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नयी दिल्ली. विशेषज्ञों का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकवाद रोधी अभियानों में भारत की रणनीति में न केवल नयी सीमाएं तय की हैं, बल्कि इससे कुछ महत्वपूर्ण सैन्य सबक भी मिले हैं जिनमें हवाई शक्ति का संयुक्त और समन्वित उपयोग, ड्रोन तकनीक को मजबूत करना और एक सशक्त संचार प्रणाली का निर्माण शामिल है। ठीक एक साल पहले छह-सात मई की दरमियानी रात को शुरू की गई निर्णायक सैन्य कार्रवाई को याद करते हुए, रक्षा और रणनीतिक मामलों के कई विशेषज्ञों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि सैन्य अभियान ने इस बात पर भी जोर दिया कि भविष्य के संघर्ष न केवल हवाई क्षेत्र में, बल्कि साइबरस्पेस और सूचना एवं संज्ञानात्मक क्षेत्रों में भी होंगे। लगभग चार दिन तक चले संघर्ष के दौरान भारतीय सेना न केवल पश्चिमी सीमा के उस पार से, लेह से लेकर सर क्रीक तक, कई चरणों में आने वाले ड्रोन हमलों का सामना कर रही थी, बल्कि एक गहन दुष्प्रचार अभियान का भी मुकाबला कर रही थी जिसका उद्देश्य सेना और जनता के मनोबल को नुकसान पहुंचाना था। इस अभियान में शामिल रहे एयर कमोडोर गौरव एम त्रिपाठी (सेवानिवृत्त) ने किसी भी संघर्ष के परिणाम को तय करने में हवाई शक्ति की महत्ता को स्वीकार करते हुए इस बात पर जोर दिया कि भविष्य में ऐसी किसी भी स्थिति में, तीनों सेवाओं की ''संयुक्त हवाई शक्ति'' का उपयोग किया जाना चाहिए, ताकि वह एक ''सक्षम प्रतिद्वंद्वी'' के खिलाफ समन्वित रूप से कार्य कर सके। उन्होंने कहा, ''ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमने देखा कि पाकिस्तान ने बड़ी संख्या में ड्रोन का उपयोग किया। इनमें से अधिकांश हानि नहीं पहुंचाने वाले थे और जिनका उद्देश्य केवल भारतीय हथियारों और गोला-बारूद बर्बाद कराना था, ताकि बाद में हमला करने वाले ड्रोन का इस्तेमाल किया जा सके।'' एयर कमोडोर त्रिपाठी ने कहा, ''लेकिन दुश्मन चालाक है। अगली बार वे और भी उन्नत ड्रोन भेजेंगे, जिन्हें जाम करना शायद और भी मुश्किल होगा... उनकी नेविगेशन क्षमता बेहतर होगी, शायद उन्हें जीपीएस की जरूरत न पड़े, और उनमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल होमिंग डिवाइस भी हो सकते हैं और वे शायद झुंड बनाकर एक साथ काम करेंगे।'' भारतीय वायु सेना के पूर्व अधिकारी त्रिपाठी कई प्रकार के लड़ाकू विमान उड़ा चुके हैं और 'हॉक एमके 132 स्क्वाड्रन' की कमान संभाल चुके हैं, साथ ही एक लड़ाकू विमान अड्डे के मुख्य संचालन अधिकारी के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। उन्होंने पिछले वर्ष अगस्त में समय पूर्व सेवानिवृत्ति ले ली थी। उन्होंने अभियान से सीखे गए सैन्य सबक के बारे में कहा, ''भारतीय वायु सेना में ड्रोन रोधी क्षमताओं में पहले से ही कुछ निवेश किया गया है, लेकिन ड्रोन रोधी क्षमताओं को वास्तव में विस्तारित करना होगा और सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को कवर करना होगा।" वायु सेना के पूर्व अधिकारी ने 'एस-400' तथा हथियार प्रणाली आकाश तथा अन्य मिसाइल प्रणालियों की सराहना करते हुए कहा कि इन्होंने आसमान की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दुश्मन को प्रभावी नुकसान पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा, ''हमने एस-400 सिस्टम का इस्तेमाल बेहद आक्रामक तरीके से किया। हमने इन्हें बार-बार एक जगह से दूसरी जगह तैनात किया। हमने इन्हें छिपाया भी और इनके नकली रूपों का इस्तेमाल दुश्मन को धोखा देने के लिए किया। सैन्य भाषा में इस तकनीक को छद्मावरण, छिपाव और छल या सीसीडी कहा जाता है।'' सेना के पूर्व अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल दुष्यंत सिंह (सेवानिवृत्त) ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह प्रदर्शित किया है कि भारत के आतंकवाद रोधी रुख के मामले में रणनीति में न केवल नयी सीमाएं तय की गई हैं बल्कि वह "दुश्मन के परमाणु खतरे का सामना करने" के लिए भी तैयार है। उन्होंने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर से मिले प्रमुख सैन्य सबकों में से एक यह है कि हम रणनीतिक संयम से रणनीतिक सक्रियता की ओर बढ़े हैं। अगली बार अगर ऐसी कोई घटना होती है तो हमें बहुत ही कम समय में जवाब देने के लिए तैयार रहना होगा।" भारत ने गत वर्ष 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला लेने के लिए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था, जिसमें भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कई आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे।
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लातेहार. प्रतिबंधित झारखंड जन मुक्ति परिषद से जुड़े दो माओवादियों को हथियार और गोला-बारूद के साथ लातेहार जिले के कुरुखेता जंगल क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। पुलिस अधीक्षक (एसपी) कुमार गौरव ने बताया कि मंगलवार को एक खुफिया सूचना के बाद जंगल में चलाए गए एक अभियान के दौरान मनोज लोहरा (26) और महादेव सिंह (24) को पकड़ा गया। उन्होंने कहा, "उनके बयान के आधार पर हमने भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया। संगठन के अन्य सदस्यों को पकड़ने के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है।" अधिकारी ने बताया कि बरामद की गई वस्तुओं में एक एके-47 राइफल, 318 कारतूस, मोबाइल फोन और सिम कार्ड शामिल हैं। उन्होंने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
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चेन्नई. तमिलनाडु में हाल में संपन्न विधानसभा चुनावों में थिरु वी का नगर सीट पर जीत दर्ज करने वाली टीवीके उम्मीदवार एमआर पल्लवी सुर्खियों में हैं। आठ महीने की गर्भवती पल्लवी (36) ने थिरु वी का नगर सुरक्षित सीट पर द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के वरिष्ठ नेता केएस रविचंद्रन को 22,333 मतों के अंतर से हराया। पल्लवी ने कक्षा 12 तक की पढ़ाई की है। अभिनेता-नेता विजय की तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) ने पल्लवी की गर्भावस्था के बावजूद उनके जज्बे और जुझारु व्यक्तित्व को देखते हुए उन्हें टिकट देने का फैसला किया। पल्लवी भी पार्टी के भरोसे पर खरी उतरीं। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने घर-घर जाकर वोट मांगी। स्थानीय लोगों के मुताबिक, एक मौके पर वह बेहोश भी हुईं, लेकिन ठीक होने के बाद उन्होंने प्रचार जारी रखा। जीत के बाद से पल्लवी ने मीडिया से बात नहीं की है, क्योंकि डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी है। पल्लवी के पति राजेश ने बताया कि डॉक्टरों ने उनसे (पल्लवी) 20 मई के आसपास अस्पताल में भर्ती होने के लिए कहा है। पल्लवी और राजेश अपनी दूसरी संतान के स्वागत की तैयारियों में जुटे हैं। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे चार मई को घोषित किए गए। राज्य में पहली बार चुनावी राजनीति में किस्मत आजमाने वाली टीवीके 108 सीट पर जीत के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। निवर्तमान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रमुक को 59 सीट, जबकि विपक्षी दल ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) को 47 सीट पर जीत हासिल हुई। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पल्लवी जैसे उम्मीदवारों की जीत तमिलनाडु के सियासी परिदृश्य में संभावित बदलाव का संकेत देती है, जिसमें मतदाता एक नयी पार्टी और गैर-पारंपरिक पृष्ठभूमि के उम्मीदवारों का समर्थन कर रहे हैं।
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पलक्कड़. केरल के पलक्कड़ जिले में एक दिलचस्प सियासी घटनाक्रम सामने आया है जहां एक दंपति क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं-पति संसद में और पत्नी राज्य विधानसभा में। हाल में संपन्न केरल विधानसभा चुनाव में जब कांग्रेस उम्मीदवार केए तुलसी ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) का गढ़ कहलाने वाली कोंगड सीट जीती, तो यह घटनाक्रम केवल एक चुनावी उलटफेर से कहीं अधिक था। कोंगड में तुलसी ने माकपा उम्मीदवार के सांताकुमारी को 3,706 से अधिक मतों के अंतर से हराकर राज्य विधानसभा में दस्तक दी। वह एक ऐसे क्षेत्र से विधायक चुनी गईं, जो उनके पति एवं कांग्रेस सांसद वीके श्रीकंदन के लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है। तुलसी ने एक समाचार चैनल से बातचीत में कहा कि जिस दिन उन्हें उम्मीदवार घोषित किया गया, उसी दिन से उनका चुनाव प्रचार अभियान शुरू हो गया। तुलसी ने कहा कि चुनावी रणनीति पहले से ही बननी शुरू हो गई थी और कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने समन्वित तरीके से काम किया। उन्होंने कहा, "कोई नकारात्मकता नहीं थी। लोगों ने गर्मजोशी से प्रतिक्रिया दी।"
तुलसी ने कहा कि पूरे चुनाव प्रचार अभियान के दौरान श्रीकंदन लगातार उनके साथ रहे। उन्होंने बताया कि श्रीकंदन ने यूडीएफ के अन्य उम्मीदवारों के समर्थन में भी जमकर प्रचार किया। श्रीकंदन लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े हुए हैं। वह कांग्रेस की पलक्कड़ जिला इकाई के अध्यक्ष के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। उन्हें जमीनी हकीकत और चुनावी दबाव, दोनों की बेहतरीन समझ है। श्रीकंदन के मुताबिक, जब पार्टी नेताओं ने पहली बार पूछा कि क्या शिक्षाविद और केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) की महासचिव तुलसी चुनाव जीत सकती हैं, तो वह कुछ देर के लिए सोच में पड़ गए थे। चूंकि, कोंगड श्रीकंदन के लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, इसलिए उनका जवाब मायने रखता था। उन्होंने तुलसी की जीत का भरोसा जताया। तुलसी उनके भरोसे पर खरी उतरीं और कोंगड से विधायक चुनी गईं। श्रीकंदन ने कहा कि विधायक के रूप में तुलसी की पहचान अपने आप में ही काफी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, "तुलसी को एक स्वतंत्र विधायक के रूप में काम करना चाहिए, जिनसे आम लोग बेझिझक संपर्क कर सकें।" तुलसी ने श्रीकंदन की बात से इत्तफाक जताया। उन्होंने कहा, "मतदाताओं ने अपने वोट के माध्यम से मेरे प्रति जो प्यार दिखाया है, मैं अपने काम के जरिये उसे लौटाऊंगी।" -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम के बीच हुई वार्ता के बाद बुधवार को भारत और वियतनाम ने अपने संबंधों को बढ़ाकर व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाने का निर्णय लिया और आर्थिक एवं रक्षा संबंधों को उल्लेखनीय रूप से विस्तार देने का संकल्प जताया। मोदी ने कहा कि दोनों देशों का हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए साझा दृष्टिकोण है और दोनों पक्ष कानून के शासन, शांति, स्थिरता और समृद्धि में अपना योगदान जारी रखेंगे। समझा जाता है कि दोनों पक्षों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में चीन की बढ़ती सैन्य शक्ति के प्रदर्शन का मुद्दा भी शामिल था। लैम ने मंगलवार को भारत की अपनी तीन दिवसीय यात्रा शुरू की। उनके साथ उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। इस महीने राष्ट्रपति चुने जाने के बाद यह उनकी पहली राजकीय यात्रा है। प्रधानमंत्री मोदी ने मीडिया में जारी अपने बयान में कहा कि भारत और वियतनाम ने अपने संबंधों को बढ़ाकर व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने का निर्णय लिया है। मोदी ने कहा, ''वियतनाम भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और 'विजन ओशन' का एक प्रमुख स्तंभ है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी, हम एक समान दृष्टिकोण साझा करते हैं।'' उन्होंने कहा, ''रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करके हम कानून के शासन, शांति, स्थिरता और समृद्धि में योगदान देना जारी रखेंगे।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत वियतनाम के सहयोग से आसियान (दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का संघ) के साथ अपने संबंधों का विस्तार करेगा। उन्होंने कहा कि वित्तीय संपर्क को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों के केंद्रीय बैंकों के बीच सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि भारत की यूपीआई और वियतनाम की त्वरित भुगतान प्रणाली जल्द आपस में जुड़ जाएंगी।
लाम ने अपने संबोधन में कहा कि दोनों पक्ष राजनीतिक विश्वास को गहरा करने और सुरक्षा सहयोग को बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। पिछले साल, दोनों पक्षों ने पनडुब्बी खोज, बचाव और सहायता तंत्र के लिए एक ढांचा स्थापित करने से संबंधित एक समझौता पर हस्ताक्षर किया था। उन्होंने द्विपक्षीय रक्षा उद्योग सहयोग को मजबूत करने के लिए आशय पत्र (एलओआई) पर भी हस्ताक्षर किए।
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कोलकाता. निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य में नयी विधानसभा के गठन के लिए मंगलवार को एक अधिसूचना जारी की। यह अधिसूचना पश्चिम बंगाल के राज्यपाल को भेज दी गई है, जो औपचारिक रूप से चुनावी प्रक्रिया की समाप्ति का संकेत है और नयी सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त करती है। निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नतीजों की घोषणा के बाद, अधिसूचना जारी करना एक अहम संवैधानिक कदम है। अधिकारी ने कहा, "इसके साथ ही, पश्चिम बंगाल में नयी विधानसभा के गठन की प्रक्रिया आयोग की तरफ से पूरी हो गई है। इससे तय प्रक्रियाओं के तहत सरकार बनाने के अगले कदम उठाने में मदद मिलती है।" उन्होंने कहा कि आयोग ने चुनावों के संचालन के दौरान सभी मानदंडों का पालन सुनिश्चित किया।
उन्होंने कहा, मतदान से लेकर मतगणना तक की पूरी प्रक्रिया, वैधानिक ढांचे के अनुरूप, स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हुई। अधिकारियों ने बताया कि इस अधिसूचना से निर्वाचित प्रतिनिधियों के शपथ ग्रहण और राज्य में नयी सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। -
कोलकाता. तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार किया और आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का परिणाम "जनादेश नहीं बल्कि एक साजिश" है। बनर्जी के इस फैसले से राज्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है जिसको लेकर संविधान में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। साथ ही इससे राजनीतिक टकराव की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। भाजपा द्वारा 207 सीट जीतकर 294 सदस्यीय विधानसभा में निर्णायक बहुमत हासिल करने और राज्य में तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत करने के एक दिन बाद बनर्जी ने नतीजों को "साजिश करके गढ़ा हुआ" बताकर खारिज कर दिया और कहा कि उनकी पार्टी चुनाव आयोग से लड़ रही थी, भाजपा से नहीं। तृणमूल को सिर्फ 80 सीट ही मिल सकीं। उन्होंने पद छोड़ने से इनकार करते हुए कहा, ''मैं पद क्यों छोड़ूं? हम हारे नहीं हैं। जनादेश लूटा गया है। इस्तीफे का सवाल ही कहां उठता है?'' उन्होंने खचाखच भरे संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि हमारी हार जनता के जनादेश से नहीं बल्कि एक साजिश से हुई है... मैं हारी नहीं हूं, मैं लोक भवन नहीं जाऊंगी।'' बनर्जी ने मतगणना में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए दावा किया कि लगभग 100 सीट की "लूट" हुई है और उनकी पार्टी का मनोबल तोड़ने के लिए मतगणना की गति जानबूझकर धीमी की गई। उन्होंने कहा, "हम भाजपा से नहीं लड़ रहे थे; हम निर्वाचन आयोग से लड़ रहे थे, जो भाजपा के लिए काम कर रहा था। मैंने अपने पूरे राजनीतिक करियर में ऐसा चुनाव कभी नहीं देखा।'' बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें ''कल मतगणना केंद्र के अंदर लात मारी गई, धकेला गया और बदसलूकी की गई।'' उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय बल के जवान मतगणना केंद्रों के बाहर "गुंडों" जैसा व्यवहार कर रहे थे।
उन्होंने निर्वाचन आयोग पर अपना हमला तेज करते हुए कहा, "इतिहास में एक काला अध्याय लिख दिया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त खलनायक बन गए हैं।" संविधान विशेषज्ञों के अनुसार, चुनाव हारने के बाद किसी मुख्यमंत्री द्वारा पद छोड़ने से इनकार करने की स्थिति की कल्पना पहले कभी नहीं की गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जब विधानसभा चुनाव हारने के बाद किसी पराजित मुख्यमंत्री ने इस्तीफा देने से इनकार किया हो। उन्होंने कहा कि यदि बनर्जी अपने रुख पर अडिग रहती हैं, यह भारत के संसदीय लोकतंत्र के विकास में एक अभूतपूर्व क्षण साबित हो सकता है। संविधान विशेषज्ञ और लोकसभा के पूर्व महासचिव पी डी टी आचार्य ने बताया कि नये मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण करते ही बनर्जी को पद छोड़ना होगा। उन्होंने कहा, "एक राज्य में दो मुख्यमंत्री नहीं हो सकते।" उन्होंने कहा कि बनर्जी निवर्तमान विधानसभा के लिए निर्वाचित हुई थीं और विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा है। उन्होंने कहा, "संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, सरकार विधायिका के प्रति जवाबदेह होती है। कार्यकाल समाप्त होने पर सरकार को भी जाना पड़ता है।" बनर्जी के बयान के बाद पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के सामने मौजूद संवैधानिक या कानूनी विकल्पों के बारे में पूछे जाने पर, वरिष्ठ अधिवक्ता और संवैधानिक कानून विशेषज्ञ राकेश द्विवेदी ने कहा कि राजनीतिक नैतिकता और संवैधानिक अनुशासन के अनुसार उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा, "लेकिन, नयी विधानसभा का चुनाव हो चुका है और जल्द ही भाजपा का कोई नेता मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारी पेश करेगा और राज्यपाल द्वारा उसे मुख्यमंत्री नियुक्त किया जाएगा। अगर बनर्जी इस्तीफा नहीं देती हैं, तो राज्यपाल उन्हें (बनर्जी को) बर्खास्त कर देंगे।'' वरिष्ठ अधिवक्ता और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष दुष्यंत दवे ने कहा, "उन्हें (राज्यपाल को) उन्हें (बनर्जी) बर्खास्त करना चाहिए।" वरिष्ठ अधिवक्ता अजित सिन्हा ने कहा कि बनर्जी को इस्तीफा देना चाहिए, अन्यथा नये मुख्यमंत्री के पदभार संभालने और सदन में बहुमत साबित करने के बाद वह पद हट जाएंगी। सिन्हा ने कहा, "ममता बनर्जी को इस्तीफा देना होगा। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, राज्यपाल को बहुमत वाली पार्टी को सरकार बनाने के लिए बुलाना होगा और सदन में बहुमत साबित करना होगा… नए मुख्यमंत्री के पदभार संभालने के बाद, यह मान लिया जाएगा कि वह पद से हट गई हैं।'' जब 2011 में वाम मोर्चे का 34 साल का शासन समाप्त हुआ, तो तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने हार स्वीकार करते हुए तुरंत राजभवन जाकर राज्यपाल गोपालकृष्ण गांधी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने बिना किसी देरी के पद त्याग दिया, जो एक सुव्यवस्थित लोकतांत्रिक परिवर्तन का प्रतीक था। उस वर्ष वाम-विरोधी लहर के बल पर सत्ता में आईं बनर्जी ने खुद को एक जमीनी कार्यकर्ता से प्रशासक के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा, "जब तक मैं कुर्सी पर थी, मैंने बहुत कुछ सहन किया। अब मैं एक स्वतंत्र पंछी हूँ, एक आम इंसान हूँ। मैं एक जमीनी कार्यकर्ता हूँ। मैं सड़कों पर रहूँगी और सभी अत्याचारों के खिलाफ लड़ूँगी।" साथ ही, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि संवैधानिक विकल्प अभी भी खुले हैं। उन्होंने विस्तार से बताए बिना कहा, "वे संवैधानिक मानदंडों के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं।" बनर्जी ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान केंद्रित करने की भी कोशिश की और इस बात पर जोर दिया कि वह विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन को मजबूत करने पर काम करेंगी। उन्होंने कहा, "इंडिया गठबंधन के नेताओं ने मुझे फोन करके एकजुटता व्यक्त की। सोनिया जी और राहुल गांधी ने भी मुझसे बात की है।" साथ ही उन्होंने बताया कि उन्हें अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव और हेमंत सोरेन जैसे नेताओं के भी फोन आए। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ममता बनर्जी का कांग्रेस से नजदीकी बढ़ाना थोड़ा विरोधाभासी है, क्योंकि उनकी पार्टी पहले कांग्रेस और उसके नेताओं, खासकर राहुल गांधी, की आलोचना करती रही है और कई राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में दोनों के बीच अक्सर मतभेद भी रहे हैं। बनर्जी ने चुनाव के बाद हुई हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने और जमीनी स्थिति का आकलन करने के लिए 10 सदस्यीय तथ्यान्वेषी समिति के गठन की भी घोषणा की। उन्होंने 2021 में चुनाव के बाद हुई हिंसा के आरोपों को निराधार बताया। वहीं, भाजपा ने उनके दावों को सिरे से खारिज करते हुए उन पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और जनता के फैसले को नकारने का आरोप लगाया। पार्टी प्रवक्ता देबोजित सरकार ने कहा, "उनकी टिप्पणियों को स्वीकार नहीं किया जा सकता। वह सिर्फ खुद को हंसी का पात्र बना रही हैं। हमें लगता है कि वह कुछ और दिनों तक सुर्खियां बटोरने के लिए इस तरह की बेतुकी टिप्पणियां कर रही हैं।" उन्होंने यह भी दावा किया कि निर्वाचन आयोग ने शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित किया और कहा कि मतदान के दोनों चरणों के दौरान "हिंसा, गोलीबारी या मृत्यु की एक भी घटना" नहीं हुई। इस बीच, निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख द्वारा भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में "अनियमितताओं" के आरोपों को "बेबुनियाद और झूठा" बताते हुए खारिज कर दिया। इस सीट से चुनाव लड़ रही बनर्जी भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी से 15,105 वोट के अंतर से हार गईं और इसके बाद उन्होंने चुनाव प्रक्रिया और आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। -
नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष नितिन नवीन ने पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनावों में पार्टी की भारी जीत के एक दिन बाद मंगलवार को दक्षिण दिल्ली के चितरंजन पार्क स्थित कालीबाड़ी मंदिर में पूजा-अर्चना की। नवीन के साथ दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा और भाजपा के अन्य नेता भी थे। उन्होंने कहा कि लोगों ने इस बार 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों की भरपाई कर दी है, जब चुनाव के नतीजे उम्मीद के अनुरुप नहीं थे। उन्होंने पश्चिम बंगाल, असम और उन अन्य तीन राज्यों के लोगों का आभार व्यक्त किया जहां विधानसभा चुनाव हुए हैं। भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ''मैं मां काली और मां कामाख्या की पवित्र भूमि में पार्टी की जीत पर दर्शन करने आया हूं।'' उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश के विकास और विरासत एवं संस्कृति के संरक्षण के लिए राष्ट्र नायक और प्रधान सेवक के रूप में लागातार काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि बंगाल की संस्कृति और विरासत केवल प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ही प्रगति कर सकती है।" पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा ने 293 सीटों में से 206 सीटों पर जीत हासिल की है, वहीं असम चुनावों में भी पार्टी को भारी बहुमत से जीत मिली है।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के शहर फुजैरा पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की, जिसमें तीन भारतीय नागरिक घायल हो गए। फुजैरा के एक प्रमुख तेल उद्योग क्षेत्र में ड्रोन हमलों के कारण लगी आग में भारतीयों के घायल होने के एक दिन बाद मोदी ने इन हमलों की कड़ी निंदा की। यूएई ने इस हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया था। मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा, ''यूएई पर हुए हमलों की मैं कड़ी निंदा करता हूं, जिनमें तीन भारतीय नागरिक घायल हुए हैं। आम नागरिकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना अस्वीकार्य है।'' उन्होंने कहा, ''भारत यूएई के साथ पूरी तरह एकजुट है और संवाद एवं कूटनीति के माध्यम से सभी मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अपना समर्थन दोहराता है।'' प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ''होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और निर्बाध नौवहन सुनिश्चित करना क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।'' फुजैरा शहर पर हमला ऐसे समय में हुआ है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर दुनिया के लगभग बीस फीसदी तेल और गैस का परिवहन होता है जो दोनों देशों के बीच वार्ता में एक प्रमुख अड़चन बना हुआ है। संघर्ष के कारण जलडमरूमध्य के इस संकरे जलमार्ग से होकर गुजरने वाले जहाजों का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है और कई देशों में ऊर्जा की कमी हो गई है। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि उसके वायु रक्षा तंत्र ने ईरान से दागी गई 12 बैलिस्टिक मिसाइलों, तीन क्रूज मिसाइलों और चार ड्रोन को नाकाम कर दिया। मंत्रालय ने पुष्टि की कि वह ''किसी भी खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है और देश की सुरक्षा को कमजोर करने के उद्देश्य से किए गए किसी भी प्रयास का दृढ़ता से मुकाबला करेगा।
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कोलकाता. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का जनादेश केवल सत्ता परिवर्तन का संकेत नहीं है, बल्कि यह उस राजनीतिक व्यवस्था में संरचनात्मक दरार को दर्शाता है जिसे ममता बनर्जी ने पिछले डेढ़ दशक में खड़ा किया था। इस चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) अब तक की सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रही है। वर्ष 2011 से राज्य की राजनीति की मुख्य धुरी बनी तृणमूल कांग्रेस के लिए यह हार महज चुनावी नहीं, बल्कि प्रणालीगत है। भाजपा ने उस व्यवस्था में निर्णायक सेंध लगाई है, जो केंद्रीकृत नेतृत्व, कल्याणकारी योजनाओं और मजबूत संगठनात्मक ढांचे पर आधारित थी। राजनीतिक विश्लेषक बिस्वनाथ चक्रवर्ती ने कहा, "तृणमूल का मॉडल सत्ता तक पहुंच पर आधारित था। जैसे ही यह धुरी बदलती है, पूरी संरचना को फिर से गढ़ना पड़ता है।" आंकड़े इस बदलाव की गहराई को दर्शाते हैं। भाजपा का वोट शेयर 2021 के 38 प्रतिशत से बढ़कर करीब 44.8 प्रतिशत हो गया है, जो उसके आधार के विस्तार और मजबूती दोनों को दिखाता है। वहीं तृणमूल का वोट शेयर 48 प्रतिशत से घटकर लगभग 41.7 प्रतिशत रह गया, जो उसके सामाजिक आधार में लगातार क्षरण को दर्शाता है, खासकर अर्ध-शहरी क्षेत्रों में। एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि 177 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता सूची से हटाए गए नामों की संख्या पिछली जीत के अंतर से अधिक थी। इन सीटों पर भाजपा ने न केवल अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी, बल्कि तृणमूल के गढ़ों में भी उल्लेखनीय सेंध लगाई। एक अन्य राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, "यह पारंपरिक अर्थों में लहर नहीं है, बल्कि राजनीतिक जमीन का पुनर्वितरण है। भाजपा अब चुनौतीदाता से व्यवस्था बदलने वाली ताकत बन गई है।" तृणमूल की सबसे बड़ी ताकत रहा केंद्रीकरण ही अब उसकी प्रमुख कमजोरी के रूप में उभरा है। शीर्ष नेतृत्व पर अत्यधिक निर्भरता के कारण जब यह परत कमजोर होती है, तो पार्टी के पास संस्थागत सुरक्षा तंत्र सीमित रह जाता है। इसके अलावा, आम आदमी पार्टी के विपरीत अन्य राज्यों में विस्तार न कर पाने के कारण तृणमूल का आधार लगभग पूरी तरह बंगाल तक सीमित रहा है, जिससे इस हार का प्रभाव और गहरा हो गया है। पार्टी के भीतर इसके असर तत्काल और संभावित रूप से अस्थिर करने वाले हो सकते हैं। प्रशासनिक नियंत्रण, संरक्षण तंत्र और चुनावी वर्चस्व पर आधारित संगठन को अब इन साधनों के बिना खुद को संभालने की चुनौती है। वैचारिक एकजुटता की कमी के बीच कुछ नेताओं और जनप्रतिनिधियों के दल बदलने की आशंका भी जताई जा रही है। यह स्थिति तृणमूल के लिए अस्तित्व के संकट जैसी हो सकती है।
ममता बनर्जी के लिए यह चुनाव उनके राजनीतिक जीवन की निर्णायक लड़ाइयों में से एक माना जा रहा था। तीन कार्यकाल और लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद यह मुकाबला केवल सरकार बचाने का नहीं, बल्कि उनके बनाए राजनीतिक ढांचे को बचाने का भी था। 71 वर्ष की उम्र में और तीन कार्यकाल पूरे करने के बाद ममता की वापसी की राह पहले से अधिक कठिन नजर आती है। हालांकि सिंगूर और नंदीग्राम जैसे आंदोलनों से उभरने की उनकी क्षमता पहले देखी जा चुकी है, लेकिन इस बार चुनौती का पैमाना अलग है, जहां समय, संगठनात्मक कमजोरी और मजबूत प्रतिद्वंद्वी एक साथ मौजूद हैं। फिर भी, उनका राजनीतिक सफर अक्सर संघर्ष की राजनीति से मजबूत हुआ है। सत्ता से बाहर होने पर वह पार्टी को फिर से विपक्षी ताकत के रूप में ढालने की कोशिश कर सकती हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी इसके असर दिखाई देंगे। बंगाल में हार से विपक्षी गठबंधन में उनकी तत्काल प्रभावशीलता कमजोर हो सकती है, हालांकि उनकी राजनीतिक प्रासंगिकता पूरी तरह खत्म नहीं होती। आने वाले समय में अभिषेक बनर्जी की भूमिका पर भी नजर रहेगी, जिनकी संगठनात्मक जिम्मेदारी बढ़ सकती है। हालांकि बिना सत्ता के सहारे आंतरिक चुनौतियों को संभालना आसान नहीं होगा। तृणमूल की हार के मूल में सत्ता विरोधी लहर का बढ़ता प्रभाव भी रहा। भ्रष्टाचार के आरोप, भर्ती घोटाले और विपक्ष की संगठित रणनीति ने पार्टी की स्थिति को कमजोर किया। भाजपा के लिए यह परिणाम लंबे समय से प्रतीक्षित सफलता है, लेकिन इसके साथ ही एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में शासन करने की चुनौती भी जुड़ी है, जहां उसका प्रमुख प्रतिद्वंद्वी अभी भी मजबूत बना हुआ है। इतना स्पष्ट है कि बंगाल अब एक नए राजनीतिक दौर में प्रवेश कर चुका है।
तृणमूल के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती सत्ता में वापसी नहीं, बल्कि बिना सत्ता के खुद को नए सिरे से परिभाषित करना है। यह परिणाम उस राजनीतिक चक्र के अंत का संकेत भी है, जिसकी शुरुआत ममता बनर्जी ने 34 साल पुराने वाम मोर्चा शासन को समाप्त कर की थी। - नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को विधानसभा चुनावों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के प्रदर्शन को ''ऐतिहासिक'' बताया और दावा किया कि विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन अब ''ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएगा।'' उन्होंने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की राज्य चुनावों में मिली हार के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहराया। पश्चिम बंगाल में पार्टी के शानदार प्रदर्शन और असम और पुडुचेरी में राजग की सफलता का जश्न मनाने के लिए यहां भाजपा मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, नवीन ने कहा कि चुनाव परिणाम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लोगों के निरंतर विश्वास को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों ने भाजपा और उसके सहयोगियों को चुनाव में जनादेश देकर ''विभाजनकारी ताकतों'' और उनके ''हिंदू विरोधी एजेंडे'' को परास्त कर दिया है। राज्य चुनावों में टीएमसी और द्रमुक की हार का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ''यह विफलता किसी और की नहीं बल्कि 'इंडी' गठबंधन के नेता राहुल गांधी की है।'' उन्होंने कहा, ''मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि इन चुनावी नतीजों के बाद 'इंडी' गठबंधन ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएगा।''
- मुख्यमंत्री ने जताया शोकपटना. बिहार में राजधानी पटना समेत कई हिस्सों में सोमवार शाम अचानक मौसम बदल गया और बिजली गिरने, आंधी चलने तथा तेज बारिश के कारण होने वाली अप्रिय घटनाओं में 12 लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार दोपहर की भीषण गर्मी के बाद शाम करीब चार बजे आसमान में घने बादल छा गए, जिससे अधिकांश इलाकों में अंधेरा हो गया। इसके बाद तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की ओर से जारी एक बयान के अनुसार पूर्वी चंपारण में पांच, गया जिले में चार और औरंगाबाद जिले में तीन लोगों की मौत हुई है। मौसम विभाग ने हालांकि पटना समेत आसपास के जिलों में तेज आंधी, गरज-चमक के साथ बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की थी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इन घटनाओं पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि आपदा की इस घड़ी में राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का निर्देश दिया है। साथ ही लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और बिजली से बचाव के लिए आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
- नयी दिल्ली. विदेश मंत्रालय ने उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से दशकों से आयोजित होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा पर नेपाल की आपत्ति को रविवार को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि क्षेत्रीय दावों का ऐसा ''एकतरफा कृत्रिम विस्तार'' अस्वीकार्य है। नेपाल ने रविवार को भारत और चीन द्वारा लिपुलेख दर्रे के रास्ते आगामी कैलाश मानसरोवर यात्रा आयोजित करने की योजना पर आपत्ति जताई और दावा किया कि यह उसका क्षेत्र है। नेपाल ने कहा कि तीर्थयात्रा के मार्ग को अंतिम रूप देने से पहले उससे परामर्श नहीं किया गया। नेपाल की इस आपत्ति के बाद भारत की कड़ी प्रतिक्रिया आई है।विदेश मंत्रालय ने 30 अप्रैल को घोषणा की थी कि वार्षिक कैलाश मानसरोवर यात्रा इस वर्ष जून से अगस्त तक दो मार्गों - उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रा और सिक्किम में नाथू ला दर्रा - के रास्ते होगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ''इस संबंध में भारत का रुख हमेशा एक जैसा और स्पष्ट रहा है। लिपुलेख दर्रा 1954 से कैलाश मानसरोवर यात्रा का एक प्रमुख मार्ग रहा है और इस मार्ग से यात्रा दशकों से होती रही है।'' उन्होंने कहा, ''यह कोई नया घटनाक्रम नहीं है। क्षेत्रीय दावों के संबंध में, भारत लगातार यह कहता रहा है कि ऐसे दावे न तो न्यायसंगत हैं और न ही ऐतिहासिक तथ्यों एवं साक्ष्यों पर आधारित हैं।'' जायसवाल ने कहा कि क्षेत्रीय दावों का इस तरह का ''एकतरफा कृत्रिम विस्तार अस्वीकार्य'' है।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत द्विपक्षीय संबंधों के सभी मुद्दों पर नेपाल के साथ ''रचनात्मक वार्ता'' के लिए तैयार है, जिसमें लंबित सीमा मुद्दों का संवाद और कूटनीति के माध्यम से समाधान भी शामिल है।
- श्री विजय पुरम. अंडमान निकोबार द्वीपसमूह ने रविवार को स्वराज द्वीप (पूर्व में हैवलॉक द्वीप) पर पानी के अंदर सबसे ऊंचा मानव पिरामिड बनाया गया। इसके साथ ही, लगातार दूसरे दिन दूसरा 'गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड' बनाया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, उपराज्यपाल डीके जोशी सहित 14 लोगों ने इसमें हिस्सा लिया और उन्होंने 22.3 मीटर ऊंचा मानव पिरामिड बनाया तथा वे तीन मिनट तक पानी के अंदर रहे। इससे एक दिन पहले, केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन ने इसी द्वीप के पास समन्वित अभियान के तहत समुद्र के अंदर विश्व के सबसे बड़े राष्ट्रीय ध्वज को फहराकर ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया था। इस ध्वज का आकार लगभग 60 मीटर लंबा और 40 मीटर चौड़ा था। द्वीप विकास एजेंसी के उपाध्यक्ष उपराज्यपाल ने शनिवार के कार्यक्रम में भी भाग लिया था।अधिकारियों ने बताया कि लगातार हासिल की जा रही ये उपलब्धियां इन द्वीपों को एक प्रमुख वैश्विक गोताखोरी गंतव्य के रूप में स्थापित करने की पहल का हिस्सा हैं।
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नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विधान चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पार्टी के मजबूत प्रदर्शन और जनसमर्थन पर प्रकाश डाला। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “मैं सभी पांच राज्यों के मतदाताओं को हार्दिक बधाई और आभार व्यक्त करता हूं। अपना वोट डालकर उन्होंने अपनी पसंद व्यक्त की है और अपनी पसंदीदा सरकारें चुनी हैं। यही लोकतंत्र का सार और हमारी संवैधानिक व्यवस्था का मूल सिद्धांत है।”
पश्चिम बंगाल और असम में भाजपा के बेहतर प्रदर्शन पर न्यूज़ एजेंसी से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “मैं इसे उपलब्धि नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी मानता हूं। लोकतंत्र में जब लोग बार-बार अपना विश्वास जताते हैं तो वह पार्टी पर भरोसा करते हुए जिम्मेदारी देते हैं। आज 22 से अधिक राज्यों में एनडीए और भाजपा की सरकारें हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में लगातार तीन कार्यकालों से हम राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं।”मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “यह हताशा और हार की भाषा है। अगर ममता बनर्जी को नैतिकता और संवैधानिक व्यवस्था में विश्वास है तो उन्हें हार को शालीनता से स्वीकार कर लेना चाहिए। जनता उन्हें पहले ही नकार चुकी है।”केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा, “आज भारतीय जनता पार्टी के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने एक बार कहा था, “बादल छटेंगे, सूरज निकलेगा और कमल खिलेगा। आज पूरे देश में कमल खिल रहा है। पश्चिम बंगाल में पहली बार हमारी सरकार बनने जा रही है। सचमुच, यह जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकतंत्र की है।”वहीं, भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा, “पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत अचानक नहीं हुई है। पिछले 15 वर्षों में लोगों ने ममता बनर्जी के बढ़ते निरंकुश व्यवहार को देखा है। जिस तरह ममता ने एक मेडिकल छात्रा से जुड़े मामले में एफआईआर तक दर्ज नहीं होने दी, उससे वहां की महिलाओं और युवाओं में आक्रोश फैल गया। ऐसे कई मुद्दों को लेकर पश्चिम बंगाल की जनता नाराज थी और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विकास के लिए भाजपा को मतदान किया है।” -
नई दिल्ली।‘ असम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सत्ता में आने की हैट्रिक लगाने जा रही है। इस बीच असम में भाजपा और सहयोगी दलों के शानदार प्रदर्शन पर हिमंता बिस्वा सरमा की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “जनता का आशीर्वाद, तीसरी बार, विकास और विरासत के लिए, असम की जनता ने प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व पर लगातार तीसरी बार अपना विश्वास जताया है। यह हमारे कार्यकर्ताओं के अथक प्रयासों, जिनका नेतृत्व अध्यक्ष नितिन नवीन ने किया और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प के बिना संभव नहीं हो पाता।”उन्होंने आगे लिखा, ”यह जीत विकास, नारी शक्ति, अस्मिता और एक ‘विकसित असम’ की परिकल्पना के पक्ष में दिया गया जनादेश है। यह विशाल जनादेश जनता के मिजाज को दर्शाता है, बराक से लेकर ब्रह्मपुत्र तक और ऊपरी असम से लेकर निचले असम तक, जिन्होंने विकास और अस्मिता के विमर्श के साथ पूरी दृढ़ता से खड़े रहने का निर्णय लिया है। अत्यंत विनम्रता के साथ, हम जनता के आशीर्वाद के समक्ष नतमस्तक हैं और ‘विकसित एवं सुरक्षित असम’ के हमारे आह्वान पर उन्होंने जो जोरदार समर्थन दिया है, उसके लिए हम उनके आभारी हैं। असम को भारत के शीर्ष 5 राज्यों में शुमार करने के हमारे अथक प्रयास, आज से और भी अधिक जोर-शोर से जारी रहेंगे।”इससे पहले सीएम सरमा ने एक्स पर लिखा, ”शतक के साथ हैट्रिक।”चुनाव आयोग के अनुसार, असम में 126 विधानसभा सीटों में से एनडीए 100 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 82 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जिसमें 51 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी है, वहीं 31 सीटों पर आगे चल रही है। एनडीए में शामिल अन्य दल, एजीपी को 10 सीटों पर आगे है, जिसमें 3 पर जीत और 7 सीट पर आगे चल रही है। वहीं बीपीएफ 10 सीट पर आगे चल रही है, जिसमें 6 सीट पर उसे जीत और 4 सीट पर आगे है। इसके अलावा कांग्रेस 19 सीटों पर आगे है, जिसमें एक सीट पर पार्टी को जीत मिली है, जबकि 18 सीटों पर आगे है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि विकसित भारत के निर्माण का एक और महत्वपूर्ण स्तंभ भारत की नारी शक्ति है। नारी शक्ति अब विकसित भारत के निर्माण में तेजी से आगे बढ़ रही है। लेकिन नारी शक्ति की इस रफ्तार को कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने कुछ दिन पहले रोकने का काम किया है। इन नारी विरोधी दलों ने संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन को पास नहीं होने दिया और इसलिए मैंने कुछ दिन पहले कहा भी था कि महिलाओं के आरक्षण का विरोध करने वाले ऐसा दलों को महिलाओं का आक्रोश झेलना पड़ेगा। आज कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके को बहनों और बेटियों ने सजा दी है।
पीएम मोदी ने कहा कि जिस समाजवादी पार्टी ने संसद में महिला आरक्षण को रोका है, उसे भी उत्तर प्रदेश की महिलाओं का आक्रोश सहना पड़ेगा। महिला विरोधी समाजवादी पार्टी कुछ भी करके अपने पाप को धूल नहीं पाएगी।सोमवार को दिल्ली भाजपा मुख्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि बंगाल के भविष्य की एक ऐसी यात्रा शुरू हो रही है जहां विकास, अटूट विश्वास और नई उम्मीदें कदम से कदम मिलाकर चलेंगी। मैं आज हर बंगालवासी को भरोसा देता हूं, बंगाल के बेहतर भविष्य के लिए, भाजपा दिन-रात एक कर देगी। बंगाल में अब महिलाओं को सुरक्षा का माहौल मिलेगा, युवाओं को रोजगार मिलेगा, पलायन रुकेगा। पहली कैबिनेट में ही आयुष्मान भारत योजना को हरी झंडी दिखाई जाएगी और घुसपैठियों के खिलाफ भी सख्त से सख्त कार्रवाई होगी।पीएम मोदी ने कहा, “बंगाल के ये चुनाव एक और वजह से बहुत खास रहे हैं। आप याद कीजिए, बंगाल चुनाव के समय कैसी खबरें आती थीं। हिंसा, डर और निर्दोष लोगों की मौतें। लेकिन इस बार पूरे देश ने एक नई खबर सुनी। पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण मतदान हुआ। पहली बार ऐसा हुआ कि चुनावी हिंसा में एक भी निर्दोष नागरिक की जान नहीं गई। लोकतंत्र के इस महापर्व में बंदूक की आवाज नहीं जनता जनार्धन की आवाज गूंजी। पहली बार डर नहीं, लोकतंत्र जीता है।”उन्होंने कहा कि आज देश का हर राज्य भी एक-दूसरे से लड़कर नहीं, एक-दूसरे के साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहता है। इन चुनावों ने इस संदेश को भी बहुत स्पष्ट किया है। बंगाल, तमिलनाडु और केरलम में जिन तीन सरकारों को जनता ने सत्ता से बाहर किया उनकी एक समान पहचान थी, विभाजन की राजनीति। यही उनकी पहचान थी। उनकी राजनीति जोड़ने की नहीं, तोड़ने की थी। कभी भाषा के नाम पर विवाद खड़ा किया गया, कभी खाने-पीने की आदतों को लेकर समाज को बांटने की कोशिशें हुईं, कभी अपने ही देश के लोगों को तक बाहरी कहा गया लेकिन भारत की जनता ने इस राजनीति को साफ जवाब दिया है। देश ने बता दिया है कि उसे विवाद नहीं विकास चाहिए, विभाजन नहीं विश्वास चाहिए।”पीएम मोदी ने आगे कहा, “मैं बंगाल के हर राजनीतिक दल से एक आग्रह भी करना चाहता हूं। बंगाल में बीते दशकों में राजनीतिक हिंसा की वजह से न जाने कितनी जिंदगियां बर्बाद हो चुकी हैं। मेरा स्पष्ट मानना है कि आज से बंगाल की जो चुनावी आदतें फैली हुई हैं, उसमें बदलाव आना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज जब भाजपा जीती है, बदला नहीं बदलाव की बात होनी चाहिए। भय नहीं भविष्य की बात होनी चाहिए।प्रधानमंत्री मोदी ने सभी राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि हिंसा के इस अंत हीन चक्र को हमेशा के लिए खत्म कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसने किसे वोट दिया, किसे नहीं दिया, उससे ऊपर उठकर बंगाल की सेवा के लिए काम करना चाहिए। -
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल और असम समेत देश के पांच राज्यों में मिले जनादेश को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने देश के करीब-करीब हर राज्य में सरकारें बनाई हैं। आजादी के आंदोलन का जो भाव था, उसका उन्हें लाभ मिला था, उसमें से उपजा हुआ जनादेश था। जैसे-जैसे आजादी के आंदोलन के भावों से आगे निकलकर देश धरातल के कामों पर लौटा, वैसे-वैसे कांग्रेस, जनता का भरोसा खोती चली गई।
उन्होंने कहा कि बीते दशकों में देश ने युवाओं की अनेक पीढ़ियां जोड़ी हैं लेकिन कांग्रेस घटती ही चली गई। कांग्रेस देश की संस्कृति को नहीं समझ पाई, देश की संवेदनाओं को नहीं समझ पाई। कांग्रेस आकांक्षाओं की राजनीति जानती ही नहीं।पीएम मोदी ने कहा, “आज हम भारत की राजनीति में एक और बड़ा बदलाव देख रहे हैं। आज पूरे देश में एक भी ऐसा राज्य नहीं है जहां कम्यूनिस्ट पार्टी की सरकार हो। यह सिर्फ सियासत का बदलाव नहीं है, यह सोच का बदलाव है। यह बताता है कि विकसित होता हुआ भारत किस दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। आज का भारत अवसर चाहता है, विकास चाहता है, विश्वास चाहता है, आज का भारत प्रगति चाहता है, स्थिरता चाहता है, आज का भारत ऐसी राजनीति चाहता है जो देश को आगे बढ़ाए लेकिन दुर्भाग्य से आज की कांग्रेस बिल्कुल विपरीत दिशा में चल पड़ी है। ऐसे समय में जब पूरा देश कम्युनिज्म से किनारा कर चुका है तब कांग्रेस उसी विचारधारा को अपनाने में लगी है जिसे देश ने ठुकरा दिया है।”प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भाजपा के लिए भारत और भारतीयता के भाव से बड़ा और कुछ नहीं है। हमारे लिए भारत सब कुछ है, भारतीयता सब कुछ है। भाजपा क्षेत्रीय आकांक्षाओं से राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा को पूरा करने वाली पार्टी है। इसलिए भाजपा देश की पसंद बन रही है, जनता के आशीर्वाद प्राप्त कर रही है। भाजपा परिवार की नहीं, ज़मीन से जुड़ी राजनीति करती है इसलिए आज पूर्वोत्तर भाजपा से जुड़ता है, आज पूरा आदिवासी अंचल भाजपा को इतना प्रचंड जनादेश दे रहा है, इसलिए देश के मछुआरों का अभूतपूर्व समर्थन भाजपा के साथ है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं भाजपा के कोटि-कोटि कार्यकर्ताओं का हृदय से अभिनंदन करता हूं। भाजपा के हर छोटे-बड़े कार्यकर्ता ने एक बार फिर से कमाल कर दिया है, कमल खिला दिया है। आपने नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने कहा कि मैं बंगाल की जनता को, असम की जनता को, पुडुचेरी की जनता को, तमिलनाडु और केरलम की जनता को आज आदरपूर्वक नमन करता हूं।
पीएम मोदी सोमवार शाम को असम और पश्चिम बंगाल चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन का जश्न मनाने के लिए पार्टी मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने असम और पश्चिम बंगाल चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन का जश्न मनाने के लिए पार्टी मुख्यालय में मौजूद पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को बधाई दी। जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पीएम मोदी को माला पहनाने के लिए आगे बढ़े, तो उन्होंने माला ली और नितिन नवीन को पहनाई। वहीं मोदी-मोदी के नारों से भाजपा मुख्यालय गूंज उठा।इसके बाद, अपने संबोधन के दौरान, पीएम मोदी ने कहा कि आज का ये दिन ऐतिहासिक है, अभूतपूर्व है। जब वर्षों की साधना सिद्धी में बदलती है तो चेहरे पर जो खुशी होती है वो खुशी आज मैं देश भर के भाजपा के कार्यकर्ताओं के चेहरे पर देख रहा हूं।” पीएम मोदी ने आगे कहा कि एक कार्यकर्ता होने के नाते मैं भाजपा के हर कार्यकर्ता की खुशी में शामिल हूं। आज का यह दिवस कई मायनों में खास है, विशेष है, यह देश के उज्ज्वल भविष्य की उद्घोषणा का दिन है। यह भरोसे का दिन है। भरोसा भारत के महान लोकतंत्र पर, भरोसा परफॉर्मेंस की राजनीति पर, भरोसा स्थिरता के संकल्प पर, भरोसा एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना पर।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आज विभिन्न उपचुनावों के परिणाम भी अत्यंत उत्साहजनक रहे हैं। महाराष्ट्र, गुजरात, नागालैंड और त्रिपुरा में जो उपचुनाव हुए हैं, उसमें हमारे उम्मीदवारों को जनता-जनार्धन ने आशीर्वाद दिया और इन राज्यों में भी जीत गए हैं। NDA की नेता, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री, सुनेत्रा पवार जी ने भी बड़ी जीत दर्ज की है। मैं इन सभी राज्यों की जनता का उनके समर्थन के लिए हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।”अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, “भाजपा के अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा अध्यक्ष पद संभालने के बाद यह पहले विधानसभा चुनाव थे। इन चुनाव में पार्टी के हर कार्यकर्ता को उनका जो मार्गदर्शन मिला, वह मार्गदर्शन इस जीत में बहुमूल्य रहा है।”वहीं, इससे पहले पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि आज 4 मई का दिन है और नतीजे आए हैं लेकिन मैं 4 जून 2024 को भी आपको याद करवाना चाहता हूं। जनता ने हमारे नेतृत्वकर्ता को जो समर्थन दिया था, जो विश्वास जताया था, उसमें कहीं न कहीं एक कसक रह गई थी और आज जब 4 मई को जनता ने हमें प्रचंड जीत दिलाई है तो 2024 की उस कसक को पूरा किया है और उसके बाद जब-जब चुनाव हुए हर राज्य में भाजपा को प्रचंड जीत देने का काम किया है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में दक्षिण भारत में भी भाजपा का कमल खिलेगा। -
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन के मद्देनजर भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने वर्तमान राज्य सचिवालय नबन्ना सहित सरकारी कार्यालयों में केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश दिया है। सोमवार को अधिकारियों ने बताया कि सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि सरकारी दस्तावेजों को नष्ट होने से बचाने के लिए दोपहर में राज्य के कई सरकारी कार्यालयों में सीआरपीएफ की टीमें तैनात की गई। राज्य सचिवालय नबन्ना, राइटर्स बिल्डिंग, विकास भवन, जल संपद भवन और खाद्य भवन में त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) तैनात किए गए। इसका उद्देश्य सभी सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा करना है।राज्य में चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की थी कि भाजपा के सत्ता में आने पर सभी फाइलें खोली जाएंगी। माना जा रहा है कि इसलिए सभी दस्तावेजों की सुरक्षा के लिए यह पहल की गई है।फिलहाल, हावड़ा के मंदिरतला स्थित शरत चटर्जी रोड पर स्थित नबन्ना राज्य सरकार का मुख्य प्रशासनिक भवन है, जहां मुख्यमंत्री कार्यालय स्थित है।वाम मोर्चा के शासनकाल में राइटर्स बिल्डिंग आधिकारिक सचिवालय भवन था। ऐसी अटकलें हैं कि भाजपा राइटर्स बिल्डिंग को महत्व दे सकती है। इस उद्देश्य से इन भवनों के जीर्णोद्धार की योजना पहले ही बनाई जा चुकी है।हालांकि, सरकारी दस्तावेजों की उचित सुरक्षा इस समय अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि भाजपा को आशंका है कि कुछ दस्तावेज गुम हो सकते हैं। इसी कारण महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों में क्यूआरटी टीमें तुरंत भेजी गई हैं।अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा कारणों से इन कार्यालयों के आसपास केंद्रीय बलों की तैनाती की गई है। राज्य सरकार के कर्मचारियों के बैग की जांच की जा रही है और यह सुनिश्चित करने के लिए निगरानी रखी जा रही है कि कोई भी कर्मचारी राज्य सचिवालय से बाहर कोई फाइल न ले जाए।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने राज्य में चुनाव प्रचार के दौरान तृणमूल कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाए थे। उन्होंने बार-बार चेतावनी दी थी कि भाजपा के सत्ता में आने पर सभी फाइलें खोली जाएंगी। चुनाव आयोग के नवीनतम अपडेट के अनुसार, भाजपा 203 सीटों पर आगे चल रही थी और उसने नौ सीटें जीती थीं, जबकि तृणमूल 84 सीटों पर आगे चल रही है। - पुडुचेरी. पुडुचेरी में एआईएनआरसी नीत राजग ने नौ अप्रैल को हुए विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की और यहां लगातार दूसरी बार सरकार बनाने के लिए तैयार है। पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एवं ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस (एआईएनआरसी) नेता एन. रंगासामी ने सोमवार को थट्टनचावडी और मंगलम सीट पर जीत हासिल की। निर्वाचन आयोग के मुताबिक, एआईएनआरसी ने 11 सीट जीत ली हैं और एक पर बढ़त बनाए हुए है। पुडुचेरी की 30 सदस्यीय विधानसभा के लिए नौ अप्रैल को मतदान हुआ था।राजग के घटक भाजपा ने चार सीटों पर जीत हासिल की, जबकि गठबंधन के अन्य सहयोगियों -- अन्नाद्रमुक और एलजेके ने एक-एक सीट पर जीत दर्ज की। विपक्षी द्रमुक ने पांच सीटें जीतीं और कांग्रेस एक सीट पर विजयी हुई।
- नयी दिल्ली. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भाजपा की शानदार जीत के बाद, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि ''आज से बंगाल भयमुक्त हुआ है'' और यह बदलाव का समय है, बदले का नहीं। उन्होंने सभी दलों से राजनीतिक हिंसा की संस्कृति को त्यागने और राज्य के भविष्य पर ध्यान केंद्रित करने की भी अपील की। पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत के बाद भाजपा मुख्यालय में उत्साहित पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि नारी शक्ति वंदन (संशोधन) विधेयक का विरोध की कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और अन्य दलों को कड़ी सजा मिली है। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी (सपा) को भी जल्द ही महिलाओं के गुस्से का सामना करना पड़ेगा। उनका इशारा उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की ओर था। करीब 50 मिनट के अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल में इस साल के चुनाव खास रहे हैं, क्योंकि इससे पहले के चुनावों में हिंसा, भय और निर्दोष लोगों की मौत होती थी। उन्होंने कहा कि लेकिन इस बार खबर अलग थी, क्योंकि पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण मतदान हुआ और ऐसा पहली बार हुआ कि मतदान के दौरान किसी की जान नहीं गई। मोदी ने कहा, ''बंगाल बदलाव के एक नये दौर में प्रवेश कर रहा है, मैं बंगाल की हर राजनीतिक पार्टी से एक अपील करना चाहता हूं। पिछले कई दशकों में बंगाल में राजनीतिक हिंसा के कारण अनगिनत लोग प्रभावित हुए हैं। मेरा दृढ़ विश्वास है कि बंगाल की यह चुनावी संस्कृति आज से ही बदलनी चाहिए।'' उन्होंने कहा, ''आज जब भाजपा जीती है, तो बदला नहीं, बदलाव की बात होनी चाहिए। भय नहीं, भविष्य की बात होनी चाहिए।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ''यह भरोसे का दिन है। यह भारत के महान लोकतंत्र पर भरोसे का दिन है, (जनता के लिए) काम करने की राजनीति पर भरोसे का दिन है, स्थिरता के संकल्प पर भरोसे का दिन है, और 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना पर भरोसे का दिन है।'' उन्होंने विजय समारोह में कहा, ''मैं पश्चिम बंगाल, असम, पुडुचेरी, तमिलनाडु और केरल की जनता को नमन करता हूं।'' समारोह में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री अमित शाह और राजनाथ सिंह सहित पार्टी के अन्य नेता उपस्थित थे। पिछले साल 14 नवंबर को, जब बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हुए थे, मोदी ने इसी स्थान से भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि गंगा बिहार से पश्चिम बंगाल के गंगा सागर तक बहती है। उन्होंने कहा, ''और आज, पश्चिम बंगाल में जीत के साथ, गंगोत्री (उत्तराखंड) से गंगा सागर (पश्चिम बंगाल) तक कमल ही कमल खिला हुआ है। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल -- मां गंगा के किनारे बसे इन सभी राज्यों में अब भाजपा-राजग की सरकारें हैं।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि जीत और हार लोकतंत्र और राजनीति का स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन इन पांच राज्यों की जनता ने दुनिया को दिखा दिया है कि क्यों ''हमारा देश लोकतंत्र की जननी'' है। उन्होंने कहा, ''नारी शक्ति अब तेजी से एक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि, कुछ दिन पहले कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने महिला शक्ति की इस गति को अवरुद्ध कर दिया।'' मोदी ने कहा, ''इन महिला विरोधी दलों ने संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन को पारित होने नहीं दिया। इसीलिए मैंने कुछ दिन पहले कहा था कि इस (संशोधन) विधेयक का विरोध करने वाले दलों को महिलाओं के प्रकोप का सामना करना पड़ेगा। आज बहनों और बेटियों ने कांग्रेस, तृणमूल और द्रमुक को सबक सिखा दिया है।'' मोदी ने कहा कि केरल में वामपंथियों के 10 साल के कुशासन से कांग्रेस को निश्चित रूप से फायदा हुआ है, लेकिन उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ''केरल की माताएं-बहनें भी अगले चुनावों में कांग्रेस को सबक जरूर सिखाएंगी।'' उन्होंने कहा, ''संसद में महिलाओं के लिए आरक्षण को रोकने वाली समाजवादी पार्टी को उत्तर प्रदेश की महिलाओं के विरोध का सामना करना पड़ेगा। महिला विरोधी समाजवादी पार्टी चाहे कुछ भी कर ले, वह अपने पापों को कभी नहीं धो पाएगी।'' असम का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि मां गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी ने भाजपा को आशीर्वाद दिया है और मां कामाख्या का आशीर्वाद भी पार्टी के साथ है। उन्होंने कहा, ''असम की जनता ने लगातार तीसरी बार भाजपा-राजग पर भरोसा जताया है।''प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के 20 से अधिक राज्यों में भाजपा-राजग की सरकारें हैं।मोदी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत के साथ, जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आत्मा को अब शांति मिल गई होगी। पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत के बाद भाजपा मुख्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि यह देश के उज्ज्वल भविष्य की उद्घोषणा का दिन है। उन्होंने कहा, ''आज मैं बंगाल, असम, पुडुचेरी, तमिलनाडु और केरल के लोगों को नमन करता हूं। आज मैं भाजपा के अनगिनत कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई भी देता हूं।'' अपने भाषण के बाद, प्रधानमंत्री ने भाजपा मुख्यालय में पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ बैठक की।
- कोलकाता. भाजपा नेता कौस्तुव बागची ने सोमवार को कहा कि ममता बनर्जी सरकार की हार के बाद वह अपना सिर मुंडवा कर रखने का तीन साल पुराना प्रण अब तोड़ देंगे। बागची ने अपने पहले ही चुनाव में उत्तर 24 परगना जिले की बैरकपुर सीट जीती थी। उन्होंने निवर्तमान मुख्यमंत्री के खिलाफ सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने को लेकर कोलकाता पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के बाद मार्च 2023 में अपना सिर मुंडवा लिया था। उस समय वह कांग्रेस में थे, लेकिन बाद में भाजपा में शामिल हो गए। उन्होंने कसम खाई थी कि बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने तक वह अपने बाल नहीं बढ़ाएंगे। तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार राज चक्रवर्ती को 15,822 मतों से हराने के बाद बागची ने कहा, ''मैंने तीन साल से सिर मुंडवाये रखने का अपना प्रण तोड़ दिया है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, ''ममता बनर्जी के 'पूर्व मुख्यमंत्री' बनने के बाद से ही मेरे बाल उगने लगे हैं। मैं जल्द ही अपने पुराने रूप में लौट आऊंगा।
- नयी दिल्ली. विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रचंड जीत पर पश्चिम बंगाल के लोगों को बधाई देते हुए, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि राज्य की जनता ने घुसपैठियों और उनके समर्थकों को एक कड़ा संदेश दिया है। शाह ने यह भी रेखांकित किया कि तुष्टीकरण की राजनीति करने वाले दल इस सबक को नहीं भूलेंगे। भवानीपुर से हारने वाली निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम लिए बिना, शाह ने 'एक्स' पर पोस्ट में कहा, ''भवानीपुर की जनता को सलाम। उनके जनादेश ने स्पष्ट कर दिया है कि एक अराजक शासक का क्या हश्र होता है।'' शाह ने 'एक्स' पर सिलसिलेवार पोस्ट में टिप्पणी की कि भारी जनादेश उन लोगों के प्रति जनता की प्रतिक्रिया है जो भय का माहौल बनाते हैं और घुसपैठियों को संरक्षण देने व तुष्टीकरण की राजनीति करने में लगे रहते हैं। गृह मंत्री ने कहा, ''बंगाल की जनता को लाखों सलाम...यह तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भय पर नरेन्द्र मोदी जी के भरोसे की जीत है। मेरे जैसे भाजपा के हर कार्यकर्ता के लिए यह गर्व का क्षण है कि गंगा के उद्गम स्थल गंगोत्री से लेकर गंगासागर तक, आज भाजपा का भगवा झंडा हर जगह शान से लहरा रहा है।'' उन्होंने बंगाल में भाजपा की ''ऐतिहासिक जीत'' को अनगिनत कार्यकर्ताओं के बलिदानों, संघर्ष और शहादत का परिणाम बताया। उन्होंने कहा, ''यह उन परिवारों के धैर्य की जीत है, जिन्होंने हिंसा सहते हुए भी भगवा झंडा नहीं छोड़ा। भाजपा की इस कठिन यात्रा में मैं उन सभी कार्यकर्ताओं, साथ ही उनके परिवारों को भी नमन करता हूं जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी, हिंसा और यातनाएं सहीं, लेकिन अपनी विचारधारा के मार्ग से कभी विचलित नहीं हुए।'' शाह ने कहा, ''बंगाल की जनता ने इस शानदार जनादेश के माध्यम से उन सभी शहीद भाजपा कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की है।" गृह मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि बंगाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व पर जो भरोसा दिखाया है, उससे व्यक्त हुई उम्मीदें और आकांक्षाएं पूरी की जाएंगी। उन्होंने कहा, ''बंगाल की जनता ने घुसपैठियों और उनके समर्थकों को ऐसा सबक सिखाया है कि तुष्टीकरण की राजनीति में लिप्त पार्टियां इसे कभी नहीं भूल पाएंगी।'' शाह ने यह भी कहा कि भाजपा बंगाल की खोई हुई गरिमा को पुनर्स्थापित करने के लिए अथक प्रयास करेगी, जहां चैतन्य महाप्रभु, स्वामी विवेकानंद, कवि गुरु (रवींद्रनाथ) टैगोर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसी महान विभूतियों ने जन्म लिया। उन्होंने 'सोनार बांग्ला' के सपने को साकार करने का संकल्प भी दोहराया।
- कोलकाता. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के साथ ही तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और उनके कई मंत्री चुनाव हार गए। ममता बनर्जी अपने गृह क्षेत्र भवानीपुर में भाजपा के शुभेंदु अधिकारी से 15,105 मतों से हार गईं। हालांकि, तृणमूल के वरिष्ठ मंत्री शोवनदेब चट्टोपाध्याय, फिरहाद हकीम और जावेद खान चुनाव जीत गए।खान ने दक्षिण कोलकाता के कस्बा निर्वाचन क्षेत्र से लगातार चौथी बार जीत हासिल की, उन्होंने भाजपा के संदीप मुखर्जी को 20,974 मतों से हराया। दक्षिण कोलकाता के प्रतिष्ठित बॉलीगंज निर्वाचन क्षेत्र में शोवनदेब चट्टोपाध्याय ने भाजपा के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी सतरूप को 61,476 मतों से हराया। कोलकाता के महापौर और निवर्तमान ममता बनर्जी मंत्रिमंडल में शहरी विकास मंत्री रहे फिरहाद हकीम ने कोलकाता पोर्ट सीट पर भाजपा के राकेश सिंह को 56,000 से अधिक मतों से हराया। बनर्जी के भरोसेमंद सहयोगी हकीम ने लगातार चौथी बार यह सीट जीती है। तृणमूल सांसद सुदीप बंदोपाध्याय की पत्नी नयना बंदोपाध्याय ने चौरंगी सीट पर भाजपा प्रत्याशी एवं अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी संतोष पाठक को 22,002 मतों से हराया। तृणमूल के मंत्री उदय गुहा दिन्हाटा सीट पर भाजपा के अजय राय से 17,000 से अधिक मतों से हार गए। महिला एवं बाल कल्याण मंत्री शशि पांजा को श्यामपुकुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की पूर्णिमा चक्रवर्ती ने 14,633 मतों से हरा दिया। तृणमूल के आसनसोल उत्तर निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार और मंत्री मलय घटक भाजपा के कृष्णेंदु मुखर्जी से 11,615 मतों से हार गए। मलय ने तीन बार इस सीट पर जीत दर्ज की थी।




























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