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नयी दिल्ली. प्रश्नपत्र लीक होने के कारण तीन मई को हुई परीक्षा रद्द किए जाने के बाद, लाखों मेडिकल अभ्यर्थी रविवार को राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) की पुनर्परीक्षा में दूसरी बार शामिल हुए। यह मुद्दा सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था और इसके खिलाफ व्यापक जन आंदोलन भी शुरू हो गया था।
अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने यह परीक्षा भारत के 551 शहरों में 5,440 केंद्रों और विदेशों में 14 केंद्रों पर आयोजित की। उन्होंने बताया कि परीक्षा में किसी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए 51,311 जैमर लगाये गये थे।
इससे पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिल्ली के ओखला स्थित एनटीए मुख्यालय में नीट-यूजी पुनर्परीक्षा के सुचारु संचालन की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। शिक्षा मंत्रालय ने कहा, ''एनटीए ने मंत्री को परीक्षा के कुशल और पारदर्शी ढंग से संचालन के लिए की गई तकनीकी व्यवस्थाओं की जानकारी दी।'' पुनर्परीक्षा अपराह्न दो बजे शुरू हुई जो शाम 5.15 बजे तक चली। दिव्यांग अभ्यर्थियों को परीक्षा के लिए शाम 6:20 बजे तक अनुमति दी गई। परीक्षा अंग्रेजी और 12 भारतीय भाषाओं में आयोजित की गई।
मध्य प्रदेश में पुनर्परीक्षा देने के बाद एक अभ्यर्थी ने बताया, "प्रश्नपत्र अच्छा था और इस बार की व्यवस्थाएं कहीं बेहतर थीं, विशेषकर पहचान सत्यापन की व्यवस्था।" अभ्यर्थी ने कहा, "हालांकि दोबारा परीक्षा देना थोड़ा असामान्य लगा, लेकिन पुनः परीक्षा ने चयन का एक और अवसर दिया, जिससे आत्मविश्वास और उम्मीद की भावना भी बनी रही।" एक अन्य अभ्यर्थी ने कहा, "प्रश्नपत्र बहुत लंबा था और उम्मीद से अधिक कठिन था। मेरा पिछला प्रयास ठीक रहा था, लेकिन इस बार परीक्षा उतनी अच्छी नहीं गई।" बेंगलुरु में परीक्षा केंद्र से बाहर निकलते समय एक अभ्यर्थी ने कहा कि केवल भौतिकी का खंड कठिन था, जबकि अन्य सभी खंड अपेक्षाकृत आसान थे। अभ्यर्थी ने कहा, ''हमें प्रश्न पढ़ने और समस्याओं को हल करने के लिए अधिक समय मिला, जिससे मुझे अपना प्रदर्शन बेहतर करने में मदद मिली।'' हालांकि कुछ अभ्यर्थियों और उनके परिजनों ने परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में आने वाली यात्रा संबंधी कठिनाइयों को उठाया। भोपाल में दो अभ्यर्थियों को देर से पहुंचने के कारण परीक्षा केंद्र में प्रवेश से वंचित कर दिया गया। अभ्यर्थियों में से एक के चाचा आमिर कादरी ने कहा, ''मैं अपने भतीजे के साथ उसकी परीक्षा के लिए यहां आया हूं। परीक्षा केंद्र जाते समय हम दुर्घटना का शिकार हो गए और हमें थोड़ी देर हो गई, क्योंकि मेरे भतीजे को प्राथमिक उपचार दिया गया। अब जब हम यहां पहुंच चुके हैं, तो हमें प्रवेश से वंचित किया जा रहा है। अधिकारी कह रहे हैं कि परीक्षा शुरू हो चुकी है और हमें प्रवेश की अनुमति देना संभव नहीं होगा।'' भारी बारिश ने कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों को प्रभावित किया, जिससे शहर के कई हिस्सों में जलभराव हो गया और यातायात व्यवस्था बाधित हो गई। कोलकाता में एक घायल अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र पर अलग कक्ष दिया गया, साथ ही चिकित्सा सहायता और एक एम्बुलेंस की व्यवस्था भी की गई। अभ्यर्थी सृष्टि दुबे 14 जून को एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गई थीं और उन्होंने विशेष व्यवस्था के लिए अधिकारियों से सहायता मांगी थी। प्रधान ने व्यक्तिगत रूप से अभ्यर्थी के माता-पिता से बात की, जिन्होंने एनटीए और अधिकारियों द्वारा दी गई सहायता के लिए आभार व्यक्त किया। मुंबई में, कर्मचारियों की जारी हड़ताल के बीच बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति एवं यातायात (बेस्ट) ने पुनर्परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के लिए विशेष बस सेवाओं की व्यवस्था की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोलकाता से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचने के बाद अपने आवास की ओर प्रस्थान को कुछ समय के लिए टाल दिया ताकि नीट पुनर्परीक्षा देने वाले किसी भी अभ्यर्थी को यातायात पाबंदियों के कारण असुविधा नहीं हो। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री अपराह्न लगभग एक बजे हवाई अड्डे पहुंचे, लेकिन वहां से तुरंत लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने आवास रवाना होने के बजाय वहीं रुके रहे। गुजरात में कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट)-स्नातक 2026 शुरू हुई। परीक्षा को सुचारू और निष्पक्ष ढंग से आयोजित करने के लिए गुजरात पुलिस ने परीक्षा केंद्रों पर ड्रोन और सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया था। गुजरात पुलिस के अनुसार, राज्य में 211 केंद्रों पर लगभग 79,400 अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल हुए।
अधिकारियों ने बताया कि रविवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बिहार में लाखों अभ्यर्थी नीट-यूजी पुनर्परीक्षा में शामिल हुए। पटना के जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने परीक्षा से पहले पत्रकारों से कहा, ''परीक्षा के लिए सर्वोत्तम व्यवस्थाएं की गई हैं।'' दिल्ली में पुनः परीक्षा दे रहे अभ्यर्थी किशन ने कहा कि इस बार सुरक्षा व्यवस्था पहले की परीक्षा की तुलना में अधिक सख्त है। उन्होंने कहा, ''पिछले एक महीने में बहुत कुछ हुआ है। मैंने जितनी हो सके उतनी तैयारी की है, और अब मैं सिर्फ परीक्षा देना चाहता हूं। मुझे बस यही उम्मीद है कि परीक्षा निष्पक्ष रूप से आयोजित हो।'' दिल्ली में नीट अभ्यर्थी सोनिया ने कहा कि वह इस बार पहले की परीक्षा की तुलना में अधिक तनाव महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा, ''अगर पिछली बार भी ऐसी सुरक्षा व्यवस्था होती, तो प्रश्नपत्र लीक होने की आशंका कम होती और विद्यार्थियों को इतनी परेशानी नहीं झेलनी पड़ती।'' ओडिशा में अभ्यर्थी पार्थसारथी राउत ने कहा कि वह मेडिकल कॉलेज में दाखिला पाने के लिए पुनर्परीक्षा में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करेंगे। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ओडिशा में हजारों अभ्यर्थियों ने नीट-यूजी पुनर्परीक्षा दी।
अधिकारियों ने बताया कि पुनर्परीक्षा राज्यभर में 130 से अधिक केंद्रों पर आयोजित की गई। उन्होंने बताया कि परीक्षा के सुचारु संचालन को सुनिश्चित करने के लिए सभी केंद्रों के बाहर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। वहीं, एक खबर में कहा गया कि बुर्का पहने एक नीट अभ्यर्थी ने आरोप लगाया कि उसे राजस्थान के अजमेर में स्थित एक परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया गया। अभ्यर्थी कुलसुम बानो ने दावा किया कि वह पहले की परीक्षा में भी शामिल हुई थीं।
उन्होंने कहा, ''मैं नीट परीक्षा देने के लिए ब्यावर से आई हूं। जब मैंने तीन मई को परीक्षा दी थी, तब भी मैं इसी तरह के कपड़े पहनकर आई थी-बुर्का और दुपट्टा। पहले उन्होंने कहा कि प्रवेश के लिए मुझे दुपट्टा हटाना होगा; फिर उन्होंने यह भी कहा कि मुझे बुर्का भी हटाना पड़ेगा।" बानो ने कहा, ''अगर एनटीए ने हमें अनुमति दी है, तो ये लोग हमें नहीं रोक सकते... अगर मुझे परीक्षा देनी है और वे मुझे इस पोशाक में अंदर नहीं जाने देते, तो मैं परीक्षा ही नहीं दूंगी।'' उन्होंने कहा, ''मेरे लिए परीक्षा मायने नहीं रखती; मेरे लिए मेरा 'बुर्का' और मेरी पहचान मायने रखती है।'' बाद में, एनटीए ने स्पष्ट किया कि अभ्यर्थी को प्रवेश की अनुमति दे दी गई।
अहमदाबाद में नीट-यूजी पुनर्परीक्षा के एक केंद्र के बाहर उस समय थोड़ी देर के लिए हंगामा हुआ जब कुछ अभिभावकों ने तलाशी के दौरान 'कंठी' (पवित्र धागा) हटाए जाने पर आपत्ति जताई, जबकि हिजाब पहनी छात्राओं को अंदर जाने की अनुमति दी गई थी। पुलिस ने यह जानकारी दी। बाद में पुलिस ने परीक्षा केंद्र के बाहर एकत्र अभिभावकों और समूहों के सदस्यों को एनटीए के ड्रेस कोड संबंधी दिशा-निर्देश समझाए, जिसके बाद यह मामला सुलझ गया। राजस्थान में नीट-यूजी की पुनर्परीक्षा कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित हुई।
रविवार को व्यापक सुरक्षा व्यवस्था और एनटीए के दिशा-निर्देशों के कड़े पालन के बीच कोटा के 92 परीक्षा केंद्रों पर नीट पुनर्परीक्षा शांतिपूर्ण और सुचारु रूप से आयोजित की गई। कोटा के जिलाधिकारी पीयूष समारिया के अनुसार, परीक्षा के निष्पक्ष और पारदर्शी संचालन को सुनिश्चित करने के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई थीं। इसके तहत शहर में स्थानीय पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की तैनाती की गई थी। एमबीबीएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए नीट-यूजी पुनर्परीक्षा रविवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच झारखंड में शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित की गई। राज्यभर में कुल 67 केंद्र स्थापित किए गए थे, जहां लगभग 30,000 अभ्यर्थियों ने पुनः परीक्षा दी। रांची के पुलिस अधीक्षक (नगर) पारस राणा ने बताया कि सभी 21 केंद्रों पर पुनः परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित की गई। -
नई दिल्ली। 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में योग को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। इस बार का आयोजन कई मायनों में खास रहा क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए और लोगों के साथ योगाभ्यास किया। इस अवसर पर भाजपा नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने इसे पश्चिम बंगाल और खासकर कोलकाता के लिए गौरव का क्षण बताया।
पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री निसिथ प्रमाणिक ने कहा कि पहली बार कोलकाता में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस इतने भव्य स्तर पर मनाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी इस आयोजन को और भी विशेष बनाती है। यह पश्चिम बंगाल के हर युवा और हर नागरिक के लिए गर्व की बात है कि प्रधानमंत्री स्वयं यहां आकर सभी के साथ योग कर रहे हैं।पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री शंकर घोष ने कहा कि योग को वैश्विक पहचान दिलाने में प्रधानमंत्री मोदी का सबसे बड़ा योगदान रहा है। उनके प्रयासों की वजह से आज पूरी दुनिया योग के महत्व को समझ रही है और इसे अपने जीवन का हिस्सा बना रही है। वहीं, मंत्री मनोज कुमार उरांव ने कहा कि योग हमारी प्राचीन परंपरा और संस्कृति का हिस्सा रहा है। यह हमारे पूर्वजों के समय से चला आ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी इसे एक बार फिर लोगों के बीच लोकप्रिय बना रहे हैं। खासकर युवा पीढ़ी को इससे जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जो एक बेहद सकारात्मक पहल है। भाजपा विधायक रितेश तिवारी ने इस दिन को कोलकाता के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि योग दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री की मौजूदगी और इस आयोजन का हिस्सा बनने का अवसर मिलना मेरे लिए बेहद गर्व की बात है। उधर, भाजपा सांसद खगेन मुर्मू ने भी खुशी जताते हुए कहा कि योग दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योगाभ्यास करने से लोगों में उत्साह बढ़ा है। उन्होंने जनता की ओर से प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया और इस आयोजन को बेहद महत्वपूर्ण बताया।( -
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार को राजधानी पटना समेत बिहार के अलग-अलग जिलों में सामूहिक योग शिविरों और विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों में आम नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया। उन्होंने उत्साहपूर्वक योग के विभिन्न आसनों का अभ्यास किया और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया।
पटना के पाटलिपुत्र खेल परिसर में आयोजित राज्यस्तरीय योग कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भाग लेकर योगाभ्यास किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और पूर्व मंत्री मंगल पांडेय समेत बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रदेशवासियों को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं दीं।उन्होंने कहा कि योग सिर्फ शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन, आत्मिक शांति और सकारात्मक जीवनशैली का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि योग भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत है, जिसने आज पूरे विश्व को स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने का मार्ग दिखाया है।मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर शेयर संदेश में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में योग को वैश्विक पहचान मिली और संयुक्त राष्ट्र की ओर से 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता प्रदान की गई। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भर में करोड़ों लोग योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाकर स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवन की ओर अग्रसर हो रहे हैं।इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने मुख्यमंत्री से बिहार के सभी स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में योग को शामिल करने का आग्रह किया। उन्होंने सुझाव दिया कि शिक्षण संस्थानों में प्रतिदिन आधे घंटे का योग, ध्यान और योग निद्रा सत्र आयोजित किया जाए। उन्होंने कहा कि इसे अनिवार्य नहीं बल्कि वैकल्पिक रखा जा सकता है, ताकि विद्यार्थी अपनी इच्छा के अनुसार इसमें भाग ले सकें।वहीं, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मुजफ्फरपुर में योगाभ्यास किया, जबकि बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने भागलपुर के सैंडिस कंपाउंड स्थित वशिष्ठ योग संस्था की ओर से आयोजित कार्यक्रम में भाग लेकर योग किया। उन्होंने कहा कि योग भारत की सनातन संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो शरीर, मन और आत्मा को संतुलित कर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।भागलपुर के कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे, विधायक रोहित पांडेय, विधान परिषद सदस्य एनके यादव और योग गुरु वशिष्ठ सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वक्ताओं ने लोगों से योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने और स्वस्थ, निरोग और खुशहाल जीवन के निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान किया। - नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने हिस्सा लिया और योगाभ्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि योग व्यक्ति को स्वयं और समाज से, समाज को प्रकृति से तथा संपूर्ण मानवता को विश्व चेतना से जोड़ने का सशक्त माध्यम है।समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने देशवासियों और विश्वभर के योग साधकों को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, “जबलपुर की पावन धरती पर उपस्थित होकर मुझे प्रसन्नता हो रही है। मैं देश-विदेश में सक्रिय सभी योग साधकों को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं देती हूं। आज हम भारत की उस महान परंपरा का उत्सव मना रहे हैं, जिसने मानवता को स्वस्थ, संतुलित और सार्थक जीवन का मार्ग दिखाया है। योग विश्व समुदाय के लिए हमारी सांस्कृतिक धरोहर का अमूल्य उपहार है। यह हमारे ऋषियों-मुनियों की हजारों वर्षों की साधना का परिणाम है।”राष्ट्रपति ने कहा, “हमारे शास्त्रों में शरीर, मन और आत्मा के संतुलन को जीवन की सफलता का आधार माना गया है। योग उसी संतुलन को स्थापित करने का मार्ग है। योग का शाब्दिक अर्थ है ‘जोड़ना’। यह व्यक्ति को स्वयं और समाज से, समाज को प्रकृति से तथा संपूर्ण मानवता को विश्व चेतना से जोड़ने का सशक्त माध्यम है।”उन्होंने कहा, “आज जब विश्व अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब योग मानवता को शांति, संतुलन, समरसता और सामूहिक कल्याण का मार्ग दिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्ष 2014 में भारत की पहल पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रति वर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की घोषणा की थी। इस पहल के बाद विश्व कल्याण के एक सशक्त माध्यम के रूप में योग की पहचान और अधिक मजबूत हुई है। आज दुनिया के अनेक देशों में करोड़ों लोग योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना रहे हैं।”राष्ट्रपति ने कहा कि इस महीने अहमदाबाद में आयोजित प्रथम ‘वर्ल्ड योगासन एक्सपर्ट चैंपियनशिप’ भी योग की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता का एक उदाहरण है, जिसमें कई देशों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा, “जब मैं विदेश यात्राओं पर जाती हूं, तो वहां के लोग योग के बारे में पूछते हैं। कई देशों में नियमित रूप से योगाभ्यास किया जाता है। यह भारत की पहल और योग की वैश्विक लोकप्रियता का प्रमाण है।इस वर्ष की थीम ‘योग फॉर हेल्दी एजिंग’ है। यह थीम वरिष्ठ नागरिकों के स्वस्थ, सक्रिय, आत्मनिर्भर और गरिमापूर्ण जीवन के लिए योग की उपयोगिता को रेखांकित करती है। आज हम जो जीवनशैली अपनाते हैं, वही भविष्य में हमारे स्वास्थ्य और सुख का आधार बनती है। योग बढ़ती आयु में भी सक्रिय और आत्मनिर्भर बने रहने में सहायक है।”
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नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई दिग्गज नेताों ने शुभकामनाएं दी हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सतत प्रयासों और दूरदर्शी नेतृत्व के परिणामस्वरूप भारत की यह सांस्कृतिक विरासत आज एक वैश्विक जन-आंदोलन बन चुकी है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। योग केवल स्वस्थ शरीर का आधार नहीं है, बल्कि संतुलित और संयमित जीवन जीने का मार्ग है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सतत प्रयासों और दूरदर्शी नेतृत्व के परिणामस्वरूप भारत की यह सांस्कृतिक विरासत आज एक वैश्विक जन-आंदोलन बन चुकी है।”उन्होंने आगे लिखा, “योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की उस शक्ति का प्रतीक है, जो सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर रही है। आइए, इस योग दिवस पर हम सभी स्वस्थ शरीर, शांत मन और सशक्त राष्ट्र के निर्माण के लिए योग को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का संकल्प लें।”गृह मंत्री अमित शाह ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “समस्त देशवासियों को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। योगाभ्यास से निरोगी काया, शांत मन और धैर्यपूर्ण जीवन की प्राप्ति होती है। यह व्यायाम के साथ-साथ जीवन को संतुलित और सकारात्मक बनाने का मार्ग भी है। मोदी जी के नेतृत्व में आज योग पूरे विश्व में एक जीवनशैली के रूप में अपनाया जा रहा है। आइए, संकल्प लें कि योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर स्वस्थ, सशक्त और संतुलित जीवन की ओर अग्रसर हों।”केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए लिखा, “योग सिर्फ व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर, शांत मन और संतुलित जीवन का आधार है। आइए, योग को अपनाकर निरोग, ऊर्जावान और सकारात्मक भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।”कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लिखा, “अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं और योग साधकों को सादर प्रणाम। योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का सशक्त माध्यम है। यह हमें स्वस्थ तन, प्रसन्न मन और सकारात्मक जीवन की दिशा प्रदान करता है। भारतीय संस्कृति की इस अमूल्य धरोहर ने आज संपूर्ण विश्व को स्वास्थ्य और कल्याण का मार्ग दिखाया है।”शिवराज सिंह चौहान ने आगे लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से योग को वैश्विक पहचान मिली और आज यह विश्वभर में स्वस्थ जीवनशैली का अभिन्न अंग बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आइए, हम सभी संकल्प लें कि योग को केवल एक दिवस का आयोजन नहीं, बल्कि अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएंगे। रोज योग करें, निरोग रहें।”भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की सभी को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लिखा, “योग भारतीय ऋषियों द्वारा विश्व को दिया गया वह अमूल्य उपहार है, जो तन और मन के संतुलन के साथ आत्मिक शांति का मार्ग प्रशस्त करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के प्रयासों से आज योग एक वैश्विक जन-आंदोलन बन चुका है। आइए, ‘स्वस्थ भारत, सशक्त भारत’ के संकल्प के साथ योग को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं।” -
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर योग को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। जम्मू में युवाओं की भागीदारी के साथ एक अनोखे अंडरवॉटर योग सत्र का आयोजन किया गया, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया। इस विशेष कार्यक्रम में युवाओं ने पानी के भीतर योगाभ्यास कर फिटनेस, मानसिक संतुलन और तैराकी कौशल का अनूठा संगम प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के दौरान योग प्रशिक्षक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग को पूरी दुनिया तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने कहा कि योग जीवन का एक महत्वपूर्ण कौशल है, जो व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाता है। योग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे कहीं भी और किसी भी समय किया जा सकता है। इसके लिए किसी विशेष स्थान या निश्चित समय की आवश्यकता नहीं होती। लोग अपने घरों में भी नियमित रूप से योग कर सकते हैं।वहीं, श्रीनगर में भी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बड़ी संख्या में लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विभिन्न आयु वर्ग के लोगों ने एक साथ योगाभ्यास कर स्वास्थ्य और फिटनेस के प्रति अपनी जागरूकता दिखाई। कार्यक्रम में शामिल एक प्रतिभागी ने बताया कि योग के अनेक लाभ हैं और वह पिछले दो वर्षों से नियमित रूप से योग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवा सेवा एवं खेल विभाग के माध्यम से भी योग को बढ़ावा दिया जाता है। योग फेफड़ों को स्वस्थ रखने में मदद करता है और युवाओं को नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रखने में भी सहायक साबित होता है। एक अन्य प्रतिभागी ने कहा कि योग अच्छे स्वास्थ्य और संपूर्ण कल्याण के लिए बेहद लाभकारी है। उन्होंने बताया कि उनके स्कूल में प्रतिदिन योगाभ्यास कराया जाता है, जिससे बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर तरीके से होता है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार सुबह कोलकाता के रेड रोड पर आयोजित 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मुख्य कार्यक्रम में देश का नेतृत्व किया। राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पूरा विश्व और पूरा देश एक-दूसरे से जुड़ा हुआ नजर आ रहा है और यही तो योग की ताकत है। योग सबको जोड़ता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि 21 जून का ये दिन पृथ्वी के कुछ भूभाग पर साल में सबसे लंबी अवधि का दिन होता है और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कारण 21 जून का ये दिन विश्व के सबसे बड़े सामूहिक उत्सव का दिन बन गया है। कोलकाता के लोगों की सराहना करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ‘स्वच्छता से स्वागत’ यह एक अच्छी पहल है। इसके लिए जिस तरह कोलकाता में श्रम किया गया है, नागरिक कर्तव्य निभाया गया है, वह सभी देशवासियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा बन गया है।संपूर्ण मानव समुदाय को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए पीएम मोदी ने कहा, “विश्व के अलग-अलग हिस्सों से एक से एक अद्भुत तस्वीरें आ रही हैं। भारत में हिमालय से लेकर हिंद महासागर तक, पूर्वोत्तर और पूरब में बंगाल से लेकर पश्चिम में सौराष्ट्र तक पूरा देश योग की ऊर्जा से चैतन्य से भरा हुआ नजर आ रहा है। पूरा विश्व और पूरा देश एक-दूसरे से जुड़ा हुआ नजर आ रहा है और यही तो योग की ताकत है। योग सबको जोड़ता है।”पीएम मोदी ने इस दौरान पश्चिम बंगाल की महान विभूतियों को याद किया। उन्होंने कहा, “योग दिवस के अवसर पर आज बंगाल में होना बहुत ही विशेष है। बंगाल की ये पवित्र भूमि, जहां भगवान रामकृष्ण परमहंस जैसे सिद्ध संतों ने अवतार लिया, जहां से निकलकर स्वामी विवेकानंद ने पूरे विश्व को योग से परिचय कराया, जहां महर्षि अरविंद जैसे महान योगी ने जन्म लिया, लाहिड़ी महाशय जैसे महान योगियों ने जहां योग परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, आज उसी धरती पर सामूहिक योग का अनुभव एक अलग आध्यात्मिक अनुभूति दे रहा है।”इस अवसर पर पीएम मोदी ने गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर को भी याद किया। उन्होंने कहा, “बंगाल की धरती पर जन्मे गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर का मानना था कि मनुष्य की पहचान अलग-अलग रहने में नहीं, बल्कि अपने आस-पास की दुनिया से जुड़ने में है। यही जुड़ाव योग का मूल भाव है।उन्होंने महर्षि अरविंद के शब्दों को भी दोहराया। पीएम मोदी ने कहा, “महर्षि अरविंद भी कहते थे कि हमारा पूरा जीवन योग है, चाहे हमें इसका बोध हो या न हो। योग जब स्वभाव में आता है, तो वो मानवीय एकता का आधार बन जाता है। योग सिर्फ शारीरिक श्रम का साधन नहीं है, योग सिर्फ एक आयु वर्ग के लिए सीमित भी नहीं है। योग मानव के जीवन का, चेतना के साथ, ऊर्जा के साथ एक प्रकाश भी है।”पीएम मोदी ने कहा कि जब हम ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ की बात करते हैं, तो इसका अर्थ है कि हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास करें कि बढ़ती आयु मानव की क्षमता को सीमित न करे। योग मानव जीवन को निरंतर विकास और आत्मोन्नति की ओर प्रेरित कर सकता है।उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य यह होना चाहिए कि 40 साल की आयु में हम 20 साल की आयु की तुलना में अधिक लचीले हों। हमारा लक्ष्य यह होना चाहिए कि 50 साल की आयु में हम 30 साल की आयु की तुलना में अधिक ऊर्जावान हों। हमारा लक्ष्य यह होना चाहिए कि 70 साल की आयु में हम 50 साल की आयु की तुलना में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के प्रति अधिक प्रतिरोधक क्षमता रखते हों। यही वह क्षेत्र है, जहां योग हमारी सहायता कर सकता है।” -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के जन्मदिन पर शनिवार को उन्हें शुभकामनाएं दीं और कहा कि साहस, सादगी, विनम्रता तथा जनसेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता से भरी उनकी जीवन यात्रा देशभर के लोगों को प्रेरित करती है। भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति मुर्मू शनिवार को 68 वर्ष की हो गईं।
मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। साहस, सादगी, विनम्रता और जनसेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता से भरी उनकी जीवन यात्रा देशभर के लोगों को प्रेरित करती है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि मुर्मू ने सार्वजनिक जीवन में अपने कई वर्षों के दौरान राष्ट्र की उत्कृष्ट तरीके से सेवा की है और वह वंचित एवं हाशिये पर रह रहे लोगों के कल्याण के लिए विशेष रूप से समर्पित रही हैं। मोदी ने कहा कि भारत के विकास के प्रति मुर्मू का दृढ़ समर्पण बेहद प्रेरणादायक है।
उन्होंने कहा, ''मैं कामना करता हूं कि राष्ट्र की सेवा के लिए उन्हें लंबा और स्वस्थ जीवन मिले। मैं आज ओडिशा में आयोजित कार्यक्रम में उनसे मिलने को लेकर उत्साहित हूं।-file photo
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तारकेश्वर. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि पश्चिम बंगाल ''अपनी बेड़ियों से मुक्त हो गया है'' और विकास की एक नयी यात्रा पर निकल पड़ा है। मोदी ने कहा कि चुनाव के एक ही फैसले से आया बदलाव पूरे राज्य में साफ तौर पर देखा जा सकता है। तारकेश्वर में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने के बाद 'पश्चिमबंग दिवस' के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि बंगाल की हवा में अब एक ''नयी ताजगी'' महसूस की जा सकती है। मोदी ने कहा, ''चुनाव और सरकार गठन के बाद, आज मुझे पहली बार आपके बीच आने का सौभाग्य मिला है। बंगाल की हवा में अब एक नयी ताजगी है। ऐसा लगता है मानो बंगाल अब अपनी बेड़ियों से आजाद हो गया है और बंगाल का गौरव फिर से लौटने लगा है।'' विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि राज्य में हो रहा बदलाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया की ताकत को दिखाता है। उन्होंने कहा, ''बंगाल के लोगों के चेहरों पर चमक है और गांवों में खुशी और भरोसे का माहौल है... बंगाल में यह साफ दिखता है कि आपका एक वोट कैसे बदलाव ला सकता है।'' मोदी ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के काम में तेजी के लिए राज्य सरकार की कोशिशों का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने इस प्रक्रिया में रुकावट डाली थी। प्रधानमंत्री ने कहा, ''आपने देखा होगा कि पिछली सरकार ने सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन सौंपने के काम को रोक दिया था। मौजूदा सरकार के कार्यकाल में वह प्रक्रिया शुरू हो गई है।'' मोदी ने यह भी कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार और सरकारी धन के गबन के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बंटवारे के समय बंगाल का एक हिस्सा भारत के पास ही रहे, यह सुनिश्चित करने में उन्होंने निर्णायक भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा, ''जब पूरे बंगाल को पाकिस्तान का हिस्सा बनाने की कोशिशें हो रही थीं, तब कांग्रेस ने साजिश रचने वाली ताकतों के सामने घुटने टेक दिए थे। तभी श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी। बंटवारे के समय कांग्रेस ने बंगाल को बेसहारा छोड़ दिया था और आजादी के बाद तुष्टीकरण की राजनीति की।'' मोदी ने 20 जून के 'पश्चिमबंग दिवस' के ऐतिहासिक महत्व पर जोर दिया और कहा कि नयी पीढ़ी को उन हालात के बारे में पता होना चाहिए जिनकी वजह से यह राज्य बना। मोदी ने कहा, ''हमें बार-बार 'पश्चिमबंग दिवस' के महत्व को रेखांकित करने की आवश्यकता है। युवा पीढ़ी के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि उस दौरान क्या हुआ था।
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कोल्हापुर. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 12 वर्ष के कार्यकाल को स्वतंत्र भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान मिलेगा और उनके कार्यकाल को एक पुनरुत्थानशील राष्ट्र के निर्माण एवं विश्वभर में देश की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए याद किया जाएगा। शाह ने कहा कि पुनरुत्थानशील भारत के निर्माण और देश की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए नरेन्द्र मोदी के 12 वर्ष के कार्यकाल का अध्याय स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। शाह ने महाराष्ट्र के कोल्हापुर में देवी अंबाबाई मंदिर गलियारा परियोजना की शुरुआत करने के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, ''जब स्वतंत्र भारत का इतिहास लिखा जाएगा तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 12 वर्ष के कार्यकाल का अध्याय एक पुनरुत्थानशील भारत के निर्माण और दुनियाभर में देश की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए दर्ज किया जाएगा।'' उन्होंने कहा कि मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्ष में ऐसे कई काम पूरे हुए, जिन्हें कभी असंभव माना जाता था। शाह ने इस संदर्भ में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण, काशी विश्वनाथ गलियारे के पुनर्विकास, केदारनाथ और बदरीनाथ धामों में किए गए कार्यों तथा सोमनाथ एवं कामाख्या मंदिरों से जुड़ी परियोजनाओं का उल्लेख किया। शाह ने कहा कि ''विकास भी, विरासत भी'' के मंत्र के तहत देशभर में सांस्कृतिक पुनर्जागरण हो रहा है। उन्होंने अंबाबाई मंदिर गलियारे को भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक और कदम बताया। उन्होंने कहा कि 500 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना 28,058 वर्ग मीटर क्षेत्र में विकसित की जाएगी। इसके तहत सातवीं शताब्दी के ऐतिहासिक मंदिर को कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित सुरक्षा व्यवस्था, एलईडी प्रकाश व्यवस्था, विरासत दीर्घाओं, प्रकाश एवं ध्वनि कार्यक्रम, बहुउद्देश्यीय सभागार और अन्य सुविधाओं से लैस आधुनिक तीर्थस्थल में बदला जाएगा। शाह ने कहा कि महालक्ष्मी मंदिर और उसके आसपास स्थित 41 मंदिरों का पुरातत्व विभाग के परामर्श से संरक्षण किया जाएगा। उन्होंने परियोजना शुरू करने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और महाराष्ट्र सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा, ''जिन स्थानों में हमारा इतिहास, धर्म और संस्कृति बसती है, उनपर 1,500 करोड़ रुपये खर्च करना कोई बड़ी राशि नहीं है। ऐसे स्थान पूरे देश को प्रेरणा देते हैं।'' शाह ने कहा कि मोदी ने हाल में देश के सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनकर रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने बुनियादी ढांचे और विनिर्माण से लेकर सेमीकंडक्टर, क्वांटम इंजीनियरिंग, सॉफ्टवेयर और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी तक विभिन्न क्षेत्रों में भारत को मजबूत बनाने का श्रेय मोदी को दिया। शाह ने चंद्रयान-3 अभियान की सफलता को याद करते हुए कहा कि कभी भारतीयों को लगता था कि चंद्रमा बहुत दूर है, लेकिन मोदी ने चंद्रयान को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचाया और वहां 'शिव शक्ति बिंदु' स्थापित किया, जिससे हर भारतीय गौरवान्वित हुआ। शाह ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत का उल्लेख करते हुए कहा, ''कोल्हापुर की इस पवित्र भूमि से मैं पूरे विश्वास के साथ देशवासियों से कहना चाहता हूं कि बंगाल के लोगों ने हमें आशीर्वाद दिया है।'' उन्होंने कहा, ''हम उनके विश्वास के ऋणी हैं और एक-एक घुसपैठिये की पहचान करके उसे देश से बाहर निकालकर इस ऋण को चुकाएंगे।'' शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्ष में हर वह काम पूरा किया गया है, जिसे कभी असंभव माना जाता था। उन्होंने कहा कि मोदी ने हाल में देश के सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनकर रिकॉर्ड कायम किया है। शाह ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि उद्धव कांग्रेस की गोद में बैठे हैं और घुसपैठियों को वोट बैंक में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। शाह ने साथ ही उन्हें चेतावनी दी कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है। शिवसेना (उबाठा) में संभावित टूट की ओर इशारा करते हुए शाह ने कहा कि पहले लोगों को शिंदे-नीत गुट का अलग से जिक्र करना पड़ता था, लेकिन अब कोई गुट नहीं बचा है और केवल एक ही शिवसेना है, जिसके प्रमुख एकनाथ शिंदे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि शिवसेना (उबाठा) संकट का सामना कर रही है तथा कम से कम छह लोकसभा सदस्यों ने ठाकरे के खिलाफ बगावत कर दी है और उनके सत्तारूढ़ शिवसेना में शामिल होने की संभावना है। शाह ने कहा, ''कांग्रेस नेता और कांग्रेस की गोद में बैठे उद्धव जी घुसपैठियों को वोट बैंक में बदलकर अपना अस्तित्व बनाए रखना चाहते हैं। मैं उन्हें स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि यह देश कोई धर्मशाला नहीं है। यहां केवल वही लोग रहेंगे जो इस देश के हैं।'' उन्होंने कहा कि हर घुसपैठिये की पहचान की जाएगी और उसे देश से बाहर निकाला जाएगा।
शाह ने कोल्हापुर के प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर में ''परिवार देवता मंदिर'' के संरक्षण कार्य के साथ-साथ नये प्रदक्षिणा मार्ग का शिलान्यास भी किया। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए केंद्रीय मंत्री शाह, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे एक ही कार में सवार होकर मंदिर पहुंचे। देवी महालक्ष्मी के दर्शन करने के बाद शाह ने मंदिर परिसर में विभिन्न विकास कार्यों का उद्घाटन किया। उन्होंने मंदिर परिसर में 'पश्चिम महाराष्ट्र मंदिर विकास योजना' के तहत जारी विकास परियोजनाओं की समीक्षा भी की। उन्होंने करवीर निवासिनी श्री अंबाबाई महालक्ष्मी मंदिर विकास योजना के तहत संरक्षण, रखरखाव और विकास के विभिन्न कार्यों का उद्घाटन किया। राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत महालक्ष्मी मंदिर विकास महायोजना को कोल्हापुर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इस योजना में बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने, विरासत के संरक्षण, श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने और पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। राज्य मंत्रिमंडल ने पिछले वर्ष हुई बैठक में श्री करवीर निवासिनी महालक्ष्मी अंबाबाई देवस्थान क्षेत्र विकास योजना के लिए कुल 1,445 करोड़ रुपये मंजूर किए थे। परियोजना के पहले चरण में 143 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को मंजूरी दी गई। इनमें पुरातत्व विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप मूल मंदिर का संरक्षण, रखरखाव और जीर्णोद्धार शामिल है। मुख्य मंदिर के संरक्षण के साथ बिजली, सीसीटीवी कैमरे और प्रकाश व्यवस्था से संबंधित कार्य फिलहाल जारी हैं। परियोजना के लिए कुल 28,000 वर्ग मीटर भूमि चिह्नित की गई है। अधिकारियों के अनुसार, विकास महायोजना से श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलने और कोल्हापुर के धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन क्षेत्रों के विकास को नयी दिशा मिलने की उम्मीद है। -
रायरंगपुर. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि पूर्वी भारत कांग्रेस के शासनकाल के दौरान पिछड़ा हुआ रहा और अब यह प्रगति तथा विकास के प्रवेश द्वार के रूप में उभर रहा है। ओडिशा में मयूरभंज जिले के रायरंगपुर में 47,600 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करने के बाद मोदी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य विकास के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ रहा है और कल्याणकारी योजनाएं गरीबों के जीवन में बदलाव ला रही हैं। उन्होंने कहा, ''पूर्वी भारत कांग्रेस के शासनकाल के दौरान पिछड़ा हुआ रहा और अब यह प्रगति तथा विकास के प्रवेश द्वार के रूप में उभर रहा है।'' मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार का नजरिया पूर्वी भारत के विकास के माध्यम से देश का विकास करना है और सरकार 'पूर्वोदय' नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा, ''ओडिशा विकास के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र का दृष्टिकोण पूर्वी भारत के विकास के माध्यम से भारत का विकास करना है। इसीलिए हम 'पूर्वोदय' नीति पर काम कर रहे हैं।'' मोदी ने कहा कि भाजपा सरकार ओडिशा के संसाधनों को संभावनाओं में बदल रही है और अब तक लगभग 20 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को उनके जन्मदिन पर शुभकामनाएं देते हुए मोदी ने कहा कि उन्होंने (मुर्मू) ओडिशा की पहचान को और मजबूत किया है।
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चेन्नई. तमिलनाडु की सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार ने मंदिरों के कोष से पूरी की जाने वाली 246 करोड़ रुपये की पिछली द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सरकार की परियोजनाएं रद्द कर दी हैं। एक अधिकारी ने शनिवार को कहा कि इस कदम से तमिलनाडु हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के नियंत्रण वाले मंदिरों को वित्तीय संकट में जाने से बचाने में भी मदद मिलेगी। एक सूत्र ने बताया कि अब तक प्रमुख प्राचीन मंदिरों से होने वाली आय का इस्तेमाल वंचित वर्गों के लोगों के विवाह कराने, विवाह भवनों और बड़े व्यावसायिक परिसरों के निर्माण जैसी सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लिए किया जाता था जबकि मंदिर पट्टे पर दी गई अपनी जमीन और दुकानों को वापस हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहे थे। 'हिंदू मुन्नानी' जैसे हिंदू संगठन मंदिरों के कोष का व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किए जाने और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लिए धन हस्तांतरित किए जाने का विरोध करते रहे हैं। टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता संभालने के बाद हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग ने मंदिरों के कोष से 29 विवाह भवन और 17 व्यावसायिक परिसर बनाने के लिए पिछली द्रमुक सरकार द्वारा दी गई प्रशासनिक मंजूरी 19 जून को रद्द कर दी। कुल 246 करोड़ रुपये की इन 46 परियोजनाओं की घोषणा तो की गई थी लेकिन इन पर काम शुरू नहीं हुआ था। एक अधिकारी ने कहा कि इस धन का इस्तेमाल मंदिरों और श्रद्धालुओं के हित में किया जाएगा।
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नई दिल्ली। कोलकाता में रविवार को आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मुख्य कार्यक्रम में नया रिकॉर्ड बन सकता है। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में करीब 10 लाख लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ योगाभ्यास करेंगे। यह जानकारी आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने दी।
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि पहली बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य कार्यक्रम कोलकाता में आयोजित हो रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत को लेकर लोगों में काफी उत्साह है। उन्होंने बताया कि 20 जून को एक भव्य कार्निवल और ड्रोन शो का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा विश्व रिकॉर्ड बनाने के प्रयास के तहत लगभग 500 नावों की विशेष गतिविधि भी आयोजित की जाएगी।वैद्य राजेश कोटेचा ने बताया कि रविवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कार्यक्रम का नेतृत्व करेंगे। मुख्य आयोजन स्थल पर करीब 35 हजार लोग एकत्रित होंगे, जबकि पूरे कोलकाता में लगभग 10 लाख लोग प्रधानमंत्री के साथ योग करेंगे। उन्होंने कहा कि पोर्टल पर अब तक 7 लाख लोगों ने पंजीकरण कराया है और रात तक यह संख्या 10 लाख के करीब पहुंचने की उम्मीद है।आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव मोनालिसा दास ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य कार्यक्रम हर वर्ष अलग-अलग स्थानों पर आयोजित किया जाता है और सभी राज्य इसे अपने-अपने तरीके से उत्साह के साथ मनाते हैं। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को कोलकाता के चार स्थानों पर ‘रन फॉर योग’ का आयोजन किया गया, जिसमें 10 हजार लोगों ने भाग लिया। इसमें बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल रहे। इसके अलावा अन्य जिलों में भी ‘रन फॉर योग’ कार्यक्रम आयोजित किए गए।मोनालिसा दास ने बताया कि शनिवार को ड्रोन शो का आयोजन होगा। इसके बाद रविवार को कोलकाता के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर योग दिवस कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।योग गुरु और योग इन्फ्लुएंसर उमंग त्यागी ने कहा कि इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं योग कार्यक्रम में शामिल होंगे और उनके साथ योग करना गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि जब देश का नेतृत्व करने वाला व्यक्ति स्वयं आगे बढ़कर योग जैसे अभियान का हिस्सा बनता है, तो इससे लोगों को भी प्रेरणा मिलती है।उमंग त्यागी ने कहा कि इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ बेहद महत्वपूर्ण है। भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में शामिल है और यह समय स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने का बड़ा अवसर है। उन्होंने कहा कि यदि लोग अभी से अपने स्वास्थ्य और शरीर पर ध्यान देंगे तो भविष्य में बेहतर स्वास्थ्य के साथ देश के विकास में भी योगदान दे सकेंगे।एक योग प्रशिक्षक ने कहा कि अब योग केवल एक अभ्यास नहीं रह गया है, बल्कि यह एक जन-उत्सव का रूप लेता जा रहा है। उन्होंने कहा कि हर घर में योग को अपनाने की जरूरत है और कोलकाता में भी ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित होने चाहिए। ( -
नई दिल्ली। 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 से पहले देशभर में योग को लेकर अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। आयुष मंत्रालय के योग संगम पोर्टल पर पंजीकृत संगठनों की संख्या 6 लाख के आंकड़े को पार कर गई है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि योग अब केवल एक स्वास्थ्य अभ्यास नहीं, बल्कि जनभागीदारी का एक व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन बन चुका है।
21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय योग कार्यक्रम में देशभर के लाखों लोग एक साथ योग करेंगे। योग संगम पहल के तहत पंजीकृत संगठन अपने-अपने स्थानों पर सामूहिक योग सत्र आयोजित करेंगे और कॉमन योग प्रोटोकॉल का पालन करते हुए इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनेंगे।आयुष मंत्रालय के अनुसार, हाल के दिनों में पोर्टल पर पंजीकरण की रफ्तार तेज हुई है। स्कूल, कॉलेज, सरकारी संस्थान, निजी संगठन, गैर-सरकारी संस्थाएं और सामुदायिक समूह बड़ी संख्या में इस अभियान से जुड़ रहे हैं। योग संगम का उद्देश्य देश के हर कोने में योग को जन-जन तक पहुंचाना और इसे एक साझा राष्ट्रीय स्वास्थ्य आंदोलन के रूप में स्थापित करना है।योग संगम पोर्टल इस अभियान की डिजिटल रीढ़ बनकर उभरा है। इसके माध्यम से संगठन अपने कार्यक्रमों का पंजीकरण कर रहे हैं, आयोजन स्थलों की जानकारी साझा कर रहे हैं और प्रतिभागियों को जोड़ रहे हैं। यह मंच देशव्यापी समन्वय और व्यापक सहभागिता सुनिश्चित कर रहा है।यह पहल देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक पहुंच चुकी है और 778 जिलों को कवर कर रही है। आंकड़ों के अनुसार, 3.22 लाख से अधिक सरकारी संस्थानों, लगभग 2 लाख शैक्षणिक संस्थानों, 16 हजार से अधिक निजी संस्थानों, 5 हजार से अधिक गैर-सरकारी संगठनों तथा 44 हजार अन्य संगठनों ने पोर्टल पर पंजीकरण कराया है।राज्यों की बात करें तो पश्चिम बंगाल सबसे आगे है, जहां 2.76 लाख से अधिक संगठनों ने पंजीकरण कराया है। इसके बाद राजस्थान में लगभग 1.5 लाख पंजीकरण दर्ज किए गए हैं। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिल रही है।इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम “स्वस्थ आयु के लिए योग” रखी गई है। यह विषय जीवन के हर चरण में योग की उपयोगिता को रेखांकित करता है और स्वस्थ, सक्रिय तथा संतुलित जीवनशैली को बढ़ावा देने का संदेश देता है। - -हमारे युवाओं की आकांक्षा, कौशल और क्षमता ही विकसित भारत की दिशा तय करती हैं: पीएम-आने वाले वर्षों में भारत के युवा वैश्विक विकास, नवाचार और उद्यमिता को आगे बढ़ाने में सबसे आगे रहेंगे: पीएम-भारत अग्रिम पंक्ति में नेतृत्व करने के लिए तैयार है: पीएम-21वीं सदी में अवसर उन देशों को मिलेंगे, जो कुशल प्रतिभा को बढ़ावा देंगे, नवाचार को प्रोत्साहित करेंगे और गुणवत्ता के उच्चतम मानकों को बनाए रखेंगे: पीएम-वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए हमें गुणवत्ता के उच्चतम मानकों को पूरा करना होगा: पीएम
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना से जुड़े लाभार्थियों, उद्योग प्रतिनिधियों और हितधारकों को संबोधित किया और भारत के युवाओं को सशक्त बनाने तथा पूरे देश में रोजगार सृजन को तेज करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। श्री मोदी ने प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाई) के तहत लगभग 2,400 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि का वितरण किया, जो पीएम-वीबीआरवाई के कार्यान्वयन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। पीएम-वीबीआरवाई भारत सरकार की रोजगार से जुड़ी प्रमुख प्रोत्साहन योजना है, जो विभिन्न क्षेत्रों में सामाजिक सुरक्षा कवरेज का विस्तार कर रही है। इस प्रोत्साहन से पूरे देश में रोजगार के 15 लाख अवसरो के सृजन में मदद मिली है।
फ्रांस और स्लोवाकिया की अपनी यात्रा से लौटने के तुरंत बाद सभा को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के युवाओं को उनकी प्रतिभा, कौशल और क्षमता के लिए वैश्विक स्तर पर अभूतपूर्व पहचान मिल रही है। प्रधानमंत्री जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने और विश्व के राजनेताओं से विचार-विमर्श करने के लिए फ्रांस और स्लोवाकिया की यात्रा पर थे। उन्होंने कहा कि दुनिया युवा भारतीयों की क्षमताओं को पहचान रही है और इस बात पर जोर दिया कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि हर युवा को अपनी क्षमता को सफलता में बदलने का अवसर मिले।श्री मोदी ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना एक रोजगार योजना से कहीं अधिक है। यह पहली बार नौकरी शुरू करने वाले युवाओं की आकांक्षाओं को मजबूत करने और उद्योग तथा कार्यबल के बीच एक मजबूत सेतु बनाने के लिए तैयार की गई एक पहल है।" उन्होंने कहा कि जहाँ कई योजनाएँ आमतौर पर कर्मचारियों या नियोक्ताओं पर केंद्रित होती हैं, वहीं यह कार्यक्रम एक साथ दोनों का समर्थन करता है। सरकार उन युवाओं के साथ खड़ी है, जो अपने पेशेवर सफर की शुरुआत कर रहे हैं और उन संस्थाओं को प्रोत्साहित करती है, जो नए रोजगार के अवसर पैदा करती हैं।योजना की उपलब्धियों को साझा करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि अब तक लगभग 70 लाख नई नौकरियां सृजित की गई हैं और इतनी ही संख्या में पहली बार नौकरी पाने वाले कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है। उन्होंने आगे कहा कि लगभग 20 लाख युवा पहली नौकरी में छह महीने पूरे कर चुके हैं, जबकि इस उपलब्धि को पूरा करने पर लगभग 10 लाख लाभार्थियों को योजना के तहत पहले ही प्रोत्साहन राशि मिल चुकी है। 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में अंतरित की गयी है। इस सहायता को वित्तीय मदद से अधिक बताते हुए, श्री मोदी ने कहा कि यह देश के युवाओं की मेहनत को मान्यता देने और देश का उनके भविष्य में विश्वास का प्रतीक है।प्रधानमंत्री ने योजना के तहत रोजगार के अवसर पैदा करने वाले संस्थानों और उद्यमों की भागीदारी पर भी संतोष व्यक्त किया। श्री मोदी ने कहा, “जब सरकार, उद्योग और युवा मिलकर काम करते हैं, तो रोजगार सृजन में तेजी आती है। यह पहल एक नए भारत की झलक है जहां युवाओं को अवसर मिलते हैं, उद्योगों को प्रोत्साहन मिलता है और रोजगार सृजन एक राष्ट्रीय मिशन बन जाता है।”भारत की जनसांख्यिकीय ताकत को रेखांकित करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है और एक विकसित राष्ट्र बनने की यात्रा स्वाभाविक रूप से देश की युवा शक्ति की आकांक्षाओं, कौशल और क्षमताओं से जुड़ी होती है। उन्होंने दोहराया कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि हर युवा भारतीय अपनी प्रतिभा और महत्वाकांक्षा के अनुसार आगे बढ़ सके। श्री मोदी ने ज़ोर देकर कहा कि पिछले बारह वर्षों में सरकार ने रोजगार के हर रास्ते को मजबूत करने के लिए काम किया है। उन्होंने कहा, "अवसंरचना और नवाचार से लेकर निर्माण, डिजिटल अर्थव्यवस्था, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप्स तक, सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रयास किए गए हैं। मेक इन इंडिया, वोकल फॉर लोकल, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुँचाने के प्रयास और मिशन निर्माण जैसी पहलों ने रोजगार और स्वरोजगार दोनों के लिए अवसरों का विस्तार किया है।"श्री मोदी ने बताया कि सरकार का अवसंरचना में 12 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश रोजगार सृजन के लिए मजबूत आधार बना रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत 33 लाख करोड़ रुपये से अधिक की मदद ने लाखों युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने में सक्षम बनाया है। महिलाओं के सशक्तिकरण की बात करते हुए उन्होंने कहा कि 10 करोड़ से अधिक महिलाएँ स्वयं-सहायता समूहों से जुड़ी हैं, जबकि 3 करोड़ से ज्यादा महिलाएँ लखपति दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि पीएम स्वनिधि और पीएम विश्वकर्मा जैसी पहलों ने छोटे उद्यमियों, रेहड़ी विक्रेताओं और पारंपरिक कारीगरों की आजीविका को मजबूत किया है।प्रधानमंत्री ने तेजी से बढ़ते ड्रोन क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे नई तकनीकें रोजगार के नए अवसर पैदा कर रही हैं। दवाइयों की डिलीवरी और कृषि कार्यों से लेकर स्वामित्व योजना के तहत भूमि मानचित्रण और रक्षा अभियानों तक, ड्रोन तकनीक को अपनाने से युवा भारतीयों के लिए रोजगार के नए रास्ते खुल रहे हैं। डिजिटल अर्थव्यवस्था के परिवर्तनकारी प्रभाव के बारे में श्री मोदी ने गिग अर्थव्यवस्था, प्लेटफॉर्म-आधारित सेवा, कंटेंट निर्माण और तकनीक-आधारित उद्यमों के उदय को रोजगार और आय के महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में रेखांकित किया। श्री मोदी ने जोर देकर कहा, "जो अवसर पहले असंभव लगते थे, वे अब लाखों युवा भारतीयों के लिए जीविकोपार्जन का जरिया बन गए हैं। यही बदलाव भारत के जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम में भी दिखाई दे रहा है, जो लगातार नवाचार को बढ़ावा दे रहा है, रोजगार पैदा कर रहा है और देश की आर्थिक वृद्धि में योगदान कर रहा है।“प्रधानमंत्री ने पिछले दशक में भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की असाधारण वृद्धि को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि पहले देश में केवल लगभग 500 स्टार्टअप थे, जबकि आज 2,00,000 से अधिक पंजीकृतस्टार्टअप कार्यरत हैं, जो देश के लगभग हर जिले में मौजूद हैं। श्री मोदी ने कहा, “वैश्विक समुदाय भारत के भविष्य के प्रति उत्साहित है और उसे इसके युवाओं की क्षमताओं में अत्यधिक विश्वास है।” अपनी हाल की फ्रांस यात्रा का जिक्र करते हुए, उन्होंने “इंडिया इनोवेट्स” कार्यक्रम के सफल आयोजन को याद किया, जिसने भारतीय स्टार्टअप और वैश्विक निवेशकों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष तकनीक, हरित ऊर्जा और जैव-प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए एक साझा मंच प्रदान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम भारत के नवाचार इकोसिस्टम में बढ़ती अंतरराष्ट्रीय रुचि और भविष्य की तकनीकों को आकार देने में इसके बढ़ती भूमिका को दर्शाते हैं।श्री मोदी ने आगे कहा कि भारत सक्रिय रूप से दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ नए व्यापार समझौते कर रहा है। उन्होंने बताया कि ये समझौते भारतीय उद्योगों के लिए नए बाजार खोल रहे हैं और भारतीय पेशेवरों के लिए नये अवसर बना रहे हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “जब पूरी दुनिया भविष्य की अर्थव्यवस्था की तैयारी कर रही है, भारत इसका नेतृत्व करने की तैयारी कर रहा है। जैसे-जैसे देश भविष्य की तकनीकों की ओर बढ़ रहे हैं, भारत अपने युवाओं को तेजी से बदलती दुनिया में सफल होने के लिए आवश्यक कौशल और क्षमताओं से लैस करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।“प्रधानमंत्री ने पिछले बारह वर्षों में भारत के रोजगार इकोसिस्टम में हुए महत्वपूर्ण बदलाव की ओर भी ध्यान दिलाया, जिसे अक्सर कम महत्व दिया जाता है, लेकिन यह विकसित भारत की यात्रा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। श्री मोदी ने उल्लेख किया, “सरकार का ध्यान हमेशा रोजगार को सुरक्षा, गरिमा और सामाजिक संरक्षण से जोड़ने पर रहा है। कर्मचारियों के भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) को आधुनिक बनाने, पेंशन प्रणाली को सरल बनाने और लाखों श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य बीमा और सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार द्वारा किये गये श्रम सुधारों के पीछे भी यही सोच है।"प्रधानमंत्री ने भारत के आर्थिक और सामाजिक विकास में महिलाओं के बढ़ते योगदान पर भी ज़ोर दिया। श्री मोदी ने जोर देकर कहा, “रात्रि-पाली रोजगार से जुड़े सुधार, घर-से-काम (वर्क-फ्रॉम-होम) के अवसर बढ़ानाऔर कार्यस्थल सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना, इन सबका उद्देश्य महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी को और बढ़ाना है।“उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने 21वीं सदी में आर्थिक सफलता तय करने में कुशल प्रतिभा, नवाचार और गुणवत्ता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिन देशों के पास ये खूबियां होंगी, उन्हें सबसे ज़्यादा मौके मिलेंगे। उन्होंने दावा किया कि भारत के पास इन तीनों क्षेत्रों में अभूतपूर्व क्षमता है। श्री मोदी ने कहा, “दुनिया तेजी से भारत के लिए दरवाजे खोल रही है और लगभग चालीस देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए जा चुके हैं। ये समझौते नए बाजार बना रहे हैं, वैश्विक उपभोक्ताओं तक पहुंच बढ़ा रहे हैं, और मेक इन इंडिया पहल के तहत बने ब्रांड्स के लिए नई संभावनाएँ पैदा कर रहे हैं।”श्री मोदी ने ज़ोर देकर कहा कि जब कोई देश वैश्विक दृष्टिकोण अपनाता है, तो सफलता की सीमाएँ स्वाभाविक रूप से विस्तृत हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि इक्कीसवीं सदी में प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और इंटर्नशिप अब विकल्प नहीं, बल्कि भविष्य के कार्यबल के लिए अनिवार्य घटक हैं। श्री मोदी ने रेखांकित किया, “विकसित भारत की ओर यात्रा केवल निवेश से आगे नहीं बढ़ेगी। बल्कि यह प्रतिभा, कौशल और नवाचार की ताकत से संचालित होगी। राष्ट्रीय विकास के हर क्षेत्र में गुणवत्ता ही मुख्य पैमाना होना चाहिए। वैश्विक स्तर पर मुकाबला करने और सफल होने के लिए, भारत को लगातार सबसे ऊँचे अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करना होगा और उनसे भी आगे निकलना होगा।“श्री मोदी ने कहा कि आज की दुनिया भारत से बड़ी उम्मीदें रखती है। देश के युवाओं में विश्वास व्यक्त करते हुए, उन्होंने कहा कि युवा भारतीय न केवल इन उम्मीदों को पूरा करेंगे बल्कि अपनी लगन, रचनात्मकता और क्षमताओं के माध्यम से उन्हें पार भी कर जाएंगे। उन्होंने इस विश्वास को 'विकसित भारत' की असली ताकत और भारत के युवा शक्ति की विशाल क्षमता का प्रतिबिंब बताया। प्रधानमंत्री ने युवाओं को यह कहकर प्रोत्साहित किया कि वे असफलताओं या बाधाओं से निराश न हों। श्री मोदी ने जोर देकर कहा, “हर असफलता में एक कीमती सबक होता है और यह व्यक्तिगत विकास और भविष्य की सफलता में योगदान देता है। एक युवा मन की सच्ची पहचान इसके चुनौतियों से निरंतर सीखने, सपनों को उपलब्धियों में बदलने, और हर उपलब्धि के बाद नए लक्ष्य बनाने की क्षमता में होती है।“प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के युवाओं और उनमें मौजूद उद्यमिता की ऊर्जा में अटूट विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए अपने संबोधन का समापन किया और दोहराया कि भारत विकसित देश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है तथा सरकार देश के युवा नागरिकों की आकांक्षाओं, नवाचार और महत्वाकांक्षाओं का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है। - -भारत-कोरिया गणराज्य की साझेदारी क्षेत्रीय स्थिरता, शांति और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है: लोकसभा अध्यक्ष-कोरिया गणराज्य के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा अध्यक्ष से की मुलाकातनई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने शुक्रवार को कहा कि भारत और कोरिया गणराज्य के बीच सदियों पुराने सभ्यतागत संबंध हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की बौद्ध विरासत अत्यंत समृद्ध है और दोनों के बीच घनिष्ठ जन-संवाद (people-to-people contacts) रहे हैं। उन्होंने बढ़ते द्विपक्षीय जुड़ाव के माध्यम से इन संबंधों को और गहरा करने के लिए भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दोहराया।उन्होंने ये बातें आज संसद भवन में कोरिया गणराज्य के आंतरिक और सुरक्षा मंत्री तथा 'कोरिया गणराज्य-भारत संसदीय मित्रता समूह' के अध्यक्ष महामहिम श्री युन होजुंग के नेतृत्व में आए एक प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहीं।कोरिया गणराज्य के साथ अपने संबंधों को भारत द्वारा दिए जाने वाले महत्व पर प्रकाश डालते हुए, श्री बिरला ने कहा कि दोनों देश, अग्रणी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं और जीवंत लोकतंत्रों के रूप में—लोकतंत्र, कानून के शासन और मानव-केंद्रित विकास के साझा मूल्यों को साझा करते हैं। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हरित ऊर्जा और सेमीकंडक्टर जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों पर दोनों देशों के मिलकर काम करने की विशाल संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने कोरियाई गणराज्य के निवेश के लिए भारत के बड़े बाजार और प्रतिभावान युवा कार्यबल को एक आकर्षक अवसर बताया । बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) के अवसरों पर प्रकाश डालते हुए, लोक सभा अध्यक्ष ने भारत की विकास पहलों में भाग लेने के लिए कोरिया गणराज्य की बढ़ती रुचि का स्वागत किया और इस बात पर जोर दिया कि इन क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग दोनों के लिए फायदेमंद होगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कोरिया गणराज्य में योग, आयुर्वेद और भारतीय संस्कृति की बढ़ती लोकप्रियता दोनों देशों के लोगों के बीच गहरे होते संबंधों को दर्शाती है और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने का एक ठोस आधार प्रदान करती है।संसदीय कूटनीति के महत्व पर जोर देते हुए, लोक सभा अध्यक्ष ने इस बात को रेखांकित किया कि जनप्रतिनिधियोंके बीच नियमित आदान-प्रदान द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। इस संदर्भ में, उन्होंने कहा कि संसदीय मित्रता समूह संवाद, अनुभवों के आदान-प्रदान और सर्वोत्तम संसदीय तौर-तरीकों को साझा करने के लिए प्रभावी मंच के रूप में उभरे हैं।इस अवसर पर बोलते हुए, महामहिम श्री युन होजुंग ने श्री बिरला को उनके गर्मजोशी भरे आतिथ्य के लिए धन्यवाद दिया और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की संसद के अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका की सराहना की। उन्होंने आईटी, एआई और ऑटोमोटिव जैसे विभिन्न क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच घनिष्ठ सहयोग को रेखांकित किया। भारत के बुनियादी ढांचा क्षेत्र में आई तेजी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देश भारत में विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे के निर्माण में सहयोग कर सकते हैं। प्रभावी आपदा प्रबंधन और सर्वोत्तम तौर-तरीकों को साझा करने के विषय पर, उन्होंने आपदा रोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन (CDRI) का हिस्सा बनने की कोरिया गणराज्य की इच्छा व्यक्त की।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को ओडिशा के दौरे पर रहेंगे। पीएम मोदी मयूरभंज जिले के रायरंगपुर में एक बड़े कार्यक्रम में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम प्रदेश में भाजपा सरकार के दो वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु भी मौजूद रहेंगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के साथ पीएम मोदी का सुबह लगभग 11:15 बजे मयूरभंज जिले के पहाड़पुर गांव दौरा करने का कार्यक्रम है। पहाड़पुर राष्ट्रपति मुर्मु का पैतृक गांव है। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति पवित्र उपवन संथाली जाहेरा एवं हो जाहेरा, कौशल केंद्र तथा पहाड़पुर स्कूल में प्रार्थना करेंगे।
यह यात्रा आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षिक अवसरों, कौशल विकास और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को मजबूत करने के लिए चल रहे प्रयासों के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।दोपहर करीब 1 बजे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ओडिशा सरकार के दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर मयूरभंज जिले के रायरंगपुर में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेंगे। कार्यक्रम का विषय “विकास रा धरा, ओडिशा सारा” रखा गया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, कार्यक्रम के दौरान ऊर्जा, औद्योगिक बुनियादी ढांचे, सड़क संपर्क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और सिंचाई सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी 47,600 करोड़ रुपए से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया जाएगा।इस अवसर पर प्रधानमंत्री रायरंगपुर में एक विशाल जनसभा को भी संबोधित करेंगे। इन परियोजनाओं से पूरे ओडिशा में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, कनेक्टिविटी में सुधार, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है। जिन प्रमुख परियोजनाओं की आधारशिला रखी जाएगी, उनमें 600 मेगावाट की ऊपरी इंद्रावती पंप भंडारण परियोजना और आईबी थर्मल पावर स्टेशन की स्टेज-II विस्तार परियोजना शामिल हैं। इस विस्तार परियोजना में 660 मेगावाट की दो नई इकाइयां स्थापित की जाएंगी।अन्य परियोजनाओं में 300 टीपीडी स्रोत-पृथक नगरपालिका ठोस अपशिष्ट आधारित संपीड़ित बायोगैस संयंत्र, कटकजोड़ी नदी पर पुल, बौध जिले में ढालपुर-हरभंगा रोड का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण, नुआपाड़ा-घाटीपाड़ा एनएच-353 खंड का चार लेन निर्माण, कुसुमदिही मेगालिफ्ट सिंचाई परियोजना, इग्नू क्षेत्रीय केंद्र तथा रायरंगपुर में इनडोर बैडमिंटन कॉम्प्लेक्स शामिल हैं।इसके अलावा, ओडिशा के विभिन्न जिलों में 24 अटल बस स्टैंड और नौ स्वचालित परीक्षण स्टेशनों का उद्घाटन किया जाएगा। बौध में 300 बिस्तरों वाले जिला मुख्यालय अस्पताल भवन का भी लोकार्पण होगा। इन परियोजनाओं से राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। -
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के जन्मदिन पर उन्हें देशभर से बधाई संदेश मिल रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने राष्ट्रपति मुर्मु को शुभकामनाएं दी हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मु का जीवन साहस, सादगी और जनसेवा के प्रति समर्पण की प्रेरक मिसाल है। उन्होंने यह भी कहा कि वह आज ओडिशा में होने वाले कार्यक्रम में राष्ट्रपति से मिलने के लिए उत्सुक हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, “भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। साहस, सादगी, विनम्रता और जनसेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता से भरी उनकी जीवन-यात्रा देशभर के लोगों को प्रेरित करती रही है।” पीएम मोदी ने राष्ट्रपति मुर्मु के लंबे सार्वजनिक जीवन और राष्ट्रसेवा की सराहना करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मु विशेष रूप से वंचित और हाशिए पर रहने वाले लोगों के कल्याण के लिए समर्पित रही हैं तथा भारत के विकास के प्रति उनका अटूट समर्पण प्रेरणादायक है।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रपति को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्होंने अपना जीवन समाज की सेवा और लोगों के सशक्तिकरण के लिए समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि समावेशी विकास, सामाजिक न्याय और नागरिकों के कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें जनसेवा की सच्ची भावना का प्रतीक बनाती है।केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राष्ट्रपति मुर्मु को एक आदर्श नेता बताते हुए कहा कि उनकी प्रेरणादायक जीवन-यात्रा साहस, दृढ़ता और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने राष्ट्रपति के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की।केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रपति मुर्मु को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि साधारण पृष्ठभूमि से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की उनकी यात्रा भारतीय लोकतंत्र की ताकत को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का जीवन विशेष रूप से महिलाओं और वंचित वर्गों को बड़े सपने देखने तथा समाजसेवा के लिए प्रेरित करता है।विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राष्ट्रपति मुर्मु के जीवन-सफर, जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और संविधान के आदर्शों के प्रति उनके समर्पण की सराहना की। वहीं, अल्पसंख्यक कार्य एवं मत्स्य पालन राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने भी राष्ट्रपति को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके अच्छे स्वास्थ्य, सुख और सफलता की कामना की। -
नई दिल्ली। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने शुक्रवार को कहा कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा, उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ाने और व्यापार सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) को प्रोत्साहित करने के लिए मजबूत परीक्षण और प्रमाणन अवसंरचना अत्यंत आवश्यक है। मुंबई स्थित राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र (एनटीएच) परिसर में परीक्षण सुविधाओं के विस्तार की आधारशिला रखते हुए प्रल्हाद जोशी ने कहा कि एक सशक्त गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली उत्पादों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने और व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रल्हाद जोशी ने कहा कि विश्व स्तरीय परीक्षण अवसंरचना सरकार के आत्मनिर्भर भारत विजन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए देश की गुणवत्ता प्रणाली को और मजबूत करना आवश्यक है।देश की गुणवत्ता आश्वासन और परीक्षण अवसंरचना के विस्तार में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के अवसर पर मंत्री ने राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र, मुंबई परिसर का दौरा किया। कार्यक्रम की शुरुआत भूमि पूजन समारोह और परीक्षण सुविधाओं के भावी विस्तार के लिए आधारशिला रखने के साथ हुई।मंत्री ने उपभोक्ता मामलों के विभाग और राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र द्वारा देशभर में उन्नत परीक्षण क्षमताओं के विस्तार तथा उद्योगों और उपभोक्ताओं के लिए गुणवत्तापूर्ण परीक्षण सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने मुंबई स्थित प्रयोगशालाओं का भी दौरा किया और चल रही आधुनिकीकरण पहलों तथा परीक्षण क्षमताओं की समीक्षा के लिए वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और अधिकारियों के साथ बातचीत की।कार्यक्रम के दौरान प्रल्हाद जोशी ने मुंबई स्थित राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र में सूक्ष्मजीवविज्ञानी परीक्षण प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। इसके अलावा उन्होंने गाजियाबाद स्थित राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र के उत्तरी क्षेत्र केंद्र तथा महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम की ऑरिक सिटी में स्थापित एनटीएच-ऑरिक उपग्रह केंद्र का वर्चुअल उद्घाटन भी किया।नई सुविधाओं के शुरू होने से विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में परीक्षण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुपालन को मजबूती मिलेगी तथा उपभोक्ता सुरक्षा और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा मिलेगा। -
नई दिल्ली। लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने शुक्रवार को सिंगल-यूज प्लास्टिक की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगाने तथा कूड़ा फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उपराज्यपाल ने पूरे लद्दाख में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर कड़ा प्रतिबंध लगाने और प्लास्टिक से जुड़े नियमों के उल्लंघन तथा गंदगी फैलाने के मामलों पर व्यापक कार्रवाई की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि यह कदम लद्दाख की नाजुक पारिस्थितिकी और प्राकृतिक सुंदरता की रक्षा के लिए जरूरी है, जो यहां की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था की आधारशिला है। नए नियमों के तहत कूड़ा फैलाने और सिंगल-यूज प्लास्टिक से जुड़े उल्लंघनों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। पहले की व्यवस्था से अलग, अब ब्लॉक विकास अधिकारी (बीडीओ), तहसीलदार, नगर निकाय अधिकारी, वन अधिकारी और वन रक्षक जैसे फील्ड स्तर के अधिकारियों को नियम उल्लंघन पकड़ने और चालान जारी करने का अधिकार दिया गया है।प्रशासन ने लेह हवाई अड्डे और लद्दाख के विभिन्न सीमा एवं प्रवेश बिंदुओं पर अचानक जांच करने के भी निर्देश दिए हैं, ताकि प्रतिबंधित प्लास्टिक सामग्री की आवाजाही और उपयोग को रोका जा सके। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब लद्दाख के पर्यावरण पर प्लास्टिक कचरे के बढ़ते दुष्प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ रही है। हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक यहां आते हैं, जिससे पर्यावरणीय दबाव भी बढ़ता है।उपराज्यपाल ने कहा कि लद्दाख का प्राकृतिक पर्यावरण उसकी सबसे बड़ी ताकत है और विकास तथा पर्यटन विस्तार के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि प्रतिबंध का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए और क्षेत्र की विशिष्ट पारिस्थितिक पहचान को संरक्षित रखा जाए।गौरतलब है कि क्षेत्र की विशेष पारिस्थितिकी, पर्यावरण और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की मांग, लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस की प्रमुख मांगों में शामिल रही है। ये दोनों लद्दाख के प्रमुख प्रतिनिधि संगठन हैं। इन संगठनों ने संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किए जाने और राज्य का दर्जा दिए जाने की भी मांग की है। -
नई दिल्ली। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को कहा कि वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग लगभग 10 लाख पेशेवरों की कमी का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह भारत के लिए एक बड़ा अवसर है और देश इस क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराने वाला प्रमुख केंद्र बन सकता है।पटना स्थित सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) केंद्र में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग का वर्तमान आकार लगभग 800 अरब डॉलर है और अगले एक वर्ष के भीतर इसके 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक होने की संभावना है। अश्विनी वैष्णव ने कहा, “वर्ष 2032 तक वैश्विक सेमीकंडक्टर क्षेत्र में लगभग 10 लाख नई नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है। वहीं उद्योग को करीब 10 लाख कुशल पेशेवरों की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है।”
उन्होंने कहा कि भारत को इस अवसर का लाभ उठाने के लिए दो प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान देना होगा – सेमीकंडक्टर डिजाइन और सेमीकंडक्टर निर्माण। मंत्री के अनुसार, सरकार देश में विश्वस्तरीय सेमीकंडक्टर डिजाइन क्षमता विकसित करने की दिशा में काम कर रही है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि भारतीय छात्र दुनिया के सबसे बेहतर प्रशिक्षित पेशेवरों में शामिल हों। उन्होंने कहा, “जब छात्र सेमीकंडक्टर डिजाइन कौशल के साथ स्नातक होकर निकलें, तो उन्हें दुनिया की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं में गिना जाए और उन्हें तुरंत उद्योग में अवसर मिलें।”अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सेमीकंडक्टर डिजाइन से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों और पहलों के माध्यम से अब तक लगभग 75 हजार छात्रों को आकर्षक अवसर मिल चुके हैं। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य इस संख्या को 75 हजार से बढ़ाकर 5 लाख छात्रों तक पहुंचाना है।”मंत्री ने कहा कि भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण गतिविधियां पहले ही शुरू हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, वैसे-वैसे निर्माण से जुड़े कौशल विकास और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी तैयार किए जाएंगे। भारत अपनी सेमीकंडक्टर मिशन योजना के तहत डिजाइन, निर्माण और पैकेजिंग को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है और देश भर में कई परियोजनाएं इस समय क्रियान्वयन के चरण में हैं। एसटीपीआई केंद्र के दौरे के दौरान अश्विनी वैष्णव ने देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम को महानगरों से बाहर ले जाने की सरकार की कोशिशों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए टियर-2 और टियर-3 शहरों में एसटीपीआई केंद्रों को लगातार मजबूत किया जा रहा है। इसके अलावा, मंत्री ने युवा उद्यमियों से बातचीत की, उनके अनुभवों को सुना और स्टार्टअप तथा तकनीक-आधारित उद्यमों के लिए सरकारी सहायता को और बेहतर बनाने के उपायों पर चर्चा की। -
नई दिल्ली।‘ पीएम मोदी ने शुक्रवार को कहा कि पीएम विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाई) रोजगार के अवसर पैदा करने, देश के युवाओं को सशक्त बनाने और भविष्य के भारत के लिए मजबूत वर्कफोर्स तैयार कर रही है।
पीएम-वीबीआरवाई के तहत इंसेंटिव बांटने के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि इस पहल से हाल के वर्षों में लाखों नौकरियां पैदा करने में मदद मिली है और यह युवा भारतीयों को अवसर प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक बनकर उभरी है।पीएम मोदी ने कहा, “पीएम-वीबीआरवाई एक नए भारत की पहचान है। यह ऐसे भारत का प्रतिनिधित्व करता है जहां रोजगार सृजन देश की भावना के केंद्र में है। जब युवा, सरकार और उद्योग एक साथ आते हैं, तो नौकरी पैदा करने की गति कई गुना बढ़ जाती है।” पीएम ने कहा, “भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है और एक विकसित भारत की ओर बढ़ने का सफर देश के युवाओं के सपनों, कौशल और क्षमताओं से तय होगा।”उन्होंने कहा कि युवाओं को सार्थक रोजगार के अवसर देकर उन्हें सशक्त बनाना केंद्र सरकार की मुख्य प्राथमिकताओं में से एक है। पीएम मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार पहली बार काम-काज की दुनिया में कदम रखने वाले युवाओं के साथ मजबूती से खड़ी है।उन्होंने कहा, “यह योजना न सिर्फ नौकरी चाहने वालों की मदद करती है, बल्कि उद्योगों को भी नए टैलेंट को काम पर रखने और उनमें निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करती है।” उन्होंने आगे कहा, “जब कोई युवा अपनी पहली नौकरी शुरू करता है, तो सरकार उनके साथ खड़ी होती है। इससे नियोक्ताओं का भी भरोसा बढ़ता है, क्योंकि उन्हें पता होता है कि पूरी सरकारी व्यवस्था इस प्रक्रिया में सहयोग कर रही है।” पीएम ने उन युवाओं को बधाई दी जिन्हें नौकरी के अवसर मिले और उन संस्थानों की भी सराहना की जिन्होंने उनकी क्षमता को पहचाना और उन्हें नौकरियां दीं। उन्होंने कहा कि इन संगठनों ने हाल के महीनों में लाखों रोजगार के अवसर पैदा करने में अहम भूमिका निभाई है। सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अनुभव और आंकड़ों से लगातार यह पता चला है कि जब सरकार, उद्योग और युवा मिलकर काम करते हैं, तो रोजगार सृजन में तेजी आती है। -
नई दिल्ली। ईरान ने शुक्रवार को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों के तहत अब जहाजों को पहले से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इस बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते में प्रवेश करने से पहले परमिट और बीमा लेना जरूरी होगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान समझौते के बाद हाल ही में यह जलमार्ग फिर से खोला गया है।
ईरान की नई बनाई गई पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (पीजीएसए) ने ये नए नियम जारी किए हैं। यह संस्था वॉशिंगटन और तेहरान के बीच हुए समझौते के तहत बनाई गई है, जिसका मकसद तीन महीने से ज्यादा चले संघर्ष के बाद इस रणनीतिक समुद्री रास्ते से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू करना है।अथॉरिटी के मुताबिक, इन नियमों का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है। यह रास्ता दुनिया के करीब एक-पांचवें हिस्से के तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) व्यापार के लिए इस्तेमाल होता है।पीजीएसए ने कहा, “इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर और संबंधित अधिकारियों के निर्देश जारी होने के बाद, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को सूचित किया जाता है कि तय समय के दौरान केवल वही जहाज गुजर सकेंगे जो जरूरी नियमों को पूरा करते हुए अपनी यात्रा की अनुमति के लिए आवेदन जमा करेंगे।”नए नियमों के अनुसार, जहाज मालिकों और ऑपरेटरों को होर्मुज स्ट्रेट पहुंचने से कम से कम 48 घंटे पहले यात्रा की अनुमति के लिए आवेदन करना होगा। पीजीएसए ने कहा कि जहाजों को प्रवेश और बाहर निकलने के समय देरी से बचने के लिए अपनी पूरी जानकारी पहले ही देनी होगी।अथॉरिटी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया कि जहाजों को यात्रा की अनुमति मिलने से पहले जरूरी परमिट और बीमा भी लेना होगा। इसके अलावा, जहाजों को ईरानी अधिकारियों की ओर से तय किए गए शिपिंग कॉरिडोर का ही इस्तेमाल करना होगा, ताकि उन इलाकों से बचा जा सके जहां संघर्ष के बाद अभी भी बारूदी माइन या अन्य खतरों की संभावना हो सकती है। अथॉरिटी ने चेतावनी दी है कि अगर कोई जहाज इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जहाज मालिकों की होगी। -
नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), नई तकनीकों, रिसर्च और इनोवेशन के क्षेत्र में मिलकर काम आगे बढ़ाने पर चर्चा की। दोनों देशों ने भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (सीईटीए) का इस्तेमाल करके नए अवसर पैदा करने, इनोवेशन को बढ़ावा देने और दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने पर भी बात की।
यह चर्चा शुक्रवार को लंदन में भारत के उच्चायुक्त पी. कुमारन और ब्रिटेन के विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसआईटी) के स्थायी सचिव इमरान मियां के बीच हुई बैठक में हुई। भारतीय उच्चायोग ने इसकी जानकारी दी। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “उच्चायुक्त पी. कुमारन ने गुरुवार को डीएसआईटी के स्थायी सचिव इमरान मियां के साथ एक अच्छी और सकारात्मक बैठक की। इस दौरान भारत-ब्रिटेन के बीच एआई, नई तकनीक, रिसर्च और इनोवेशन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और भारत-ब्रिटेन कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट का इस्तेमाल करने पर भी बात की।”बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि भारत-ब्रिटेन कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (सीईटीए) 15 जुलाई 2026 से औपचारिक रूप से लागू होगा। उन्होंने इसे दोनों देशों के रिश्तों में एक ‘ऐतिहासिक कदम’ बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह समझौता भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार और निवेश को काफी बढ़ावा देगा।प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत-ब्रिटेन संबंधों के लिए यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। मुझे खुशी है कि भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता 15 जुलाई 2026 से लागू होगा। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को काफी मजबूत करेगा।”उन्होंने आगे कहा कि इससे भारतीय किसानों, कामगारों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और इनोवेटर्स के लिए कई नए अवसर खुलेंगे और यह 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और वह खुद जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान इस बात से खुश हैं कि दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई गति मिल रही है।चार जून को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर से मुलाकात की थी। इस बैठक में दोनों नेताओं ने व्यापार, तकनीक, सप्लाई चेन, रक्षा, जलवायु, शिक्षा और लोगों के बीच संबंधों जैसे क्षेत्रों में चल रहे सहयोग की समीक्षा की। उन्होंने दुनिया के मौजूदा हालात पर भी चर्चा की।बैठक के बाद एस. जयशंकर ने ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत-ब्रिटेन साझेदारी अब साझा आर्थिक लक्ष्यों और हाईटेक विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है। ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर का भारत में स्वागत करके खुशी हुई। हमने व्यापार, तकनीक, सप्लाई चेन, रक्षा, जलवायु, शिक्षा और लोगों के बीच संबंधों में हो रही प्रगति की समीक्षा की। साथ ही स्वच्छ ऊर्जा, एआई और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में नए अवसरों पर भी चर्चा की।” उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने यूक्रेन, पश्चिम एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र सहित दुनिया के कई मुद्दों पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारत-ब्रिटेन की व्यापक रणनीतिक साझेदारी ‘विजन 2035’ के तहत लगातार आगे बढ़ रही है। - नई दिल्ली ।चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने शुक्रवार को कैलाश मानसरोवर यात्रा (केएमवाई) पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक वीडियो संदेश जारी किया। इस संदेश में उन्होंने यात्रियों का स्वागत किया और यात्रा से जुड़ी कुछ जरूरी सलाह दी। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा, “विदेश मंत्रालय (एमईए) और चीन की सरकार के सहयोग से आयोजित कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026, 20 जून को भारत से रवाना होगी। दूतावास की टीम आधिकारिक और निजी दोनों माध्यमों से यात्रा करने वाले सभी श्रद्धालुओं का पवित्र कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की यात्रा के लिए हार्दिक स्वागत करती है।”राजदूत दोरईस्वामी के नेतृत्व में दूतावास की टीम ने हाल ही में यात्रा मार्गों का दौरा किया। टीम ने भारत के सिक्किम और उत्तराखंड से तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (चीन) तक जाने वाले प्रमुख रास्तों का निरीक्षण किया। इस दौरान नाथू ला और लिपुलेख दर्रों के जरिए यात्रा व्यवस्थाओं और तैयारियों की समीक्षा की गई।दूतावास ने वीडियो साझा करते हुए कहा, “यह हमारे राजदूत का संदेश है। जल्द ही यात्रा से जुड़ी और तस्वीरें तथा जरूरी यात्रा सलाह भी जारी की जाएंगी। सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सफल और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध यात्रा की शुभकामनाएं।” राजदूत ने संदेश में बताया कि नाथू ला दर्रे पर पहुंचने के बाद चीनी कस्टम और इमिग्रेशन अधिकारी श्रद्धालुओं का स्वागत करेंगे। इसके बाद उन्हें बसों के जरिए याडोंग काउंटी ले जाया जाएगा।उन्होंने वीडियो में यात्रा के समय, खाने-पीने की सुविधाओं और करेंसी एक्सचेंज जैसी अन्य जरूरी जानकारियां भी दीं। राजदूत ने यह भी कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के मार्ग से जुड़ी और जानकारी देने वाले कई वीडियो आगे भी जारी किए जाएंगे। पिछले सप्ताह उन्होंने तिब्बत की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राजधानी ल्हासा का दौरा किया था। वहां उन्होंने स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के साथ मिलकर भारतीय श्रद्धालुओं के लिए की गई तैयारियों और सुविधाओं की समीक्षा की।ल्हासा हवाई अड्डे पर तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के विदेश मामलों के कार्यालय के उप महानिदेशक यांग लाहोंग ने उनका स्वागत किया। दूतावास के अनुसार, बाद में राजदूत ने तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के उपाध्यक्ष झाओ पेंग से मुलाकात की। झाओ पेंग ने श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं और तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी। इससे पहले 13 जून को विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू भवन में कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।



























