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संयुक्त राष्ट्र. संयुक्त राष्ट्र ने विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर शनिवार को कहा कि यह भाषा समुदायों को जोड़ती है और सीमाओं के पार लोगों को एकजुट करती है। संयुक्त राष्ट्र ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "शनिवार को विश्व हिंदी दिवस है! विश्व हिंदी दिवस की शुभकामनाएं!" हिंदी दिवस के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि हिंदी एक ऐसी भाषा है जो समुदायों को जोड़ती है और सीमाओं के पार लोगों को एकजुट करती है। इस पोस्ट में लोगों से संयुक्त राष्ट्र के कार्यों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए 'यूएन इन हिंदी' को फॉलो करने का भी आग्रह किया गया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने पहली बार वर्ष 2026 के लिए अपना नववर्ष संदेश अन्य भाषाओं के साथ-साथ हिंदी में भी दिया था। उनका नववर्ष संदेश 11 भाषाओं में जारी किया गया, जिनमें संयुक्त राष्ट्र की छह आधिकारिक भाषाएं (अरबी, चीनी, अंग्रेजी, फ्रेंच, रूसी और स्पेनिश) के साथ-साथ हिंदी और उर्दू भी शामिल हैं।
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दुबई. ईरान में अर्थव्यवस्था की खस्ताहाल स्थिति और राजनीतिक दमन को लेकर एक हफ्ते से अधिक समय से जारी विरोध-प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 35 लोगों की मौत हो चुकी है और 1,200 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। एक मानवाधिकार एजेंसी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। इस बीच, ईरान सरकार ने देश के पश्चिमी प्रांत ईलम में हिंसा की बात स्वीकार की है, जहां सुरक्षाबलों ने एक अस्पताल पर कथित तौर पर धावा बोला और आम नागरिकों पर गोलीबारी भी की। अमेरिका की ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी' ने बताया कि ईरान के 31 प्रांतों में से 27 में 250 से अधिक स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। उसने बताया कि इन विरोध-प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 29 प्रदर्शनकारी, चार बच्चे और ईरानी सुरक्षा बल के दो सदस्य मारे गए हैं। यह एजेंसी ईरान के भीतर मौजूद कार्यकर्ताओं के नेटवर्क के जरिये आंकड़े जुटाती है और अशांति के पिछले दौर के दौरान इसकी रिपोर्टिंग सही साबित हुई थी। अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘फार्स' ने सोमवार देर रात बताया कि विरोध-प्रदर्शनों के दौरान लगभग 250 पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बल रेवोल्यूशनरी गार्ड बल के 45 सदस्य घायल हुए हैं। हालांकि, ईरान सरकार ने विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में कोई समग्र आंकड़े या जानकारी प्रदान नहीं की है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने सोमवार रात आंतरिक मामलों के मंत्रालय को ईलम प्रांत में हो रही घटनाओं की “गहन जांच” के लिए एक विशेष टीम गठित करने का निर्देश दिया। राजधानी तेहरान से लगभग 515 किलोमीटर दूर ईलम प्रांत के मालेकशाही काउंटी से सामने आए वीडियो में सुरक्षाबलों को आम नागरिकों पर कथित तौर पर गोलीबारी करते देखा जा सकता है। राष्ट्रपति कार्यालय ने “ईलम के एक अस्पताल में हुई उस घटना को भी स्वीकार किया”, जिससे जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे हैं। इन वीडियो में दंगा रोधी गियर पहने सुरक्षाबलों को कथित तौर पर उस अस्पताल पर धावा बोलते देखा जा सकता है, जहां विरोध-प्रदर्शनों में घायल प्रदर्शनकारियों को भर्ती कराया गया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने ईलम के अस्पताल पर ईरानी सुरक्षाबलों की कार्रवाई की कड़ी निंदा की और उसे “आपराधिक कृत्य” करार दिया। विभाग ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, “अस्पतालों में घुसना, चिकित्सा कर्मियों को पीटना और घायलों पर आंसू गैस के गोले दागना और हथियारों से हमला करना मानवता के खिलाफ स्पष्ट अपराध है। अस्पताल युद्धक्षेत्र नहीं हैं।” समाचार एजेंसी ‘फार्स' की खबर में आरोप लगाया गया है कि ईलम में प्रदर्शनकारियों के पास आग्नेयास्त्र और ग्रेनेड थे। हालांकि, खबर में इन आरोपों के संबंध में कोई प्रमाण नहीं दिया गया है। आर्थिक रूप से पिछड़े ईलम प्रांत में मुख्य रूप से कुर्द और लूर जातीय समूहों के लोग रहते हैं।
ईरान में विरोध-प्रदर्शनों में मृतकों की संख्या बढ़ने के साथ ही आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका मामले में हस्तक्षेप कर सकता है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर तेहरान शांतिपूर्वक विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा करता है, तो अमेरिका “उन्हें बचाने के लिए आगे आएगा।” हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप ईरान में हस्तक्षेप करेंगे या नहीं और अगर करेंगे तो किस तरह करेंगे, लेकिन उनके बयानों को लेकर ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई है। ईरानी अधिकारियों ने पश्चिम एशिया में तैनात अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने की धमकी दी है। परमाणु कार्यक्रम को लेकर लागू कठोर प्रतिबंधों के कारण पहले से ही मुश्किल दौर से गुजर रही ईरानी अर्थव्यवस्था को पिछले साल इजराइल के साथ 12 दिन के युद्ध के चलते और झटका लगा। दिसंबर 2025 में ईरानी रियाल की कीमत गिरकर 14 लाख ईरानी रियाल प्रति अमेरिकी डॉलर पहुंच गई, जिससे देशभर में अर्थव्यस्था की लगातार खस्ताहाल होती स्थिति को लेकर विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए। मंगलवार को ईरानी रियाल की कीमत 14.6 लाख ईरानी रियाल प्रति अमेरिकी डॉलर दर्ज की गई।
सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के शनिवार को “दंगाइयों के खिलाफ सख्ती करने” की बात कहने के बावजूद ईरान में विरोध-प्रदर्शन थमते नजर नहीं आ रहे हैं। -
पेरिस. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के कार्यकारी निदेशक फतीह बिरोल से मुलाकात की और तेल बाजारों तथा परमाणु ऊर्जा समेत वैश्विक ऊर्जा मुद्दों पर उनसे चर्चा की। जयशंकर फ्रांस और लक्जमबर्ग की छह दिन की यात्रा पर हैं। उन्होंने आज आईईए के कार्यकारी निदेशक से मुलाकात की।
विदेश मंत्री ने ‘एक्स' पर लिखा, आज सुबह आईईए के कार्यकारी निदेशक फतीह बिरोल से मिलकर प्रसन्नता हुई। वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य के उनके आकलन और भारत के विकास में उनके समर्थन की सराहना करता हूं।'' बिरोल ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वह पेरिस में जयशंकर से मिलकर खुश हैं। -
नई दिल्ली। ब्रिटेन और फ्रांस ने एक संयुक्त ऑपरेशन में सीरिया के अंदर आतंकी ठिकानों पर स्ट्राइक की है। लड़ाकू विमानों ने सीरिया में इस्लामिक स्टेट ग्रुप के एक संदिग्ध भूमिगत हथियार डिपो पर बमबारी की। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा कि इस हमले में किसी आम नागरिक को नुकसान नहीं पहुंचा है और सभी एयरक्राफ्ट ऑपरेशन के बाद सुरक्षित लौट आए हैं।
सीरिया में इस्लामिक स्टेट ग्रुप (दाएश आतंकवादी संगठन) फिर से उभरने की कोशिश में है, जिसने 2019 तक सीरिया के कुछ हिस्सों पर कब्जा कर लिया था। इसे रोकने के लिए ब्रिटेन ने फ्रांस के साथ मिलकर ऑपरेशन किया।ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने कहा, “रॉयल एयरफोर्स के एयरक्राफ्ट मार्च 2019 में अपनी सैन्य हार के बाद दाएश आतंकवादी ग्रुप के किसी भी संभावित पुनरुत्थान को रोकने के लिए सीरिया के ऊपर गश्त करना जारी रखे हुए हैं। सावधानीपूर्वक खुफिया विश्लेषण ने पलमायरा के प्रमुख स्थल से कुछ मील उत्तर में पहाड़ों में एक भूमिगत ठिकाने की पहचान की। इस ठिकाने पर दाएश का कब्जा था, जिसका इस्तेमाल हथियार और विस्फोटक जमा करने के लिए किया जाता था। ठिकाने के आसपास के क्षेत्र में कोई नागरिक बस्ती नहीं है।”रॉयल एयरफोर्स के टाइफून एफजीआर4एस फाइटर जेट्स ने फ्रांसीसी विमानों के साथ एक संयुक्त कार्रवाई में 3 जनवरी की शाम को भूमिगत ठिकाने पर हमला किया। विमानों ने ठिकाने तक जाने वाली कई सुरंगों को निशाना बनाने के लिए पेववे-4 गाइडेड बमों का इस्तेमाल किया। रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि शुरुआती संकेत हैं कि लड़ाकू विमानों ने लक्ष्य को सफलतापूर्वक निशाना बनाया।रक्षा मंत्रालय ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें विमानों को वॉयेजर एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर से ईंधन सपोर्ट लेते दिखाया गया।रक्षा सचिव जॉन हीली ने कहा, “यह कार्रवाई हमारे ब्रिटेन के नेतृत्व और अपने सहयोगियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने के हमारे पक्के इरादे को दिखाती है, ताकि मिडिल ईस्ट में दाएश और उसकी खतरनाक व हिंसक विचारधारा के फिर से उभरने को खत्म किया जा सके। मैं इस ऑपरेशन में शामिल हमारी सेना के सभी सदस्यों को उनकी दक्षता और साहस के लिए धन्यवाद देता हूं।”उन्होंने आगे कहा, “वे क्रिसमस और नए साल के दौरान तैनात किए गए हजारों ब्रिटिश जवानों में से थे। हमारे जीवन के तरीके को खतरा पहुंचाने वाले खतरनाक आतंकवादियों को खत्म करने के लिए किया गया यह ऑपरेशन दिखाता है कि हमारी सेना पूरे साल कैसे तैयार रहती है व ब्रिटेन को घर पर सुरक्षित और विदेश में मजबूत रखती है।” -
वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 29 लाख अमेरिकी डॉलर के कंप्यूटर चिप सौदे को रद्द करने का शुक्रवार को आदेश देते हुए कहा कि अगर वर्तमान मालिक ‘हाइफो कॉर्प' प्रौद्योगिकी पर नियंत्रण बनाए रखता है तो यह अमेरिकी सुरक्षा हितों के लिए खतरा बन सकता है। इस कार्यकारी आदेश ने एक ऐसे व्यापारिक सौदे पर ध्यान केंद्रित किया, जो मई 2024 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन के दौरान घोषित किया गया था। इस सौदे में एयरोस्पेस और रक्षा विशेषज्ञ एमकोर कॉर्प ने अपने कंप्यूटर चिप और वेफर निर्माण कार्यों को 29 लाख अमेरिकी डॉलर में हाइफो को बेच दिया था। लेकिन ट्रंप अब ‘हाइफो' से मांग कर रहे हैं कि वह 180 दिनों के भीतर इस तकनीक से अपनी हिस्सेदारी समाप्त कर दे। उन्होंने ‘‘विश्वसनीय सबूत'' का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा मालिक चीन का नागरिक है। हाइफो ने ट्रंप के इस आदेश पर टिप्पणी के अनुरोध का तत्काल कोई जवाब नहीं दिया।
हाइफो के साथ हुए सौदे के समय एमकोर एक सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध कंपनी थी लेकिन पिछले वर्ष निवेश कंपनी चार्ल्सबैंक कैपिटल पार्टनर्स ने एमकोर का अधिग्रहण कर उसे निजी कंपनी बना लिया। - काराकास। अमेरिका के साथ जारी तनाव के बीच वेनेजुएला की राजधानी काराकास में शनिवार सुबह कई बड़े धमाकों की आवाज सुनी गई। धमाकों का कारण साफ नहीं है, जबकि सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो में धुएं के गुबार दिख रहे हैं। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, धमाकों की आवाज के बाद राजधानी में टेलीकम्युनिकेशन सेवा में थोड़ी रुकावट की खबर सामने आ रही है। हालांकि, अमेरिका की तरफ से अब तक इन धमाकों को लेकर किसी भी तरह का आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।बता दें, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले कई बार वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने की अपनी रणनीति के तहत वेनेजुएला में ग्राउंड ऑपरेशन की संभावना के बारे में चेतावनी दी थी। इन चेतावनियों के बाद ही वेनेजुएला में कई धमाकों की आवाज सुनाई दी है।दबाव बनाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ने वेनेजुएला पर बैन बढ़ाए हैं, इलाके में अमेरिकी सेना की मौजूदगी बढ़ाई है, और कैरिबियन और पैसिफिक दोनों में जहाजों पर ड्रग ट्रैफिकिंग का आरोप लगाया है। कैरेबियन सागर में बीते समय में अमेरिकी सेना की कार्रवाई की जानकारी भी सामने आई। हाल ही में, अमेरिकी सरकार ने ईरान और वेनेजुएला में बैन लगाने की घोषणा की थी। अमेरिकी सरकार ने तेहरान पर काराकास को पारंपरिक हथियार सप्लाई करने और अमेरिकी होमलैंड सहित पूरे पश्चिमी क्षेत्र में यूएस के हितों को खतरा पहुंचाने का आरोप लगाया था।अमेरिकी राज्य विभाग और वित्त विभाग ने कहा कि वेनेजुएला की जिस कंपनी पर बैन लगाया गया, वह लाखों डॉलर के ईरानी-डिजाइन किए गए कॉम्बैट अनमैन्ड एरियल व्हीकल (यूएवी) की बिक्री में शामिल थी। अमेरिकी विभागों की ओर से जारी बयानों में कहा गया कि दूसरी बैन की गई संस्थाओं और लोगों पर ईरान के ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम से जुड़े प्रोक्योरमेंट नेटवर्क का समर्थन करने का आरोप है।राजकीय विभाग के उपप्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा, “आज जिन संस्थाओं और लोगों पर बैन लगाया गया है, वे दिखाते हैं कि ईरान सक्रिय रूप से अपने लड़ाकू यूएवी को बढ़ा रहा है और यूएन की पाबंदियों का उल्लंघन करते हुए मिसाइल से जुड़े आइटम खरीद रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि ट्रंप सरकार ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर रोक लगाने, दूसरे पारंपरिक और एसिमेट्रिक हथियारों के विकास को रोकने के साथ-साथ ईरान को न्यूक्लियर हथियार हासिल करने से रोकने के लिए कार्रवाई करेगी।आतंकवाद और वित्तीय खुफिया के अवर सचिव जॉन के हर्ले ने कहा, “हम उन लोगों को अमेरिकी वित्तीय सिस्टम तक पहुंचने से रोकने के लिए तेजी से कार्रवाई करते रहेंगे जो ईरान के मिलिट्री-इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स को एक्सेस करने में मदद करते हैं।” अमेरिकी वित्त विभाग ने यह भी कहा कि ईरान के यूएवी और मिसाइल प्रोग्राम मिडिल ईस्ट में अमेरिका और उसके सहयोगी कर्मचारियों के लिए खतरा हैं और रेड सी में कमर्शियल शिपिंग में रुकावट डालते हैं।इससे पहले सीआईए ने पिछले साल दिसंबर 2025 में वेनेजुएला के तट पर एक डॉक फैसिलिटी पर ड्रोन हमला किया था। सूत्रों ने बताया कि इस हमले में एक दूर के डॉक को निशाना बनाया गया था, जिसके बारे में अमेरिकी अधिकारियों का मानना था कि इसका इस्तेमाल वेनेजुएला का एक गैंग ड्रग्स स्टोर करने और उन्हें शिपमेंट के लिए नावों पर भेजने के लिए कर रहा था।
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न्यूयॉर्क. जोहरान ममदानी बुधवार मध्यरात्रि के ठीक बाद न्यूयॉर्क सिटी के मेयर बन गए। उन्होंने मैनहट्टन के एक ऐतिहासिक सबवे स्टेशन पर पद की शपथ ली, जो अब इस्तेमाल में नहीं है। डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता ममदानी ने अमेरिका के सबसे बड़े शहर के पहले मुस्लिम नेता के रूप में शपथ ग्रहण की। उन्होंने कुरान पर हाथ रखकर पद की शपथ ली। ममदानी ने कहा, ‘‘यह सचमुच मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान और सौभाग्य है। उनकी राजनीतिक सहयोगी एवं न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स ने समारोह का संचालन किया। यह समारोह पुराने सिटी हॉल स्टेशन में हुआ जो न्यूयॉर्क के मूल सबवे स्टेशनों में से एक है और अपनी शानदार मेहराबदार छतों के लिए जाना जाता है। अपराह्न एक बजे वह फिर से शपथ लेंगे । अपराह्न एक बजे सिटी हॉल में अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स से वह पद की शपथ लेंगे, जो उनके राजनीतिक आदर्शों में से एक हैं। इसके बाद नए प्रशासन द्वारा आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम होगा। कार्यक्रम ब्रॉडवे के “कैनियन ऑफ हीरोज” नामक हिस्से में आयोजित किया जाएगा जो अपने टिकट-टेप परेड के लिए प्रसिद्ध है। ममदानी अब अमेरिकी राजनीति की सबसे चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में से एक शुरू करने वाले हैं, क्योंकि वह देश के सबसे उन नेताओं में शुमार हो गए हैं जिन पर सभी की नजरें टिकी रहती हैं। न्यूयॉर्क सिटी के पहले मुस्लिम मेयर होने के अलावा अफ्रीका में जन्मे ममदानी दक्षिण एशियाई मूल के पहले मेयर भी हैं। 34 वर्ष की उम्र में मेयर बनने वाले ममदानी शहर के सबसे युवा मेयर भी हैं। ममदानी का जन्म युगांडा के कैंपाला में हुआ था। उनकी माता फिल्मकार मीरा नायर और पिता शिक्षाविद एवं लेखक महमूद ममदानी हैं। जब ममदानी सात साल के थे, तब उनका परिवार न्यूयॉर्क सिटी आ गया। ममदानी उस न्यूयॉर्क सिटी में बड़े हुए जहां 9/11 के बाद मुस्लिम समुदाय को लेकर माहौल बदला हुआ था। उन्होंने 2018 में अमेरिकी नागरिकता प्राप्त की।
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नई दिल्ली। दुनिया के एक छोटे से द्वीप देश किरिबाती ने नए साल का इस्तकबाल बड़ी आन-बान-शान से कर दिया है। भारत से करीब साढ़े आठ घंटे पहले यहां नए साल के जश्न में लोग डूबे देखे गए। किरिबाती 33 एटोल (एटोल का मतलब होता है गोलाकार कोरल रीफ) से बना है—प्रशांत महासागर के 3.5 मिलियन वर्ग किमी (1.4 मिलियन वर्ग मील) से अधिक क्षेत्र में फैला है।
1994 में, किरिबाती—जिसका उच्चारण “किरिबास” किया जाता है—ने अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा के पार टाइम जोन बदल दिया, ताकि सभी 33 द्वीपों में एक ही तारीख हो (पहले अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा के पूर्वी तरफ कुछ द्वीप थे)।प्रशांत द्वीप देशों समोआ, टोंगा, और टोकेलाऊ—जो ऑकलैंड से लगभग 3,500 किमी उत्तर में न्यूजीलैंड का एक आश्रित क्षेत्र है—ने भी जश्न के साथ 2026 का स्वागत किया है।इनके बाद न्यूजीलैंड ने भी नए साल का स्वागत आतिशबाजी से किया। ऑकलैंड ने स्काई टॉवर पर रंगीन आतिशबाजी के साथ नए साल को रोशन किया। पांच मिनट के इस शो में 240 मीटर (787 फीट) ऊंचे टॉवर, जो न्यूजीलैंड की सबसे ऊंची इमारत है, की अलग-अलग मंजिलों से 3,500 पटाखे चलाए गए।आइए जानते हैं कि जब दुनिया के कुछ देश हमसे पहले नए साल का जश्न मनाते हैं तो हम और कितने घंटों का इंतजार करते हैं। किरिबाती ने जब नए साल का पहला दिन मनाया, तो भारत में दोपहर के 3:30 बजे थे। न्यूजीलैंड हमसे करीब साढ़े छह घंटे पहले और ऑस्ट्रेलिया साढ़े पांच घंटे पहले (भारत में तब साढ़े छह बजते हैं) नए साल की खुशियां मनाते हैं, जापान साढ़े तीन घंटे पहले, थाईलैंड डेढ़ घंटे पहले, बांग्लादेश हमसे आधे घंटे पहले, और नेपाल महज 15 मिनट पहले नूतन वर्ष का स्वागत करता है। - नई दिल्ली। नए साल का बाहें फैलाकर स्वागत करने को तैयार कई देश हैं। किरिबाती से शुरुआत हो चुकी है, और न्यूजीलैंड का ऑकलैंड आतिशबाजी से जगमगा उठा। ऑस्ट्रेलिया भी तैयार है। वहीं सिडनी में बोंडी बीच आतंकी हमले के पीड़ितों को जश्न से पहले ठीक 11 बजे श्रद्धांजलि दी गई।एक ऐसी रात में जो आमतौर पर खुशी और जश्न के लिए होती है, सिडनी उस बोंडी बीच हमले पर सोचने के लिए रुका, जिसने 14 दिसंबर को यहूदी समुदाय और शहर को खौफजदा कर दिया था। जश्न मनाने जुटे लोगों ने एक मिनट का मौन रखा जो सिडनी के यहूदी समुदाय के साथ एकजुटता दिखाने का एक तरीका था।सिडनी हार्बर ब्रिज सफेद रोशनी से जगमगा रहा था और हजारों मशालों की रोशनी फैल रही थी; शहर जो नहीं रहे उन्हें याद करने और कुछ सोचने के लिए रुक गया। रात 11 बजे ‘एकता के क्षण’ में सिडनी हार्बर ब्रिज शांति और एकता का प्रतीक बनने के लिए सफेद रोशनी से जगमगा उठा। ‘द सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड’ के अनुसार हार्बर के किनारे मौजूद लोगों से जो कहा गया उन्होंने वही किया। उन्होंने अपने फोन की टॉर्च जलाई और रोशनी बहते पानी पर डाली, जो यहूदी समुदाय और हमले से पीड़ित सभी लोगों के साथ शहर की एकजुटता का प्रतीक था।इससे पहले, रात के 10 बजे, सिडनी हार्बर ब्रिज को नीली रोशनी से रोशन किया गया, ताकि सिडनी शहर के ऑफिशियल चैरिटी पार्टनर, बियॉन्ड ब्लू के काम को पहचान मिल सके। इस “बियॉन्ड ब्लू मोमेंट” ने चैरिटी के उन प्रयासों को श्रद्धांजलि दी, जिसके तहत वह ऑस्ट्रेलियाई लोगों को चौबीसों घंटे मुफ्त मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रदान करती है।आतिशबाजी की शुरुआत करीब 9 बजे हुई थी। न्यू ईयर ईव के जश्न की पहली आतिशबाजी से सिडनी हार्बर जगमगा उठा। स्थानीय मीडिया ने बताया कि बुधवार को घंटों लाइन में लगकर इंतजार करने वाली भीड़ को रात 9 बजे ‘कॉलिंग कंट्री’ आतिशबाजी के साथ दुनिया के सबसे बड़े आतिशबाजी शो में से एक का पहला नजारा देखने को मिला।
- ढाका। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया का निधन हो गया है। वो लंबे समय से बीमार चल रहीं थीं और डॉक्टरों ने बताया था कि उनकी स्थिति काफी नाजुक है। बेगम खालिदा जिया बांग्लादेश की प्रमुख राजनेता और देश की पूर्व प्रधानमंत्री थीं। उनका जन्म 15 अगस्त 1945 को दीनाजपुर जिले में हुआ था। वे बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की पत्नी थीं, जिनकी 1981 में हत्या कर दी गई थी। उसके बाद खालिदा जिया सक्रिय राजनीति में आईं। पति की मौत के बाद उन्होंने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी का नेतृत्व संभाला और जल्द ही देश की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक शख्सियतों में गिनी जाने लगीं।खालिदा जिया देश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं और उन्होंने तीन बार देश का नेतृत्व किया। वो पहली बार 1991 से 1996 तक, दूसरी बार 30 मार्च 1996 से 23 जून 1996, तक और फिर 2001 से 2006 तक देश की प्रधानमंत्री रहीं। खालिदा जिया का निधन उस वक्त हुआ है, जब बांग्लादेश राजनीतिक उथल पुथल से जूझ रहा है। देश में फरवरी में चुनाव होने वाले हैं, जिसमें भाग लेने के लिए उनके बेटे तारिक रहमान, करीब 17 सालों के बाद देश लौट चुके हैं। खालिदा जिया लगातार बीमार चल रही थीं और शेख हसीना के शासन के दौरान उन्हें कई सालों से नजरबंद रखा गया था।
- काठमांडू. नेपाल के पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक ने सोमवार को दावा किया कि ‘जेन जेड' विरोध प्रदर्शन के दूसरे दिन हुई तोड़फोड़ और आगजनी "लोकतंत्र और राष्ट्र के खिलाफ एक योजनाबद्ध साजिश" का परिणाम थी। आठ और नौ सितंबर को भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ युवाओं के नेतृत्व वाले ‘जेन जेड' विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप ले लिया, जिससे प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली की गठबंधन सरकार को सत्ता से हटना पड़ा था। ‘जेन जेड' आंदोलन के दौरान कुल 77 लोग मारे गए थे, जिनमें 22 युवा शामिल थे।लेखक सोमवार को ‘जेन जेड' विरोध प्रदर्शन की जांच कर रहे उच्च स्तरीय आयोग के सामने पेश हुए। उन्होंने कहा कि वह 8 सितंबर की मौतों और अन्य क्षति के लिए पूर्ण नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं। उन्होंने हालांकि, दावा किया कि 9 सितंबर को देशभर में हुई तोड़फोड़ और आगजनी स्वतः उत्पन्न हिंसा नहीं थी, बल्कि यह लोकतंत्र और राष्ट्र के खिलाफ एक योजनाबद्ध साजिश का परिणाम थी। नेपाली कांग्रेस के नेता ने कहा कि आठ सितंबर की घटना के तुरंत बाद उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया, क्योंकि गृह मंत्रालय के राजनीतिक प्रमुख के रूप में उन्हें व्यक्तिगत और संस्थागत रूप से जिम्मेदारी महसूस हुई। हालांकि, लेखक ने 8 सितंबर के शांतिपूर्ण ‘जेन जेड' विरोध प्रदर्शन और 9 सितंबर की हिंसक घटनाओं के बीच स्पष्ट अंतर किया। उनके अनुसार, 8 सितंबर का प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, जिसे बाद में भड़काया और हथिया लिया गया, जिससे अगले दिन व्यापक आगजनी और हमले हुए। उन्होंने कहा, “9 सितंबर की हिंसक घटनाएं राष्ट्रीय अखंडता, गरिमा और लोकतंत्र के खिलाफ थीं। कोई भी देशभक्त नेपाली सिंह दरबार सचिवालय, उच्चतम न्यायालय, संसद और राष्ट्रपति कार्यालय को आग लगाने की कल्पना भी नहीं कर सकता।” उन्होंने कहा कि यह “एक योजनाबद्ध साजिश” और “राष्ट्र और लोकतंत्र पर जानबूझकर हमला” था।जांच आयोग का नेतृत्व पूर्व न्यायाधीश गौरी बहादुर कार्की कर रहे हैं। उसने लेखक को तलब किया था, जो ‘जेन जेड' विरोध प्रदर्शन के दौरान गृह मंत्री थे। लेखक ने अपने स्पष्टीकरण में दावा किया कि तब के गृह मंत्री के रूप में उन्होंने 7 सितंबर को केंद्रीय सुरक्षा समिति की बैठक बुलाई थी, जिसमें सभी सुरक्षा एजेंसियों ने कानून और व्यवस्था बनाए रखने और अत्यधिक बल या हताहत से बचने पर सहमति जताई थी। लेखक ने कहा, “जेन जेड प्रदर्शनकारियों की मांगें-भ्रष्टाचार विरोध, सुशासन और सोशल मीडिया साइट पर प्रतिबंध हटाना—वैध और व्यापक रूप से स्वीकार्य थीं।” लेखक ने कहा कि नौ सितंबर की घटना “क्षणिक क्रोध” का परिणाम नहीं हो सकती, जिसमें प्रमुख सरकारी कार्यालयों, निजी संपत्तियों, राजनीतिक पार्टी के भवनों, पुलिस इकाइयों और देशभर के व्यापारिक प्रतिष्ठानों को आग लगाई गई। उन्होंने बताया कि इस तरह के समन्वित हमले तैयारी, योजना और इरादे को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा, “ये स्वाभाविक घटनाएं नहीं थीं। ये राष्ट्र के संस्थानों पर संगठित हमले थे।” लेखक ने आयोग को यह सुझाव भी दिया कि यह जांच की जाए कि विरोध प्रदर्शन में कौन घुसपैठ कर गया, 9 सितंबर के हमलों की योजना किसने बनाई और उन्हें किसने अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं की मांगों को स्वीकार किया जाना चाहिए, लेकिन अपराधिक कृत्यों को अलग से देखना और दंडित करना जरूरी है। ओली और लेखक के काठमांडू घाटी छोड़ने पर रोक लगा दी गई है, क्योंकि उन्हें आयोग के सामने पेश होने की आवश्यकता हो सकती है। जांच आयोग के प्रवक्ता विज्ञान राज शर्मा के अनुसार, लेखक को बुधवार को फिर से पेश होने के लिए कहा गया है, ताकि वह घटना के बारे में स्पष्टीकरण देना जारी रख सकें। शर्मा के अनुसार, आयोग ओली को तलब करने और घटना के संबंध में उनका स्पष्टीकरण दर्ज करने के लिए पत्र भेजने की तैयारी कर रहा है।
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काठमांडू। काठमांडू महानगरपालिका के महापौर बालेंद्र शाह को राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) की ओर से रविवार को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया। बालेंद्र शाह को बालेन के नाम से भी जाना जाता है। इससे पहले, बालेन और आरएसपी ने नेपाल आम चुनाव मिलकर लड़ने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। देश में आम चुनाव के लिए मतदान पांच मार्च को होने हैं। रातभर चली लंबी बातचीत के बाद हुए सात सूत्री समझौते के तहत 35 वर्षीय बालेन को संसदीय दल का नेता एवं प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया, जबकि रबी लामिछाने भंग हो चुकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में चौथी सबसे बड़ी पार्टी आरएसपी के अध्यक्ष बने रहेंगे। समझौते के अनुसार, बालेन और उनका समूह निर्वाचन आयोग द्वारा आवंटित आरएसपी के चुनाव चिह्न ‘घंटी' पर चुनाव लड़ेगा। समझौते के बाद रबी लामिछाने ने कहा कि यह सहमति व्यक्तिगत नेताओं की महत्वाकांक्षाओं के बजाय देश की जरूरतों को प्रतिबिंबित करनी चाहिए। उन्होंने यह बात रविवार सुबह फेसबुक पोस्ट में कही।
समझौते में कहा गया है कि दोनों पक्षों ने “भ्रष्टाचार और कुशासन के खिलाफ युवा पीढ़ी द्वारा शुरू किए गए आंदोलन की जिम्मेदारी” ली है और ‘जेन-जेड' के प्रदर्शनकारियों द्वारा उठाई गई मांगों को पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई है। पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह समझौता युवा-नेतृत्व वाली उन उभरती राजनीतिक ताकतों को एकजुट करने की दिशा में एक अहम कदम है, जिन्होंने सितंबर के आंदोलन का नेतृत्व किया था। इसी आंदोलन के कारण के.पी. शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई थी। इस समझौते के बाद बड़ी संख्या में ‘जेन-जेड' समर्थकों के आरएसपी में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, ऊर्जा और जल संसाधन मंत्री कुलमान घिसिंग के नेतृत्व वाले एक अन्य नवगठित दल उज्यालो नेपाल पार्टी (यूएनपी) ने गठबंधन में शामिल होने को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं किया है। मंत्री ने एकजुटता और सहयोग पर बालेन के साथ कई दौर की वार्ता की है ।समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के दौरान आरएसपी के वरिष्ठ नेता डॉ. स्वर्णिम वागले, डी.पी. आर्यल और शिशिर खनाल मौजूद थे। लामिछाने की ओर से असीम शाह शामिल हुए, जबकि बालेन शाह के पक्ष से कुमार ब्यांजंकर, निश्चल बसनेत और भूप देव शाह उपस्थित थे।
- ढाका। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री एवं बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की अध्यक्ष खालिदा जिया की हालत “बेहद नाजुक” बनी हुई है। उनके निजी चिकित्सक ने यह जानकारी दी। कई स्वास्थ्य जटिलताओं से जूझ रही 80 वर्षीय खालिदा जिया 23 नवंबर से ढाका के ‘एवरकेयर' अस्पताल में उपचाराधीन हैं और उन्हें 11 दिसंबर को वेंटिलेटर पर रखा गया था। डॉ. ए.जेड.एम. जाहिद ने शनिवार को मध्यरात्रि के बाद एवरकेयर अस्पताल के बाहर बिना पूर्व सूचना के आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “यह नहीं कहा जा सकता कि उनकी हालत में सुधार हुआ है। फिलहाल उनकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।'' समाचार पोर्टल बीडीन्यूज24डॉटकॉम की खबर के अनुसार, डॉ. जाहिद ने देशवासियों से खालिदा जिया के शीघ्र स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना करने की अपील भी की। उन्होंने कहा, “अगर अल्लाह की रहमत से वह इस नाजुक दौर से बाहर निकल जाती हैं, तो हमें कुछ सकारात्मक खबर सुनने को मिल सकती है।” पार्टी सदस्यों के मुताबिक, खालिदा जिया के बेटे एवं बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान ने अस्पताल में दो घंटे से अधिक समय बिताया और आधी रात के आसपास रवाना हुए। स्थानीय और विदेशी दोनों चिकित्सक उनकी देखभाल में लगे हैं। उनकी बहू डॉ. जुबैदा रहमान भी उपचार प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं। बीएनपी ने पहले संकेत दिया था कि वह खालिदा जिया को उन्नत चिकित्सा उपचार के लिए विदेश ले जाना चाहती है। हालांकि, उनकी वर्तमान शारीरिक स्थिति हवाई यात्रा की अनुमति नहीं देती, इसलिए उनका इलाज फिलहाल देश में ही जारी है। file photo
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न्यूयॉर्क/वाशिंगटन. अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा कि भारत द्वारा एक अमेरिकी संचार उपग्रह का सफल प्रक्षेपण वाशिंगटन और नयी दिल्ली के बीच साझेदारी के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पल है, और यह वर्ष 2025 में द्विपक्षीय अंतरिक्ष सहयोग के दौरान हासिल हुई सबसे बड़ी उपलब्धि है। क्वात्रा ने कहा कि अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत-अमेरिका साझेदारी के लिए आज वास्तव में एक बहुत महत्वपूर्ण दिन है।” उन्होंने कहा, “ यह हमारे अंतरिक्ष इंजीनियरों और हमारे अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के लिए बड़ा दिन है। यह आत्मनिर्भरता के प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) के दृष्टिकोण के हिसाब से एक बड़ा दिन है। यह भारत-अमेरिका सहयोग के लिए बड़ा दिन है। मुझे लगता है कि कम से कम इस क्षेत्र में तो हम वर्ष 2025 का इससे बेहतर अंत नहीं कर सकते थे, और अगले वर्ष और अधिक उपलब्धियां हासिल करने की पूरी तैयारी है।” भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए अपने सबसे भारी रॉकेट एलवीएम3-एम6 से बुधवार को अमेरिका वाणिज्यिक संचार उपग्रह ब्लूबर्ड-6 (ब्लॉक-2) को सटीक तरीके से उसकी निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया। क्वात्रा ने कहा, “आज की इस अद्वितीय उपलब्धि से हमने जो हासिल किया वह 2025 में दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष सहयोग में हासिल हुई सबसे बड़ी उपलब्धि है।” क्वात्रा ने जोर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उद्योग तथा सरकारी विभागों को 'आत्मनिर्भरता' की दिशा में आगे बढ़ने के प्रेरित किया है। उन्होंने कहा, “यह अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ती आत्मनिर्भरता का एक स्पष्ट उदाहरण है। आत्मनिर्भरता को हमें एक रणनीतिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए, न कि इसे केवल एक साधारण वाणिज्यिक आदान-प्रदान मानना चाहिए।”
- नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने उत्तर-पश्चिम नाइजीरिया में आईएसआईएल (आईएसआईएस) के लड़ाकों के खिलाफ हवाई हमला किया है। खास बात रही कि ट्रंप ने यह सूचना देने के लिए क्रिसमस के दिन को चुना।ट्रंप ने गुरुवार को अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में कहा, “आज रात, कमांडर इन चीफ के तौर पर दिए मेरे निर्देश पर अमेरिका ने उत्तर-पश्चिम नाइजीरिया में आईएसआईएस आतंकवादियों के खिलाफ एक शक्तिशाली और घातक हमला किया।उन्होंने कहा कि आईएस आतंकवादियों ने मुख्य रूप से निर्दोष ईसाइयों को निशाना बनाया और बेरहमी से मारा, जो कई सालों और सदियों में नहीं देखा गया था। मैंने पहले ही इन आतंकवादियों को चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने ईसाइयों का नरसंहार बंद नहीं किया तो उन्हें इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा और आज रात ऐसा ही हुआ।अमेरिकी सेना की अफ्रीका कमांड (एएफआरआईसीओएम) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि हवाई हमला नाइजीरियाई अधिकारियों के अनुरोध पर किया गया था और इसमें ‘कई आतंकवादी’ मारे गए।अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने लिखा, “मैं नाइजीरियाई सरकार के समर्थन और सहयोग के लिए आभारी हूं।” उन्होंने चेतावनी दी कि और भी बहुत कुछ होने वाला है। एएफआरआईसीओएम ने कहा कि यह हमला ‘सोबोटो राज्य’ में हुआ, जो नाइजीरिया के सोकोटो राज्य का हिस्सा है।अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ट्रंप के उस बयान के हफ्तों बाद हुई है जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने पेंटागन को देश में ईसाइयों के उत्पीड़न के दावों के बाद नाइजीरिया में संभावित सैन्य कार्रवाई की योजना शुरू करने का आदेश दिया था।नाइजीरिया की सरकार ने ट्रंप के दावों को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि सशस्त्र समूह देश में मुस्लिम और ईसाई दोनों समुदायों को निशाना बनाते हैं। साथ ही अमेरिकी दावे कि ईसाइयों को उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, एक कठिन सुरक्षा स्थिति का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए नाइजीरियाई अधिकारियों के प्रयासों को नजरअंदाज करते हैं।ट्रंप द्वारा अमेरिकी हमले की घोषणा के तुरंत बाद नाइजीरिया के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया, जिसमें शुक्रवार सुबह पुष्टि की गई कि नाइजीरियाई अधिकारी आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के लगातार खतरे से निपटने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका सहित अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ संरचित सुरक्षा सहयोग में लगे हुए हैं।
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संयुक्त राष्ट्र. दुनिया के कई इलाकों में जारी संघर्षों, वित्तीय संकट और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना के बीच, संयुक्त राष्ट्र ने 2025 में अपनी 80वीं वर्षगांठ मनाई, जबकि भारत ने विश्व निकाय से ‘‘नेतृत्व और आशा'' पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया और एक बड़ी भूमिका निभाने की इच्छा व्यक्त की। यूक्रेन और गाजा में संघर्ष, सूडान से लेकर म्यांमा तक दुनिया भर के कई अन्य हिस्सों में युद्ध की स्थिति ने 2025 में भी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में संयुक्त राष्ट्र और उसकी शक्तिशाली, लेकिन ध्रुवीकृत, सुरक्षा परिषद की अक्षमता को उजागर किया। जैसे-जैसे राष्ट्र मानवीय आपात स्थितियों, जलवायु संकट और आर्थिक असमानता से जूझ रहे हैं, वैसे-वैसे संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता पर सवाल और मुखरता से उठाए जा रहे हैं जिनमें प्रमुख सवाल यह है कि क्या 1945 में स्थापित 80 साल पुराने इस संगठन के पास 21वीं सदी में अस्थिर दुनिया की समस्याओं का समाधान है। इस पृष्ठभूमि में, भारत ने इस बहुपक्षीय संगठन में सुधार के लिए जोरदार आह्वान किया है। सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से विश्व नेताओं को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि एक ‘‘निष्पक्ष रिपोर्ट कार्ड'' से पता चलेगा कि संयुक्त राष्ट्र संकट की स्थिति में है। उन्होंने कहा, ‘‘जब संघर्षों से शांति खतरे में पड़ती है, जब संसाधनों की कमी से विकास पटरी से उतर जाता है, जब आतंकवाद से मानवाधिकारों का उल्लंघन होता है, तब संयुक्त राष्ट्र गतिरोध में फंसा रहता है। आम सहमति बनाने की इसकी क्षमता कम होने के साथ-साथ बहुपक्षीय मंच के तौर पर इसके प्रति विश्वास भी घटता जाता है।'' भारत ने स्पष्ट रूप से दुनिया को बताया कि संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता में कमी का मुख्य कारण सुधारों का प्रतिरोध रहा है, और नयी दिल्ली विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अधिक जिम्मेदारियां संभालने के लिए तैयार है, जो अपने वर्तमान 15 सदस्यों के साथ 2025 की दुनिया का प्रतिनिधित्व नहीं करती है। जयशंकर ने कहा, ‘‘परिषद की स्थायी और अस्थायी दोनों प्रकार की सदस्यता का विस्तार किया जाना चाहिए। एक सुधार किये गए परिषद को सही मायने में प्रतिनिधि होना चाहिए। भारत अधिक जिम्मेदारियां संभालने के लिए तैयार है।'' उन्होंने कहा, ‘‘संयुक्त राष्ट्र का नौवां दशक नेतृत्व और आशा का दशक होना चाहिए। भारत अपनी पूरी भूमिका निभाएगा, और उससे भी अधिक करेगा।'' जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत अग्रणी भूमिका निभाना जारी रखेगा।
दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट' नामक आतंकवादी संगठन ने 26 लोगों की निर्मम हत्या कर दी जिसके मद्देनजर, भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से आतंकवाद के खिलाफ अपने लोगों की रक्षा करने के अपने अधिकार का प्रयोग किया और पाकिस्तान तथा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकी ढांचे को निशाना बनाया। ऐसे समय में जब पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का गैर-स्थायी सदस्य था तब परिषद ने पहलगाम हमले की कड़ी निंदा करते हुए एक बयान जारी किया और इसके अपराधियों, वित्तपोषकों और प्रायोजकों को जवाबदेह ठहराने और उन्हें न्याय के कटघरे में लाने की आवश्यकता पर जोर दिया। पाकिस्तान से संचालित लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट का भी पहलगाम हमले में उसकी भूमिका के लिए पहली बार सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया। संयुक्त राष्ट्र में सुधार की मांग विश्व निकाय के सर्वोच्च स्तर से भी उठी, जब महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने सुरक्षा परिषद में सुधार करने के लिए पुरजोर तरीके से आह्वान किया ताकि इसे अधिक प्रतिनिधित्व युक्त, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सके। संयुक्त राष्ट्र अपनी 80वीं सालगिरह में असंख्य चुनौतियों से जूझ रहा था, और डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस में वापसी के बाद उसकी चुनौती बढ़ गई है। ट्रंप के अपने पहले कार्यकाल के दौरान भी संयुक्त राष्ट्र से रिश्ते बहुत सौहार्दपूर्ण नहीं रहे और उस समय उन्होंने इस विश्व निकाय को ‘‘लोगों के एक साथ आने, बात करने और अच्छा समय बिताने के लिए सिर्फ एक क्लब'' के रूप में वर्णित किया था। दूसरे कार्यकाल में उनकी संयुक्त राष्ट्र के प्रति तल्खी और बढ़ गई। जनवरी में शपथ ग्रहण करने के कुछ ही घंटों के भीतर, ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसमें अमेरिका को पेरिस जलवायु समझौते से फिर से हटने का निर्देश दिया गया था, जो उनके पहले कार्यकाल के इसी तरह के निर्देश की प्रतिध्वनि थी। अपने दूसरे कार्यकाल के कुछ ही हफ्तों के भीतर, ट्रंप ने एक आदेश जारी किया जिसमें निर्देश दिया गया कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भाग नहीं लेगा, यूनेस्को में अपनी सदस्यता की समीक्षा करेगा और फलस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत और कार्य एजेंसी के लिए धन निलंबित करेगा। ट्रंप सितंबर में 80वें महासभा सत्र के लिए संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय पहुंचे और तब भी वह विश्व निकाय की कड़ी आलोचना करने से नहीं झिझके। -
ह्यूस्टन. भारतीय मूल की चिकित्सक पद्मजा पटेल को गवर्नर ग्रेग एबॉट ने ‘टेक्सास पोषण सलाहकार कमेटी में नियुक्त किया। एक प्रेस विज्ञिप्त में यह जानकारी दी गयी। मिडलैंड में रहने वाली चिकित्सक पटेल एक सितंबर, 2029 तक कमेटी में अपनी सेवाएं देंगी।
यह कमेटी राज्य को आहार एवं पोषण संबंधी सलाह देती है और दीर्घकालिक रोगों की रोकथाम व प्रबंधन में भोजन की भूमिका का अध्ययन करती है। विज्ञप्ति में बताया गया कि सदस्यों की नियुक्ति गवर्नर द्वारा अलग-अलग कार्यकालों के लिए की जाती है और वे चिकित्सा एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह नियुक्ति गवर्नर कार्यालय द्वारा घोषित व्यापक नियुक्तियों का हिस्सा थी।
पटेल के अलावा शेरिल सेउ होय, जैकलिन एल्बिन और कैथलीन डेविस को कमेटी में नियुक्त किया गया हैं तथा ये सभी 2029 तक अपनी सेवाएं देंगे। एन शिप्पी, कमिश्नर सिड मिलर और नताली बाचिन्स्की को कमेटी का सदस्य बनाया गया तथा इनका कार्यकाल 2027 में समाप्त होगा। भारत में जन्मी पटेल ने बड़ौदा मेडिकल कॉलेज से मेडिकल की डिग्री प्राप्त की और बाद में अमेरिका में अपना मेडिकल प्रशिक्षण पूरा किया। प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि वह नुडज हेल्थ में मुख्य चिकित्सा अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं और ‘अमेरिकन कॉलेज ऑफ लाइफस्टाइल मेडिसिन' की अध्यक्ष हैं। पटेल, ‘मिडलैंड क्वालिटी एलायंस' और ‘हेल्दी सिटी मिडलैंड' में भी नेतृत्व की भूमिका निभाती हैं तथा टेक्सास मेडिकल एसोसिएशन, अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन और अमेरिकन कॉलेज ऑफ फिजिशियंस से संबद्ध हैं। -
अंकारा. लीबिया के सैन्य प्रमुख, चार अन्य अधिकारियों और चालक दल के तीन सदस्यों को लेकर जा रहा एक निजी विमान तुर्किये की राजधानी अंकारा से उड़ान भरने के बाद मंगलवार को दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिससे उसमें सवार सभी लोगों की मौत हो गई। लीबिया के अधिकारियों ने बताया कि विमान में तकनीकी खराबी के कारण यह दुर्घटना हुई।
तुर्किये के अधिकारियों ने बताया कि दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से उच्चस्तरीय रक्षा वार्ता के लिए लीबिया का प्रतिनिधिमंडल अंकारा में था। लीबिया के प्रधानमंत्री अब्दुल-हामिद दबीबा ने जनरल मोहम्मद अली अहमद अल-हद्दाद और चार अन्य अधिकारियों की मौत की पुष्टि करते हुए फेसबुक पर जारी एक बयान में कहा कि यह ‘‘दुखद दुर्घटना'' उस समय हुई जब प्रतिनिधिमंडल स्वदेश लौट रहा था। प्रधानमंत्री ने इसे लीबिया के लिए ‘‘बड़ी क्षति'' बताया। अल-हद्दाद पश्चिमी लीबिया के शीर्ष सैन्य कमांडर थे और संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से जारी लीबिया की सेना के एकीकरण के प्रयासों में उनकी अहम भूमिका थी। लीबिया की अन्य संस्थाओं की तरह ही वहां की सेना भी बंटी हुई है। इस दुर्घटना में मारे गए अन्य चार अधिकारी लीबिया के जमीनी बलों के प्रमुख जनरल अल-फितौरी घ्रैबिल, सैन्य विनिर्माण प्राधिकरण के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल महमूद अल-कतावी, चीफ ऑफ स्टाफ के सलाहकार मोहम्मद अल-असावी दियाब और चीफ ऑफ स्टाफ के कार्यालय में कार्यरत सैन्य फोटोग्राफर मोहम्मद उमर अहमद महजूब थे। चालक दल के तीन सदस्यों की पहचान का अभी पता नहीं चल सका है।
तुर्किये के अधिकारियों ने बताया कि ‘फाल्कन-50' प्रकार के व्यावसायिक विमान का मलबा अंकारा से करीब 70 किलोमीटर (लगभग 43.5 मील) दक्षिण में स्थित हायमाना जिले के केसीक्कावाक गांव के पास मिला है। इससे पहले मंगलवार शाम तुर्किये के हवाई यातायात नियंत्रकों ने बताया था कि अंकारा के एसेनबोआ हवाई अड्डे से उड़ान भरने के बाद लीबिया वापस जा रहे विमान से उनका संपर्क टूट गया। तुर्किये के गृह मंत्री अली येरलिकाया ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि विमान ने रात साढ़े आठ बजे उड़ान भरी और 40 मिनट बाद उससे संपर्क टूट गया। येरलिकाया ने बताया कि हायमाना के पास विमान ने आपात स्थिति में उतरने का संकेत भेजा था जिसके बाद उससे संपर्क टूट गया। तुर्किये के राष्ट्रपति कार्यालय में संचार विभाग के प्रमुख बुरहानत्तिन दुरान ने बताया कि विमान ने हवाई यातायात नियंत्रण को विद्युत संबंधी खराबी की सूचना दी थी और आपात स्थिति में विमान उतारे जाने का अनुरोध किया था। उन्होंने बताया कि विमान को वापस एसेनबोआ की ओर मोड़ दिया गया, जहां उसके उतरने की तैयारी शुरू कर दी गई लेकिन नीचे आते समय विमान रडार से गायब हो गया। इससे पहले अल-हद्दाद ने अंकारा में तुर्किये के रक्षा मंत्री यासार गुलर और अन्य अधिकारियों से मुलाकात की थी। अंकारा का हवाई अड्डा अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है और कई उड़ानों का मार्ग परिवर्तित कर दिया गया है। तुर्किये के न्याय मंत्रालय ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। फेसबुक पर जारी सरकार के एक बयान के अनुसार, लीबिया तुर्किये के अधिकारियों के साथ मिलकर जांच करने के लिए अंकारा में एक दल भेजेगा। - न्यूयॉर्क/वाशिंगटन. ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए ‘रैंडम' लॉटरी प्रणाली को समाप्त करने की घोषणा की है, जिसके तहत वीजा लाभार्थियों का चयन किया जाता था। इसकी जगह अब ऐसी प्रक्रिया लागू की जा रही है, जिसमें अधिक कुशल और अधिक वेतन पाने वाले व्यक्तियों को वीजा आवंटन में प्राथमिकता दी जाएगी। यह नया नियम ऐसे समय में निर्धारित किया गया है जब ट्रंप प्रशासन एच-1बी वीजा समेत कानूनी व अवैध दोनों तरह के वीजा आवेदनों को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है। अमेरिका की कंपनियां एच1बी वीजा के जरिये विदेशी दक्ष व्यक्ति को नौकरी पर रखती हैं। इस वीजा के तहत काम करने वालों में भारतीय पेशेवरों की संख्या सबसे ज़्यादा है। मंगलवार को जारी बयान में अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने कहा कि एच1-बी वीजा की चयन प्रक्रिया में बदलाव किया जा रहा है। अब ज्यादा कुशल और ज्यादा वेतन पाने वाले लोगों को पहले मौका दिया जाएगा। बयान में कहा गया है कि इसका मकसद अमेरिकी कामगारों के वेतन, काम करने की स्थिति और नौकरी के अवसरों की रक्षा करना है। नया नियम 27 फरवरी 2026 से लागू होगा और वित्त वर्ष 2027 की एच-1बी वीज़ा पंजीकरण प्रक्रिया में इस नियम का इस्तेमाल किया जाएगा। बयान में कहा गया है कि इसके तहत वीजा पाने वालों का चयन अब लॉटरी से नहीं होगा, बल्कि अधिक कौशल वाले लोगों को ज्यादा प्राथमिकता दी जाएगी। एजेंसी ने कहा कि एच-1बी वीजा के लिए लॉटरी प्रणाली का काफी दुरुपयोग हो रहा था और कुछ कंपनियां इसका इस्तेमाल कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को रखने के लिए कर रही थीं। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) के प्रवक्ता मैथ्यू ट्रैगेसर ने कहा, “ अमेरिकी नियोक्ताओं मौजूदा लॉटरी प्रणाली का दुरुपयोग कर रहे हैं। वे अमेरिकी कामगारों की तुलना में कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को लाना चाहते थे।” उन्होंने कहा, “नयी चयन प्रक्रिया एच-1बी कार्यक्रम को संसद की मंशा के अनुसार बेहतर बनाएगी और अमेरिकी कंपनियों को अधिक वेतन पाने वाले, अधिक कुशल विदेशी कर्मचारियों को चुनने के लिए प्रोत्साहित करेगी। इससे अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी।
- काठमांडू. नेपाल की प्रधानमंत्री सुशीला कार्की, पूर्व प्रधानमंत्रियों और तीन प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं शेर बहादुर देउबा, के पी शर्मा ओली और पुष्प कमल दहाल ‘‘प्रचंड'' ने पांच मार्च को होने वाले आम चुनाव के लिए "अनुकूल" माहौल बनाने का मंगलवार को संकल्प लिया। आठ और नौ सितंबर के ‘जनरेशन जेड' आंदोलन के परिणामस्वरूप ओली के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार सत्ता से हट गई थी और उसके बाद कार्यवाहक सरकार का गठन हुआ था। सरकार गठन के बाद शीर्ष राजनीतिक नेताओं और प्रधानमंत्री कार्की के बीच यह पहली बैठक थी। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल की पहल पर आयोजित संयुक्त बैठक में हिमालयी देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और आगामी आम चुनाव पर चर्चा हुई। इस बैठक में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री कार्की, पूर्व प्रधानमंत्री एवं नेपाली कांग्रेस अध्यक्ष देउबा, नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) अध्यक्ष एवं पूर्व प्रधानमंत्री ओली तथा पूर्व प्रधानमंत्री एवं नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के समन्वयक ‘प्रचंड' उपस्थित थे। राष्ट्रपति के प्रेस सलाहकार किरण पोखरेल के अनुसार, शीर्ष नेताओं ने आगामी आम चुनाव के लिए अनुकूल माहौल बनाने पर सहमति जतायी। नेपाल के राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, उन्होंने अनुकूल चुनावी माहौल बनाने के लिए गहन चर्चा हेतु जल्द ही प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास पर एक बैठक आयोजित करने पर भी सहमति जतायी। बैठक के दौरान राष्ट्रपति ने कहा कि ‘जनरेशन जेड' आंदोलन के बाद देश में उत्पन्न हुई गंभीर और संवेदनशील स्थिति से निपटने के उपाय के रूप में चुनाव की घोषणा की गई है। उन्होंने कहा, "इसलिए देश की गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए आगामी चुनाव को सफल बनाना हम सभी का कर्तव्य है।"
- वाशिंगटन. अमेरिकी अर्थव्यवस्था इस साल की जुलाई-सितंबर तिमाही में 4.3 प्रतिशत की दर से बढ़ी है, जो जो पिछले दो वर्षों में सबसे तेज वृद्धि है। उपभोक्ता खर्च, सरकारी व्यय और निर्यात में मजबूती के चलते यह वृद्धि अनुमान से कहीं अधिक रही। अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा कि जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि अप्रैल-जून तिमाही के 3.8 प्रतिशत से तेज रही। यह वृद्धि दर विश्लेषकों के अनुमान से तेज रही है। डेटा फर्म फैक्टसेट के सर्वे में इस अवधि के लिए करीब तीन प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया था। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मुद्रास्फीति अभी भी अमेरिकी फेडरल रिजर्व की वांछनीय सीमा से ऊपर बनी हुई है। फेड रिजर्व का पसंदीदा महंगाई संकेतक निजी उपभोग व्यय सूचकांक सितंबर तिमाही में बढ़कर 2.8 प्रतिशत हो गया, जो जून तिमाही में 2.1 प्रतिशत था। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में करीब 70 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला उपभोक्ता व्यय पिछली तिमाही में बढ़कर 3.5 प्रतिशत पर पहुंच गया। वहीं, सरकार का उपभोग और निवेश 2.2 प्रतिशत बढ़ा, जिसे राज्य और स्थानीय स्तर पर खर्च एवं संघीय रक्षा व्यय से समर्थन मिला। इसके उलट पिछली तिमाही में निजी व्यवसाय निवेश में 0.3 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। हालांकि, यह जून तिमाही में आई 13.8 प्रतिशत की तेज गिरावट की तुलना में काफी कम रही। आलोच्य अवधि में अमेरिका के निर्यात में 8.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई जबकि आयात 4.7 प्रतिशत घट गया।रिपोर्ट के अनुसार, अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती दर्शाने वाला एक सूचकांक तीन प्रतिशत की दर से बढ़ा जबकि जून तिमाही में यह 2.9 प्रतिशत बढ़ा था। मुद्रास्फीति के दबाव के बावजूद अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने 2025 के अंत तक लगातार तीन बार ब्याज दरों में कटौती की है जिसके लिए श्रम बाजार में आई कमजोरी एक प्रमुख कारण रही है। पिछले सप्ताह जारी आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर में 64,000 नई नौकरियां जुड़ीं जबकि अक्टूबर में रोजगार में 1.05 लाख की गिरावट दर्ज की गई थी। पिछले महीने बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6 प्रतिशत हो गई, जो 2021 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है।
- बीजिंग. दिल्ली स्थित चीनी दूतावास ने भारतीय पासपोर्ट धारकों को ऑनलाइन वीज़ा आवेदन की सुविधा प्रदान करने के लिए ‘चीन ऑनलाइन वीजा एप्लिकेशन सिस्टम' शुरू किया है। यह जानकारी एक सोशल मीडिया रिपोर्ट में सोमवार को दी गई। शेनझेन स्थित चीनी ऑनलाइन पोर्टल ग्रेटर बे एरिया (जीबीए) के अनुसार, यह प्रक्रिया पिछली प्रक्रिया की तुलना में आसान है, जिसमें आवेदकों को कई कागजी दस्तावेज भौतिक तौर पर प्रस्तुत करने की आवश्यकता होती थी। इससे पहले, भारत में चीनी दूतावास ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट ‘वीचैट' पर घोषणा की थी कि ऑनलाइन वीजा सेवा प्रणाली 22 दिसंबर से शुरू की जाएगी। दूतावास ने कहा था कि चीनी ऑनलाइन वीजा आवेदन प्रणाली को भारत में चीनी दूतावास द्वारा 22 दिसंबर 2025 को आधिकारिक तौर पर शुरू किया जाएगा। उसने कहा कि आवेदक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भरने और आवेदन सामग्री अपलोड कर सकते हैं।जीबीए की रिपोर्ट में कहा गया है कि पात्र आवेदक -- पर्यटक (एल), व्यावसायिक (एम), छात्र (एक्स) और कार्य (जेड) -- वीजा के लिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से फॉर्म भर सकते हैं, दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं और बायोमेट्रिक प्रक्रिया कर सकते हैं। इस महीने की शुरुआत में, भारत ने चीनी पेशेवरों के लिए व्यावसायिक वीजा जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कदम उठाए थे। हालांकि, सभी चीनी वीजा आवेदकों के लिए मौजूदा जांच प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
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ह्यूस्टन (अमेरिका). अमेरिका की बहुराष्ट्रीय कंपनी ‘स्टारबक्स' ने भारतीय मूल के आनंद वरदराजन को अपना नया कार्यकारी उपाध्यक्ष और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (सीटीओ) नियुक्त किया है। करीब दो दशकों तक अमेजन में काम कर चुके वरदराजन को दुनियाभर में कॉफीहाउस श्रृंखला के लिए मशहूर इस कंपनी के वैश्विक प्रौद्योगिकी संचालन की कमान सौंपी गई है। स्टारबक्स के अनुसार, वरदराजन 19 जनवरी से पदभार संभालेंगे, कंपनी की कार्यकारी नेतृत्व टीम में शामिल होंगे और मुख्य कार्यकारी अधिकारी ब्रायन निकोल के मातहत काम करेंगे। वह डेब हॉल लेफेवर का स्थान लेंगे, जो सितंबर में सेवानिवृत्त हुई थीं। अमेजन में अपने लगभग 19 वर्षों के कार्यकाल के दौरान वरदराजन ने बड़े पैमाने पर ग्राहक-केंद्रित प्रौद्योगिकी मंच विकसित किए। हाल के वर्षों में वह अमेजन के ‘वर्ल्डवाइड ग्रॉसरी स्टोर' कारोबार के लिए प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखला की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इससे पहले उन्होंने अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनी ‘ओरेकल' में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में और कई स्टार्टअप के साथ भी काम किया। स्टारबक्स ने कहा कि वरदराजन को सुरक्षित और भरोसेमंद प्रणालियां विकसित करने तथा परिचालन उत्कृष्टता के लिए प्रौद्योगिकी को बड़े पैमाने पर लागू करने का गहरा अनुभव है, जिसमें ग्राहकों को केंद्र में रखा जाता है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के पूर्व छात्र वरदराजन ने पर्ड्यू विश्वविद्यालय से सिविल इंजीनियरिंग में परास्नातक डिग्री और वाशिंगटन विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस में परास्नातक डिग्री हासिल की है।
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जकार्ता। इंडोनेशिया के मुख्य द्वीप जावा में एक यात्री बस के रविवार देर रात दुर्घटनाग्रस्त होने से कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी है। खोज और बचाव एजेंसी के प्रमुख बुडियोनो ने बताया कि 34 लोगों को ले जा रही बस टोल रोड पर नियंत्रण खो बैठी और कंक्रीट के एक अवरोधक से टकराने के बाद पलट गई। उन्होंने बताया कि अंतर-प्रांतीय बस राजधानी जकार्ता से देश के प्राचीन शाही शहर योग्याकार्ता जा रही थी तभी यह हादसा हुआ।
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लंदन । प्रिंस विलियम और उनके सबसे बड़े बेटे प्रिंस जॉर्ज बेघर लोगों के आश्रय स्थल पर पहुंचे और वहां एप्रन पहनकर क्रिसमस का दोपहर का भोजन बनाने में मदद की। इस आश्रय स्थल में प्रिंस ऑफ वेल्स पहली बार बचपन में अपनी मां (दिवंगत राजकुमारी डायना) के साथ गए थे। शनिवार को विलियम के यूट्यूब अकाउंट पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में पिता-पुत्र मध्य लंदन के ‘द पैसेज' स्थित रसोई में क्रिसमस ट्री सजाते और भोजन तैयार करने में मदद करते देखे गए। विलियम और उनकी पत्नी (राजकुमारी कैथरीन) ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, ‘‘क्रिसमस के दोपहर का भोजन तैयार करने में ‘द पैसेज' के स्वयंसेवकों और कर्मचारियों के साथ जुड़कर गर्व महसूस हो रहा है, इस साल मदद करने के लिए एक जोड़ा हाथ और साथ हैं।'' विलियम ‘द पैसेज' के शाही संरक्षक हैं और वह यहां पहली बार 11 साल की उम्र में अपनी मां डायना के साथ गए थे। राजगद्दी के उत्तराधिकारी ने हाल के वर्षों में इस आश्रय स्थल का दौरा किया है, लेकिन यह पहली बार है जब 12 वर्षीय जॉर्ज उनके साथ गए।










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