इस नाटक के निर्देशक प्रसन्न निमोणकर और मार्गदर्शक अनिल श्रीराम कालेले होंगे। नाटक में कुछ और कसावट लाने के बाद इसकी स्क्रिप्ट को लॉक किया जा रहा है। उसके बाद नाटक के प्रत्येक पात्रों पर कलाकारों के नामों की अंतिम मुहर लगाकर इसकी रिहर्सल शुरू की जाएगी। ‘सेलिबेशन’ की स्क्रिप्ट सुनने के लिए मंडल अध्यक्ष अजय मधुकर काले, सचिव चेतन गोविंद दंडवते, रंजन मोडक, पवन ओगले, प्रिया बक्षी, कुंतल कालेले, कीर्ति हिशीकर, अभिषेक बक्षी, जयेश कालेले, रविंद्र ठेंगड़ी, नवीन देशमुख, समीर टुल्लु सहित अनेक रंगसाधक उपस्थित रहे।स्क्रिप्ट वाचन के बाद अध्यक्ष अजय काले ने नए नाटक को लेकर सभी कलाकारों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने आग्रह किया कि चूंकि यह नाटक मराठी में लिखा गया है, इसलिए केवल मराठी तक ही इसे सिमित न रखें। बेहद ज्वलंत, गंभीर विषय पर लिखे गए इस नाटक का मैसेज सही मायनों में हिंदी में मंचन करने के बाद ही अधिकाधिक लोगों का पहुंचेगा। इसके साथ ही महाराष्ट्र मंडल के कलाकारों को रायपुर के अलावा दूसरे शहरों में इस नाटक को मंचित करने का अवसर मिलेगा। काले ने स्पष्ट किया कि इस नाटक का मंचन किसी तीज- त्योहार या पूर्व निर्धारित उत्सव पर नहीं, बल्कि किसी विशेष अवकाश के दिन किया जाएगा, ताकि बड़ी संख्या रंगप्रेमी दर्शक इसे देखने के लिए जुट सके।नाटक के रिहर्सल को लेकर सचिव चेतन दंडवते ने भी कई अहम् सुझाव दिए। मार्गदर्शक कालेले व निर्देशक निमोणकर को अध्यक्ष का सुझाव पसंद आया। इस पर अंतिम निर्णय लेने के बाद जल्द ही ‘सेलिब्रेशन’ की रिसर्हल शुरू की जाएगी। दोनों ने ही यह स्पष्ट किया कि नाटक में कई पुराने रंगसाधकों के साथ नए कलाकारों को भी अभिनय करने का मौका मिलेगा।


















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