- Home
- देश
- नयी दिल्ली ।देश के कई हिस्सों में शनिवार को बारिश का प्रकोप कम हुआ, लेकिन इससे हुई तबाही का असर बरकरार रहा। असम में बारिश और बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 99 हो गई, जबकि हिमाचल प्रदेश में 153 सड़कें बंद होने से आवागमन प्रभावित रहा। केरल में मकानों और सड़कों को हुए नुकसान के कारण सैकड़ों लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। असम आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के बुलेटिन के अनुसार, शनिवार को भी राज्य में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी रही तथा एक और मौत की खबर के साथ मरने वालों की संख्या 99 हो गई। इसमें कहा गया कि असम में 1.47 लाख से अधिक लोग अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। मौत का नया मामला गोलाघाट ज़िले से सामने आया है। इसके साथ ही, असम में इस साल बाढ़ से मरने वालों की संख्या 99 हो गई है। बुलेटिन में कहा गया कि बाढ़ से असम में 12 जिले-सोनितपुर, नागांव, गोलाघाट, शिवसागर, होजई, दरांग, जोरहाट, धेमाजी, चराइदेव, कार्बी आंगलोंग, लखीमपुर और विश्वनाथ प्रभावित हैं। चार दिन से लगातार हो रही बारिश के बीच, राष्ट्रीय राजधानी में शनिवार का दिन दो वर्षों में अगस्त का सबसे अधिक बारिश वाला दिन दर्ज किया गया। महीने के पहले आठ दिनों में ही अगस्त में होने वाली औसत मासिक बारिश लगभग पूरी हो गई है। शनिवार को सुबह 8:30 बजे तक दिल्ली में 98.7 मिलीमीटर (मिमी) बारिश दर्ज की गई, जो अगस्त में 2024 के बाद की सबसे अधिक बारिश है। वर्ष 2024 में अगस्त के पहले दिन 107.6 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। लगातार बारिश के बीच राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में यातायात जाम की स्थिति देखने को मिली। कालिंदी कुंज बॉर्डर, आईटीओ, प्रेस एन्क्लेव मार्ग, गीतांजलि मार्ग और महरौली-बदरपुर रोड पर भारी जाम रहा। पूर्वी दिल्ली के कुछ हिस्सों में भी यातायात प्रभावित हुआ, जिसमें जीटी रोड के कुछ हिस्से शामिल हैं। अगस्त के पहले सात दिनों के दौरान दिल्ली में 127 मिमी बारिश दर्ज की गई। शुक्रवार तक लगातार जारी बारिश ने राष्ट्रीय राजधानी को प्रभावित किया। शुक्रवार को हुई भारी बारिश के कारण दिल्ली के कई इलाकों में जलभराव हो गया, नालों में पानी का बहाव बढ़ गया और कई जगहों पर दीवारों तथा मकानों के ढहने की घटनाएं सामने आईं। हिमाचल प्रदेश में मूसलाधार बारिश के कारण 153 सड़कें बंद हो गई हैं। वहीं, शिमला मौसम विज्ञान केंद्र ने सोमवार और मंगलवार को राज्य में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी देते हुए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। राज्य आपातकालीन अभियान केंद्र (एसईओसी) के अनुसार, शनिवार सुबह तक 77 जलापूर्ति योजनाएं और 92 ट्रांसफॉर्मर भी प्रभावित हुए थे। अधिकारियों ने बताया कि 30 जून को मानसून शुरू होने के बाद से अब तक बारिश से जुड़ी घटनाओं में 66 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 14 लोगों की जान भूस्खलन और एक व्यक्ति की मौत अचानक आई बाढ़ में हुई। उन्होंने बताया कि राज्य को कुल 835 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। मौसम विभाग ने राज्य में 14 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है।केरल में शनिवार को बारिश जारी रही। हालांकि, कई इलाकों में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन कई सड़कें और मकान अब भी जलमग्न होने के कारण सैकड़ों लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। अधिकारियों ने बताया कि अलप्पुझा के अपर कुट्टनाड और कुट्टनाड इलाकों तथा कोट्टायम जिले के अंदरूनी क्षेत्रों में बाढ़ का सबसे अधिक असर रहा, हालांकि कई स्थानों पर पानी का स्तर अब धीरे-धीरे कम होने लगा है। कुछ इलाकों में बाढ़ का पानी केवल मामूली रूप से कम हुआ है, जबकि कई लोग अब भी फंसे हुए या प्रभावित हैं, क्योंकि उनके मकान और सड़कें अभी भी पानी में डूबी हुई हैं। अलप्पुझा-चंगनास्सेरी सड़क समेत कई प्रमुख सड़कें अब भी जलमग्न हैं, जिससे क्षेत्र में यातायात बाधित है। जलभराव वाले इलाकों से लोगों को निकालने और जरूरी सामान को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए छोटी नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। लगातार हो रही बारिश को देखते हुए एहतियाती कदम के तौर पर शनिवार को आठ जिलों-कासरगोड, कन्नूर, वायनाड, कोझिकोड, त्रिशूर, कोट्टायम, पथनमथिट्टा और अलप्पुझा के सभी शैक्षणिक संस्थानों में अवकाश घोषित किया गया। स्थानीय स्वशासन संस्थाओं, राजस्व अधिकारियों और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से कहा गया कि जरूरत पड़ने पर कमजोर और जोखिम वाले लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अगले 24 घंटों के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई स्थानों और राज्य के पूर्वी हिस्सों में कुछ स्थानों पर बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान जताया है। अधिकारियों ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी भी जारी की है।पंजाब और हरियाणा के कुछ इलाकों में दिन के दौरान बारिश हुई, जिनमें लुधियाना, पटियाला, पठानकोट, बठिंडा, हिसार, रोहतक, भिवानी, सिरसा और गुरुग्राम शामिल हैं। हरियाणा के फरीदाबाद में शनिवार को 50 से अधिक स्थानों पर जलभराव हो गया। पिछले 24 घंटों से लगातार हो रही बारिश के कारण भारी यातायात जाम लगा और जनजीवन व्यापक रूप से प्रभावित हुआ। वहीं, सूरजकुंड रोड पर एक पुलिया का बड़ा हिस्सा धंस गया, जिससे पैदल यात्रियों और वाहन चालकों के लिए खतरा पैदा हो गया। जिला प्रशासन के अनुसार, फरीदाबाद में शुक्रवार सुबह आठ बजे से शनिवार सुबह आठ बजे तक 120 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो शुरुआती अनुमान से अधिक है। दक्षिण-पश्चिमी मानसून के सक्रिय रहने के कारण राजस्थान के कई इलाकों में भी भारी बारिश दर्ज की गई।मौसम विज्ञान केंद्र ने बताया कि अगले एक सप्ताह के दौरान पूर्वी राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में मानसून के सक्रिय रहने की संभावना है। भारी बारिश के बाद कोटपूतली-बहरोड़ जिले से गुजरने वाले जयपुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बन गई। शहरी इलाकों में पानी बाजारों और घरों में भी घुस गया। भरतपुर में बारिश के कारण स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों को बंद कर दिया गया। वहीं, अलवर के गोविंदगढ़ में एक मकान की छत ढह गई। इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। जम्मू-कश्मीर में आने वाले दिनों में व्यापक बारिश और गरज-चमक होने की संभावना है। मौसम विभाग ने नौ से 11 अगस्त के बीच जम्मू संभाग के कुछ जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी है। अधिकारियों ने बताया कि खराब मौसम, अगले कुछ दिनों में भारी बारिश के पूर्वानुमान और श्रद्धालुओं की संख्या में कमी को देखते हुए शनिवार को जम्मू से अमरनाथ यात्रा स्थगित कर दी गई। राजौरी जिले में एक दुखद घटना सामने आई है। हाल में हुई भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन से क्षतिग्रस्त सड़क पर कीचड़ में कई घंटे तक फंसे रहने के बाद अस्पताल ले जा रहे वाहन में सवार 17 वर्षीय लड़की की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि लगातार हो रही भारी बारिश के कारण शनिवार को नगालैंड के दीमापुर जिले के कई निचले इलाकों में बाढ़ आ गई, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ। वहीं, घर में पानी घुसने के बाद करंट लगने से अंतिम वर्ष के एक कॉलेज छात्र की मौत हो गई। शनिवार सुबह से दीमापुर जिले में भारी बारिश हो रही है। अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा स्थिति मुख्य रूप से लगातार हो रही बारिश और ऊपरी इलाकों तथा पहाड़ी जलग्रहण क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में सतही जल बहाव के कारण बनी है। इससे दीमापुर के निचले हिस्सों में जल निकासी तंत्र में पानी का प्रवाह बढ़ गया है। एसडीआरएफ ने बाढ़ में फंसे एक घर से दो बच्चों और एक बुजुर्ग सहित नौ लोगों को सुरक्षित बचाकर बाहर निकाला। रिवर बेल्ट कॉलोनी स्थित एक छात्रावास से चार छात्रों को बचाया गया, जबकि होली क्रॉस स्कूल क्षेत्र में फंसे पांच अन्य लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने शनिवार को बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से अगले पांच दिनों में ओडिशा में भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है। आईएमडी ने कहा कि इसके प्रभाव से उत्तरी और पश्चिमी ओडिशा के कुछ हिस्सों में अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है।
-
नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को छात्रों से कहा कि वे उन बातों पर सवाल उठाएं, जिन्हें बिना सोचे-समझे मान लिया जाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उन्हें सिर्फ सवाल पूछने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनके समाधान खोजने का साहस भी दिखाना चाहिए। आईआईटी दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि चुनौतियों का सामना करने के लिए नए समाधान खोजने का साहस रखने वालों के लिए चुनौतियां ही अवसर बन जाएंगी। मोदी ने छात्रों को सलाह दी कि वे जीवन में अपनी जिज्ञासा और सीखने की प्रवृत्ति को बनाए रखें। उन्होंने कहा, "बिना सोचे-समझे स्वीकार की गई बातों पर सवाल उठाएं, लेकिन सिर्फ सवाल उठाने तक ही सीमित न रहें; उनके समाधान खोजने का साहस भी दिखाएं।" उन्होंने कहा कि देश के युवा जितने ज्यादा सशक्त होंगे, पूरा देश उतना ही सशक्त होगा।
मोदी ने कहा कि भारत अब हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम कर रहा है; चाहे वह आर्थिक आत्मनिर्भरता हो, तकनीकी आत्मनिर्भरता हो या औद्योगिक आत्मनिर्भरता; यही 'विकसित भारत' की मजबूत नींव है। समारोह से जुड़े गहरे भावनात्मक जुड़ाव को रेखांकित करते हुए, उन्होंने परिसर के जीवंत और सपनों से भरे माहौल का उल्लेख किया। छात्रों और उनके परिवारों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए बधाई देते हुए, मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी डिग्रियां केवल शैक्षणिक सफलता से कहीं ज्यादा हैं; वे देश के प्रति योगदान करने की जिम्मेदारी का प्रतीक हैं। उन्होंने मेडल पाने वालों की खास तौर पर तारीफ की और संस्थान में नई एआई पहल की शुरुआत का जश्न मनाया। उन्होंने कहा, "आप यहां से देश के लिए बहुत कुछ करने का सपना लेकर निकल रहे हैं।"
छात्रों की इस तेज-तर्रार यात्रा पर बात करते हुए, मोदी ने प्रबोधन दिवस से लेकर दीक्षांत समारोह तक के उनके सफर को विस्तार से याद किया। उन्होंने छात्रों के मन में मौजूद अलग-अलग तरह की उम्मीदों का भी जिक्र किया- जैसे पहली सैलरी पाना, स्टार्टअप शुरू करना या आगे की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना। उन्होंने कहा, "आपको निश्चित रूप से इस शानदार सफर और जिंदगी में एक बिल्कुल नया अध्याय शुरू करने के उत्साह से बहुत संतुष्टि मिल रही होगी।" तेजी से बदलते भू-राजनीतिक और रणनीतिक वैश्विक परिदृश्य का जिक्र करते हुए, प्रधानमंत्री ने इन बड़े वैश्विक बदलावों के मुख्य कारण के तौर पर तकनीकी प्रगति की तेज रफ्तार को रेखांकित किया। उन्होंने तेजी से बदलते इस दौर को अभूतपूर्व चुनौतियों और नए बड़े अवसरों के मिले-जुले परिदृश्य के तौर पर पेश किया। उन्होंने कहा, "इस तेजी से हो रहे बदलाव के बीच, मेरी बात याद रखना: जो लगातार सीखता रहता है, वही जीतता है।" आईआईटी डिग्री की असली अहमियत को नए सिरे से परिभाषित करते हुए, मोदी ने जोर दिया कि यह योग्यता सिर्फ अच्छे सीजीपीए (क्युमुलेटिव ग्रेड पॉइंट एवरेज) या मोटी सैलरी वाले नियुक्ति प्रस्तावों से कहीं बढ़कर है; बल्कि यह मुश्किल समस्याओं को सुलझाने की बेहतरीन काबिलियत का एक पक्का वैश्विक प्रमाण-पत्र है। उन्होंने कहा, "आपकी डिग्री दुनिया को ये बताती है कि आप कठिन समस्याओं का समाधान करना जानते हैं।"
शैक्षणिक मेहनत और जीवन की चुनौतियों के बीच समानता बताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने युवाओं से कहा कि बड़ी समस्याओं को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर उनका समाधान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तरह जटिल प्रयोगशाला अभ्यासों को चरणों में हल किया जाता है, उसी तरह जीवन की बड़ी चुनौतियों का भी सामना किया जा सकता है। उन्होंने कहा, "अगर जिंदगी में मुश्किलें आती ही हैं, तो बिल्कुल नए मौके भी सामने आएंगे; बस आपको पूरी तरह सतर्क रहना होगा।" प्रधानमंत्री ने कहा कि परिसर का जीवन और परिसर के बाहर का जीवन, इन दोनों में बहुत बड़ा अंतर होता है। आईआईटी की परीक्षा में पाठ्यक्रम होता है, लेकिन जिंदगी की परीक्षा में सबकुछ पाठ्यक्रम से बारह होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि असली सफलता सिर्फ पहले से तय सवालों के जवाब देने में नहीं, बल्कि उन समस्याओं की पहचान करने और उन्हें हल करने में है, जिन्हें समाज ने बिना किसी सवाल-जवाब के स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा, "कई पूर्व छात्रों की सफलता का मूल कारण यह था कि उन्होंने निडर होकर उन अहम सवालों की पहचान की, जिन्हें दुनिया ने सवाल मानना ही छोड़ दिया था।" पिछली पीढ़ियों पर रहे ऐतिहासिक बोझ पर बात करते हुए, मोदी ने याद किया कि कैसे आज़ादी पाने के एकमात्र लक्ष्य ने एक पूरे दौर को परिभाषित किया, जो भारी त्याग और तपस्या से भरा था। उन्होंने मौजूदा पीढ़ी से कहा कि वे अगले तीन दशकों में अपने करियर के रास्ते को सीधे देश के विकास के लक्ष्यों से जोड़कर अपनी एक अलग पहचान बनाएं। उन्होंने कहा, "आपके हर फैसले का आधार यही होना चाहिए कि उससे देश को क्या फायदा होगा और देश की कौन-सी जरूरत पूरी होगी।" आर्थिक, तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्रों में पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनने की सरकार की जबरदस्त कोशिशों का जिक्र करते हुए, मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि युवाओं का सशक्तीकरण ही विकसित भारत की नींव है। उन्होंने प्रशासन के उन रणनीतिक नीतिगत फैसलों की सराहना की, जिनके जरिए पारंपरिक रूप से सीमित क्षेत्रों को लोकतांत्रिक बनाया गया और युवा नवोन्मेषकों के लिए खोला गया। प्रधानमंत्री ने भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र की तेज रफ्तार और सेमीकंडक्टर निर्माण में घरेलू स्तर पर तेजी से हो रही तरक्की का जिक्र करते हुए कहा कि आज कोई युवा पूरे आत्मविश्वास के साथ गर्व से कह रहा है- "मैं अपने परिवार की पहली पीढ़ी हूं, जिसने भारत में चिप बनाई है"। भारत में स्टार्टअप क्रांति को आगे बढ़ाने का श्रेय मौजूदा पीढ़ी को देते हुए, उन्होंने यूनिकॉर्न, डिजिटल पेमेंट और फिनटेक के तेजी से बढ़ते दौर से पैदा हुई जबरदस्त आर्थिक रफ्तार की तारीफ करते हुए कहा कि इसने लाखों लोगों को कारोबार शुरू करने के लिए अभूतपूर्व मंच उपलब्ध कराए हैं। उन्होंने कहा, "इन सभी क्रांतियों ने देश के लाखों युवाओं को पहली बार कुछ बिल्कुल नया करने का एक अद्भुत अवसर दिया है।" भविष्य में तकनीकी दबदबे की सीमाओं को रेखांकित करते हुए, मोदी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा सेंटर, महत्वपूर्ण खनिज, गहरे समुद्र की खोज, क्वांटम कंप्यूटिंग और ऊर्जा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण उभरते क्षेत्रों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "ऐसे कई अत्याधुनिक क्षेत्र आपके जबरदस्त हुनर, आपके साहसी नवोन्मेष और आपके मजबूत नेतृत्व का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।" शैक्षणिक संसाधनों को सभी के लिए सुलभ बनाने की पहलों का जिक्र करते हुए, उन्होंने 'वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन' कार्यक्रम पर प्रकाश डाला। यह कार्यक्रम यह सुनिश्चित करता है कि प्रतिष्ठित वैश्विक शोध पत्रिका बिना किसी अतिरिक्त लागत के सबसे छोटे शहरों में भी उपलब्ध हों। -
शिमला. हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में शनिवार सुबह करीब सवा सात बजे एक निजी बस पलटकर नीचे की सड़क पर जा गिरी, जिससे सात यात्रियों की मौत हो गई और 11 अन्य लोग घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। यह हादसा उस समय हुआ जब बस बैरागढ़ से चंबा जा रही थी। बैरागढ़-तीसा मार्ग पर चालुज मोड़ के पास बस पलट गई। चुराह घाटी का 27 किलोमीटर लंबा यह पहाड़ी मार्ग बेहद संकरा है और कई जगह गहरी खाइयां हैं। यह मार्ग ऊंचाई पर स्थित साच दर्रे की ओर जाने वाले प्रमुख रास्तों में से एक है। राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस हादसे में लोगों के हताहत होने पर दुख व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने 'फेसबुक' एवं 'एक्स' पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि चंबा जिले के तीसा-बैरागढ़ मार्ग पर चालुज मोड़ के पास हुए बस हादसे में सात लोगों के निधन तथा 11 अन्य लोगों के घायल होने का समाचार अत्यंत दुखद है। मुख्यमंत्री ने कहा, ''इस दुःखद हादसे में अपनों को खोने वाले परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। ईश्वर दिवंगत जन की आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिजन को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें।'' उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन को सभी घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराकर उनके उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा, ''मैं सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की ईश्वर से प्रार्थना करता हूं।''
चंबा के पुलिस अधीक्षक विजय सकलानी ने बताया कि हादसे में सात लोगों की मौत हुई है और 11 लोग घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बस में कुल कितने लोग सवार थे। सकलानी ने बताया कि यात्रियों की चीख-पुकार सुनकर स्थानीय लोग मदद के लिए मौके पर पहुंचे और पुलिस को दुर्घटना की सूचना दी। पुलिस ने बताया कि घटनास्थल पर बचाव अभियान जारी है तथा राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), पुलिस, होमगार्ड, अग्निशमन सेवा और राजस्व विभाग के कर्मियों का दल बचाव कार्य में जुटा है। पुलिस ने बताया कि मृतकों की पहचान जगदेव (50), देश राज (35), जहदेही (24), हरदेही (43), नीलम (34), बस चालक रूप सिंह (35) और परिचालक तेज सिंह (39) के रूप में हुई है। सभी चंबा जिले के चुराह क्षेत्र के रहने वाले थे। घायलों में करण सिंह, सुष्मिता, पानो देवी, धानी, धर्मो देवी और विजय कुमार के अलावा पांच नाबालिग-प्रियंका, हर्षा, काव्या, अप्रित और नेहा शामिल हैं। घायल 11 लोगों में से छह को गंभीर चोटें आई हैं और उन्हें चंबा के पंडित जवाहरलाल नेहरू राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल रेफर किया गया है। पुलिस ने बताया कि हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है।
स्थानीय प्रधान मंधी राणा ने भी बताया कि बचाव अभियान जारी है।
सड़क के बीचोंबीच उलटी पड़ी बस के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे हैं, जिनमें स्थानीय लोग मदद के लिए मौके पर पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में मौजूदा मानसून के दौरान 30 जून से सात अगस्त तक सड़क हादसों में 78 लोगों की मौत हो चुकी है। -
बुलढाणा (महाराष्ट्र). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि देश को असल मायने में 'विश्वगुरु' बनाने के लिए वंचित और हाशिए पर रहने वाले लोगों को मुख्यधारा में लाना जरूरी है। महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के खामगांव में पारधी समुदाय के आवासीय विद्यालय में तीन खेल मैदानों का उद्घाटन करने के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जिस समुदाय को आज हम गैर अधिसूचित या 'भटके-विमुक्त' समुदाय कहते हैं, वह कभी ज्ञान देने वाला समुदाय हुआ करता था। उन्होंने कहा कि वे निस्वार्थ भाव से अपना ज्ञान बांटने के लिए बाहर जाते थे, लेकिन समय के साथ वे हाशिए पर चले गए। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शासन के दौरान स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के कारण पूरे पारधी समुदाय को ''अपराधी जनजाति'' घोषित कर दिया गया, जिससे वे विकास की दौड़ में काफी पीछे रह गए। भागवत ने कहा कि भारतीय समाज कभी पूरी तरह संगठित था, लेकिन विदेशी आक्रमणकारियों की गुलामी के कारण उसमें बिखराव आ गया। आरएसएस प्रमुख ने कहा, ''इसके परिणामस्वरूप समाज में वंचित समूहों की संख्या बढ़ गई। इसके बावजूद इन समुदायों ने कभी अधीनता स्वीकार नहीं की और वे लगातार स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते रहे।'' उन्होंने कहा कि संघ कई वर्षों से पारधी समुदाय के विकास के लिए काम कर रहा है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता अंबादास दानवे भी इस कार्यक्रम में मौजूद थे।
-
नयी दिल्ली. केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शनिवार को कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था ''विद्यार्थी-केंद्रित, अनुसंधान आधारित और भविष्य के लिए तैयार'' है तथा देश के युवा अब दुनिया से केवल प्रतिस्पर्धा नहीं कर रहे बल्कि उसका नेतृत्व भी कर रहे हैं। जोशी ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा, ''शिक्षा मंत्री का अतिरिक्त प्रभार संभालने के बाद किसी शिक्षण संस्थान में यह मेरा पहला सार्वजनिक कार्यक्रम है और वह भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ। मैं आप सभी के बीच आकर बहुत खुश हूं और खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं।'' उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने ''भारत के युवाओं की क्षमता पर हमेशा अपार विश्वास जताया है'' और वह उन्हें ''विकसित भारत 2047 का प्रमुख शिल्पकार'' मानते हैं। जोशी ने कहा, ''आज उच्च शिक्षा में 4.5 करोड़ से अधिक विद्यार्थी पंजीकृत हैं। विश्वविद्यालयों की संख्या में 2014 से करीब 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।'' उन्होंने कहा, ''650 से अधिक नए विश्वविद्यालय, 14,000 नए महाविद्यालय, 4,000 से अधिक नए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई), नौ नए भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम), सात नए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) और 13 नए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) स्थापित किए गए हैं।'' जोशी ने कहा कि मेडिकल कॉलेज की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है और मेडिकल की सीटें लगभग तीन गुनी हो गई हैं। उन्होंने कहा कि ''देश के 823 मेडिकल कॉलेज में करीब 1.4 लाख सीट उपलब्ध'' हैं। उन्होंने कहा कि 14,000 से अधिक 'पीएम स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया' (पीएम श्री) विद्यालयों और 10,000 'अटल टिंकरिंग' प्रयोगशालाओं के माध्यम से बच्चों को ''नवोन्मेष, प्रौद्योगिकी और नए विचारों की ताकत'' से अवगत कराया जा रहा है। जोशी ने खेलों के क्षेत्र में सरकार की पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया, विश्वविद्यालय खेल और युवा खेलों जैसे कार्यक्रमों ने गांवों, कस्बों और उभरते शहरों की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया है। उन्होंने कहा, ''इससे आप समझ सकते हैं कि युवाओं और खेलों दोनों को कितना महत्व दिया गया है।''
जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से पहले और बाद में खिलाड़ियों से मुलाकात करते हैं, ''जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है।'' उन्होंने कहा, ''नए भारत का यह आत्मविश्वास हाल में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में एक बार फिर दिखाई दिया।'' जोशी ने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य समेत कुल 39 पदक जीते और पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। उन्होंने कहा, ''एक समय सवाल यह था कि भारत के युवा दुनिया से कैसे प्रतिस्पर्धा करेंगे। आज दुनिया देख रही है कि भारत के युवा उसका नेतृत्व कैसे कर रहे हैं और नारी शक्ति भी निश्चित रूप से पीछे नहीं है।'' जोशी ने शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) विषयों में पंजीकरण कराने वालों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 44 प्रतिशत है, जो दुनिया में सबसे अधिक अनुपातों में से एक है। उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण ने हमारी शिक्षा व्यवस्था को विद्यार्थी-केंद्रित, अनुसंधान आधारित और भविष्य के लिए तैयार बनाया है।'' जोशी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 तथा 'एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स' और 'मल्टीपल एंट्री, मल्टीपल एग्जिट' जैसी पहल विद्यार्थियों को ''काफी लचीलापन'' दे रही हैं और उच्च शिक्षा को वास्तव में विद्यार्थी-केंद्रित बना रही हैं। उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री ने भारत के संस्थानों में नया आत्मविश्वास पैदा किया है कि हमारे परिसर केवल स्नातक ही नहीं, बल्कि नवप्रवर्तक, शोधकर्ता और राष्ट्र निर्माता भी तैयार कर सकते हैं।'' जोशी ने आईआईटी दिल्ली को ''इस बदलाव का जीवंत उदाहरण'' बताते हुए कहा कि संस्थान को वैश्विक स्तर पर मिल रही पहचान न केवल उसकी उत्कृष्टता बल्कि ''दुनिया भर में भारतीय उच्च शिक्षा के बढ़ते कद'' को भी दर्शाती है। उन्होंने कहा, ''भारत की युवा शक्ति की उल्लेखनीय झलक आज यहां प्रधानमंत्री के सामने बैठी है।''
जोशी ने डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से कहा, ''आज आप आईआईटी से केवल डिग्री लेकर नहीं जा रहे हैं, बल्कि एक जिम्मेदारी भी लेकर जा रहे हैं-उद्देश्यपूर्ण नवोन्मेष करने, ईमानदारी के साथ नेतृत्व करने और भारत को विकसित भारत बनाने में योगदान देने की जिम्मेदारी।'' उन्होंने विद्यार्थियों और उनके माता-पिता को बधाई देते हुए कहा, ''उत्कृष्टता के साथ-साथ नैतिकता और मूल्य भी महत्वपूर्ण हैं।'' -
मेरठ/ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कांवड़ यात्रा में शामिल शिवभक्तों का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया और देवाधिदेव महादेव से प्रदेश और देश में सुख, शांति, समृद्धि एवं सौहार्द की कामना की। मेरठ के मोदीपुरम क्षेत्र में दुल्हेड़ा पुलिस चौकी के निकट बनाए गए मंच से योगी आदित्यनाथ ने 'बोल बम' और 'हर-हर महादेव' के जयकारों के बीच कांवड़ियों पर पुष्प वर्षा की। इस अवसर पर उनके साथ रामानंद सागर के धारावाहिक 'रामायण' में भगवान राम की भूमिका निभाने वाले अरुण गोविल, उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री सोमेंद्र तोमर समेत कई प्रमुख लोग मौजूद थे। गोविल, मेरठ से भारतीय जनता पार्टी के सांसद भी हैं। योगी ने अपने संबोधन में कहा, "सभी जनप्रतिनिधियों, सामाजिक और धार्मिक संगठनों का हृदय से धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने पूरी श्रद्धा के साथ कांवड़ियों की सुविधाओं का ध्यान रखा है। सावन में कांवड़ यात्रा का हिस्सा बन रहे सभी शिवभक्तों का अभिनंदन करता हूं और उनकी इस यात्रा के लिए देवाधिदेव महादेव से प्रार्थना करता हूं कि वे उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें।" मुख्यमंत्री ने कहा, "प्रदेश और देश में सुख, शांति, समृद्धि और सौहार्द का माहौल बनाने के लिए देवाधिदेव महादेव की कृपा बनी रहे, इसी भावना के साथ आज मुझे भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने का अवसर मिला है।" उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा अपने समापन की ओर बढ़ रही है। हरिद्वार से गंगाजल लेकर शिवभक्त अपने गंतव्य की ओर बढ़ते हुए विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और लाखों श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल हैं। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि सावन की शिवरात्रि तक गाजियाबाद से लेकर हरिद्वार के बीच चार से साढ़े चार करोड़ श्रद्धालु और शिवभक्त इस कांवड़ यात्रा में गंगाजल लेकर शिवालयों में जलाभिषेक करेंगे।" मुख्यमंत्री ने कहा, "आज मुजफ्फरनगर के शिव चौक पर भारी भीड़ है। अभी मेरठ में मुझे शिवभक्त कांवड़ियों पर पुष्प वर्षा करने का अवसर मिला है। मेरठ के हमारे सभी जनप्रतिनिधि इस अवसर पर मेरे साथ यहां मौजूद हैं।" योगी ने कहा कि मेरठ के प्रसिद्ध बाबा औघड़नाथ मंदिर, गाजियाबाद के बाबा दूधेश्वरनाथ मंदिर और बागपत के पुरा महादेव मंदिर समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और हिमाचल प्रदेश से आने वाले शिवभक्त इस यात्रा का हिस्सा बने हुए हैं। उन्होंने कहा, "पूरी श्रद्धा, उत्साह और उमंग के साथ यात्रा में शामिल होने आए कांवड़ियों का प्रदेश सरकार की ओर से स्वागत और अभिनंदन करता हूं।" मुख्यमंत्री ने कांवड़ियों के राष्ट्र के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि जात-पात, प्रांत और क्षेत्रीयता की सीमाओं से ऊपर उठकर शिवत्व की भावना से एकाकार होने के लिए यह यात्रा उत्साह और उमंग का वातावरण पैदा कर रही है। प्रशासनिक तैयारियों और व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, "प्रशासन ने उच्च स्तर की व्यवस्था की है और समाजसेवी संगठनों ने शिविर लगाए हैं तथा कांवड़ियों को सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। वास्तव में यह भक्ति की पराकाष्ठा है। मैं सभी कांवड़ यात्रियों का स्वागत करता हूं। आज, कल और परसों यानी शिवरात्रि के दिन यहां पुष्प वर्षा होगी और हमने हेलीकॉप्टर की भी व्यवस्था की है.
- श्री विजय पुरम । उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के दो दिवसीय दौरे पर शनिवार को श्री विजय पुरम पहुंचे, जहां वह 'हर घर तिरंगा' अभियान और 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। अधिकारियों ने बताया कि राधाकृष्णन शनिवार सुबह एक विशेष विमान से वीर सावरकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास स्थित नौसैनिक वायु अड्डे 'आईएनएस उत्क्रोश' पर उतरे, जहां वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। उन्होंने बताया कि 'आईएनएस उत्क्रोश' से राधाकृष्णन लोक निवास गए, जहां उन्होंने उपराज्यपाल डीके जोशी के साथ बैठक की। अधिकारियों के मुताबिक, उपराष्ट्रपति शनिवार शाम सेलुलर जेल राष्ट्रीय स्मारक का दौरा देंगे, जहां वह शहीद स्तंभ पर श्रद्धांजलि देंगे। उन्होंने बताया कि सेलुलर जेल राष्ट्रीय स्मारक में राधाकृष्णन स्वतंत्रता ज्योति पर श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे और उस कोठरी में भी जाएंगे, जहां ब्रिटिश शासन के दौरान वीडी सावरकर को कैद रखा गया था। अधिकारियों के अनुसार, सेलुलर जेल राष्ट्रीय स्मारक में उपराष्ट्रपति आजादी के आंदोलन और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान पर आधारित 'लाइट एंड साउंड शो' भी देखेंगे। उन्होंने बताया कि नौ अगस्त की सुबह उपराष्ट्रपति श्री विजय पुरम में 'हर घर तिरंगा अभियान' के तहत फ्लैग पॉइंट पर राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। अधिकारियों ने बताया कि इसके बाद राधाकृष्णन एक सभागार में राज्य स्तरीय 'वंदे मातरम तिरंगा संगीत कार्यक्रम' में शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि रविवार दोपहर उपराष्ट्रपति ऐतिहासिक नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप का दौरा करेंगे और शाम को नयी दिल्ली के लिए रवाना होंगे।
-
नयी दिल्ली. सरकार ने मई में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के कृषि मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन में अल नीनो की संभावित स्थिति के प्रभाव सहित खरीफ मौसम की तैयारियों की समीक्षा की थी। कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में शुक्रवार को यह जानकारी दी। राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन का आयोजन 28 और 29 मई को किया गया था। ठाकुर ने कांग्रेस के प्रमोद तिवारी के प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि सम्मेलन में फसल योजना, बीज और उर्वरक की उपलब्धता, जल प्रबंधन और क्षेत्र विशिष्ट चुनौतियों की समीक्षा की गई। उन्होंने बताया कि राज्यों को महत्वपूर्ण सूचनाओं की समय पर उपलब्धता, कुशल जल प्रबंधन, मौसम की स्थिति की सूक्ष्म निगरानी, किसानों को परामर्श और भारत मौसम विज्ञान विभाग, आईसीएआर तथा राज्य सरकारों के समन्वय से आकस्मिक उपायों के कार्यान्वयन के माध्यम से तैयारियों को सुदृढ़ करने की सलाह दी गई। उनके अनुसार, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के लिए अल नीनो से संबंधित जोखिमों को कम करने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं भी जारी की हैं।
-
नयी दिल्ली. शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद अगले वर्ष होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले शिअद और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के फिर से साथ आने की अटकलें तेज हो गई हैं। शिअद ने कृषि कानूनों के मुद्दे पर छह वर्ष पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का साथ छोड़ दिया था। इस बैठक से परिचित सूत्रों के अनुसार, सुखबीर सिंह बादल ने संसद भवन परिसर स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। हालांकि, बैठक में क्या चर्चा हुई, इसकी तत्काल जानकारी नहीं मिल सकी लेकिन इस मुलाकात के बाद यह कयास लगाए जाने लगे कि शिअद एक बार फिर भाजपा के साथ गठबंधन कर सकता है। शिअद, राजग के सबसे पुराने सहयोगी दलों में से एक था और उसने दो दशक से अधिक समय तक इस गठबंधन का हिस्सा रहने के बाद 2020 में तीन कृषि कानूनों के विरोध में गठबंधन छोड़ दिया था। बाद में मोदी सरकार ने इन तीनों कृषि कानूनों को निरस्त कर दिया था। सुखबीर सिंह बादल की पत्नी और लोकसभा सांसद हरसिमरत कौर बादल भी केंद्र में मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुकी हैं। पंजाब विधानसभा चुनाव अगले वर्ष की शुरुआत में प्रस्तावित हैं।
-
नयी दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को कहा कि देश का हथकरघा क्षेत्र रोजगार के व्यापक अवसर प्रदान करता है और ई-कॉमर्स मंचों के जरिए इसके उत्पादों की वैश्विक बाजारों में पहुंच को और बढ़ाया जा सकता है। मुर्मू ने '12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस' समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि इस क्षेत्र से लगभग 35 लाख लोग जुड़े हुए हैं, जिनमें 25 लाख से अधिक महिलाएं हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि हथकरघा क्षेत्र देश के समावेशी विकास का एक मजबूत आधार बनेगा।
उन्होंने कहा, "हथकरघा क्षेत्र न केवल आजीविका का महत्वपूर्ण स्रोत है, बल्कि यह हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। डिजिटल मंचों और ई-कॉमर्स के माध्यम से भारतीय हथकरघा उत्पादों की वैश्विक पहचान को और मजबूत किया जा सकता है।" मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में विश्वास जताया कि सरकार और अन्य हितधारकों के सहयोग से यह क्षेत्र आने वाले समय में और सशक्त होगा तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा। राष्ट्रपति ने इस अवसर पर 'संत कबीर हथकरघा पुरस्कार' और 'राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार 2025' भी प्रदान किए। इन पुरस्कारों के जरिए उत्कृष्ट बुनकरों और कारीगरों के योगदान को सम्मानित किया जाता है। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने शुक्रवार को लोकसभा को बताया कि इस साल 31 मई तक, आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने के कारण राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने 2,000 से ज़्यादा अस्पतालों को सूची से हटा दिया है और 1,200 अन्य को निलंबित कर दिया है। नड्डा ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि योजना के दिशानिर्देशों के उल्लंघन के लिए 29 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं और 328.49 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। नड्डा ने कहा कि नियमों के उल्लंघन के कारण 2,359 अस्पतालों को सूची से हटाया गया है।
उन्होंने कहा कि इस योजना में धोखाधड़ी के मामले में 'कतई बर्दाश्त नहीं करने की' नीति अपनाई जाती है और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के तहत राष्ट्रीय धोखाधड़ी रोधी इकाई संदिग्ध दावों का पता लगाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग पर आधारित स्वचालित प्रणाली का इस्तेमाल करती है। उन्होंने कहा कि ये स्वचालित प्रणालियां दावा जमा होने के 24 घंटे के भीतर असामान्य दावा पैटर्न की पहचान करती हैं, जिनमें अनधिकृत बिलिंग, दोहरी प्रविष्टि, बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई प्रक्रियाओं और मरीज की पहचान का गलत इस्तेमाल शामिल है। मंत्री ने कहा कि संदिग्ध माने गए दावों की भुगतान से पहले जांच की जाती है और धोखाधड़ी वाले दावों का भुगतान नहीं किया जाता है, जिससे 31 जुलाई, 2026 तक 676.14 करोड़ रुपये की बचत हुई है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों को निलंबित करने और सूची से हटाने के अलावा, योजना के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों के खिलाफ जुर्माना लगाने और प्राथमिकी दर्ज करने जैसी कार्रवाई भी की जाती हैं। आयुष्मान भारत योजना देश की आबादी के निचले 40 प्रतिशत हिस्से को द्वितीय और तृतीय स्तर के अस्पतालों में भर्ती कराने के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा कवरेज देती है। यह योजना सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू की जा रही है, और कई राज्य इसे अपनी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के साथ जोड़ रहे हैं। नड्डा ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, पात्र लाभार्थियों के लिए 3.75 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए गए, अस्पताल में भर्ती होने के 2.74 करोड़ मामलों को मंज़ूरी दी गई और योजना के तहत 5,074 अस्पतालों को सूची में शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस योजना को लागू करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को साल के दौरान 8,438.27 करोड़ रुपये जारी किए। उन्होंने यह भी बताया कि धन जारी करना मांग पर आधारित होता है और यह राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा प्रस्तुत उपयोग प्रमाणपत्र और जरूरतों पर निर्भर करता है। एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए नड्डा ने कहा कि 31 जुलाई, 2026 तक पूरे देश में 95.99 करोड़ आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते (आभा) बनाए गए थे, जिनमें से 5.25 करोड़ खाते गुजरात में बनाए गए। उन्होंने कहा कि आभा, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का एक अहम घटक है। यह 14 अंकों की एक खास संख्या है, जो नागरिकों को स्वास्थ्य प्रणाली में अपने डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड को सुरक्षित रूप से रखने और उनका प्रबंधन करने की सुविधा देता है। मंत्री ने सदन को यह भी बताया कि आभा बनाने से जुड़े आंकड़े संसदीय क्षेत्र के हिसाब से नहीं रखे जाते। -
नई दिल्ली। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 शुक्रवार को लोकसभा में पारित हो गया है। इस विधेयक का उद्देश्य भुगतान में विलंब की समस्या को समाप्त करना और विवाद निपटारे की प्रक्रिया को आसान बनाना है। इसमें यह प्रावधान किया गया है कि सभी केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों को लघु एवं मध्यम उद्यमों से की गई खरीद के सभी बिलों का भुगतान व्यापार प्राप्य छूट प्रणाली के माध्यम से करना अनिवार्य होगा।
इस विधेयक को राज्यसभा से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है।प्रस्तावित विधेयक में कहा गया कि अगर विवाद के मामले में मध्यस्थता विफल हो जाती है, तो मध्यस्थता खत्म होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर आर्बिट्रेशन के लिए रेफरेंस दिया जाना चाहिए। साथ ही, दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के 90 दिन में फैसला सुनाना जरूरी है। इसमें ये भी है कि अगर कोई मामला 6 महीने से ज्यादा लटका है तो आपूर्तिकर्ता (एमएसएमई) को तय रकम का कम से कम 50 प्रतिशत भुगतान तुरंत करना पड़ेगा।इससे पहले गुरुवार को लोकसभा ने विपक्ष के विरोध के बीच ‘कराधान और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026’ को ध्वनि मत से पारित कर दिया। इस कानून का मकसद ‘भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007, आयकर अधिनियम, 2025 और वित्त अधिनियम, 2026 में’ में संशोधन करना है।इस बिल में टैक्स से जुड़े ऐसे बदलावों का प्रस्ताव है जिनका मकसद निवेश को बढ़ावा देना, मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट करना और टैक्स से जुड़ी निश्चितता प्रदान करना है। यह विधेयक ‘आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026’ की जगह लेगा।इसके अतिरिक्त, इस हफ्ते की शुरुआत में सरकार ने आधिकारिक बयान में कहा था कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) की सस्टेनेबल जीरो डिफेक्ट जीरो इफेक्ट (जेडईडी) सर्टिफिकेशन योजना के तहत अब तक करीब 9.49 लाख एमएसएमई पंजीकृत हो चुके हैं। केंद्र सरकार महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं के स्वामित्व वाले एमएसएमई को जेडईडी सर्टिफिकेशन पर 100 प्रतिशत सब्सिडी भी दे रही है। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने बृहस्पतिवार को कहा कि आयुर्वेद आज एक बड़े बदलाव के दौर में है, जहां भारत के समृद्ध पारंपरिक ज्ञान के साथ-साथ वैज्ञानिक प्रमाण, नवाचार और वैश्विक स्तर पर पहुंच को भी शामिल करना जरूरी है। उन्होंने यह बात दिल्ली में केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) की शासी निकाय की 27वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। जाधव ने इस बात पर जोर दिया कि सीसीआरएएस ने साक्ष्य-आधारित अनुसंधान में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने संस्थान से आह्वान किया कि वह आयुर्वेद को वैज्ञानिक रूप से और मजबूत, वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य और सुलभ बनाने की अपनी कोशिशों को और तेज करे। जाधव ने कहा कि आयुर्वेद के विकास के अगले चरण में प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और बाजार से जुड़ने पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि युवा शोधकर्ताओं और स्टार्टअप को आयुर्वेद को प्रयोगशाला से बाजार तक ले जाना चाहिए।
मंत्री ने नवाचार को बढ़ावा देने और भारत को वैश्विक स्वास्थ्य सेवा केंद्र के तौर पर स्थापित करने के लिए 'युवा शोध निधि', 'आयुर्वेद स्टार्टअप उत्प्रेरक' और 'वैश्विक आयुर्वेद चुनौती' जैसी पहलों पर ध्यान देने का सुझाव भी दिया। उन्होंने शासी निकाय से आग्रह किया कि वे आयुर्वेद को एक आधुनिक, साक्ष्य-आधारित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में बदलने के लिए मिलकर काम करें। बैठक के दौरान, जाधव ने ऑनलाइन माध्यम से सीसीआरएएस-क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (आरएआरआई), पुणे में 'पशु गृह' और आरएआरआई, रानीखेत में कर्मचारी आवास परिसर का उद्घाटन किया। साथ ही आरएआरआई, नागपुर में 50 बिस्तरों वाले नए आयुर्वेद अस्पताल का भूमि पूजन भी किया। -
नयी दिल्ली. सरकार ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि पेंशनभोगियों की शिकायतों की वास्तविक समय पर निगरानी को आसान बनाने वाली एक ऑनलाइन प्रणाली के परिणामस्वरूप औसतन करीब 21 दिनों में निवारण के साथ जवाबदेही में सुधार हुआ है। कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने एक सवाल के लिखित जवाब में कहा कि केंद्रीय पेंशन शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली ने एक ऑनलाइन मंच प्रदान कर केंद्र सरकार के पेंशनभोगियों के लिए शिकायत निवारण की पारदर्शिता, जवाबदेही और समय पर निवारण में उल्लेखनीय वृद्धि की है। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली के तहत मंत्रालयों और विभागों द्वारा वास्तविक समय पर निगरानी, समयबद्ध निवारण और निरंतर निरीक्षण संभव होती है, जिसके परिणामस्वरूप निवारण में कम देरी होती है और इसमें औसतन करीब 21 दिन का समय लगता है। सिंह ने डिजिटल पेंशन सुधारों का विवरण देते हुए कहा कि डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र को पेंशन वितरण अधिकारियों के डेटाबेस में अपडेट किया जाता है, जिससे पेंशन की निर्बाध निरंतरता सुनिश्चित होती है। उन्होंने कहा, 'जीवन प्रमाण' से डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा करने और पेंशन संवितरण प्राधिकरण से रिकॉर्ड अपडेट करने पर पेंशनभोगियों के मोबाइल फोन पर एसएमएस संदेश स्वचालित रूप से प्राप्त होते हैं, जिससे बेहतर पारदर्शिता और पेंशनभोगियों को समय पर लाभ सुनिश्चित होता है।
-
नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) के उत्पादन में तेजी लाने के लिए बृहस्पतिवार को 23,731 करोड़ रुपये की एक राष्ट्रीय एकीकृत योजना को मंजूरी दी। यह योजना आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने और स्वच्छ ऊर्जा बदलाव को मजबूत करने के लिए कृषि एवं शहरी कचरे के उपयोग पर आधारित है। सरकार ने एक बयान में कहा कि 'गोबरधन' (जैविक संसाधनों से धन सृजन) योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 के बीच लागू की जाएगी। इसका लक्ष्य सुनिश्चित खरीद, विनियमित मूल्य, पूंजी सब्सिडी, पाइपलाइन अवसंरचना और वित्त तक आसान पहुंच के जरिये घरेलू सीबीजी उत्पादन को लगभग दस गुना बढ़ाना है। कुल 23,731 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली इस योजना के तहत कृषि अवशेष, गोबर, चीनी उद्योग का कचरा (गन्ने की खोई), शहरी जैविक कचरा एवं अन्य बायोमास का उपयोग कर कम्प्रेस्ड बायोगैस तैयार की जाएगी। इस गैस को वाहनों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी में मिलाया जा सकेगा। यह योजना मौजूदा पहल, जैसे 'सस्टेनेबल अल्टरनेटिव टुवर्ड्स अफोर्डेबल ट्रांसपोर्टेशन' (सतत) कार्यक्रम पर आधारित है, जिसके तहत 200 से अधिक सीबीजी संयंत्र पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं। नए ढांचे के तहत शहरी गैस वितरण कंपनियां सीएनजी और घरों को आपूर्ति होने वाली पाइप वाली प्राकृतिक गैस (पीएनजी) में सीबीजी की अनिवार्य मिलावट के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सीबीजी खरीदेंगी। वित्त वर्ष 2026-27 में तीन प्रतिशत, 2027-28 में चार प्रतिशत और 2028-29 से पांच प्रतिशत मिलावट का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने उत्पादकों को दीर्घकालिक राजस्व सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं के लिए कीमतों को किफायती बनाए रखने के उद्देश्य से सीबीजी के लिए 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू का विनियमित मूल्य भी तय किया है। गोबरधन योजना के तहत पात्र नई परियोजनाओं को स्थापित क्षमता के प्रति टन प्रतिदिन पर अधिकतम दो करोड़ रुपये तक की पूंजी सहायता मिलेगी, जबकि पुरानी विस्तार परियोजनाओं को भी समर्थन दिया जाएगा। इसके साथ, सीबीजी संयंत्रों को मुख्य पाइपलाइन और शहरी गैस नेटवर्क से जोड़ने के लिए अवसंरचना वित्तपोषण, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों के लिए ऋण गारंटी व्यवस्था और जैविक कच्चे माल के एकत्रीकरण, प्रौद्योगिकी अपनाने और जिला-स्तरीय परियोजनाओं के विकास के लिए एक विशेष कोष का प्रावधान किया गया है। बयान के मुताबिक, इस कार्यक्रम से निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा, किसानों और ग्रामीण उद्यमियों की आय के नए अवसर पैदा होंगे, कचरा प्रबंधन में सुधार होगा, जैविक खाद का उत्पादन बढ़ेगा और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आएगी। भारत अपनी ऊर्जा बदलाव रणनीति के तहत प्राकृतिक गैस के उपयोग का विस्तार कर रहा है। इसके साथ ही कम्प्रेस्ड बायोगैस जैसे नवीकरणीय गैसीय ईंधन के घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर आयातित एलएनजी पर निर्भरता कम करने का प्रयास कर रहा है।
-
मुंबई. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने बृहस्पतिवार को कहा कि असली नेतृत्व का मतलब भाषण देना, चुनाव जीतना या लोगों को उपदेश देना नहीं है, बल्कि पर्दे के पीछे रहकर काम करना और सफलता एवं प्रसिद्धि को साझा करना है। एक सच्चे नेता के गुणों का वर्णन करते हुए, भागवत ने एक श्लोक का उल्लेख किया और कहा कि एक नेता के पास ज्ञान होना चाहिए, उसे दूसरों के गुणों की सराहना करनी चाहिए, सफलता, प्रसिद्धि और भौतिक लाभ सभी के साथ साझा करने चाहिए तथा संघर्ष की स्थिति में एक योद्धा की तरह व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने यहां एक कार्यक्रम में जेन-जी और जेन-अल्फा आयुवर्ग के विद्यार्थियों से संवाद करते हुए ये टिप्पणियां कीं। भागवत ने कहा, ''असल नेता वे होते हैं जो पीछे से नेतृत्व करते हैं। अंदर से बदलाव लाते हैं। उन्होंने कहा कि नेतृत्व को लोगों के सामने खड़े होने, भाषण देने या चुनाव जीतने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। भागवत ने कहा, ''मैं खुद को नेता नहीं मानता। मैं खुद को एक कार्यकर्ता मानता हूं। उन्होंने कहा कि नेतृत्व का मकसद लोगों को 'प्रकाश' की ओर ले जाना है। भागवत ने कहा, नेतृत्व का मकसद नेता तैयार करना है। इसका मकसद खुद नेता बने रहना नहीं है। मेरे नेतृत्व से नेता बनने चाहिए।
-
मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक ने बृहस्पतिवार को कहा कि बैंक व्यक्तिगत, वाहन या आवास ऋण नहीं लौटाने वालों से कर्ज की वसूली के लिए उनके मोबाइल फोन, टैबलेट या लैपटॉप को बंद या निष्क्रिय नहीं कर सकते हैं। हालांकि, यदि संबंधित उपकरण की खरीद के लिए उसी बैंक ने कर्ज दिया है, तो यह कदम उठाया जा सकता है। आरबीआई ने कहा कि जिन मामलों में उपकरण की कार्यक्षमता सीमित या निष्क्रिय करने की अनुमति है, उनमें भी बैंक को शुरुआत से ही उपकरण बंद करने के बजाय चरणबद्ध तरीका अपनाना होगा। केंद्रीय बैंक ने कर्ज वसूली और 'रिकवरी' एजेंसियों की नियुक्ति से जुड़े आचरण संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उधारकर्ताओं ने सोशल मीडिया के जरिये उत्पीड़न और अभद्र भाषा के इस्तेमाल जैसी शिकायतें की थीं। उसके बाद यह कदम उठाया गया है। आरबीआई के परिपत्र के अनुसार, ये नियम एक जनवरी, 2027 से प्रभावी होंगे।
केंद्रीय बैंक ने कहा, ''कोई भी बैंक ऐसी प्रौद्योगिकी आधारित व्यवस्था का इस्तेमाल नहीं करेगा, जो ऋण वसूली के साधन के रूप में उधारकर्ता के मोबाइल फोन, टैबलेट या लैपटॉप जैसी मोबाइल उपकरण की किसी भी कार्यक्षमता को सीमित या निष्क्रिय करे। अपवाद केवल उन मामलों में होगा, जहां संबंधित उपकरण की खरीद के लिए बैंक ने ही ऋण उपलब्ध कराया हो।'' केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि यदि मोबाइल उपकरण की खरीद बैंक से कर्ज लेकर की गई है, तो बैंक उसकी कार्यक्षमता सीमित या निष्क्रिय करने का विकल्प अपना सकता है। हालांकि, ऐसे मामलों में भी बैंक को उपकरण को तुरंत बंद करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई करनी होगी। आरबीआई ने यह भी कहा कि बैंक आवश्यक सुविधाओं को किसी भी स्थिति में बंद या सीमित नहीं कर सकेंगे। इनमें 'इनकमिंग कॉल', एसएमएस और आपातकालीन एसओएस सुविधा शामिल हैं। इससे पहले, मई में आरबीआई ने बैंक और एनबीएफसी समेत उसके दायरे में आने वाले वित्तीय संस्थानों द्वारा ऋण वसूली और रिकवरी एजेंसियों की नियुक्ति से संबंधित आचरण' पर मसौदा दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिस पर विभिन्न पक्षों से सुझाव प्राप्त हुए थे। केंद्रीय बैंक ने कहा कि सुझावों में यह सुनिश्चित करने की बात कही गई थी कि बैंक और एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी) केवल सुरक्षित, मानकों के अनुरूप और परीक्षण की गई 'डिवाइस-लॉकिंग' तकनीक का ही उपयोग करें तथा बिना लाइसेंस या गैर-भरोसेमंद सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल को रोका जाए। इन सुझावों को स्वीकार करते हुए आरबीआई ने कहा कि तकनीक आधारित वसूली प्रणाली लागू करने वाली वित्तीय संस्थाएं और उससे जुड़ी तीसरे पक्ष की सेवा प्रदाता कंपनी को संबंधित डिवाइस के मूल उपकरण विनिर्माता या 'ऑपरेटिंग सिस्टम' मंच से इस तकनीक का प्रमाण पत्र प्राप्त करना होगा। आरबीआई ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है कि किसी भी उधारकर्ता या गारंटर की जानकारी केवल उतनी ही सीमा तक अपने कर्मचारियों या रिकवरी एजेंसियों के साथ साझा की जाए, जितनी ऋण वसूली से जुड़े दायित्वों के निर्वहन के लिए आवश्यक हो। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बृहस्पतिवार को इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फोन किया और दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रमों पर बातचीत की। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने भारत-इजराइल विशेष रणनीतिक साझेदारी में हो रही लगातार प्रगति की समीक्षा की तथा दोनों देशों के पारस्परिक लाभ के लिए विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और प्रगाढ़ करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। बाद में, मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का फोन आया। हमने भारत-इजराइल विशेष रणनीतिक साझेदारी के तहत विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की, जो लगातार और सुदृढ़ हो रही है।'' उन्होंने कहा, ''हमने पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर भी चर्चा की।''
पीएमओ के बयान के अनुसार, ''प्रधानमंत्री नेतन्याहू और प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में हाल में हुए घटनाक्रमों पर बातचीत की। दोनों नेता संपर्क में बने रहने पर सहमत हुए।'' पश्चिम एशिया में संघर्ष बिना किसी स्थायी समाधान के पांच महीने से अधिक समय से जारी है।
ईरान ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह ओमान के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य पर एक समझौते का मसौदा तैयार करने के अंतिम चरण में है, जबकि लेबनान में इजराइल के दो सैनिक मारे गए हैं। यह जलडमरूमध्य वैश्विक पोत परिवहन और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। फरवरी में ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों से शुरू हुए संघर्ष से पहले, दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस फारस की खाड़ी के मुहाने पर स्थित इस जलमार्ग से होकर गुजरता था। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को गोबरधन योजना को मंजूरी दिए जाने और असम में गुवाहाटी-तेजपुर के बीच चार लेन वाले राजमार्ग के निर्माण को स्वीकृति देने के केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से निर्बाध संपर्क व्यवस्था मजबूत होगी तथा निवेश और नवोन्मेष के लिए मजबूत एवं भरोसेमंद माहौल तैयार होगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 23,731 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय गोबरधन योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य कृषि और शहरी अपशिष्ट का उपयोग कर कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) के उत्पादन में तेजी लाना, आयातित जीवाश्म ईंधन (कच्चा तेल, गैस) पर निर्भरता कम करना और देश में स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति देना है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''स्वच्छ ऊर्जा, ग्रामीण समृद्धि और आत्मनिर्भर भारत के हमारे सामूहिक सपने को साकार करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। मंत्रिमंडल ने गोबरधन योजना को मंजूरी दी है, जिससे कम्प्रेस्ड बायोगैस को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। इसका लक्ष्य देश में सीबीजी उत्पादन को लगभग दस गुना बढ़ाना है। यह योजना निवेश और नवोन्मेष के लिए मजबूत और भरोसेमंद परिवेश तैयार करेगी।'' उन्होंने कहा कि इस योजना से किसानों, सहकारी समितियों, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई), महिला उद्यमियों और ग्रामीण उद्यमों को लाभ मिलेगा। साथ ही यह ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने और वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने में भी मदद करेगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने असम में राष्ट्रीय राजमार्ग-15 पर 135.87 किलोमीटर लंबे चार लेन के 'नियंत्रित प्रवेश' वाले गुवाहाटी-तेजपुर गलियारे को भी मंजूरी दी है। इस परियोजना पर 8,970.20 करोड़ रुपये की लागत आएगी। प्रधानमंत्री ने कहा, ''असम में संपर्क व्यवस्था और विकास को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय राजमार्ग-15 पर चार लेन वाले नियंत्रित प्रवेश गुवाहाटी-तेजपुर कॉरिडोर को मंजूरी दी है। इस परियोजना से यात्रा का समय कम होगा, सड़क सुरक्षा बेहतर होगी और विभिन्न स्थानों पर प्रमुख बाइपास बनने से यातायात जाम की समस्या कम होगी।'' उन्होंने कहा कि इस परियोजना में तेजपुर में आपातकालीन विमान उतरने की सुविधा के साथ पुल, फ्लाईओवर, अंडरपास और सर्विस रोड का भी निर्माण किया जाएगा। यह कॉरिडोर असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच निर्बाध संपर्क को और मजबूत करेगा।
-
मुंबई. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि एलजीबीटीक्यूआईए समुदाय समाज का एक अहम हिस्सा है, लेकिन अभी शादी की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे ''अनचाहे दुष्प्रभाव'' हो सकते हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि समलैंगिक जोड़ों के लिए एक अलग कानूनी ढांचा हो सकता है।
मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान समलैंगिक विवाह पर आरएसएस के विचारों के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए भागवत ने कहा, ''कानून समाज को तय नहीं करता, समाज कानूनों को तय करता है, और समाज को पहले बदलाव के लिए तैयार होना चाहिए।'' भागवत 'इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशन्स' (आईआईएमयूएन) के 15वें वर्षगांठ कार्यक्रम में 'जेन-जी' और 'जेन अल्फा' के लगभग 2,000 सदस्यों को संबोधित कर रहे थे। भागवत ने कहा कि संघ का हमेशा से यह मानना रहा है कि एलजीबीटीक्यूआईए लोग ''उस समाज का हिस्सा हैं जिससे हम जुड़े हैं, और हमारे समाज में उन्हें साथ लेकर चलने की परंपरा रही है।'' भागवत ने कहा कि भारतीय परंपरा में, शादी परिवार बनाने के लिए बनाई गई एक संस्था है, जो समाज की बुनियादी इकाई के तौर पर काम करती है और आने वाली पीढ़ियों का पालन-पोषण करती है। उन्होंने कहा, ''हमारी पारंपरिक विवाह व्यवस्था सिर्फ दो लोगों के साथ रहने की सुविधा नहीं है। यह एक ऐसी संस्था है जिसके जरिये परिवार बनता है, और परिवार समाज की वह इकाई है, जहां अगली पीढ़ी को तैयार किया जाता है।'' संघ प्रमुख ने कहा, ''हमें पहले समाज को तैयार करना होगा, क्योंकि कानून समाज को तय नहीं करता, समाज कानूनों को तय करता है। इस चरण में, अगर हम मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव करते हैं, तो इसके अनचाहे दुष्प्रभाव हो सकते हैं।'' भागवत ने सुझाव दिया कि समलैंगिक जोड़ों के लिए एक अलग कानूनी ढांचे पर विचार किया जा सकता है। एलजीबीटीक्यूआईए, एक संक्षिप्त शब्द है, जो विभिन्न लैंगिक पहचान और यौन रुझानों वाले लोगों के समूह को दर्शाता है। -
मुंबई/ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने बृहस्पतिवार को कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन संवाद का एक वैध तरीका है, लेकिन इसका मकसद विभाजन पैदा करने के बजाय आम सहमति बनाना होना चाहिए। भागवत ने मुंबई में 'इंडियाज़ इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशन्स' (आईआईएमयूएन) के 15वें वर्षगांठ कार्यक्रम में में 'जेन-जी' और 'जेन अल्फा' के लगभग 2,000 सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा, ''विरोध प्रदर्शन भी बातचीत का एक तरीका है। लोकतंत्र में, विरोध प्रदर्शन आम सहमति बनाने का एक जरिया है। अलग-अलग विचार एक साथ आते हैं और चर्चा के बाद आम सहमति बनती । उन्होंने कहा, ''अगर विभिन्न कारणों से बातचीत के जरिए चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया जाता, तो लोग आंदोलन की ओर जा सकते हैं। लेकिन इन सबका मकसद आम सहमति बनाना है, न कि विभाजन पैदा करना। जेन-जी की शिकायतें जायज़ हैं और मुझे उनकी ईमानदारी पर भरोसा है।'' भागवत के इस संवाद को आरएसएस की ओर से 'जेन-जी' और 'जेन अल्फा' तक पहुंचने की सबसे अहम कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। यह कोशिश 'कॉकरोच जनता पार्टी' (कॉजपा) के उस विरोध-प्रदर्शन के बाद हो रही है, जो नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर हुआ था तथा उसके फलस्वरूप केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफ़ा देना पड़ा था। भागवत ने कहा कि भारत की शिक्षा प्रणाली को लेकर जताई जा रही चिंताएं जायज हैं। उन्होंने कहा कि संवाद हमेशा पहला कदम होना चाहिए।
भागवत ने कहा, ''बातचीत होनी चाहिए। अगर बातचीत से काम न बने तो आगे क्या किया जाए, इस पर बाद में विचार किया जा सकता है।'' सरसंघचालक ने कहा कि जेन-जी अपनापन और सम्मान के साथ-साथ 'तार्किक जवाब' भी चाहता है, जबकि पिछली पीढ़ियां बिना सवाल किए बड़ों की बात मान लेती थीं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर पाबंदी लगाना इसके नुकसानदेह असर का समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज को आत्म-अनुशासन विकसित करना चाहिए और ऑनलाइन किसी भी बात पर विश्वास करने से पहले विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए। भागवत ने कहा कि जब तक लोगों का नज़रिया नहीं बदलेगा, तब तक सिर्फ़ नियम-कानून काम नहीं आएंगे।
उन्होंने कहा, ''नियम और अनुशासन जरूरी हैं, लेकिन वे तभी सफल होते हैं जब सोच बदलती है। कई कानून बनाए गए हैं। असल में जो बात मायने रखती है वह है लोगों की सोच में बदलाव।'' प्रौद्योगिकी के दुरुपयोग के बारे में चेतावनी देते हुए सरसंघचालक ने कहा कि लोगों को बिना जांच-पड़ताल के सोशल मीडिया पर मौजूद सामग्री पर भरोसा नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, ''आज प्रौद्योगिकी हमारे चेहरे और आवाज का इस्तेमाल करके नकली वीडियो बना सकती है। यह पता होने पर लोगों को कभी भी सोशल मीडिया पर किसी भी चीज़ पर तब तक विश्वास नहीं करना चाहिए जब तक कि वे विश्वसनीय स्रोतों से उसकी पुष्टि न कर लें।'' भागवत ने यह भी कहा कि 'सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स' की अपने 'फॉलोवर्स' के प्रति ज़िम्मेदारी होती है। उन्होंने कहा, ''अगर मैं सोशल मीडिया पर कोई मशहूर हस्ती हूं और 10 लाख लोग मुझे फ़ॉलो करते हैं, तो यह मेरी ज़िम्मेदारी है कि मैं यह पक्का करूं कि मुझे फ़ॉलो करने की वजह से वे किसी मुसीबत में न पड़ें। इतनी समझदारी जरूरी है।'' उन्होंने स्व-नियमन का आह्वान करते हुए कहा कि पुरानी पीढ़ी को युवाओं की मदद करनी चाहिए ताकि वे सोशल मीडिया का ज़िम्मेदारी से इस्तेमाल करने की समझ विकसित कर सकें। भागवत ने कहा, ''सोशल मीडिया के इस्तेमाल में हमें खुद से अनुशासन बनाए रखने की ज़रूरत है। एक बार जब यह अनुशासन आ जाएगा, तो नियम प्रभावी ढंग से काम करेंगे।'' इस सवाल पर कि क्या भारत को बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी लगा देनी चाहिए, जैसा कि कुछ अन्य देशों ने किया है, भागवत ने कहा कि पाबंदी इसका समाधान नहीं है। उन्होंने कहा, ''अगर आप किसी चीज़ पर पाबंदी लगाते हैं, तो वह बस ब्लैक मार्केट में चली जाती है तथा और भी ज़्यादा फैल जाती है। पूरे समाज को मिलकर इस चुनौती का सामना करना होगा। तभी सरकार की कोशिशें सफल होंगी।'' भागवत ने यह भी कहा कि वह शिक्षा पर खर्च को जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के छह प्रतिशत तक बढ़ाने की मांग का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा, ''शिक्षा कोई वाणिज्यिक कारोबार नहीं है। इसे इस तरह से व्यवस्थित किया जाना चाहिए कि यह सभी को सुलभ हो।'' सरसंघचालक ने कहा कि शिक्षा की स्थिति को बेहतर बनाने में समाज को भी योगदान देना चाहिए। भागवत ने कहा कि रोज़गार का मतलब सिर्फ़ नौकरी ही नहीं, बल्कि उद्यमिता भी है। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वर्ष 2025 में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन और जापान समेत 23 देशों की यात्राओं पर 180 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए। विदेश मंत्रालय की ओर से बृहस्पतिवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं को लेकर देशवार और वर्षवार आंकड़े साझा किए गए। इसके अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर करीब 74.58 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसमें छह से 11 जुलाई तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा भी शामिल है। आप के संजय सिंह और माकपा के वी. शिवदासन ने विदेश मंत्रालय से 2021 से अब तक प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं का देशवार विवरण और इन यात्राओं पर हुए खर्च का वर्षवार एवं यात्रा-वार ब्योरा मांगा था। विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा ने अपने जवाब में प्रधानमंत्री द्वारा 2021 से की गई विदेश यात्राओं और प्रत्येक यात्रा पर हुए कुल खर्च का वर्षवार तथा यात्रा-वार विवरण दिया। इसके अनुसार, प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा (2011) पर 10,74,27,363 रुपये, रूस यात्रा (2013) पर 9,95,76,890 रुपये, फ्रांस यात्रा (2011) पर 8,33,49,463 रुपये और जर्मनी यात्रा (2013) पर 6,02,23,484 रुपये खर्च हुए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये आंकड़े महंगाई या मुद्रा विनिमय दर में बदलाव को समायोजित किए बिना वास्तविक खर्च को दर्शाते हैं। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री की विभिन्न देशों की यात्राओं पर करीब 187 करोड़ रुपये खर्च हुए। इनमें से फ्रांस यात्रा पर 25,59,82,902 रुपये, अमेरिका यात्रा पर 16,54,84,302 रुपये, सऊदी अरब यात्रा पर 15,54,03,792.47 रुपये, ब्राजील यात्रा पर 17,72,22,144 रुपये, चीन यात्रा पर 10,59,90,561 रुपये और ब्रिटेन यात्रा पर 9,91,55,061.39 रुपये खर्च हुए। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने 2025 में मॉरीशस, थाईलैंड, श्रीलंका, साइप्रस, कनाडा, क्रोएशिया, घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, अर्जेंटीना, नामीबिया, मालदीव, जापान, भूटान, दक्षिण अफ्रीका, जॉर्डन, ओमान और इथियोपिया की भी यात्रा की। सरकार ने जुलाई 2025 में राज्यसभा में एक अन्य लिखित जवाब में बताया था कि 2021 से 2024 तक प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर कुल खर्च करीब 295 करोड़ रुपये रहा। आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री की वर्ष 2024 में रूस, यूक्रेन, अमेरिका और ब्राजील समेत 16 देशों की यात्राओं पर करीब 109 करोड़ रुपये, वर्ष 2023 में करीब 93 करोड़ रुपये, वर्ष 2022 में 55.82 करोड़ रुपये और वर्ष 2021 में करीब 36 करोड़ रुपये खर्च हुए। वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री ने बांग्लादेश, अमेरिका, इटली और ब्रिटेन की यात्रा की थी। इन यात्राओं पर क्रमश: 1,00,71,288 रुपये, 19,63,27,806 रुपये, 6,90,49,376 रुपये और 8,57,41,408 रुपये खर्च हुए थे। विदेश मंत्रालय से इन यात्राओं के दौरान हुए द्विपक्षीय समझौतों और समझौता ज्ञापनों (एमओयू), घोषित निवेश प्रतिबद्धताओं तथा इनके परिणामस्वरूप भारत में आए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का देशवार विवरण भी मांगा गया था। मार्गेरिटा ने कहा, ''प्रधानमंत्री की उच्चस्तरीय विदेश यात्राएं अन्य देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने और द्विपक्षीय, क्षेत्रीय तथा वैश्विक स्तर पर भारत की भागीदारी को बढ़ावा देने का स्थापित माध्यम हैं। इन यात्राओं के दौरान हुए समझौते और सहमतियां प्रौद्योगिकी, नवाचार, व्यापार एवं निवेश, रक्षा, ऊर्जा सहयोग और मजबूत आपूर्ति शृंखलाओं समेत कई क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करने में मदद करती हैं।'' उन्होंने 35 पृष्ठों के जवाब में इन यात्राओं के दौरान हुए एमओयू का देशवार विवरण साझा करते हुए बताया कि अप्रैल 2021 से दिसंबर 2025 तक भारत में कुल 381.8 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया। सरकार द्वारा साझा सूची के अनुसार, जुलाई 2021 से प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं के दौरान कुल 316 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
-
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष नितिन नवीन और पार्टी में हाल में शामिल हुए आम आदमी पार्टी के कुछ पूर्व नेताओं समेत 37 पार्टी सांसदों के साथ सुबह के नाश्ते पर बैठक की और इस बात पर जोर दिया कि संसद में बिना किसी अवरोध के सुचारू तरीके से कामकाज होना चाहिए। सूत्रों ने कहा कि मोदी ने सार्वजनिक जीवन के अपने अनुभव साझा किये और इस बारे में मार्गदर्शन किया कि सांसदों को संसद को कितनी गंभीरता से लेना चाहिए। सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री ने सांसदों से यह भी कहा कि वे रोजाना कम से कम एक या दो घंटे संसद के पुस्तकालय में बिताएं। इसके अलावा, उन्होंने सांसदों को युवाओं से जुड़ने और अपने संसदीय क्षेत्रों में युवाओं व खेल गतिविधियों पर ध्यान देते हुए सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीलैड्स) को सक्रिय रूप से लागू करने के लिए प्रोत्साहित किया। बैठक में नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ और विनोद तावडे के साथ ही पूर्व आप नेता स्वाति मालीवाल, राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक और विक्रमजीत सिंह साहनी भी शामिल हुए। प्रधानमंत्री मोदी पिछले कई वर्षों से संसद सत्र के दौरान नाश्ते पर सांसदों से मिलते रहे हैं। ऐसी बैठकों में सांसदों को प्रधानमंत्री से सीधे संवाद करने का अवसर मिलता है। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत 20 जुलाई को हुई थी और दोनों सदनों में तब से राम मंदिर चढ़ावा चोरी और नीट प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई समेत विभिन्न मुद्दों पर गतिरोध बना हुआ है।
-
नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर बुधवार को तीखा हमला करते हुए उन्हें ''अपरिपक्व'' और ''अंशकालिक'' नेता प्रतिपक्ष बताया तथा आरोप लगाया कि वह संसद की कार्यवाही में बाधा डाल रहे हैं क्योंकि वह नरेन्द्र मोदी सरकार के कामकाज की तुलना पूर्ववर्ती कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार से होने से डरते हैं। सत्तारूढ़ दल ने कांग्रेस नेता पर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ ''निराधार'' टिप्पणियां करने का भी आरोप लगाया। गांधी ने मंगलवार को पूर्व सांसद वाइको की पुस्तक के विमोचन के अवसर पर कहा था कि देश के छात्र ''गहरी पीड़ा'' में हैं और उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की माफी नहीं चाहिए बल्कि वे चाहते हैं कि सरकार की कार्रवाई के लिए मोदी सार्वजनिक तौर पर माफी मांगें। उन्होंने यह भी कहा था कि छात्र इसलिए सड़कों पर हैं क्योंकि आरएसएस देश के इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश कर रहा है। गांधी ने कहा था कि भारत अपने इतिहास को किसी के द्वारा रौंदे जाने को स्वीकार नहीं करेगा। गांधी ने कहा था कि प्रत्येक राज्य को अपनी संस्कृति और भाषा के साथ समान व्यवहार पाने का अधिकार है, लेकिन आरएसएस चाहता है कि केवल उसी के दृष्टिकोण वाला इतिहास स्वीकार किया जाए। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने यहां संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि राहुल गांधी ''अपरिपक्व'', ''अंशकालिक'' और ''गैर-जिम्मेदार'' नेता प्रतिपक्ष हैं तथा संसद की कार्यवाही इसलिए बाधित कर रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि मोदी सरकार के कामकाज से तुलना होने पर कांग्रेस की पोल खुल जाएगी। भाटिया ने दावा किया, ''राहुल गांधी डरे हुए हैं। उन्हें पता है कि जब प्रभावशाली मोदी सरकार और 2004 से 2014 तक की रीढ़विहीन कांग्रेस नीत सरकार की तुलना होगी तो कांग्रेस बेनकाब हो जाएगी। इसलिए संसद में व्यवधान डाला जा रहा है।'' भाजपा और आरएसएस पर राहुल गांधी की टिप्पणी का जवाब देते हुए भाटिया ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता ''मोदी-भय'' और ''आरएसएस-भय'' से ग्रस्त हैं तथा बिना किसी प्रमाण के संघ की विचारधारा को बार-बार ''जहरीली'' बताते हैं। उन्होंने कहा, ''राहुल गांधी मोदी-भय और आरएसएस-भय से ग्रस्त हैं। जिस विचारधारा ने पूरी निष्ठा से देश की सेवा की है, उसे 'जहरीली' कहना आसान है, लेकिन बिना किसी सबूत के इसे सिद्ध करना संभव नहीं है।'' छात्रों और परीक्षा सुधारों पर राहुल गांधी की टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए भाटिया ने आरोप लगाया कि विपक्ष शासित राज्यों में कथित प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं पर कांग्रेस नेता चुप्पी साध लेते हैं। उन्होंने कहा, ''झारखंड में प्रश्नपत्र लीक हुआ तो राहुल गांधी गायब हैं। कर्नाटक में प्रश्नपत्र लीक हुआ तो राहुल गांधी गायब हैं। केरल में प्रश्नपत्र लीक हुआ तो राहुल गांधी गायब हैं। यह दोहरा मापदंड और यह पाखंड क्यों?'' संसद में गतिरोध से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी सदन में चर्चा के दौरान सरकार के तर्कों का जवाब नहीं दे पाते, इसलिए सदन से ''भाग जाते'' हैं। उन्होंने कहा, ''जब संसद का सत्र चल रहा हो तो क्या नेता प्रतिपक्ष को पूरी तैयारी के साथ सदन में नहीं आना चाहिए? राहुल गांधी संसद से भी भागते हैं। जब प्रधानमंत्री मोदी, राजनाथ सिंह और अमित शाह तथ्यों के साथ बोलते हैं तो राहुल गांधी के पास कोई जवाब नहीं होता।'' भाटिया ने विदेशों से भगोड़ों को वापस लाने के मामले में मोदी सरकार के रिकॉर्ड का भी उल्लेख करते हुए दावा किया कि इससे राजग और पूर्ववर्ती संप्रग सरकार के बीच का अंतर स्पष्ट होता है। उन्होंने कहा, ''2019 से 2026 के बीच 36 देशों से 274 भगोड़ों को भारत वापस लाया गया। यानी औसतन हर वर्ष 40 भगोड़ों को वापस लाया गया। इसकी तुलना संप्रग सरकार से करें, जिसके कार्यकाल में औसतन केवल चार भगोड़ों को हर वर्ष वापस लाया गया।'' आर्थिक अपराध करने वालों का ज़िक्र करते हुए भाटिया ने कहा कि विजय माल्या के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और दावा किया कि सरकार की कोशिशों से जनता के हजारों करोड़ रुपये वापस पाने में मदद मिली है। उन्होंने कहा, ''वित्तीय धोखाधड़ी के आरोपी लोगों में (जिनमें विजय माल्या जैसे लोग शामिल हैं जिनके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है) से जुड़े नौ मामले हैं, जबकि 45 अन्य लोग अलग-अलग तरह के अपराधों के आरोपी हैं।'' उन्होंने कहा, ''जो भगोड़े वापस लाए गए हैं, उनकी वजह से लगभग 19,000 करोड़ रुपये की वसूली हो पाई है। यह रकम इसके असली मालिकों को वापस मिल गई है।'' अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त किए जाने के सात वर्ष पूरे होने के अवसर पर भाटिया ने पांच अगस्त को ''ऐतिहासिक दिन'' बताया और इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को दिया। उन्होंने कहा, ''अनुच्छेद 370 की शुरुआत 'अस्थायी' शब्द से हुई थी, लेकिन इसे हटाने की इच्छाशक्ति किसी में नहीं थी। पांच अगस्त, 2019 को, जब अनुच्छेद 370 को हटाया गया, तो संविधान की असली भावना का सम्मान किया गया। अमित शाह जी ने सरदार पटेल जैसी इच्छाशक्ति दिखाई जिससे ऐसा किया जाना सुनिश्चित हुआ।
-
नयी दिल्ली. यमन के तट के निकट मंगलवार को भारतीय ध्वज वाले एक वाणिज्यिक जहाज पर हमला हुआ। विदेश मंत्रलय ने यह जानकारी दी। मंत्रालय ने बताया कि जहाज पर 13 भारतीय नागरिक सवार थे और सभी को बचा लिया गया। भारत ने इस हमले की निंदा की और कहा कि इस क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया जाना बंद होना चाहिए। विदेश मंत्रालय ने कहा, ''हम भारतीय ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाज 'एमएसवी फैज नूर ओलिया' पर हुए हमले की निंदा करते हैं, जो चार अगस्त को यमन के तट के पास लाल सागर में डूब गया।'' मंत्रालय ने कहा, ''सभी 13 भारतीय नागरिकों को बचा लिया गया है। रियाद स्थित हमारा दूतावास स्थिति पर करीबी नजर रख रहा है और चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यमन के अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से समन्वय कर रहा है।'' विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को बचाने में सहयोग के लिए यमन के अधिकारियों का धन्यवाद किया।
मंत्रालय ने कहा, इस क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं।'' मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ''इस क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना बंद होना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप, क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से स्वतंत्र एवं निर्बाध आवागमन तथा व्यापार को जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए।



























