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नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्रियों की उच्चस्तरीय मंथन बैठक मंगलवार को आयोजित की जाएगी। इसका उद्देश्य सहकारी समितियों को केवल संस्थागत ढांचे तक सीमित न रखकर उन्हें सदस्य-केंद्रित, आय-वर्धक और आत्मनिर्भर आर्थिक इकाइयों में रूपांतरित करना है।
सहकारिता मंत्रालय के अनुसार, बैठक में 2 लाख नई बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS), डेयरी एवं मत्स्य सहकारी समितियों की स्थापना की प्रगति पर चर्चा होगी, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दी जा सके। मंथन बैठक में विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना के अंतर्गत देशभर में आधुनिक गोदामों के नेटवर्क के विस्तार पर विचार किया जाएगा, जिससे किसानों को बेहतर भंडारण, मूल्य स्थिरता और बाज़ार तक सुगम पहुंच सुनिश्चित हो सके।इस बैठक में राष्ट्रीय स्तर की नई सहकारी संस्थाओं—नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट लिमिटेड (NCEL), नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक लिमिटेड (NCOL) तथा भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL) में राज्यों की सक्रिय भागीदारी, भूमिका और अपेक्षाओं पर भी विमर्श होगा, जिससे निर्यात, जैविक खेती और गुणवत्तापूर्ण बीज आपूर्ति के क्षेत्र में सहकारिता को नई पहचान मिल सके।इसके साथ ही, राज्यों के सहकारिता कानूनों में समयानुकूल सुधार, 97वें संविधान संशोधन के अनुरूप मॉडल अधिनियम को अपनाने, सहकारी गन्ना मिलों की आर्थिक व्यवहार्यता बढ़ाने, डेयरी क्षेत्र में सर्कुलरिटी एवं सस्टेनेबिलिटी को प्रोत्साहन देने, तथा अमूल और एनडीडीबी के सहयोग से नई डेयरी सहकारी समितियों के गठन जैसे विषयों पर भी चर्चा की जाएगी।दलहन एवं मक्का उत्पादन को बढ़ावा देने, सहकारी बैंकों से जुड़ी चुनौतियों के समाधान, साझा सेवा इकाई (SSE) एवं अंब्रेला संरचना को सुदृढ़ करने, सदस्यता विस्तार एवं जागरूकता अभियान को मजबूत बनाने, और प्रभावी मीडिया-संचार रणनीति विकसित करने जैसे मुद्दे भी विचार-विमर्श का हिस्सा रहेंगे। इसके अतिरिक्त, PACS एवं RCS कार्यालयों के कंप्यूटरीकरण, राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस के उपयोग, मानव संसाधन विकास, प्रशिक्षण और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) की योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर भी राज्यों से अपेक्षाओं पर चर्चा होगी। -
मथुरा (उप्र) . उत्तर प्रदेश मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने रविवार को बताया कि मथुरा जिले में विश्व विख्यात लठामार होली के अवसर पर यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा के लिए कस्बे के मेला परिसर को सात जोन व 18 सेक्टरों में बांटा गया है। मथुरा में होली की इस अनूठी परंपरा को विभिन्न नामों से जाना जाता है। इसे बरसाना में 'लठामार होली', गोकुल में 'छड़ीमार होली' और बलदेव में 'हुरंगा' के नाम से जाना जाता है, जिसमें महिलाएं खेल-खेल में पुरुषों को लाठियों या 'छड़ी' से पीटती हैं, जो भगवान कृष्ण के बचपन में गोपियों के साथ की गई शरारतों का पुनर्मंचन है। गन्ना विकास एवं चीनी मिलें मंत्री चौधरी ने 'रंगोत्सव-2026' की तैयारियों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता के बाद बताया कि 24 फरवरी को बरसाना के लाडिलीजी मंदिर में फाग आमंत्रण एवं लडडू होली, 25 फरवरी को लठामार होली, 26 फरवरी को नन्दगांव व रावल में लठामार होली, 27 फरवरी को श्रीकृष्णजन्म स्थान मंदिर एवं वृन्दावन के बांकेबिहारी मन्दिर में रंगों की होली तथा द्वारिकाधीश मंदिर में कुंज की होली और एक मार्च को गोकुल में छड़ीमार होली का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि तीन मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर मथुरा में चतुर्वेदी समाज का डोला निकलेगा तथा होलिका दहन किया जाएगा और चार मार्च को जनपद भर में धूलेंडी का पर्व मनाया जाएगा। मंत्री ने कहा कि इसके बाद पांच मार्च को बलदेव व जाब गांव में हुरंगा व मुखराई एवं नन्दगांव में चरकुला व हुरंगा का आयोजन किया जाएगा। इसी प्रकार, छह मार्च को बठैन व गिडोह में हुरंगा, नौ मार्च को महावन में छड़ीमार होली तथा 12 मार्च को वृन्दावन के रंगजी मन्दिर में होली का आयोजन होगा। बरसाना में आयोजित विश्व प्रसिद्ध लडडू होली तथा लठामार होली की तैयारियों के सम्बन्ध में मंत्री ने कहा कि मेला क्षेत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजनों से सम्बन्धित मंचों, साज-सज्जा, प्रवेश द्वार, सेल्फी प्वाइंट आदि का निर्माण एवं सीधे प्रसारण आदि की व्यवस्था पर्यटन विभाग एवं ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा की जाएगी। उन्होंने कहा कि रंगोत्सव 2026 के अन्तर्गत जनपद के विभिन्न स्थानों पर कुल दो दर्जन प्रवेश द्वारों की स्थापना की जाएगी। एक दर्जन प्रमुख स्थलों पर सेल्फी प्वाइंट स्थापित किए जाएंगे। इसी के साथ सभी प्रमुख स्थलों व सार्वजनिक इमारतों, प्रमुख चौराहों आदि को लाइटिंग से सुसज्जित किया जाएगा। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने बताया कि बरसाना में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कस्बे को सात जोन व 18 सेक्टर में विभाजित कर 56 पार्किंग स्थल तथा 94 अवरोधक बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 13 स्थलों पर स्वास्थ्य केंद्र तथा पांच दो पहिया एम्बुलेंस लगाई जाएंगी। बरसाना में पांच वॉचटावर तथा पांच स्थानों पर अग्निशमन व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। कुमार ने बताया कि पूरे क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन एवं सार्वजनिक घोषणा प्रणाली को सुचारू रखते हुए निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि विभिन्न स्थानों पर अवरोधक व बैरिकेडिंग के साथ-साथ खोया पाया केंद्र एवं नियंत्रण कक्ष बनाए जा रहे हैं।
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गोरखपुर (उप्र) . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भारत को सद्भावना और सामाजिक सामंजस्य का वैश्विक केंद्र बताते हुए रविवार को जोर देकर कहा कि देश की सभ्यतागत विचारधारा लेन-देन वाले संबंधों के बजाय एकता और आपसी जुड़ाव की भावना पर आधारित है। आरएसएस के मीडिया प्रकोष्ठ ने यह जानकारी दी। आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में तारामंडल स्थित बाबा गंभीरनाथ सभागार में आयोजित 'सामाजिक सद्भाव' सम्मेलन को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि समाज की पहचान परस्पर जुड़ाव से होती है, न कि स्वार्थ से। उन्होंने कहा, "कई देशों में रिश्तों को लेन-देन के रूप में देखा जाता है। हमारे देश में मानवीय रिश्ते अपनेपन की भावना पर आधारित हैं।" भारत की विविधता पर प्रकाश डालते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा, "हम भारत को अपनी माता मानते हैं। वही दिव्य चेतना हम सब में निवास करती है। यही बंधन हमें हमारी भिन्न-भिन्न पहचानों के बावजूद एकजुट रखता है।" उन्होंने कहा कि समाज को कायम रखने के लिए केवल कानून लागू करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सामाजिक सद्भाव भी आवश्यक है। आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि यह उपलब्धि जश्न मनाने का नहीं, बल्कि आत्मनिरीक्षण का विषय है। उन्होंने सामाजिक एकता को मजबूत करने के लिए साल में दो से तीन बार खंड विकास स्तर की बैठकें आयोजित करने का आह्वान किया और समुदायों से जातिगत सरोकारों से परे व्यापक हिंदू समाज के लिए काम करने का आग्रह किया। भागवत ने कहा, "समाज को स्वयं कार्रवाई करनी होगी। संघ सहायता करेगा, लेकिन जिम्मेदारी समाज की है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने हमेशा स्वार्थहीन भाव से संकट के समय अन्य देशों की सहायता की है।
बैठक के दौरान विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार साझा किए। बाद में भागवत ने उनके साथ सामुदायिक भोज में भाग लिया। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सोमवार को भारत मंडपम में 'एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026' का उद्घाटन करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने यह जानकारी दी। पीएमओ ने एक बयान जारी कर बताया कि 'इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026' का आयोजन 16 से 20 फरवरी तक भारत मंडपम में 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' के साथ किया जाएगा। यह एक्सपो एआई के व्यावहारिक प्रदर्शन का एक राष्ट्रीय मंच होगा, जहां नीति व्यवहार से मिलेगी, नवाचार व्यापक स्तर पर लागू होगा और प्रौद्योगिकी आम नागरिक तक पहुंचेगी। बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी 16 फरवरी को शाम पांच बजे भारत मंडपम में 'इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026' का उद्घाटन करेंगे। यह एक्सपो 70,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में फैले 10 एरेना में आयोजित होगा, जो वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों, स्टार्टअप, शिक्षाविदों और अनुसंधान संस्थानों, केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों को एक साथ लाएगा। इस एक्सपो में एआई तंत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रदर्शित करने वाले 13 देशों के मंडप भी होंगे। इनमें ऑस्ट्रेलिया, जापान, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, सर्बिया, एस्टोनिया, ताजिकिस्तान और अफ्रीका के पवेलियन शामिल हैं। इस एक्सपो में 300 से अधिक चुनिंदा प्रदर्शनी मंडप और लाइव प्रदर्शन होंगे जिन्हें तीन मुख्य विषयों - लोग, ग्रह और उन्नति - के आधार पर तैयार किया गया है। इसके अलावा एक्सपो में 600 से अधिक उच्च क्षमता वाले स्टार्टअप शामिल होंगे, जिनमें से कई वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक और जनसंख्या-स्तरीय समाधान कर रहे हैं। ये स्टार्टअप ऐसे उपयुक्त समाधानों का प्रदर्शन करेंगे, जो पहले से ही वास्तविक दुनिया में उपयोग में हैं। 'इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026' में अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों सहित 25 लाख से अधिक आगंतुकों के भाग लेने की उम्मीद है। इस आयोजन का उद्देश्य वैश्विक एआई पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर नयी साझेदारियों को बढ़ावा देना और व्यावसायिक अवसर पैदा करना है। इसमें 500 से अधिक सत्रों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें 3,250 से अधिक दूरदर्शी वक्ता और परिचर्चा सदस्य शामिल होंगे। इन सत्रों का मुख्य उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में एआई के परिवर्तनकारी प्रभाव को स्वीकार करना और यह सुनिश्चित करने के लिए भविष्य की कार्रवाइयों पर विचार-विमर्श करना होगा कि एआई से प्रत्येक वैश्विक नागरिक को लाभ मिले।
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नयी दिल्ली/केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कोलंबो में खेले गए टी20 विश्व कप के एक मुकाबले में पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय क्रिकेट टीम की शानदार जीत के लिए बधाई दी। शाह ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''शानदार खेल खेला टीम इंडिया। प्रारूप, स्थान और तारीखें बदल सकती हैं, लेकिन भारत बनाम पाकिस्तान मुकाबले का परिणाम अपरिवर्तित रहता है। पूरी टीम को बधाई।'' भारत ने आईसीसी टी20 विश्व कप के ग्रुप ए मैच में रविवार को पाकिस्तान को 61 रन से हराकर सुपर आठ चरण के लिए क्वालीफाई किया।
- नयी दिल्ली,। भारत और ब्रिटेन की शिक्षा, संस्कृति और रचनात्मक अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में ''साझा महत्वाकांक्षाएं और लक्ष्य'' हैं, और दोनों देश समावेशी विकास और युवाओं के लिए अवसरों की दिशा में एक साथ आगे बढ़ सकते हैं। यह राय नयी दिल्ली स्थित ब्रिटिश काउंसिल की प्रमुख एलिसन बैरेट ने व्यक्त की है। ब्रिटिश काउंसिल की भारत में प्रमुख बैरेट ने यहां आयोजित किये जा रहे 'एआई इम्पैक्ट समिट-2026' से पहले एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि पिछले तीन वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी में वास्तव में 'बहुत मजबूती' आई है। उन्होंने विस्तार से बताए बिना कहा, ''हम ब्रिटेन के सांस्कृतिक संबंध संगठन हैं, और आगामी एआई शिखर सम्मेलन में एक पैवेलियन स्थापित करने की योजना बनाई गई है। हम इसके शैक्षिक और सांस्कृतिक घटकों का संचालन करेंगे।'' प्रौद्योगिकी, एआई और रचनात्मक अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में काम करने वाले विभिन्न संगठनों के प्रमुख और कई वैश्विक नेता 16 से 20 फरवरी तक होने वाले 'इंडिया एआई इम्पैक्ट-2026' में हिस्सा लेंगे। बैरेट ने हाल में कहा था कि इस वर्ष ब्रिटेन के आठ विश्वविद्यालय भारत में अपने परिसर खोलेंगे।उन्होंने कहा, ''साउथम्पटन विश्वविद्यालय ने गुरुग्राम में पहले ही अपना परिसर खोल दिया है (जुलाई 2025 में), और यह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशानिर्देशों के तहत परिसर खोलने की मंजूरी प्राप्त करने वाला पहला विश्वविद्यालय है। ब्रिटेन के अन्य आठ विश्वविद्यालयों को भी मंजूरी पत्र प्राप्त हो चुका है।'' बैरेट ने बताया, ''गुजरात के 'गिफ्ट सिटी' में ब्रिटेन के तीन विश्वविद्यालय खुल रहे हैं, कर्नाटक के बेंगलुरु में लिवरपूल विश्वविद्यालय और लैंकेस्टर विश्वविद्यालय के परिसर खुल रहे हैं जबकि मुंबई में यॉर्क विश्वविद्यालय, एबरडीन विश्वविद्यालय और ब्रिस्टल विश्वविद्यालय अपने परिसर खोलने जा रहे हैं।'' ब्रिटिश काउंसिल के मुताबिक, एबरडीन विश्वविद्यालय और ब्रिस्टल विश्वविद्यालय 2026 की गर्मियों तक आधिकारिक तौर पर अपने परिसरों को खोल सकते हैं। ब्रिटिश काउंसिल भारत में 1948 से मौजूद है और दिल्ली की मौजूदा इमारत में यह 1992 से है। इस इमारत को प्रसिद्ध भारतीय वास्तुकार चार्ल्स कोरिया ने डिजाइन किया था। इसके अग्रभाग पर प्रतिष्ठित 'बरगद के पेड़' की कलाकृति ब्रिटिश कलाकार हॉवर्ड होडकिन द्वारा बनाई गई थी। बैरेट ने शिक्षा और संस्कृति को दो बेहद 'महत्वपूर्ण क्षेत्र' और द्विपक्षीय संबंधों के महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए कहा कि इन दोनों क्षेत्रों को ''पिछले तीन वर्षों में कई अलग-अलग तरीकों से वास्तविक बढ़ावा मिला है,'' लेकिन वास्तव में यह बढ़ावा इस तथ्य से और गहरा हुआ है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने अधिक ब्रिटिश संस्थानों को भारत के साथ सहयोग और साझेदारी करने की अनुमति दी है। उन्होंने कहा कि भारत-ब्रिटेन दृष्टिपत्र-2035 ने शिक्षा को 'कहीं अधिक महत्व' देने में सक्षम बनाया है, क्योंकि यह दृष्टिकोण के पांच प्रमुख स्तंभों में से एक है, इसलिए यह विभिन्न प्राथमिकताओं की एक शृंखला निर्धारित करता है ''जो हमें शिक्षा साझेदारी को कहीं अधिक महत्वाकांक्षी बनाने और संबंधों में कहीं अधिक अग्रणी साझेदारी के साथ बढ़ाने'' में सक्षम बनाता है। भारत और ब्रिटेन के प्रधानमंत्रियों ने जुलाई 2025 में लंदन में हुई अपनी बैठक के दौरान 'भारत-ब्रिटेन दृष्टिपत्र 2035' का समर्थन किया था, जिसमें साझेदारी की पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए साझा प्रतिबद्धता दोहराई गई थी।
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नई दिल्ली। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार को कहा कि ब्रह्मपुत्र के नीचे नुमालीगढ़ टनल दुनिया की दूसरी अंडरवाटर टनल होगी, जो रेल आवागमन को आसान बनाने में सक्षम होगी। उन्होंने इस प्रोजेक्ट को पूर्वोत्तर में कनेक्टिविटी और रणनीतिक लॉजिस्टिक्स के लिए गेम-चेंजर बताया।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि गोहपुर-नुमालीगढ़ टनल, जिसकी अनुमानित लागत 18,622 करोड़ रुपए है, ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनाई जाएगी और इसे सड़क व रेल दोनों तरह के ट्रैफिक के लिए डिजाइन किया जाएगा। प्रोजेक्ट पूरा हो जाने पर, इससे उत्तरी और ऊपरी असम के बीच यात्रा का समय बहुत कम हो जाएगा, साथ ही पूरे इलाके में रक्षा और माल ढुलाई भी मजबूत होगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि रेल परिचालन को सपोर्ट करने की टनल की क्षमता इसे दुनिया भर में ऐसे बहुत छोटे प्रोजेक्ट्स के ग्रुप में शामिल करती है, जो इसकी तकनीकी और रणनीतिक महत्व को दिखाता है। उन्होंने आगे कहा कि यह टनल बाढ़ के दौरान भी साल भर कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगी व आपातकाल और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी मूवमेंट में अहम भूमिका निभाएगी।दूसरे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के बारे में बताते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने घोषणा की कि कामाख्या में एक रोपवे प्रोजेक्ट बनाया जाएगा, जो कामाख्या स्टेशन से शुरू होगा, ताकि भीड़ कम हो सके और पवित्र मंदिर आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए पहुंच आसान हो सके। इस प्रोजेक्ट से गुवाहाटी में धार्मिक पर्यटन को काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि गुवाहाटी एयरपोर्ट को जालुकबारी से जोड़ने वाली एक रिंग रोड की योजना बनाई गई है, जिसकी अनुमानित लागत 1,500 करोड़ रुपए है। इस सड़क से शहर के अंदर ट्रैफिक कम होगा और एयरपोर्ट तक पहुंच तेज व आसान होगी।हिमंत बिस्वा सरमा ने आगे बैहाटा चरियाली से तेजपुर तक चार लेन का हाईवे बनाने की घोषणा की, जिसमें लगभग 14,000 करोड़ रुपए का निवेश होगा, जिससे मिडिल असम में एक महत्वपूर्ण आर्थिक गलियारे के साथ कनेक्टिविटी मजबूत होगी।सीएम हिमंत ने जानकारी दी कि डिब्रूगढ़ मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल के लिए 600 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट तैयार किए गए हैं, ताकि सुविधाओं को अपग्रेड किया जा सके और एडवांस्ड इलाज सेवाओं को बढ़ाया जा सके।मुख्यमंत्री ने कहा कि इन प्रोजेक्ट्स का स्केल केंद्र के मजबूत समर्थन के साथ असम के तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित विकास को दिखाता है, जिससे राज्य पूर्वोत्तर के लिए एक अहम कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स हब बन गया है। -
नई दिल्ली। भारत और फ्रांस के बीच रक्षा संवाद होने जा रहा है। सैन्य तकनीक व रक्षा क्षेत्र की तैयारियों के लिहाज से यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण संवाद होगा। भारत की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस संवाद में शामिल होंगे। वहीं फ्रांस की रक्षा मंत्री भी इस बैठक में शामिल होंगी।
17 फरवरी को दोनों देशों के रक्षामंत्री इस बैठक की संयुक्त अध्यक्षता करेंगे। वहीं इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों कर्नाटक के वेमगल में टाटा एयरबस की एच 125 हेलीकॉप्टर असेंबली लाइन का वर्चुअल उद्घाटन करेंगे।दरअसल, भारत और फ्रांस के बीच यह 6वां वार्षिक संवाद है। यह संवाद बेंगलुरु में 17 फरवरी को होगा। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग की पूरी समीक्षा होगी, खासकर रक्षा उद्योग में साझेदारी बढ़ाने पर जोर रहेगा। रक्षा समझौते को अगले 10 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। साथ ही हैमर मिसाइलों के संयुक्त निर्माण के लिए समझौता होने की संभावना है। सेना में अधिकारियों की आपसी तैनाती को लेकर भी घोषणा हो सकती है।रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, भारत और फ्रांस के रिश्तों में रक्षा सहयोग हमेशा से अहम रहा है। दोनों देश ‘शक्ति’, ‘वरुणा’ और ‘गरुड़’ जैसे संयुक्त सैन्य अभ्यास भी नियमित रूप से करते हैं। अक्टूबर 2025 में पद संभालने के बाद फ्रांस की रक्षा मंत्री कैथरीन वाउटरिन की यह पहली भारत यात्रा होगी।दरअसल, भारत और फ्रांस के संबंधों में रक्षा सहयोग एक महत्वपूर्ण स्तंभ रहा है। हाल के वर्षों में उच्चस्तरीय आदान-प्रदान से दोनों देशों के रणनीतिक संबंध और मजबूत हुए हैं। जुलाई 2023 में प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस के बास्तील दिवस समारोह में मुख्य अतिथि रहे, जबकि 2024 के गणतंत्र दिवस परेड में फ्रांसीसी राष्ट्रपति मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे।गौरतलब है कि तीन दिन पहले ही रक्षा मंत्रालय की एक अहम बैठक में मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट राफेल की खरीद को मंजूरी दे दी गई है। भारतीय वायुसेना के लिए नए राफेल लड़ाकू विमान का यह सौदा फ्रांस के साथ होना है।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) की यह बेहद महत्वपूर्ण बैठक 12 फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित की गई थी। बैठक में वायुसेना के लिए राफेल फाइटर एयरक्राफ्ट, आधुनिक कॉम्बैट मिसाइलों व हाई एल्टीट्यूड प्स्यूडो सैटेलाइट खरीदने को मंजूरी दी गई है।गौरतलब है कि बीते वर्ष ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान राफेल की मदद से पाकिस्तान में स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। दरअसल, राफेल जैसे लड़ाकू विमान वायुसेना को दुश्मन पर लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की ताकत देंगे। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि अच्छी बात यह है कि ज्यादातर विमान भारत में ही बनाए जाएंगे, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलेगा। भारतीय वायुसेना पहले से ही राफेल विमानों को अपने बेड़े में शामिल कर चुकी है। फिलहाल इन विमानों की दो स्क्वाड्रन भारतीय वायुसेना का हिस्सा हैं।( -
नई दिल्ली। भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। आगामी इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में ‘परम-2’ नाम का 17 अरब पैरामीटर वाला बहुभाषी एआई मॉडल लॉन्च किया जाएगा।
के तहत विकसित ‘परम-2’ भारत के अपने स्वयं के संप्रभु मूलभूत एआई मॉडल बनाने के प्रयासों का प्रतिनिधित्व करता है, जिन्हें खास तौर पर भारत की भाषाओं, प्रशासनिक जरूरतों और सांस्कृतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।भारतजेन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा समर्थित भारत की राष्ट्रीय जनरेटिव एआई पहल है। पिछले कुछ वर्षों में इस कार्यक्रम ने मजबूत आधार तैयार किया है, जिससे भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है जो बड़े स्तर के एआई मॉडल खुद विकसित करने में सक्षम हैं।‘परम-2’ भारत की सभी 22 अनुसूचित भाषाओं को सपोर्ट करता है, जिसे ‘भारत डेटा सागर’ के तहत भारत से जुड़े डाटासेट्स पर प्रशिक्षित किया गया है। यह मॉडल ‘मिक्सचर-ऑफ-एक्सपर्ट्स’ आर्किटेक्चर पर आधारित है, जिससे यह जटिल बहुभाषी कार्यों को बेहतर और प्रभावी ढंग से संभालने में सक्षम होता है।भारतजेन के प्रमुख नेताओं में से एक, आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर गणेश रामकृष्णन ने इस लॉन्च को महज एक नए मॉडल की रिलीज से कहीं अधिक बताया। उन्होंने बताया कि यह शोधकर्ताओं, संस्थानों, सरकारी निकायों और उद्योग जगत के साझेदारों के सहयोग का परिणाम है ताकि भारत अपने एआई भविष्य को खुद आकार दे सके।चैटजीपीटी या जेमिनी जैसे वैश्विक उपभोक्ता एआई प्लेटफॉर्म के विपरीत, भारतजेन एक अलग मॉडल अपनाता है।यह किसी एक केंद्रीकृत बिजनेस-टू-कंज्यूमर सेवा के रूप में काम नहीं करता, बल्कि इसके एआई मॉडल को राष्ट्रीय सार्वजनिक डिजिटल संपत्ति (पब्लिक डिजिटल गुड) के रूप में जारी किया जाता है।इससे सरकारी विभाग, बैंक, अस्पताल, अदालतें और शैक्षणिक संस्थान इन्हें अपने स्तर पर, यहां तक कि बिना इंटरनेट वाले सुरक्षित वातावरण में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसका उद्देश्य पारदर्शिता, भरोसा और डेटा संप्रभुता सुनिश्चित करना है। भारतजेन की नींव विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तहत नेशनल मिशन ऑन इंटरडिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम्स पर आधारित है। इस मिशन के तहत शुरुआत में 235 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई थी। अब इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के इंडियाएआई मिशन के समर्थन से इसे और आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसमें राष्ट्रीय एआई रणनीति के तहत 900 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। -
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को गुजरात के गांधीनगर में देश का फर्स्ट सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी)-बेस्ड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (पीडीएस) लॉन्च करते हुए कहा कि दुनिया के कुल डिजिटल ट्रांजेक्शन में आधे से ज्यादा हिस्सा भारत का है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि “डिजिटल इंडिया” शब्द का मैं जब प्रयोग करता हूं और 11 साल पहले मुड़कर देखते हैं तो कल्पना नहीं कर सकते कि 60 करोड़ लोग ऐसे थे, जिनके परिवार में बैंक अकाउंट नहीं था। आज यही 11 साल बाद पीएम मोदी के नेतृत्व में दुनिया के आधे डिजिटल ट्रांजेक्शन भारत में हो रहे हैं। मतलब दुनिया में 2 डिजिटल ट्रांजेक्शन होते हैं तो एक भारत में होता है। आज वही डिजिटल इंडिया गरीबों को सस्ता अनाज देने के क्षेत्र में पदार्पण कर रहा है।उन्होंने कहा कि जिस तरह से डीबीटी ने देश में 15 लाख करोड़ से ज्यादा घपले-घोटालों को समाप्त कर दिया, उसी तरह से खाद्य आपूर्ति मंत्रालय का यह कदम ट्रांसपेरेंट डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम सुनिश्चित करेगा और पीएम मोदी के मंत्र ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ को जमीन पर उतारेगा।गृह मंत्री अमित शाह ने आगे कहा कि 11 साल पहले का समय मुझे याद है। सबसे पहले भ्रष्टाचार की शुरुआत अनाज को तौलने में होती थी। उसके वेट करने वाले स्केल को डिजिटल किया गया। राशन कार्ड फर्जी होते थे, लेकिन अब ई-राशन कार्ड ला दिया गया, फिर ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ आया और अब यह जो सिस्टम शुरू हुआ है, इससे और पारदर्शिता होगी।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल इंडिया के माध्यम से ढेर सारी पारदर्शिता गांवों तक पहुंचाई। कांग्रेस की सरकार में 500 गांवों तक ही कनेक्टिविटी पहुंची थी, लेकिन आज 1 लाख 7 हजार गांवों में कनेक्टिविटी पहुंची है। पीएम मोदी के उस उद्गार को, जब उन्होंने 2014 में कहा था कि ‘मेरी सरकार गरीबों की, दलितों की, पिछड़ों की, आदिवासियों की सरकार है और मेरी सरकार में पहला अधिकार इनका है, उस समय हम भावुक होकर देख रहे थे।उन्होंने कहा कि आज वही चीज मुस्कुराकर देखते हैं कि 81 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलो मिल रहा है। 81 करोड़ लोगों को खाद्य सुरक्षा, यानी पूरे यूरोपियन यूनियन की आबादी से लगभग दो गुना अधिक लोगों को खाद्य सुरक्षा देने का कार्यक्रम है।उन्होंने पिछले एक दशक में किए गए कल्याणकारी कामों का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया कि ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के तहत चार करोड़ घर बनाए गए हैं, 13 करोड़ घरों में नल के पानी के कनेक्शन दिए गए हैं, लगभग 13 करोड़ घरों में गैस सिलेंडर दिए गए हैं, और 12 करोड़ घरों में टॉयलेट बनाए गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि 2.91 करोड़ महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन गई हैं, जो सबको साथ लेकर चलने वाले विकास की बड़ी कोशिशों को दिखाता है। -
नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी के भारत मंडपम में इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 का उद्घाटन करेंगे। यह जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में दी गई है।
यह एक्सपो 16 से 20 फरवरी तक इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के साथ एक ही स्थान पर आयोजित किया जाएगा। 70,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में फैले 10 एरिना में यह आयोजन किया जाएगा, जिसमें दुनिया की बड़ी तकनीकी कंपनियां, स्टार्टअप्स, शिक्षण संस्थान, शोध संस्थान, केंद्रीय मंत्रालय, राज्य सरकारें और अंतरराष्ट्रीय साझेदार भाग लेंगे।इस आयोजन में 13 देशों के पवेलियन भी होंगे, जो एआई इकोसिस्टम में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को दर्शाएंगे। इन देशों में ऑस्ट्रेलिया, जापान, रूस, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, सर्बिया, एस्टोनिया, ताजिकिस्तान और अफ्रीकी देश शामिल हैं।एक्सपो में 300 से अधिक विशेष प्रदर्शनी पवेलियन और लाइव डेमोंस्ट्रेशन होंगे। यह आयोजन तीन थीम – पीपल, प्लेनेट और प्रोग्रेस – पर आधारित होगा। इसके अलावा 600 से अधिक संभावनाशील स्टार्टअप इसमें भाग लेंगे, जिनमें से कई वैश्विक स्तर और बड़ी आबादी के लिए समाधान विकसित कर रहे हैं। ये स्टार्टअप अपने ऐसे समाधान पेश करेंगे जो पहले से वास्तविक दुनिया में उपयोग में हैं।इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 में 2.5 लाख से अधिक लोगों के शामिल होने की उम्मीद है, जिनमें अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि भी होंगे। इस आयोजन का उद्देश्य वैश्विक एआई इकोसिस्टम में नए साझेदारी अवसर पैदा करना और व्यापार के नए मौके बनाना है।इस दौरान 500 से अधिक सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें 3,250 से ज्यादा विशेषज्ञ वक्ता और पैनल सदस्य भाग लेंगे। इन सत्रों में अलग-अलग क्षेत्रों में एआई के प्रभाव पर चर्चा की जाएगी और यह विचार किया जाएगा कि भविष्य में एआई का लाभ दुनिया के हर नागरिक तक कैसे पहुंचाया जाए। बयान में कहा गया है कि यह एक्सपो एआई के वास्तविक उपयोग का राष्ट्रीय प्रदर्शन होगा, जहां नीति और व्यवहार, नवाचार और विस्तार, तथा तकनीक और आम नागरिक के बीच बेहतर तालमेल दिखेगा। -
नई दिल्ली। देशभर में भगवान शिव की आराधना और उपासना के पावन पर्व महाशिवरात्रि को श्रद्धा भाव के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों को महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं दी हैं।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मैं सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देती हूं। मेरी प्रार्थना है कि महादेव की कृपा हम सभी पर सदा बनी रहे और हमारा देश प्रगति के पथ पर सदैव अग्रसर रहे।”
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “सभी देशवासियों को भक्ति, शक्ति और भगवान भोलेनाथ को समर्पित पावन पर्व महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं। काशी से रामेश्वरम् तक, महाशिवरात्रि का यह पावन पर्व भारत की अखंड और शाश्वत आध्यात्मिक परंपरा का जीवंत प्रतीक है। महादेव और माता पार्वती की कृपा से हम सभी को सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति हो, यही मंगलकामना है।”प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “मेरी कामना है कि आदिदेव महादेव सदैव सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें। उनके आशीर्वाद से सबका कल्याण हो और हमारा भारतवर्ष समृद्धि के शिखर पर विराजमान हो।”रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर सभी श्रद्धालुओं और देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, “देवाधिदेव महादेव से प्रार्थना है कि उनकी कृपा से विश्व में शांति और सद्भाव की भावना मजबूत हो। भगवान शिव का आशीर्वाद हमारे देश को एकता, सुरक्षा और निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाता रहे। सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का वास हो।” केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “हर हर महादेव! समस्त देशवासियों को महाशिवरात्रि के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। देवाधिदेव महादेव सभी के जीवन में सुख-समृद्धि प्रदान करें।”केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी देशवासियों को महाशिवरात्रि के पावन पर्व की शुभकामनाएं दीं और भगवान महादेव से देश की खुशहाली व समृद्धि की प्रार्थना की। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखा, “महाशिवरात्रि की सभी श्रद्धालुओं और प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं। बाबा भोलेनाथ की कृपा सभी पर बनी रहे, हर हृदय में शांति, हर जीवन में शक्ति और हर पथ में मंगल का संचार हो, यही प्रार्थना है।” - बलरामपुर (उप्र). उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में गौरा थाना क्षेत्र में मामा-भांजे को किसी अज्ञात वाहन ने रौंद दिया, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि बेलहा-गौरा मार्ग पर शुक्रवार देर रात देवलहा गांव के पास किसी अज्ञात वाहन की चपेट में आने से सुनील मणि त्रिपाठी (40) और नितिन कुमार पांडेय (35) की मौके पर मौत हो गई। दोनों रिश्ते में मामा-भांजे थे। उन्होंने बताया कि देवलहा गांव में एक धार्मिक कार्यक्रम था, जिसमें गोवर्धनदास महाराज उर्फ देवमणि त्रिपाठी धार्मिक पुस्तक ले जाना भूल गए थे, जिसे उनके पुत्र सुनील मणि त्रिपाठी अपने भांजे के साथ देने गए थे। पुस्तक देकर लौट रहे मामा-भांजे किसी वाहन का प्रतीक्षा कर रहे थे, तभी किसी अज्ञात वाहन ने उन्हें रौंद दिया जिससे दोनों की मौके पर मौत हो गई। थानाध्यक्ष हरीश सिंह ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया है और अज्ञात वाहन की तलाश के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे है। घटना की जानकारी मिलने पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के स्थानीय विधायक पलटू राम ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढाढस बंधाया और सरकार से सहायता दिलाने का भरोसा दिलाया।
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चंडीगढ़. हरियाणा के सोनीपत जिले में एक एसयूवी पेड़ से टकरा गई और इस हादसे में पांच दोस्तों की मौत हो गई, जबकि दो घायल हो गए। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि सातों लोग गोहाना के भावड़ गांव में एक शादी समारोह में शामिल होने के बाद शुक्रवार शाम को रोहतक लौट रहे थे और इस दौरान यह हादसा हुआ। पुलिस ने कहा कि टक्कर में एसयूवी क्षतिग्रस्त हो गई और तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। घायलों में से एक की हालत गंभीर बनी हुई है। अधिकारियों ने कहा कि मृतकों की पहचान सागर, दीपक, साहिल, मोहित और अंकुश के रूप में हुई है। सभी की उम्र 22 से 27 साल के बीच है। उन्होंने बताया कि ये सभी लोग रोहतक जिले के खिड़वाली और घुसकानी गांवों के निवासी थे।
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नई दिल्ली। गृह मंत्री अमित शाह ने पुलवामा आतंकी हमले की बरसी पर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि आतंकवाद मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन है और भारत इसके समूल नाश के लिए दृढ़ संकल्पित है।
गृह मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि पुलवामा में बलिदान देने वाले वीर जवानों के शौर्य और समर्पण को राष्ट्र सदैव स्मरण रखेगा। उन्होंने कहा कि आतंकवाद से लड़ने वाले सुरक्षा बलों और एजेंसियों के साहस के प्रति देश हमेशा ऋणी रहेगा।मनोज सिन्हा ने पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों को नमन करते हुए कहा कि मातृभूमि के प्रति उनकी निष्ठा, बहादुरी और निस्वार्थ सेवा हर नागरिक को प्रेरित करती रहेगी।नितिन नबीन ने शहीद जवानों के बलिदान को राष्ट्र की सुरक्षा का अमिट प्रतीक बताया। वहीं रेखा गुप्ता ने कहा कि वीर जवानों का अदम्य साहस और शौर्य देश को सदैव प्रेरित करता रहेगा पुलवामा आतंकी हमले की बरसी पर देशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए और वीर जवानों के बलिदान को याद किया गया। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुलवामा आतंकी हमले की बरसी पर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। वर्ष 2019 में हुए इस हमले में 40 जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि वीर जवानों की निष्ठा, दृढ़ संकल्प और राष्ट्र के प्रति सेवा देश की सामूहिक चेतना में सदा अमिट रहेगी। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि पुलवामा में बलिदान देने वाले वीरों का साहस हर भारतीय को शक्ति देता है और राष्ट्र उनकी वीरता को सदैव स्मरण रखेगा।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि शहीदों का बलिदान आतंकवाद के खिलाफ देश को एकजुट होकर लड़ने की प्रेरणा देता है।केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने भी वीर जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका बलिदान भारतीय शौर्य और पराक्रम का प्रतीक है।योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अमर जवानों का बलिदान देश को आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ता से लड़ने की प्रेरणा देता रहेगा। -
नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ‘पीएम राहत’ योजना के लिए नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह पहल ‘नागरिकदेवो भव:’ की भावना को साकार करती है और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को नई गति देती है। गडकरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि ‘पीएम राहत’ पहल के जरिए दुर्घटना पीड़ितों को तुरंत और सम्मानजनक मेडिकल केयर सुनिश्चित करने के लिए ऐतिहासिक और जीवनरक्षक फैसला लिया गया है। इस योजना के तहत 1.5 लाख रुपए तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे प्रभावित परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होगा।
नितिन गडकरी ने कहा कि हर अमूल्य जीवन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाली यह पहल संवेदनशील और दूरदर्शी है। उनके अनुसार, यह योजना सेवा की भावना को मजबूत करती है और नागरिकों के कल्याण को केंद्र में रखती है। नए कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री ने ‘पीएम राहत’ योजना के शुभारंभ को मंजूरी दी। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तत्काल चिकित्सा सहायता के अभाव में किसी भी दुर्घटना पीड़ित की जान न जाए। प्रधानमंत्री ने बताया कि ‘सेवा तीर्थ’ में गरीबों, किसानों, युवाओं और नारी शक्ति से जुड़ी विभिन्न फाइलों पर हस्ताक्षर किए गए। केंद्र सरकार ने ‘लखपति दीदी’ योजना का लक्ष्य बढ़ाकर 6 करोड़ करने का निर्णय लिया है। कृषि क्षेत्र को मजबूती देने के लिए एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के ऋण लक्ष्य को 1 लाख करोड़ रुपए से बढ़ाकर 2 लाख करोड़ रुपए किया गया है। साथ ही, नवाचार को बढ़ावा देने के लिए 10,000 करोड़ रुपए के कॉर्पस के साथ स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 की घोषणा भी की गई है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सेवा तीर्थ शिफ्ट होने के तुरंत बाद लिए अपने प्रथम निर्णय में पीएम राहत (सड़क दुर्घटना पीड़ितों का कैशलेस उपचार) योजना के शुभारंभ को स्वीकृति प्रदान की। यह निर्णय—सेवा, करुणा और कमजोर नागरिकों की सुरक्षा पर आधारित शासन के दृष्टिकोण को प्रतिबिम्बित करता है। यह कदम सरकार की इस प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है कि सड़क दुर्घटना के बाद तत्काल चिकित्सीय सहायता के अभाव में किसी भी व्यक्ति को जान नहीं गंवानी पड़े।
भारत में प्रतिवर्ष सड़क दुर्घटनाओं में बहुत अधिक संख्या में मौते होती हैं, जिनमें से अनेक को समय पर चिकित्सीय सहायता प्रदान कर टाला जा सकता है। अध्ययनों से संकेत मिलता है कि यदि दुर्घटना पीड़ितों को पहले एक घंटे के भीतर अस्पताल में भर्ती करा दिया जाए, तो लगभग 50% मौतों को टाला जा सकता है। सेवा तीर्थ से पीएम राहत को स्वीकृति देकर प्रधानमंत्री ने जीवनरक्षक हस्तक्षेप, अस्पतालों के लिए वित्तीय सुनिश्चितता और दुर्घटना पीड़ितों के लिए सुव्यवस्थित आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र स्थापित करने को प्राथमिकता दी है।आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ईआरएसएस) 112 हेल्पलाइन के साथ एकीकरण सड़क दुर्घटना पीड़ितों को गोल्डन आवर के भीतर अस्पताल पहुँचाया जाना सुनिश्चित करता है। सड़क दुर्घटना पीड़ित, राह-वीर या दुर्घटना स्थल पर उपस्थित कोई भी व्यक्ति 112 डायल करके निकटतम नामित अस्पताल की जानकारी प्राप्त कर सकता है और एम्बुलेंस सहायता का अनुरोध कर सकता है। इससे आपातकालीन सेवाओं, पुलिस प्राधिकरणों और अस्पतालों के बीच त्वरित तालमेल संभव हो सकेगा।योजना के अंतर्गत, किसी भी श्रेणी की सड़क पर हुई दुर्घटना के प्रत्येक पात्र पीड़ित को दुर्घटना की तिथि से 7 दिनों की अवधि तक प्रति व्यक्ति 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार प्रदान किया जाएगा। जीवन को खतरे में नहीं डालने वाले मामलों में अधिकतम 24 घंटे तक तथा जीवन के लिए घातक मामलों में अधिकतम 48 घंटे तक स्टेबलाइजेशन उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। यह सुविधा एकीकृत डिजिटल प्रणाली पर पुलिस प्रमाणीकरण के अधीन होगी।पीएम राहत को एक सुदृढ़, प्रौद्योगिकी-आधारित ढाँचे के माध्यम से लागू किया जा रहा है, जिसमें सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट (ईडीएआर) प्लेटफ़ॉर्म को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के ट्रांजैक्शन मैनेजमेंट सिस्टम (टीएमएस 2.0) के साथ एकीकृत किया गया है। यह एकीकरण दुर्घटना की जानकारी देने से अस्पताल में भर्ती, पुलिस प्रमाणीकरण, उपचार प्रदान करने, दावे की प्रक्रिया और अंतिम भुगतान तक निर्बाध डिजिटल संपर्क सुनिश्चित करता है। निर्धारित समय-सीमा के भीतर — जीवन को खतरे में नहीं डालने वाले मामलों में 24 घंटे के भीतर तथा जीवन के लिए घातक मामलों में 48 घंटे के भीतर — पुलिस की पुष्टि आवश्यक होगी, ताकि आपातकालीन उपचार निर्बाध रूप से जारी रहने के साथ ही जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।अस्पतालों को प्रतिपूर्ति मोटर वाहन दुर्घटना कोष (एमवीएएफ) के माध्यम से की जाएगी। जिन मामलों में दोषी वाहन बीमित होगा, उनमें भुगतान सामान्य बीमा कंपनियों द्वारा किए गए अंशदान से किया जाएगा। जबकि बिना बीमा वाले तथा हिट एंड रन मामलों में भुगतान भारत सरकार द्वारा बजटीय आवंटन के माध्यम से किया जाएगा। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा स्वीकृत दावों का भुगतान 10 दिनों के भीतर किया जाएगा, जिससे अस्पतालों को वित्तीय सुनिश्चितता प्राप्त होगी और निर्बाध उपचार को प्रोत्साहन मिलेगा।सड़क दुर्घटना पीड़ितों की शिकायतों का निवारण जिला स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए, जिला कलेक्टर / जिला मजिस्ट्रेट / उपायुक्त की अध्यक्षता वाली जिला सड़क सुरक्षा समिति द्वारा नामित एक शिकायत निवारण अधिकारी के माध्यम से किया जाएगा।सेवा तीर्थ से पीएम राहत की स्वीकृति और शुभारंभ नागरिक-प्रथम दृष्टिकोण का प्रतीक है — जहाँ सुशासन का अर्थ समयबद्ध कार्रवाई, करुणामय प्रतिक्रिया और जीवन की रक्षा से है। पीएम राहत किसी भी दुर्घटना पीड़ित का वित्तीय अड़चनों के कारण जीवनरक्षक उपचार से वंचित न रहना सुनिश्चित करते हुए सड़क दुर्घटना पीड़ितों का जीवन बचाने तथा भारत की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को सुदृढ़ करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। - नई दिल्ली। असम के मोरन बाईपास पर शनिवार को देश और क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक क्षण आया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर आपातकालीन लैंडिंग फैसिलिटी (ईएलएफ) का उद्घाटन किया। इस मौके पर स्थानीय लोगों ने इसे क्षेत्र और देश के लिए गौरव का क्षण बताया। उद्घाटन के बाद स्थानीय लोगों ने खुशी और गर्व जताया। एक निवासी ने कहा, “हमने सपने में भी नहीं सोचा था कि हमारे क्षेत्र में इतना बड़ा काम होगा। आज प्रधानमंत्री ने हमारी उम्मीदों से बढ़कर काम किया।” दूसरे व्यक्ति ने कहा, “देश की सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री ने यह सुविधा हमारे इलाके में बनाई है, हमें गर्व है।” तीसरे निवासी ने जोड़ा, “सड़क पर इस तरह का काम संभव है, यह हमने कभी सोचा नहीं था, लेकिन आज इसे अपनी आंखों से देखकर गर्व महसूस हो रहा है।”सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह सुविधा डिब्रूगढ़ जिला के मोरन क्षेत्र में विकसित की गई है और यह पूरे पूर्वोत्तर भारत की पहली ऐसी ईएलएफ है। उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री ने भारतीय वायु सेना का एयर शो भी देखा, जिसमें राफेल, सुखोई और मिग लड़ाकू विमानों ने हाईवे स्ट्रिप पर सफल टेक-ऑफ और लैंडिंग कर अपनी परिचालन क्षमता का प्रदर्शन किया। अधिकारियों के अनुसार, मोरन ईएलएफ को इस तरह डिजाइन किया गया है कि आपात स्थिति या हवाई अड्डों के अनुपलब्ध होने पर यह वैकल्पिक लैंडिंग स्थल के रूप में काम कर सके। इससे सेंसिटिव सीमावर्ती क्षेत्रों के पास त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ेगी और राष्ट्रीय सुरक्षा तैयारियों को मजबूती मिलेगी। इस ऐतिहासिक अवसर को देखने के लिए करीब एक लाख लोग मौके पर मौजूद रहे। यह सुविधा पूर्वोत्तर में भारत की सैन्य संरचना और रणनीतिक मजबूती के लिए अहम कदम मानी जा रही है।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ब्रह्मपुत्र नदी पर बने आधुनिक कुमार भास्कर वर्मा सेतु का उद्घाटन किया। यह पुल गुवाहाटी को नॉर्थ गुवाहाटी से जोड़ता है और क्षेत्र की कनेक्टिविटी को नई गति देगा। करीब 2.86 किलोमीटर लंबा यह 6-लेन एक्स्ट्राडोज्ड प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट (पीएससी) पुल लगभग 3,030 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुआ है। यह पूर्वोत्तर भारत का पहला एक्स्ट्राडोज्ड पुल है। इसके चालू होने से गुवाहाटी और उत्तर-गुवाहाटी के बीच यात्रा समय घटकर मात्र 7 मिनट रह जाएगा। भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए पुल में बेस आइसोलेशन तकनीक का उपयोग किया गया है, जिसमें फ्रिक्शन पेंडुलम बेयरिंग्स लगाए गए हैं। हाई-परफॉर्मेंस स्टे केबल्स और ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम (बीएचएमएस) पुल की मजबूती और दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। बीएचएमएस रियल-टाइम निगरानी और शुरुआती क्षति पहचान में मदद करता है।
इससे पहले प्रधानमंत्री ने डिब्रूगढ़ जिले के मोरान में राष्ट्रीय राजमार्ग पर आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ईएलएफ) का उद्घाटन किया। यह पूरी तरह से पूर्वोत्तर क्षेत्र में अपनी तरह की पहली सुविधा है। उद्घाटन के बाद भारतीय वायुसेना ने भव्य एयर शो प्रस्तुत किया, जिसमें राफेल, सुखोई और मिग लड़ाकू विमान शामिल थे।अधिकारियों के अनुसार इस ऐतिहासिक अवसर को देखने के लिए करीब 1 लाख लोग मौजूद रहे। 4.2 किलोमीटर लंबा ईएलएफ स्ट्रेच सैन्य और नागरिक दोनों प्रकार के विमानों के लिए आपातकालीन रनवे के रूप में काम कर सकता है। यह डिब्रूगढ़ एयरपोर्ट या छाबुआ एयर फोर्स स्टेशन के अनुपलब्ध होने पर वैकल्पिक लैंडिंग विकल्प देगा और सीमावर्ती क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करेगा। -
नई दिल्ली। दिल्ली में उद्योग भवन मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ कर दिया गया है। यह बदलाव प्रधानमंत्री कार्यालय के ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट होने के अगले दिन किया गया।केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शुक्रवार को घोषणा की कि राष्ट्रीय राजधानी में उद्योग भवन मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बदलाव का उद्देश्य स्टेशन की पहचान को ‘सेवा तीर्थ’ भवन से जुड़े बड़े विजन के साथ जोड़ना है, जो केंद्रीय प्रशासनिक क्षेत्र में प्रतीकात्मक बदलाव का संकेत देता है। मौजूदा उद्योग भवन मेट्रो स्टेशन दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) नेटवर्क की येलो लाइन पर है। यह सेंट्रल दिल्ली के बीचों-बीच स्थित है और कई अहम सरकारी ऑफिसों को सेवा देता है। बड़े प्रशासनिक भवनों और मंत्रालयों के पास होने के कारण इसका नाम बदलने का महत्व और बढ़ जाता है। रोजाना सरकारी अधिकारी, कर्मचारी और विजिटर्स इस स्टेशन का उपयोग करते हैं। सेवा तीर्थ’ मेट्रो स्टेशन प्रधानमंत्री कार्यालय से थोड़ी ही दूरी पर स्थित है। शुक्रवार को प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम भी ‘सेवा तीर्थ’ रखा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सेवा का भाव भारत की आत्मा है और यही भारत की पहचान है। पीएम मोदी ने कहा कि “‘सेवा तीर्थ’ जनसेवा और नागरिकों के कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह कर्तव्य, करुणा और ‘भारत प्रथम’ के सिद्धांत के प्रति अटूट समर्पण का उज्ज्वल प्रतीक है।” उन्होंने उम्मीद जताई कि यह आने वाली पीढ़ियों को नि:स्वार्थ सेवा और सभी के कल्याण के प्रति प्रेरित करेगा।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों पर कैबिनेट कमेटी (सीसीईए) की बैठक में 18,509 करोड़ रुपए (अनुमानित) लागत वाले तीन रेलवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है।
सीसीईए के अनुसार, इन प्रोजेक्ट्स में कसारा–मनमाड (तीसरी और चौथी लाइन), दिल्ली–अंबाला (तीसरी और चौथी लाइन) और बल्लारी–होसपेटे (तीसरी और चौथी लाइन) शामिल हैं।बढ़ी हुई लाइन क्षमता से आवागमन में सुधार होगा, जिससे भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। ये मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स परिचालन को सुव्यवस्थित करने और भीड़भाड़ को कम करने के लिए तैयार किए गए हैं।सीसीईए ने बताया कि ये प्रोजेक्ट्स दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और कर्नाटक के 12 जिलों से होकर गुजरेंगे। इससे भारतीय रेलवे का नेटवर्क करीब 389 किलोमीटर बढ़ेगा। इन प्रोजेक्ट्स से 3,902 गांवों तक कनेक्टिविटी मजबूत होगी और लगभग 97 लाख लोगों को फायदा होगा।ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए भारत के विजन के अनुरूप हैं, जिसका उद्देश्य क्षेत्र के लोगों को व्यापक विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना और रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना है।सीसीईए ने बताया कि ये प्रोजेक्ट्स प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बनाए गए हैं, जिसमें एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से बहु-मार्गीय संपर्क और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इन प्रोजेक्ट्स से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी।प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देशभर के प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे भावली बांध, श्री घाटंदेवी, त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग, श्री माता वैष्णो देवी कटरा/श्रीनगर, हम्पी, बल्लारी किला, दारोजी स्लॉथ बियर अभयारण्य, तुंगभद्रा बांध, केंचनागुड्डा और विजया विट्टला मंदिर के लिए रेल संपर्क में सुधार होगा। सीसीईए ने बताया कि ये प्रोजेक्ट्स कोयला, इस्पात, लौह अयस्क, सीमेंट, चूना पत्थर/बॉक्साइट, कंटेनर, खाद्यान्न, चीनी, उर्वरक, तेल आदि के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण हैं।क्षमता वृद्धि कार्यों से प्रति वर्ष 96 मिलियन टन की अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता प्राप्त होगी। रेलवे पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा कुशल होने के कारण जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की रसद लागत कम करने में सहायक होगा। इसके अलावा, ये प्रोजेक्ट्स तेल आयात (22 करोड़ लीटर) कम करेंगे और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन (111 करोड़ किलोग्राम) घटाएंगे, जो लगभग 4 करोड़ वृक्षारोपण के बराबर है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने शहरी चुनौती कोष (Urban Challenge Fund – UCF) को मंजूरी दी है। इसके तहत शहरों में उच्च गुणवत्ता वाले इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण के लिए कुल एक लाख करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता प्रदान की जाएगी।
कैबिनेट ने बताया कि यह कोष बाजार वित्त, निजी भागीदारी और नागरिक-केंद्रित सुधारों का लाभ उठाकर उच्च गुणवत्ता वाले शहरी बुनियादी ढांचे के निर्माण को प्रोत्साहित करेगा। इसका उद्देश्य लचीले, उत्पादक, समावेशी और जलवायु-अनुकूल शहर तैयार करना है, ताकि शहर देश के आर्थिक विकास के अगले चरण के प्रमुख चालक बन सकें।शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की लागत का 25 प्रतिशत हिस्सा केंद्रीय सहायता के रूप में दिया जाएगा, बशर्ते परियोजना लागत का न्यूनतम 50 प्रतिशत हिस्सा बाजार से जुटाया गया हो। इस पहल से अगले पांच वर्षों में शहरी क्षेत्र में कुल चार लाख करोड़ रुपए का निवेश होने का अनुमान है। यह अनुदान आधारित वित्तपोषण से हटकर बाजार-संलग्न, सुधार-उन्मुख और परिणाम-उन्मुख इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण की दिशा में भारत के शहरी विकास दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव दर्शाता है।कैबिनेट ने बताया कि यह कोष वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक परिचालन में रहेगा, और इसकी कार्यान्वयन अवधि वित्त वर्ष 2033-34 तक बढ़ाई जा सकती है। परियोजनाओं का चयन परिवर्तनकारी प्रभाव, स्थिरता और सुधार-उन्मुखीकरण जैसे मानदंडों के आधार पर किया जाएगा। कोष का आवंटन सुधारों, लक्ष्यों और स्पष्ट रूप से परिभाषित परिणामों से जुड़ा होगा, और सुधारों की निरंतरता आगे कोष जारी करने की पूर्व शर्त होगी। आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के एकल डिजिटल पोर्टल के माध्यम से परियोजनाओं और सुधारों की कागजरहित निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। ( -
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शनिवार को नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक से ‘सेवा तीर्थ’ व ‘कर्तव्य भवनों’ में स्थानांतरण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि साउथ ब्लॉक में अंतिम बार केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई। उन्होंने कहा कि यह केवल स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि इतिहास और भविष्य के संगम का क्षण है। इस परिसर ने गुलामी से आजादी और स्वतंत्र भारत की अनेक ऐतिहासिक घटनाओं को देखा और गढ़ा है।
मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि नरेंद्र मोदी की ओर से नया प्रधानमंत्री कार्यालय, जिसे ‘सेवा तीर्थ’ नाम दिया गया है, राष्ट्र को समर्पित किया गया है। उन्होंने कहा कि साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक का निर्माण अंग्रेजों ने भारत को गुलामी की बेड़ियों में जकड़े रखने के उद्देश्य से किया था। 1947 में स्वतंत्रता मिलने के बाद भी इन भवनों का उपयोग प्रशासनिक कार्यों के लिए जारी रहा और स्वतंत्रता के बाद से प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक से संचालित होता रहा।उन्होंने कहा कि इस परिसर ने देश के 16 प्रधानमंत्रियों के नेतृत्व में हुई कैबिनेट बैठकों के महत्वपूर्ण फैसले देखे हैं। इन सीढ़ियों पर जवाहरलाल नेहरू से लेकर नरेंद्र मोदी तक के पदचिन्ह रहे हैं, जिनके निर्णयों ने देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में योगदान दिया। दशकों से यहां संविधान के आदर्शों, जनादेश और राष्ट्र की आकांक्षाओं से प्रेरित होकर अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।अश्विनी वैष्णव ने कहा कि साउथ ब्लॉक के इन कमरों ने विभाजन की त्रासदी, युद्ध और आपातकाल जैसी चुनौतियों के साथ शांतिकाल की नीतियों पर चिंतन भी देखा है। इस परिसर ने टाइपराइटर से डिजिटल गवर्नेंस तक तकनीक की लंबी यात्रा को महसूस किया है। यहां लिए गए फैसलों ने देश को स्वतंत्रता के बाद की अनिश्चितता से निकालकर स्थिरता की राह पर आगे बढ़ाया।उन्होंने कहा कि बीते एक दशक में यह परिसर कई ऐतिहासिक निर्णयों का केंद्र रहा। यहीं से डीबीटी, स्वच्छ भारत अभियान, डिजिटल इंडिया और जीएसटी जैसे व्यापक सुधारों को गति मिली। इसी स्थान से आर्टिकल-370 से संबंधित निर्णय, तीन तलाक कानून, सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक जैसे अहम फैसले लिए गए, जिन्होंने भारत की दृढ़ सुरक्षा नीति का संदेश दिया।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विकसित भविष्य की दिशा में बढ़ते भारत को एक आधुनिक, तकनीकी और पर्यावरण-अनुकूल कार्यालय की आवश्यकता थी, जो कर्मयोगियों की उत्पादकता बढ़ाए और सेवाभाव को सशक्त करे। उन्होंने बताया कि साउथ ब्लॉक के उद्घाटन के लगभग 95 वर्ष बाद सरकार ने इन भवनों को खाली कर ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवनों’ में स्थानांतरण किया है। यह कदम गुलामी के अतीत से विकसित भारत के भविष्य की ओर प्रतीकात्मक प्रगति है।मंत्रिमंडल ने यह भी संकल्प लिया कि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को ‘युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय’ का हिस्सा बनाया जाएगा। यह संग्रहालय भारत की हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ियों तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शनिवार को नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक से ‘सेवा तीर्थ’ व ‘कर्तव्य भवनों’ में स्थानांतरण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि साउथ ब्लॉक में अंतिम बार केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई। उन्होंने कहा कि यह केवल स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि इतिहास और भविष्य के संगम का क्षण है। इस परिसर ने गुलामी से आजादी और स्वतंत्र भारत की अनेक ऐतिहासिक घटनाओं को देखा और गढ़ा है। मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि नरेंद्र मोदी की ओर से नया प्रधानमंत्री कार्यालय, जिसे ‘सेवा तीर्थ’ नाम दिया गया है, राष्ट्र को समर्पित किया गया है। उन्होंने कहा कि साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक का निर्माण अंग्रेजों ने भारत को गुलामी की बेड़ियों में जकड़े रखने के उद्देश्य से किया था। 1947 में स्वतंत्रता मिलने के बाद भी इन भवनों का उपयोग प्रशासनिक कार्यों के लिए जारी रहा और स्वतंत्रता के बाद से प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक से संचालित होता रहा।उन्होंने कहा कि इस परिसर ने देश के 16 प्रधानमंत्रियों के नेतृत्व में हुई कैबिनेट बैठकों के महत्वपूर्ण फैसले देखे हैं। इन सीढ़ियों पर जवाहरलाल नेहरू से लेकर नरेंद्र मोदी तक के पदचिन्ह रहे हैं, जिनके निर्णयों ने देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में योगदान दिया। दशकों से यहां संविधान के आदर्शों, जनादेश और राष्ट्र की आकांक्षाओं से प्रेरित होकर अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।अश्विनी वैष्णव ने कहा कि साउथ ब्लॉक के इन कमरों ने विभाजन की त्रासदी, युद्ध और आपातकाल जैसी चुनौतियों के साथ शांतिकाल की नीतियों पर चिंतन भी देखा है। इस परिसर ने टाइपराइटर से डिजिटल गवर्नेंस तक तकनीक की लंबी यात्रा को महसूस किया है। यहां लिए गए फैसलों ने देश को स्वतंत्रता के बाद की अनिश्चितता से निकालकर स्थिरता की राह पर आगे बढ़ाया।उन्होंने कहा कि बीते एक दशक में यह परिसर कई ऐतिहासिक निर्णयों का केंद्र रहा। यहीं से डीबीटी, स्वच्छ भारत अभियान, डिजिटल इंडिया और जीएसटी जैसे व्यापक सुधारों को गति मिली। इसी स्थान से आर्टिकल-370 से संबंधित निर्णय, तीन तलाक कानून, सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक जैसे अहम फैसले लिए गए, जिन्होंने भारत की दृढ़ सुरक्षा नीति का संदेश दिया।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विकसित भविष्य की दिशा में बढ़ते भारत को एक आधुनिक, तकनीकी और पर्यावरण-अनुकूल कार्यालय की आवश्यकता थी, जो कर्मयोगियों की उत्पादकता बढ़ाए और सेवाभाव को सशक्त करे। उन्होंने बताया कि साउथ ब्लॉक के उद्घाटन के लगभग 95 वर्ष बाद सरकार ने इन भवनों को खाली कर ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवनों’ में स्थानांतरण किया है। यह कदम गुलामी के अतीत से विकसित भारत के भविष्य की ओर प्रतीकात्मक प्रगति है। मंत्रिमंडल ने यह भी संकल्प लिया कि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को ‘युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय’ का हिस्सा बनाया जाएगा। यह संग्रहालय भारत की हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ियों तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। -
नई दिल्ली। भारत के बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम को बड़ा प्रोत्साहन देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 (स्टार्टअप इंडिया एफओएफ 2.0) की स्थापना को मंजूरी दे दी है। इसके लिए कुल 10,000 करोड़ रुपए का कोष आवंटित किया गया है, जिसका मकसद देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए वेंचर कैपिटल जुटाना है।
इस योजना का उद्देश्य दीर्घकालिक घरेलू पूंजी जुटाकर, वेंचर कैपिटल इकोसिस्टम को मजबूत करते हुए और देश भर में नवाचार-आधारित उद्यमिता को समर्थन देकर भारत के स्टार्टअप सफर के अगले चरण को गति देना है।स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत शुरू की गई स्टार्टअप इंडिया एफओएफ 2.0, भारत को दुनिया के अग्रणी स्टार्टअप देशों में शामिल करने के लिए करीब एक दशक से जारी प्रयासों का परिणाम है। 2016 में पहल की शुरुआत के बाद से भारत के स्टार्टअप परिदृश्य में उल्लेखनीय बदलाव हुआ है। 500 से भी कम स्टार्टअप से बढ़कर अब उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा मान्यता प्राप्त 2 लाख से अधिक स्टार्टअप हो चुके हैं, जबकि 2025 में स्टार्टअप पंजीकरण की वार्षिक संख्या अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।स्टार्टअप इंडिया एफओएफ 2.0, स्टार्टअप्स के लिए फंड ऑफ फंड्स (एफएफएस 1.0) की सफलता को आगे बढ़ाएगा। एफएफएस 1.0 को 2016 में स्टार्टअप्स के लिए फंडिंग की कमी दूर करने और घरेलू वेंचर कैपिटल बाजार को गति देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। इसके तहत 10,000 करोड़ रुपए की पूरी राशि 145 वैकल्पिक निवेश फंडों (एआईएफ) को आवंटित की गई थी। इन समर्थित एआईएफ ने कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, ऑटोमोटिव, क्लीन टेक, ई-कॉमर्स, शिक्षा, फिनटेक, स्वास्थ्य सेवा, विनिर्माण, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी सहित कई क्षेत्रों के 1,370 से अधिक स्टार्टअप्स में 25,500 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश किया।स्टार्टअप इंडिया एफओएफ 2.0 लक्षित और खंडित वित्तपोषण दृष्टिकोण अपनाएगा। इसके तहत डीप टेक और तकनीक-आधारित नवोन्मेषी विनिर्माण क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां दीर्घकालिक पूंजी की आवश्यकता होती है। प्रारंभिक विकास चरण के संस्थापकों को समर्थन देकर नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा और वित्तीय कमी के कारण होने वाली प्रारंभिक विफलताओं को कम करने का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही निवेश को प्रमुख महानगरों से आगे बढ़ाकर देशव्यापी पहुंच सुनिश्चित करने, उच्च जोखिम वाले पूंजी अंतर को कम करने और घरेलू वेंचर कैपिटल आधार, विशेष रूप से छोटे फंडों, को मजबूत करने पर भी जोर रहेगा।स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 से भारत के नवाचार-आधारित विकास एजेंडा को मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह फंड वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रौद्योगिकियों और उत्पादों का निर्माण करने वाले स्टार्टअप्स को समर्थन देकर आर्थिक मजबूती, विनिर्माण क्षमता और उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार सृजन में योगदान देगा। विकसित भारत @ 2047 के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप यह पहल उद्यमियों को सशक्त बनाने और देश की स्टार्टअप व्यवस्था की पूरी क्षमता को सामने लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।






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