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मानसून सीजन में ज्यादातर लोग चटपटी चाट, समोसा और पकौड़े खाना पसंद करते हैं. लेकिन ये चीजें आपके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होती है. इस मौसमें में पाचन से जुड़ी समस्या हो सकती हैं. अगर आप एसिडिटी, गैस, अपच की समस्या से परेशान रहते हैं तो अपने भोजन में बाजरा आंवला की चटनी खाएं.
ये चटनी खाने में स्वादिष्ट होने के साथ- साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद है. इसमें मौजूद आंवला स्वास्थ्य के साथ -साथ त्वचा के लिए भी फायदेमंद है. इसमें एंटी ऑक्सीडेंट होता है जो स्किन प्रॉब्लम्स को दूर रखता है. आइए जानते हैं बाजरा आंवला को कैसे बना सकते हैं. इसे डाइट में शामिल करने से क्या फायदे होते हैं.
बाजर आंवला चटनी
सामग्री
आधा कप अकुंरित बाजरा
4 आंवला
आधा कप पाल्म शुगर
3 हरी मिर्च
आधा चम्मच हल्दी
आधा चम्मच सौंफ के बीज
आधा चम्मच अजवाइन
एक चौथाई चम्मच हींग
एक कप पानी
फ्रेश पुदीना के पत्ते
2 टेबलस्पून कोल्ड प्रेसड सरसों का तेल
बनाने का तरीका
प्रेशर कुकर में तेल, सरसों के दाने, सौंफ, मेथी के दाने, हींग और हरी मिर्च डालें. अब इसमें अंकुरित बाजरा डालें और उसे अच्छे से पकने दें. इसके बाद आंवला, नमक और हल्दी डालें. इसे मध्यम आंच पर पकने दें. अब इसमें थोड़ा सा पानी, पुदीना की पत्तियां डालकर पकाएं. प्रेशर कुकर को मध्यम आंच पर 15 मिनट के लिए पकने दें.
जब कुकर खुल जाएं तो उसमें पल्म शुगर मिलाएं. अब इन सभी चीजों को मिक्सी में डालकर पीस लें. इस चटनी को आर पुदीने के पत्तियों से गार्निश करें और अपने फेवरेट डिश के साथ परोसें.
आंवला के फायदे
आंवला एक सुपरफूड है जो सेहत के साथ – साथ त्वचा के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है. ये आपकी इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करता है. इसके अलावा पाचन तंत्र को मजबूत करता है. वहीं बाजरा भी स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है. इसमें पोटेशियम, कैल्शियम, विटामिन्स की पर्याप्त मात्रा होती हैं. बाजरा मुख्य रूप से राजस्थान और हरियाणा में खाया जाता है. ये शरीर को एनर्जी देने का काम करता है. आंवला और बजरा दोनों पौष्टिक तत्वों से भरपूरहोते हैं. -
शाकाहार यानी वेज खाने की कुछ चीजों में भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। आइए, जानते हैं प्रोटीन से भरे शाकाहार स्रोत-
हल्की आंच में भुने आलू
आपको जानकर हैरानी होगी कि मीडियम साइज में कटे और हल्की आंच में भुने हुए आलू में प्रोटीन, पोटेशियम, विटामिन सी और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है।
ब्रोकली
अगर अभी तक आप ब्रोकली खाने से परहेज कर रहे थे, तो आपको ब्रोकली खानी शुरू कर देनी चाहिए। आपको ब्रोकली में प्रोटीन की मात्रा और आयरन मिलेगा।
फूलगोभी
ज्यादातर लोगों को फूलगोभी पसंद होती है। इस सब्जी में प्रोटीन, कैलोरीज, पोटेशियम, मैग्नीशियम, फाइबर और आयरन के गुण होते हैं।
मशरूम
आप अगर बार-बार बीमार पड़ते हैं, तो आपको मशरूम खाना शुरू कर देना चाहिए। इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन होता है।
पालक
पालक में प्रोटीन के अलावा आयरन, फाइबर और विटामिन बी पाया जाता है।
बंदगोभी
एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर बंदगोभी शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने में मददगार है। इससे सूजन व दर्द में भी राहत मिलती है।
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अगर आप बढ़े हुए वजन से परेशान है और वजन घटाना चाहते हैं तो एक्सरसाइज और संतुलित आहार के साथ-साथ आप कुछ डिटॉक्स ड्रिंक्स को अपने डाइट में शामिल कर सकते हैं। डिटॉक्स ड्रिंक्स शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं। इसके साथ ही इससे आपका मेटाबॉलिज्म भी बेहतर रहता है जिससे आपका पाचन भी बेहतर रहेगा और आपको वजन कम करने में आसानी मिलेगी:
==नींबू और अदरक
वजन घटाने में डिटॉक्स ड्रिंक की अहम भूमिका है। नींबू और अदरक के गुणों से बनाए जाने वाले इस ड्रिंक को सुबह खाली पेट पीना चाहिए। ये आपके शरीर को जहां ताकत देता है वहीं आपके मेटाबॉलिज्म को भी दुरुस्त करता है।
ऐसे बनाएं
गुनगुने 1 गिलास पानी में आधा नींबू निचोड़कर उसमें 1 इंच के बराबर अदरक को ग्रेट कर लीजिए। इस ड्रिंक को सुबह दो गिलास रोज़ाना 2 महीने तक पिएं।
==दालचीनी का डिटॉक्स ड्रिंक
दालचीनी के ड्रिंक से आपका मेटाबॉलिज्म तो मजबूत होता है, साथ ही इसमें फैट को गलाने की ताकत भी होती है।
ऐसे बनाएं
एक कंटेनर में गुनगुना पानी लीजिए और इसमें एक छोटी चम्मच दालचीनी का पाउडर डालें। सोते वक्त इस डिटॉक्स ड्रिंक का सेवन रोज़ाना करें आपको मनचाहा परिणाम दिखाई देने लगेगा।
==खीरे और पुदीने का डिटॉक्स ड्रिंक
ये डिटॉक्स ड्रिंक न केवल शरीर से हानिकारक विषैले तत्वों को बाहर निकालता है, बल्कि इसका स्वाद और महक भी लाजवाब होती है। खीरा और पुदीना पानी में डाले जाने के बाद अपने पोषक तत्वों को पानी में निकालते हैं, जिससे आपका पाचन बेहतर होता है।
ऐसे बनाएं
एक गिलास लें औऱ उसमें कुछ खीरे के टुकड़े और पुदीने की पत्तियां डालें।
- आज हम आपके लिए लेकर आए हैं मूंग दाल के फायदे। जी हां भारतीय भोजन में मूंग का खूब प्रयोग किया जाता है। वैसे तो सभी दालें प्रोटीन से भरपूर और सेहत का खजाना हैं, लेकिन मूंग की दाल का सेवन सेहत के लिए बेहद लाभकारी माना गया है। इसमें विटामिन 'ए', 'बी', 'सी' और 'ई' की भरपूर मात्रा होती है। डाइट एक्सपर्ट के अनुसार, अगर अंकुरित दाल सुबह सुबह खाई जाए तो इसमें अधिक मात्रा में प्रोटीन, अमीनो एसिड और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को कई गंभीर बीमारियों से बचाते हैं।मूंग दाल में पाए जाने वाले पोषक तत्वमूंग दाल में कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, विटामिन बी9, मैग्नेशियम, मैग्नीज, विटामिन बी4, फॉस्फोरस, पोटैशियम, जिंक, आयरन, विटामिन बी 2, बी3, बी5, बी6 आदि पाया जाता ह। इसे प्रोटीन का बेहतरीन विकल्प माना जाता है।मूंग दाल के फायदेवजन कम करेमूंग दाल के सेवन से वजन को भी कम किया जा सकता है। इसमें हाई फाइबर और प्रोटीन होता ह। इसके सेवन से भूख लगने वाले हार्मोन्स उतने सक्रीय नहीं होते और पेट लंबे समय तक भरा भरा भी रहता है।ब्लड प्रेशर को रखें ठीकमूंग की दाल ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने में मदद करती है। इसमें मौजूद पोटैशियम, मैग्नीशियम और फाइबर ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में काफी काम आता है।पेट के लिए फायदेमंदमूंग दाल में मौजूद फाइबर गट को हेल्दी रखता है। इसमें मौजूद कार्ब भी अन्य चीजों की तुलना में अधिक हेल्दी होता है, जिससे पेट को डीटॉक्स करने और क्लीन करने में सहायता मिलती है।इन बीमारियों से बचाती है मूंग दालमूंग की दाल में भरपूर मात्रा में तरह तरह के एंटीऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाते है। अधिक मात्रा में फ्रीरेडिकल्स शरीर में कैंसर, इनफ्लामेशन, हार्ट डिजीज आदि की समस्याओं का कारण होती हैं।दिल को रखता है ठीकएक शोध के मुताबिक, यह एलडीएल कोलेस्ट्रोल को नियंत्रित करने में सक्षम है, जिस वजह से हार्ट की समस्या को दूर रखने के लिए इसका सेवन जरूर करना चाहिए।
- क्या आप चाय दोबारा गर्म करके पीते हैं? चाय को दोबारा गर्म करके पीने से स्वास्थ्य को कई तरह से नुकसान पहुंच सकता है। दरअसल, चाय को दोबारा गर्म करने से चाय का स्वाद और पौष्टिकता खत्म हो जाती है। इसलिए अगर आप इसे पीते भी हैं, तो आपको इसका कोई लाभ नहीं मिलेगा, बल्कि आपको इससे नुकसान ही होगा।इतना ही नहीं अगर चाय को कमरे के तापमान में चार घंटे या उससे अधिक समय के लिए छोड़ दिया गया है, तो उसमें बैक्टीरिया और मोल्ड के बढऩे की संभावना रहती है। इससे आंतों को नुकसान पहुंचता है। इसलिए कभी भी चाय को गर्म करके नहीं पीना चाहिए। आइये जाने इस बारे में विशेषज्ञों की क्या राय है।आंतों स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायकस्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए आंतों का स्वस्थ होना बेहद जरूरी होता है। अगर आप अपने आंतों को हमेशा स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो कभी भी दोबारा गर्म की गई चाय का सेवन न करें। इससे पूरी तरह से दूरी बनाकर रखें। इसके अलावा अगर आपको आंतों से जुड़ी कोई समस्या है, तो भूलकर भी ऐसी चाय न पिएं।फूड प्वाइजनिंग होने का खतराकमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को फूड प्वाइजनिंग का अधिक खतरा रहता है। फूड प्वाइजनिंग से बचने के लिए आपको दोबारा गर्म की हुई चाय पीने से बचना चाहिए। दरअसल, छोड़ी गई चाय बैक्टीरिया और कवक के विकास का कारण बन सकता है, ऐसे में अगर इसे दोबारा गर्म करके पिया जाए तो फूड प्वाइजनिंग की समस्या हो सकती है।कैंसरचाय को दोबारा गर्म करके पीने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी होने की भी संभावना रहती है। दरअसल, चाय को दोबारा गर्म करने पर टैनिन निकलता है, जो कैंसरकारी हो सकता है। टैनिन से चाय का स्वाद बिगड़ जाता है और कड़वा हो जाता है।गैस्ट्रोएंटेराइटिसगैस्ट्रोएंटेराइटिस एक गंभीर समस्या हैं। इसमें व्यक्ति के पेट और आंत में इंफेक्शन हो जाता है। गैस्ट्रोएंटेराइटिस एक संक्रमण है, इसमें उल्टी और दस्त लगाना सामान्य लक्षण है। यह समस्या दोबारा गर्म करके चाय पीने से भी हो सकती है। ऐसे में भूलकर भी रिहिटिंग चाय नहीं पीनी चाहिए। यह संक्रमण पेट, आंत को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है।उल्टी और जी मिचलानागर्म की हुई चाय पीने से उल्टी और जी मिचलाने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए आपको भूलकर भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए। वैसे तो चाय पीने से सिरदर्द ठीक होता है, लेकिन अगर छोड़ी गई चाय पी जाए तो यह सिरदर्द, उल्टी और जी मिचलाने जैसी समस्याओं को कारण बन सकता है।
- चाट के जिक्र से ही मुंह में पानी आ जाता है. आलू चना चाट एक आसानी से बनने वाली स्नैक रेसिपी है. इसे आप अपने परिवार और दोस्तों के लिए किसी भी अवसर पर बना सकते हैं. भारत के हर हिस्से में मसालेदार चाट और भेलपुरी के लोग बहुत शौकीन हैं. आप इस स्वादिष्ट चना चाट को घर पर भी झटपट बना सकते हैं. जब भी मन करे इसका आनंद ले सकते हैं. इस हेल्दी और सुपर स्वादिष्ट चाट रेसिपी को किसी पार्टी या पिकनिक जैसे मौकों पर अपने प्रियजनों को परोस सकते हैं.आइए जानें इसकी रेसिपी.उबले आलू – 2प्याज – 1/2नींबू का रस – 1 बड़ा चम्मचआवश्यकता अनुसार नमकधनिया पत्ती – 1 छोटा चम्मचआलू भुजिया – 3 चम्मचटमाटर – 1 कटा हुआकाला चना – 1 कपहरी मिर्च – 1चाट मसाला – 1 चम्मचटमाटर – 1सरसों का तेल – 1 चम्मचकच्ची मूंगफली – 1 चम्मचस्टेप -1इस स्वादिष्ट चाट रेसिपी को बनाने के लिए मध्यम आंच पर एक पैन रखें और इसमें पानी के साथ नमक भी डाल दें. उबाल आने पर इसमें काला चना डाल दें. चने को गर्म पानी में भिगोकर एक तरफ रख दें.स्टेप – 2कच्ची मूंगफली लें और इन्हें एक कड़ाही में सरसों के तेल में 2-3 मिनट के लिए मध्यम आंच पर या हल्के भूरे और कुरकुरे होने तक भून लें.स्टेप -3प्याज, टमाटर, हरी मिर्च और हरा धनिया लें और इन्हें बारीक काट लें.स्टेप – 4एक बाउल में उबले हुए चने लें और बची हुई सामग्री डालें.अच्छी तरह मिलाएं ताकि मसाले और नींबू का रस मिश्रण को अच्छी तरह से कोट कर ले. अब उबले हुए आलू को बारीक काट लें और चने के मिश्रण में अच्छी तरह मिला लें. अब चटपटी आलू और चना चाट परोसें और आनंद लें.काले चने के फायदेकाले चने में मौजूद कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फाइबर पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद होता है. चने को अपने आहार में शामिल करने से आपको ब्लड शुगर के स्तर को कम करने और टाइप 2 डायबिटीज के जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी. इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम है. इसमें मौजूद उच्च फाइबर आपको देर तक भरा रखता है. अगर आप हेल्दी बाल चाहते हैं तो चने को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें. चने में विटामिन ए, बी 6, जिंक और मैंगनीज जैसे आवश्यक विटामिन और मिनरल होते हैं. ये आपके बालों के लिए फायदेमंद है. बालों को समय से पहले सफेद होने से रोकने के लिए चने का नियमित रूप से सेवन करना भी फायदेमंद है.-
- पेट हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग है और पाचन तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. ये कई तरह के एंजाइम को रिलीज करता है जो पाचन तंत्र को बढ़ाने का काम करता है. इसके अलावा एनर्जी देने में मदद करता है. हम क्या खाते हैं इसका असरा हमारे स्वास्थ्य पर असर पड़ता है. हम जो खाते हैं उसका सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव होता है. इसलिए अपनी डाइट का खास खयाल रखना चाहिए.कई लोगों को अक्सर पेट से जुड़ी समस्याएं होती है. इसके पीछे का मुख्य कारण खान पान हो सकता है. आइए जानते हैं पेट की समस्या को दूर करने के लिए किन चीजों को खाने से परहेज करना चाहिए.बिना धोएं फल और सब्जियां खाना – फलों और सब्जियों की सतह में हानिकारक पेस्टिसाइड्स और फर्टिलाइजर हो सकते हैं. अगर आप सब्जियों और फलों को धोकर नहीं खाते हैं तो स्वास्थ्य को नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए खाने से पहले फल और सब्जियों को अच्छे से धो लें.कम पका मांस और सीफूड – अधपका मांस और सीफूड खाना सेहत के लिए हानिकारक होता है. क्योंकि इसमें जर्म और बैक्टीरियां होते हैं. अधपका मीट और सीफूड खाने से फूड पॉइजनिंग और पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं.कच्चा दूध – कई बार डायरी प्रोडक्ट्स खाने से भी पेट की समस्याएं बढ़ सकती है. कच्चा दूध पीने से अपच की समस्या हो सकती है. इसलिए दूध से बनी चीजों से कुछ देर के लिए परहेज करें. इसक अलावा बिना फिल्टर के पानी न पिएं. इन चीजों को पीने से कई तरह की बीमारियां हो सकती है.अधिक मात्रा में नमक और चीनी का सेवन – खाने पीने के पदार्थों में चीनी और नमक का सेवन लिमिट में करें. इन चीजों का अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है.चाय और कॉफी का सेवन – चाय और कॉफी से परहेज करें क्योंकि इनमें कैफीन होता है. कैफीन की अधिक मात्रा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है. इससे अपच और गैस की समस्या हो सकती है.मसालेदार खाना – मसाले खाने का स्वाद बढ़ाने का काम करते हैं. लेकिन अधिक मात्रा में मसालों का सेवन करना नुकसानदायक होता है. अधिक मसाले वाली चीजें खाने से परहेज करें क्योंकि ये चीजें पेट की समस्या को बढ़ा सकती है. इसकी वजह से गैस, जल, अपच आदि की समस्या हो सकती है.खाली पेट एसिडिक चीजें खाना – संतरा, अंगूर, नींबू जैसे खट्टे फलों का सेवन कभी भी खाली पेट नहीं करना चाहिए. ये सभी चीजें एसिडिक होते हैं और सुबह नाश्ते से पहले सेवन करने पर ये अपच का कारण बन सकते हैं. कार्बोनेटेड ड्रिंक्स को पीने से भी बचना चाहिए क्योंकि इससे गैस बनता है.
- इंसान के शरीर का हर एक अंग महत्वपूर्ण होता है। वहीं, अगर बात शरीर के बेहतर कामकाज की करें, तो इसके लिए आपकी हड्डियों का मजबूत होना बेहद जरूरी है। लेकिन आपने कई ऐसे लोगों को देखा होगा जो अक्सर अपने शरीर में दर्द, हड्डियो में दर्द को लेकर शिकायत करते रहते होंगे। यहां तक कि ये समस्या जवान लोगों में भी देखा जाती है। ऐसे में जो लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं, इसके पीछे उनका खराब खानपान हो सकता है। खाने-पीने की कुछ ऐसी चीजें और आदतें हैं जो हड्डियों को समय से पहले ही काफी कमजोर कर सकती हैं। ऐसे में हमें सिर्फ उन चीजों का सेवन करना चाहिए, जो हमारी हड्डियों को कैल्शियम दे सके। तो चलिए हम आपको कुछ ऐसी ही खाने की चीजों के बारे में बताते हैं, जिनका सेवन करने से आपकी हड्डियां कमजोर हो सकती है। इसलिए इनको छोड़ना ही बेहतर विकल्प हो सकता है।नमक का ज्यादा सेवननमक हमारे खाने को स्वाद देने का काम करता है। लेकिन दो तरह के लोग होते हैं एक वे जो कम नमक खाते हैं, तो दूसरे वे जो काफी ज्यादा मात्रा में नमक का सेवन करते हैं। यहां ये समझना होगा कि नमक में सोडियम होता है, जो व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करने के बाद कैल्शियम को यूरीन के माध्यम से बाहर निकाल देता है, जिसकी वजह से हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। इसलिए नमक का ज्यादा सेवन करने से बचें।चॉकलेटआजकल के युवा और बच्चे काफी ज्यादा चॉकलेट का सेवन करते हैं, लेकिन हमें ये समझना होगा कि ये हमारी हड्डियों को अंदर ही अदंर खोखला बना देती है। चॉकलेट के सेवन से शरीर में ऑक्सलेट और शुगर की मात्रा बढ़ जाती है, जिसके कारण कैल्शियम शरीर में अवशोषित नहीं हो पाता है और ये हड्डियां कमजोर होने का कारण बनता है।शराबकई लोग कभी-कभी पार्टी में, तो कई लोग तो रोजाना शराब पीते हैं। लेकिन हम ये भूल जाते हैं कि शराब हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाती है। वहीं, शराब के सेवन से व्यक्ति के शरीर में कैल्शियम की मात्रा कम होने लगती है, जो हड्डियों को कमजोर करने का कारण बनता है।कोल्ड ड्रिंक्सगर्मी के मौसम हो या घर पर पार्टी हो, ऐसे समय पर लोग कोल्ड ड्रिंक्स काफी पीते हैं। उन्हें लगता है कि ये उनको ठंडक दे रही है, लेकिन असल में ये आपकी हड्डियों को कमजोर करने का काम करती है। इसमें पाए जाने वाले फॉस्फोरस और कार्बन डाईऑक्साइड हड्डियों को खोखला बनाने का काम करता है।
- सर्प को सनातन धर्म में पूज्यनीय माना गया है. महादेव जहां सांप को अपने गले में धारण करते हैं, वहीं जगत के पालनहार नारायण शेषनाग पर विराजमान होते हैं. लेकिन सांप एक खतरनाक जीव होता है, जिससे लोगों को डर लगता है. लोगों के मन से इस डर को निकालने और धरती पर नागों की महत्ता बताते हुए उनके संरक्षण का संदेश देने के लिहाज से हर साल नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है. नाग पंचमी सावन के महीने में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है.इस बार नाग पंचमी 13 अगस्त शुक्रवार को है. इस दिन नागों की पूजा का विधान है. धार्मिक मान्यता है कि नाग पंचमी पर नागों की पूजा करने से महादेव प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी होती है. इसके अलावा सापों से रक्षा होती है. काल सर्पदोष का प्रभाव समाप्त होता है और सांप का डर मन से निकल जाता है. गरुड़ पुराण में नाग पंचमी के दिन घर के दरवाजे के दोनों ओर नाग बनाकर उनका पूजन करने के बारे में बताया गया है. वहीं स्कन्द पुराण में नाग पंचमी पर नागों का पूजन करने से हर मनोकामना पूरी होने की बात कही गई है. जानिए नाग पंचमी की पूजा विधि, उपाय और शुभ मुहूर्त.ऐसे करें नाग देवता की पूजानाग पंचमी के दिन पांच नाग बनाकर उनकी पूजा की जाती है. ये नाग अनन्त, वासुकी, तक्षक, कर्कोटक और पिंगल नाग का स्वरूप माने जाते हैं. इस दिन सुबह उठकर स्नान आदि के बाद नाग देवता का स्मरण करना चाहिए. इसके बाद घर के दरवाजे के दोनों तरफ चांदी, लकड़ी या मिट्टी की कलम से हल्दी और चन्दन की स्याही से फन वाले पांच नाग बनाएं. कमल, पंचामृत, धूप आदि नागों को समर्पित करके विधिवत पूजन करें और खीर का भोग लगाएं. इसके बाद नाग गायत्री मंत्र और सर्प सूक्त का पाठ करें. फिर आरती गाएं. इससे सर्पाें से रक्षा होती है और भाग्य में वृद्धि होती है.पूजा का शुभ मुहूर्तनाग पंचमी 12 अगस्त को दोपहर 03 बजकर 24 मिनट से शुरू होकर 13 अगस्त को 01 बजकर 42 मिनट तक रहेगी. लेकिन उदया तिथि के हिसाब से इस पर्व को 13 अगस्त को ही मनाया जाएगा. इस दिन पूजा का शुभ समय 13 अगस्त को सुबह 05 बजकर 49 मिनट से 08 बजकर 28 मिनट तक रहेगा.ये उपाय भी आएंगे काम1. इस दिन नाग देवता के दर्शन करें और उन्हें दूध से स्नान करवाएं. अगर नाग के दर्शन न हो सकें तो नाग की प्रतिमा पर दूध अर्पित करें.2. किसी सपेरे से नाग नागिन का एक जोड़ा खरीद लें और इस जोड़े को जंगल में जाकर मुक्त कर दें. इससे सांपों के भय से मुक्ति मिलने के अलावा काल सर्प योग के प्रभाव कम होते हैं.3. घर पर या मंदिर में बैठकर नाग गायत्री मंत्र — ओम नागकुलाय विद्महे विषदन्ताय धीमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात् का कम से कम 108 बार जाप करें.
- गरुड़ पुराण एक ऐसा महापुराण है जो मानव जाति को जीवन के उत्थान की प्रेरणा देता है. इस पुराण में व्यक्ति की रोजाना की दिनचर्या से लेकर जीवन को बेहतर बनाने को लेकर ऐसी तमाम नीतियां बताई गईं हैं, जिन्हें अपनाकर व्यक्ति सिर्फ अपना जीवन ही नहीं संवारता, बल्कि मृत्यु के बाद भी सद्गति प्राप्त करता है. यहां जानिए ऐसे 5 कामों के बारे में जिन्हें हर व्यक्ति को सुबह-सुबह जरूर करना चाहिए. इससे तन-मन शुद्ध होने के साथ पॉजिटिव एनर्जी मिलती है और आपका दिन शुभ रहता है. आपके सभी काम आसानी से बन जाते हैं. जानिए उन 5 कामों के बारे में.स्नानं दानं होमं स्वाध्यायो देवतार्तनम्यस्मिन् दिने न सेव्यन्ते स वृथा दिवसो नृणाम्1. स्नानशास्त्रों में मन की शुद्धता के साथ तन की शुद्धता की बात भी कही गई है. तन की शुद्धता के लिए व्यक्ति को नियमित तौर पर स्नान करना चाहिए. जो मनुष्य रोजाना सुबह स्नान करता है, वो पूरे दिन ऊर्जावान रहता है. उसका तमाम बीमारियों से बचाव होता है और वो हर काम को मन लगाकर कर पाता है, जिससे उसे शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं.2. दानदान की बात सिर्फ गरुड़ पुराण में ही नहीं बल्कि अन्य शास्त्रों में भी कही गई है. व्यक्ति को रोजाना अपने हाथों से कुछ न कुछ दान जरूर करना चाहिए. चाहे वो भोजन हो या कुछ भी. इससे परिवार में खुशहाली बनी रहती है और किसी चीज की कमी नहीं रहती.3. हवन या दीपकवैसे तो शास्त्रों में हवन का बहुत बड़ा महत्व बताया गया है. हवन करने से वातावरण शुद्ध होता है और घर की नकारात्मकता दूर होती है. लेकिन यदि आप रोजाना हवन नहीं कर सकते तो कम से कम रोजाना दीपक जरूर जलाएं. एक दीपक मंदिर में रखें और एक तुलसी के पास. इससे हर काम में सफलता मिलती है. वास्तु दोष दूर होता है.4. जापदिन में थोड़ा समय निकालकर भगवान का जाप जरूर करें. चाहे कोई भी मंत्र पढ़ें लेकिन ईश्वर का जाप करने का एक नियम बनाएं. इससे घर के बड़े से बड़े व्यवधान टल जाते हैं और शुभ फल प्राप्त होते हैं.5. देवपूजनरोजाना स्नान के बाद भगवान की पूजा करके उन्हें भोग लगाना चाहिए. इससे आपके घर में धन धान्य की कमी नहीं रहती. भगवान की कृपा हमेशा बनी रहती है और तमाम संकट टल जाते हैं.
- दुनिया में ऐसे तमाम फल और ड्राई फ्रूट्स हैं, जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहत के लिए लाभदायक भी होते हैं। इन्हीं में से एक है खजूर। इसमें कई तरह के पोषक तत्व और खनिज होते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखते हैं और बीमारियों को दूर भगाते हैं। चूंकि अभी बारिश का मौसम है और इस मौसम में तरह-तरह की बीमारियां होने का खतरा रहता है, ऐसे में आपको खजूर को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। इस फल की सबसे बड़ी खासियत ये है कि आप इसे ताजा भी खा सकते हैं और चाहें तो सुखाकर भी खा सकते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि खजूर एक ऐसा फल है, जो प्राकृतिक रूप से पाचन क्रिया में मदद करता है। अगर आपका पाचन तंत्र कमजोर है, तो खजूर आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।शरीर को देता है ऊर्जाकई लोग बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस करते हैं या कई लोगों को दोपहर में सुस्ती या आलस लगने लगता है, ऐसे लोगों को खजूर का सेवन जरूर करना चाहिए। इसे खाने से शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है। खजूर का सेवन वैसे लोगों के लिए अच्छा है, जिन्हें बार-बार मीठा खाने की इच्छा होती है। यह अन्य मीठे खाद्य पदार्थों की तरह शरीर के लिए नुकसानदायक भी नहीं होता है।हड्डियों को बनाता है मजबूतखजूर में अच्छी खासी मात्रा में वैसे खनिज पाए जाते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए जरूरी होते हैं। दरअसल, उम्र बढ़ने के साथ ही लोगों की हड्डियां भी कमजोर होने लगती हैं, ऐसे में अगर आप पहले से ही खजूर का सेवन कर रहे हैं, तो इससे आपकी हड्डियां लंबे समय तक मजबूत रहेंगी। इसके नियमित सेवन से ऑस्टियोपोरोसिस जैसी हड्डियों की बीमारी में होने वाले दर्द को दूर करने में भी मदद मिलती है।ऐसे लोगों को जरूर खाना चाहिए खजूरखजूर को आयरन का एक अच्छा स्रोत माना जाता है। इसलिए विशेषज्ञ कहते हैं कि जो लोग एनीमिया के शिकार हैं, उन्हें खजूर का सेवन जरूर करना चाहिए। इसके अलावा खजूर के सेवन से कोलेस्ट्रॉल को भी कम करने में मदद मिलती है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कम रहता है।ये फायदे भी हैं खजूर केखजूर को त्वचा के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। इसके नियमित सेवन से त्वचा को लंबे समय तक सुंदर बनाए रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा यह बालों को भी मजबूत करता है और सबसे जरूरी कि खजूर में विटामिन-सी भी पाया जाता है, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को बढ़ाने में मदद मिलती है।
- बाजार में ऐसी कई चीजें मौजूद हैं जिनके सेवन से बेली फैट बर्न करने में मदद मिलती है, लेकिन ये कितनी कारगर हैं, इसका दावा कोई नहीं कर सकता. लिहाजा आपको वजन कम करने के लिए एक्सरसाइज के साथ हेल्दी डाइट लेनी चाहिए. मोटापे से छुटकारा पाने के लिए आपको सबसे पहले बैलेंस्ड डाइट में फलों, सब्जियों और पेय पदार्थों को शामिल करना चाहिए. वजन कम करने में खीरा पानी भी आपकी मदद कर सकता है. डाइट एक्सपर्ट के अनुसार, खीरे का यह जादुई पानी कैलोरी कम करने के साथ साथ पेट की चर्बी को भी कम कर देता है. नियमित रूप से खीरे के पानी का सेवन करने से बेली फैट तेजी से बर्न होता है. यह एक डिटॉक्स ड्रिंक है, जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर करता है और डिहाइड्रेशन से बचाता है. हालांकि पेट की चर्बी कम करने के लिए खीरे का पानी पीने के साथ ही वर्कआउट भी करना चाहिए.खीरे का पानी बनाने की सामग्री --1 खीरा1 गिलास पानी1 नींबूकाला नमक स्वादानुसारखीरे का पानी बनाने की विधि --सबसे पहले खीरे को नॉर्मल पानी से धो लें.अब इसे छीलकर पतले स्लाइस में काट लें.स्लाइस को किसी जार या पानी की कांच की बोतल में डालें.आप खीरे के पानी में नींबू के कुछ टुकड़े भी मिला सकते हैं.नींबू और खीरे के पानी को रात भर रेफ्रिजरेटर में मैरिनेट होने दें.इसे एक सर्विंग गिलास में डालें और इसका सेवन करें.खीरा पानी के अन्य फायदे --खीरे में कम कैलोरी और अधिक घुलनशील फाइबर पाए जाते हैं जो शरीर को हाईड्रेट रखते हैं और तेजी से वजन घटाने में मदद करते हैं.खीरा खाने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और लीवर हेल्दी रहता है. खीरा खाने से भूख कम लगती है जिससे आप अधिक खाने से बच जाते हैं.खीरे का पानी कई विटामिन, खनिज और इलेक्ट्रोलाइट से भरपूर होता है जो आसानी से अवशोषित हो जाते हैं. यह गर्म दिनों में शरीर में पानी के संतुलन को बनाए रखता है.
- आयुर्वेद में काफी लंबे समय से कुमकुमादि तेल का इस्तेमाल किया जाता है। यह हमारी त्वचा के लिए बहुत ही फायदेमंद है। कुमकुमादि तैलम को कुमकुमादि तेल कहते हैं। यह एक आयुर्वेदिक औषधि में से एक है। कुंकुमादि प्राचीन औषधीय है, जिसका वर्षों से इस्तेमाल किया जा रहा है। यह 26 तरह के हर्बल से तैयार औषधीय तेल है। कुंकुमादि तेल का इस्तेमाल चेहरे को गोरा बनाने, झुर्रियों को हटाने और दाग-धब्बों को दूर करने के लिए किया जाता है।किस तरह से तैयार होता है कुमकुमादि तेलकुंकुमादि तेल को तैयार करने के लिए लगभग 26 तरह के जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है। आइए जानते हैं इसमें इस्तेमाल करने वाली जड़ी-बूटियां- चंदन, लाक्षा, केसर, मंजिष्ठा, लीकोरिस , मधुका, कालियाका-बर्बेरिस एरिस्टाटा , गोक्षुरा, शलपरनी, पाताल, गांभरी, प्रिंशनपर्णी, इंडियन लोटस, जावा अंजीर, इंडियन लैम्पस, बरगद और तिल का तेल, बकरी का दूध आदि।कैसे करें कुंकुमादि तेल का उपयोगकुंकुमादि तेल में पोषक तत्व और औषधीय गुण भरपूर होता है। इसलिए इसका इस्तेमाल सावधानीपूर्वक करें। कुंकुमादि तेल का इस्तेमाल करने के लिए कुछ विशेष निर्देश दिए जाते हैं।-इसका इस्तेमाल सिर्फ बाहरी हिस्से में किया जाता है। तेल का इस्तेमाल करने से पहले अपने हाथों और चेहरे को अच्छी तरह धोएं। अपनी उंगलियों में तेल को लगभग 10-15 मिनट के लिए गोलाकार मालिश करें। अच्छे रिजल्ट के लिए रात के समय तेल से मालिश करें। नियमित रूप से दिन में 2 बार इस तेल का इस्तेमाल करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। तेल को कम से कम 1 से 2 घंटा अपने फेस पर लगाएं। अगर आपको इस तेल से एलर्जी है, तो तेल का इस्तेमाल ना करें।सूजन के लिए कुमकुमादि तेलम के लाभकुमकुमादि तेल में अधिकतर ऐसी जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें एंटी-इंफ्लामेटरी का गुण पाया जाता है। अगर आप इस तेल के साथ बकरी के दूध का इस्तेमाल करके लगाते हैं, तो इससे आपको सूजन की समस्या दूर होगी है। इसके इस्तेमाल से गठिया का दर्द और सूजन की समस्या से भी राहत मिलता है।प्रतिरक्षा को बढ़ाए कुंकुमादि तेलकुंकुमादि तेल में एंटी-ऑक्सीडेंट गुण भरपूर रूप से होता है। इसमें गांभरी नामक तत्व होता है। इसके इस्तेमाल से आपके शरीर की प्रतिरक्षा शक्ति बेहतर होती है। कुमकुमादि तेल में ल्यूटोलिन और बेंजोइक एसिड नामक तत्व होता है। कुमकुमादि तेल में तिल का तेल मिलाया जाता है, जिसमें फैटी एसिड और विटामिन ई भरपूर रूप से होता है, जो हानिकारक फ्री रेडिकल्स से स्किन की कोशिकाओं का बचाव करते हैं। नियमित रूप से इसका इस्तेमाल करने से आपकी कोशिकाओं को पुनर्जीवित होने में मदद मिल सकता है।हाइपरपिग्मेंटेशन दूर करे कुमकुमादिनियमित रूप से कुमकुमादि तेल का इस्तेमाल करने से हाइपरपिग्मेंटेशन की समस्या से राहत मिलता है। इससे स्किन की गहराई से सफाई होती है। इसके इस्तेमाल से अन्य क्रीम और तेलों की तुलना में चेहरे की सफाई गहराई से साफ होती है। यह आपके स्किन के छोटे और बड़े हिस्से को प्रभावित करता है।प्राकृतिक सनस्क्रीनयह हमारी स्किन के लिए नैचुरल सनस्क्रीम की तरह काम करता है। इसमें विटामिन ई सहित कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं, तो हमारी स्किन के लिए अच्छे होते हैं। एंटीऑक्सीडेंट भी इसमें उच्च मात्रा में होते हैं, सूर्य की हानिकारक किरणों से आपकी स्किन का बचाव करते हैं।कुमकुमादि तेल के नुकसानकुमकुमादि तेल के इस्तेमाल से आपके स्किन का दाग-धब्बा दूर हो सकता है। लेकिन ऑयली स्किन वालों के लिए ठीक नहीं होता है। इसके इस्तेमाल से त्वचा तैलीय हो सकती है और इसका इस्तेमाल त्वचा पर ज्यादा देर तक ना करें।------
- अमरूद तो आपने खाया ही होगा, लेकिन क्या आप उसके फायदों के बारे में जानते हैं? जुलाई-अगस्त महीने में भरपूर मात्रा में मिलने वाला अमरूद अनेक पोषक तत्वों का भंडार होता है और इस वजह से यह कई बीमारियों से शरीर की रक्षा करता है। यानी कुल मिलाकर अमरूद किसी चमत्कारी फल से कम नहीं है। सिर्फ यही नहीं, अमरूद के पत्ते भी सेहत के लिए लाभदायक होते हैं। ये भी कई बीमारियों से शरीर को बचाने में सक्षम हैं, क्योंकि इन पत्तों में एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी जैसे गुण पाए जाते हैं। अमरूद के पत्ते जहां कोलेस्ट्रॉल के नियंत्रण और जोड़ों के दर्द को दूर करने में उपयोगी हैं, तो वही अमरूद खाने के भी कई फायदे हैं। अमरूद को उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) में तो फायदेमंद माना ही जाता है, साथ ही इसके सेवन से पाचन तंत्र भी सही रहता है। हालांकि कभी-कभी कई लोगों को अमरूद का सेवन नुकसान भी पहुंचा सकता है।दिमाग को तेज बनाता है अमरूदअमरूद में विटामिन बी-3 और बी-6 भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जिन्हें मस्तिष्क के लिए अच्छा माना जाता है। इसके सेवन से दिमाग तो स्वस्थ और तेज बनता ही है, साथ ही यह ध्यान में भी सुधार लाता है, यानी यह ध्यान केंद्रित करने की प्रक्रिया में सुधार करता है।इन समस्याओं में भी फायदेमंद है अमरूदअमरूद में उच्च मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो न केवल पाचन क्रिया में सुधार लाता है और कब्ज से राहत प्रदान करता है, बल्कि आंत की सफाई करने में भी मदद करता है। इसके अलावा अमरूद को थायरॉयड में भी उपयोगी माना जाता है, साथ ही यह विटामिन-ए का बहुत अच्छा स्रोत है, ऐसे में यह आंखों के स्वास्थ्य में भी सुधार लाता है।अमरूद खाने के नुकसान क्या हैं?किसी भी चीज का अधिक मात्रा में सेवन नुकसानदायक ही होता है। अमरूद के भी कुछ नुकसान हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को अमरूद के अधिक सेवन से बचना चाहिए, क्योंकि इसमें ज्यादा फाइबर होता है और ऐसे में उन्हें डायरिया होने की संभावना रहती है।अमरूद के अधिक सेवन से शरीर में फाइबर की मात्रा में बढ़ोतरी होती है और ऐसे में इससे पाचन संबंधी समस्याएं, जैसे पेट में गैस, सूजन और मल त्याग में परिवर्तन आदि हो सकते हैं। हालांकि अगर आप फाइबर का अधिक सेवन करते हैं तो यह जरूरी है कि अधिक से अधिक तरल पदार्थों का भी सेवन करें।विशेषज्ञ कहते हैं कि जिन लोगों को स्वास्थ्य संबंधी कोई ऐसी परेशानी है, जिसमें फाइबर या पोटैशियम का कम से कम सेवन होना चाहिए, तो आपको अमरूद के सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर ले लेनी चाहिए। ऐसा नहीं करने पर आपकी परेशानियां बढ़ सकती हैं।
- ये अमूमन देखा जाता है कि बच्चे हरी सब्जियों को खाने में काफी आनाकानी करते हैं। इस कारण उन्हें अच्छा पोषण नहीं मिल पाता, जिसके चलते कई मर्तबा उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है। अच्छी हरी सब्जियां हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक होती हैं। ऐसे में बच्चों के विकास के लिए हरी सब्जियां काफी जरूरी हैं। वहीं दूसरी तरफ कई बच्चे इन हरी सब्जियों को खाने की बजाए ज्यादातर जंक फूड का सेवन करते हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक होता है। इसे खाने से विभिन्न प्रकार की बीमारियां जन्म लेती हैं। अगर आपके बच्चे भी हरी सब्जियों को खाने में आनाकानी करते हैं, तो आप घर पर ही ऐसे स्नैक्स को बना सकती हैं, जिसे वो बार-बार खाने की डिमांड करेंगे। ये स्नैक्स स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी काफी फायदेमंद हैं। इससे कई तरह के पोषक तत्व शरीर को मिलते हैं।जरूरी सामग्री-----पालक के पत्ते - 8 से 10अजवाइन - 1 छोटी चम्मचलाल मिर्च पाउडर - 1 छोटी चम्मचहल्दी पाउडर - 1 छोटी चम्मचनमक - स्वाद के अनुसारफेंटा हुआ दही - आधा कपइमली की चटनीबारीक कटा हुआ प्याजचाट मसालाबारीक सेव - 2 चम्मचअनार दानास्टेप 1-----------पालक के पत्तों को अच्छे से धोकर पोंछ लें। उसके बाद एक बर्तन में बेसन, नमक, मिर्च, हल्दी, अजवाइन और थोड़ा सा पानी डालकर गाढ़ा बेटर को तैयार करें। ये करने के बाद पालक के हर एक पत्ते को बेटर में डुबोएं और उसे तेल में अच्छे से फ्राई करें।स्टेप 2-------------उसके बाद एक अलग बर्तन लें और उस पर टिश्यू पेपर को बिछाएं। फ्राई किए हुए पत्तों को अलग निकालकर बर्तन में रखें। पत्तों का अतिरिक्त तेल टिश्यू पेपर सोख लेगा। उसके बाद पत्तों को दूसरे प्लेट पर निकाल कर रख देंं। फ्राई हो चुके पत्तों पर चाट मसाला को छिड़कें।स्टेप 3-----------उसके बाद इमली की चटनी, फेंटा हुआ दही और हरी चटनी को स्वाद के अनुसार फ्राई किए हुए पत्तों पर डालें। बारीक कटे हुए प्याज, सेव और अनार दाने से उसे गार्निश करके अपने बच्चों को सर्व करें। ये रेसिपी स्वादिष्ट होने के साथ साथ सेहतमंद भी है। इसे खाने के बाद बच्चे आपसे बार बार इसे बनाने के डिमांड करेंगे।
- दाल के पानी के फायदे. वर्तमान में शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. ऐसे में दाल पानी आपकी मदद कर सकता है. इसके नियमित सेवन से आप कई गंभीर बीमारियों से भी बच सकते हैं. दाल के पानी में कैलोरी की मात्रा नहीं के बराबर होती है, साथ ही इसमें प्रोटीन भी अच्छी-खासी मात्रा में होता है. दाल के पानी में घुलनशील फाइबर होने की वजह से बैड कोलेस्ट्रॉल नहीं जमा होता हैडाइट एक्सपर्ट के अनुसार, दाल के पानी का सेवन हमें कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद करता है. दाल के पानी में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स और फॉस्फोरस होता है. इसे पीने से एनीमिया दूर होने के साथ ही वजन कम होता है. आप अलग-अलग तरह के दाल का पानी पी सकते हैं.दाल का पानी पीने के फायदे1. इम्यूनिटी पावर को मजबूत करता हैदाल के पानी के सेवन से आप इम्यूनिटी पावर को मजबूत रख सकते हैं. इसमें भारी मात्रा में कैल्शियम, मैग्नेशियम, पोटैशियम और सोडियम होता है. इसमें अच्छी मात्रा में विटामिन-सी, कार्ब्स और प्रोटीन्स के साथ डायटरी फाइबर भी मौजूद होते हैं. इसका ग्लायसेमिक इंडेक्स भी काफी कम होता है.2. एनर्जी को बनाए रखता हैरोज एक कटोरी दाल का पानी पीने से शरीर में एनर्जी बनी रहती है. आप इसे फ्रिज में रखकर ठंडा करके भी पी सकते हैं. ऐसा करने से इसकी पोष्टिकता खत्म नहीं होती है.3. वजन कम करने में मददगारअगर आप मोटापे से परेशान हैं तो दाल पानी आपकी मदद कर सकता है. आप वेटलॉस डाइट के रूप में दाल का पानी पी सकते हैं. ये न सिर्फ कैलोरी को कम करती है बल्कि इसका पानी पीने से आपको लम्बे वक्त तक भूख का भी एहसास नहीं होता है.4.. दिमाग के लिए फायदेमंददाल का पानी दिमाग के लिए फायदेमंद माना जाता है. यह आसानी से पच जाता है और हल्का होने के कारण शरीर में गैस नहीं बनती. इससे पेट की समस्या से भी छुटकारा मिलता है.5. डायरिया में आरामलूज मोशन होने पर या डायरिया होने पर एक कटोरी दाल का पानी पीने से आराम मिलता है. ये न सिर्फ शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है, बल्कि लूज मोशन को भी कम करता है.
- औषधीय गुणों से भरपूर भुट्टा दिल व दिमाग को मजबूत व ताकतवर बनाकर दुरुस्त रखता है. भुट्टे में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, विटामिन, खनिज और एंटी-ऑक्सिडेंट जैसे कई ऐसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो सेहत को काफी फायदा पहुंचाते हैं. आयुर्वेद में भुट्टा खाने के कई फायदे गिनाए गए हैं. ये प्यास को शांत करने वाला होता है. अच्छी बात ये है कि एक ओर जहां बहुत सी चीजें पकने के बाद अपना पोषक गुण खो देती हैं वहीं भुट्टे का पोषण और बढ़ जाता है.एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर 100 ग्राम भुट्टे के दाने लगभग 365 कैलोरी ऊर्जा प्रदान करते हैं. इसमें 7 प्रतिशत फैट, 18 फीसदी प्रोटीन, 24 फीसदी कार्बोहाइड्रेट और 8 प्रतिशत पोटैशियम होता है. साथ ही इसमें 31 फीसदी मैग्नीशियम, 30 फीसदी विटामिन-बी6 और 15 प्रतिशत आयरन होता है, ये सभी तत्व सेहत के लिए जरूरी होते हैं. जाने माने आयुर्वेद के अनुसार, बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए भी ये बहुत फायदेमंद है. इसमें कोलेस्ट्रॉल न के बराबर होता है और इसलिए ये दिल की सेहत के लिए भी बहुत अच्छा है. इसे आप खाली पेट भी खा सकते हैं. इसके अलावा नाश्ते में भुट्टे का सेवन फायदेमंद माना जाता है.इम्यूनिटी बढ़ाता है भुट्टाभुट्टे में काफी मात्रा में विटामिन बी-6, आयरन, विटामिन ए, थियामिन, जिंक और मैग्नीशियम जैस पोषक तत्व होते हैं. ये इम्यूनिटी को बढ़ाने में मदद करते हैं. जिससे थकान और कमजोरी दूर होती है और शरीर को मजबूती मिलती है.आंखों की रोशनी बढ़ाने में मददभुट्टे के पीले दानों में कैरोटीनोइड नाम का पदार्थ मौजूद होता है, जो आंखों की रोशनी को बढ़ाने में मदद करता है. साथ ही इसमें मौजूद ल्यूटिन मोतियाबिंद की दिक्कत को होने से रोकता है.पाचन को करता है ठीकभुट्टे में काफी मात्रा में फाइबर होता है, जो पाचन सम्बन्धी समस्या नहीं होने देता है. इसके सेवन से कब्ज की दिक्कत से भी निजात मिलती है.वजन घटाने में मददभुट्टे को खाने से पेट जल्दी भर जाता है और बार-बार भूख भी नहीं लगती हैं. भुट्टे में फैट काफी कम और स्टार्च काफी मात्रा में होता है. जो लोग वजन कम करना चाहते हैं वो भुट्टे की मदद ले सकते हैं.एनीमिया का खतरा कम करता हैभुट्टे के सेवन से एनीमिया का खतरा कम होता है. भुट्टे में विटामिन बी 12, फोलिक एसिड और आयरन काफी मात्रा में होता है. इसके सेवन से रेड ब्लड सेल्सके उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिलती है.
- भारतीय घरों में दाल पकाने से पहले उसे भिगोकर रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। दरअसल दाल को भिगोने से पौष्टिकता बढ़ती है। बिना भिगोई हुई दाल प्रयोग करने से इनमें मौजूद फाइटिक एसिड नामक कंपाउंड पोषक तत्वों के अवशोषण में रुकावट उत्पन्न करता है। भीगी हुई दाल फाइटिक एसिड को कम करने में सहायक है और ब्लोटिंग को भी कम करती है। दाल भी जल्दी पकती है।जब दाल भिगोकर पकाया जाता है तब उसमें न्यूट्रिशन लॉस भी कम हो जाता है। उसमें मौजूद वॉटर सॉल्युबल विटामिन्स पानी में घुल जाते हैं और यदि वह पानी फेंक दिया जाता है तो न्यूट्रिएंट्स भी खत्म हो जाते हैं। खाने में बहुत तरह के ऐसे न्यूट्रिएंट्स होते हैं जो खाने को तेज आँच पर पकाने से खत्म हो जाते हैं। सही ढंग से कुकिंग प्रैक्टिस करने से हम ऐसे न्यूट्रिएंट्स के नुकसान को बचा सकती हैं।दाल भिगोने के फायदेभीगी हुई दाल शरीर में मिनरल अब्जॉप्र्शन रेट बढ़ाती है और फाइटेज नामक एंजाइम सक्रिय हो जाता है। ये फाइटेज कैल्शियम, आयरन और जिंक को जोड़ता है जबकि फाइटिक एसिड को ब्रेक करता है और अवशोषण को आसान बनाता है। जबकि एमाइलेज कंपाउंड दाल में कांप्लेक्स स्टार्च को तोड़ता है और उन्हें पचाने में आसान बनाता है। दाल को भिगोने से उसमें मौजूद गैस उत्पन्न करने वाले कंपाउंड खत्म होते हैं। अधिकांश दालों में कांप्लेक्स ओलिगोसेकेराइड होते हैं, जो एक प्रकार की कांप्लेक्स शुगर है। ये सूजन और गैस कारण होती है। भिगोने के बाद इस कांप्लेक्स शुगर की मात्रा बहुत कम हो जाती है और आप इन सब परेशानियों से बच जाते हैैं।दाल भिगोने का सही तरीकाजरूरत के हिसाब से दाल निकालने और उसे एक बर्तन में निकाल लें। अब पानी से धो लें। भिगोने से पहले पानी को कम से कम 3-4 बार बदलें और हाथों से रगड़ते हुए धीरे से धोयें। आप दाल को छलनी में डालकर भी धो सकते हैं। अब दाल को एक कटोरे में डालें और पानी से भरें। दाल को कम से कम 30 मिनट और अधिक से अधिक 2 घंटे तक भीगने दें।बिना छिलके वाली दालों को 30 मिनट से लेकर 1 घंटा तक भिगोया जा सकता है और साबुत या छिलके वाली दालों को 2 घंटे तक भिगोयें। दालों को भिगोने से कंपलेक्स कार्ब टूटते हैं। साथ ही खाना पकने का समय भी कम होता है।ज्यादातर लोग दाल को पकाने से पहले धोते हैं और बहुत कम लोगों में आदत होती है दाल भिगोने की। जबकि राजमा और छोले जैसे खाद्य तो रात भर भिगोने चाहिए। बहुत सी दालें बिना भिगोए भी जल्दी बन जाती हैं। यही सोच कर दालों को भिगोया नहीं जाता, लेकिन दालों को भिगोकर उनसे मिलने वाले फायदे जानकर, आप अपनी आदत जरूर बदल देंगे।----
- आप सभी ने छुईमुई या लाजवंती के पौधे के बारे में जरूर सुना होगा। एक ऐसा पौधा जिसे छूने से उसकी पत्तियां सिकुड़ जाती हैं। यह एक संवेदनशील पौधा होता है जिसे कई नामों से जाना जाता है। छुईमुई या लाजवंती और शर्मीली इन नामों से जानें जाना वाला पौधा आयुर्वेद के मुताबिक कई औषधीय गुणों का भंडार है। आदिवासी इलाके में इस पौधे का इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा के लिए काफी समय से किया जाता रहा है। आइये जानते हैं छुईमुई या लाजवंती के पौधे के औषधीय लाभ के बारे में।1. एंटी डिप्रेसेंट, एंटी एंग्जायटी और मेमोरी के लिए फायदेमंदआयुर्वेद के मुताबिक छुईमुई के पौधे के इस्तेमाल से तनाव, अवसाद और डिप्रेशन की समस्या को खत्म किया जा सकता है। याददाश्त में सुधार के लिए भी छुईमुई या लाजवंती का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसके पौधे (पत्ती समेत) का अर्क बनाकर उसका सेवन करने से आपको मानसिक समस्याओं में फायदा मिलेगा। आप तनाव, डिप्रेशन, चिंता और अवसाद जैसी मानसिक बीमारियों के इलाज के लिए छुईमुई के पौधे का अर्क बना लें। अब इस अर्क का रोजाना सुबह-शाम एक चम्मच सेवन करें। ऐसा कुछ दिनों तक करने से इन बीमारियों में फायदा मिलेगा।2. डायबिटीज की समस्या में छुईमुई का इस्तेमालमधुमेह (डायबिटीज) की समस्या में छुईमुई की पत्तियों का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद माना जाता है। ब्लड शुगर के स्तर को कम करने के लिए छुईमुई की 100 ग्राम पत्तियों को 300 मिलीलीटर पानी में डालें। अब इसे तेज आंच पर उबालकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े का सेवन करने से मधुमेह की समस्या में फायदा मिलता है।3. बवासीर (पाइल्स) की समस्या में छुईमुई का इस्तेमालआयुर्वेद के मुताबिक बवासीर के इलाज के लिए छुईमुई का इस्तेमाल प्राचीन काल से ही होता आ रहा है। बवासीर से राहत पाने के लिए छुईमुई के पत्तों को लेकर उन्हें छाए में सुखा लें। अब इनका चूर्ण बनाकर तैयार कर लें। अब इसके एक चम्मच चूर्ण को एक गिलास दूध में मिलकर सुबह शाम सेवन करें। ऐसा नियमित रूप से करने पर बवासीर और अर्श की समस्या में फायदा मिलेगा।4. डायरिया की समस्या में छुईमुई का इस्तेमालसामान्य और खूनी दस्त की समस्या में छुईमुई या लाजवंती की पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है। खूनी दस्त की समस्या में छुईमुई के पौधे की जड़ का चूर्ण बनाकर मरीज को लगभग 3 ग्राम चूर्ण दही के साथ खिलाएं। एक से दो बार खिलाने से खूनी दस्त की समस्या तुरंत खत्म हो जाती है। आदिवासी इलाके में इसकी जड़ों का काढ़ा बनाकर खूनी दस्त की समस्या में देते हैं।5. अस्थमा में छुईमुई का इस्तेमालअस्थमा की समस्या में छुईमुई को असरदार आयुर्वेदिक औषधि माना जाता है। अस्थमा में इसका इस्तेमाल बहुत फायदेमंद होता है। लाजवंती या छुईमुई में कफ को खत्म करने के गुण पाए जाते हैं इसलिए इसके इस्तेमाल से अस्थमा की समस्या में कफ बनने से छुटकारा पाया जा सकता है। इसके पौधे के अर्क का सेवन करने से अस्थमा की समस्या में फायदा मिलता है। लेकिन इसका उपयोग करने से पहले आप किसी वैद्य या आयुर्वेदिक एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें।6. पीलिया के इलाज में छुईमुई का इस्तेमालपीलिया एक गंभीर बीमारी है जिसका समय पर इलाज न किये जाने की स्थिति में मरीज की जान भी जा सकती है। पीलिया की समस्या में मरीज के शरीर में खून की कमी और कमजोरी हो जाती है। पीलिया के इलाज के लिए आयुर्वेद में छुईमुई के इस्तेमाल का वर्णन किया गया है। आप छुईमुई के पौधों के इस्तेमाल से पीलिया की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। इसके लिए आप छुईमुई की पत्तियों का रस निकाल लें। इस रस को नियमित रूप से मरीज को दें। लगभग एक हफ्ते में इसका असर देखने को मिलेगा। पीलिया को खत्म करने के लिए छुईमुई की पत्तियों रस रोजाना सुबह 15 दिन के लिए जरूर दिया जाना चाहिए।
- मानसून के सीजन में हमें त्वचा से जुड़ी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस दौरान कील और मुहांसे त्वचा की रंगत को कम कर देते हैं। चेहरे पर अनेकों दाग धब्बे निकल आते हैं। इस कारण हमारी खूबसूरती कम हो जाती है। इनसे छुटकारा पाने के लिए व्यक्ति कई उपायों को अपनाता है। उसके बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं होता। जानकारी के अभाव में हम कई मर्तबा चेहरे पर निखार पाने के लिए गलत किस्म के ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं। इससे त्वचा पर और भी ज्यादा दाग धब्बे आ जाते हैं। अगर आप भी इन समस्याओं से परेशान हैं, तो आगे बताए गए आयुर्वेदिक उपायों को अपना सकते हैं। इनके कोई साइड इफेक्ट्स नहीं होते हैं। इनको अपनाने के बाद आपका चेहरा साफ चमकदार और ग्लोइंग दिखने लगेगा। इसके अलावा आपके चेहरे पर एक प्राकृतिक सुंदरता भी नजर आएगी।एलोवेरा जेलआयुर्वेद में एलोवेरा को कुमारी के नाम से जाना जाता है। त्वचा के लिए एलोवेरा जेल काफी फायदेमंद है। इसके इस्तेमाल से त्वचा से जुड़ी कई समस्याओं से हमें छुटकारा मिलता है। इसके प्रयोग से सनबर्न और एजिंग के लक्षण कम हो जाते हैं। इस कारण चेहरा साफ और ग्लोइंग दिखने लगता है।चंदन और दही का फेस मास्कअगर आप ऑयली स्किन से परेशान हैं, तो ऐसे में आपको चंदन और दही के फेस मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए। इसको आप चंदन और दही के मिश्रण से बना सकते हैं। ये आपके चेहरे के पोर्स को अच्छे से साफ करता है। इससे चेहरा भी मॉइश्चराइज होता है। इस फेस मास्क के प्रयोग से मुहांसों से जुड़ी समस्या से छुटकारा मिलता है।नीम का फेस पैकनीम के भीतर कई औषधीय गुण पाए जाते हैं। इसे आयुर्वेद में काफी महत्वपूर्ण माना गया है। इसके प्रयोग से त्वचा से जुड़ी कई समस्याएं दूर हो जाती हैं। नीम के अंदर एंटी बैक्टीरियल, एंटी फंगल और एंटी सेप्टिक गुण पाए जाते हैं, जो कि स्किन के लिए काफी फायदेमंद हैं। इसके उपयोग से त्वचा से मुहांसे और दाग धब्बे खत्म हो जाते हैं।मुल्तानी मिट्टी और चमेली त्वचा के लिए है काफी फायदेमंदमुल्तानी मिट्टी को लगाने से स्किन पर आने वाला अतिरिक्त ऑयल कम हो जाता है। वहीं चमेली के भीतर ऐसे कई गुण होते हैं, जो स्किन के एक्ने को दूर करने का काम करते हैं। चेहरे को साफ और चमकदार रखने के लिए आप बिना चीनी के आधा कप चमेली की चाय लें। उसमें 3 चम्मच मुल्तानी मिट्टी को अच्छे से मिलाकर पेस्ट तैयार करें। इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाइए। करीब 5 से 10 मिनट लगाने के बाद उसे साफ पानी से धो लें। त्वचा के लिए ये उपाय काफी फायदेमंद है।
- धनिया पानी के फायदे. धनिया का पाउडर भारतीय किचन का एक ऐसा इंग्रेडिएंट्स है, जो ज्यादातर चीजों में इस्तेमाल होता है. तो वहीं धनिया की पत्ती भी गार्निशिंग के लिए एक खास मुकाम रखती है. लेकिन आप जानते हैं कि धनिया का पानी भी सेहत को कई तरह के फायदे पहुंचाने का काम बड़ी ही आसानी के साथ करता है. इस खबर में हम आपके लिए धनिया पानी को तैयार करने से लेकर सेवन करने का तरीका और उससे होने वाले लाभों के बारे में जानकारी दे रहे हैं.धनिया में क्या-क्या पाया जाता हैधनिया के पानी में पोटैशियम, कैल्श्यिम, विटामिन सी और मैग्नीजियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है और ये सभी तत्व बीमारियों को कोसों दूर रखते हैं.ऐसे तैयार करें धनिया पानीआयुर्वेद एक्सपर्ट्स की मानें तो आप जीरा, धनिया के बीज, मेथी के दाने और काली मिर्च डालकर रातभर के लिए भिगो दें. सुबह होने पर इसमें नींबू का रस और शहद मिलाएं. अब इसे खाली पेट पीएं. अगर जीरा, धनिया के बीज, मेथी के बीज, और काली मिर्च नहीं खाना चाहते तो छलनी से छान कर अलग कर सकते हैं.धनिया पानी के जरबदस्त लाभ ---00धनिया में मौजूद गुण वजन और पेट की चर्बी घटाने में भी सहायक होते हैं. धनिया का पानी शरीर के मेटाबोलिज्म को नियंत्रित करता है, जिसकी वजह शरीर में मौजूद अतिरिक्त फैट को कम करने में मदद मिलती है.00धनिया के पानी का सेवन करने से इम्यूनिटी मजबूत होती है. इस पानी में मौजूद एंटी-ऑक्सिडेंट शरीर में फ्री रेडिकल्स को कम करने में मदद करते हैं. जिसकी वजह से बीमार होने का खतरा कम होता है.00इसके प्रयोग से ब्लड शूगर लेवल को कम किया जा सकता है. यह गठिए के दर्द को कम कर सकता है. इसके साथ ही शरीर को हाइड्रेट रखता है और शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता.00 धनिया का पानी आपकी पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में भी खास भूमिका निभाता है. ये पाचन सम्बधी दिक्कतों को दूर करने में मदद करता है जिससे पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है.00धनिया का पानी बॉडी को डिटॉक्स करने में मदद करता है. इसको पीने से शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं. इसकी वजह से इंफेक्शन का खतरा कम होता है.
- आज के समय में लोग सेहत और खानपान को लेकर जागरूक हो रहे हैं। यही कारण है कि लोग चीनी की जगह पर गुड़ के सेवन पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। गुड़ कई फायदेमंद पोषक तत्वों से भरपूर एक स्वीटनर है जिसे गन्ने से बनाया जाता है। आयुर्वेद और प्राचीन चिकित्सा पद्धति में गुड़ का इस्तेमाल औषधि के रूप में किया जाता है। गुड़ में आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम, खनिज और अन्य फायदेमंद पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि इन तमाम पोषक तत्वों से भरपूर गुड़ का सेवन सेहत के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है? आइये जानते हैं ज्यादा गुड़ खाने से सेहत को होने वाले नुकसान के बारे में।1. गुड़ के अधिक सेवन से ब्लड शुगर बढऩे का खतरासभी स्वीटनर की तरह गुड़ भी सुक्रोज होता है। गुड़ का अधिक सेवन शरीर में ब्लड शुगर (रक्त शर्करा) का स्तर बढ़ा सकता है। विशेष रूप से जो लोग डायबिटीज की समस्या से ग्रसित हैं उन्हें गुड़ का सेवन कम मात्रा में करना चाहिए। डायबिटीज से पीडि़त लोगों में चीने के समान ही गुड़ का असर भी होता है। यदि इसका सेवन अधिक मात्रा में किया गया तो इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति के इंसुलिन के स्तर में बदलाव देखने को मिलेगा। एक आंकड़े के मुताबिक लगभग 10 ग्राम गुड़ में 9.7 ग्राम शुगर होती है। इसलिए गुड़ का अधिक मात्रा में सेवन नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि इसका कम मात्रा में सेवन फायदेमंद माना जाता है।2. गुड़ के अधिक सेवन से मोटापे का खतरागुड़ का अधिक सेवन करने से मोटापे का खतरा बना रहता है। चूंकि लगभग 100 ग्राम गुड़ में 385 कैलोरी मौजूद होती है इसलिए डाइटिंग आदि कर रहे लोगों को इसका सेवन सोच समझकर ही करना चाहिए। अगर आप वजन कम करने का प्रयास कर रहे हैं तो भी गुड़ का कम मात्रा में ही सेवन करें।3. गुड़ के अधिक सेवन से कब्ज का खतरागुड़ के सेवन से कुछ लोगों को कब्ज, अपच जैसे पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। दरअसल कुछ लोग ताजे गुड़ का सेवन अधिक मात्रा में करते हैं और ताजा गुड़ पेट में ठीक ढंग से पचने में असमर्थ होता है। इसलिए ताजा गुड़ का सेवन पाचन से जुड़ी समस्याओं के अलावा कब्ज और पेट में मरोड़ का कारण भी बन सकता है।4. नाक से खून बहने की समस्यागुड़ का अधिक मात्रा में सेवन करने से नाक में से खून बहने की समस्या भी हो सकती है। चूंकि गुड़ की तासीर गर्म होती है इसलिए इसका सेवन गर्मी में मौसम में कम किया जाता है। गर्मी के मौसम में गुड़ का अधिक मात्रा में सेवन करने से आपको नाक से खून बहने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।5. परजीवी संक्रमण का खतरागुड़ का सेवन अधिक मात्रा में करने से परजीवी संक्रमण (पैरासाइट इंफेक्शन) का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि आमतौर पर गुड़ को बनाने में साफ सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है लेकिन अगर इसे बनाने में साफ-सफाई का ध्यान नहीं दिया गया तो इसमें कई प्रकार की अशुद्धियां रह जाती है जो आँतों में कीड़े पैदा करने का काम करती है। ऐसे गुड़ का अधिक मात्रा में सेवन परजीवी संक्रमण का खतरा पैदा करते हैं।6. एलर्जी का खतरागुड़ का अधिक मात्रा में सेवन संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है। लेकिन अगर आपको एलर्जी की समस्या है तो गुड़ का सेवन बहुत सोच समझकर करना चाहिए। एलर्जी की समस्या में आप अगर गुड़ का सेवन करते हैं तो आपको स्किन रैशेज, सिरदर्द, बुखार, थकान, उल्टी और मतली की समस्या होने लगेगी। इसके अलावा गुड़ का अधिक मात्रा में सेवन चेहरे पर दाने और एक्ने की समस्या ही पैदा कर सकती है।
- जितना हम मानसून का आनंद लेते हैं, ये कई स्वास्थ्य समस्याओं को अपने साथ लाता है जो कि चिंता का विषय हो सकता है अगर कोई अपनी उचित देखभाल करने में विफल रहता है. बरसात का मौसम नमी, पसीने और चिपचिपाहट से भरा होता है जो नमी की वजह से होता है और इससे आपके शरीर में विशेष रूप से आपके पैरों में फंगस और मोल्ड की संभावना कई गुना बढ़ जाती है. इसलिए, अपने पैरों को संक्रमण से बचाने और उन्हें स्वस्थ और साफ रखने के लिए, आपको मानसून में अपने पैरों की विशेष देखभाल करने की जरूरत है.एक्सफोलिएटअपने पैरों से डेड स्किन को नियमित रूप से हटाने के लिए फुट स्क्रबर या झांवा का इस्तेमाल करें. डेड स्किन सेल्स पैरों को सख्त कर देती हैं और दरारें बन जाती हैं. इससे आपके पैर साफ रहेंगे और डेड स्किन भी नहीं रहेगी.मॉइस्चराइजिंग कुंजी हैपैरों को अच्छी तरह धोने के बाद हमेशा मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करें. जैतून का तेल या बादाम का तेल भी मॉइस्चराइजर की तरह प्रभावी हो सकता है. बादाम का तेल एक प्राकृतिक फुट लोशन है जिसे सोने से पहले पूरे पैरों पर समान रूप से लगाना चाहिए.फुट थेरेपीफुट सोक, स्क्रब और हीलिंग क्रीम बहुत उपलब्ध हैं और ये आपके पैरों की चिकनाई को बहाल करने के लिए बहुत अच्छा काम करते हैं. फुट सोक वो है जिसे गर्म पानी में मिलाया जाता है जिसके बाद नमक के मोती और ताजा एक्वा सुगंध उन्हें आराम और शुद्ध करने में मदद करते हैं. फुट स्क्रब में विटामिन ई के साथ जोजोबा और सूरजमुखी जैसे हीलिंग ऑयल होते हैं. वो खोई हुई नमी की भरपाई करते हैं और आपके फुटपैड को भी कोमल बनाते हैं.अपने पैरों को ठीक से धोएंअपने पैरों के जरिए अपने शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालें. आपके पैरों के लिए हॉट बाथ बेहतरीन काम कर सकता है. अपने पैरों को अच्छी तरह साफ करने के लिए एक महीन झांवा या स्क्रबर का इस्तेमाल करें और बाद में उन्हें आराम करने और डेड सेल्स और टॉक्सिन्स को अलविदा कहने के लिए गर्म पानी में भिगो दें. इसके तुरंत बाद अपने पैरों को मॉइस्चराइज करना न भूलें.फुट मास्क का इस्तेमाल करेंजैसे बाल और फेस मास्क आपके लिए चमत्कार करते हैं, वैसे ही फुट मास्क भी आपकी त्वचा को शांत कर सकते हैं और इसे एक सूक्ष्म और कोमल स्पर्श दे सकते हैं. दाहिने पैर का मास्क न केवल त्वचा को एक्सफोलिएट करेगा बल्कि गहरी पैठ वाली नमी भी प्रदान करेगा.बंद जूते पहनने से बचेंबंद जूते और अन्य जूते इस मौसम में आपके पैरों में फंसी थोड़ी नमी को सोखने में विफल हो सकते हैं जिससे कई तरह के फंगल संक्रमण हो सकते हैं. इसलिए गीले और गंदगी से बचने के लिए खुली रबर की सैंडल और चप्पल पहनने की कोशिश करें.गीले जूतों को घर के अंदर सुखाने से बचेंगीले जूते, सैंडल या किसी दूसरी तरह के जूते को सुखाने के लिए छाया में नहीं रखना चाहिए. उन्हें बिस्तर के नीचे या जूते के रैक में रखने से बैक्टीरिया उन पर पनपने लगेंगे, खासकर अगर वो गीले हों. याद रखें कि फंगस और बैक्टीरिया अंधेरी और नम जगहों की ओर आकर्षित होते हैं.मानसून के दौरान अपने नाखूनों को लंबा करने से बचेंलंबे नाखूनों के नीचे बैक्टीरिया पनपने की संभावना हो सकती है. ये आपकी उंगलियों और पैरों में कई प्रकार के फंगल संक्रमण की वजह बन सकते हैं. इसलिए, सुनिश्चित करें कि मानसून के दौरान नाखूनों को छोटा कर दिया जाए.
- गुलमोहर के पेड़ न केवल एक घर को सुंदर दृश्य प्रदान करता है बल्कि इसके कई लाभ भी है. ये कई स्वास्थ् संबंधित समस्याओं को दूर करने में मदद करता है. आयुर्वेद में गुलमोहर के बहुत सारे औषधीय गुण होते हैं. गर्मियों में ये पेड़ गुलमोहर के फूलों से भर जाता है. इसके फूल बेहद सुंदर होते हैं. खूबसूरत होने के साथ-साथ इस पेड़ को पवित्र भी माना जाता है. ये मूल रूप से दो प्रकार का होता है लाल गुलमोहर और पीला गुलमोहर. ये दोनों ही बहुत फायदेमंद होते हैं लेकिन दोनों के फायदे अलग-अलग होते हैं. आइए जानें इस फूल के सभी लाभ.दस्त को ठीक करता हैअपच की समस्या से पीड़ित हैं तो इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. ये दस्त दूर करने में मदद करता है. इसके लिए आप गुलमोहर के पेड़ के तने की छाल के पाउडर का इस्तेमाल करके देख सकते हैं. ये आपको पेट से जुड़ी कई समस्याओं से निजात दिला सकता है.गंजापन और बालों के झड़ने को ठीक करता हैअगर आप बालों के झड़ने की समस्या का सामना कर रहे हैं, तो गुलमोहर का इस्तेमाल सकते हैं. गुलमोहर की पत्तियों को पीसकर पाउडर बना लें. फिर इसे गर्म पानी में मिलाएं और इसे अपने सिर पर लगाएं. इसका इस्तेमाल नियमित रूप से कर सकते हैं.मासिक धर्म के दर्द को ठीक करता हैमासिक धर्म में महिलाओं को पेट और पीठ दर्द आदि का सामना करना पड़ता है. ऐसे में गुलमोहर के फूलों के इस्तेमाल से दर्द से राहत पाई जा सकती है. इसके लिए गुलमोहर की पत्तियों को पीसकर पाउडर बना लें. इस पाउडर को शहद के साथ मिलाएं और इसका सेवन करें. ये मासिक धर्म की ऐंठन को ठीक करने में मदद कर सकता है.मुंह के छालों को ठीक करता हैमुंह के छाले बेहद असहज हो सकते हैं, इसलिए इन्हें जल्द से जल्द ठीक करने की जरूरत होती है. इन्हें जल्दी ठीक करने के लिए आप गुलमोहर का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसकी छाल का थोड़ा-सा चूर्ण लेकर इसमें शहद मिलाएं. इसे अपने मुंह में रखें.गठिया दर्द का इलाजगठिया रोग में पीले रंग के गुलमोहर के पौधे की पत्तियों को पीसकर लगाने से गठिया के दर्द से राहत मिल सकती है.डायबिटीज को ठीक करने के लिएइसमें मौजूद एंटी-डायबिटिक गुणों के कारण गुलमोहर ब्लड शुगर लेवल को कम करने में कारगर है. इसके मेथनॉल अर्क का इस्तेमाल ब्लड शुगर लेवल को काफी कम कर सकता है.
- सावन महीने में अधिकांश लोगों का व्रत होगा. ऐसे में सबके मन में यह सवाल होता है कि सावन सोमवार के व्रत में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं. सावन के व्रत में कुछ लोग नमक नहीं खाते हैं तो कुछ लोग सेंधा नमक का प्रयोग करते हुए व्रत करते हैं. वहीं कुछ लोग फलाहार करते हैं तो कुछ लोग सिर्फ एक वक्त खाते हैं. शास्त्रों में कुछ सब्जियों को शुद्ध सात्विक माना जाता है. आप इन्हें व्रत में खा सकते हैं. इससे आपका पाचन भी ठीक रहेगा और इनसे आपका पेट भी भरा रहेगा.सावन सोमवार व्रत में दिन की शुरूआत कैसे करेंअगर आपने भी सावन सोमवार का व्रत रखा है तो सबसे पहले सुबह स्नान करके शिवजी को जल चढ़ाएं और उसके बाद पूजापाठ करके स्वयं जल ग्रहण करें.पानी के साथ आप थोड़ा सा गुड़ या थोड़ी सी मिश्री ले सकते हैं. व्रत में नींबू की शिकंजी और नारियल पानी के साथ भी दिन की शुरुआत कर सकते हैंसावन सोमवार व्रत में सुबह क्या खाएंसुबह जल ग्रहण करने के बाद आप एक कप चाय के साथ मूंगफली या मखाने भूनकर खा सकते हैं. इनको खाने से आपको भूख भी नहीं लगेगी. आप चाहें तो स्नैक्स के तौर पर थोड़े से ड्राईफ्रूट्स भी ले सकते हैं. चाय से आपकी थकान दूर हो जाएगी और आपको सूखी मेवा से आपको शरीर को चलाने के लिए पर्याप्त ऊर्जा मिलती रहेगी.दोपहर में क्या खाएंआप आलू उबालकर उन्हें जरा से घी में फ्राई करके खा सकते हैं.आप चाहें तो सब्जियों में लौकी, कद्दू या फिर अरबी भी खा सकते हैं.आप कुट्टू के आटे या फिर सिंघाड़े के आटे की पूरियां खा सकते हैं.सावन सोमवार व्रत में ये फल खा सकते हैंव्रत रखकर फल खाना बहुत जरूरी माना जाता है. माना जाता है कि व्रत में फल खाने से फाइबर खूब मिलता है और इस वजह से आपका पेट नहीं खराब होता. व्रत में आप केला, सेब, संतरा और अनार खा सकते हैं. इससे आपके शरीर में पानी की भी भरपूर मात्रा बनी रहती है.चायअक्सर लोग व्रत में खाली पेट चाय का सेवन करते रहते हैं. ऐसा करने से बचें, क्योंकि खाली पेट चाय पीने से गैस की समस्या हो सकती है.खाली पेट रहने की न करें गलतीव्रत में खाली पेट रहने से गैसे की समस्या के साथ पेट दर्द, सिरदर्द, उल्टी और थकान महसूस हो सकती है. इससे बचने के लिए थोड़े-थोड़े समय पर कुछ न कुछ खाते रहें.फ्राइड चीजों से करें परहेजव्रत के दौरान तली- भूनी चीजें खाने से परहेज करें. ऐसा करने से व्यक्ति का पाचन तंत्र कमजोर होकर पेट दर्द, गैस और अपच का कारण बन सकता है.इन बातों का रखें ध्यानव्रत के दौरान शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए. प्रतिदिन 6-8 गिलास पानी जरूर पिएं.डायट में ऐसे फल शामिल करें, जिसमें पानी की मात्रा अधिक हो जैसे- अंगूर, लीची, संतरा, मौसमी आदि.पेट खाली रहने से एसिडिटी बढ़ सकती है, लिहाजा थोड़े-थोड़े अंतराल पर कुछ न कुछ फलाहार करते रहें.ड्राई फ्रूट्स खा सकते हैं, इससे जरूरी एनर्जी मिलेगी और कमजोरी नहीं महसूस होगी.



























