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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी के साथ टेलीफोन पर बात की है। कतर के अमीर ने रविवार को कतर के रास लाफ़ान शहर में हुए हादसे में भारतीय नागरिकों की मृत्यु पर दुख जताया और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।प्रधानमंत्री मोदी ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त के लिए कतर के अमीर को धन्यवाद दिया और घायलों को तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए उनका आभार व्यक्त किया।
प्रधानमंत्री कार्यालय (सेवा तीर्थ) के अनुसार, दोनों नेताओं ने अपने नागरिकों के कल्याण और सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, साथ ही आपसी सहयोग और एकजुटता को फिर से व्यक्त किया। वहीं, पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा करते हुए, पीएम मोदी ने शांति प्रयासों में कतर के सकारात्मक योगदान की सराहना की और उम्मीद जताई कि इन प्रयासों से क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता आएगी। दोनों नेताओं ने सभी क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार करने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई। इसके अलावा, दोनों नेताओं ने नियमित रूप से संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई। -
नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष नितिन नवीन ने मंगलवार को श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उन्हें प्रखर राष्ट्रवादी तथा महान चिंतक के रूप में याद किया। मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए नवीन ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त किया जाना जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के प्रति ''सच्ची श्रद्धांजलि'' है। पांच अगस्त 2019 को नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया था, जिसके तहत तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा प्राप्त था। श्यामा प्रसाद मुखर्जी का 23 जून 1953 को संदिग्ध परिस्थितियों में श्रीनगर की एक जेल में निधन हो गया था। उन्हें बिना परमिट जम्मू-कश्मीर में प्रवेश करने के कारण गिरफ्तार किया गया था। भाजपा हर वर्ष 23 जून को उनकी याद में 'बलिदान दिवस' के रूप में मनाती है।
नवीन ने संवाददाताओं से कहा, ''आज पूज्य श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 73वीं पुण्यतिथि पर मैं उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं। वह प्रखर राष्ट्रवादी और महान चिंतक थे। वह देश के पहले उद्योग मंत्री थे। उन्होंने जो सपना देखा था और जिसके लिए अपना बलिदान दिया, उस बलिदान का महत्व आज हम सभी के सामने स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।'' भाजपा मुख्यालय में जनसंघ नेता को पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद नवीन ने कहा, ''मेरा निश्चित रूप से मानना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अनुच्छेद 370 को निरस्त किया जाना श्यामा प्रसाद मुखर्जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।'' नवीन ने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने पश्चिम बंगाल, असम और पंजाब की जनसांख्यिकी तथा सीमाओं की रक्षा के लिए भी संघर्ष किया था। उन्होंने कहा कि मुखर्जी की जन्मभूमि पश्चिम बंगाल में हाल में भाजपा सरकार के गठन से यह संकेत मिलता है कि राज्य की जनता पार्टी के साथ है। नवीन ने कहा, ''इसलिए हम कह सकते हैं कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने भारत के लिए जो सपना देखा था, उसे हमारे नेता नरेन्द्र मोदी साकार कर रहे हैं। और आज भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता तथा हमारे नेता नरेन्द्र मोदी उनके अधूरे कार्यों को पूरा करके उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।'' भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि मुखर्जी ने 1951 में इस विचार और भावना के साथ भारतीय जनसंघ की स्थापना की थी कि यह राष्ट्रवादी विचारधारा का नेतृत्व करेगा। नवीन ने कहा, ''आज भारतीय जनता पार्टी के 14 करोड़ से अधिक कार्यकर्ता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उसी राष्ट्रवादी विचारधारा के साथ भारत को आगे बढ़ाने के कार्य में जुटे हुए हैं।'' -
नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को एक याचिकाकर्ता से कहा कि वह पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनके नाम राशन सूची से भी हटाए जाने के आरोप से जुड़े अपने मामले को लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख करे। यह मामला न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष पेश किया गया और इसे तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा, '' एसआईआर के दौरान जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें राशन सूची से भी हटाया जा रहा है, जिससे बड़ी समस्या पैदा हो रही है। बड़ी संख्या में लाभार्थियों के बाहर होने का खतरा है।'' इस पर न्यायमूर्ति नागरत्ना ने सवाल किया कि याचिकाकर्ता ने कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख क्यों नहीं किया। पीठ ने कहा, ''कलकत्ता उच्च न्यायालय काम कर रहा है, वहां जाइए।' वकील ने तर्क दिया कि एसआईआर प्रक्रिया को शीर्ष अदालत ने बरकरार रखा है। इस पर पीठ ने टिप्पणी की कि राशन कार्ड से जुड़े मामले में कार्रवाई का एक अलग आधार है। पीठ ने कहा, ''कृपया इसे उच्च न्यायालय में ले जाइए।''
चार जून को पश्चिम बंगाल के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने राज्यव्यापी सत्यापन अभियान का आदेश दिया था, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली से अयोग्य लाभार्थियों की पहचान कर उनके नाम हटाना था। यह प्रक्रिया मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के परिणामों से जुड़ी हुई थी। आधिकारिक आदेश के अनुसार, इस अभियान के दायरे में वे राशन कार्ड धारक आएंगे जिनके नाम एसआईआर के दौरान हटाए गए या जिन्हें अयोग्य पाया गया था और इस अभियान को 15 जून तक पूरा किया जाना था। -
नयी दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को टेनिस के दिग्गज खिलाड़ी विजय अमृतराज, अभिनेता ममूटी और पार्श्व गायिका अलका याग्निक समेत 65 हस्तियों को प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया। राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में आयोजित समारोह में इन हस्तियों को सम्मानित किया। उन्होंने उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश केटी थॉमस को जन-सेवा के लिए और मलयालम पत्रकार पी. नारायणन को साहित्य और शिक्षा में योगदान के लिए पद्म विभूषण से सम्मानित किया। राष्ट्रपति ने अलका याग्निक, ममूटी, अमेरिकी डॉक्टर दत्तात्रेयडु नोरी, टेनिस खिलाड़ी विजय अमृतराज, उद्योगपति एसकेएम माएलानंदन और समाजसेवी व शिक्षाविद वी नटेसन को पद्म भूषण से सम्मानित किया। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन ने दिवंगत नेता की ओर से पद्म भूषण सम्मान ग्रहण किया। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर, सरकार ने वर्ष 2026 के लिए 131 पद्म पुरस्कारों की घोषणा की थी, जिनमें पांच पद्म विभूषण पुरस्कार शामिल थे। राष्ट्रपति ने 25 मई को आयोजित पहले नागरिक सम्मान समारोह में 65 पद्म पुरस्कार दिए थे। देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म पुरस्कार तीन श्रेणियों में दिए जाते हैं- पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री। ये पुरस्कार विभिन्न क्षेत्रों में योगदान के लिए दिए जाते हैं जिनमें कला, समाज सेवा, जन-सेवा, विज्ञान और इंजीनियरिंग, व्यापार और उद्योग, चिकित्सा, साहित्य और शिक्षा, खेल, सिविल सेवा आदि शामिल हैं। पद्म विभूषण असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए दिया जाता है जबकि पद्म भूषण उच्च स्तर की विशिष्ट सेवा के लिए और पद्म श्री किसी भी क्षेत्र में योगदान के लिए दिया जाता है।
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नयी दिल्ली. राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने मंगलवार को संयुक्त विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी स्नातक) 2026 के नतीजे घोषित किए। इसमें एक अभ्यर्थी ने चुने गए पांच में से चार विषयों में 100 परसेंटाइल हासिल किए। एजेंसी ने बताया कि कुल 22 उम्मीदवारों ने अपने चुने हुए तीन विषयों में 100 परसेंटाइल हासिल किए, जबकि 180 उम्मीदवारों ने दो विषयों में 100 परसेंटाइल हासिल किए। उसने कहा कि कि 3,214 उम्मीदवारों ने एक विषय में 100 परसेंटाइल हासिल किए।
परसेंटाइल एक सांख्यिकीय माप है जो यह दर्शाता है कि किसी परीक्षा या मूल्यांकन में अभ्यर्थी का प्रदर्शन अन्य लोगों की तुलना में कैसा रहा है। यह अभ्यर्थी कुल अंकों (प्रतिशत) को नहीं, बल्कि यह बताता है कि कितने प्रतिशत परीक्षार्थियों ने अभ्यर्थी से कम या उसके बराबर अंक प्राप्त किए हैं। एनटीए ने एक बयान में कहा, "सीयूईटी-स्नातक 2026 में चुने गए पांच विषयों में से चार में एक उम्मीदवार ने 100 परसेंटाइल अंक हासिल किये और परीक्षा में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया।" परीक्षा एजेंसी ने पांच विषयों में सबसे ज्यादा एनटीए स्कोर पाने वाले शीर्ष 10 अभ्यर्थियों की लैंगिक आधार पर सूची भी जारी की। सबसे ज्यादा अंक पाने वाली छात्रा का अंक 1232.19 रहा, जो सबसे ज़्यादा अंक हासिल करने वाले छात्र अभ्यर्थी के 1230.82 से थोड़ा ज्यादा था। दूसरे और तीसरे स्थान पर छात्राओं को क्रमशः 1203.78 और 1202.15 अंक मिले, जबकि पुरुषों में यह क्रमशः 1207.21 और 1205.96 रहा। एनटीए के अनुसार, परीक्षा के लिए कुल 15,68,867 विशिष्ट अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 11,64,098 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। इस साल पंजीकृत अभ्यर्थियों में 7,94,257 छात्र, 7,74,607 छात्राएं और तीन तृतीय लिंग अभ्यर्थी थे। परीक्षा में शामिल होने वालों में 5,78,500 छात्र, 5,85,596 छात्राएं और दो तृतीय लिंग अभ्यर्थी थे। श्रेणीवार आंकड़ों से पता चला कि परीक्षा के लिए सामान्य श्रेणी के 6,86,419, अन्य पिछड़ा वर्ग (नॉन-क्रीमी लेयर) के 5,28,838, अनुसूचित जाति (एससी) के 1,71,397, अनुसूचित जनजाति (एसटी) के 95,464 और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के 86,749 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था। एजेंसी ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "एनटीए ने 15,68,867 पंजीकृत अभ्यर्थियों के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) प्रारूप में सीयूईटी (स्नातक)2026 का आयोजिन किया।" एजेंसी ने बताया कि सीयूईटी(स्नातक) 2026 का आयोजन 321 परीक्षा शहरों में किया गया, जिनमें भारत के बाहर के 13 शहर भी शामिल थे। इसमें उम्मीदवारों के लिए 37 विषय उपलब्ध थे, जिनमें 13 भाषाएं, 23 विशिष्ट विषय और एक सामान्य योग्यता परीक्षा शामिल थे। उसने बताया कि एक छात्र अधिकतम पांच विषयों का चयन कर सकता था।
अकादमिक सत्र 2026-27 में दाखिले के लिए परीक्षा सीबीटी प्रारूप में 11 मई से 31 मई और छह जून से सात जून तक आयोजित की गई थी। एजेंसी ने कहा, "नतीजा विषय विशेषज्ञों द्वारा जांची गई अंतिम उत्तर कुंजी के आधार पर तैयार किया गया है।" उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर अपने आवेदन क्रमांक और पासवर्ड का इस्तेमाल करके अपना नतीजा देख और डाउनलोड कर सकते हैं। एनटीए ने कहा, "छात्र अपने विवरण का इस्तेमाल करके आधिकारिक सीयूईटी वेबसाइट पर लॉगइन करके अपना अंक देख सकते हैं।" सीयूईटी (स्नातक) एनटीए द्वारा केंद्रीय, राज्य और चुनिंदा निजी विश्वविद्यालयों में स्नातक डिग्री कार्यक्रमों में दाखिले के लिए आयोजित की जाने वाली एक मानकीकृत राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा है। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के युवा अधिकारियों से कहा कि हर फाइल अनगिनत नागरिकों की उम्मीदों, चिंताओं और जिंदगी को परिलक्षित करती है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने युवा अधिकारियों से कहा कि वे हर फैसले में लोगों को केंद्र में रखें और यह सुनिश्चित करें कि शासन संवेदनशील, जवाबदेह और समावेशी हो। प्रधानमंत्री 2024 बैच के 183 प्रशिक्षु आईएएस अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। इन अधिकारियों को यहां विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में सहायक सचिवों के तौर पर तैनात किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास की बड़ी चुनौतियों का अलग-अलग हल नहीं किया जा सकता और सार्थक एवं स्थायी परिणाम के लिए विभागों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। उन्होंने युवा प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि वे मज़बूत मकसद, नवाचार और नागरिक-केंद्रित शासन के साथ खुद को राष्ट्र-निर्माण के लिए समर्पित करें। प्रधानमंत्री ने उनसे आग्रह किया कि वे हमेशा हर प्रशासनिक फाइल के पीछे मानवीय प्रभाव को ध्यान में रखें। एक आधिकारिक बयान के अनुसार मोदी ने कहा कि हर फाइल अनगिनत नागरिकों की आकांक्षाओं, चिंताओं और ज़िंदगी को परिलक्षित करती है। बयान में कहा गया है कि ''नागरिक देवो भव'' के मंत्र पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने युवा अधिकारियों से कहा कि वे हर फ़ैसले में नागरिकों को केंद्र में रखें और यह सुनिश्चित करें कि शासन संवेदनशील, जवाबदेह और समावेशी बना रहे। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे राष्ट्र-निर्माण में अपने योगदान का लगातार मूल्यांकन करें और पद से नहीं, बल्कि हासिल किए गए नतीजों से संतुष्टि प्राप्त करें। मोदी ने कहा कि क्षेत्र में काम करने और प्रशासनिक सीख लेने के दो साल बाद, अधिकारी अब एक अहम मोड़ पर हैं, जहां उनके फैसले न सिर्फ उनके अपने करियर को, बल्कि करोड़ों नागरिकों के भविष्य को भी आकार देंगे। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि जनसेवा की असली परीक्षा ईमानदारी, संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ मौजूदा स्थितियों को संभालने से शुरू होती है। ''विकसित भारत 2047'' के विजन पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले दशकों में हर नीति और प्रशासनिक फ़ैसले का योगदान विकसित भारत बनाने की दिशा में होना चाहिए। सरकार के सभी विभागों के मिलकर काम करने के तरीके का आह्वान करते हुए उन्होंने ज़ोर दिया कि आज देश की प्राथमिकताओं में ''आत्मनिर्भर भारत'', ''मेक इन इंडिया'', विनिर्माण में बढ़ोतरी, ऊर्जा सुरक्षा और युवाओं के लिए अवसर पैदा करना शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने पिछले 10 साल में शासन में आए बदलाव को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रशासन प्रक्रिया-केंद्रित मॉडल से हटकर परिणामोन्मुख दृष्टिकोण की ओर बढ़ा है। उन्होंने ''सेवा आपूर्ति'' को बेहतर बनाने और नागरिकों को सेवा पाने में आसानी एवं पारदर्शिता के लिए डिजिटल गवर्नेंस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका का ज़िक्र किया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे नियमित रूप से यह गौर करें कि क्या नीतियां ज़मीनी स्तर पर असरदार ढंग से नतीजों में बदल रही हैं। प्रधानमंत्री ने राष्ट्र-निर्माण में महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर भी ज़ोर दिया और बताया कि मौजूदा बैच में 40 प्रतिशत से ज़्यादा महिला अधिकारी हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि उनकी ऊर्जा, हुनर और लगन भारत की विकास यात्रा को नयी ऊंचाइयों तक ले जाने में अहम भूमिका निभाएंगे। इस मौके पर युवा प्रशिक्षु अधिकारियों ने काम करने के दौरान मिले अनुभवों को भी साझा किया। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्र और शक्तिकांत दास, कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के निदेशक श्रीराम तारनिकांती समेत कई अन्य लोग मौजूद थे।
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नयी दिल्ली. केरल से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन ने राज्यसभा सदस्य के रूप में अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया। कुरियन (65) अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के साथ-साथ मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कुरियन का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। भाजपा ने हाल में हुए राज्यसभा चुनावों में कुरियन को दोबारा उम्मीदवार न बनाने का फैसला किया था। उनका कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो गया। वह केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा रिक्त की गई राज्यसभा सीट के शेष कार्यकाल के लिए अगस्त 2024 में मध्यप्रदेश से उच्च सदन के लिए निर्विरोध चुने गए थे। केंद्रीय संचार मंत्री एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री सिंधिया जून 2024 में मध्यप्रदेश के गुना निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा के लिए चुने गए थे। मंगलवार को जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारत के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सलाह पर संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत केंद्रीय मंत्रिपरिषद से कुरियन का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। इस खंड के अनुसार, ''वह तब तक पद पर रहेंगे जब तक राष्ट्रपति चाहें।'' इससे पहले, पूर्व अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने भी अपना राज्यसभा कार्यकाल पूरा होने से एक दिन पहले जुलाई 2022 में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था।
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नयी दिल्ली. उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मंगलवार को जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए कहा कि उन्होंने भारत की एकता के लिए निडरता से काम किया। जम्मू कश्मीर में बिना अनुमति के प्रवेश करने के लिए गिरफ्तार किए गए मुखर्जी का 23 जून 1953 को श्रीनगर जेल में रहस्यमयी परिस्थिति में निधन हो गया था। राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में लिखा, ''डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनके बलिदान दिवस पर मेरी विनम्र श्रद्धांजलि। एक दूरदर्शी नेता, प्रख्यात शिक्षाविद् और दृढ़ देशभक्त के रूप में, उन्होंने निडर होकर भारत की एकता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन किया।'' उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक मजबूत, संगठित और विकसित भारत के निर्माण के लिए मुखर्जी का बलिदान और अटूट संकल्प पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मिडिल क्लास हमेशा हमारी बड़ी प्राथमिकता रहा है। इस वर्ग की ‘जीवनयापन में सुगमता’ (Ease of Living) के लिए सरकार ने हर स्तर पर काम किया है।
पीएम मोदी ने कहा कि देश में मिडिल क्लास परिवारों में एक बड़ा खर्चा डायबिटीज या ऐसी लाइफस्टाइल से जुड़े इलाज का रहता है। जन औषधि केंद्रों पर 80 परसेंट डिस्काउंट पर ऐसी दवाएं मिल रही हैं। अगर आपका पहले हजार रुपया खर्चा होता था, तो आज 200 रुपये में काम हो जाता है, 800 रुपये बच रहा है और इससे बीते वर्षों में करीब 40 हज़ार करोड़ रुपए की बचत देश के अनेक परिवारों की हुई है।उन्होंने कहा, “मिडिल क्लास के बजट का एक बड़ा हिस्सा बुजुर्गों के इलाज पर भी जाता है। आज 70 वर्ष से ऊपर के हर नागरिक के लिए 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध है।”सोमवार को नई दिल्ली में एक निजी समाचार चैनल के समिट में पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि 2014 के बाद, हालात को बदलने के लिए हम राष्ट्र प्रथम के भाव से आगे बढ़े, हम निकल पड़े।पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 12 साल, मिडिल क्लास के लिए कमाई के साथ-साथ बचत के भी रहे हैं। 2013-14 में, लगभग 2 लाख रुपए तक की आय होने पर टैक्स लगता था, आप सबको वो नसीब रहा होगा। और यह टैक्स मिडिल क्लास देता रहता था। आज 12 लाख रुपए तक की आय पर कोई टैक्स नहीं है। यानी टैक्स फ्री इनकम कई गुणा बढ़ गई है।उन्होंने कहा, “GST रिफॉर्म्स के कारण भी मिडिल क्लास को बहुत सुविधा हुई है। टैक्स फाइलिंग का समय और खर्चा भी बच गया है। क्योंकि यह बहुत ही आसान हो गया है। घर बैठे ही ITR फाइल हो रहे हैं, अगर कोई सेटलमेंट का इश्यू है, तो वो फेसलेस हो रहा है।”पीएम मोदी ने कहा कि साढ़े 9 हज़ार से अधिक मोबाइल टावर बनाए गए हैं। करीब 45,000 गांव में मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाई। नक्सल प्रभावित जिलों में 1800 से अधिक बैंक ब्रांच खोली गई। करीब 75,000 बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट और 6000 से अधिक नए पोस्ट ऑफिस बनाए गए।वहीं, देश में तेजी से बढ़ती कनेक्टिविटी पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एक और चीज है, जो रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती है। यह जरूरत है, कनेक्टिविटी की, ट्रांसपोर्ट की। उन्होंने कहा कि दुनियाभर से जो भी टूरिस्ट भारत आता है, वो हमारे मेट्रो सिस्टम को देखकर हैरान रह जाता है।पीएम मोदी ने कहा, “वर्ष 2014 में करीब 28 लाख लोग, हर रोज मेट्रो से सफर करते थे। आज करीब एक करोड़ अठाइस लाख लोग हर रोज मेट्रो से सफर कर रहे हैं। अब वंदे भारत, नमो भारत और अमृत भारत जैसी हाई स्पीड ट्रेन्स देश को कनेक्ट कर रही हैं। अच्छी सड़कों, अच्छे हाईवे से, समय तो बच ही रहा है, गाड़ियों की मैंटेनेंस पर होने वाला खर्चा भी कम हुआ है। बीते वर्षों में एयरपोर्ट्स की संख्या डबल हुई है। इससे कई छोटे-छोटे शहरों में भी मिडिल क्लास को हवाई यात्रा की सुविधा पहली बार मिली है।प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि आज दुनिया पुरानी धाराओं को चैलेंज कर रही है, डिसरप्शन्स की स्केल बहुत बड़ी हो गई है, लेकिन इसका एक और पक्ष है। यह चुनौतियां, नए अवसर भी ला रही है। भारत के हर युवा, हर उद्यमी, हर इनोवेटर, हर स्टार्टअप को, इन्हीं अवसरों पर फोकस करना है और इसमें सरकार, नेशन फर्स्ट की भावना के साथ पूरी तरह देश के लोगों के साथ है। उन्होंने कहा कि भारत आज रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार हो चुका है। -
नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत किसी क्षणिक घटना पर उतावला होने वाला देश नहीं है, हम वो हैं जिसने विकास और विनाश, देखा भी झेला भी है। हम वो देश हैं, जिसके जेहन में युगों की मेमरी चिप लगी हुई है, हम युगों की मेमरी चिप वाले नेशन हैं। और इसलिए भारत जो कर रहा है वो आने वाले एक हज़ार वर्ष का फ्यूचर लिखने वाला है। और यही दुनिया के लिए भारत की सबसे बड़ी गारंटी है।
सोमवार को नई दिल्ली में एक निजी समाचार चैनल के समिट में पीएम मोदी ने अपने संबोधन के दौरान कहा, भारत, फास्ट-ग्रोइंग इकोनॉमी भी है। एक विश्वसनीय अर्थव्यवस्था भी है। भारत भरोसेमंद शक्ति है। उन्होंने कहा कि मैं अभी दो-तीन दिन पहले G7 समिट से लौटा हूं और दुनिया का हर नेता हर देश इस बात को भली-भांति समझता है कि आज के भारत के लिए नेशन फर्स्ट ही सबसे बड़ा मंत्र है, सबसे बड़ा सिद्धांत है।पीएम मोदी ने कहा, “सरकार की नीति और निर्णयों में नेशन फर्स्ट का क्या प्रभाव होता है, इसका एक उदाहरण हमारा आदिवासी क्षेत्र है। हम सबको पता है कि दशकों से माओवादी आतंक वहाँ अपने डेरा तंबू डालकर बैठ हुआ था। जहां 21वीं सदी में भी इन आतंकियों ने एक भी सुविधा पहुंचने नहीं दी, सरकारी एक वेहिकल नहीं गुजर सकता था वहां से। गोलियों से भून दिया जाता था। अनेक सरकारें आई-गईं, कई पीढ़ियां आई-गईं, लगता था कि हिंसा का ये दुर्भाग्य ऐसे ही रहेगा। आप कल्पना कर सकते हैं, 2004 से 2014 के बीच, मैं उस दस साल का हिसाब बताता हूँ, 2004 से 2014 के बीच माओवादी आंतक के कारण, 17 हज़ार से भी अधिक हिंसक घटनाएं हुईं थीं। और करीब-करीब 7 हज़ार से ज्यादा जानें गईं थी।”पीएम मोदी ने कहा कि आज आपके लिए वन लाइन न्यूज होगा या टीवी पर आधे घंटे डिबेट होगी कि माओवाद आतंकवाद खत्म हो गया, चीजें ऐसी नहीं होती। उसके लिए खपना पड़ता है और इसलिए मैं बताना चाहता हूँ। और इसलिए मैं बताना चाहता हूं और आजकल जो लोग, कुछ लोग संविधान दिखाते रहते हैं, लेकिन जब ये लोग सरकार में थे और नक्सल प्रभावित इलाकों में संविधान का नाम लेने पर गोली मार दी जाती थी और तब ये लोग चुप बैठे थे, तब उनके हाथो में संविधान नहीं दिखता था, कांप रहे थे उनके हाथ। उस दर्दनाक स्थिति से कांग्रेस को कोई खास फर्क नहीं पड़ता था।उन्होंने आगे कहा, “2014 के बाद, हालात को बदलने के लिए हम राष्ट्र प्रथम के भाव से आगे बढ़े, हम निकल पड़े। बोलते नहीं थे, बताते भी नहीं थे, करते जरूर थे। हमने संकल्प लिया कि नक्सलवाद-माओवाद को जड़ से उखाड़ फेकेंगे और आज पूरा देश नतीजा देख रहा है, आज देश में माओवादी आतंक, अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है।”पीएम मोदी ने कहा, “साढ़े 9 हज़ार से अधिक मोबाइल टावर बनाए। एक टावर नहीं लगने और लगा हुआ टावर तोड़ देते थे। क्योंकि उनको हमेशा वहां आक्रोश पैदा करना था। करीब 45,000 गांव में मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाई। नक्सल प्रभावित जिलों में 1800 से अधिक बैंक ब्रांच खोली गई। करीब 75,000 बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट और 6000 से अधिक नए पोस्ट ऑफिस बनाए गए। सिर्फ बम, बंदूक और गोली के सहारे काम नहीं किया है, हमने दिलों को जीतने के लिए, ईश्वर ने जो भी शक्ति दी थी उसको खपाया था।” - नई दिल्ली। कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी में हुए दर्दनाक हादसे में 12 भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। दोहा स्थित भारतीय दूतावास ने घटना की पुष्टि करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई है। वहीं भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने घटना पर शोक जताया और पीड़ित परिवार के प्रति दुख जाहिर किया।विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “कतर के रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी में हुए धमाके में भारतीय नागरिकों समेत कई लोगों की मौत और घायल होने से बहुत दुख हुआ। जैसे-जैसे और जानकारी सामने आ रही है, हमारा दूतावास कतर के अधिकारियों के संपर्क में है और इस हादसे से प्रभावित भारतीय नागरिकों के परिवारों की मदद करने की कोशिश कर रही है। हमारी प्रार्थनाएं पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ हैं।”कतर के दोहा स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने एक्स पोस्ट में पुष्टि करते हुए बताया, ”रविवार रात हुए रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी हादसे में 12 भारतीय नागरिकों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो गई है। हम इस दुख की घड़ी में मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।”कतर के दोहा स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में पुष्टि करते हुए बताया, ”रविवार रात हुए रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी हादसे में 12 भारतीय नागरिकों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो गई है। हम इस दुख की घड़ी में मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।”अधिकारियों ने बताया है कि हादसे में घायल हुए सभी लोग अभी स्थिर हालत में हैं और उन्हें सही इलाज दिया जा रहा है। दूतावास कतर के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और इस हादसे से प्रभावित भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों को हर संभव मदद पहुंचाने का काम कर रहा है। इसमें मृतकों के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत भेजने की व्यवस्था करना भी शामिल है। रविवार रात, दुनिया के सबसे अहम एनर्जी हब में से एक, रास लाफान इंडस्ट्रियल एरिया में धमाका हुआ। यह धमाका तब हुआ जब कामकाज फिर से शुरू करने की कोशिशें चल रही थीं। इस घटना के बाद बरजान गैस सप्लाई लाइन में जबरदस्त आग लग गई, जिसके बाद इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं।
- नई दिल्ली। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि, सुभाषित में लिखा- राष्ट्र की सेवा में समर्पित रहेप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर संस्कृत सुभाषित शेयर किया। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनके बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि भी दी। पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “निःस्वार्थ भाव से राष्ट्र और समाज की सेवा में आजीवन समर्पित रहे देश की महान विभूति डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को उनके बलिदान दिवस पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। उनके प्रखर विचार और आदर्श देश की हर पीढ़ी को मातृभूमि की सेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे।”प्रधानमंत्री ने एक श्लोक “न कर्मणा न प्रजया धनेन त्यागेनैके अमृतत्वमानशुः। परेण नाकं निहितं गुहायां विभ्राजते यद्यतयो विशन्ति॥” भी साझा किया है। जिसका हिंदी अर्थ है कि अमृतत्व केवल कर्म, धन या वंश से प्राप्त नहीं होता, बल्कि त्याग और उच्च आदर्शों के प्रति पूर्ण समर्पण से प्राप्त होता है। जो यतिजन राष्ट्र, समाज और सत्य के लिए अपने स्वार्थों का त्याग करते हैं, उनका जीवन, काल की सीमाओं से परे जाकर जनमानस में अमर हो जाता है।उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “उनके बलिदान दिवस पर, मैं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। वे एक महान देशभक्त, विद्वान और राजनेता थे जिन्होंने अपना जीवन भारत के विकास के लिए समर्पित कर दिया।” प्रधानमंत्री ने आगे लिखा, “उनका अटूट संकल्प, सार्वजनिक जीवन में साहस और राष्ट्रीय हित के प्रति समर्पण पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। डॉ. मुखर्जी का बलिदान हमारी सामूहिक स्मृति में सदैव अंकित रहेगा। हम उन मूल्यों से प्रेरित होकर एक सशक्त और विकसित भारत के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं, जिन्हें उन्होंने अपने अंतिम क्षणों तक अपनाया और जिनके लिए कार्य किया।बीते दिन सोमवार को प्रधानमंत्री ने संस्कृत सुभाषित पोस्ट करते हुए लिखा था, “अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की बड़ी सफलता इस बात का प्रमाण है कि योग न केवल दुनियाभर में करोड़ों लोगों को शारीरिक रूप से स्वस्थ बना रहा है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास के साथ सकारात्मक जीवन जीने के लिए प्रेरित भी कर रहा है।”
- नई दिल्ली। भारत आ रहे उर्वरकों से भरे चार जहाजों ने हॉर्मुज स्ट्रेट को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। इनमें यूरिया, डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) और सल्फर लदे हुए हैं। यह जानकारी आधिकारिक बयान में सोमवार को दी गई। जानकारी के मुताबिक, इन जहाजों ने पिछले हफ्ते फारस की खाड़ी में मौजूद होर्मुज को पार किया था और अब यह भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं।बयान में कहा गया है कि ग्लोबल ट्रेड की मौजूदा चुनौतियों के बीच, ये जहाज अभी अपने तय गंतव्य बंदरगाहों कृष्णपट्टनम, काकीनाडा, पारादीप और मुंद्रा की ओर बढ़ रहे हैं। वहां पहुंचने पर, इन नए आयात को तुरंत अनलोड किया जाएगा, ताकि देश के मौजूदा उर्वरक बफर को बढ़ाया जा सके और खेती से जुड़ी जरूरतों को पूरा किया जा सके। भारत का कुल उर्वरक भंडार 22 जून तक 196.08 लाख टन रहा, जो पिछले साल इसी समय के 168.67 लाख टन के मुकाबले अच्छी बढ़ोतरी दिखाता है।बयान के अनुसार, इस मजबूत भंडार में 81.44 लाख टन यूरिया, 20.92 लाख टन डीएपी, 55.91 लाख टन एनपीके, 12.68 लाख टन एमओपी और 25.13 लाख टन एसएसपी शामिल है। मध्य पूर्व संकट के बाद (1 मार्च, 2026 से 21 जून, 2026 तक) खेती की गतिविधियां बढ़ने से कुल उर्वरकों की बिक्री बढ़कर 153.4 लाख टन तक पहुंच गई है। यह पिछले साल इसी अवधि में हुई 140.2 लाख टन की बिक्री के मुकाबले 13.2 लाख टन की बढ़ोतरी है।भारतीय किसानों को ग्लोबल मार्केट में अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए, सरकार ने देश में ही उर्वरक बनाने की क्षमता को अधिकतम किया और साथ ही आयात पर भी फोकस किया। संकट के बाद देश में उत्पादन बढ़कर 133.12 लाख टन तक पहुंच गया। बयान में कहा गया है कि इस दौरान भारतीय बंदरगाहों पर कुल आयात 43.69 लाख टन रहा।भारत ने अपने हालिया ग्लोबल टेंडर में 17.70 लाख टन यूरिया का कॉन्ट्रैक्ट सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस नई खरीद के साथ, भारत ने ग्लोबल मार्केट से 90 लाख टन से ज्यादा यूरिया और पीएंडके उर्वरकों का इंतजाम कर लिया है, जो खास तौर पर मौजूदा खरीफ सीजन के लिए है। बयान में कहा गया है कि बड़े पैमाने पर खरीद की यह रणनीति विदेशों में मौजूद 28 भारतीय मिशनों के साथ सक्रिय डिप्लोमैटिक तालमेल से संभव हो पाई, जिससे कई इंटरनेशनल कॉरिडोर के जरिए आयात के अलग-अलग रास्ते खुले।यूरिया ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फिनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्की और नीदरलैंड से मंगाया गया है।बयान में आगे कहा गया है कि डीएपी और एनपीके की आपूर्ति रूस, मोरक्को, मिस्र, यूएसए, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब से लाल सागर मार्ग के जरिए हासिल की गई है।
- नई दिल्ली। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने हज नीति 2027 की घोषणा कर दी है। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार को नीति जारी करते हुए घोषणा की कि हज कमेटी आज से हज-2027 के लिए संभावित हाजियों से आवेदन आमंत्रित करेगी। केंद्रीय मंत्री ने सभी योग्य हज यात्रियों से निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदन करने का आग्रह किया और हज कमेटी ऑफ़ इंडिया तथा सभी संबंधित एजेंसियों को आवेदन की प्रक्रिया को सुचारू और पारदर्शी बनाने का निर्देश दिया।अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के अनुसार, हज-2027 के लिए हज पर जाने के इच्छुक लोग, हज कमेटी ऑफ इंडिया के पोर्टल (hajcommittee.gov.in) के साथ ही हज सुविधा ऐप के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, जिससे आवेदन प्रक्रिया लचीली, सरल और अधिक सुलभ हो जाएगी। हज कमेटी ऑफ़ इंडिया और निजी क्षेत्र के बीच कोटे का बंटवारा 70:30 के अनुपात में ही रहने की उम्मीद है, जिसमें ‘हज कमेटी ऑफ़ इंडिया’ के लिए 1,22,518 सीटें और निजी क्षेत्र के लिए 52,507 सीटें होंगी। हालांकि, भारत सरकार भारतीय हज यात्रियों के लिए हज कोटा बढ़ाने का प्रयास करेगी। पिछले वर्ष यह कोटा 1,75,025 था।यह घोषणा केंद्रीय मंत्री की अध्यक्षता में 18 जून 2026 को हुई हज समीक्षा बैठक के बाद की गई है, जिसमें हज-2026 की समीक्षा की गई और हज-2027 के लिए रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया। नीति की शीघ्र घोषणा करने के साथ ही आवेदन की शुरुआत यह दर्शाता है कि मंत्रालय सऊदी अरब द्वारा निर्धारित समय-सीमा के अनुपालन और समय पर तैयारी पर जोर दे रहा है।हज नीति 2027 प्रत्येक हज यात्री के लिए हज यात्रा को अधिक आरामदायक, सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने के लिए मंत्रालय के निरंतर प्रयासों को आगे बढ़ाती है, जो हज-2026 की हज यात्री-केंद्रित पहलों जैसे मीना में सोफा-सह-बिस्तर, मक्का और मदीना के बीच हाई-स्पीड ट्रेन से यात्रा, मक्का में होटल-शैली के आवास और 20-दिवसीय लघु हज पैकेज पर आधारित है। इन प्रयासों को देखते हुए सऊदी हज और उमराह मंत्रालय ने भारतीय हज मिशन को हज 2026 के लिए “सर्वश्रेष्ठ हज समन्वय और संचार” श्रेणी के तहत दो लब्बैतुम पुरस्कार प्रदान किए – यह सम्मान पहली बार प्राप्त हुआ है।प्रमुख परिवर्तनों में, इस नीति के तहत राज्य हज निरीक्षक का अनुपात हर 150 हज यात्रियों पर एक निरीक्षक से बढ़ा कर हर 135 तीर्थयात्रियों पर एक निरीक्षक कर दिया गया है। प्रतीक्षा सूची में बढ़ती संख्या का उचित तरीके से समाधान करने के लिए, हज-2026 के अंतिम प्रतीक्षा सूची आवेदकों के शीर्ष 20 प्रतिशत को प्राथमिकता दी जाएगी। अपने पहले वर्ष में उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिलने वाले लघु हज पैकेज को जारी रखा जा रहा है। इसके साथ ही, इस क्षेत्र से अधिक मांग को देखते हुए कोलकाता को एक अतिरिक्त एम्बार्केशन पॉइंट (यात्रा शुरू करने का स्थान) के तौर पर इसमें शामिल किया गया है।यह नीति चिकित्सा जांच को सऊदी अरब के चिकित्सा दिशानिर्देशों के अनुरूप बनाती है। इसमें जांच को और सख्त किया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि गंभीर या पुरानी बीमारी वाले लोगों को हज पर जाने की मंज़ूरी न मिले, जिससे हज यात्रियों की सेहत और सुरक्षा बनी रहे।मंत्रालय हज यात्रियों के प्रबंधन को शुरू से आखिर तक बेहतर बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित कई नए उपाय भी अपना रहा है। इनमें एआई की मदद से चलने वाले ऐप्स, यात्रियों के दस्तावेजों का सत्यापन, अलग-अलग जगहों से उड़ानों के लिए मांग मॉडलिंग और शिकायतों को रियल-टाइम में ट्रैक करना और आगे बढ़ाना शामिल है। सरकार की प्रौद्योगिकी-आधारित हज की पहल के तहत इन उपायों को चरणों में लागू करने की योजना है।इस प्रयास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हज यात्रियों के लिए बातचीत करने वाला एआई असिस्टेंट है। इसे हिंदी, उर्दू और मुख्य क्षेत्रीय भाषाओं में चौबीसों घंटे मदद देने के लिए बनाया गया है, ताकि यात्री अपनी भाषा में आसान आवाज़ या टेक्स्ट के ज़रिए प्रश्न पूछ सकें और जानकारी प्राप्त कर सकें। इसका उद्देश्य आवेदन फ़ॉर्म भरने और उसे जमा करने से लेकर भुगतान,उड़ान, रहने के स्थान और सामान के बारे में जानकारी पाने, शिकायतें दर्ज करने और आपातकाल में मदद मांगने तक जैसे प्रत्येक चरण में हज यात्रियों की मदद करना है। इससे आवेदन फ़ॉर्म में त्रुटियों और अस्वीकृतियों को कम किया जा सकेगा, बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और पहली बार हज करने वाले तथा बुजुर्ग हज यात्रियों के लिए सटीक जानकारी आसानी से उपलब्ध होगी। सऊदी नुसुक प्लेटफ़ॉर्म के साथ भी इसे जोड़ने की योजना है, ताकि भारतीय और सऊदी सिस्टम में हज यात्रियों की सेवाएं बिना किसी रुकावट के एक साथ कारगर हो सकें और हज यात्रियों को अपनी पूरी यात्रा के दौरान लगातार और वास्तविक समय की जानकारी मिलती रहे।
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पटना. चिकित्सा के स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए रविवार को दोबारा आयोजित की गई राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा(नीट-यूजी) में कथित अनियमितताओं के मामले में बिहार से कम से कम 28 लोगों को गिरफ्तार अथवा हिरासत में लिया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। बिहार में रविवार को कड़ी सुरक्षा के बीच बड़ी संख्या में अभ्यर्थी नीट की पुनर्परीक्षा में शामिल हुए थे। तीन मई को आयोजित नीट प्रश्नपत्र लीक होने के व्यापक आरोपों के बाद 12 मई को रद्द कर दी गई थी। अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) सुधांशु कुमार ने संवाददाताओं से कहा, ''बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली से जुड़े कुल 18 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। उन पर अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा देने वाले दूसरे व्यक्तियों और प्रश्नपत्र हल करने वाले गिरोह के सदस्यों के साथ मिलकर सत्यापन प्रक्रिया से छेड़छाड़ करने का आरोप है।'' इससे एक दिन पहले लखीसराय की पुलिस अधीक्षक प्रेरणा कुमार ने पुष्टि की थी कि रविवार शाम नौ फर्जी परीक्षार्थियों को हिरासत में लिया गया, जो वास्तविक अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा दे रहे थे। एडीजीपी ने बताया कि गया चिकित्सा महाविद्यालय का छात्र अंकित राज कथित रूप से 'सॉल्वर' (प्रश्नपत्र हल करने वाले) की भूमिका में था और उसे भी गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में लखीसराय में दो प्राथमिकी दर्ज की गई हैं और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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कोलकाता. पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने सोमवार को अपने पहले बजट में राज्य कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 20 प्रतिशत वृद्धि, एक लाख खाली पदों को भरने और 'अन्नपूर्णा योजना' के लिए 36,000 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव किया। वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने कहा कि उनकी सरकार को पिछली सरकार से 8.15 लाख करोड़ रुपये का कर्ज विरासत में मिला है। उन्होंने कहा कि राजकोषीय अनुशासन बहाल करना तथा राजकाज में जनता का विश्वास बहाल करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल होगा। मंत्री ने कहा, '' भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासनिक ढांचे का निर्माण हमारे दृष्टिकोण का प्रमुख आधार है। हमें राजकाज में लोगों का भरोसा फिर से कायम करना होगा।'' दासगुप्ता ने कहा कि राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (डीए) और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत (डीआर) को एक अक्टूबर से 20 प्रतिशत बढ़ाकर 38 प्रतिशत किया जाएगा। इस कदम से राज्य सरकार के कर्मचारियों को मिलने वाले डीए और उनके केंद्र सरकार के कर्मचारियों को मिलने वाले भत्ते में अंतर कम होकर 22 प्रतिशत रह गया है। यह एक राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घोषणा है, क्योंकि पिछली सरकार के दौरान इस मुद्दे पर सरकारी कर्मचारी लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे। बजट पेश करने से पहले दासगुप्ता और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा परिसर में एक संक्षिप्त प्रार्थना समारोह में भाग लिया। दासगुप्ता ने कहा, '' हमने यह बजट जागृत राष्ट्रीय शक्ति से प्रेरणा लेकर तैयार किया है।''
उन्होंने घोषणा की कि पुलिस में 20,000 पद और स्कूलों में 50,000 शिक्षण एवं गैर-शिक्षण पद सहित एक लाख रिक्तियां चरणबद्ध तरीके से भरी जाएंगी। वित्त मंत्री ने कहा कि 33 प्रतिशत नौकरियां महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, जबकि जहां लागू होगा वहां अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा, '' सरकारी भर्तियों के लिए अधिकतम आयु सीमा, जिसे पहले ही पांच वर्ष तक बढ़ाया गया है, अगले दो वर्षों तक जारी रहेगी।'' दासगुप्ता ने कहा कि सभी मौजूदा सामाजिक कल्याण योजनाएं जारी रहेंगी।
उन्होंने कहा, '' हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के सबसे कमजोर वर्गों तक पहुंचे। जहां आवश्यकता होगी, वहां आवश्यक सुधार किए जाएंगे।'' दासगुप्ता ने अन्नपूर्णा योजना के लिए 36,000 करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा की। इसके तहत 25-60 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं को सीधे उनके बैंक खातों में 3,000 रुपये मासिक सहायता दी जाएगी। बजट में महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा के लिए 550 करोड़ रुपये भी निर्धारित किए गए हैं।मंत्री ने कहा, '' इस सुविधा का लाभ लेने के लिए जल्द ही 'पिंक कार्ड' प्रणाली शुरू की जाएगी।''
सरकार ने विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि को 70 लाख रुपये से बढ़ाकर एक करोड़ रुपये कर दिया है।
बजट में सेवानिवृत्त पत्रकारों के लिए 5,000 रुपये मासिक पेंशन और उन लोगों के लिए 10,000 रुपये मासिक पेंशन का प्रस्ताव भी रखा गया है जिन्होंने सरकार के अनुसार राजनीतिक रूप से प्रेरित या झूठे मामलों में जेल में समय बिताया था। कल्याणकारी उपायों के तहत सरकार ने आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के लिए 5,000 रुपये मासिक वृद्धि की घोषणा की। सिविक वालंटियर, ग्रीन पुलिस कर्मियों, एनवीएफ कर्मियों, प्राणी बंधु और प्राणी मित्र कार्यकर्ताओं को अगस्त से प्रति माह अतिरिक्त 2,000 रुपये मिलेंगे। बजट में राज्य की सब्सिडी वाली भोजन योजना का विस्तार करने का प्रस्ताव भी रखा गया है, जिसके तहत शहरी क्षेत्रों में अतिरिक्त 'मां आहार' केंद्र खोले जाएंगे, जहां मछली और चावल सहित भोजन नाममात्र दरों पर उपलब्ध होगा। सरकार ने 125-दिवसीय वीबी जी-राम-जी योजना के लिए आवंटन भी बढ़ाया है और 25 लाख नए लाभार्थियों को शामिल करने की घोषणा की है। बजट में कोलकाता में चिंगरीघाटा एवं न्यू टाउन के बीच एलिवेटेड कॉरिडोर, दादनपात्राबर में गहरे समुद्री बंदरगाह, बीरभूम में मयूराक्षी नदी पर चार-लेन पुल तथा दुर्गापुर, आसनसोल और सिलीगुड़ी में मेट्रो रेल परियोजनाओं के लिए अध्ययन का प्रस्ताव भी शामिल है। दासगुप्ता ने कहा कि झारग्राम में एक जनजातीय विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा, जबकि राज्य में उभरती प्रौद्योगिकियों एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) मिशन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 'गिग वर्कर्स' के लिए मुफ्त चार्जिंग प्वाइंट और पेयजल जैसी विशेष सुविधाएं विकसित की जाएंगी। दासगुप्ता ने कहा कि सरकार का दृष्टिकोण 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है।
उन्होंने कहा, '' लोग राज्य की वित्तीय स्थिति के बारे में पारदर्शिता की अपेक्षा करते हैं। हमें रोजगार, औद्योगिक विकास और एक आधुनिक, प्रगतिशील बंगाल के निर्माण के अवसर पैदा करते हुए संतुलन बनाए रखना होगा।'' -
नई दिल्ली। रेल मंत्रालय ने सोमवार को घोषणा की कि सरकार ने ईस्ट कोस्ट रेलवे नेटवर्क के 631 किलोमीटर (आरकेएम) मार्ग पर स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ लगाने को मंजूरी दे दी है। मंत्रालय के अनुसार, इस परियोजना पर करीब 270 करोड़ रुपए की लागत आएगी। यह परियोजना ईस्ट कोस्ट रेलवे के छह महत्वपूर्ण रेल सेक्शन्स को कवर करेगी, जिनमें बाघुआपाल-बुढ़ापंक, हरिदासपुर-पारादीप, खुर्दा रोड-बलांगीर, नौपाड़ा-गुनुपुर, लांजीगढ़ रोड-जूनागढ़ और बोब्बिली-सलूर रेल सेक्शन शामिल हैं।
मंत्रालय के अनुसार, यह स्वीकृत परियोजना भारतीय रेलवे के उस बड़े कार्यक्रम का हिस्सा है जिसके तहत पूरे रेल नेटवर्क पर एलटीई-आधारित संचार व्यवस्था के साथ ‘कवच’ प्रणाली लागू की जा रही है। ‘कवच’ भारत में विकसित की गई स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (एटीपी) प्रणाली है, जिसे सिग्नल तोड़ने (एसपीएडी), अधिक गति और ट्रेन टक्करों जैसी घटनाओं को रोकने के लिए तैयार किया गया है।यह प्रणाली लगातार ट्रेनों की गतिविधियों पर निगरानी रखती है और आवश्यकता पड़ने पर स्वतः ब्रेक लगा देती है। इससे रेल संचालन की सुरक्षा में काफी सुधार होता है। रेल मंत्रालय ने कहा कि इन रेल सेक्शन्स पर ‘कवच’ प्रणाली लागू होने से ट्रेनों को स्वचालित सुरक्षा और टक्कर-रोधी सुविधा मिलेगी, जिससे परिचालन सुरक्षा का स्तर और मजबूत होगा।मंत्रालय के अनुसार, दुर्घटनाओं को रोकने के अलावा यह प्रणाली खराब मौसम, विशेषकर घने कोहरे के दौरान भी ट्रेनों के सुरक्षित संचालन में मदद करेगी। रेल अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना से ओडिशा और ईस्ट कोस्ट रेलवे के अधीन आने वाले आसपास के क्षेत्रों में यात्री और मालगाड़ी दोनों सेवाओं को लाभ मिलेगा।यह पहल ट्रेनों की समयपालन क्षमता और परिचालन दक्षता को बेहतर बनाने के साथ-साथ महत्वपूर्ण रेल मार्गों पर सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करेगी। यह मंजूरी भारतीय रेलवे द्वारा देश भर में सिग्नलिंग और सुरक्षा प्रणालियों के आधुनिकीकरण के व्यापक अभियान के तहत दी गई है।इस महीने की शुरुआत में सरकार ने घोषणा की थी कि पूर्वी रेलवे को हाई डेंसिटी नेटवर्क (एचडीएन) और हाईली यूटिलाइज्ड नेटवर्क (एचयूएन) मार्गों पर स्थित 32 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) प्रणाली लगाने की मंजूरी मिल गई है। सरकार ने इस सिग्नल उन्नयन परियोजना के लिए 405 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं, जिसका उद्देश्य महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोरों में विश्वसनीयता, सुरक्षा और परिचालन प्रदर्शन को बेहतर बनाना है। - मुंबई ।महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सोमवार को घोषणा की कि शिवसेना (उबाठा) के सभी छह बागी लोकसभा सदस्यों के आधिकारिक तौर पर सत्ताधारी शिवसेना में शामिल होने के साथ ही ''ऑपरेशन टाइगर'' अब पूरा हो गया है। इससे उद्धव ठाकरे के गुट में एक और विभाजन की प्रक्रिया पूरी हो गई। नयी दिल्ली में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की संसदीय दल की एक अहम बैठक में शामिल न होने के पांच दिन बाद, शिंदे और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में एक कार्यक्रम में बागी सांसद शिवसेना में शामिल हुए। शिवसेना (उबाठा) संसदीय दल की बैठक में केवल तीन लोकसभा सदस्य शामिल हुए थे। पाला बदलने वाले शिवसेना (उबाठा) के लोकसभा सदस्य हैं: संजय देशमुख (यवतमाल), संजय जाधव (परभणी), संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर पूर्व), नागेश पाटिल-आष्टीकर (हिंगोली), ओमप्रकाश राजे निंबालकर (धाराशिव) और भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी)। शिंदे ने पाला बदलने वाले छह सांसदों को जमीन से जुड़े 'धुरंधर' बताते हुए कहा, ''मेरा अभियान एकदम पुख्ता होता है।'' उपमुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ''ऑपरेशन टाइगर" अब पूरा और सफल हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सांसदों की संख्या के हिसाब से शिवसेना अब महाराष्ट्र की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। ठाकरे खेमे में दल-बदल कराने और सांसदों को अपनी तरफ लाने के लिए शिवसेना के कदम को 'ऑपरेशन टाइगर' नाम दिया गया था। इन बागी नेताओं ने 2024 के आम चुनावों में भाजपा और शिवसेना के उम्मीदवारों को हराया था। शिवसेना (उबाठा) ने 2024 के आम चुनाव में महाराष्ट्र में नौ लोकसभा सीट जीती थीं। शिवसेना में बागी सांसदों के शामिल होने से सत्ताधारी गठबंधन 'महायुति' में शिंदे की मोल-भाव करने की ताकत बढ़ने की उम्मीद है; इस गठबंधन में भाजपा और राकांपा भी शामिल हैं। पत्रकारों से बातचीत में शिंदे ने कहा, ''ये लोकसभा सदस्य अब उस असली शिवसेना में शामिल हो गए हैं, जो दिवंगत बालासाहेब ठाकरे की सीख का पालन करती है। चार साल पहले मैंने एक कड़ा कदम उठाया था और अब मैंने छक्का मारा है (यह उन सांसदों की संख्या की ओर इशारा है, जिन्होंने पाला बदला है)।" उन्होंने जून 2022 में अविभाजित शिवसेना में की गई अपनी बगावत का भी जिक्र किया, जिसकी वजह से उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास आघाडी (एमवीए) सरकार गिर गई थी और वह मुख्यमंत्री बन गए थे। शिंदे ने कहा, ''मैंने पहले (जून 2022 में शिवसेना में विभाजन) दिवंगत बालासाहेब ठाकरे के सिद्धांतों और शिवसेना को बचाने के लिए ऐसा किया था। अब, यह कदम (शिवसेना उबाठा के लोकसभा सदस्यों में बगावत) शिवसेना के विस्तार का दूसरा चरण है।" एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि वे सभी 2029 के लोकसभा चुनाव में अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों से शिवसेना के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ेंगे और निश्चित रूप से चुने जाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा, ''महाराष्ट्र एक प्रगतिशील राज्य है। नए लोग हमारी पार्टी से जुड़ रहे हैं, क्योंकि हमारा एजेंडा विकास और प्रगति का है। आप जानते हैं कि मैं अपनी बात का पक्का हूं। लोग मुझ पर और शिवसेना पर भरोसा कर रहे हैं, जो कार्यकर्ताओं और आम लोगों की पार्टी है।'' शिवसेना (उबाठा) नेताओं का नाम लिये बिना, शिंदे ने उन्हें अपशब्द कहने के बजाय आत्म-मंथन करने की सलाह दी। यह इशारा ठाकरे के करीबी और राज्यसभा सांसद संजय राउत की ओर था, जिन्होंने पिछले हफ्ते बागी नेताओं के खिलाफ अपशब्दों से भरी तीखी टिप्पणी की थी। शिंदे ने कहा, "यह उन लोगों के लिए आत्ममंथन का समय है, जिनकी पार्टी को इन सांसदों ने छोड़ा है। वे सुबह तो गाली-गलौज करते हैं, लेकिन शाम को अपना सुर बदलकर उन्हें मनाने की कोशिश करते हैं। लगता है कि उनमें ही कोई समस्या है।" शिंदे ने कहा, "इन सभी सांसदों ने अपने समर्थकों से बात करने के बाद ही शिवसेना में शामिल होने का फ़ैसला किया है। मैं आपकी निजी समस्याओं को भी हल करने के लिए मौजूद हूं।" शिवसेना (उबाठा) में अपने विरोधियों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, "जो लोग 2022 से हमें बुरा-भला कह रहे हैं, उन्हें अपना काम करने दें। इससे उनकी मुश्किलें ही बढ़ेंगी।" शिंदे ने भरोसा दिलाया कि बागी सांसदों के प्रतिनिधित्व वाले लोकसभा क्षेत्रों के विकास के लिए धन की कोई कमी नहीं होगी।
- लखनऊ.। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार को तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में आग लगने के कारण झुलसने से कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई जबकि नौ लोग घायल हो गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटनास्थल पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया और मामले की जांच के निर्देश दिये। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के जनसंपर्क अधिकारी के.के. सिंह बताया कि बचाव दल ने इस घटना में घायल कुल 22 लोगों को केजीएमयू पहुंचाया, जिनमें से 15 को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। अस्पताल की ओर से जारी सूची के अनुसार हादसे में मरने वालों की शिनाख्त सागर, नीलेश, अनामिका, संयम, अनुछा, सुखमणि, आदित्य श्रीवास्तव, ज्योति, भविष्य, अब्दुल रहमान, सूरज शाह, शाहजान, जयनिल चक्रवर्ती, मोहम्मद अम्मार और सुमाल्या के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि हादसे में नौ लोग घायल हुए हैं, जिनका उपचार किया जा रहा है।केजीएमयू की कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद ने ट्रामा सेंटर में संवाददाताओं को बताया कि शवों का पंचनामा करके पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। सूचना मिलने पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, गृह विभाग के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद और पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण मौके पर पहुंचे और बचाव अभियान की निगरानी की। मुख्यमंत्री अलीगढ का दौरा बीच में ही छोड़कर लखनऊ लौटे और घटनास्थल पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। वह अस्पताल भी पहुंचे और घायल पीड़ितों से मुलाकात करके संवेदना प्रकट की। अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री शाम करीब छह बजकर 15 मिनट पर घटनास्थल पर पहुंचे और हादसे का शिकार हुई तीन मंजिला इमारत की स्थिति का जायजा लिया और इमारत की ऊपरी मंजिलों का दौरा भी किया। इस दौरान उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी उनके साथ थे। अधिकारियों के अनुसार घटनास्थल का मुआयना करने के बाद आदित्यनाथ केजीएमयू पहुंचे और दुर्घटना में घायल हुए लोगों से मुलाकात करके उनका हाल जाना और उन्हें भरोसा दिलाया कि घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने अस्पताल प्रशासन और अधिकारियों को पीड़ितों का हर संभव बेहतर इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। अधिकारियों के मुताबिक आदित्यनाथ ने पुलिस महानिदेशक और अपर मुख्य सचिव (गृह) को घटनास्थल पर जाकर हालात का जायजा लेने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले की तह में जाकर दोषियों को सजा दिलाई जाएगी। अलीगंज थाना इलाके में उषा मेहता मार्ग पर स्थित तीन मंजिला वाणिज्यिक इमारत में अपराह्न करीब तीन बजे आग लगी। आग पर काबू पाने के लिए कई दमकल वाहनों और 'हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म' वाली गाड़ी का इस्तेमाल किया गया। पुरनिया बाजार से चंद कदमों की दूरी पर स्थित यह इमारत अलीगंज के पॉश रिहायशी इलाके में है, जहां कोचिंग सेंटर और कैफे स्थित हैं। स्थानीय भाजपा विधायक नीरज बोरा ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि हादसे में मरने वाले लोगों में से आधे स्थानीय निवासी थे। उन्होंने कहा, ''मुझे लगता है कि उनमें से ज़्यादातर लोगों की मौत जलने से नहीं, बल्कि दम घुटने से हुई है। इमारत में बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था और शायद यही वजह है कि यह हादसा इतना बड़ा हो गया।'' विधायक ने कहा, ''यह इलाका और जानकीपुरम कोचिंग हब बन गए हैं इसीलिए मैं लगातार इस इलाके के लिए एक फायर स्टेशन की मांग कर रहा था।'' अधिकारियों के अनुसार बचाव अभियान के दौरान आग में फंसे लोगों को इमारत से बाहर निकाला गया। कुछ लोगों को 'बॉडी बैग' में लाया गया, जबकि कुछ को कंबल में लपेटा गया था और एम्बुलेंस में ले जाते समय वे बेहोश लग रहे थे। उन्होंने कहा कि शवों और घायल लोगों को बगल की इमारत की छत से बाहर निकाला गया।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस घटना में लोगों की मौत पर दुख जाहिर करते हुए मृतकों के परिजन को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''लखनऊ में अग्नि दुर्घटना में हुई जनहानि अत्यंत दुखद एवं हृदय विदारक है। मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को शांति तथा घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करें।'' सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए 'एक्स' पर लिखा कि इस हादसे के पीछे के कारणों की ईमानदारी से जांच हो। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसे हादसों से बचने की कोशिश की जानी चाहिए। बसपा अध्यक्ष मायावती ने भी घटना पर शोक व्यक्त करते हुए 'एक्स' पर कहा, ''उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में आज दोपहर बाद आग लगने की घटना में अनेक लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की घटना अति-दुखद है।'' उन्होंने कहा, ''इस प्रकार की जानलेवा घटनायें दिल को दहलाने वाली होती हैं तथा कितने ही परिवार की उम्मीदों को बिखेर देती हैं। ऐसी दुखद घटनाओं की रोकथाम के लिये सबको मिलकर सही से काम करने की ज़रूरत है। सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप से काम नहीं चलेगा।'' आग लगने के समय इमारत के अंदर मौजूद रहे युवकों और युवतियों के रिश्तेदार बताये जा रहे कुछ लोग घटनास्थल के पास खड़े होकर रोते-बिलखते और अधिकारियों से इमारत के अंदर जाने की गुहार लगाते नजर आये।
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नई दिल्ली। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने तमिलनाडु के तिरुवल्लुर जिले में अमोनिया गैस रिसाव की घटना पर शोक व्यक्त किया है। सरकार ने सीफूड एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग यूनिट में जान गंवाने वाले ओडिशावासी मजदूरों के आश्रितों को 4 लाख रुपए की अनुग्रह राशि देने का ऐलान किया है।सीएम माझी ने एक शोक संदेश जारी कर पीड़ित परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि यह घटना बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने अस्पताल में भर्ती घायल मजदूरों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य सरकार प्रभावित परिवारों और घायलों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।इस बीच, ओडिशा सरकार तमिलनाडु प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में है। ओडिशा के मुख्य सचिव अनु गर्ग ने तमिलनाडु की मुख्य सचिव से बातचीत कर घायल मजदूरों के समुचित इलाज और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करने का आग्रह किया।मुख्यमंत्री के निर्देश पर ओडिशा सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की तीन सदस्यीय टीम तिरुवल्लुर पहुंच चुकी है। यह टीम स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय कर घायलों के उपचार और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं की निगरानी कर रही है।रविवार को तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में पेरियापलायम के पास एक सीफूड एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग यूनिट में अमोनिया गैस लीक होने से कई मजदूरों की मौत हो गई और कई अन्य अस्पताल में भर्ती हैं। घटना के समय असम, ओडिशा और झारखंड की महिलाओं समेत करीब 120 वर्कर फैक्ट्री परिसर में मौजूद थे।पुलिस अधिकारियों ने कहा कि संदिग्ध अमोनिया लीक यूनिट के रेफ्रिजरेशन या प्रोसेसिंग सिस्टम से शुरू हुआ और तेजी से फैसिलिटी के कुछ हिस्सों में फैल गया। गैस के संपर्क में आने वाले वर्करों को सांस लेने में बहुत दिक्कत, चक्कर आना और जलन होने लगी। सूचना पर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम, पुलिसकर्मी और स्थानीय अधिकारी मौके पर पहुंचे और बचाव अभियान शुरू किया। प्रभावित वर्करों को शुरू में इमरजेंसी इलाज के लिए पास के प्राइवेट अस्पतालों में ले जाया गया था, जहां उनका इलाज जारी है। -
नई दिल्ली। लखनऊ के अलीगंज इलाके के पुरानिया में सोमवार को एक कोचिंग सेंटर में आग लगने से 14 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई छात्र इमारत के अंदर फंस गए थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीनियर अधिकारियों को तुरंत घटनास्थल पर पहुंचने और तेजी से बचाव अभियान चलाने का आदेश दिया। प्रधानमंत्री मोदी, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हादसे पर दुख जताया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुई भीषण अग्निकांड में हुई जानमाल की हानि से मैं व्यथित हूं। मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। बचाव अभियान जारी है और अधिकारी हर संभव सहायता प्रदान कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष की ओर से प्रत्येक मृतक के परिजनों को दो लाख रुपए की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायलों को 50,000 रुपए दिए जाएंगे।वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस हादसे पर दुख जताया है। उन्होंने कहा कि लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक कोचिंग सेंटर में आग लगने से हुआ हादसा मन को व्यथित करने वाला है। मेरी संवेदनाएं उन सभी परिवारों के साथ है, जिन्होंने इस घटना में अपने प्रियजनों को खोया है। इसके साथ ही मैं सभी घायलों के जल्द से जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुई अग्निकांड में हुई जानमाल की हानि अत्यंत दुखद है। मेरी हार्दिक संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।इस हादसे में मृतकों की आयु 20 से 24 वर्ष के बीच बताई जा रही है। आसपास के इलाके में घटना से दहशत फैल गई और आशंका जताई जा रही है कि हताहतों की संख्या और बढ़ सकती है। जानकारी के अनुसार इमारत के अंदर चल रहे एक कोचिंग सेंटर में आग लगने से पूरा परिसर तेजी से घने धुएं से भर गया और छात्रों और अन्य उपस्थित लोगों में अफरा-तफरी मच गई। जान बचाने की कोशिश में कुछ लोग ऊपरी मंजिलों और छत से कूद गए, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि दोपहर में सबसे पहले इमारत से धुआं उठता देखा गया और देखते ही देखते आग तेजी से फैल गई और पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। आग और धुएं से निकास मार्ग अवरुद्ध होने के कारण, घबराए हुए छात्र खिड़कियों और छत की ओर भागे। कुछ ने तो अपनी जान बचाने के लिए नीचे छलांग लगा दी। दमकल, पुलिस और प्रशासन की कई टीमें मौके पर पहुंचीं। जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस आयुक्त सहित वरिष्ठ अधिकारी बचाव और राहत कार्यों की निगरानी के लिए मौके पर मौजूद थे। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 को 'वास्तव में वैश्विक उत्सव' बनाने के लिए दुनिया भर के लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह उत्साहजनक है कि योग स्वास्थ्य और कल्याण की साझा खोज में जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों को एक साथ ला रहा है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2014 में मान्यता दिए जाने के बाद से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (आईडीवाई) प्रत्येक वर्ष 21 जून को दुनिया भर में मनाया जाता है। मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''पूरी दुनिया में यादगार रूप से योग दिवस मनाया गया। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 को वास्तव में वैश्विक उत्सव बनाने के लिए दुनिया भर के लोगों का आभार।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ''आशा है कि यह दिन आने वाले समय में अधिक से अधिक लोगों को योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित करेगा।'' प्रधानमंत्री ने 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर कोलकाता के प्रतिष्ठित रेड रोड पर आयोजित एक कार्यक्रम में हजारों लोगों के साथ योग सत्र में भाग लिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जबलपुर में आम लोगों के साथ योगासन किए। देशभर में इसी प्रकार के कई कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और राज्यपालों ने भाग लिया। जापान की राजधानी तोक्यो के ऐतिहासिक मंदिरों से लेकर न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित टाइम्स स्क्वायर तक दुनिया भर के योग प्रेमी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने के लिए एकत्र हुए। इस अवसर पर स्वास्थ्य, संतुलन और समग्र कल्याण के मार्ग के रूप में योग की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता की झलक देखने को मिली। इस वर्ष का आयोजन 'बढ़ती उम्र में योग से रहें निरोग' विषय पर केंद्रित रहा, जिसमें जीवन के प्रत्येक चरण में शारीरिक फिटनेस, मानसिक दृढ़ता और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में योग की प्रासंगिकता को रेखांकित किया गया।
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कोलकाता. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि मजबूत समुद्री क्षमताएं किसी देश के आर्थिक और सामरिक प्रभाव को तय करने में निर्णायक भूमिका निभाती हैं तथा भारत इस बात को अच्छी तरह समझता है और इसके लिए तैयारी कर रहा है। मोदी ने यहां श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह पर स्वदेश निर्मित तीन पोतों को नौसेना में शामिल करने के बाद अपने संबोधन में कहा कि भारत रक्षा क्षेत्र में केवल खरीदार देश बनकर नहीं रहना चाहता और देश के सशस्त्र बल दुनिया के लिए महज एक बाजार नहीं बने रह सकते। उन्होंने कहा, ''हमारी क्षमताओं की पहचान आत्मनिर्भरता से है, दुनिया के लिए बाजार बनने से नहीं।''
मोदी ने कहा, ''कोई भी देश समुद्री ताकत के बिना बड़ी शक्ति नहीं बन सकता। विकास, सुरक्षा और समृद्धि समुद्र से जुड़े हुए हैं। समुद्री क्षमताओं से लैस देश मजबूत होता है और उसका आर्थिक एवं सामरिक प्रभाव अधिक होता है।'' उन्होंने कहा कि भारत इस वास्तविकता को अच्छी तरह समझता है और इसके लिए स्वयं को तैयार कर रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वदेश निर्मित तीन पोतों-'स्टील्थ फ्रिगेट' 'दूनागिरि', सर्वेक्षण पोत 'संशोधक' और पनडुब्बी रोधी युद्धपोत 'अग्रय' को नौसेना में शामिल किया। उन्होंने कहा कि प्रथम पंक्ति के ये पोत समुद्री युद्ध, जल सर्वेक्षण और पनडुब्बी रोधी युद्ध से जुड़ी महत्वपूर्ण अभियानगत क्षमताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। मोदी ने कहा कि भारत ने कुछ वर्ष पहले विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत को नौसेना में शामिल कर अपनी समुद्री क्षमताओं का प्रदर्शन किया था। भारत के पहले स्वदेश निर्मित विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत को 2022 में नौसेना में शामिल किया गया था। उन्होंने कहा कि आईएनएस विक्रांत से लेकर आज तक की भारत की यात्रा केवल नए युद्धपोतों की नहीं बल्कि आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ने की यात्रा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आईएनएस अग्रय, आईएनएस दूनागिरि और आईएनएस संशोधक को नौसेना में शामिल किए जाने से इस यात्रा को गति मिल रही है। उन्होंने कहा, ''इन तीनों पोतों का डिजाइन और निर्माण भारत में किया गया है तथा ये पोत देश की प्रतिभा का प्रतिनिधित्व करते हैं।'' मोदी ने कहा कि भारत खरीदार देश से निर्माता देश में तेजी से बदल रहा है। उन्होंने कहा, ''जिस दिन हम निर्माता बन जाएंगे, उस दिन हम निर्णय लेने वाले भी बन जाएंगे।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत कभी दुनिया के सबसे बड़े रक्षा आयातक देशों में शामिल था और इस निर्भरता के कारण देश को सामरिक एवं सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए 2014 से नीतिगत स्तर पर बड़े सुधार किए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, ''रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दी गई।'' उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में डिजाइन, विनिर्माण और निर्यात के नए अवसर खुले हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में 40 से अधिक युद्धपोत और पनडुब्बियां नौसेना में शामिल की गई हैं जबकि 45 बड़े नौसैनिक मंच निर्माणाधीन हैं। उन्होंने कहा कि ये केवल आंकड़े नहीं बल्कि भारत की औद्योगिक क्षमता का प्रमाण और देश के भविष्य का संकेत हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि रविवार को नौसेना में शामिल किए गए तीनों पोतों के निर्माण में भारतीय उद्यमों, इंजीनियरों और श्रमिकों ने योगदान दिया है। इन पोतों का डिजाइन भारतीय नौसेना के 'वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो' ने तैयार किया है और इनका निर्माण कोलकाता स्थित सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनी 'गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड' ने किया है। एक अधिकारी ने बताया कि इन पोतों में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है और इनके निर्माण में 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) समेत भारतीय उद्योग ने व्यापक भागीदारी की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार समुद्री क्षेत्र को ''विकसित भारत के लिए रोजगार का इंजन'' मानती है क्योंकि इसमें लाखों नौकरियां पैदा करने की क्षमता है। उन्होंने कहा, ''भारत के लिए समुद्री शक्ति के अगले चरण में प्रवेश करने का समय आ गया है और इसीलिए देश ने पोत निर्माण उद्योग के लिए एक नयी सोच के साथ आगे बढ़ना शुरू कर दिया है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में नीतिगत स्तर पर कई सुधार किए गए हैं और घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष पहल की गई हैं। उन्होंने कहा कि पोत निर्माण, मरम्मत, पुनर्चक्रण और रखरखाव, मरम्मत एवं संचालन (एमआरओ) को एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पोत परिवहन क्षेत्र के लिए 70,000 करोड़ रुपये का वित्तीय पैकेज केवल एक आर्थिक निर्णय नहीं बल्कि भारत के समुद्री भविष्य और औद्योगिक विस्तार में निवेश है। सरकार ने देश के पोत निर्माण क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए लगभग 70,000 करोड़ रुपये के निवेश वाली तीन योजनाओं की सितंबर 2025 में घोषणा की थी। प्रधानमंत्री ने कहा, ''भारत अपने समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर रहा है।'' उन्होंने कहा कि इसी सोच के साथ देश अपने बंदरगाहों का आधुनिकीकरण कर रहा है। उन्होंने कहा, ''भारत ने हमेशा समुद्र को सहयोग का माध्यम माना है, लेकिन देश यह भी जानता है कि शांति सुनिश्चित करने के लिए सामर्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि समृद्धि की रक्षा के लिए सुरक्षा आवश्यक है और भविष्य की दिशा तय करने के लिए आत्मनिर्भरता जरूरी है। मोदी ने कहा कि नौसेना में शामिल किए गए ये तीनों पोत उस भारत के प्रतीक हैं, जो 21वीं सदी में अपनी क्षमताओं को पहचानता है, अपनी शक्ति पर विश्वास करता है और आत्मविश्वास के साथ लगातार आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक आधुनिक पोत के निर्माण में हजारों टन इस्पात, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, मशीनों और कलपुर्जों की आवश्यकता होती है तथा इनके निर्माण में अनेक कंपनियां काम करती हैं, जिससे हजारों युवाओं को रोजगार मिलता है। मोदी ने कहा कि भारत नए नदी जलमार्गों का विस्तार कर रहा है। उन्होंने कहा कि सागरमाला परियोजना का उद्देश्य बंदरगाह आधारित आर्थिक समृद्धि को गति देना है। उन्होंने कहा, ''इन पहलों से व्यापार पर होने वाला खर्च कम हो रहा है... उद्यमों को गति मिल रही है और तटीय क्षेत्रों में नए अवसर पैदा हो रहे हैं।'' पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर. एन. रवि, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन समेत कई गणमान्य व्यक्ति पोतों को नौसेना में शामिल किए जाने के कार्यक्रम में शामिल हुए। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने रविवार को उन छात्रों के लिए पुनर्मूल्यांकन परिणाम घोषित किया जिन्होंने अपनी 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया था। पहले चरण में 87 प्रतिशत से अधिक आवेदकों के परिणाम घोषित किए गए। सीबीएसई ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''सीबीएसई ने कक्षा 12 के लिए सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के नतीजे जारी करना शुरू कर दिया है।'' इसने कहा, ''नतीजे चरणबद्ध तरीके से जारी किए जा रहे हैं और आज कुल प्राप्त आवेदनों में से 87 प्रतिशत से अधिक के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं। बाकी आवेदनों के नतीजे भी चरणों में उपलब्ध होंगे और उम्मीद है कि पूरी प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो जाएगी।'' छात्र अपने 'लॉगिन क्रेडेंशियल्स' का इस्तेमाल करके सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट पर अपने अद्यतन अंक देख सकते हैं। सीबीएसई ने छात्रों को भरोसा दिलाया कि निष्पक्षता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए हर आवेदन को एक ''मजबूत, पारदर्शी और ठोस निगरानी प्रणाली'' के ज़रिए परखा गया। बोर्ड ने कहा, ''छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे अफ़वाहों या सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि वाले पोस्ट पर विश्वास न करें और सही जानकारी के लिए केवल सीबीएसई की आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।'' इसने कहा, ''सीबीएसई के कार्यालय छात्रों को मार्गदर्शन और सहायता देने के लिए हमेशा उपलब्ध रहेंगे।'' सीबीएसई ने 13 मई, 2026 को लगभग 17.69 लाख छात्र-छात्राओं के कक्षा 12 के नतीजे घोषित किए।
इसने छात्र-छात्राओं को 19 मई से 25 मई, 2026 तक अपनी जांची गई उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की हुई प्रतियां प्राप्त करने की सुविधा दी थी। इसके बाद, उन्हें दो जून से सात जून, 2026 तक समस्याओं के सत्यापन और/या पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने का समय दिया गया था। बोर्ड ने कहा कि जिन छात्र-छात्राओं ने देखी गई खामियों की जांच के लिए आवेदन किया था और जिनके मामले में सीबीएसई ने ''कोई बदलाव नहीं'' का नतीजा बताया है, अगर वे अपनी उत्तर-पुस्तिकाएं देखना चाहते हैं, तो वे संबंधित सीबीएसई क्षेत्रीय कार्यालय में ऐसा कर सकते हैं। इसने कहा कि इसका कार्यक्रम जल्द ही जारी किया जाएगा।
प्रवेश और अन्य शैक्षिक उद्देश्यों के लिए अपने संशोधित अंकों का इंतज़ार कर रहे छात्रों की बेचैनी के बीच पुनर्मूल्यांकन के नतीजे घोषित किए गए हैं। हाल ही में बोर्ड तब विवादों में घिर गया था, जब 12वीं कक्षा के कुछ छात्रों ने दावा किया कि सीबीएसई द्वारा अपलोड की गई उनकी उत्तर पुस्तिका की स्कैन की गई कॉपी उनकी लिखावट से मेल नहीं खातीं, जिससे ओएसएम प्रणाली में गड़बड़ी की आशंका पैदा हो गई। -
नयी दिल्ली. ऊंचाई वाले पर्वतीय इलाकों से लेकर मैदानी क्षेत्रों के परेड मैदानों तक, देशभर में बड़ी संख्या में सशस्त्र बलों के कर्मियों ने रविवार को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित योग सत्रों में हिस्सा लिया। थल सेना, नौसेना और वायु सेना की सभी सैन्य कमान इस वार्षिक आयोजन की तैयारियों में जुटी थीं। इस आयोजन का उद्देश्य शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक दृढ़ता और समग्र कल्याण को बढ़ावा देना है। राष्ट्रीय राजधानी में भारतीय सेना ने दिल्ली छावनी स्थित करियप्पा परेड ग्राउंड में कार्यक्रम आयोजित किया। विशाल वर्गाकार संरचना में खड़े सेना के जवानों और अन्य प्रतिभागियों ने विभिन्न योगासन किए।
सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ''करियप्पा परेड ग्राउंड में योग सत्र सुबह करीब छह बजे शुरू हुआ। कार्यक्रम में सैन्यकर्मियों और उनके परिवारों, कई रक्षा अताशे, राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के कैडेट और स्कूली बच्चों समेत लगभग 3,500 लोग शामिल हुए।'' सेना की उत्तरी, पश्चिमी, पूर्वी, दक्षिणी, मध्य और दक्षिण-पश्चिमी कमान में भी इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित किए गए। सेना की कई कमान ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले भी योग सत्र आयोजित किए थे।
लखनऊ स्थित मध्य कमान ने इससे पहले सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''योग का धैर्य, सैनिक की शक्ति। योग शारीरिक ऊर्जा बढ़ाता है, मानसिक एकाग्रता को तेज करता है और आंतरिक संतुलन कायम करता है। यह लोगों को शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करते हुए अधिक स्वस्थ, अनुशासित और दृढ़ जीवन जीने में सक्षम बनाता है।'' मध्य कमान ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले ''सूर्य वॉरियर्स ने योग को जीवनशैली के रूप में अपनाया।'' उसने कहा, ''हिमालय की भव्य ऊंचाइयों से लेकर गंगा के पवित्र मैदानों और मध्य भारत के विभिन्न इलाकों तक, उन्होंने योग की शाश्वत भावना को आत्मसात किया तथा शरीर में सहनशक्ति, मन में दृढ़ता और आत्मा में संकल्प विकसित किया।'' पोस्ट में कहा गया, ''हर आसन। हर सांस। हर योद्धा। राष्ट्र के लिए अधिक मजबूत।''
इस वर्ष 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 'बढ़ती उम्र में योग से रहें निरोग' थीम के तहत मनाया जा रहा है, जो सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए योग के महत्व को रेखांकित करता है। भारतीय वायु सेना ने भी दिल्ली स्थित पश्चिमी वायु कमान से लेकर तिरुवनंतपुरम स्थित दक्षिणी वायु कमान तक अपनी विभिन्न कमान में कई कार्यक्रम आयोजित किए। अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले कहा था कि भारतीय वायु सेना ''देशभर के विभिन्न भूभागों और क्षेत्रों में योग सत्र आयोजित करके यह दिवस मनाएगी। ये कार्यक्रम उत्तर में लेह के ऊंचाई वाले पर्वतीय इलाकों से लेकर दक्षिण में कार निकोबार के समुद्र तटों और पूर्व में तवांग से लेकर पश्चिम में पवित्र नगरी द्वारका तक आयोजित किए जाएंगे।'' भारतीय नौसेना भी योग दिवस समारोह में शामिल हुई।
यह दिन नौसेना के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि 'स्टील्थ फ्रिगेट- दूनागिरि' समेत प्रथम पंक्ति के तीन स्वदेशी युद्धपोतों को रविवार को कोलकाता में नौसेना में शामिल किया जाना है। नौसेना ने योग दिवस से पहले 'एक्स' पर पोस्ट साझा करते हुए कहा, ''शांत मन। मजबूत शरीर। अभियान के लिए तैयार। समुद्र और तट पर मौजूद भारतीय नौसेना योग को जीवनशैली के रूप में अपनाती है जिससे एकाग्रता, सहनशक्ति और समग्र स्वास्थ्य बेहतर होता है।'' सैन्य अधिकारियों ने कहा कि भारत के प्राचीन ज्ञान में निहित योग शक्ति, संतुलन एवं आंतरिक सामंजस्य को बढ़ावा देता है तथा लोगों को हर उम्र में अधिक स्वस्थ, सक्रिय और संतुष्ट जीवन जीने में सक्षम बनाता है। उन्होंने कहा कि योग अधिक स्वस्थ, मजबूत और दृढ़ भविष्य के निर्माण में मदद करता है।


















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