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नई दिल्ली। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को संसद में कहा कि पिछले पांच दिनों में रिफाइनरियों को दिए गए निर्देशों के बाद एलपीजी उत्पादन में 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। साथ ही अतिरिक्त एलपीजी की खरीद भी सक्रिय रूप से की जा रही है। यह अफवाहें फैलाने या झूठे आख्यान गढ़ने का समय नहीं है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि देश के 33 करोड़ से अधिक परिवारों, खासकर गरीब और वंचित वर्ग की रसोई में गैस की कमी न हो। उन्होंने बताया कि घरेलू गैस की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है और सिलेंडर की डिलीवरी का समय पहले की तरह ही बना हुआ है।केंद्रीय मंत्री पुरी ने संसद को बताया कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग से लेकर डिलीवरी तक का औसत समय अभी भी 2.5 दिन है, जो संकट से पहले भी इतना ही था। इसके अलावा, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर बिना रुकावट गैस सप्लाई दी जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ जगहों से ऐसी जानकारी मिली है कि डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेल स्तर पर गैस सिलेंडर जमा करने और घबराहट में ज्यादा बुकिंग करने की प्रवृत्ति देखी जा रही है। हालांकि यह स्थिति किसी वास्तविक सप्लाई की कमी के कारण नहीं, बल्कि लोगों की चिंता के कारण पैदा हुई है।केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि सरकार डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) प्रणाली का विस्तार कर रही है। अभी यह करीब 50 प्रतिशत उपभोक्ताओं के लिए लागू है, जिसे बढ़ाकर 90 प्रतिशत तक किया जा रहा है। इस व्यवस्था में सिलेंडर की डिलीवरी तभी दर्ज होगी, जब उपभोक्ता अपने मोबाइल पर आए वन-टाइम कोड से इसकी पुष्टि करेगा, जिससे गैस की गलत तरीके से सप्लाई या हेरफेर को रोकना आसान होगा। मांग को संतुलित रखने के लिए शहरी क्षेत्रों में गैस सिलेंडर की बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिन का अंतर और ग्रामीण तथा दुर्गम क्षेत्रों में 45 दिन का अंतर तय किया गया है।मंत्री ने बताया कि तेल मार्केटिंग कंपनियों के फील्ड अधिकारी और एंटी-अडल्टरेशन सेल डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर निगरानी कर रहे हैं। इसके अलावा केंद्रीय गृह सचिव ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ बैठक कर राज्य प्रशासन को इस व्यवस्था के साथ जोड़ने पर चर्चा की है। पुरी ने कहा कि कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई को नियंत्रित करने का उद्देश्य काला बाजारी रोकना है, न कि होटल और रेस्टोरेंट उद्योग को नुकसान पहुंचाना। कमर्शियल एलपीजी पूरी तरह बाजार आधारित कीमत पर बिना सब्सिडी के बेची जाती है और इसके लिए कोई पंजीकरण या बुकिंग प्रणाली नहीं होती।उन्होंने कहा कि अगर कमर्शियल एलपीजी की बिक्री पूरी तरह खुली छोड़ दी जाती, तो काउंटर से खरीदे गए सिलेंडर अवैध बाजार में भेजे जा सकते थे, जिससे असली व्यावसायिक और घरेलू उपभोक्ताओं को नुकसान होता। इसलिए सरकार ने स्पष्ट प्राथमिकता और पारदर्शी आवंटन प्रणाली लागू की है। इस व्यवस्था की निगरानी के लिए इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के कार्यकारी निदेशकों की तीन सदस्यीय समिति 9 मार्च को बनाई गई थी। इस समिति ने देश भर में राज्य के नागरिक आपूर्ति विभागों और रेस्तरां संघों के साथ बैठकें आयोजित की हैं और ये बैठकें जारी हैं।समिति ने विभिन्न क्षेत्रों और सेक्टरों के आधार पर कमर्शियल एलपीजी की वास्तविक जरूरत का आकलन किया है। इसके तहत एक बड़े फैसले में आज से तेल कंपनियां औसत मासिक कमर्शियल एलपीजी मांग का 20 प्रतिशत हिस्सा आवंटित करेंगी, ताकि जमाखोरी और काला बाजारी न हो। पुरी ने कहा कि एलपीजी और गैस पर दबाव कम करने के लिए वैकल्पिक ईंधन विकल्पों को भी सक्रिय किया जा रहा है।उन्होंने बताया कि हालिया 60 रुपए के समायोजन के बाद बिना सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 913 रुपए है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से इसकी कीमत करीब 987 रुपए होनी चाहिए थी। वैश्विक कीमतों के अनुसार, प्रति सिलेंडर 134 रुपए की बढ़ोतरी की जरूरत थी, लेकिन सरकार ने 74 रुपए खुद वहन किए। इसके कारण उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए अतिरिक्त खर्च प्रतिदिन 80 पैसे से भी कम बैठता है।पुरी ने बताया कि पड़ोसी देशों में एलपीजी की कीमतें भारत से ज्यादा हैं। पाकिस्तान में एलपीजी सिलेंडर करीब 1,046 रुपए, श्रीलंका में 1,242 रुपए और नेपाल में 1,208 रुपए के आसपास है। उन्होंने यह भी कहा कि तेल मार्केटिंग कंपनियों को 2024-25 में हुए करीब 40,000 करोड़ रुपए के नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने 30,000 करोड़ रुपए के मुआवजे को मंजूरी दी है। -
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में एक थाई जहाज पर हुए हमले को लेकर भारत ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। इस संबंध में विदेश मंत्रालय ने कहा है कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव के दौरान व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया जाना चिंताजनक है और इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा पर खतरा पैदा होता है।विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार 11 मार्च को जिस थाई मालवाहक जहाज ‘मयूरी नारी’ पर हमला हुआ, वह भारत के गुजरात स्थित कांडला बंदरगाह की ओर आ रहा था। घटना के बाद भारत स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय ने खाड़ी देशों और इजरायल में स्थित सभी भारतीय दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को 24X7 सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं। हेल्पलाइन नंबर जारी किया है, ताकि संकट में फंसे भारतीय तुरंत संपर्क कर सकें।सरकार ने कहा कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। भारत ने क्षेत्र में सभी पक्षों से संयम बरतने और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा बनाए रखने की अपील भी की है। भारत ने दोहराया है कि व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाना, निर्दोष नागरिक चालक दल के सदस्यों को खतरे में डालना या समुद्री मार्गों पर आवाजाही और व्यापार की स्वतंत्रता में बाधा डालना उचित नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और अन्य व्यापारिक सामान का आवागमन होता है। पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव के कारण हाल के दिनों में इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
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नई दिल्ली। आधार प्रणाली की डिजिटल सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने नया बग बाउंटी कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और एथिकल हैकर्स को डिजिटल प्लेटफॉर्म में संभावित कमजोरियों की पहचान करने के लिए आमंत्रित किया गया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार इस पहल के तहत 20 अनुभवी सुरक्षा शोधकर्ताओं और एथिकल हैकर्स के पैनल का चयन किया गया है। ये विशेषज्ञ यूआईडीएआई के प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुरक्षा जांच करेंगे।किन प्लेटफॉर्म की होगी जांचशोधकर्ता यूआईडीएआई के कई डिजिटल प्लेटफॉर्म की जांच करेंगे, जिनमेंयूआईडीएआई की आधिकारिक वेबसाइटमायआधार पोर्टलसिक्योर क्यूआर कोड एप्लिकेशनशामिल हैं।इन प्लेटफॉर्म में मौजूद संभावित कमजोरियों को क्रिटिकल, हाई, मीडियम और लो जोखिम श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा। जिन शोधकर्ताओं द्वारा महत्वपूर्ण सुरक्षा खामियां खोजी जाएंगी, उन्हें उनकी गंभीरता के आधार पर पुरस्कार दिया जाएगा।साइबर सुरक्षा कंपनी के साथ साझेदारीयह कार्यक्रम साइबर सुरक्षा समाधान प्रदाता कॉमओल्हो आईटी प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।डिजिटल सुरक्षा को प्राथमिकतायूआईडीएआई का कहना है कि डिजिटल युग में सूचना सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। संस्था पहले से ही कई स्तरों पर सुरक्षा उपाय लागू कर रही है, जिनमें नियमित सुरक्षा ऑडिट, कमजोरियों का आकलन, पेनिट्रेशन टेस्टिंग और निरंतर निगरानी शामिल हैं।स्कूलों में बायोमेट्रिक अपडेट अभियानहाल ही में यूआईडीएआई ने आधार के तहत छात्रों के अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट के लिए देशभर के 1.03 लाख से अधिक स्कूलों को शामिल किया है। इस पहल के तहत अब तक लगभग 1.2 करोड़ बच्चों का बायोमेट्रिक अपडेट स्कूल परिसर में ही पूरा कराया जा चुका है। -
नई दिल्ली। महात्मा गांधी द्वारा 12 मार्च 1930 को भारत के स्वतंत्रता संग्राम के लिए निकाली गई ‘दांडी नमक सत्याग्रह’ की वर्षगांठ पूरे देश में मनाई जा रही है। जगह-जगह विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन कर महात्मा गांधी को याद किया जा रहा है।
इस मौके पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी महात्मा गांधी को याद करते हुए एक्स पोस्ट पर लिखा है, “महात्मा गांधी के नेतृत्व में 1930 में इसी दिन शुरू हुआ ऐतिहासिक दांडी सत्याग्रह भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का एक निर्णायक मोड़ था, जिसने सत्य और अहिंसा के आदर्शों के माध्यम से राष्ट्रव्यापी आत्मनिर्भरता की भावना को प्रेरित किया। मैं बापू और इस ऐतिहासिक मार्च में भाग लेने वाले सभी वीर स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करता हूं। जैसे-जैसे हम आत्मनिर्भर भारत का निर्माण कर रहे हैं और विकसित भारत के सपने की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इस आंदोलन द्वारा प्रेरित आत्मनिर्भरता की भावना हमारे राष्ट्र के मार्ग का मार्गदर्शन करती रहेगी।”वहीं, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल साइट एक्स पर पोस्ट में लिखा, 12 मार्च 1930 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा साबरमती से दांडी तक आरंभ किया गया दांडी मार्च भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक अत्यंत गौरवपूर्ण अध्याय है। नमक कानून के विरुद्ध यह शांतिपूर्ण आंदोलन सत्य, अहिंसा और दृढ़ संकल्प की शक्ति का प्रतीक बना। इस ऐतिहासिक आंदोलन ने पूरे देश को अन्याय के विरुद्ध संगठित होकर खड़े होने की प्रेरणा दी और स्वतंत्रता व स्वाभिमान की भावना को नई ऊर्जा दी। स्वतंत्रता संग्राम के इस महत्वपूर्ण पड़ाव के सूत्रधार महात्मा गांधी और सभी समर्पित सत्याग्रहियों को सादर नमन।भाजपा नेता डॉ. महेंद्र सिंह ने पोस्ट में लिखा, “1930 में आज ही के दिन ‘राष्ट्रपिता’ महात्मा गांधी के नेतृत्व में साबरमती आश्रम से आरंभ हुआ दांडी नमक सत्याग्रह शुरू किया गया था, जिसने हर आयु-वर्ग के भीतर स्वतंत्रता की इच्छा को और भी प्रबल बनाया। दांडी यात्रा में सम्मिलित होने वाले सभी सत्याग्रहियों को शत-शत नमन।” -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुरुवार को ‘दांडी मार्च’ की वर्षगांठ पर इसमें शामिल सभी विभूतियों को याद करते हुए एक ‘संस्कृत सुभाषितम्’ शेयर किया है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “1930 में आज ही के दिन दांडी मार्च की शुरुआत हुई थी। इसमें शामिल सभी विभूतियों का श्रद्धापूर्वक स्मरण।” उन्होंने ‘संस्कृत सुभाषितम्’ लिखा, “सत्यमेव जयति नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः। येनाक्रमन्त्यृषयो ह्याप्तकामा यत्र तत्सत्यस्य परमं निधानम्॥”
इस ‘सुभाषितम्’ का संदेश है कि सदैव सत्य की ही विजय होती है और असत्य का नाश होता है। इसलिए उस मार्ग का अनुसरण करना चाहिए, जिस मार्ग पर चलकर ऋषियों ने आनंद और परमसत्य की प्राप्ति की।इससे पहले, स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण अध्याय ‘दांडी नमक सत्याग्रह’ की वर्षगांठ पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई नेताओं ने महात्मा गांधी को याद किया। अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “1930 में आज ही के दिन महात्मा गांधी जी ने दांडी सत्याग्रह शुरू किया था, जिसने हर आयु और वर्ग के भीतर स्वतंत्रता की इच्छा को और भी प्रबल बनाया। यह स्वदेशी की दिशा में उठाया गया ऐसा कदम था, जिसने स्वाधीनता आंदोलन की दिशा बदल दी। दांडी सत्याग्रह के सभी महापुरुषों को नमन करता हूं।”केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “महात्मा गांधी ने 1930 में आज ही के दिन अंग्रेजों के अत्याचारी नमक कानून के विरोध में साबरमती आश्रम से ऐतिहासिक दांडी नमक सत्याग्रह की शुरुआत की थी, जिसने भारतीय स्वाधीनता संग्राम को नई दिशा दी। स्वतंत्रता संग्राम के इस महत्वपूर्ण अध्याय दांडी नमक सत्याग्रह की वर्षगांठ के अवसर पर पूज्य महात्मा गांधी और सत्याग्रहियों को विनम्र अभिवादन।”वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखा, “पूज्य बापू और अमर संघर्ष के सभी सत्याग्रहियों को कोटि-कोटि नमन। साल 1930 में आज ही के दिन महात्मा गांधी के नेतृत्व में साबरमती आश्रम से आरंभ हुआ दांडी नमक सत्याग्रह भारतीय स्वाधीनता संग्राम की उस ज्योति का प्रज्ज्वलन था, जिसने जन-जन में आत्मबल और स्वराज का नया मंत्र भर दिया। बर्बर और अलोकतांत्रिक ब्रिटिश शासन की जड़ें हिलाने वाले इस अभूतपूर्व ‘दांडी मार्च’ ने यह सिद्ध किया कि सत्य, साहस और सामूहिक संकल्प से साम्राज्य भी डगमगा जाते हैं।” -
तिरुचिरापल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखला प्रभावित हुई है। उन्होंने देश के इस संकट से उबरने का भरोसा व्यक्त करते हुए लोगों से अपील की कि वे घबरायें नहीं। रसोई गैस की आपूर्ति में कमी और विपक्ष द्वारा केंद्र सरकार पर ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान को लेकर तैयारी करने में "विफल" होने का आरोपों के बीच, प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार हमेशा भारतीयों के हितों को सर्वोपरि रखती है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की एक रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, "आज मैं तमिलनाडु के लोगों से पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बारे में बात करना चाहता हूं। इसने पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति शृंखला को प्रभावित किया है। हम 'इंडिया फर्स्ट' की विचारधारा में विश्वास रखते हैं।" उन्होंने कहा, "हमने देखा है कि हर परिस्थिति में हमारी सरकार हमेशा भारतीयों के हितों को सर्वोपरि रखती है। इन परिस्थितियों में भी हमारा यही दृष्टिकोण रहेगा। घबराने या अफवाहों पर ध्यान देने की कोई जरूरत नहीं है। मैं जनता से अपील करता हूं कि हम केवल सही और सत्यापित जानकारी का प्रसार करे।" प्रधानमंत्री ने कहा, "कोविड महामारी के दौरान, 140 करोड़ भारतीयों ने दुनिया को दिखाया कि हमारा राष्ट्र कितना परिपक्व है। मुझे विश्वास है कि एक राष्ट्र के रूप में, हम हर परिस्थिति का सफलतापूर्वक सामना करेंगे।" तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने निर्बाध एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित करने और मूल्य वृद्धि के प्रभाव को कम करने के लिए मोदी से हस्तक्षेप की मांग की।
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नयी दिल्ली. केंद्र सरकार ने बुधवार को किसानों से पीएम-किसान पोर्टल पर अपने विवरण को सत्यापित करने और जल्द से जल्द ई-केवाईसी पूरा करने का आग्रह किया। यह आग्रह 13 मार्च को 18,640 करोड़ रुपये की 22वीं किस्त जारी होने से पहले किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी असम के गुवाहाटी से 'प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि' (पीएम-किसान) योजना के तहत 9.32 करोड़ पंजीकृत किसानों के खातों में यह राशि डिजिटल माध्यम से हस्तांतरित करेंगे। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देश भर के किसानों, विशेष रूप से असम के किसानों से अपील की है कि वे पीएम-किसान पोर्टल पर अपनी जानकारी की स्थिति की जांच करें। उन्होंने एक बयान में कहा, ''यदि आवश्यक हो, तो जल्द से जल्द ई-केवाईसी पूरा करें, ताकि 13 मार्च को जारी होने वाली 22वीं किस्त का लाभ उनके खातों में समय पर पहुंच सके।'' लाभार्थियों की सहायता के लिए, पोर्टल पर 'अपनी स्थिति को जानों (केवाईएस)' नामक एक मॉड्यूल उपलब्ध कराया गया है। यह मॉड्यूल भुगतान की स्थिति, पात्रता, भूमि विवरण, आधार जोड़ने और ई-केवाईसी की स्थिति जैसी सभी जानकारियों को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराता है। सरकार ने चेहरे की पहचान पर आधारित एक मोबाइल ऐप भी पेश किया है, जिससे किसान बिना किसी ओटीपी या बायोमेट्रिक डिवाइस की आवश्यकता के, घर बैठे ही अपना ई-केवाईसी पूरा कर सकते हैं। राज्य और ग्राम स्तर के नोडल अधिकारी इस कार्य में अतिरिक्त सहायता प्रदान कर रहे हैं। मंत्रालय का कृत्रिम मेधा-आधारित वॉयस चैटबॉट 'किसान-ईमित्र' 11 क्षेत्रीय भाषाओं में चौबीसों घंटे सहायता प्रदान कर रहा है, और अब तक इसने लाखों किसानों के प्रश्नों का समाधान किया है। अपात्र लाभार्थियों को बाहर करने के लिए एक मजबूत सत्यापन प्रणाली लागू की गई है, जबकि संपन्न किसानों के लिए अपनी पात्रता स्वेच्छा से छोड़ने (स्वैच्छिक समर्पण) की सुविधा भी शुरू की गई है। उन किसानों को फिर से जोड़ने के लिए भी व्यवस्था की गयी है, जिन्होंने अनजाने में अपनी पात्रता छोड़ दी थी। 22वीं किस्त प्राप्त करने वाले लाभार्थियों में 2.15 करोड़ से अधिक महिला किसान हैं। इस योजना के तहत, पात्र किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की राशि तीन समान किस्तों में दी जाती है, जिसे 'प्रत्यक्ष लाभ अंतरण' (डीबीटी) प्रणाली के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में जमा किया जाता है। इस किस्त के जारी होने के साथ, पीएम-किसान के तहत वितरित कुल राशि 4.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगी।
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नयी दिल्ली. केंद्र सरकार ने बुधवार को त्वरित संदेश मंच 'टेलीग्राम' को कॉपीराइट कानून का उल्लंघन करने वाले 3,100 से अधिक चैनल को तीन घंटे के भीतर निष्क्रिय करने का निर्देश दिया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने यह पाया था कि इन चैनल पर कुछ सामग्री मालिकों, ओटीटी मंचों और निर्माताओं के स्वामित्व वाले या उनके लाइसेंस-प्राप्त कार्यक्रमों को बिना कानूनी अनुमति के साझा और वितरित की जा रही थीं। मंत्रालय की तरफ से जारी अधिसूचना में संयुक्त सचिव सी. सेंथिल राजन ने कहा कि ये सामग्री कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए मंच पर डाली और प्रसारित की जा रही थीं। अधिसूचना के मुताबिक, "मध्यस्थ मंच टेलीग्राम को निर्देश दिया जाता है कि वह इस सूचना के जारी होने के तीन घंटे के भीतर संबंधित टेलीग्राम चैनल और उनकी सभी सामग्रियों को हटा दे और उनकी पहुंच बंद कर दे। साथ ही किसी भी प्रकार से साक्ष्यों को प्रभावित न होने दे।" सरकार के इस आदेश में कुल 3,142 टेलीग्राम चैनल को हटाने के लिए चिन्हित किया गया है।
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नयी दिल्ली/ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आचरण और सदन की कार्यवाही में उनकी भागीदारी पर तीखी टिप्पणियां करते हुए बुधवार को विपक्ष के इस आरोप को खारिज कर दिया कि उन्हें निचले सदन में बोलने नहीं दिया जाता। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए संकल्प पर चर्चा का जवाब देते हुए शाह ने यह भी कहा, ''आप प्रधानमंत्री के खिलाफ प्रस्ताव लाइए। हम मुद्दों पर जवाब देंगे। लेकिन लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने के प्रस्ताव को मैं सामान्य बात नहीं मानता।'' शाह के भाषण के बाद, सदन ने ध्वनिमत से विपक्ष के प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
उन्होंने कहा, ''विपक्ष के नेता का यह आरोप सही नहीं है कि उन्हें बोलने नहीं दिया जाता। नेता प्रतिपक्ष की पार्टी लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव लाई, उस पर भी वह नहीं बोले। वह बोलना ही नहीं चाहते। बोलना चाहते हैं तो नियमानुसार बोलना नहीं आता। यह कोई सभा (रैली) नहीं है, यहां नियमानुसार बोलना होता है।'' गृह मंत्री ने बिरला के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि यह बहुत अफसोसजनक घटनाक्रम है। उन्होंने कहा, ''जब सदन के मुखिया की निष्ठा पर सवाल उठाया जाता है तो दुनिया में भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया की साख पर सवाल खड़े हो जाते हैं।'' शाह ने कहा कि बजट सत्र के पहले चरण में लोकसभा अध्यक्ष के चैम्बर में ऐसा माहौल खड़ा किया गया कि अध्यक्ष की सुरक्षा की चिंता पैदा हो गई थी। उन्होंने कहा कि लोकसभा का संचालन कैसे करना है, इसके लिए इसी सदन ने नियम बनाए हैं और सदन के नियम जिसकी अनुमति नहीं देते, उस हिसाब से बोलने का अधिकार किसी को भी नहीं है। उन्होंने कांग्रेस सदस्यों को आड़े हाथ लेते हुए कहा, ''जब आप सदन के संचालन के नियमों को नजरअंदाज करेंगे तो अध्यक्ष का दायित्व है कि ऐसे सदस्य को रोकें, टोकें और बाहर निकाल दें।'' शाह ने कहा कि भाजपा और राजग के विपक्ष में रहते अध्यक्ष के खिलाफ कभी अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया गया और हमने हमेशा रचनात्मक विपक्ष के रूप में काम किया। उन्होंने कहा, ''मेरी पार्टी का मजबूत मत है और मान्यता है कि कभी भी लोकसभा अध्यक्ष की निष्ठा पर सवाल नहीं उठाना चाहिए।'' शाह ने बजट सत्र के पहले चरण में आसन की अवहेलना के मामले में आठ विपक्षी सदस्यों को निलंबित किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा, ''कागज फाड़कर आसन पर फेंकना कैसा आचरण है। किसी के सलाहकार आंदोलनकारी हो सकते हैं। लेकिन उन्हें सदन में नियमों के अनुसार ही चलना होगा।'' उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष को सदन के नियम के तहत, आसन की अवहेलना के लिए सदस्य को चेतावनी देने, निलंबित करने और निष्कासित करने का अधिकार है। गृह मंत्री ने यह भी कहा कि विपक्ष को ओम बिरला को नैतिकता सिखाने की जरूरत नहीं है क्योंकि उन्होंने अपने खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान में भाग नहीं लिया और इससे उच्च नैतिकता कुछ और हो ही नहीं सकती। उन्होंने माइक बीच में बंद होने के विपक्षी सदस्यों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नियमानुसार सदन की कार्यवाही चलती है और मंत्रियों के भी माइक बंद कर दिए जाते हैं। शाह ने कहा, ''जो नियमानुसार नहीं चलेगा, उसका माइक बंद हो ही जाएगा, बंद हो ही जाना चाहिए।''
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष अपने प्रस्ताव को लेकर ही गंभीर नहीं है और इस पर चर्चा के लिए निर्धारित नौ मार्च की तारीख को वह कोई और विषय लेकर आ गया। शाह ने कहा, ''जिस दिन प्रस्ताव लाया गया, उस पर चर्चा करने की जगह सदन को बाधित किया गया। इससे ज्यादा शर्मनाक घटना कोई नहीं हो सकती।'' शाह ने कहा कि देशभर में भाजपा की छवि बिगाड़ने के लिए प्रचार किया जा रहा है कि विपक्ष को बोलने नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा, ''कौन बोलेगा, क्या बोलेगा, कितना बोलेगा? यह आसन तय करता है, सत्ताधारी पार्टी तय नहीं करती। हमने कभी विपक्ष की आवाज दबाने का काम नहीं किया।'' उन्होंने कहा कि राहुल गांधी अपने अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन 17वीं लोकसभा में उनकी उपस्थिति 51 प्रतिशत रही, 16वीं लोकसभा में उनकी उपस्थिति 52 प्रतिशत रही। शाह ने कहा कि गांधी ने 16वीं लोकसभा में एक भी बार अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा नहीं लिया, बजट की चर्चा में हिस्सा नहीं लिया, एक भी सरकारी विधेयक पर चर्चा में हिस्सा नहीं लिया। गृह मंत्री ने कहा कि 17वीं लोकसभा में भी उन्होंने तीन बार धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में, चार बार बजट पर चर्चा में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने दावा किया कि 2025 के शीतकालीन सत्र में राहुल गांधी जर्मनी की यात्रा पर थे, बजट सत्र में वियतनाम की यात्रा पर थे। शाह ने कहा, ''जब भी बजट या कोई महत्वपूर्ण सत्र आता है, उनकी विदेश यात्रा होती है। फिर कहते हैं कि बोलने नहीं देते। विदेश से सदन में कैसे बोलेगे।'' बजट सत्र के पहले चरण में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी द्वारा एक पूर्व सेना प्रमुख के संस्मरण का उल्लेख किये जाने के संदर्भ में शाह ने कहा, ''अध्यक्ष ने उन्हें एक बार टोका। जब वह नहीं सुनेंगे तो दूसरी बार टोकने के अलावा क्या विकल्प रह जाता है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि वह (राहुल) अप्रकाशित पुस्तक को उद्धृत नहीं कर सकते। वह ऐसी पत्रिका को उद्धृत कर रहे थे जिसकी छवि उनकी पार्टी की पत्रिका की है।'' शाह ने कहा, ''यह सब्जी बाजार नहीं है, लोकसभा है। चर्चा के विषय तय होते हैं।
उन्होंने सदन की कुछ घटनाओं का जिक्र करते हुए राहुल पर निशाना साधा और कहा कि ''प्रधानमंत्री के पास आकर उनके गले लग जाना, सत्ता पक्ष की ओर 'फ्लाइग किस' करना, आंखें मटकाना। नेता प्रतिपक्ष का इस तरह का आचरण नहीं होता।'' इस दौरान शाह के एक शब्द पर विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया, जिस पर गृह मंत्री ने कहा कि कोई अससंदीय शब्द हो तो उसे कार्यवाही से हटा दिया जाए। पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल ने कहा कि वह कार्यवाही को देखेंगे और यदि कोई असंसदीय शब्द होगा तो उसे हटा दिया जाएगा। इस दौरान विपक्ष के सदस्य आसन के समीप आकर शाह के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। शाह ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में किसानों को नुकसान होने के विपक्ष के आरोपों को दरकिनार करते हुए कहा कि किसी भी समझौते में भारत के किसानों का नुकसान नहीं हुआ। -
नयी दिल्ली. सरकार ने बुधवार को राज्यसभा को बताया कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और असम राइफल्स में 93,000 से अधिक पद रिक्त हैं। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने अर्द्धसैनिक बलों में रिक्तियों के आंकड़े पेश किए, जिसके अनुसार केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में सबसे अधिक 27,400 पद रिक्त हैं। इसके बाद केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) है, जिसमें 28,342 पद खाली हैं। उन्होंने बताया कि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में 14,531 रिक्तियां हैं, जबकि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में 12,333 और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में 6,784 रिक्त पद हैं। असम राइफल्स में 3,749 रिक्तियां हैं। रिक्त पदों के कारण कानून प्रवर्तन, आंतरिक सुरक्षा और आपदा राहत क्षमता पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर जताई जा रही चिंताओं के संदर्भ में राय ने कहा कि बल अपनी जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभा रहे हैं। उन्होंने कहा, ''बल उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करते हुए अत्यंत पेशेवर तरीके से सभी कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं।'' मंत्री ने कहा कि सीएपीएफ और असम राइफल्स में रिक्त पदों को भरना एक सतत प्रक्रिया है, जिसकी भर्ती संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) और कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) जैसी एजेंसियों के जरिये की जा रही है। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।
राय ने कहा कि सरकार ने चिकित्सा परीक्षणों में लगने वाले समय को भी कम कर दिया है और आवश्यकतानुसार 'कट-ऑफ' अंक भी कम किए दिए हैं, ताकि पर्याप्त भर्ती सुनिश्चित हो सके। उन्होंने एक अन्य प्रश्न के उत्तर में सीएपीएफ के इस्तीफे के आंकड़े प्रस्तुत किए। पेश आंकड़ों के अनुसार 2021 से इस्तीफों की संख्या में वृद्धि हुई है। वर्ष 2025 में 2,333 इस्तीफे दिए गए, जबकि 2021 में यह संख्या 1,255 थी। आंकड़ों के अनुसार, 2022, 2023 और 2024 में क्रमशः 1,183; 2,037 और 2,724 इस्तीफे दर्ज किए गए।
आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि अर्द्धसैनिक बलों में आत्महत्याओं, सहकर्मियों की हत्याओं और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की संख्या में भी कमी आई है। आंकड़ों के अनुसार, 2021 में 143 आत्महत्याओं की तुलना में 2025 में यह संख्या घटकर 158 रह गई। सहकर्मियों की हत्याओं के मामले 2021 में 11 थे, जो 2025 में घटकर चार रह गए। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की संख्या 2021 में 10,828 थी, जो 2025 में 4,291 रह गई। -
फूलबनी. ओड़िशा के कंधमाल जिले में बुधवार को 10 माओवादियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वालों में भाकपा(माओवादी) की राज्य समिति के सदस्य सानू पोट्टम उर्फ नितू शामिल हैं, जिस पर 55 लाख रुपये का इनाम था। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने वाले इन दस माओवादियों में छह महिलायें एवं चार पुरुष हैं। इन लोगों ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (नक्सल विरोधी अभियान) संजीब पांडा, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के महानिरीक्षक अमितेंद्र नाथ सिन्हा, दक्षिणी संभाग बहरामपुर के पुलिस महानिरीक्षक निति शेखर, पुलिस महानिरीक्षक (अभियान) दीपक कुमार एवं अन्य अधिकारियों के समक्ष एक समारोह में आत्मसमर्पण किया। उन्होंने बताया कि आत्मसर्मण करने वालों में सानू पोट्टम के अलावा संताई सलाम, लक्ष्मी मडवी (उर्फ अनुपा), सुनील टेलम, मंजुला पुनेम, रामबती अय्यम, गणेश कुंजम, सुशीला डुडी, शरीर कूहुड़म और चौड़ी योड़ी शामिल हैं। इनमें एक डिवीज़नल कमिटी सदस्य और दो एरिया कमिटी सदस्य भी हैं। अधिकारियों ने बताया कि यह 10-सदस्यीय दल कंधमाल जिले में प्रतिबंधित संगठन के केकेबीएन (कंधमाल-कलाहंडी-बौध-नयागढ़)संभाग के तहत कार्य कर रहा था। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी ने पांडा को अपने हथियार सौंपे, जिनमें दो इंसास राइफलें, दो स्वचालित राइफलें, तीन .303 राइफलें, दो सिंगल-शूटर्स, एक 12-बोर की पिस्तोल एवं बड़ी मात्रा में कारतूस आदि शामिल हैं। पांडा ने कहा कि सानू पोट्टम उर्फ नितु समेत 10 माओवादी का आत्मसमर्पण इस क्षेत्र में वामपंथी उग्रवादी विचारधारा के धीरे-धीरे कमजोर पड़ने को दर्शाता है।" उन्होंने कहा कि कंधमाल में माओवादी का आधार कमजोर हुआ है, जो ओड़िशा का एकमात्र ऐसा जिला है जो अब भी एसआरई (सिक्योरिटी-रिलेटेड एक्सपेंडिचर) सूची में शामिल है। उन्होंने आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को भरोसा दिलाया कि उन्हें राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के लाभ मिलेंगे, जिसमें वित्तीय सहायता और व्यवसायिक प्रशिक्षण शामिल हैं, ताकि वे गरिमा के साथ समाज में पुनः शामिल हो सकें।
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नयी दिल्ली. राज्यसभा में बुधवार को भारतीय जनता पार्टी के एक सदस्य ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हालिया पश्चिम बंगाल दौरे में हुए कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन को लेकर क्षोभ व्यक्त करते हुए सरकार से मांग की कि राज्य सरकार के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए अन्यथा आने वाले समय में कोई और राज्य इसकी पुनरावृत्ति कर सकता है। शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए भाजपा के बाबू राम निषाद ने कहा कि पश्चिम बंगाल में हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की यात्रा के दौरान जो प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ वह चूक नहीं बल्कि एक संवैधानिक अपराध है। उन्होंने कहा ''यह विषय राष्ट्रपति की गरिमा और संविधान के सम्मान से संबंधित है। जब एक राज्य सरकार जानबूझकर देश के सर्वोच्च पद की अवहेलना करती है तो वह यह कैसे भूल जाती है कि उसने खुद संविधान की शपथ ली है।'' निषाद ने जब यह मुद्दा उठाया तब तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने हंगामा किया। दूसरी ओर भाजपा सदस्यों ने उनका पुरजोर विरोध किया। निषाद ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 52 से 62 तक राष्ट्रपति के पद की व्याख्या की गई है। उन्होंने कहा कि बंगाल सरकार का यह आचरण अनुच्छेद 256 और 257 का भी उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि इस तरह के उल्लंघन की स्थिति के लिए विशेष कानून बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई राज्य सरकार जानबूझकर राष्ट्रपति या संवैधानिक प्रमुख का अपमान करती है तो उसे संवैधानिक विफलता मान कर ऐसी सरकार के खिलाफ संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत कार्रवाई की व्यवस्था होनी चाहिए, उसके विवेकाधीन अनुदानों में कटौती का प्रावधान होना चाहिए और उसके संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर अभी पश्चिम बंगाल सरकार पर कार्रवाई नहीं की गई तो अन्य राज्य सरकारें भी ऐसा कर सकती हैं। उन्होंने कहा ''संविधान सर्वोपरि है और राष्ट्रपति पद 140 करोड़ भारतीयों के गौरव का प्रतीक है।'' राष्ट्रपति की सात मार्च की बंगाल यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक वहां मौजूद नहीं थे। नियमों के अनुसार, जब राष्ट्रपति किसी राज्य के दौरे पर जाती हैं, तो मुख्यमंत्री और राज्य के शीर्ष अधिकारियों का वहां मौजूद होना प्रोटोकॉल का हिस्सा होता है।
- नई दिल्ली। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन बढ़कर लगभग 357 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है जिससे भारत की खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय दोनों मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि भारत ने करीब 150 मिलियन टन से अधिक चावल उत्पादन के साथ चावल उत्पादन में चीन को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है, जबकि गेहूं, सरसों, सोयाबीन, मूंगफली जैसी फसलों में भी रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज हुआ है। केंद्रीय मंत्री के अनुसार, पहले भारत को पीएल-480 के तहत आयातित गेहूं पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन आज हालात यह हैं कि देश के गोदाम गेहूँ और चावल से भरे पड़े हैं और सरकार को चिंता इस बात की है कि “रखे कहाँ”, जबकि दुनिया भारत के किसानों और नीतियों की सराहना कर रही है।प्राकृतिक खेती, दालें, फल-सब्जियां: केंद्र की पहलकेंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए फलों और सब्जियों के साथ-साथ दालों के उत्पादन में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी करवाई है जिससे कुल उर्वरक उपयोग और लागत में कमी के साथ पौष्टिक आहार की उपलब्धता बढ़ी है। उन्होंने बताया कि दालों का उत्पादन लगभग 19 मिलियन टन से बढ़कर 25–26 मिलियन टन के आसपास पहुंच गया है और बागवानी उत्पादन भी 369 मिलियन टन से अधिक के स्तर पर पहुंच चुका है जो किसानों के लिए अतिरिक्त आय का बड़ा स्रोत बना है।प्राकृतिक खेती मिशन के तहत गंगा जैसी नदियों के किनारे के विस्तृत क्षेत्रों में रासायनिक मुक्त खेती को बढ़ावा देने, लाखों किसानों को जागरूक करने और प्रति एकड़ प्रोत्साहन की व्यवस्था करने की जानकारी देते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अगर प्राकृतिक खेती सही तरीके से की जाए तो उत्पादन घटता नहीं, कई मामलों में बढ़ता है, लेकिन पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों की उदासीनता देश के लिए चिंता का विषय है।उन्होंने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल के गरीब किसान केंद्र की कई महत्वपूर्ण योजनाओं से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य भारत को दुनिया का “फूड बास्केट” बनाना और “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना के साथ वैश्विक खाद्य सुरक्षा में योगदान देना है।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों ने रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अंधाधुंध और असंतुलित उपयोग से पैदा हो रही गंभीर समस्याओं पर कभी गंभीरता से ध्यान नहीं दिया, जबकि इससे एक ओर मिट्टी की उर्वरता और गुणवत्ता लगातार खराब हुई, दूसरी ओर इंसानों में कई तरह की बीमारियां बढ़ीं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकारें न तो मिट्टी के स्वास्थ्य की चिंता कर पाईं, न ही किसानों और उपभोक्ताओं को शुद्ध और पोषक आहार दिलाने की दिशा में कोई ठोस पहल कर सकीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस चुनौती को समय रहते समझा और स्पष्ट संदेश दिया कि यह धरती केवल हमारी पीढ़ी के लिए नहीं, आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित और उपजाऊ रहनी चाहिए।प्राकृतिक खेती मिशन: “उत्पादन घटता नहीं, बढ़ता है”केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने प्राकृतिक खेती मिशन और जैविक खेती मिशन का ज़िक्र करते हुए कहा कि इन योजनाओं के जरिए सरकार मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ाने, भूमि को रसायनमुक्त बनाने और किसानों की लागत घटाकर उनकी आय बढ़ाने पर फोकस कर रही है। उन्होंने बताया कि गंगा जैसी नदियों के दोनों किनारों पर 5 किलोमीटर तक के क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए, बड़े पैमाने पर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि पानी, जमीन और इंसान– तीनों का स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके। उन्होंने कहा कि देशभर में 1 करोड़ से ज्यादा किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए संवेदनशील और प्रशिक्षित किया गया है और लाखों हेक्टेयर क्षेत्र में क्लस्टर बनाकर रासायनिक उर्वरक व कीटनाशक मुक्त खेती शुरू हो चुकी है।किसान को प्रोत्साहन, स्थानीय संसाधनों से खेती का मॉडलकेंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि प्राकृतिक खेती में किसानों को प्रति एकड़ वित्तीय सहायता दी जा रही है ताकि वे रासायनिक खाद और महंगे कीटनाशकों की जगह स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों पर आधारित पारंपरिक भारतीय पद्धतियां अपनाएं। उन्होंने समझाया कि इस मॉडल में खेत और गांव के आसपास मिलने वाली वनस्पतियों, देसी गाय के गोबर और गोमूत्र से तैयार घनजीवामृत, बीजामृत और नीमास्त्र जैसी देसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है। साथ ही इंटरक्रॉपिंग के जरिए एक ही खेत में अलग‑अलग फसलें ली जाती हैं। उन्होंने दावा किया कि सही तरीके से प्राकृतिक खेती अपनाने पर उत्पादन घटने की आशंका निराधार है, बल्कि देश के कई हिस्सों के प्रयोगों में यह साबित हुआ है कि किसानों की पैदावार पहले से ज्यादा हुई है और उत्पाद की गुणवत्ता भी बेहतर मिली है।“हरित क्रांति से भी तेज गति से आगे बढ़ रहा है भारत”केंद्रीय मंत्री ने बताया कि आज भारत का खाद्यान्न उत्पादन हरित क्रांति के शुरुआती दौर की तुलना में कई गुना अधिक हो चुका है और अब वृद्धि की रफ्तार भी पहले से तेज है। उन्होंने कहा कि 2014–15 के मुकाबले खाद्यान्न उत्पादन में लगभग 40–42 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है, दलहन, तिलहन, बागवानी और दुग्ध उत्पादन जैसे क्षेत्रों में भी लगातार नए कीर्तिमान बन रहे हैं, जिसका सीधा फायदा किसानों की आय और देश की खाद्य सुरक्षा – दोनों को मिल रहा है। मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि “सेल्फ‑रिलायंस इन पल्सेज मिशन” और बागवानी के लिए की गई पहलों ने दालों और फल‑सब्जियों के उत्पादन को नए स्तर पर पहुँचाया है, जिससे पोषण सुरक्षा को मजबूत आधार मिला है।“भारत को दुनिया का फूड बास्केट बनाकर रहेंगे”केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पीएम मोदी का स्पष्ट विज़न है कि भारत केवल अपने नागरिकों की खाद्य सुरक्षा तक सीमित न रहे, बल्कि विश्व बंधु की भावना के साथ दुनिया की जरूरतों को भी पूरा करने वाला “फूड बास्केट ऑफ द वर्ल्ड” बने। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में रिकॉर्ड उत्पादन, मजबूत भंडारण क्षमता और निर्यात की संभावनाओं ने भारत को वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित किया है और आने वाले समय में यह भूमिका और मजबूत होगी।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज बुधवार को केरल के कोच्चि में अखिल केरल धीवर सभा के स्वर्ण जयंती सम्मेलन में भाग लिया। सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 50 वर्षों में धीवर सभा ने मछुआरा समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर कार्य किया है।
पीएम मोदी ने कहा, “मलयाली लोग लंबे समय से केरल का नाम बदलकर केरलम रखने की मांग कर रहे थे। केंद्र में एनडीए सरकार द्वारा इसे मंजूरी मिलने के बाद मैं आप सभी के चेहरों पर खुशी देख सकता हूं। इस खूबसूरत राज्य को मलयाली संस्कृति के अनुसार उसका उचित नाम मिल गया है। मैं केरलम के लोगों को बधाई देता हूं।”पीएम मोदी ने कहा, “हमें मत्स्य पालन में नई संभावनाओं को साकार करने और मछुआरों के जीवन स्तर में सुधार करने की आवश्यकता है। समुद्र से संबंधित अर्थव्यवस्था केवल पारंपरिक मछली पकड़ने तक ही सीमित नहीं है। मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में भी नए अवसर उभर कर सामने आए हैं। केरल में आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान पूरे देश ने मछुआरा समुदाय के प्रयासों को देखा। आपने फंसे हुए लोगों को बचाया और जरूरतमंदों तक आवश्यक सामग्री पहुंचाई। इसीलिए पूरा देश मछुआरा समुदाय के साहस, सेवा और समर्पण को सम्मानपूर्वक याद करता है।”प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारा संकल्प है कि केरलम के प्रत्येक परिवार तक समृद्धि पहुंचे और केरलम की अर्थव्यवस्था नई ऊंचाइयों को प्राप्त करे। पिछली सरकारों ने दशकों तक मछुआरा समुदाय की उपेक्षा की। लेकिन अब एनडीए सरकार उनकी प्रगति और क्षमताओं को असीमित स्तर तक बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी सरकार ने मछुआरा समुदाय की क्षमता और नीली अर्थव्यवस्था में उनकी भूमिका को पहचाना है। भाजपा-एनडीए सरकार ने ही मत्स्य पालन के लिए एक अलग मंत्रालय का गठन किया है। उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत केरल के लिए लगभग 1400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।”पीएम मोदी ने आगे कहा, “समुद्र में जाने वाले मछुआरों की सुरक्षा भी हमारे लिए महत्वपूर्ण है। पहले हमारे मछुआरे भाई-बहन खुले समुद्र में जाते थे, तो उनके घरवाले उनके वापस आने तक चिंता और डर में डूबे रहते थे, क्योंकि समुद्र में मौसम को लेकर हमेशा आशंकाएं बनी रहती थीं। लेकिन अब ऐसा नहीं है। हमने सैटेलाइट के जरिए समुद्र में जाने वाले मछुआरे भाई-बहनों की सुरक्षा को और मजबूत किया है। तकनीक भी मछुआरा समुदाय की एक ताकत है। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया गया है। इसके माध्यम से मछुआरे, व्यापारी और निर्यातक एक ही प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कर सकते हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करना भी उनके लिए आसान हो गया है। उन्होंने कहा, “हमें मत्स्य पालन में नई संभावनाओं को साकार करने और मछुआरों के जीवन स्तर में सुधार करने की आवश्यकता है। मछुआरों के कल्याण के लिए अखिल केरल धीवर सभा का कार्य सराहनीय है और यह तटीय समुदायों को सशक्त बनाने के एनडीए के दृष्टिकोण के अनुरूप है। -
गुरुग्राम. हरियाणा के गुरुग्राम जिले में निर्माणाधीन दीवार के ढह जाने से सात मजदूरों की मौत हो गई। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि घटना सोमवार शाम गुरुग्राम के सिधरावली इलाके में स्थित सिग्नेचर ग्लोबल सोसाइटी में हुई। अधिकारियों ने बताया कि सोमवार रात करीब आठ बजे दीवार ढहने से 12 से 15 मजदूर मलबे के नीचे दब गए। उन्हें भिवाड़ी के एक अस्पताल में ले जाया गया, जहां उनमें से सात को मृत घोषित कर दिया गया। उन्होंने बताया कि मृतकों में से छह की पहचान सतीश, भागीरथ, मिलन, शिव शंकर, मंगल और परमेश्वर के रूप में हुई है, जबकि चार अन्य - छोटेलाल, दीनदयाल, शिवकांत और इंद्रजीत की हालत गंभीर है।
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नयी दिल्ली. राज्यसभा में मंगलवार को शून्यकाल के दौरान विपक्षी सदस्यों ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर चर्चा की मांग करते हुए हंगामा किया और सदन से बहिर्गमन कर गए, जिसके बाद सदन के नेता जे पी नड्डा ने कहा कि विपक्ष सदन की कार्यवाही को बाधित कर रहा है और उसका यह आचरण निंदनीय है। उच्च सदन की बैठक शुरू होने पर सभापति सी पी राधाकृष्णन ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाने के बाद जब शून्यकाल शुरू करने के लिए कहा, तभी तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने व्यवस्था का प्रश्न उठाया। आसन की अनुमति मिलने पर उन्होंने कहा कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के मुद्दे पर चर्चा की मांग सदस्य लगातार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कल सदन के नेता ने कहा था कि चुनाव सुधार पर चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा ''लेकिन एसआईआर पर चर्चा की मांग अब तक पूरी नहीं हुई है।'' इस बीच, विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया।
कांग्रेस अध्यक्ष एवं सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि एसआईआर बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है। उन्होंने कहा कि यह एक राज्य के बाद दूसरे राज्य में.... हर जगह हो रहा है और लोगों के नाम मतदाता सूचियों से हटाए जा रहे हैं। हंगामे के बीच ही सभापति ने कहा कि चुनाव सुधार के मुद्दे पर चर्चा हो चुकी है और आज वह कामकाज होने देना चाहिए जो आज की कार्य सूची में तय है। उन्होंने कहा ''आप हर दिन सदन की कार्यवाही बाधित करते हैं और वे मुद्दे उठाते हैं जिनके बारे में स्पष्ट व्यवस्था दी जा चुकी है।'' इस पर असंतोष जताते हुए विपक्षी सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गए।
सदन के नेता एवं केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा ने कहा ''मैंने कल भी यह बात कही थी और आज भी कह रहा हूं कि विपक्ष की मंशा कभी भी, किसी भी मुद्दे पर चर्चा करने की नहीं होती। वे गंभीर मुद्दों पर भी गंभीरता नहीं दिखाते।'' उन्होंने कहा ''आज ये लोग एसआईआर का मुद्दा लेकर आए। चुनाव सुधार पर करीब 15 घंटे चर्चा हो चुकी है जिसमें एसआईआर पर भी सबने अपनी अपनी बात रखी थी। लेकिन मंत्री के के जवाब से पहले ही ये लोग सदन से बहिर्गमन कर गए।'' नड्डा ने विपक्ष पर संसदीय परंपराओं को बाधित करने तथा चर्चा में व्यवधान डालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा ''ये इनका रवैया है। इनको प्रजातांत्रिक व्यवस्था में और लोकतांत्रिक परंपराओं-मानकों में विश्वास नहीं है। ये हमेशा अवरोध पैदा करते हैं, और यह आचरण निंदनीय है। मैं इसकी घोर निंदा करता हूं।'' -
शाहजहांपुर (उप्र). उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में एक पालतू पिल्ले के कब्रिस्तान में घुसने पर उसे कथित रूप से पीट-पीटकर मार देने के मामले में पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। पुलिस अधीक्षक (एसपी) राजेश द्विवेदी ने बताया कि थाना सदर बाजार क्षेत्र के लाल तेली बजरिया निवासी करन का पालतू पिल्ला कब्रिस्तान में चला गया था और वहां मौजूद पांच लोगों ने उसे पीटना शुरू कर दिया। पड़ोस की छत पर जाकर करन ने इस घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया।
द्विवेदी ने बताया कि पिल्ला बचने के लिए चारपाई के नीचे छिप गया, लेकिन आरोपी उसे वहां से खींचकर फिर पीटते रहे, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। उन्होंने बताया कि इसके बाद आरोपी पिल्ले को बोरी में डालकर ले गए।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि घटना सात मार्च की है, लेकिन पुलिस में शिकायत सोमवार को जीव सहयोग फाउंडेशन के एक अधिकारी ने दर्ज कराई। पुलिस ने पांच अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। -
कटनी (मप्र) . मध्यप्रदेश के कटनी जिले में एक तेज रफ्तार कार की मोटरसाइकिल से टक्कर होने के कारण चार युवकों की मौत हो गई तथा पांच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार यह घटना सोमवार रात करीब साढ़े 11 बजे जगतपुर-उमरिया मार्ग पर हुई।
बड़वारा थाना प्रभारी केके पटेल ने बताया कि चार युवक मोटरसाइकिल पर सवार थे, तभी सामने से आ रही तेज रफ्तार कार ने दोपहिया वाहन को टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर की तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग और राहगीर मौके पर इकट्ठा हो गए। हादसे के बाद सड़क पर कुछ समय के लिए यातायात बाधित हो गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मोटरसाइकिल सवार चारों युवकों को बड़वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतकों की पहचान धीरेंद्र सिंह (18), रामकिशोर सिंह (26), रामदास सिंह (18) और इंद्रभान सिंह (25) के रूप में हुई है। वे उमरिया जिले के अलग-अलग गांवों के निवासी थे। परिजनों के अनुसार रामकिशोर, रामदास और इंद्रभान मजदूरी का काम करते थे और सोमवार को महाराष्ट्र से लौटे थे। उन्होंने बताया कि धीरेंद्र उन्हें लेने मोटरसाइकिल से कटनी रेलवे स्टेशन गया था और लौटते समय यह हादसा हो गया। हादसे में कार में सवार पांच लोग भी गंभीर रूप से घायल हो गए।
पुलिस के अनुसार प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया है। पुलिस ने कार चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस के अनुसार शवों को पोस्टमार्टम के लिए बड़वारा के सरकारी अस्पताल भेज दिया गया है। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के स्थापना दिवस पर सुरक्षा बल के सभी कर्मियों को बधाई दी और कहा कि सीआईएसएफ देश भर में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मोदी ने कहा कि सीआईएसएफ कर्मियों की कर्तव्यनिष्ठा भारत की सुरक्षा और प्रगति में बहुत बड़ा योगदान देती है। मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के सभी कर्मियों को सुरक्षा बल के स्थापना दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं। सीआईएसएफ अपने दृढ़ संकल्प, अनुशासन और समर्पण के लिए जाना जाता है जो देश भर में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है।'' संसद के एक अधिनियम के तहत 1968 में गठित सीआईएसएफ एक बहुआयामी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है। महज 3,129 कर्मियों से शुरू हुआ यह सुरक्षा बल अब 22 लाख कर्मियों की एक मजबूत ताकत बन गया है जो लगभग सभी राज्यों में तैनात है। सीआईएसएफ वर्तमान में 70 हवाई अड्डों सहित 361 महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रतिष्ठानों को सुरक्षा प्रदान करता है। इसके अलावा किसी भी सुरक्षा आपात स्थिति से निपटने के लिए इसके पास 12 आरक्षित बटालियन हैं और यह देश भर में आठ अत्याधुनिक प्रशिक्षण संस्थान संचालित करता है जो सीआईएसएफ को निरंतर निखारते और मजबूत बनाते हैं।
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नई दिल्ली। भारतीय दूतावास ने कतर में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए कतर एयरवेज और सऊदी अरब के अधिकारियों के साथ समन्वय जारी रखा है। 10 मार्च को लगभग एक हजार यात्री अपने वतन लौट आए। इसके लिए भारतीय दूतावास ने कतर एयरवेज का धन्यवाद किया।
भारतीय दूतावास की ओर से जानकारी दी गई कि 10 मार्च को लगभग एक हजार भारतीय यात्रियों ने कतर एयरवेज की फ्लाइट्स से नई दिल्ली, मुंबई और कोच्चि की यात्रा की। 11 मार्च को नई दिल्ली के लिए कतर एयरवेज की एक उड़ान निर्धारित की गई है। भारतीय दूतावास ने बताया कि 96 घंटे की वैधता वाले अस्थायी ट्रांजिट वीजा पर भारतीय नागरिकों की सऊदी अरब के सलवा सीमा के माध्यम से यात्रा की सुविधा दी जा रही है।दूतावास ने बताया कि भारत की बास्केटबॉल टीम, जो कतर में फंसी हुई थी, सऊदी अरब से उड़ानों के माध्यम से भारत पहुंच गई है। हम सऊदी अरब और कतर के अधिकारियों के सहयोग के लिए धन्यवाद करते हैं।दूतावास का 24X7 कंट्रोल रूम और भारतीय समुदाय के हेल्पडेस्क लगातार सक्रिय है।इसके अलावा मंगलवार को ही दूतावास की ओर से अपडेट एडवाइजरी भी जारी की गई थी, जिसमें भारतीय दूतावास की ओर से कहा गया कि वे भारतीय नागरिक जो वर्तमान में कतर में पर्यटक/कम अवधि के आगंतुक के रूप में फंसे हुए हैं (हाया A1 वीजा धारक) और 28 फरवरी 2026 से कतर से उड़ानों के रद्द होने के कारण वापस नहीं जा पा रहे हैं, उनसे अनुरोध है कि इंडियन एम्बेसी कतर की आधिकारिक वेबसाइट पर अपनी जानकारी भरें। भारतीय दूतावास की ओर से स्पष्ट किया गया कि यह केवल कतर में फंसे उन भारतीय नागरिकों की संख्या और विवरण जानने के लिए है, जो कतर के निवासी नहीं हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि जिन लोगों ने पहले वाले लिंक के माध्यम से अपनी जानकारी पहले ही जमा कर दी है, उन्हें दोबारा भरने की आवश्यकता नहीं है। -
नयी दिल्ली/ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि भारत के युवाओं की आकांक्षाएं देश की ''सबसे बड़ी पूंजी'' हैं और उनके नवाचार एवं योगदान की इच्छा राष्ट्र के भविष्य के लिए एक प्रमुख ताकत है। दिव्यांगजन कौशल योजना पर बजट के बाद एक वेबिनार में मोदी ने कहा कि इस तरह के परामर्श की नयी परंपरा जन भागीदारी के शक्तिशाली उदाहरण को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि वे केंद्रीय बजट के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए व्यावहारिक विचार पेश करने को लेकर विशेषज्ञों, हितधारकों और लाभार्थियों को एक साथ लाते हैं। मोदी ने कहा, आज भारत की सबसे बड़ी ताकत गांवों, कस्बों और शहरों के युवाओं की आकांक्षाओं में निहित है, जो देश के भविष्य के लिए कुछ नया करना और सार्थक योगदान देना चाहते हैं।'' एक आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे-जैसे भारत एक नवाचार-संचालित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, देश को इस क्षमता का फायदा उठाने के लिए अपनी शिक्षा प्रणाली को लगातार आधुनिक बनाना होगा। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने कहा कि केंद्रीय बजट में दिव्यांगजन कौशल योजना की घोषणा का उद्देश्य दिव्यांग लोगों के लिए रोजगार से जुड़े कौशल विकास को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि सम्मानजनक रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने के लिए सरकार, उद्योग और नागरिक समाज के बीच साझेदारी महत्वपूर्ण होगी। वेबिनार में विशेषज्ञों ने जोर दिया कि दिव्यांगजन के लिए बाजार-आधारित कौशल ऐसे हों, जो समुदाय की आकांक्षाओं को उद्योग की मांग के साथ जोड़े और उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा, एसटीईएम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित) अध्ययन और रोजगार प्रणाली में समाहित करे। चर्चा में समावेशी नियुक्ति, सुलभ प्रशिक्षण उपकरण, उद्यमिता, डिजिटल प्लेटफॉर्म और एआई-सक्षम दूरस्थ कार्य अवसरों के महत्व पर प्रकाश डाला गया। -
तिरुवनंतपुरम. प्रख्यात इतिहासकार एवं शिक्षाविद के.एन. पणिक्कर का सोमवार को यहां एक निजी अस्पताल में उम्र संबंधी बीमारियों के कारण निधन हो गया। परिवार के सूत्रों ने यह जानकारी दी। वह 90 वर्ष के थे। इतिहास के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व रहे पणिक्कर इतिहास लेखन में अपने मार्क्सवादी दृष्टिकोण और क्षेत्र में धर्मनिरपेक्ष एवं वैज्ञानिक तरीकों को बढ़ावा देने के लिए व्यापक रूप से जाने जाते थे। उनकी पहचान साम्प्रदायिकता के आलोचक के रूप में भी थी। इस वरिष्ठ इतिहासकार ने आधुनिक भारतीय इतिहास के अध्ययन में प्रगतिशील दृष्टिकोण को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद पणिक्कर ने राष्ट्रीय राजधानी के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में इतिहास विभाग के शिक्षक के रूप में कार्य शुरू किया, जहां बाद में उन्होंने विभागाध्यक्ष के रूप में भी सेवा दी। पणिक्कर ने राज्य के कलाडी स्थित श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में भी सेवा दी। वह केरल ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद के संस्थापक अध्यक्ष भी थे और 2001 से 2017 तक इस संस्था का नेतृत्व किया। पणिक्कर की दो पुत्रियां हैं। उनकी पत्नी राजस्थान की मूल निवासी और उनकी पूर्व सहपाठी थीं। उनका निधन पहले ही हो चुका है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्य सचिव एम. वी. गोविंदन, सामान्य शिक्षा मंत्री वी. शिवणकुट्टी और कई अन्य लोगों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। विजयन ने एक विस्तृत संदेश में पणिक्कर को एक सांस्कृतिक व्यक्तित्व के रूप में वर्णित किया, जिन्होंने इतिहास की वैज्ञानिक और वस्तुनिष्ठ समझ की दृढ़ता से रक्षा की। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सांस्कृतिक क्षेत्र में धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में उनका योगदान महत्वपूर्ण था।
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नई दिल्ली। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को जानकारी दी कि नामीबियाई चीता ‘ज्वाला’ ने जो तीसरी बार सफलतापूर्वक मां बनी है, कुनो राष्ट्रीय उद्यान में पांच शावकों को जन्म दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में मंत्री ने कहा कि इस जन्म के साथ, भारत में जन्मे स्वस्थ शावकों की संख्या बढ़कर 33 हो गई है, जो भारतीय धरती पर चीतों के 10वें सफल प्रजनन का प्रतीक है और भारत की चीता संरक्षण यात्रा में एक और महत्वपूर्ण सफलता है।
केंद्रीय मंत्री ने इसे ‘प्रोजेक्ट चीता’ के लिए अत्यंत गर्व का क्षण बताया और कहा कि यह उपलब्धि पशु चिकित्सकों, फील्ड स्टाफ और इस परियोजना से जुड़े सभी लोगों के समर्पित प्रयासों, कौशल और प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जो लगातार जमीनी स्तर पर अथक परिश्रम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इन शावकों के आगमन के साथ भारत में चीतों की कुल संख्या 53 हो गई है।इसे वन्यजीव संरक्षण के लिए एक ऐतिहासिक और हृदयस्पर्शी क्षण बताते हुए मंत्री ने आशा व्यक्त की कि ‘ज्वाला’ और उसके शावक स्वस्थ होकर आगे बढ़ेंगे और भारत की चीता गाथा को और ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे। उन्होंने आगे कहा, “वाइल्डलाइफ संरक्षण के लिए एक ऐतिहासिक और दिल को छू लेने वाला पल। ज्वाला और उसके शावक मजबूत बनें और आगे बढ़ें, भारत की चीता कहानी को और भी ऊंचाइयों तक ले जाएं।” हाल ही में दक्षिण अफ्रीका की चीता ‘गामिनी’ दूसरी बार मां बनी और उसने चार शावकों को जन्म दिया। इसके अलावा, 28 फरवरी को केंद्रीय मंत्री ने बोत्सवाना से प्राप्त 9 चीतों, 6 मादा और 3 नर, को मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में बने क्वारंटीन बाड़ों में छोड़ा। ये चीते वर्तमान में बड़े वन क्षेत्र में क्रमिक रूप से छोड़े जाने से पहले अनुकूलन और स्वास्थ्य निगरानी के चरण से गुजर रहे हैं। -
नई दिल्ली। टी20 विश्व कप में मिली खिताबी जीत पर सोमवार को राज्यसभा में भारतीय टीम को बधाई दी गई। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने राज्यसभा सदस्यों की तरफ से विजेता भारतीय टीम को बधाई देते हुए जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह देश के लिए गर्व की बात है कि भारतीय टीम ने आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप का खिताब जीत लिया है।
भारतीय क्रिकेट टीम ने अहमदाबाद के नरेन्द्र मोदी स्टेडियम में खेले गए फाइनल में शानदार प्रदर्शन किया। यह तीसरी बार है जब भारत ने टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम किया है। दिलचस्प बात है कि लगातार दूसरी बार टीम ने ऐसा किया है क्योंकि भारत ने इससे पहले संस्करण में भी ट्रॉफी अपने नाम की थी।राधाकृष्णन ने कहा कि यह जीत इसलिए भी विशेष है क्योंकि भारत पहला देश है जो अपनी मेजबानी में टी20 विश्व कप का विजेता बना है। पूरे टूर्नामेंट के दौरान टीम के शानदार प्रदर्शन ने देशभर के करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों को अपार खुशी और गर्व का अनुभव कराया है। सदन की ओर से भारतीय टीम के खिलाड़ियों, सहयोगी स्टाफ और भारतीय क्रिकेट से जुड़े सभी लोगों को इस शानदार उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई। यह सदन उनकी आने वाले वर्षों में निरंतर सफलता की कामना करता है। -
नयी दिल्ली. भारत में होम्योपैथी का क्षेत्र काफी व्यापक स्तर पर फैला हुआ है और अब हमारा देश वैश्विक स्तर पर दुनिया में इसका नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। भारत में होम्योपैथी का क्षेत्र मजबूत नैदानिक विशेषज्ञता, व्यापक चिकित्सक नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त गुणवत्ता प्रमाणपत्रों और मानकों द्वारा संचालित है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन कारकों के चलते भारत आने वाले समय में वैश्विक होम्योपैथी उद्योग में एक प्रमुख भूमिका निभा सकता है और इस क्षेत्र में नयी संभावनाओं के द्वार खुल सकते हैं। आयुष विशेषज्ञों का कहना है कि दशकों से, जर्मनी के होम्योपैथी ब्रांडों ने वैश्विक स्तर पर अपनी एक उत्कृष्ट प्रतिष्ठा कायम रखी है और अक्सर उन्हें गुणवत्ता, निरंतरता और अनुसंधान-समर्थित विनिर्माण क्षेत्र में स्वर्ण मानक के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कहा कि भारत न केवल उनके बराबर पहुंचने की राह पर है, बल्कि दो शक्तिशाली गुणवत्ता ढांचों - आयुष प्रीमियम मार्क और एनएबीएल मान्यता के चलते उनसे आगे निकलने की राह पर भी है। होम्योपैथी क्षेत्र से जुड़े उद्योग जगत की रिपोर्टों के अनुसार, देश में 25 लाख से अधिक पंजीकृत होम्योपैथी चिकित्सक और लगभग 300 शिक्षण संस्थान हैं। इसके अलावा देश में लाखों मरीज होम्योपैथी को अपनी प्राथमिक या पूरक चिकित्सा पद्धति के रूप में अपनाते हैं। वैश्विक होम्योपैथी बाजार का मूल्य आठ से 10 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है, जिसमें यूरोप की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है और इस पर ऐतिहासिक रूप से जर्मनी का वर्चस्व रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि गुणवत्ता के बल पर स्थापित भारतीय ब्रांड अब इस प्रभुत्व को चुनौती देने के लिए अच्छी स्थिति में हैं। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) के निदेशक डॉ. प्रदीप प्रजापति ने कहा, ''मुख्य अंतर प्रमाणित गुणवत्ता और वैज्ञानिक सत्यापन में निहित है।'' उन्होंने कहा कि आयुष मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया आयुष प्रीमियम मार्क, आयुष उत्पादों के निर्माण, सुरक्षा और गुणवत्ता प्रबंधन में वैश्विक स्तर के अनुपालन का प्रतिनिधित्व करता है। डॉ. प्रजापति ने बताया कि एनएबीएल (नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज) प्रमाणन परीक्षण और गुणवत्ता नियंत्रण में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित सटीकता, विश्वसनीयता और पुनरुत्पादकता सुनिश्चित करता है। आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ प्रतिनिधि राजेश्वर तिवारी ने कहा कि होम्योपैथी में भारत के पास अद्वितीय नैदानिक डेटा, चिकित्सकों की संख्या और रोगियों की विविधता मौजूद है। राजेश्वर तिवारी ने कहा, '' जब इस अनुभवजन्य लाभ को आयुष प्रीमियम और एनएबीएल जैसे प्रमाणित गुणवत्ता मानकों का समर्थन प्राप्त होता है, तो भारतीय होम्योपैथी को वैश्विक स्तर पर तुलनीय वैज्ञानिक विश्वसनीयता प्राप्त होती है। अनुसंधान, विनियमन और विनिर्माण उत्कृष्टता का यह एकीकरण स्थापित यूरोपीय ब्रांडों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए आवश्यक है।'' इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण उदाहरण एडवेन बायोटेक है, जो आयुष प्रीमियम मार्क और एनएबीएल प्रमाणन दोनों प्राप्त करने वाली भारत की पहली होम्योपैथी कंपनी बन गई है।



























