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- -सभी एआरआई जोन 8 के सभी 7 वार्डों के घर - घर, दुकान - दुकान जाकर फील्ड में उतरकर राजस्व वसूली करें, कोई भी घर, कोई भी दुकान 31 मार्च तक राजस्व वसूली से छूटने ना पाएरायपुर -आज रायपुर नगर पालिक निगम के आयुक्त श्री विश्वदीप के आदेशानुसार नगर निगम अपर आयुक्त श्री विनोद पाण्डेय ने नगर निगम जोन 8 महोबा बाजार पहुंचकर जोन 8 के सभी 7 वार्डों में राजस्व वसूली अभियान की गहन समीक्षा नगर निगम जोन 8 जोन कमिश्नर श्रीमती राजेश्वरी पटेल और जोन सहायक राजस्व अधिकारी श्री महादेव रक्सेल एवं सभी राजस्व निरीक्षकों और सहायक राजस्व निरीक्षकों की उपस्थिति में की.अपर आयुक्त श्री विनोद पाण्डेय ने दिए गए निर्धारित लक्ष्य अनुसार 31 मार्च 2026 तक शत - प्रतिशत राजस्व वसूली करना नगर निगम हित में सर्वोच्च प्राथमिकता से हर हाल में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. अपर आयुक्त ने जोन 8 के अंतर्गत सभी 7 वार्डों के प्रत्येक घर और प्रत्येक दुकान में जाकर घर - घर और दुकान - दुकान फील्ड में उतरकर नगर निगम जोन 8 राजस्व विभाग के लिए राजस्व वसूली करने सभी सहायक राजस्व निरीक्षकों को निर्देशित किया. अपर आयुक्त ने निर्देश दिए कि 31 मार्च तक जोन 8 अंतर्गत किसी भी वार्ड में कोई भी घर और कोई भी दुकान राजस्व वसूली से छूटने ना पाए , यह सभी सहायक राजस्व निरीक्षक हर हाल में नगर निगम हित में सुनिश्चित करें.
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- जल संसाधन विभाग से प्राप्त हो रहे कच्चे जल को प्रतिदिन मॉनिटर कर विभाग से समन्वय बनाने दिए निर्देश
रायपुर - आज रायपुर नगर पालिक निगम के आयुक्त श्री विश्वदीप के आदेशानुसार नगर निगम अपर आयुक्त श्री लोकेश्वर साहू द्वारा इंटेकवेल स्थित सागर , सरिता ,नीर क्षीर एवं खारुन पंप हाउस से रॉ वाटर पंपों का निरीक्षण कर संचालित पंपों की क्षमता , संचालन की स्थिति , सभी सब स्टेशन 33 के वी/11के वी की प्रशासनिक व्यवस्थाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन किया. इस दौरान नगर निगम कार्यपालन अभियंता जल श्री नर सिँह फरेन्द्र सहित अन्य सम्बंधित अधिकारी और कर्मचारीगण की इंटेकवेल में उपस्थिति रही.नगर निगम अपर आयुक्त श्री लोकेश्वर साहू द्वारा सभी पंपों तथा मोटर इत्यादि का मेंटेनेंस ग्रीष्म ऋतु में कोई दिक्कत न हो, इसलिए सभी पार्ट्स तथा पूर्व से सर्विसिंग करने के निर्देश दिए. इसके साथ ही अपर आयुक्त ने नदी में जल संसाधन विभाग से प्राप्त हो रहे कच्चे जल का लेवल प्रतिदिन मॉनिटर कर विभाग से समन्वय बनाने के निर्देश दिए. - रायपुर । आबकारी आरक्षक पद हेतु छत्तीसगढ़ व्यापम द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षा (ABA25) के अंतर्गत जारी मेरिट सूची के आधार पर विभाग द्वारा दस्तावेज सत्यापन एवं शारीरिक मापदण्ड की प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है। इसके उपरांत मुख्य सूची एवं अनुपूरक सूची जारी कर चयन परिणाम घोषित किया गया है।आबकारी विभाग द्वारा जारी सूचना के अनुसार चयन परिणाम में अंक, टंकण, मापदण्ड या प्रक्रिया संबंधी किसी भी प्रकार की त्रुटि पाए जाने की स्थिति में व्यापम द्वारा उपलब्ध कराए गए मूल डाटा के आधार पर संशोधन किया जा सकेगा।यदि किसी अभ्यर्थी को जारी चयन परिणाम के संबंध में कोई दावा-आपत्ति प्रस्तुत करना हो, तो वे सूचना पत्र जारी होने की तिथि से 7 दिवस के भीतर कार्यालय आबकारी आयुक्त, छत्तीसगढ़, वाणिज्यिक कर (जीएसटी) भवन, नॉर्थ ब्लॉक, सेक्टर-19, नवा रायपुर अटल नगर में कार्यालयीन समय पर उपस्थित होकर अथवा विभागीय ईमेल [email protected] पर आवश्यक दस्तावेजों सहित दावा-आपत्ति प्रस्तुत कर सकते हैं। निर्धारित समय-सीमा के पश्चात प्राप्त दावा-आपत्तियों पर विचार नहीं किया जाएगा। प्राप्त दावा-आपत्तियों का नियमानुसार परीक्षण कर निर्णय लिया जाएगा तथा संबंधित अभ्यर्थियों को पृथक से सूचना प्रदान की जाएगी।
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भिलाईनगर। नगर पालिक निगम भिलाई क्षेत्रांतर्गत इन दिनों नालियों की सफाई का कार्य युद्व स्तर पर किया जा रहा है। शहर को स्वच्छ और जलभराव मुक्त रखने के उददेश्य से निगम प्रशासन ने विशेष सफाई अभियान शुरू किया है।
निगम आयुक्त राजीव कुमार पाण्डेय के निर्देश पर अलग-अलग टीमों का गठन कर विभिन्न वार्डो एवं सड़क किनारे लगे नालियों की नियमित सफाई कराई जा रही है। सफाई कर्मी सुबह से ही प्रमुख सड़कों, गलियों और बस्तियों में जमे गंदगी को हटाने में संलग्न रहते हैं। साथ ही नालियों से निकले कचरे को तत्काल उठाव भी सुनिश्चित किया जा रहा है। आगामी बारिश के मौसम को ध्यान में रखते हुए यह अभियान तेज किया गया है, ताकि जलभराव की समस्या से नागरिकों को राहत मिल सके। निगम द्वारा मशीनों और मैनपावर दोनो का उपयोग कर सफाई कार्य को प्रभावी बनाया जा रहा है। निगम प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे कचरा नालियों में न डालें और स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करें, जिससे शहर को साफ-सुथरा और स्वच्छ रखा जा सके। - -भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्त कानून लागू – मुख्यमंत्री श्री साय-नकल और पेपर लीक पर रोक के लिए व्यापक प्रावधान – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय-परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में बड़ा कदम – मुख्यमंत्रीरायपुर, / छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2026 को पारित किया दिया। इस विधेयक के माध्यम से राज्य में आयोजित होने वाली भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।विधानसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि विकसित राज्य के निर्माण में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, इसलिए यह आवश्यक है कि भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी हो। उन्होंने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में अनुचित साधनों के उपयोग को पूरी तरह समाप्त करना और योग्य अभ्यर्थियों को समान अवसर प्रदान करना है।मुख्यमंत्री ने कहा कि नई व्यवस्था के तहत प्रश्नपत्र लीक, फर्जी अभ्यर्थियों की भागीदारी तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के माध्यम से नकल जैसी गतिविधियों को स्पष्ट रूप से दंडनीय अपराध घोषित किया गया है। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में तीन से दस वर्ष तक की सजा और दस लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है, जबकि संगठित अपराध के मामलों में एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने के साथ संपत्ति जब्ती का भी प्रावधान रखा गया है।उन्होंने कहा कि यदि कोई अभ्यर्थी नकल या अन्य अनुचित साधनों का उपयोग करते हुए पाया जाता है, तो उसका परीक्षा परिणाम निरस्त किया जाएगा और उसे एक से तीन वर्ष तक परीक्षा से प्रतिबंधित किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि परीक्षा से जुड़ी एजेंसियों, आईटी सेवा प्रदाताओं और परीक्षा केंद्रों के प्रबंधकों को भी जवाबदेह बनाया गया है, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता की संभावना को रोका जा सके।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस कानून के तहत यह भी सुनिश्चित किया गया है कि परीक्षा से संबंधित मामलों की जांच उप निरीक्षक से नीचे के अधिकारी द्वारा नहीं की जाएगी, जिससे जांच की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बनी रहे। आवश्यकता पड़ने पर राज्य सरकार विशेष जांच एजेंसियों को भी जांच सौंप सकेगी।उन्होंने बताया कि यह कानून राज्य लोक सेवा आयोग, व्यापमं तथा विभिन्न शासकीय विभागों, निगमों और मंडलों द्वारा आयोजित सभी भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं पर लागू होगा। इसके माध्यम से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने, अनुचित हस्तक्षेप को रोकने और अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करने का प्रयास किया गया है।मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार के सख्त प्रावधानों से परीक्षा प्रक्रिया में विश्वास बढ़ेगा और योग्य अभ्यर्थियों को उनकी मेहनत के अनुरूप अवसर प्राप्त हो सकेंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह कानून राज्य में एक निष्पक्ष और विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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दुर्ग/ जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र दुर्ग एवं क्रिश्चन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नोलॉजी दुर्ग के संयुक्त तत्वावधान में 10 अप्रैल 2026 को क्रिश्चन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नोलॉजी भिलाई में जिला स्तरीय रोजगार मेला का आयोजन किया जा रहा है। इस मेले हेतु निजी क्षेत्र के नियोजक जो अपने संस्थान में रिक्त पदों को इस रोजगार मेला के माध्यम से भरना चाहते हैं, वे 05 अपै्रल 2026 के पूर्व रिक्त पदों की जानकारी छ.ग. रोजगार विभाग के ई-रोजगार पोर्टल के माध्यम से जिला रोजगार कार्यालय दुर्ग को अधिसूचित कर सकते हैं। छ.ग. रोजगार विभाग के ई-रोजगार पोर्टल के माध्यम से रिक्तियाँ प्रेषित करने के लिए नियोजकों का पोर्टल पर ’रोजगार मेला हेतु पंजीयन’ कराना अनिवार्य होगा जिसके लिए नियोक्ता का जी.एस.टी. क्रमांक एवं डॉक्यूमेंट अपलोड करना आवश्यक होगा। अधिक जानकारी के लिए जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र दुर्ग में संपर्क कर सकते है।
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-अचल संपत्ति रजिस्ट्री पर उपकर समाप्त- आम नागरिकों को बड़ी राहत - मुख्यमंत्री श्री साय
-जमीन-मकान की रजिस्ट्री होगी अधिक सरल, सुलभ और कम खर्चीली-वाणिज्यिक कर मंत्री श्री चौधरी-छत्तीसगढ़ विधानसभा ने छत्तीसगढ़ उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026 ध्वनिमत से पारितरायपुर / छत्तीसगढ़ विधानसभा ने छत्तीसगढ़ उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026 को आज ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस विधेयक के पारित होने से अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर बाजार मूल्य के आधार पर लगाया जाने वाला 0.60 प्रतिशत उपकर समाप्त हो गया है। वाणिज्यिक कर मंत्री श्री ओ पी चौधरी ने बताया कि इस निर्णय से प्रदेश के आम नागरिकों, किसानों, मध्यमवर्गीय परिवारों तथा संपत्ति के क्रय-विक्रय से जुड़े लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।छत्तीसगढ़ उपकर समाप्त होने से अब संपत्ति पंजीयन की लागत में कमी आएगी। उदाहरण के तौर पर एक करोड़ रुपये के बाजार मूल्य की संपत्ति पर नागरिकों को लगभग 60 हजार रुपये की सीधी बचत होगी, इससे जमीन-मकान की रजिस्ट्री अधिक सुलभ, सरल और कम खर्चीली बनेगी। इस अवसर पर विधानसभा में विधेयक प्रस्तुत करते हुए मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि यह विधेयक केवल एक विधिक संशोधन नहीं, बल्कि राज्य सरकार की जनहित, लोककल्याण और कर-व्यवस्था में न्यायपूर्ण सुधार के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का स्पष्ट मत है कि शासन का उद्देश्य केवल राजस्व अर्जित करना नहीं, बल्कि जनता के जीवन को सरल, सुलभ और सम्मानजनक बनाना है।वाणिज्यिक कर मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार ने सितंबर 2025 में जीएसटी 2.0 के माध्यम से आम जनता के उपयोग की वस्तुओं एवं सेवाओं पर व्यापक कर रियायतें प्रदान कीं, जिससे आम नागरिकों की निर्वाह लागत में कमी आई। इसी क्रम में पंजीयन विभाग में भी अनेक ऐतिहासिक, व्यावहारिक और जनहितकारी सुधार किए गए हैं, जिनका उद्देश्य आम जनता पर आर्थिक बोझ कम करना और सेवाओं को सरल बनाना है। उन्होंने बताया कि स्वतः नामांतरण व्यवस्था आम जनता के लिए अत्यंत राहतकारी सिद्ध हुई है। पंजीयन के बाद तत्काल नामांतरण होने से पक्षकारों को आर्थिक बचत के साथ-साथ महीनों चलने वाली नामांतरण प्रक्रिया से मुक्ति मिली है। मई 2025 से अब तक लगभग डेढ़ लाख दस्तावेजों का स्वतः नामांतरण सफलतापूर्वक किया जा चुका है।पंजीयन प्रणाली को अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने के लिए सुगम मोबाइल ऐप विकसित किया गया है, जो संपत्ति की सही भौगोलिक स्थिति सुनिश्चित करने में सहायक है। साथ ही, फर्जी व्यक्ति द्वारा पहचान छुपाकर पंजीयन न कराया जा सके, इसके लिए पंजीयन कार्यालयों में आधार आधारित सत्यापन की व्यवस्था भी लागू की गई है। नागरिकों की सुविधा के लिए विभाग द्वारा पंजीयन कार्यालयों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के वीजा ऑफिस की तर्ज पर सर्वसुविधायुक्त बनाया जा रहा है। इसके अंतर्गत नागरिकों को वातानुकूलित प्रतीक्षालय, स्वच्छ पेयजल, साफ-सुथरे शौचालय, निःशुल्क वाई-फाई तथा क्यू-आधारित त्वरित पंजीयन जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। वर्तमान में 10 पंजीयन कार्यालयों को पीपीपी मोड पर स्मार्ट पंजीयन कार्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसके बाद अन्य कार्यालयों को भी चरणबद्ध रूप से स्मार्ट कार्यालय बनाया जाएगा।श्री चौधरी ने बताया कि सरकार ने पंजीयन शुल्क निर्धारण की व्यवस्था में सुधार किया है। पहले संपत्ति के पंजीयन में गाइडलाइन मूल्य एवं बाजार मूल्य से जो अधिक होता था, उसी पर शुल्क लिया जाता था। अब इस व्यवस्था को बदलते हुए पंजीयन शुल्क को आपसी लेनदेन की कीमत के बजाय गाइडलाइन मूल्य से जोड़ा गया है, इससे बड़ी संख्या में परिवारों को राहत मिली है। उदाहरण स्वरूप यदि किसी संपत्ति का गाइडलाइन मूल्य 10 लाख रुपये है, लेकिन दस्तावेज में बैंक ऋण आदि के कारण 25 लाख रुपये अंकित हैं, तो अब शुल्क केवल 10 लाख रुपये पर ही लगेगा। इस निर्णय से राज्य सरकार ने लगभग 170 करोड़ रुपये के राजस्व का त्याग किया है।श्री चौधरी ने बताया कि पहले परिवारजनों के मध्य दान, बंटवारा और हक-त्याग जैसी रजिस्ट्रियों पर बाजार मूल्य का 0.8 प्रतिशत पंजीयन शुल्क लिया जाता था, जिसे सरकार ने घटाकर मात्र 500 रुपये कर दिया है, चाहे संपत्ति का मूल्य कितना भी हो। उदाहरण के तौर पर, एक करोड़ रुपये की संपत्ति के दान पर पहले 80 हजार रुपये शुल्क लगता था, जो अब केवल 500 रुपये रह गया है, इससे सामान्य परिवारों और किसानों को व्यापक राहत मिली है।गाइडलाइन मूल्य निर्धारण में भी व्यापक जनहितकारी सुधार किए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी भूमि पर भी अत्यधिक मूल्यांकन की स्थिति को समाप्त करते हुए वर्गमीटर आधारित मूल्यांकन व्यवस्था खत्म कर दी गई है और अब मूल्यांकन हेक्टेयर दर से किया जा रहा है, इससे आम जनता को 300 से 400 करोड़ रुपये तक के लाभ का अनुमान है।मंत्री श्री चौधरी ने बताया किसरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि पर लागू ढाई गुना मूल्यांकन, शहरों और गाँवों में कई प्रकार के अतिरिक्त मूल्यांकन तथा भूमि पर लगे वृक्षों के अलग मूल्यांकन जैसे प्रावधानों को भी समाप्त किया है, इससे जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ कम हुआ है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है। शहरी मध्यमवर्गीय परिवारों को राहत देते हुए अब फ्लैट का मूल्यांकन सुपर बिल्ट-अप एरिया के बजाय केवल बिल्ट-अप एरिया के आधार पर किए जाने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही बाउंड्री वॉल, प्लिंथ आदि जैसे कारणों से होने वाले अनावश्यक अतिरिक्त मूल्यांकन को भी समाप्त किया गया है।श्री चौधरी ने बताया कि किसानों के हित में भी सरकार ने महत्त्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पहले दो-फसली भूमि, नकदी फसल, मछली पालन हेतु तालाब जैसी स्थितियों में अतिरिक्त मूल्यांकन कर आर्थिक भार बढ़ा दिया जाता था। अब इन सभी प्रावधानों को समाप्त कर कृषि भूमि के लेनदेन को अधिक सहज, न्यायसंगत और किफायती बनाया गया है। मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि छत्तीसगढ़ उपकर अधिनियम, 1982 के अंतर्गत स्थावर संपत्ति के अंतरण पर उपकर का प्रावधान किया गया था। वर्ष 2023 में तत्कालीन सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ रोजगार मिशन एवं राजीव गांधी मितान क्लब योजना के वित्तपोषण हेतु स्टांप शुल्क के अतिरिक्त 12 प्रतिशत की दर से उपकर अधिरोपित किया गया था। इसके कारण नागरिकों को संपत्ति के पंजीयन पर बाजार मूल्य का लगभग 0.60 प्रतिशत अतिरिक्त भार वहन करना पड़ रहा था।वाणिज्यिक कर मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि वर्तमान में राजीव गांधी मितान क्लब योजना संचालित नहीं है तथा रोजगार संबंधी योजनाओं का वित्तपोषण अब राज्य के सामान्य बजट से किया जा रहा है। ऐसे में जिस उद्देश्य से यह उपकर लगाया गया था, वह अब प्रासंगिक नहीं रह गया है। इसी सोच के अनुरूप जनता को राहत प्रदान करने के लिए इस अनावश्यक उपकर को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।मंत्री ने बताया कि वर्ष 2024-25 में राज्य सरकार को उपकर से लगभग 148 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था तथा वर्तमान वित्तीय वर्ष में अब तक लगभग 150 करोड़ रुपये का उपकर प्राप्त हो चुका है। उपकर समाप्त होने से सरकार को राजस्व की हानि अवश्य होगी, किंतु इसका सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा और यही सरकार की नीतियों का मूल केंद्र है।उन्होंने आगे कहा कि इस संशोधन के माध्यम से छत्तीसगढ़ उपकर अधिनियम, 1982 की धारा 8, धारा 9 तथा अनुसूची में वर्णित उपकर संबंधी प्रावधानों को हटाने का प्रस्ताव किया गया है। अचल संपत्ति के अंतरण विलेखों के पंजीयन पर लगाया जाने वाला उपकर अब पूर्णतः समाप्त कर दिया जाएगा।शासन के इस निर्णय और पंजीयन विभाग में किए गए सुधारों से प्रदेश की जनता को अनेक प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होंगे। संपत्ति के पंजीयन पर देय शुल्क में कमी आएगी, जमीन-मकान की रजिस्ट्री अधिक किफायती होगी, मध्यमवर्गीय एवं निम्न आय वर्गीय परिवारों को राहत मिलेगी, दस्तावेजों के पंजीयन में वृद्धि होगी, किसानों और परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा तथा संपत्ति का बाजार मूल्य और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार सदैव इस सिद्धांत पर चली है कि छत्तीसगढ़ की जनता पर अनावश्यक कर का बोझ नहीं होना चाहिए। यह निर्णय और सुधारों की यह श्रृंखला उन लाखों नागरिकों को राहत देने वाली है, जो अपनी जीवन भर की कमाई से जमीन खरीदते हैं, घर बनाते हैं। परिवार में संपत्ति का बंटवारा करते हैं अथवा अपने बच्चों के भविष्य के लिए संपत्ति का हस्तांतरण करते हैं। यह केवल कर में कमी नहीं, बल्कि जनता के परिश्रम, सपनों और अधिकारों के प्रति संवेदनशील शासन का परिचायक है। उन्होंने कहा कि विष्णु देव की सरकार आने के बाद पंजीयन विभाग में किए जाने वाले जनहितैषी सुधारों के कारण पंजीयन शुल्क में होने वाले रियायतों से प्रतिवर्ष 460 करोड़ का सीधा लाभ आमजनता को होगा।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026 के माध्यम से अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर लगाए गए 0.60 प्रतिशत उपकर को समाप्त करना हमारी सरकार का जनहित में लिया गया एक महत्वपूर्ण निर्णय है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि आम नागरिक, किसान और मध्यमवर्गीय परिवारों पर किसी भी प्रकार का अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े। राज्य में सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण को केंद्र में रखते हुए हम लगातार कर व्यवस्था को सरल, न्यायसंगत और नागरिक-अनुकूल बना रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय केवल कर में राहत नहीं, बल्कि उन लाखों परिवारों के सपनों को सम्मान देने की दिशा में एक सार्थक पहल है, जो अपनी मेहनत की कमाई से घर और जमीन खरीदते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इस कदम से संपत्ति के पंजीयन में वृद्धि होगी, आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई ऊर्जा प्राप्त होगी। -
दुर्ग/ दुर्ग ग्रामीण परियोजना के सेक्टर रसमड़ा के छोटे से ग्राम महमरा में रहने वाली भारती वर्मा का जीवन पहले काफी कठिनाइयों से भरा हुआ था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे हर महीने कुछ बचत नहीं कर पाती थीं। घर का खर्च चलाना ही उनके लिए एक बड़ी चुनौती थी। मार्च 2024 में जब उन्हें महतारी वंदन योजना की राशि मिलनी शुरू हुई, तब उनके जीवन में एक नई उम्मीद जगी। यह छोटी-सी आर्थिक सहायता उनके लिए बहुत बड़ा सहारा बन गई। धीरे-धीरे उनकी स्थिति में सुधार आने लगा और वे घर के खर्चों को बेहतर तरीके से संभालने लगीं। लेकिन अक्टूबर 2024 में एक और मुश्किल सामने आई। उनके पति एक दुर्घटना में घायल हो गए और उनका पैर फ्रैक्चर हो गया। इस कारण उसके पति लगभग 8 महीनों तक मजदूरी करने नहीं जा सके। इस कठिन समय में पूरे परिवार की जिम्मेदारी भारती वर्मा के कंधों पर आ गई।
ऐसे मुश्किल दौर में महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं थी। इसी सहायता से उन्होंने अपने परिवार का पालन-पोषण किया और घर को संभाले रखा। इसके साथ ही उन्होंने अपनी दो जुड़वा बेटियों के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में खाते भी खुलवाया और नियमित रूप से किश्तें जमा कर रहे हैं। इस योजना के लिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद देते हुए कहती है कि राज्य सरकार की विभिन्न योजनाएं कई परिवारों को मुश्किल समय में संभलने का हौसला दिया। - -ग्रामीण जल व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम – मुख्यमंत्री सायरायपुर // मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज छत्तीसगढ़ विधानसभा में जल जीवन मिशन 2.0 के तहत केन्द्र और राज्य के बीच एमओयू कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल की वर्चुअल मौजूदगी में अधिकारियों ने एमओयू पर हस्ताक्षर कर एक्सचेंज किया।मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य की ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में यह पहल ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि “हर घर जल” के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए जल जीवन मिशन 2.0 के तहत हुये एमओयू से इन कार्यों में गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 10 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन के विस्तारित चरण, जल जीवन मिशन 2.0 को मंजूरी दी है। इस चरण में जल सेवा वितरण प्रणाली को मजबूत करने के साथ-साथ जनभागीदारी को भी सुनिश्चित किया जाएगा।मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में अब तक 41 लाख 30 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों, यानी लगभग 82.66 प्रतिशत घरों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराया जा चुका है। श्री साय ने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत दूरस्थ, वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों तक शुद्ध पेयजल पहुंचने से महिलाओं को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें पहले पानी के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता था।उन्होंने कहा कि मिशन 2.0 के तहत ग्राम स्तर पर जल प्रबंधन में समुदाय की भागीदारी बढ़ाने और जल स्रोतों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जाएगा। साथ ही जल संवर्धन, पुनर्भरण तथा योजनाओं के संचालन और रखरखाव को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि इस एमओयू के माध्यम से पारदर्शी और तकनीक आधारित जल सेवा प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल वितरण और अधिक व्यवस्थित एवं सुदृढ़ होगा।मुख्यमंत्री ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल सुविधा को और बेहतर बनाने के लिए केंद्रीय मंत्री से 1300 करोड़ रुपये की विशेष स्वीकृति का आग्रह भी किया। इस स्वीकृति से 70 समूह जल प्रदाय योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के 3 हजार से अधिक गांवों तक पेयजल पहुंचाने में मदद मिलेगी। अंत में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री मोदी का आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि सभी के सहयोग से छत्तीसगढ़ न केवल “हर घर जल” का लक्ष्य हासिल करेगा, बल्कि सतत जल प्रबंधन और ग्रामीण जल शासन में भी नए मानक स्थापित करेगा।केंद्रीय जलशक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल ने कहा कि आज का दिन अत्यधिक महत्वपूर्ण है और इस एमओयू के बाद छत्तीसगढ़ में पाइप लाइन एवं संरचनाओं के माध्यम से प्रत्येक घर में पानी की पहुँच सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों को इसके तहत सशक्त अधिकार प्राप्त होंगे और इन संरचनाओं के रख रखाव के लिए वे जिम्मेदार होंगे। श्री पाटिल ने कहा कि जिला प्रशासन के जरिये पंचायत के कार्यों पर निगरानी रखी जाएगी एवं आवश्यकता होने पर सहायता भी करेंगे। उन्होंने बताया कि आज का यह एमओयू जल शक्ति मंत्रालय और छत्तीसगढ़ शासन का साझा प्रयास का परिणाम है। इससे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के हर घर स्वच्छ एवं निर्बाध पानी की पहुँच का सपना साकार होगा।कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री अरुण साव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, सचिव श्री राहुल भगत, जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश टोप्पो सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
- -नेशनल डिफेंस कॉलेज के प्रशिक्षु सैन्य और गैर सैन्य अधिकारियों ने की मुख्यमंत्री से मुलाकात-विदेशी मेहमानों ने कहा - अद्भुत है छत्तीसगढ़, सुंदर स्मृतियों के साथ पूरी हुई यात्रा-राज्य की भौगोलिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक विशेषताओं की हुई सराहना-नेशनल डिफेंस कॉलेज का 15 सदस्यीय अध्ययन दल 05 दिवसीय यात्रा पर पहुंचा है छत्तीसगढ़रायपुर // छत्तीसगढ़ की हमारी धरती सघन वन, प्राकृतिक संसाधन, खनिज संपदा के विपुल भंडार, लोक संस्कृति की अमूल्य विरासत और नैसर्गिक सौन्दर्य का अद्भुत संगम है। इस सुंदर धरती के विकास की सबसे बड़ी बाधा नक्सलवाद को हमारे डबल इंजन की सरकार ने अब दूर कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में नेशनल डिफेंस कॉलेज के सैन्य एवं सिविल सेवा अधिकारियों के अध्ययन दल से मुलाकात कर आत्मीय संवाद किया। इस दौरान उन्होंने देश-विदेश से आए अधिकारियों का स्वागत करते हुए शाल एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। अध्ययन दल का नेतृत्व कर रहे एयर कमोडोर अजय कुमार चौधरी ने छत्तीसगढ़ प्रवास के अनुभव साझा करते हुए राज्य की भौगोलिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक विशेषताओं की सराहना की। उन्होंने मुख्यमंत्री को सैन्य स्मृति चिन्ह भी भेंट किया।मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ सघन वनों, खनिज संपदा, समृद्ध लोक संस्कृति और नैसर्गिक सौंदर्य का अद्वितीय संगम है। उन्होंने बताया कि राज्य का लगभग 46 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है, जिसमें “एक पेड़ मां के नाम” अभियान और कैम्पा योजना का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। श्री साय ने कहा कि राज्य खनिज संसाधनों से परिपूर्ण है—कोयले से लेकर हीरे तक यहां उपलब्ध हैं। छत्तीसगढ़ वर्तमान में विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में सरप्लस राज्य है, जहां लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए है, जिससे आने वाले समय में इतनी ही अतिरिक्त उत्पादन क्षमता विकसित होगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से अब नक्सल समस्या समाप्ति की ओर है। इससे प्रदेश में शांति और विकास की गति और तेज होगी। कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को “धान का कटोरा” कहा जाता है और यहां किसानों के लिए प्रभावी धान खरीदी नीति लागू है। प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में ‘महतारी वंदन योजना’ का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि इसके तहत 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं को प्रदान की जा चुकी है। इसके अलावा 05 लाख 30 हजार से अधिक भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति, खान पान, रीति रिवाज परंपरा पर खुलकर बातें की और अपने राजनीतिक और सामाजिक अनुभव भी उनके साथ साझा किए।अध्ययन दल में शामिल विदेश के सैन्य अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ प्रवास को “अद्भुत और यादगार” बताते हुए कहा कि राज्य भौगोलिक विविधताओं और उर्वर भूमि से समृद्ध है। उन्होंने विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र की जनजातीय संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य की प्रशंसा की।एयर कमोडोर अजय कुमार चौधरी ने कहा कि स्पष्ट नेतृत्व और सशक्त नीति के कारण प्रदेश में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों का मनोबल बढ़ा है जिससे नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी कार्य हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं—जैसे महिला सशक्तिकरण और आवास योजनाओं—का जमीनी स्तर पर सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के समग्र विकास को कुशल नेतृत्व का परिणाम बताया।इस दौरान मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, आईजी श्री ओ पी पाल, अध्ययन दल में आईपीएस श्री अमनदीप सिंह कपूर, म्यांमार कर्नल लू जॉ आंग, ब्रिगेडियर मोहम्मद शाहिद अहमद, जापान के कर्नल उचीनो तोमोफुमी, ब्रिगेडियर कुंवर मान विजय सिंह राणा, सुश्री सुप्रिया घाघ, ब्रिगेडियर शिशिर थमैय्या, बांग्लादेश के ब्रिगेडियर जनरल फिरदौस आरिफ अहमद, ब्रिगेडियर केतन अरुण मोहिते, ब्रिगेडियर अनिरुद्ध चौहान, एयर कमोडोर श्री अजय कुमार चौधरी, एयर कमोडोर श्री मूलनाथ गिरीश, डॉ. राजेश कुमार अस्थाना, भूटान के कर्नल समतेन चेनोर, ग्रीस के कर्नल कॉन्सटेंटिनॉस नीरस शामिल है।उल्लेखनीय है कि नेशनल डिफेंस कॉलेज द्वारा प्रतिवर्ष एक साल का कोर्स आयोजित किया जाता है। इस वर्ष 66वाँ प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है, जिसमें 120 सैन्य तथा गैर सैन्य अधिकारियों का दल प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 15 अधिकारियों का दल आर्थिक सुरक्षा और रणनीति विषय पर अध्ययन के लिए छत्तीसगढ़ पहुँचा, जिसमें 05 विदेशी सैन्य अधिकारी भी शामिल है। प्रशिक्षण में शामिल अधिकारियों ने बताया कि सबसे पहले उन्होंने नया रायपुर में शहर की व्यवस्था और प्लान, कृषि और वन विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा, कांकेर के जंगल वारफेयर कॉलेज और कृषि विज्ञान केंद्र का अवलोकन किया। इसके साथ ही बस्तर में सुरक्षा संबंधी विषयों से जुड़ी विशेष चर्चा, सुरक्षाबलों के साहसिक कार्य, पर्यटन स्थल, विभिन्न शासकीय आयोजनों में बस्तर की कला-संस्कृति, चित्रकोट जलप्रपात, कोंडागांव में शिल्पग्राम का भ्रमण किया। अगले दिन उन्होंने भिलाई स्टील प्लांट और भिलाई के पुलिस थाना का भ्रमण कर कानून व्यवस्था के बारे में जानकारी प्राप्त की।
- -शांति, विश्वास और विकास-बस्तर हेरिटेज मैराथन एक मज़बूत संदेश-बस्तर की वादियों में गूँजेगी बदलाव की नई आहट, बस्तर हेरिटेज मैराथन को लेकर पुनर्वासित जनों में अभूतपूर्व उत्साह-खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने 25 लाख रुपये की पुरस्कार की घोषणारायपुर / बस्तर में आपका स्वागत है, जहाँ विरासत जीवंत है और प्रकृति साँस लेती है। बस्तर हेरिटेज मैराथन में प्राचीन वन, जीवंत आदिवासी संस्कृति और मनमोहक परिदृश्य समाहित हैं। धावक साल के पेड़ों से घिरे सुरम्य मार्गों और प्राचीन गाँवों से गुजरेंगे, और हर कदम पर बस्तर की सुंदरता का अनुभव करेंगे। छत्तीसगढ़ के बस्तर में रोमांच और प्रकृति के बीच एक खास आयोजन होने जा रहा है। 22 मार्च 2026 को बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026 का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देशभर के धावक हिस्सा ले सकेंगे। इस मैराथन की शुरुआत जगदलपुर के लाल बाग मैदान से होगी और फिनिश लाइन एशिया के नियाग्रा कहे जाने वाले चित्रकोट जलप्रपात पर होगी। खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि की घोषणा की गई है।बस्तर की शांत वादियों में इस बार केवल प्रकृति का संगीत नहीं, बल्कि बदलाव और विकास के संकल्प की एक अभूतपूर्व गूँज सुनाई देने वाली है। इस मैराथन की सबसे गौरवशाली और मानवीय तस्वीर उन आत्म-समर्पित माओवादियों के रूप में उभर कर सामने आ रही है, जो कभी दुर्गम जंगलों के अंधेरों में भटकते थे, लेकिन अब समाज की मुख्यधारा का अभिन्न हिस्सा बनकर इस खेल महाकुंभ में अपनी शारीरिक शक्ति और जीवटता का परिचय देने को बेताब हैं। हिंसा का मार्ग त्याग कर शांति की राह चुनने वाले इन युवाओं का यह उत्साह इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि बस्तर अब पुराने संघर्षों के साये से बाहर निकलकर खेल, साहस और शौर्य के वैश्विक मंच पर अपनी एक नई और सकारात्मक पहचान गढ़ रहा है।इस मैराथन में 42 कि.मी., 21 कि.मी., 10 कि.मी. और 5 कि.मी. जैसी अलग-अलग कैटेगरी रखी गई हैं, ताकि हर स्तर के रनर्स इसमें भाग ले सकें। प्रतियोगिता में 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि भी रखी गई है और बस्तर संभाग के धावकों के लिए अलग से पुरस्कार की व्यवस्था की गई है। यह आयोजन बस्तर की प्राकृतिक खूबसूरती, संस्कृति और खेल भावना को एक साथ जोड़ने का खास मौका बनने जा रहा है।बस्तर की फिजाओं में अब हिंसा के बारूद की नहीं, बल्कि उम्मीदों और सपनों की उड़ान की खुशबू तैर रही है। कभी जिन हाथों में बंदूकें हुआ करती थीं और जो पैर घने जंगलों की खाक छानते थे, वे अब बस्तर मैराथन के ट्रैक पर अपनी किस्मत आजमाने और एक नई पहचान बनाने को पूरी तरह तैयार हैं। दंतेवाड़ा के लोन वर्राटू (घर वापस आइए) अभियान और पूना मारगेम” (पुनर्वास से पुनर्जीवन) जैसे प्रभावी पुनर्वास कार्यक्रमों के माध्यम से दर्जनों पूर्व नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में शामिल होने का ऐतिहासिक फैसला किया है। शासन की कल्याणकारी पुनर्वास नीति के तहत ये युवा अब अपनी ऊर्जा का सकारात्मक उपयोग कर रहे हैं और जंगल की संकरी पगडंडियों पर छिपने के बजाय मैराथन की फिनिशिंग लाइन को छूने का लक्ष्य लेकर कड़ी ट्रेनिंग ले रहे हैं।स्थानीय खेल मैदानों में आयोजित अभ्यास सत्रों के दौरान इन युवाओं का जोश देखते ही बनता है, जहाँ पसीने से तर-बतर चेहरे और दृढ़ संकल्प वाली आँखें बस्तर के बदलते स्वरूप की गवाही दे रही हैं। प्रशिक्षकों का मानना है कि इन युवाओं में अदम्य साहस और बेमिसाल स्टेमिना है, जिसे अब आधुनिक रनिंग तकनीकों के माध्यम से तराशा जा रहा है ताकि वे न केवल दौड़ें, बल्कि जीत का परचम भी लहरा सकें। इस बदलाव का मानवीय पक्ष तब और उभर कर आता है जब शिविर की महिला प्रतिभागी भावुक होकर बताती हैं कि डर के साये से निकलकर अब उन्हें समाज में सम्मान और सुरक्षा मिल रही है। यह अनूठी पहल केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जंगल की हिंसा और भटकाव को पीछे छोड़कर एथलेटिक्स में करियर बनाने का एक सुनहरा अवसर है। अनुभवी कोचों द्वारा दी जा रही प्रोफेशनल ट्रेनिंग इन युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से सुदृढ़ बना रही है, जिससे वे स्थानीय समुदाय के साथ जुड़कर एक नई पहचान तलाश रहे हैं।अंततः यह प्रयास बस्तर में शांति, विश्वास और प्रगति का एक सशक्त संदेश दे रहा है, जहाँ पूरा दंतेवाड़ा इन युवाओं के हौसले को सलाम करते हुए मैराथन के ट्रैक पर उनकी ऐतिहासिक जीत की राह देख रहा है। इस मैराथन के माध्यम से ये पूर्व माओवादी न केवल अपनी दमखम का प्रदर्शन करेंगे, बल्कि पूरी दुनिया को यह संदेश भी देंगे कि यदि सही दिशा और अवसर मिले, तो बस्तर का हर हाथ राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण सहभागी बन सकता है। ऐतिहासिक लालबाग मैदान की मिट्टी से शुरू होकर विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात के कल-कल करते तटों पर समाप्त होने वाली यह 42 किलोमीटर की श्फुल मैराथनश् इन समर्पित युवाओं की भागीदारी को विशेष रूप से रेखांकित करेगी।आयोजन को पूरी तरह समावेशी बनाने के उद्देश्य से इसमें 21 किलोमीटर की हाफ मैराथन, 10 किलोमीटर की दौड़ और 5 किलोमीटर की श्फन रनश् जैसी श्रेणियां भी रखी गई हैं, जहाँ बस्तर के स्थानीय धावकों और मुख्यधारा में लौटे इन युवाओं का एक अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशासन ने 25 लाख रुपये की विशाल इनामी राशि की घोषणा की है, जिसमें बस्तर कैटेगरी के विशेष प्रावधानों ने स्थानीय समुदायों के साथ-साथ इन युवाओं के भीतर एक नई ऊर्जा का संचार किया है। विशेषकर 10 किलोमीटर की श्रेणी में जूनियर और ओपन वर्ग के अलग-अलग प्रावधानों ने पहली बार दौड़ने वाले युवाओं और फिटनेस प्रेमियों के बीच जबरदस्त आकर्षण पैदा किया है। स्थानीय सहभागिता को अधिकतम करने के लिए बस्तर जिले के सभी धावकों हेतु पंजीकरण पूर्णतः निःशुल्क रखा गया है, ताकि कोई भी प्रतिभा आर्थिक तंगी के कारण इस ऐतिहासिक अवसर से वंचित न रह जाए।इच्छुक खिलाड़ी आधिकारिक वेबसाइट www.bastarheritage.run या जारी विज्ञापनों में उपलब्ध क्यूआर कोड के माध्यम से अपना स्थान सुरक्षित कर सकते हैं, जबकि किसी भी प्रकार की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 92440-79533 भी सक्रिय कर दिया गया है। निश्चित रूप से, 22 मार्च को जब ये धावक चित्रकोट की लहरों के साथ कदमताल करेंगे, तो वे केवल फिनिश लाइन की ओर नहीं भाग रहे होंगे, बल्कि बस्तर के एक नए, शांतिपूर्ण और प्रगतिशील भविष्य की पटकथा लिख रहे होंगे।22 मार्च 2026 (रविवार) को जगदलपुर से चित्रकोट तक आयोजित होने वाली बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026 में बस्तर संभाग के सभी सात जिलोंकृसुकमा, नारायणपुर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, कांकेर एवं कोंडागांव से 200 से अधिक पुनर्वासित माओवादी कैडर उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। इस आयोजन में उनके साथ-साथ विभिन्न वर्गों के प्रतिभागी, पेशेवर एवं स्थानीय एथलीट, युवा, छात्र-छात्राएं तथा बड़ी संख्या में नागरिक भी सम्मिलित हो रहे हैं। यह मैराथन खेल भावना के साथ-साथ बस्तर में शांति, एकता एवं सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक बनकर उभर रही है।आत्मसमर्पित माओवादी कैडरों की यह सक्रिय सहभागिता “पूना मारगेम” (पुनर्वास से पुनर्जीवन) की अवधारणा को साकार रूप देती है, जो शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का मूल उद्देश्य है। “पूना मारगेम” के माध्यम से इन कैडरों को हिंसा के मार्ग से हटाकर समाज की मुख्यधारा में जोड़ने, उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान करने तथा नई पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। मैराथन जैसे आयोजनों में उनकी भागीदारी इस सकारात्मक बदलाव का सशक्त उदाहरण है। बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026 का उद्देश्य बस्तर क्षेत्र को एक नई पहचान देना, पर्यटन एवं सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना तथा बस्तर की सकारात्मक छवि को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना है।आत्मसमर्पित कैडरों, स्थानीय नागरिकों एवं एथलीट्स की संयुक्त सहभागिता इस आयोजन को और अधिक प्रेरणादायक बना रही है। यह पहल स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि बस्तर अब विकास, विश्वास एवं नई संभावनाओं की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जहां “पूना मारगेम” के माध्यम से हिंसा का राह छोड़, उम्मीदों की दौड़ का अवसर मिल रहा है।
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रायपुर/ 21 मार्च 2026 शनिवार को *"ईद उल फितर"* का त्यौहार है। प्रतिवर्षानुसार शांति समिति की बैठक में लिए गये निर्णय अनुसार यह पर्व शांति एवं सौहार्दपूर्व वातावरण में मनाया जाना है।
नगर पालिक निगम रायपुर के आयुक्त श्री विश्वदीप ने रायपुर नगर पालिक निगम के सभी जोन कमिश्नरों को निर्देशित किया है कि दिनांक 21 मार्च 2025 शनिवार को नगर के प्रमुख मस्जिदों, ईदगाहों के आसपास समुचित साफ-सफाई, कीटनाशक दवाईयों का छिडकाव पानी के टैंकरों की व्यवस्था तथा स्ट्रीट लाईटों की व्यवस्थायें सुनिश्चित की जाये। विशेष रूप से ईदगाहभाठा मस्जिद, मौदहापारा, छोटापारा, मोमिनपारा, तात्यापारा, पण्डरी इरानीडेरा एवं अन्य स्थानों पर स्थित मस्जिदों के आसपास विशेष साफ-सफाई, पानी के टैंकरों की व्यवस्था एवं स्ट्रीट लाईट आदि की व्यवस्था हो। नगर के मुस्लिम बहुल वार्डों में विशेष रूप से साफ-सफाई, पानी, स्ट्रीट लाईट आदि की व्यवस्था सुनिश्चित की जावे। सीरत मैदान, शास्त्री बाजार के सामने विशेष रूप से साफ-सफाई, चूने की लाईनिंग, पानी टैंकर, प्रकाश की व्यवस्था की जावे। - -अम्बिकापुर में संभाग स्तरीय सरगुजा ओलंपिक 2026 तथा राज्य स्तरीय तिलहन किसान मेला 2026 का करेंगे उद्घाटन-कुदरगढ़ महोत्सव का करेंगे शुभारंभरायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय 21 मार्च को सरगुजा और सूरजपुर जिले के दौरे पर रहेंगे। मुख्यमंत्री सरगुजा जिले के मुख्यालय अम्बिकापुर में बस्तर ओलंपिक की तर्ज पर आयोजित संभाग स्तरीय ‘सरगुजा ओलंपिक 2026’ तथा ‘राज्य स्तरीय तिलहन-किसान मेला 2026’ का उद्घाटन करेंगे। मुख्यमंत्री सूरजपुर जिले के कुदरगढ़ में आयोजित ‘कुदरगढ़ महोत्सव 2026’ का उद्घाटन करेंगे।मुख्यमंत्री श्री साय निर्धारित दौरा कार्यक्रम के अनुसार पूर्वान्ह 10.30 बजे पुलिस ग्राउंड हेलीपेड रायपुर से हेलीकॉप्टर द्वारा रवाना 11.50 बजे सरगुजा संभाग के मुख्यालय अंबिकापुर पहुंचेंगे और दोपहर 12 बजे वहां आयोजित संभाग स्तरीय सरगुजा ओलंपिक 2026 का शुभारंभ करेंगे। अम्बिकापुर के पीजी कॉलेज ग्राउण्ड में सरगुजा ओलंपिक का आयोजन 21 से 23 मार्च तक किया जाएगा, जिसमें 12 खेल विधाओं में सरगुजा संभाग के सभी जिलों के 2000 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा लेंगे।प्रतियोगिता के विजेता खिलाड़ियों को राज्य की खेल प्रशिक्षण अकादमियों में सीधे प्रवेश दिया जाएगा और उन्हें युथ आइकॉन के रूप में सम्मानित किया जाएगा। सरगुजा ओलंपिक में कबड्डी, खो-खो, तीरंदाजी, फुटबॉल, वॉलीबॉल, हॉकी, कुश्ती, दौड़, बेडमिंटन, रस्साकसी सहित 12 खेल विधाओं में प्रतियोगिता आयोजित होंगी।मुख्यमंत्री श्री साय सरगुजा ओलंपिक के शुभारंभ के बाद दोपहर 1.40 बजे अम्बिकापुर के राजमोहिनी देवी कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्रों में आयोजित दो दिवसीय तिलहन मेला-किसान मेला 2026 का शुभारंभ करेंगे। इस मेले का आयोजन नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयलसीड्स के अंतर्गत कृषि विभाग एवं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है।कुदरगढ़ महोत्सव: 185 करोड़ के 76 विकास कार्यों का होगा लोकार्पण-भूमिपूजनमुख्यमंत्री श्री साय तिलहन मेला-किसान मेला 2026 का शुभारंभ करने के बाद दोपहर 2.40 बजे अंबिकापुर से हेलीकॉप्टर द्वारा रवाना होकर 3 बजे सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड के ग्राम कुदरगढ़ पहुंचेंगे तथा वहां कुदरगढ़ महोत्सव 2026 का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री इस अवसर पर जिलेवासियों को 185 करोड़ 10 लाख रूपए की लागत के 76 विकास कार्यों की सौगात देंगे। मुख्यमंत्री इनमें से 52 विकास कार्यों का लोकार्पण और 24 कार्यों का भूमिपूजन करेंगे। मुख्यमंत्री श्री साय इस कार्यक्रम के बाद कुदरगढ़ से शाम 4.20 बजे हेलीकॉप्टर द्वारा रवाना होकर शाम 5.35 बजे रायपुर लौट आएंगे।
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रायपुर - रायपुर नगर पालिक निगम की महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने रायपुर नगर पालिक निगम मुख्यालय संस्कृति विभाग के सम्बंधित अधिकारियों को रायपुर नगर पालिक निगम क्षेत्र में स्थित सभी शहीदों, महापुरुषों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की सभी प्रतिमाओं / मूर्तियों के परिसरों में उनके शहादत दिवसों, जयंतियों, पुण्यतिथियों पर सादर ससम्मान विशेष साफ - सफाई व्यवस्था, फूलमाला, पुष्पसज्जा, पुष्पांजलि, संधारण कार्य सहित समस्त आवश्यक प्रबंध प्रशासनिक तौर पर पूर्वनिश्चित करने के सम्बन्ध में सख्त निर्देश दिए हैँ. साथ ही सभी सम्बंधितों को एक दिन पूर्व फोन से आयोजनों की सूचना देने के निर्देश दिए हैं.
महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने संस्कृति विभाग के अधिकारियो को यह समस्त व्यवस्थायें प्रशासनिक तौर पर सम्बंधित जोन के सहयोग से पूर्वनिश्चित करवाने केसम्बन्ध में कड़े निर्देश दिए हैँ और इनका नगर पालिक निगम रायपुर क्षेत्र में नगर निगम मुख्यालय संस्कृति विभाग के माध्यम से जोनों से कड़ाई से व्यवहारिक परिपालन सुनिश्चित करने निर्देशित किया है.महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने इस सम्बन्ध में आज नगर निगम संस्कृति विभाग के सम्बंधित अधिकारियों की आवश्यक बैठक ली, जिसमें कार्य समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिए. - - राजस्व प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा,अभिलेख शुद्धता पर विशेष ध्यान देने के दिए निर्देश- कलेक्टर श्रीमती प्रजापति ने ली राजस्व अधिकारियों की समीक्षा बैठकमोहला । कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति ने कलेक्टोरेट सभा कक्ष में राजस्व अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। इस दौरान उन्होंने विभिन्न लंबित राजस्व प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में अपर कलेक्टर श्री जी.आर. मरकाम, अपर कलेक्टर श्री मिथलेश डोंडे, एसडीएम मानपुर श्री अमित नाथ योगी, डिप्टी कलेक्टर श्री डी.आर. ध्रुव सहित सभी तहसीलदार एवं राजस्व अधिकारी उपस्थित रहे।कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि लंबित राजस्व प्रकरणों का निराकरण प्राथमिकता के आधार पर निर्धारित समय-सीमा में सुनिश्चित किया जाए, ताकि आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि राजस्व मामलों में पारदर्शिता, त्वरित कार्रवाई और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। साथ ही, राजस्व न्यायालयों में लंबित प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग कर गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।कलेक्टर ने भू-अर्जन प्रकरणों की स्थिति, अविवादित एवं विवादित नामांतरण-बंटवारा प्रकरण, सीमांकन कार्य, स्वामित्व योजना के अंतर्गत किए जा रहे कार्य तथा अभिलेख शुद्धता पर विस्तार से चर्चा की गई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिन प्रकरणों में दस्तावेजों की कमी या तकनीकी समस्याएं हैं, उन्हें शीघ्र दूर कर कार्यवाही पूर्ण की जाए। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को राजस्व मामलों के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए सभी अधिकारी संवेदनशीलता के साथ कार्य करें। राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों की सूची तैयार कर प्राथमिकता तय की जाए तथा समय-सीमा का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। कलेक्टर ने स्वामित्व योजना एवं अभिलेख शुद्धता से संबंधित कार्यों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए, ताकि भविष्य में भूमि संबंधी विवादों में कमी लाई जा सके। उन्होंने सभी राजस्व अधिकारियों को शासन की मंशानुसार जनहित को सर्वोपरि रखते हुए पारदर्शी, निष्पक्ष एवं समयबद्ध तरीके से प्रकरणों का निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
- -मोटर-साइकिल सह आइस बॉक्स योजना ने राकेश धीवर को दिखाया उन्नति का रास्तामहासमुंद / जिले के महासमुंद विकासखंड अंतर्गत ग्राम तुमगांव के निवासी श्री राकेश धीवर एक साधारण परिवार से आते हैं। मछली पालन उनके परिवार का परंपरागत व्यवसाय रहा है और आज समय के साथ यह उनकी आजीविका का मुख्य आधार भी बन गया है। उनकी इस प्रगति में मत्स्य विभाग का विशेष योगदान रहा है। विभाग द्वारा उन्हें मोटर-साइकिल सह आइस बॉक्स योजना का लाभ प्राप्त हुआ। इस योजना के अंतर्गत मिली मोटर-साइकिल और आइस बॉक्स की सहायता से अब वे दूर-दराज के गांवों और हाट-बाजारों तक आसानी से मछली पहुंचा पाते हैं, जिससे उनके व्यवसाय का विस्तार हुआ है और आय में भी वृद्धि हुई है।श्री राकेश धीवर के पिता श्री विश्राम धीवर प्राथमिक मत्स्य सहकारी समिति तुमगांव के सदस्य रहे हैं। इससे प्रेरित होकर राकेश का भी मछली पालन एवं विक्रय कार्य की ओर रुझान बढ़ा। आज यह कार्य उनके पूरे परिवार के सहयोग से संचालित हो रहा है। उनके परिवार में पत्नी एवं दो पुत्र हैं, जो मछली विक्रय कार्य में सक्रिय रूप से सहयोग करते हैं और वर्तमान में सशक्त पारिवारिक उद्यम का रूप ले चुका है।राकेश धीवर द्वारा प्रतिदिन आसपास के तालाबों से मछलियाँ खरीदकर स्थानीय हाट-बाजारों में बिक्री किया जाता है। वे प्रतिदिन लगभग 2 क्विंटल मछली का व्यापार करते हैं। इस कार्य में प्रतिदिन लगभग 20 हजार रुपए की लागत आती है, जबकि विक्रय से 24 हजार रुपए तक की आय होती है। इस प्रकार उन्हें प्रतिदिन लगभग 4 हजार रुपये का सकल लाभ प्राप्त होता है। मजदूरी एवं अन्य खर्चों को घटाने के बाद वे प्रतिदिन एक हजार से 1,500 रुपये तक की शुद्ध आय अर्जित कर लेते हैं, जो उनके परिवार के लिए एक स्थिर आय का स्रोत बन गया है। इस तरह प्रतिमाह लगभग 45 से 50 हजार रुपए की शुद्ध आमदनी होती है।इसके अलावा राकेश धीवर अपने पैतृक खेत में कृषि कार्य भी करते हैं, जिससे उनकी आय के स्रोत और मजबूत हुए हैं। इस प्रकार मछली विक्रय और कृषि कार्य के समन्वय से उन्होंने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाया है।
- -भोजन व्यवस्था सहित चिकित्सकीय सुविधाओं का लिया जायजामहासमुंद /अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटी महासमुंद द्वारा 19 मार्च को बेमचा स्थित जिला जेल महासमुंद का निरीक्षण किया गया। माननीय छ0ग0 उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेशानुसार एवं छ0ग0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर द्वारा दिए गए निर्देशों के पालन में बेमचा स्थित जिला जेल में अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटी के पदाधिकारों द्वारा निरीक्षण किया गया।निरीक्षण के दौरान अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटी के अध्यक्ष एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती अनिता डहरिया, पुलिस अधीक्षक श्री प्रभात कुमार, प्राधिकरण की सचिव एवं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट महासमुंद सुश्री चेतना ठाकुर द्वारा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा जारी आदेश के पालन में बंदियो को दी जाने वाली विधिक सहायता, जेल में स्थापित व्हीसी कक्ष, बैरकों की व्यवस्था, जेल बिल्डिंग की व्यवस्था, नए बैरको का निर्माण, मुलाकात कक्ष, विधिक सहायता कक्ष, बंदियों को प्रदत्त सुविधा, टॉयलेट की व्यवस्था, भोजन की गुणवत्ता, बंदियों के कपड़ो की दशा, पेयजल की व्यवस्था के साथ-साथ बंदियों को दी जा रही प्राथमिक चिकित्सा व्यवस्था आदि का भी जायजा लिया। अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटी द्वारा बंदियों से प्रत्यक्ष रूप से जेल में उनके रहन-सहन, दिए जाने वाली औपचारिक सुविधा तथा न्यायालय में लंबित उनके प्रकरण और उनके अधिवक्ता तथा उनके समस्याओं के संबंध में जानकारी ली गई तथा नवनिर्मित अतिरिक्त बैरको का भी जायजा लिया गया। कमेटी के निरीक्षण के दौरान अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सुश्री अक्षा गुप्ता, तहसीलदार श्री जुगल किशोर, जेल अधीक्षक अश्विनी पूजा तिर्की, सहायक जेल अधीक्षक उदय राज गायकवाड़, एलएडीसीएस के अधिवक्ता श्रीमती रीना जैन, डोलामनी पटेल, जेल चिकित्सा अधिकारी महेन्द्र चैधरी, थाना प्रथारी महासमुंद नरेन्द्र राठौर, जेल स्टाफ सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारीगण उपस्थित थे।
- महासमुन्द / मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आई. नागेश्वर राव के निर्देशन में राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत तृतीय वर्ष में अध्ययनरत जी.एन.एन. प्रशिक्षण संस्था की छात्राओं के लिए हेपेटाइटिस बी एवं सी से बचाव हेतु स्क्रीनिंग एवं टीकाकरण शिविर का आयोजन किया गया।इस शिविर का उद्देश्य छात्राओं को हेपेटाइटिस बी संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए टीकाकरण के माध्यम से बचाव सुनिश्चित करना एवं जागरूकता बढ़ाना था। कार्यक्रम का संचालन जिला नोडल अधिकारी (एन वी एच पी) डॉ. छत्रपाल चन्द्राकर एवं जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्रीमती नीलू धृतलहरे के मार्गदर्शन में किया गया।शिविर में कुल 39 छात्राओं की हेपेटाइटिस बी एवं सी की स्क्रीनिंग की गई। सभी छात्राओं की जांच रिपोर्ट निगेटिव प्राप्त होने के पश्चात उन्हें हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण किया गया। यह आयोजन भा. चि. महाविद्यालय संबद्ध चिकित्सालय, जिला महासमुन्द में संयुक्त संचालक सह अस्पताल अधीक्षक डॉ. बसंत महेश्वरी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
- -प्रथम चरण में मकान सूचीकरण 1 मई से 31 मई तक किया जाएगा-द्वितीय चरण फरवरी 2027 में-सफल जनगणना के लिए गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्राप्त करना आवश्यक - कलेक्टर श्री लंगेहमहासमुंद / जनगणना 2027 को संपादित करने हेतु जिले में आज जिला पंचायत महासमुंद के सभा कक्ष में प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में कलेक्टर एवं प्रमुख जिला गणना अधिकारी श्री विनय कुमार लंगेह, अपर कलेक्टर श्री सचिन भूतड़ा, जनगणना प्रशिक्षक श्री अशोक मिश्रा, संयुक्त निदेशक, जनगणना कार्यालय रायपुर, सहायक संचालक श्री मनोज कुमार महिलांगे, जिला जनगणना अधिकारी, अतिरिक्त जिला जनगणना अधिकारी, समस्त अनुविभागीय अधिकारी, (राजस्व), समस्त चार्ज अधिकारी ग्रामीण से तहसीलदार एवं नगरीय से मुख्य नगरपालिका अधिकारी तथा उनके डीलिंग स्टाफ उपस्थित हुए।जनगणना 2027 को संपादित करने हेतु जनगणना निदेशालय रायपुर के प्रशिक्षक श्री अशोक मिश्रा द्वारा प्रशिक्षण में बताया गया कि जनगणना 2027 पूर्णतः डिजिटल होगा, जनगणना 2027 को दो चरणों में संपादित किया जाना है। प्रथम चरण का कार्य मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना 01 मई-2026 से 31 मई-2026 तक एवं द्वितीय चरण में जनसंख्या गणना का कार्य फरवरी 2027 में संपादित कराया जाएगा। जनगणना का कार्य अति महत्वपूर्ण होने के कारण समय पर पूर्ण करने के लिए कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह द्वारा निर्देशित किया गया। कलेक्टर ने कहा कि जनगणना 2027 को ¼CMMS½ पोर्टल पर मकान सूचीकरण ब्लॉक निर्माण ¼HLBC½ वेब एप्लिकेशन में बनाना एवं ¼CMMS½ पोर्टल में प्रगणक एवं पर्यवेक्षको की यूजर आई. डी. जनरेट करने का कार्य 31 मार्च 2026 तक अनिवार्यतः पूर्ण कर लें। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि प्रगणकों के प्रशिक्षण के लिए प्रत्येक चार्ज ऑफिसर कार्यालय के फील्ड ट्रेनर्स का प्रशिक्षण आगामी सप्ताह में गुणवत्ता पूर्ण ढंग से संपादित कर लें। प्रशिक्षित फील्ड ट्रेनर्स द्वारा ही तहसील मुख्यालयों में प्रगणकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, संपूर्ण कार्य की ऑनलाइन सॉफ्टवेयर एवं ¼CMMS½ पोर्टल द्वारा पर्यवेक्षण की सुविधा होगी। जिला जनगणना अधिकारी श्री मनोज कुमार खाण्डे द्वारा प्रशिक्षण समाप्ति उपरांत उपस्थित सभी अधिकारियों-कर्मचारियों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
- महासमुंद / जिले के बसना अंचल में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज करते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बसना में सिजेरियन प्रसव सुविधा की सफल शुरुआत की गई है। यह सुविधा विशेष रूप से ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की गर्भवती महिलाओं के लिए अत्यंत लाभकारी होगी। अब जटिल एवं आपातकालीन प्रसव की स्थिति में मरीजों को महासमुंद, रायपुर या अन्य बड़े अस्पतालों में रेफर करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।यह उपलब्धि जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के समन्वित प्रयासों से संभव हो सकी है। कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह के निर्देशन एवं विभाग की सतत निगरानी में इस सुविधा का प्रारंभ किया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आई. नागेश्वर राव के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण की गईं।सिजेरियन प्रसव के अंतर्गत ग्राम भूकेल निवासी श्रीमती गंगा पटेल (आयु 27 वर्ष), पति श्री रविन्द्र पटेल का सुरक्षित प्रसव 20 मार्च को दोपहर 2:08 बजे कराया गया। नवजात शिशु का वजन 3.410 किलोग्राम है। वर्तमान में माता एवं शिशु दोनों स्वस्थ हैं तथा चिकित्सकों की सतत निगरानी में हैं।कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह ने कहा कि बसना में सिजेरियन प्रसव सुविधा की शुरुआत क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इससे ग्रामीण महिलाओं को समय पर सुरक्षित उपचार उपलब्ध होगा तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार होगा। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का सतत प्रयास है कि स्वास्थ्य सेवाएं अंतिम व्यक्ति तक सुलभ हों।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आई. नागेश्वर राव ने कहा कि इस सुविधा के प्रारंभ होने से जिले की मातृ स्वास्थ्य सेवाएं और सुदृढ़ होंगी। अब जटिल प्रसव मामलों में त्वरित उपचार संभव होगा, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी।खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. नारायण साहू के नेतृत्व में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ऑपरेशन थियेटर, आवश्यक उपकरण, प्रशिक्षित चिकित्सक एवं नर्सिंग स्टाफ की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई। इसके परिणामस्वरूप सिजेरियन प्रसव सेवा का सफलतापूर्वक संचालन प्रारंभ हो सका। इस दौरान जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्रीमती नीलू घृतलहरे, डॉ. ज्योति साहू, डॉ. छत्रपाल चंद्राकर एवं आरएमएनसीएचए सलाहकार श्री संदीप चंद्राकर द्वारा सतत मॉनिटरिंग की गई। इस उपलब्धि में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिलाषा गौतम, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. दयानंद होता, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. राहुल कश्यप (अग्रवाल नर्सिंग होम, बसना), नर्सिंग स्टाफ रैना रागनी एवं आकांक्षा इक्का तथा विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधक श्री डोलचंद नायक का विशेष योगदान रहा। टीम के समन्वित प्रयासों से प्रथम सिजेरियन प्रसव सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
- राजनांदगांव । जिले में स्कूल शिक्षा विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आज बाल मित्र कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आंगनबाड़ी में आने वाले बच्चों को विद्यालय के वातावरण से परिचित कराना तथा 6 वर्ष पूर्ण होने पर उन्हें स्कूल जाने के लिए प्रेरित करना है। कार्यक्रम के अंतर्गत 4 से 6 वर्ष आयु वर्ग के आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को उनके नजदीकी प्राथमिक शालाओं में ले जाया गया। इस दौरान बच्चों ने विद्यालय के विद्यार्थियों के साथ मिलकर विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया और स्कूल के माहौल को समझा।कार्यक्रम में बच्चों के लिए कहानी, गीत, खेल एवं चित्रकारी जैसी रोचक गतिविधियों का आयोजन किया गया। जिससे वे आनंदपूर्वक सीख सकें और स्कूल के प्रति उनकी रूचि बढ़े। कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों में शिक्षा के प्रति उत्साह जागृत करने के साथ ही विद्यालयीन जीवन के प्रति सकारात्मक वातावरण बनाने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम से बच्चों का सहज रूप से स्कूल में प्रवेश सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी तथा प्रारंभिक शिक्षा को सुदृढ़ बनाने में सहयोग मिलेगा।
- राजनांदगांव । शासन के निर्देशानुसार स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। जिले में संचालित समस्त हमर क्लीनिक में शासन द्वारा निर्धारित आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता सीजीएमएससी लिमिटेड के माध्यम से सुनिश्चित की जा रही है। इसके साथ ही कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के मुख्य जिला भंडार द्वारा आवश्यक दवाइयां शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। हमर क्लीनिक में मरीजों को आवश्यकतानुसार दवाइयों का वितरण किया जा रहा है तथा अस्पतालों के लिए जरूरी दवाइयों की आपूर्ति समय-समय पर शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों एवं जिला स्टोर के माध्यम से मांग के अनुरूप की जाती है। वर्तमान में बीपी, मधुमेह सहित अन्य आवश्यक दवाइयां हमर क्लीनिकों में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। हमर क्लीनिकों में उपलब्ध नि:शुल्क दवा एवं उपचार सुविधाओं से मरीजों एवं उनके परिजनों द्वारा संतोष व्यक्त किया गया है। file photo
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*मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में रायपुर जिला प्रशाशन के प्रोजेक्ट अजा से सशक्त बना रही महिलाएं*
रायपुर। जिला प्रशासन द्वारा संचालित अभिनव पहल “प्रोजेक्ट अजा” को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। राष्ट्रीय समाचार पत्रिका द इकॉनमिक्स टाइम्स द्वारा इस पहल को प्रतिष्ठित The Economic Times GovTech Awards 2026 में एग्रीटेक फॉर फार्मर एम्पावरमेंट श्रेणी के अंतर्गत सम्मानित किया गया है।नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह को यह पुरस्कार प्रदान किया गया। यह सम्मान जिले में किसानों को सशक्त बनाने के लिए किए जा रहे नवाचारों और प्रभावी कार्यों की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना का प्रतीक है।“प्रोजेक्ट अजा” के माध्यम से जिले में किसानों, विशेषकर ग्रामीण महिलाओं को आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस योजना के तहत महिला समूह को बकरी पालन के लिए प्रेरित कर आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं।कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने इस उपलब्धि का श्रेय जिले की पूरी टीम और लाभान्वित हितग्राहियों को देते हुए कहा कि यह सम्मान महिलाओं को आगे और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन एवं कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देशानुसार संचालित “प्रोजेक्ट अजा” का उद्देश्य जिले की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। यह योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत संचालित हो रही है।इस योजना के तहत महिला हितग्राहियों को 10 बकरियां एवं 2 बकरे उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे वे बकरी पालन के माध्यम से स्वरोजगार अपनाकर प्रतिवर्ष 1 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं। साथ ही, मुर्गी पालन एवं गोबर खाद (गोट मैन्योर) से अतिरिक्त आय के अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं।प्रोजेक्ट अजा के अंतर्गत “पशु सखी” कैडर का गठन किया गया है, जो पशुपालकों को प्रशिक्षण, टीकाकरण, नस्ल सुधार एवं आधुनिक पशु प्रबंधन की जानकारी प्रदान करता है। यह योजना ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ पशुपालन को बढ़ावा देकर रोजगार के नए अवसर सृजित कर रही है। -
राजनांदगांव । राज्य व्यवसायिक परीक्षा (एससीव्हीटी) एवं हायर सेकेण्डरी व आईटीआई की संयुक्त अध्यापन योजना के तहत कक्षा 12वीं के विद्यार्थियों की आईटीआई ट्रेड की पूरक परीक्षा (नई प्रणाली) माह अप्रैल 2026 का परीक्षा 1 अप्रैल से 10 अप्रैल 2026 तक आयोजित की जाएगी। प्रवेश सत्र 2022, 2023 एवं 2024 के पूरक की पात्रता रखने वाले वह प्रशिक्षणार्थी 24 मार्च 2026 तक 10वीं, आईटीआई अनुत्तीर्ण अंक सूची छायाप्रति, दो पासपोर्ट साईज फोटो, निर्धारित परीक्षा शुल्क सहित शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान राजनांदगांव में उपस्थित होकर परीक्षा फार्म भर सकते है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी संस्थान से प्राप्त की जा सकती है।
- राजनांदगांव । जिला कोषालय अधिकारी से प्राप्त जानकारी अनुसार भौतिक चालानों की व्यवस्था समाप्त कर अब ई-चालान को बढ़ावा देने के लिए ओटीसी सुविधा 1 अप्रैल 2026 से लागू की जाएगी। नई व्यवस्था के तहत सभी चालान अब केवल ऑनलाईन माध्यम से जमा किए जाएंगे। इस संबंध में जिले के सभी आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को चालान जमाकर्ताओं को ई-चालान प्रक्रिया से अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं। ओटीसी सुविधा अंतर्गत ई-चालान पोर्टल पर चालान भरते समय उसका डेटा सीधे बैंक को ऑनलाईन ट्रांसफर हो जाएगा, जिससे बैंक स्तर पर दोबारा डेटा प्रविष्टि की आवश्यकता नहीं रहेगी। बैंक काउंटर पर केवल ऑनलाईन जनरेटेड चालान, जिसमें ट्रेजरी रेफरेंस नंबर दर्ज होगा। इसके माध्यम से राशि जमा की जाएगी। इसके बाद बैंक द्वारा यह जानकारी एमआईएस के माध्यम से कोषालय में ऑनलाईन प्रस्तुत की जाएगी। इस नई व्यवस्था से डेटा प्रविष्टि में होने वाली त्रुटियों में कमी जाएगी और लेखांकन प्रक्रिया अधिक सटीक एवं पारदर्शी बनेगी। ई-चालान पोर्टल के सर्च प्लान विकल्प के माध्यम से जमाकर्ता आसानी से चालान का प्रिंट निकाल सकेंगे। यह पहले भौतिक चालान में संभव नहीं था।







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