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रांची. झारखंड के गिरिडीह, दुमका और लातेहार में मंगलवार को आकाशीय बिजली गिरने से कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई और आठ अन्य घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, मरने वाले 14 लोगों में से नौ गिरिडीह, तीन दुमका और दो लातेहार से थे।
खोरीमहुआ के उप-संभागीय पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) अमरेंद्र कुमार ने बताया, "गिरिडीह जिले में मेरे उप-संभाग के तहत आने वाले तीन थानों के इलाकों में बिजली गिरने से कम से कम सात लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए।" उन्होंने बताया कि इनमें से पांच लोगों की मौत और तीन लोगों के घायल होने की घटना केवल देवरी थाना क्षेत्र में हुई। अधिकारी ने बताया कि ये लोग खेलने के बाद एक स्थान पर बैठे हुए थे कि तभी यह हादसा हुआ। उन्होंने बताया कि हादसे में मारे गये चार लोगों की उम्र 18 से 20 वर्ष के बीच थी।
अधिकारी ने बताया कि गावां और नौडीहा थाना क्षेत्रों में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि गिरिडीह जिले के बगोदर पुलिस थाना क्षेत्र में भी एक व्यक्ति की मौत हो गई। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि दुमका जिले के रामगढ़ ब्लॉक में बिजली गिरने की अलग-अलग घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो गई और एक बच्चे समेत चार अन्य घायल हो गए। पुलिस ने बताया कि लातेहार में अलग-अलग पुलिस थाना क्षेत्रों में बिजली गिरने की घटनाओं में दो लोगों की मौत हो गई और एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। - नयी दिल्ली । देश में ई-20 पेट्रोल की बिक्री के खिलाफ 2.30 लाख से अधिक ज्ञापनों को सौंपने के लिए प्रधानमंत्री आवास की ओर मंगलवार को करीब 100 लोगों के साथ मार्च कर रहे आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पार्टी के अन्य नेताओं को दिल्ली पुलिस ने फिरोजशाह मार्ग पर रोक लिया। पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद केजरीवाल, दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, जैस्मीन शाह और पार्टी के अन्य नेताओं के साथ फिरोजशाह मार्ग पर ही धरने पर बैठ गए। आप ने देश भर के लोगों से एकत्र ज्ञापनों को सौंपने के लिए लगभग 100 लोगों के साथ मार्च शुरू किया था। ये ज्ञापन सरकार की ई-20 पेट्रोल को बढ़ावा देने वाली नीति के खिलाफ थीं, जिसमें आरोप लगाया गया था कि एथनॉल-मिश्रित ईंधन का वाहन मालिकों पर बुरा असर पड़ रहा है। केजरीवाल ने मार्च से पहले समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी देश भर के लोगों द्वारा हस्ताक्षरित 2.30 लाख से अधिक ज्ञापन लेकर जा रही है और उन्होंने सरकार से करोड़ों वाहन मालिकों की चिंताओं पर संज्ञान लेने की अपील की। उन्होंने कहा, ''हम देश भर के लोगों द्वारा हस्ताक्षरित 2.30 लाख से अधिक ज्ञापन के साथ प्रधानमंत्री आवास जा रहे हैं। हम चाहते हैं कि सरकार उन करोड़ों वाहन मालिकों की चिंताओं को सुने जो ई20 पेट्रोल के कारण समस्याओं का सामना कर रहे हैं।'' पुलिस सूत्रों ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को पांच फिरोज शाह मार्ग से आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने बताया, ''किसी को भी 5, फिरोज शाह मार्ग से आगे जाने की अनुमति नहीं होगी। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हमने दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों समेत बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए हैं।'' यह विरोध प्रदर्शन आप द्वारा एथनॉल जनसभा आयोजित करने और ई20 ईंधन के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान शुरू करने के कुछ दिनों बाद हो रहा है। केजरीवाल ने इससे पहले प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर एथनॉल-मिश्रित पेट्रोल से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा के लिए उनसे मिलने का समय मांगा था।
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नई दिल्ली। राज्यसभा सांसद और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके कार्यालय कक्ष में शिष्टाचार भेंट की। मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के विस्तृत ब्योरे की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
नीतीश कुमार ने एक्स पर साझा की जानकारीनीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय में उनसे शिष्टाचार भेंट की।पीएमओ ने भी दी मुलाकात की जानकारीप्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने भी एक्स पर पोस्ट के जरिए मुलाकात की पुष्टि की। पीएमओ ने कहा, “राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार ने 4 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।”अप्रैल में राज्यसभा सदस्य के रूप में ली थी शपथयह मुलाकात बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार के लंबे कार्यकाल के समाप्त होने के कुछ दिनों बाद हुई है। उन्होंने 10 अप्रैल 2026 को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली थी। उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने उन्हें उच्च सदन के सदस्य के रूप में शपथ दिलाई थी। - भुवनेश्वर। पुरी की वार्षिक रथयात्रा में इस्तेमाल होने वाले तीनों रथों के पहियों को राष्ट्रपति भवन में लगाया जाएगा। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने बताया कि उन्होंने भुवनेश्वर स्थित लोक भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और उनके समक्ष यह प्रस्ताव रखा। उन्होंने एक बयान में कहा, ''राष्ट्रपति इस बात पर सहमत हो गईं कि तीनों रथों के पहिये राष्ट्रपति भवन में लगाए जाएं। यह हम सभी के लिए गर्व का क्षण है।'' अधिकारियों ने बताया कि भगवान जगन्नाथ के 'नंदीघोष', भगवान बलभद्र के 'तालध्वज' और देवी सुभद्रा के 'दर्पदलन' रथों के पहियों को नयी दिल्ली भेजा जाएगा और ओडिशा की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत के स्थायी प्रतीक के रूप में स्थापित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि वार्षिक रथयात्रा के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले तीनों रथों को हर साल उत्सव के बाद खोल दिया जाता है। जहां लकड़ी का एक हिस्सा जगन्नाथ मंदिर की रसोई में इस्तेमाल होता है, वहीं रथों के महत्वपूर्ण हिस्सों की श्रद्धालुओं के बीच नीलामी की जाती है। उन्होंने बताया कि उत्सव के लिए नए रथों के निर्माण के वास्ते हर साल नयी लकड़ी का उपयोग किया जाता है। यह पहली बार नहीं है जब ओडिशा की विरासत को राष्ट्रपति भवन परिसर में जगह मिलने जा रही है।अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले 29 अक्टूबर 2024 को प्रतिष्ठित कोणार्क पहियों की बलुआ पत्थर से बनी चार प्रतिकृतियों को राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र और अमृत उद्यान में स्थापित किया गया था, ताकि आगंतुकों के सामने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया जा सके।
- मुंबई। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं बिहार तथा त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल डी.वाई. पाटिल का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार को महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। पारिवारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। वह 92 वर्ष के थे।राज्य में कई शिक्षण संस्थानों की स्थापना करा चुके वरिष्ठ नेता के परिवार में उनके बेटे सतेज पाटिल, संजय पाटिल और अजिंक्य पाटिल हैं। सतेज पाटिल, पूर्व मंत्री व कांग्रेस नेता हैं।कोल्हापुर निवासी पाटिल शिक्षा क्षेत्र पर अपना ध्यान केंद्रित करने से पहले 1967 से 1978 तक विधायक रहे। उन्होंने 'डी वाई पाटिल विश्वविद्यालय' की स्थापना की जो चिकित्सा, इंजीनियरिंग और कई अन्य विषयों में पाठ्यक्रम संचालित करता है। पद्म श्री से सम्मानित पाटिल ने त्रिपुरा और बिहार के राज्यपाल के रूप में सेवाएं दी थीं तथा उनके पास पश्चिम बंगाल के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी था।
- नयी दिल्ली। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सांसदों की मंगलवार को हुई साप्ताहिक बैठक में इस बारे में प्रस्तुतिकरण दिया गया कि भारत अंतरराष्ट्रीय खेल स्पर्धाओं में किस तरह उपलब्धियां अर्जित कर रहा है तथा देश में रोजगार पैदा करने के रास्ते बढ़े हैं जिससे युवाओं के लिए करोड़ों अवसर सृजित हो रहे हैं। बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय मंत्री और राजग के घटक दलों के नेता शामिल हुए।भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन मंगलवार को यहां संसद भवन परिसर में हुई 'मंगल मिलन' बैठक में प्रधानमंत्री मोदी के बगल में बैठे दिखे। यह बैठक बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर भाजपा की हार के एक दिन बाद हुई, जहां उसके उम्मीदवार को चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने उपचुनाव में हरा दिया है। भाजपा का गढ़ माने जाने वाले बांकीपुर में उपचुनाव इसलिए ज़रूरी हो गया था क्योंकि नवीन ने पार्टी अध्यक्ष बनने और राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद सीट छोड़ दी थी। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने खेलों पर एक विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया और कहा कि मोदी सरकार ने 2014 में एक खेल नीति अपनाई थी, जिसके परिणामस्वरूप भारत को अब ओलंपिक, एशियन गेम्स और राष्ट्रमंडल खेल जैसी अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में स्वर्ण समेत कई अवॉर्ड मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि रोजगार देने के तरीकों पर एक विस्तृत प्रस्तुतिकरण भी दिया गया और बताया गया कि युवाओं के लिए रोजगार के मौके दिन-ब-दिन बढ़े हैं। तिवारी ने कहा, ''हमें मंगल मिलन में बताया गया कि 2004 से 2014 के बीच, जब संप्रग सत्ता में था, सिर्फ 2.89 करोड़ युवाओं को नौकरी मिली, जबकि 2014 से 2026 के बीच कुल 17.1 करोड़ युवाओं को रोजगार मिला।'' उन्होंने कहा कि राजग संसदीय दल की बैठक में सरकार की अलग-अलग सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर भी प्रस्तुतिकरण दिया गया। भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री पीपी चौधरी ने बैठक के बारे में कहा, ''मंगल मिलन में मंगल ही होता है।'' राजग के सहयोगी दल जदयू, जद(एस), राकांपा, शिवसेना और एनसीपीआई के प्रतिनिधि भी बैठक में शामिल हुए।तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए एनसीपीआई नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि वह पहली बार राजग संसदीय दल की बैठक में शामिल हुए। उन्होंने कहा, ''मैं देश के सबसे वरिष्ठ सांसदों में से एक हूं। एनसीपीआई में सभी एकजुट हैं। यह एक अच्छा अनुभव है।'' बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, विदेश मंत्री एस जयशंकर के अलावा अन्य मंत्री और नेता भी शामिल हुए।
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नई दिल्ली । केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने मंगलवार को कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में बॉक्सिंग, जूडो और पैरा-एथलेटिक्स में ऐतिहासिक प्रदर्शन करने वाले भारतीय खिलाड़ियों को सम्मानित किया। इस दौरान गोल्ड मेडल विजेताओं को 30 लाख रुपए, सिल्वर मेडल विजेताओं को 20 लाख रुपए और ब्रॉन्ज मेडल विजेताओं को 10 लाख रुपए की पुरस्कार राशि के चेक सौंपे गए।
खिलाड़ियों को बधाई देते हुए डॉ. मांडविया ने उनसे प्रतिस्पर्धी करियर के बाद भी भारतीय खेलों में योगदान जारी रखने और अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों के मार्गदर्शक एवं प्रेरणास्रोत बनने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों का अनुभव देश में नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सम्मान समारोह में भारतीय बॉक्सिंग दल के सदस्य शामिल हुए, जिन्होंने ग्लासगो में कुल 10 मेडल जीतकर बॉक्सिंग मेडल टैली में शीर्ष स्थान हासिल किया। भारतीय मुक्केबाजों ने सात गोल्ड और तीन सिल्वर मेडल अपने नाम किए।भारत के सात गोल्ड मेडल विजेताओं में प्रीति पवार (54 किग्रा), जैस्मिन लंबोरिया (57 किग्रा), साक्षी चौधरी (51 किग्रा), प्रिया घांघस (60 किग्रा), अरुंधति चौधरी (70 किग्रा), सचिन सिवाच (60 किग्रा) और अंकुश पांघाल (80 किग्रा) शामिल रहे। जादुमनी सिंह (55 किग्रा), ओलंपिक मेडलिस्ट लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा) और नरेंद्र बेरवाल (90+ किग्रा) ने सिल्वर मेडल जीते।केंद्रीय खेल मंत्री ने भारतीय जूडो दल को भी सम्मानित किया। भारत ने ग्लासगो में 12 जूडो इवेंट्स में हिस्सा लेते हुए चार मेडल जीते, जिनमें दो गोल्ड, एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज शामिल रहे। यह कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा।अस्मिता कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला जूडोका बनीं। वहीं हर्ष ने गोल्ड मेडल जीतकर यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय पुरुष जूडोका बनने का गौरव हासिल किया।पैरा-एथलेटिक्स दल को भी समारोह में सम्मानित किया गया। ग्लासगो में भारतीय पैरा-एथलीटों के शानदार प्रदर्शन को देश के पैरा-स्पोर्ट्स के लिए महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा गया। खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की पैरा-स्पोर्ट्स क्षमता को मजबूती से सामने रखा। खिलाड़ियों से बातचीत के दौरान डॉ. मांडविया ने उन्हें अपने खेल करियर से आगे की सोचने और भारतीय खेलों की अगली पीढ़ी के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने 36,000 करोड़ रुपए के निवेश वाली विस्तारित ‘खेलो इंडिया’ योजना का उल्लेख करते हुए खिलाड़ियों से सक्रिय करियर के बाद स्पोर्ट्स एकेडमी शुरू करने और युवा प्रतिभाओं को निखारने पर विचार करने का आग्रह किया। डॉ. मांडविया ने कहा कि खिलाड़ियों का लक्ष्य केवल सरकारी नौकरी हासिल करना नहीं होना चाहिए। उन्होंने खिलाड़ियों से अपने सक्रिय करियर के बाद स्पोर्ट्स एकेडमी चलाने और अपने अनुभव के जरिए युवा खिलाड़ियों को तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विस्तारित ‘खेलो इंडिया’ योजना के जरिए आने वाले वर्षों में भारतीय खेलों में लगातार निवेश सुनिश्चित किया जाएगा।एशियन गेम्स 2026 को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय खेल मंत्री ने खिलाड़ियों से कॉमनवेल्थ गेम्स में हासिल किए गए प्रदर्शन को आगे बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले खिलाड़ी अगली बार गोल्ड हासिल करने का प्रयास करें, जबकि गोल्ड मेडल जीतने वाले खिलाड़ी अपने प्रदर्शन के स्तर को बनाए रखते हुए उसे और बेहतर करें।डॉ. मांडविया ने खिलाड़ियों से उनके कोच के योगदान को कभी नहीं भूलने की अपील की। उन्होंने कहा कि सफलता के पीछे कोच का मार्गदर्शन और निरंतर मेहनत महत्वपूर्ण होती है। उनके अनुसार, गुरु का मार्गदर्शन खिलाड़ियों को खेल के साथ-साथ जीवन में भी आगे बढ़ने में मदद करता है। मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को ‘खेलो इंडिया’, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) और ‘एनुअल कैलेंडर फॉर ट्रेनिंग एंड कॉम्पिटिशन’ (ACTC) कार्यक्रम के जरिए सरकार से सहायता मिली। इसके अलावा साई एनसीओई में नेशनल कैंप, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर, उपकरण और प्रशिक्षण सहायता भी उपलब्ध कराई गई। - नयी दिल्ली। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि 'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' के तहत देशभर में 50.06 लाख से अधिक घरों में छतों पर (रूफटॉप) सौर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। मंत्रालय ने बयान में कहा कि योजना की शुरुआत के दो वर्ष से कुछ अधिक समय में यह उपलब्धि हासिल की गई है, जबकि इससे पहले 10 साल में 7.94 लाख रूफटॉप सौर संयंत्र ही स्थापित किए गए थे। मंत्रालय ने कहा कि 75,021 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली इस योजना के तहत रूफटॉप सौर क्षमता के विस्तार में तेजी आई है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले नौ महीनों में इन संयंत्रों की स्थापना की गति 3.2 गुना बढ़ी है और दैनिक स्थापना अक्टूबर, 2025 के 5,038 से बढ़कर जुलाई, 2026 में करीब 16,328 हो गई है। जुलाई, 2026 में 5.06 लाख घरों में छतों पर सौर संयंत्र लगाए गए, जो अब तक का सर्वाधिक मासिक आंकड़ा है। मंत्रालय ने कहा कि योजना के लाभार्थियों को अब तक 28,024 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से जारी की जा चुकी है। इसका परिणाम यह हुआ है कि करीब 19 लाख परिवारों के बिजली बिल शून्य हो गए हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में 12 लाख से अधिक परिवारों ने खपत से अधिक पैदा हुई बिजली को बेचकर कुल 421 करोड़ रुपये अर्जित किए, जो प्रति परिवार औसतन करीब 3,500 रुपये की वार्षिक आय के बराबर है। मंत्रालय के अनुसार, रियायती दर पर ऋण की सुविधा 21.87 लाख आवेदकों को स्वीकृत की गई है, जिनमें से 17.5 लाख स्थापना ऋण के माध्यम से पूरी की जा चुकी हैं। इस योजना के तहत अब तक 14.8 गीगावाट की रूफटॉप सौर क्षमता स्थापित की जा चुकी है। इसके अलावा 34,219 पंजीकृत विक्रेताओं का नेटवर्क विकसित हुआ है, जिनमें से 29,469 सक्रिय हैं, और 2.32 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है। सरकारी इमारतों की छतों पर सौर संयंत्र लगाने की पहल के तहत केंद्र और राज्यों द्वारा चिह्नित 1.06 लाख भवनों में संयंत्र लगाए जा चुके हैं। इस योजना के क्रियान्वयन में डिजिटल मंच, बिजली वितरण कंपनियों का एकीकरण और त्वरित सब्सिडी भुगतान जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
- रांची। झारखंड सरकार ने मंगलवार को देवघर जिले में मशहूर बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर के हवाई दर्शन और श्रद्धालुओं को देवघर से दुमका जिले के बासुकीनाथ धाम तक ले जाने के लिए एक विशेष हेलीकॉप्टर सेवा शुरू की। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि यह सेवा राज्य के नागरिक उड्डयन विभाग के तहत झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट (जेएफआई) की ओर से संचालित जा रही है। देवघर के उपायुक्त (डीसी) सौरभ कुमार भुवानिया ने बताया कि विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए झारखंड सरकार और नागरिक उड्डयन विभाग ने हाथगढ़ मैदान में इस सेवा की शुरुआत की। श्राणणी मेले का उद्घाटन 29 जुलाई को हुआ था।उपायुक्त ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, "अब श्रद्धालु यात्रा के बेहद सुविधाजनक और सुरक्षित माध्यम से बाबाधाम के शानदार नजारे का आनंद ले सकेंगे।" श्रावण के महीने में हर साल भगवान शिव के लाखों श्रद्धालु देवघर आते हैं और बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। वे दुमका जिले में बाबा बासुकीनाथ धाम के भी दर्शन करते हैं। जेएफआई के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (सीएमडी) कैप्टन एसपी सिन्हा ने बताया कि इस सेवा के लिए पांच सीट वाला हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराया गया है। देवघर में नागरिक उड्डयन विभाग के अधिकारी नाग नारायण प्रसाद ने कहा, "इस सेवा का मकसद श्रावण के पवित्र महीने में देवघर आने वाले श्रद्धालुओं को अतिरिक्त सुविधाएं देना है। सरकार ने श्रावण के दौरान श्रद्धालुओं के लिए टेंट हाउस समेत कई सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।"
- नयी दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित किए जाने वाले 'एट होम' समारोह में मेहमानों का स्वागत हाथ से बुना हुआ पारंपरिक महेश्वरी अंगवस्त्र पहनाकर किया जाएगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। इस बार के 'निमंत्रण पैकेज' से जुड़ी सभी चीजें छत्तीसगढ़, गोवा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की सुंदर व पारंपरिक कला से प्रेरित हैं। राष्ट्रपति की उप प्रेस सचिव नविका गुप्ता ने बताया कि 15 अगस्त को आयोजित स्वागत समारोह में शिरकत करने वाले मेहमानों का यह विशेष अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया जाएगा। यह अंगवस्त्र मध्य प्रदेश के महेश्वर में महेश्वरी बुनाई की पारंपरिक तकनीक से हाथ से बनाया गया है। इसे रेशम और सूती धागों से बुना गया है। इसमें छत्तीसगढ़, गोवा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की पारंपरिक बुनाई और वस्त्र कला के अलग-अलग खास डिजाइनों का इस्तेमाल किया गया है। निमंत्रण पत्र में दिए गए विवरण में कहा गया है कि अंगवस्त्र के डिजाइन में महाराष्ट्र की करवत काठी साड़ी के किनार बॉर्डर, गोवा की कुन्बी साड़ी की रुद्राक्ष बॉर्डर, मध्य प्रदेश की महेश्वरी बुनाई का कांगरा डिज़ाइन और छत्तीसगढ़ की पनिका परंपरा का चिंता चौक डिज़ाइन शामिल किया गया है। इस तरह चार अलग-अलग बुनाई परंपराओं को एक ही कपड़े में एक साथ प्रस्तुत किया गया है।निमंत्रण में लिखा है, "15 अगस्त 2026 को भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जब राष्ट्रपति भवन आपका स्वागत करेगा, तब हम आपको भारत की सांस्कृतिक और कलात्मक विविधता तथा प्रकृति के संरक्षण की हमारी सदियों पुरानी परंपराओं का अनुभव करने के लिए आमंत्रित करते हैं।" राष्ट्रपति भवन के स्वतंत्रता दिवस के निमंत्रण में छत्तीसगढ़, गोवा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की पर्यावरण संरक्षण और हरियाली से जुड़ी अनूठी पहलों को भी प्रदर्शित किया गया है। इन राज्यों की जीवंत सजीव कला परंपराओं के माध्यम से, यह निमंत्रण समुदायों, रचनात्मकता और संरक्षण के बीच की गहरी परस्पर निर्भरता की एक झलक प्रस्तुत करता है। बाहरी आवरण (कवर) का डिजाइन तटीय कोंकण क्षेत्र की 'कावी कला' से प्रेरित है। पते की पर्ची के साथ लगी हुई लोहे की घंटी को छत्तीसगढ़ के बस्तर के कुशल जनजातीय लोहारों द्वारा रीसाइकिल किए गए कबाड़ लोहे का उपयोग करके हाथ से बनाया गया है। कपड़े का यह लिफाफा 'बाग प्रिंट' का है, जिसकी पहचान हाथ से तराशे गए लकड़ी के ठप्पों और प्राकृतिक रंगों का उपयोग है। यह शिल्प मध्य प्रदेश के धार जिले के 'बाग' कस्बे से आया है और वहीं से इसका नाम पड़ा है। यह निमंत्रण पैकेज वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले संस्थान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन (एनआईडी), अहमदाबाद द्वारा तैयार किया गया है।
- इंदौर (मध्यप्रदेश)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत आठ अगस्त को महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में पारधी समुदाय के बच्चों के लिए एक परमार्थ ट्रस्ट के संचालित विद्यालय में करीब दो करोड़ रुपये की लागत से बने खेल परिसर और सभागार का उद्घाटन करेंगे। इंदौर के श्री सद्गुरु दत्त धार्मिक एवं परमार्थिक ट्रस्ट की अध्यक्ष डॉ. आयुषी देशमुख ने मंगलवार को संवाददाताओं को बताया कि यह संस्था बुलढाणा जिले के खामगांव में पिछले 11 वर्षों से 'सूर्योदय पारधी समाज आदिवासी आश्रम विद्यालय' नाम के संस्थान का संचालन कर रही है। उन्होंने कहा, "संघ प्रमुख भागवत ने वर्ष 2018 में इस विद्यालय के खेल परिसर और सभागार के निर्माण की नींव रखी थी। वह आठ अगस्त को इस परियोजना का उद्घाटन करेंगे जिसके निर्माण में करीब दो करोड़ रुपये की लागत आई है।'' देशमुख ने बताया कि उद्घाटन समारोह में महाराष्ट्र के आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोक उईके और राज्य के श्रम मंत्री आकाश फुंडकर भी मौजूद रहेंगे। उन्होंने बताया कि खामगांव में संचालित विद्यालय में पारधी और अन्य वंचित समुदायों के करीब 4,000 बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और खेलों में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं।
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नई दिल्ली। डोलैट कैपिटल की एक रिपोर्ट के अनुसार, पूरे भारत में बारिश की कमी घटकर 12 प्रतिशत रह गई है। हालांकि जलाशयों में पानी का भंडार बढ़ने के साथ-साथ, निकट भविष्य में मध्य और पश्चिमी भारत में सामान्य से अधिक बारिश होने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन अल नीनो का जोखिम अभी भी बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस सप्ताह बारिश के दायरे में सुधार हुआ है, लेकिन बारिश के वितरण में श्रेणियों के हिसाब से बदलाव देखने को मिला। कम बारिश वाले इलाकों का हिस्सा एक सप्ताह पहले के 40 प्रतिशत से घटकर 36 प्रतिशत हो गया, जबकि बहुत कम बारिश वाले इलाकों की संख्या शून्य रही। वहीं, अधिक बारिश वाले इलाकों का हिस्सा पिछले सप्ताह के महज 1 प्रतिशत से तेजी से बढ़कर 11 प्रतिशत हो गया। हालांकि, सामान्य बारिश वाले इलाकों का हिस्सा 57 प्रतिशत से घटकर 51 प्रतिशत रह गया। डोलैट कैपिटल के अनुसार, यह सुधार मुख्य रूप से अधिक बारिश वाले इलाकों की वजह से हुआ, न कि कम बारिश वाले क्षेत्रों के सामान्य स्थिति में आने से। इससे स्पष्ट होता है कि देश के कुछ हिस्सों में तेज बारिश हुई, न कि बारिश के वितरण में व्यापक सुधार हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है, “आगे देखें तो, आईएमडी का निकट-अवधि का अनुमान मध्य और पश्चिमी भारत में सामान्य से अधिक बारिश का संकेत देता है, हालांकि मजबूत होते अल-नीनो और लगभग न्यूट्रल आईओडी के कारण अगस्त में भी मौसमी जोखिम बना हुआ है।”
इस बीच सप्ताह के दौरान खरीफ की बुवाई में और प्रगति हुई। 31 जुलाई तक कुल बुवाई का रकबा 894.2 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी समय यह 920.7 लाख हेक्टेयर था। पिछले साल की तुलना में बुवाई के अंतर में कमी आई, हालांकि फसल-वार रुझान मिले-जुले रहे। तिलहन के मामले में सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला। सीजन के अधिकांश समय पीछे रहने के बाद अब यह पिछले साल की तुलना में मामूली बढ़त की स्थिति में आ गया है। बुवाई 172.3 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई, जबकि पिछले साल यह 171.1 लाख हेक्टेयर थी।इस तरह, पिछले सप्ताह 3.4 लाख हेक्टेयर की कमी से स्थिति बदलकर 1.2 लाख हेक्टेयर की मामूली बढ़त में बदल गई।मोटे अनाज ने भी अपने अंतर को काफी हद तक कम कर लिया है। हालांकि, हाल के हफ्तों में तेजी के संकेत मिलने के बावजूद धान की बुआई पिछले साल की रफ्तार से थोड़ी और पिछड़ गई। दालों की बुआई में मामूली सुधार हुआ, जबकि गन्ने के रकबे में कोई बदलाव नहीं हुआ। ( -
मुंबई. राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में हुए विरोध-प्रदर्शन के कारण केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के कुछ दिन बाद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत छह अगस्त को मुंबई में 'जेन अल्फा' और 'जेन जेड' छात्रों से संवाद करेंगे। भागवत, नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर (एनएमएसीसी) में 'इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस' (आईआईयूएमएन) की वार्षिक चैंपियनशिप कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन समारोह को संबोधित करेंगे। यह कार्यक्रम संगठन की 15वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में देशभर के 100 से अधिक शहरों से 15 से 19 साल की आयु के 2,000 से अधिक छात्र शामिल होंगे। 'जेन अल्फा' 2010 से 2024 के बीच जन्मे बच्चे हैं, जबकि 'जेन जेड' से अभिप्राय 1997 से 2012 के बीच जन्मी पीढ़ी से है। संघ प्रमुख के संबोधन से आईआईयूएमएन के वार्षिक चैंपियनशिप कॉन्फ्रेंस की शुरुआत होगी, जिसमें छात्र स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे। उद्घाटन समारोह 'दुनिया को जोड़ने में युवाओं की भूमिका: भारतीय तरीका' विषय पर आधारित होगा।
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नयी दिल्ली. संसद में सोमवार को भी विभिन्न विपक्षी दलों के सदस्यों ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दों को लेकर हंगामा किया जिससे दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित हुई। हालांकि हंगामे के बीच ही दोनों सदनों ने एक-एक विधेयक को मंजूरी दी। विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा ने उच्चतम न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश समेत न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने के प्रावधान वाला विधेयक बिना चर्चा के पारित कर दिया। सदन में विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के बीच ही भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक, 2026 और बैंककार बही साक्ष्य विधेयक, 2026 भी पेश किए। लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने पर अध्यक्ष ओम बिरला ने राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ियों की सफलता का उल्लेख किया और उन्हें बधाई दी। इसके बाद उन्होंने प्रश्नकाल शुरू कराया लेकिन विपक्ष के सदस्य हंगामा करने लगे।
बिरला ने हंगामा कर रहे सदस्यों से प्रश्नकाल चलने देने का आग्रह करते हुए कहा, ''मुझे लगता है कि आप नियोजित तरीके से सदन नहीं चलाना चाहते। प्रश्नकाल महत्वपूर्ण होता है। कृपया प्रश्नकाल चलने दें।'' शोर-शराबा जारी रहने पर अध्यक्ष ने बैठक दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर स्थिति ज्यों की त्यों बनी रही।
हंगामे के बीच ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंककार बही साक्ष्य विधेयक, 2026 और सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक, 2026 पेश किए। सदन में हंगामा नहीं थमने पर पीठासीन सभापति कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने कुछ मिनट बाद ही कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दो बजे बैठक शुरू हुई तो कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को चर्चा और पारित करने के लिए पेश किया। इस दौरान कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों के सदस्य राम मंदिर चढ़ावा चोरी और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर नारेबाजी कर रहे थे। पीठासीन सभापति तेन्नेटी ने हंगामा कर रहे सदस्यों से अपनी सीटों पर बैठने का आग्रह करते हुए उनसे विधेयक पर चर्चा में भाग लेने को कहा, लेकिन सदन में हंगामा नहीं थमा। सदन ने विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के बीच ही ध्वनिमत से बिना चर्चा के विधेयक को पारित कर दिया। इसके बाद हंगामा नहीं थमने पर तेन्नेटी ने कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी।
उधर राज्यसभा में भी विपक्षी सदस्यों ने इन मुद्दों को लेकर हंगामा किया।
पूर्वाह्न 11 बजे बैठक शुरू होने पर सभापति सी पी राधाकृष्णन ने ग्लासगो में संपन्न राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ियों की सफलता का उल्लेख किया और उन्हें बधाई दी। इसके बाद सदन में शून्यकाल शुरू हुआ लेकिन विपक्षी सदस्य पिछले महीने दिल्ली तथा अन्य राज्यों में प्रदर्शन कर रहे छात्रों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस की कार्रवाई के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह से जवाब देने की मांग करते हुए हंगामा करने लगे कुछ सदस्यों ने तख्तियां दिखाईं जिस पर आपत्ति जताते हुए सभापति ने कहा कि सदन में तख्तियां नहीं दिखाई जा सकतीं। सभापति ने शून्यकाल चलाने का प्रयास कराया और हंगामे के बीच ही भारतीय जनता पार्टी की दर्शना सिंह, अलका गुर्जर और मनोनीत सदस्य उज्ज्वल निकम ने लोक महत्व से जुड़े अपने-अपने मुद्दे उठाए। हंगामा जारी रहने पर सभापति ने सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी।
एक बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे जब बैठक पुन: शुरु हुई तो उपसभापति हरिवंश ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक पर चर्चा शुरू करने के लिए कहा। यह विधेयक 28 जुलाई को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास मंत्री जीतन राम मांझी ने सदन में पेश किया था। इसी बीच विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया।
उपसभापति ने सदस्यों से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक पर चर्चा करने के लिए कहा। उन्होंने सदन में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से अपनी बात रखने के लिए कहा। खरगे ने अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी का मुद्दा उठाना चाहा। लेकिन उपसभापति ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी । इसके बाद उपसभापति ने कांग्रेस के अजय माकन से अपनी बात रखने के लिए कहा। हरिवंश ने उनसे कहा कि वह विधेयक पर ही बोलें। हरिवंश ने उनसे पुन: कहा कि वह विधेयक पर ही बोलें। माकन ने कहा ''एमएसएमई रोजगार देने वाला क्षेत्र है और रोजगार की मांग करने वाले युवाओं के साथ क्या हुआ, यह सबने पिछले सप्ताह देखा है।'' माकन ने कहा कि देश में कारपोरेट जगत को पूरी छूट दी जाती है लेकिन एमएसएमई के लिए यह बात नहीं है।
सदन में मौजूद संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि आसन की ओर से बार-बार विधेयक पर बोलने के लिए कहा गया लेकिन विपक्षी सदस्य विषय को भटकाते हैं। इसके बाद हरिवंश ने भाजपा की सुमित्रा वाल्मीक को विधेयक पर बोलने के लिए कहा। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से लाए गए इस विधेयक पर चर्चा में सुमित्रा ने और उनके बाद अन्य सदस्यों ने हिस्सा लिया और मंत्री जीतन राम मांझी ने चर्चा का जवाब दिया। मंत्री के जवाब के बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी दे दी। सदन ने विधेयक पर विपक्ष द्वारा लाये गये संशोधनों को ध्वनिमत से खारिज कर दिया। इस दौरान विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते रहे।
सदन में व्यवस्था बनते न देख उपसभापति हरिवंश ने करीब साढ़े तीन बजे बैठक को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया। -
नयी दिल्ली. सरकार ने सोमवार को संसद में बताया कि जून में थोक मूल्य मुद्रास्फीति बढ़कर 9.87 प्रतिशत होने का मुख्य कारण उन वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि थी, जो वैश्विक जिंस और ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव से अधिक प्रभावित होती हैं। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि सरकार महंगाई को काबू में रखने और उपभोक्ताओं पर इसके असर को कम करने के लिए कई कदम उठा रही है। इन उपायों में जरूरी खाद्य पदार्थों के बफर भंडार को बढ़ाना, खरीदे गए अनाज को खुले बाजार में युक्तिपूर्वक रूप से बेचना और व्यापार नीतियों में जरूरी बदलाव करना शामिल है। सरकार के उपायों के कारण, पिछली दो तिमाही में खुदरा या उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित महंगाई दर 4 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे रही है -- 3.1 प्रतिशत (वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही) और 3.9 प्रतिशत (वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही)। वर्षवार आधार पर, थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित महंगाई दर मई के 9.68 प्रतिशत से बढ़कर जून में 9.87 प्रतिशत हो गई। चौधरी ने कहा, ''डब्ल्यूपीआई महंगाई में बढ़ोतरी मुख्य रूप से उन जिंस की कीमतों में दबाव के कारण है जो वैश्विक ऊर्जा (ईंधन) और जिंस की कीमतों में उतार-चढ़ाव से अधिक प्रभावित होती हैं, खासकर खनिज तेल (पेट्रोलियम उत्पादों सहित), खाद्य पदार्थ, मूल धातु, रसायन और रासायनिक उत्पाद।'' उन्होंने कहा कि सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ परामर्श कर विकास लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए कीमतों में स्थिरता बनाए रखने के लिए हर पांच साल में एक बार सीपीआई खुदरा महंगाई का लक्ष्य निर्धारित करती है।
सरकार ने 25 मार्च 2026 को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 की अवधि के लिए सीपीआई महंगाई का लक्ष्य 4 प्रतिशत निर्धारित किया, जिसमें निचली सीमा 2 प्रतिशत और ऊपरी सीमा 6 प्रतिशत रखी गई। मुख्य रूप से खाने-पीने की चीजों और परिवहन की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण, भारत की खुदरा महंगाई मई 2026 के 3.93 प्रतिशत से बढ़कर जून 2026 में अस्थायी रूप से 4.38 प्रतिशत हो गई। -
नयी दिल्ली. राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) 2026 प्रश्नपत्र लीक विवाद के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने मिंटो रोड स्थित अपने मुख्यालय, ओखला स्थित क्षेत्रीय कार्यालयों, भंडारण केंद्रों और अन्य अधिसूचित स्थानों पर चौबीस घंटे की सुरक्षा सेवाओं के लिए 7.5 करोड़ रुपये की निविदा आमंत्रित की है। निविदा दस्तावेज के मुताबिक, इस कदम का उद्देश्य एनटीए के कर्मियों, आगंतुकों, संपत्तियों, परिसरों, अभिलेखों, गोपनीय परीक्षा सामग्री, सर्वर रूम, स्ट्रॉन्ग रूम और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों की सुरक्षा करना है। एनटीए की ओर से 25 जुलाई को जारी आरएफपी (प्रस्ताव के लिए अनुरोध) में कहा गया है कि दो साल के अनुबंध का अनुमानित मूल्य ''बिना किसी बदलाव के 7.5 करोड़ रुपये और जीएसटी'' है। दस्तावेज के अनुसार, 17 अगस्त को दोपहर तीन बजे तक बोलियां दर्ज कराई जा सकती हैं, जबकि मुद्रण सेवाओं के लिए निविदा प्रक्रिया 20 अगस्त को समाप्त होगी। यह अनुबंध शुरुआत में दो साल के लिए मान्य रहेगा और संतोषजनक प्रदर्शन, परस्पर सहमति तथा सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन के अधीन इसे एक-एक वर्ष की दो अतिरिक्त अवधि के लिए बढ़ाया जा सकता है। दस्तावेज में कहा गया है, ''बोलीदाता के पास बोली जमा करने की अंतिम तिथि तक कम से कम पांच वर्षों के लिए पेशेवर सुरक्षा सेवाएं प्रदान करने का अनुभव होना चाहिए।'' आरएफपी के तहत बोलीदाताओं के पास केंद्र सरकार के मंत्रालयों, विभागों, स्वायत्त निकायों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, संवैधानिक निकायों, विश्वविद्यालयों, परीक्षा एजेंसियों, आईटी पार्कों, हवाई अड्डों, अस्पतालों, मेट्रो रेल प्रणालियों या चौबीसों घंटे सुरक्षा की आवश्यकता वाले अन्य प्रतिष्ठानों को सुरक्षा सेवाएं प्रदान करने का अनुभव होना आवश्यक है। दस्तावेज के मुताबिक, बोलीदाताओं का पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान औसत वार्षिक कारोबार कम से कम 10 करोड़ रुपये होना चाहिए। यह निविदा नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक के बाद महीनों चली गहन जांच के बाद आई है।
नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक विवाद के बाद देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की शुचिता और सुरक्षा को लेकर चिंताएं पैदा हो गई थीं। इस विवाद ने गोपनीय परीक्षा सामग्री के प्रबंधन एवं परिवहन, सुरक्षा व्यवस्था और संवेदनशील रिकॉर्ड तक अनधिकृत पहुंच को रोकने के उपायों पर सवाल खड़े किए थे। -
नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को स्पष्ट किया कि दिल्ली और अन्य राज्यों की सरकारें राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को बंद कर सकती हैं या उन्हें वापस ले सकती हैं, बशर्ते उनका गंभीर और जघन्य अपराधों का कोई 'आपराधिक रिकॉर्ड' नहीं हो। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि ''आपराधिक रिकॉर्ड'' से आशय सिर्फ गंभीर और जघन्य अपराधों से है। मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शुरुआत में शीर्ष अदालत को बताया कि केंद्र सरकार प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ प्राथमिकी पर आगे नहीं बढ़ने की अपनी प्रतिबद्धता को लेकर गंभीर है, सिवाय उन छात्रों के जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा हो। मेहता ने कहा कि गंभीर और जघन्य अपराधों से जुड़े आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,700 से अधिक लोगों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस नहीं ली जाएंगी। सुनवाई के दौरान, वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने बताया कि प्रदर्शनों के दौरान वकीलों के बच्चों को भी पीटा गया। उन्होंने कहा, ''वीडियो बेहद चौंकाने वाले हैं। हमने अदालत को 300 वीडियो सौंपे हैं। चूंकि ऊपर से निर्देश आए हैं, इसलिए पुलिस आयुक्त को इन सब पर ध्यान देना चाहिए।'' शंकरनारायणन ने कहा, ''हमने बिना वर्दी वाले उन लोगों की पहचान की है, जो कथित पुलिस ज्यादती में शामिल थे। पुलिस आयुक्त और आरएएफ (त्वरित कार्य बल) निदेशक को यह बताने का निर्देश दिया जाना चाहिए कि पुलिस ने पैलेट गन आदि का इस्तेमाल क्यों किया।'' मामले की अगली सुनवाई अब 18 अगस्त को होगी।
शीर्ष अदालत ने इससे पहले कहा था कि सिर्फ इसलिए पुलिस की ज्यादती या 'लाठीचार्ज' को सही नहीं ठहराया जा सकता कि कोई आंदोलन हो रहा है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार पूरी तरह से सुनिश्चित है। दिल्ली में 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़पें हुई थीं। संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने लाठियों और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया था। -
नयी दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को महिला पहलवानों द्वारा दायर यौन उत्पीड़न के मामले में भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और सह-आरोपी विनोद तोमर को बरी कर दिया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) अश्विनी पंवार ने इस मामले में भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और डब्ल्यूएफआई के पूर्व सहायक सचिव तोमर को बरी कर दिया। अदालत के बाहर पत्रकारों से बातचीत में बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि अदालत ने उन्हें और विनोद तोमर को ''बाइज्जत बरी'' किया है। उन्होंने कहा, ''पहले ही दिन मैंने कहा था कि यदि मेरे खिलाफ लगाया गया कोई भी आरोप साबित हो जाए तो मैं खुद फांसी पर लटक जाऊंगा। अब अदालत ने मुझे बाइज्जत बरी कर दिया है। मैं खुश हूं और अपने वकीलों का आभारी हूं।'' भाजपा सांसद रह चुके सिंह ने कहा, ''फिलहाल मैं इतना ही कह सकता हूं। अदालत का विस्तृत आदेश पढ़ने के बाद ही इस मामले पर आगे टिप्पणी करूंगा।'
बहरहाल, लोक अभियोजक मनीष रावत ने कहा कि अदालत का विस्तृत आदेश पढ़ने के बाद उच्च न्यायालय में आगे की ''उचित कानूनी कार्रवाई'' की जाएगी। अभियोजन पक्ष मजिस्ट्रेट अदालत के इस फैसले को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकता है। मामले की सुनवाई बंद कमरे में हुई और मीडिया को अदालत कक्ष में प्रवेश की अनुमति नहीं थी। आदेश सुनाए जाने के तुरंत बाद सिंह के वकील ने अदालत के बाहर पत्रकारों को संबोधित करते हुए उनको बरी किए जाने की पुष्टि की। महिला पहलवानों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने पैरवी की, जबकि बृजभूषण शरण सिंह की ओर से अधिवक्ता राजीव मोहन, ऋषभ भाटी और रेहान खान अदालत में पेश हुए। यह मामला अप्रैल 2023 का है, जब ओलंपियन खिलाड़ियों सहित कई महिला पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन शुरू किया था। उन्होंने भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने सात महिला पहलवानों की याचिका पर संज्ञान लिया, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज कीं। दिल्ली पुलिस ने जून 2023 में छह बार सांसद रह चुके बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 (महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग), 354ए (यौन उत्पीड़न), 354डी (पीछा करना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत आरोपपत्र दाखिल किया। एक नाबालिग महिला पहलवान द्वारा दर्ज कराई गई अलग प्राथमिकी को बाद में पुलिस जांच के बाद बंद कर दिया गया। मई 2024 में दिल्ली की एक अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न, आपराधिक धमकी और महिला की लज्जा भंग करने के आरोप तय किए, जबकि विनोद तोमर के खिलाफ आपराधिक धमकी का आरोप तय किया। हालांकि, छह महिला पहलवानों में से एक की शिकायत में उसके आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने के कारण अदालत ने उस मामले में बृजभूषण शरण सिंह को आरोपमुक्त कर दिया। इसके अगले महीने यानी जून 2024 में मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई। बाद में मई 2025 में अदालत ने नाबालिग महिला पहलवान से जुड़े मामले में पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली। छह महिला पहलवानों द्वारा दर्ज कराए गए मामले में बंद कमरे में सुनवाई दो वर्ष से अधिक समय तक चली। अदालत ने दो जुलाई 2026 को अंतिम दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। अदालत के विस्तृत आदेश का अभी इंतजार है। -
जम्मू. लगातार बारिश के कारण दो दिनों तक बंद रहे जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के आंशिक रूप से बहाल होने के बाद 3,886 श्रद्धालुओं का एक नया जत्था रविवार तड़के भगवती नगर आधार शिविर से अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हुआ। अधिकारियों ने बताया कि एक दिन के विराम के बाद यात्रा का 25वां जत्था कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच 177 वाहनों के काफिले में तड़के दो बजकर 52 मिनट पर जम्मू आधार शिविर से मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले में स्थित बालटाल के लिए रवाना हुआ। उन्होंने बताया कि तीन जुलाई को यात्रा शुरू होने के बाद से अब तक कश्मीर के हिमालय में समुद्र तल से 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ की पवित्र गुफा के दर्शन 4.50 लाख से अधिक श्रद्धालु कर चुके हैं। 57 दिनों तक चलने वाली यह यात्रा 28 अगस्त को संपन्न होगी। लगातार बारिश के कारण उधमपुर जिले के झखानी और रामबन जिले के बनिहाल के बीच कई स्थानों पर जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग को भारी नुकसान पहुंचा था, जिसके चलते बड़े पैमाने पर मरम्मत कार्य की आवश्यकता पड़ी। इसी कारण शनिवार को जम्मू से यात्रा एक दिन के लिए स्थगित कर दी गई थी। अधिकारियों ने बताया कि कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला 250 किलोमीटर लंबा जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग, सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र, विशेषकर उधमपुर के समरोली इलाके में देवाल पुल के पास, अब एक लेन के यातायात के लिए बहाल कर दिया गया है। इसके बाद अमरनाथ यात्रा के वाहनों की आवाजाही फिर शुरू हो गई। उन्होंने बताया कि मरम्मत कार्य अब भी जारी है, लेकिन दो दिन के अंतराल के बाद रविवार सुबह जम्मू से हल्के मोटर वाहनों को जाने की अनुमति दे दी गई। अधिकारियों ने कहा कि अगले कुछ घंटों में अमरनाथ यात्रा का काफिला गुजरने के बाद काजीगुंड से जम्मू की ओर यातायात भी बहाल कर दिया जाएगा। यातायात पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया कि भारी वाहनों को राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक-एक दिन छोड़कर चलने की अनुमति दी जाएगी। अगले कुछ दिनों के लिए प्रतिकूल मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुए यातायात पुलिस ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे राष्ट्रीय राजमार्ग पर यात्रा करने से पहले सड़क और यातायात की ताजा स्थिति की पुष्टि कर लें। एक अन्य घटनाक्रम में उधमपुर-रियासी रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) शिव कुमार शर्मा ने शनिवार को समरोली स्थित देवाल पुल का दौरा कर राजमार्ग पर मलबा हटाने और यातायात बहाल करने के कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने यातायात जल्द से जल्द बहाल करने के लिए मलबा हटाने का कार्य तेजी से पूरा करने पर जोर दिया, साथ ही अभियान में लगे कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
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कोलकाता. बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन ने रविवार को भारत में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करने की वकालत करते हुए कहा कि भेदभाव, खासकर महिलाओं के खिलाफ भेदभाव को खत्म करने के लिए ऐसा कानून जरूरी है। उन्होंने पड़ोसी देश बांग्लादेश और पाकिस्तान में भी ऐसे कानून की जरूरत पर जोर दिया। तसलीमा ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''मैं विगत 40 सालों से यूसीसी के लिए लड़ रही हूं। किसी भी सभ्य देश में इसकी बहुत ज़रूरत है। बांग्लादेश, पाकिस्तान और भारत को समान नागरिक संहिता की जरूरत है। सभी के लिए एक जैसे कानून होने चाहिए। महिलाओं को बहुत भेदभाव का सामना करना पड़ता है और यूसीसी के जरिए इस भेदभाव को काफ़ी हद तक दूर किया जा सकता है।'' तसलीमा का यह बयान पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा राज्य के लिए यूसीसी के मसौदे की समीक्षा करने के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित करने के बाद आया है। सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक प्रस्तावित कानून के "व्यापक असर और विस्तृत दायरे" के मद्देनजर यह समिति बनाई गई है। इसके मुताबिक कोई भी अगला कदम उठाने से पहले समिति मसौदा विधेयक की समीक्षा करेगी। तसलीमा (63) ने बांग्लादेश का जिक्र करते हुए कहा कि समानता सभ्यता की नींव है, लेकिन कई महिलाओं को अब भी भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, ''बांग्लादेश में हिंदू महिलाओं को समान अधिकार नहीं हैं। वह अपने पिता की संपत्ति की उत्तराधिकारी नहीं बन सकतीं। अगर हिंदू महिलाओं को आज़ादी और समान अधिकार चाहिए, तो यूसीसी जरूरी है।'' तसलीमा शनिवार को करीब 19 साल बाद कोलकाता लौटीं। यहां उनका रवींद्र सदन में राज्य सरकार के एक कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। उन्हें 2007 में उनकी किताब 'द्विखंडितो' के प्रकाशन को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के कारण तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार के कहने पर कोलकाता छोड़ना पड़ा था। लेखिका ने एक दिन पहले शहर में हुए उनके सम्मान समारोह में हुई गड़बड़ी पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि उन्हें ''अपमान'' महसूस हुआ, जब दर्शकों के एक हिस्से के विरोध के कारण मशहूर कवि जॉय गोस्वामी को मंच छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। तसलीमा ने संवाददाताओं से कहा, ''न केवल जॉय का अपमान हुआ, बल्कि मेरा भी अपमान हुआ क्योंकि मैंने ही उन्हें आमंत्रित किया था।'' विवाद तब शुरू हुआ जब तसलीमा ने गोस्वामी को मंच पर आमंत्रित किया और उनसे सभा को संबोधित करने का अनुरोध किया। हालांकि, दर्शकों के एक वर्ग के विरोध की वजह से मशहूर कवि को बिना संबोधन के मंच से उतरना पड़ा। लेखिका ने उस घटना को याद करते हुए कहा, ''मैंने अपने भाषण में अभिव्यक्ति की आज़ादी के बारे में बात की थी। हर किसी को बोलने की अनुमति होनी चाहिए। किसी को भी अपने विचार व्यक्त करने से रोकना सही नहीं है।'' तसलीमा ने प्रदर्शनकारियों के बर्ताव पर सवाल उठाते हुए कहा, ''जिन लोगों ने मेरे भाषण की तारीफ की, उन्हीं लोगों ने उन्हें मंच पर नहीं आने दिया। क्या उन्होंने मुझसे भी सवाल नहीं पूछे? यह विरोधाभासी बात है। जब कोई अभिव्यक्ति की आज़ादी की बात करता है, तो लोग उसका समर्थन करते हैं, लेकिन जब किसी कवि को बोलने के लिए बुलाया जाता है, तो वे उसे सुनना नहीं चाहते। यह सही नहीं है।'' तसलीमा ने कहा कि वह कोलकाता स्थित गोस्वामी के घर जाएंगी। उन्होंने कहा, ''(घटना के बाद) मुझे जॉय से बात करने का मौका नहीं मिला है, लेकिन मैं आज या कल उनसे मिलने जाऊंगी।'' बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका ने हालांकि उम्मीद जताई कि भविष्य में उनके पसंदीदा शहर में ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी। उन्होंने कहा कि कोलकाता हमेशा से अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतांत्रिक मूल्यों का पक्षधर रहा है। तसलीमा ने संवाददाताओं से कहा, "कोलकाता प्रगतिशील लोगों का शहर है। यहां के लोग अभिव्यक्ति की आजादी और अपने विचार रखने के अधिकार में विश्वास रखते हैं। लोगों की राजनीतिक विचारधाराएं अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन हर किसी को अपनी राय रखने का मौका मिलना चाहिए।'' जब पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा, तृणमूल कांग्रेस और मौजूदा भाजपा सरकार के शासन की तुलना करने के लिए कहा गया, तो लेखिका ने भाजपा नीत सरकार की प्रशंसा की जिसने उन्हें कोलकाता आने की अनुमति दी है। तसलीमा ने कहा, ''बेशक, तीनों सरकारों के बीच फर्क है। एक सरकार ने मुझे राज्य से निकाल दिया, दूसरी ने मुझे वापस नहीं आने दिया, जबकि तीसरी सरकार ने मुझे आने की अनुमति दी है। उन अंतरों पर ध्यान देने के बजाय, मुझे लगता है कि हमें इस बात का जश्न मनाना चाहिए कि मैं वापस आ पाई हूं। मैं बहुत खुश हूं कि मैं लौट सकी। मैं यह मानना चाहती हूं कि यह सरकार अभिव्यक्ति की आज़ादी और बोलने की आज़ादी में विश्वास रखती है।'' तसलीमा को 'सेक्युलर मिशन' नामक संगठन ने कोलकाता आमंत्रित किया था।
बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका ने कहा कि आमंत्रण के बाद राज्य सरकार ने उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई और पश्चिम बंगाल के उनके दौरे में मदद की। तसलीमा ने शनिवार को कहा था कि 19 साल बाद कोलकाता लौटना इस बात का सबूत है कि ''अन्याय लंबा तो हो सकता है, लेकिन हमेशा के लिए नहीं रह सकता''। साथ ही, उन्होंने रेखांकित किया कि उनकी लड़ाई हमेशा महिलाओं के अधिकारों और अभिव्यक्ति की आज़ादी के लिए रही है, न कि किसी राजनीतिक पार्टी के पक्ष या विरोध में। तसलीमा को 1994 में, धर्म और अपनी लेखनी को लेकर कट्टरपंथी समूहों से मिली जान से मारने की धमकियों के कारण बांग्लादेश छोड़ना पड़ा। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘नशा मुक्त युवा से विकसित भारत संकल्प अभियान’ का शुभारंभ किया। नशीले पदार्थों के सेवन के खिलाफ 100 सप्ताह तक चलने वाले इस अभियान में उन्होंने हर नागरिक, खासकर युवाओं से सक्रिय रूप से जुड़ने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश के युवाओं का तन-मन से स्वस्थ, आत्मविश्वास से भरपूर और नशे जैसी घातक आदतों से दूर रहना जरूरी है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह अभियान व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि अभियान का नाम ही इसके संकल्प को स्पष्ट करता है। जब देश ने विकसित भारत का लक्ष्य तय किया है, तब यह आवश्यक है कि युवा शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहें, आत्मविश्वास से भरपूर हों और ड्रग्स जैसी घातक आदत से हमेशा दूर रहें।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी को यह संकल्प लेना होगा कि देश के युवा नशे और ड्रग्स के खतरे को समझें, हर तरह से जागरूक रहें और इससे दूर रहें। उन्होंने कहा कि नशे की लत न केवल व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करती है, बल्कि परिवार और समाज पर भी इसका गंभीर असर पड़ता है।पीएम मोदी ने कहा कि कुछ काम ऐसे होते हैं, जिन्हें व्यक्ति अकेले करने का प्रयास करता है तो निराशा और थकान महसूस हो सकती है। लेकिन जब वही काम सामूहिक अभियान बन जाता है और करोड़ों लोग कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ते हैं, तो उसमें नई ऊर्जा पैदा होती है। उन्होंने विश्वास जताया कि इसी सामूहिक शक्ति के साथ चलाया जा रहा यह अभियान हर युवा के मन को छुएगा।युवाओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वे इस बड़े अभियान के लीडर हैं। उन्होंने युवाओं की जागरूकता, समझदारी और कर्तव्यों के प्रति गंभीरता की सराहना की। पीएम मोदी ने कहा कि युवा भारत की ‘अमृतपीढ़ी’ हैं और अगले 20-25 वर्षों में वे अपने जीवन को दिशा देने के साथ 2047 तक देश को विकसित भारत की मंजिल तक पहुंचाएंगे। उन्होंने कहा कि देश को युवाओं की ऊर्जा, कल्पनाशक्ति और प्रतिभा की जरूरत है। इसलिए देश और अपने जीवन के लिए युवाओं का नशामुक्त रहना बेहद जरूरी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले 100 रविवार ‘नशा मुक्त भारत’ की दिशा में 100 मजबूत कदम होंगे। उन्होंने कहा कि यदि कोई युवा गलती से नशे की गिरफ्त में आ भी गया है तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसके सारे रास्ते बंद हो गए हैं। उन्होंने परिवारों से अपील की कि यदि घर का कोई बच्चा नशे का शिकार हो गया है तो सामाजिक प्रतिष्ठा की आड़ में इसे छिपाया नहीं जाना चाहिए। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों और चिकित्सा सहायता की मदद लेकर बच्चे को नशे से मुक्त कराने का प्रयास किया जाना चाहिए। साथ ही, परिवार में बच्चों के साथ खुलकर संवाद की संस्कृति विकसित करने पर भी जोर दिया।पीएम मोदी ने कहा कि समाज का सहयोग, योग और ध्यान की ताकत नशे के खिलाफ आंतरिक शक्ति प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि आज नशा छोड़ने के लिए पुनर्वास केंद्र जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। उन्होंने युवाओं और परिवारों से जरूरत के अनुसार इन सुविधाओं की मदद लेने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि कार्यक्रम से स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के हजारों छात्र ऑनलाइन जुड़े हैं। इसके अलावा ‘मायभारत’ के लाखों वॉलंटियर्स और एनएसएस के स्वयंसेवक भी अभियान में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों, संस्थानों और पृष्ठभूमि से जुड़े एक करोड़ से अधिक युवा इस अभियान के साथ एकजुट हुए हैं। प्रधानमंत्री ने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों से भी अपील की कि वे पाठ्यक्रम की पढ़ाई के साथ छात्रों से ड्रग्स के खतरों पर बातचीत करें। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों में नशे के खिलाफ जागरूकता का आंदोलन चलाया जाना चाहिए और शिक्षकों के प्रयास इसके सकारात्मक परिणाम ला सकते हैं।पीएम मोदी ने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ अभियान में सरकार मजबूती से युवाओं के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि देश में नशे के कारोबारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। पहले की तुलना में कई गुना अधिक गिरफ्तारियां हुई हैं और हजारों करोड़ रुपए की ड्रग्स जब्त की गई है। उन्होंने कहा कि यह नशे के खिलाफ सरकार की सख्ती को दर्शाता है।प्रधानमंत्री ने युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि उन्हें अपनी क्षमता को बचाकर रखना होगा। उन्होंने कहा कि ड्रग्स कुछ समय के लिए नशा या उत्साह दे सकते हैं, लेकिन इसके दीर्घकालिक परिणाम करियर और परिवार दोनों के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकते हैं। युवाओं को अपनी ऊर्जा और प्रतिभा का इस्तेमाल देश के निर्माण और अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए करना चाहिए। - नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में आयोजित समारोह में ‘पीबीजी सोल्जरथॉन’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर मिजोरम के राज्यपाल जनरल वीके सिंह भी मौजूद रहे, जो इस पहल के संरक्षक हैं। वहीं, केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री मनसुख मांडविया और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में एनसीसी साइक्लोथॉन 2026 को हरी झंडी दिखाई। इसके अलावा जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम से ‘नशा मुक्त भारत’ थीम पर आधारित ‘फिट इंडिया संडेज ऑन साइकिल’ का 84वां संस्करण भी शुरू हुआ।सैनिकों के साथ दौड़ें-सैनिकों के लिए दौड़ें’ थीम पर आयोजित पीबीजी सोल्जरथॉन का उद्देश्य फिटनेस और देशभक्ति को बढ़ावा देने के साथ सशस्त्र बलों के साहस, बलिदान और सेवा का सम्मान करना था। इसमें सैनिकों के साथ आम नागरिकों ने भी हिस्सा लिया और सशस्त्र बलों के प्रति एकजुटता का संदेश देते हुए दौड़ लगाई।सोल्जरथॉन में प्रतिभागियों ने राष्ट्रीय ध्वज और कार्यक्रम के बैनर लेकर हिस्सा लिया। इस दौरान सैनिकों के प्रति सम्मान, आभार और एकजुटता की भावना प्रदर्शित की गई। आयोजन ने नागरिकों और सशस्त्र बलों के बीच जुड़ाव को मजबूत करने का संदेश दिया। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि ‘सैनिकों के लिए दौड़ें, सैनिकों के साथ दौड़ें’ के विजन से प्रेरित सोल्जरथॉन आम नागरिकों और सशस्त्र बलों के बीच संबंधों को मजबूत करने का अनूठा मंच है। उन्होंने कहा कि ‘असली नायकों (सशस्त्र बलों) का समर्थन’ थीम पर आधारित यह आयोजन सैनिकों के समर्पण, साहस और बलिदान को सम्मान देता है। साथ ही यह नागरिकों को सक्रिय भागीदारी के जरिए सैनिकों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए प्रेरित करता है। आजादी के 79 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में एनसीसी साइक्लोथॉन 2026 का आयोजन किया गया। केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री मनसुख मांडविया और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने इसे हरी झंडी दिखाई। इस कार्यक्रम में बॉक्सर और ओलंपिक पदक विजेता मैरी कॉम ने भी हिस्सा लिया।मनसुख मांडविया ने कहा कि देश की आजादी के 79 साल पूरे होने के जश्न के तहत 79 एनसीसी कैडेट साइक्लोथॉन में हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि एनसीसी फिटनेस, अनुशासन और समाज सेवा का प्रतीक है। ये कैडेट देश का भविष्य और उम्मीद हैं। साइक्लोथॉन के जरिए युवा यह संदेश दे रहे हैं कि वे विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएंगे। एनसीसी साइक्लोथॉन 2026 में शामिल मैरी कॉम ने युवाओं से जीवन में आगे बढ़ने और बहुत कुछ हासिल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एनसीसी की यूनिफॉर्म सिर्फ एक कपड़ा नहीं है, बल्कि देश के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संकल्प है। उन्होंने कहा कि युवाओं को यही भावना सिखाना जरूरी है। दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम से ‘नशा मुक्त भारत’ थीम पर आधारित ‘फिट इंडिया संडेज ऑन साइकिल’ का 84वां संस्करण शुरू किया गया। कार्यक्रम के जरिए फिटनेस को बढ़ावा देने के साथ युवाओं और आम लोगों को नशे से दूर रहने का संदेश दिया गया।
- कोलकाता. कोलकाता के उत्तरी बाहरी इलाके में शनिवार सुबह पिता के साथ स्कूटर पर सवार होकर स्कूल जाते समय ट्रक की टक्कर लगने से दो सगे भाइयों की मौत हो गई। पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि यह हादसा उत्तर 24 परगना जिले के बरानगर स्थित मलिक कॉलोनी के निकट बी. टी. रोड पर हुआ। स्थानीय लोगों ने बताया कि यह हादसा तब हुआ जब स्कूटर चालक वाहन को सड़क के किनारे पड़े निर्माण सामग्री के बीच से निकलने की कोशिश कर रहा था। पुलिस ने बताया कि दोनों बच्चे खालसा स्कूल के छात्र थे और उनकी उम्र पांच और सात वर्ष थी।अधिकारी ने कहा, "टक्कर के बाद दोनों बच्चे सड़क पर गिर गए और ट्रक के पहियों के नीचे आ गए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। उनके पिता घायल हो गए हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।" उन्होंने कहा कि ट्रक को जब्त कर लिया गया है और दुर्घटना के सही कारण का पता लगाने के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों का विश्लेषण किया जा रहा है।
- नयी दिल्ली. सरकारी कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) का कोयला उत्पादन जुलाई में 8.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 5.036 करोड़ टन हो गया। सीआईएल की देश के कुल कोयला उत्पादन में 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है। बारिश से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद कंपनी ने उत्पादन में अच्छी वृद्धि दर्ज की। मांग के अनुरूप भंडार प्रबंधन रणनीति के चलते कोयले की आपूर्ति भी मजबूत बनी रही और उत्पादन तथा आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखा गया। कंपनी ने बयान में कहा, ''कोल इंडिया लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 के जुलाई में शानदार परिचालन प्रदर्शन किया और कोयला उत्पादन में 8.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।'' कोयले की आपूर्ति जुलाई में 18.38 प्रतिशत बढ़कर 6.419 करोड़ टन रही।बयान में कहा गया, ''वित्त वर्ष 2026-27 के जुलाई महीने में की गई कोयले की आपूर्ति, किसी भी वित्त वर्ष के इसी महीने में कोयले की अब तक की सबसे ज्यादा खपत है। इससे पहले जुलाई में सबसे ज़्यादा आपूर्ति वित्त वर्ष 2024-25 में 6.05 करोड़ टन हुई थी।'' कोल इंडिया ने जून 2026 में 6.595 करोड़ टन कोयले की आपूर्ति की थी, जो जून महीने की अब तक की सबसे अधिक आपूर्ति थी। कंपनी के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) में कुल कोयला आपूर्ति 6.9 प्रतिशत बढ़कर 26.204 करोड़ टन हो गई, जो इस अवधि का अब तक का सर्वाधिक स्तर है। इससे पहले अप्रैल-जुलाई 2024-25 में 25.94 करोड़ टन आपूर्ति का रिकॉर्ड था। बिजली क्षेत्र को कंपनी की कोयला आपूर्ति जुलाई में 18 प्रतिशत बढ़कर 4.977 करोड़ टन रही, जबकि पिछले वर्ष समान अवधि में यह 4.235 करोड़ टन थी। बिजली क्षेत्र, कोल इंडिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता वर्ग है।
- नई दिल्ली। नई दिल्ली स्थित वीएमएमसी और सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने एक बेहद दुर्लभ जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित वयस्क मरीज की रोबोटिक तकनीक से सफल सर्जरी कर चिकित्सा क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के अनुसार, इस तरह की रोबोटिक एवी वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी दुनिया में पहली बार की गई है। इस सफलता को वैश्विक चिकित्सा जगत में भारत की अत्याधुनिक सर्जिकल क्षमता के महत्वपूर्ण उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है।अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता शर्मा के नेतृत्व में कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग की टीम ने यह जटिल ऑपरेशन किया। सर्जरी का नेतृत्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) अनुभव गुप्ता ने किया। डॉक्टरों की टीम ने मरीज की जटिल हृदय संरचना को ध्यान में रखते हुए रोबोटिक तकनीक से वाल्व रिप्लेसमेंट को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।ऑपरेशन किए गए मरीज को दो बेहद दुर्लभ जन्मजात हृदय समस्याएं थीं। इनमें पहली कंजेनिटली करेक्टेड ट्रांसपोजिशन ऑफ द ग्रेट आर्टरीज (सीसीटीजीए) थी, जिसमें हृदय के निचले कक्ष सामान्य स्थिति के उलट होते हैं। इसके कारण हृदय के दाहिने हिस्से को पूरे शरीर में रक्त पहुंचाने के लिए अतिरिक्त दबाव झेलना पड़ता है।मरीज को डेक्स्ट्रोकार्डिया की समस्या भी थी, जिसमें हृदय सामान्य बाईं ओर के बजाय दाईं ओर स्थित होता है। दोनों स्थितियों के कारण मरीज का एवी वाल्व गंभीर रूप से खराब हो गया था और हृदय की कार्यक्षमता लगातार कम हो रही थी। इस जटिल शारीरिक संरचना ने सर्जरी को सामान्य रोबोटिक प्रक्रिया से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया था।सर्जरी से पहले डॉक्टरों ने मरीज के सीटी स्कैन के आधार पर हृदय की थ्री-डी इमेज तैयार की। इससे डॉक्टरों को हृदय की असामान्य और जटिल बनावट को विस्तार से समझने में मदद मिली। इसके आधार पर ऑपरेशन की विस्तृत योजना तैयार की गई, ताकि सर्जरी के दौरान किसी भी संभावित चुनौती से निपटा जा सके।आमतौर पर रोबोटिक हार्ट सर्जरी छाती के दाईं ओर से की जाती है, लेकिन मरीज का हृदय दाईं ओर स्थित होने के कारण इस तकनीक को बदलना पड़ा। डॉक्टरों ने बाईं ओर से रोबोटिक सर्जरी करने की रणनीति अपनाई। अस्पताल के अनुसार, इस तरह की प्रक्रिया पहली बार अपनाई गई और यह सर्जिकल दृष्टि से एक महत्वपूर्ण नवाचार है।सर्जरी के दौरान छाती की हड्डी काटने के बजाय छोटे-छोटे छिद्रों के जरिए रोबोटिक उपकरणों और हाई-डेफिनिशन 3डी विजुअल सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। इससे डॉक्टरों को अत्यधिक सटीकता के साथ खराब एवी वाल्व को बदलने में मदद मिली और ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया गया।रोबोटिक तकनीक से की गई इस तरह की मिनिमली इनवेसिव सर्जरी में छाती की हड्डी काटने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे मरीज को कम दर्द होता है और रक्तस्राव भी अपेक्षाकृत कम होता है। संक्रमण का जोखिम घटने के साथ मरीज के जल्द स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौटने की संभावना भी बढ़ती है।विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपलब्धि केवल एक जटिल सर्जरी की सफलता नहीं है, बल्कि भारत के सरकारी अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा तकनीक और विशेषज्ञता की बढ़ती क्षमता का प्रमाण भी है। इससे यह संदेश मजबूत हुआ है कि सरकारी संस्थानों में भी विश्वस्तरीय उपचार और अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।सफदरजंग अस्पताल की यह सफलता भविष्य में जटिल जन्मजात हृदय रोगों के इलाज के लिए नई संभावनाएं खोल सकती है। साथ ही, इस तरह की सर्जिकल तकनीक दुनिया भर के विशेषज्ञों के लिए नए शोध और उपचार पद्धतियों के विकास का आधार बन सकती है।




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