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नयी दिल्ली. रूस से भारत का कच्चे तेल का आयात मार्च में बढ़कर 16.4 लाख बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) की नई ऊंचाई पर पहुंच गया। इस तरह रूस से भारत का तेल आयात इराक की तुलना में दोगुना हो गया है। ऊर्जा की खेप पर निगाह रखने वाली वॉर्टेक्सा के अनुसार, रूस लगातार छठे महीने भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। भारत के कच्चे तेल के आयात में रूस का हिस्सा एक-तिहाई से अधिक है। कच्चे तेल को रिफाइनरी इकाइयों में पेट्रोल और डीजल में बदला जाता है।
रिफाइनरी कंपनियां अन्य ग्रेड की तुलना में रियायती मूल्य पर उपलब्ध रूसी तेल खरीद कर रही हैं। फरवरी, 2022 में रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने से पहले भारत के कच्चे तेल के आयात में रूस की बाजार हिस्सेदारी एक प्रतिशत से भी कम थी। मार्च में रूस से भारत का कच्चे तेल आयात बढ़कर 16.4 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया। भारत के आयात में रूस की हिस्सेदारी 34 प्रतिशत हो गई है। मार्च में भारत की रूस से कच्चे तेल की खरीद इराक से दोगुना रही है। इस दौरान इराक से कच्चे तेल का आयात 8.1 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक रहा है। इराक 2017-18 से भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता था। चीन और अमेरिका के बाद भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है। यूक्रेन पर हमले के बाद पश्चिम ने रूस पर प्रतिबंध लगाए हैं। ऐसे में रूसी कच्चा तेल रियायती मूल्य पर उपलब्ध है और भारत इसकी जमकर खरीद कर रहा है। वॉर्टेक्सा के अनुसार, मार्च में सऊदी अरब 9.86 लाख बैरल प्रतिदिन के साथ भारत का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता था। वहीं इराक 8.21 लाख बैरल प्रतिदिन की आपूर्ति के साथ तीसरे नंबर पर था। मार्च में संयुक्त अरब अमीरात 3.13 लाख बैरल प्रतिदिन के साथ भारत का चौथा सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया। इसने अमेरिका को पीछे छोड़ा। अमेरिका ने मार्च में भारत को 1.36 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल की आपूर्ति की। फरवरी में अमेरिका से भारत का आयात 2.48 लाख बैरल प्रतिदिन था। -
नयी दिल्ली. देश का सोने का आयात बीते वित्त वर्ष के पहले 11 माह (अप्रैल-फरवरी, 2023) के दौरान करीब 30 प्रतिशत घटकर 31.8 अरब डॉलर रह गया। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। सीमा शुल्क की ऊंची दरों तथा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सोने का आयात घटा है। उल्लेखनीय है कि सोने का आयात देश के चालू खाते के घाटे (कैड) को प्रभावित करता है। वित्त वर्ष 2021-22 की समान अवधि में पीली धातु का आयात 45.2 अरब डॉलर रहा था। अगस्त, 2022 से सोने का आयात लगातार नकारात्मक बना हुआ है। हालांकि, बीते वित्त वर्ष के पहले 11 माह में चांदी का आयात 66 प्रतिशत बढ़कर 5.3 अरब डॉलर हो गया।
सोने के आयात में भारी गिरावट के बावजूद देश के व्यापार घाटे को कम करने में मदद नहीं मिली है। आयात और निर्यात का अंतर व्यापार घाटा कहलाता है। अप्रैल-फरवरी, 2022-23 में व्यापार घाटा 247.52 अरब डॉलर पर पहुंचने का अनुमान है। इससे पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 172.53 अरब डॉलर था। उद्योग के विशेषज्ञों के अनुसार, सोने पर ऊंचे आयात शुल्क और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं की वजह से इसके आयात में गिरावट आई है। रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्द्धन परिषद (जीजेईपीसी) के पूर्व चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक कोलिन शाह ने कहा, ‘‘भारत ने अप्रैल-जनवरी, 2023 के दौरान लगभग 600 टन सोने का आयात किया है। ऊंचे आयात शुल्क की वजह से इसमें गिरावट आई है। सरकार को घरेलू उद्योग की मदद करने और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए शुल्क के हिस्से पर विचार करना चाहिए।'' मात्रा के लिहाज से देखा जाए तो देश सालाना 800-900 टन सोने का आयात करता है।
पिछले वित्त वर्ष के 11 माह के दौरान रत्न एवं आभूषण निर्यात 0.3 प्रतिशत घटकर 35.2 अरब डॉलर रह गया। कैड पर काबू के लिए सरकार ने पिछले साल सोने पर आयात शुल्क 10.75 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था। -
नयी दिल्ली. देश की सबसे बड़ी गैस कंपनी गेल (इंडिया) लिमिटेड की शहर गैस वितरण इकाई गेल गैस लिमिटेड ने गैस की मूल्य लागत में कमी के बाद रविवार को सीएनजी और पाइप वाली रसोई गैस (पीएनजी) की कीमतों में सात रुपये तक की कटौती की है। गेल गैस ने बेंगलुरु और दक्षिण कन्नड़ में पीएनजी गैस की कीमत सात रुपये प्रति मानक घनमीटर (एससीएम) घटाई है। वहीं कंपनी ने अपने परिचालन वाले अन्य शहरों में पीएनजी का दाम छह रुपये प्रति इकाई घटाया है। कंपनी ने बयान में कहा कि उसने कर्नाटक में वाहन ईंधन के रूप में इस्तेमाल की जाने वाली सीएनजी के दाम सात रुपये प्रति किलोग्राम घटाए हैं। अन्य क्षेत्रों में सीएनजी का दाम छह रुपये प्रति किलोग्राम कम किया गया है। बयान में कहा गया है, ‘‘गेल गैस लिमिटेड ने अपने ग्राहकों को नए घरेलू गैस मूल्य निर्धारण का लाभ देने के लिए नौ अप्रैल से कीमतों में उल्लेखनीय रूप से कटौती की घोषणा की है।'' देवास, मेरठ, सोनीपत, ताज ट्रेपेजियम क्षेत्र, रायसेन, मिर्जापुर, धनबाद, आदित्यपुर और राउरकेला में पीएनजी की नई दर 52.50 रुपये प्रति इकाई (एससीएम) होगी। बेंगलुरु और दक्षिण कन्नड़ के लिए यह 51.50 रुपये प्रति इकाई है। इसी तरह मेरठ और सोनीपत के लिए सीएनजी की नई कीमत 85 रुपये प्रति किलोग्राम है। देवास, ताज ट्रेपेज़ियम क्षेत्र और देहरादून के लिए यह 92 रुपये प्रति किलो; बेंगलुरु और दक्षिण कन्नड़ के लिए 82.50 रुपये प्रति किलो; मिर्जापुर के लिए 87 रुपये प्रति किलोग्राम, रायसेन, धनबाद, आदित्यपुर, पुरी और राउरकेला के लिए 91 रुपये प्रति किलोग्राम होगी। कंपनी ने सरकार द्वारा प्राकृतिक गैस के मूल्य निर्धारण के फार्मूले को संशोधन के बाद यह कदम उठाया है। संशोधित फॉर्मूले और मूल्य की सीमा की वजह से प्राकृतिक गैस की कीमत 8.57 डॉलर से घटाकर 6.5 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट कर दी गई है। प्राकृतिक गैस को ही वाहन के लिए सीएनजी ईंधन और रसोई में खाना पकाने वाली पीएनजी में बदला जाता है।
- नयी दिल्ली । छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में लगातार तीन बार बढ़ोतरी होने से डाकघर की सावधि जमा एक बार फिर बैंक एफडी के मुकाबले में खड़ी हो गई हैं।लघु बचत योजनाओं के तहत डाकघर में दो साल की सावधि जमा पर 6.9 प्रतिशत ब्याज मिल रहा है जो अधिकांश बैंकों की तरफ से समान परिपक्वता अवधि वाली जमाओं पर दी जाने वाली दर के बराबर हैरिजर्व बैंक ने मई, 2022 में रेपो दर में वृद्धि का सिलसिला शुरू किया था और तब से यह चार प्रतिशत से बढ़कर 6.50 प्रतिशत हो चुकी है। इसका असर यह हुआ कि पिछले वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में बैंकों ने अधिक वित्त जुटाने के लिए खुदरा जमाओं पर ज्यादा ब्याज देना शुरू कर दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि मई, 2022 से फरवरी, 2023 के दौरान बैंकों की नई जमाओं पर भारित औसत घरेलू सावधि जमा दर (डब्ल्यूएडीटीडीआर) 2.22 प्रतिशत तक बढ़ गई। वहीं, वित्त वर्ष 2022-23 की पहली छमाही में बैंकों का जोर थोक जमाओं पर अधिक था। लेकिन दूसरी छमाही में उनकी प्राथमिकता बदली और खुदरा जमा जुटाने पर उन्होंने अधिक ध्यान दिया। ब्याज दरों में बढ़ोतरी करना इसी का हिस्सा रहा।सरकार ने लघु बचत योजनाओं (एसएसआई) के लिए ब्याज दरें अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए 0.1-0.3 प्रतिशत, जनवरी-मार्च तिमाही के लिए 0.2-1.1 प्रतिशत और अप्रैल-जून 2023 तिमाही के लिए 0.1-0.7 प्रतिशत तक बढ़ा दीं। इसके पहले लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरें लगातार नौ तिमाहियों से अपरिवर्तित बनी हुई थीं। वित्त वर्ष 2020-21 की दूसरी तिमाही से 2022-23 की दूसरी तिमाही तक इनमें कोई बढ़ोतरी नहीं की गई थी। लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरों का निर्णय सरकार करती है। इनका निर्धारण तुलनीय परिपक्वता वाली सरकारी प्रतिभूतियों पर मिलने वाले प्रतिफल से जुड़ा होता है। रिजर्व बैंक ने कहा, ‘‘बैंकों की सावधि जमा दरें अब डाकघर सावधि जमा दरों की तुलना में प्रतिस्पर्धी रूप से निर्धारित हैं।’’ रिजर्व बैंक के मुताबिक, एक से दो साल की परिपक्वता वाली बैंक खुदरा जमा पर डब्ल्यूएडीटीडीआर फरवरी, 2023 में 6.9 प्रतिशत हो गया जबकि सितंबर, 2022 में यह 5.8 प्रतिशत और मार्च, 2022 में 5.2 प्रतिशत था।लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दर लगातार तीन बार बढ़ने के बाद द्विवर्षीय डाकघर सावधि जमा पर अब 6.9 प्रतिशत का रिटर्न मिल रहा है। यह दर सितंबर, 2022 में 5.5 प्रतिशत थी।देश का सबसे बड़ा बैंक एसबीआई एक साल से अधिक और दो साल से कम की जमा पर 6.8 प्रतिशत ब्याज दे रहा है। वहीं दो साल से अधिक और तीन साल से कम की जमा पर एसबीआई की ब्याज दर सात प्रतिशत है। बैंकों ने मई, 2022-मार्च, 2023 के दौरान नीतिगत रेपो दर में हुई वृद्धि के अनुरूप अपनी बाहरी बेंचमार्क-आधारित ऋण दरों (ईबीएलआर) में 2.50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है। इस दौरान ऋण मूल्य निर्धारण के आंतरिक मानक एमसीएलआर में 1.40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
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नयी दिल्ली. अडाणी समूह की गैस वितरण कंपनी अडाणी टोटल गैस लिमिटेड (एटीजीएल) ने शनिवार को सीएनजी की कीमत में 8.13 रुपये प्रति किलोग्राम और पाइपलाइन गैस की कीमत में 5.06 रुपये प्रति घन मीटर की कटौती करने की घोषणा की। यह बदलाव सरकार द्वारा प्राकृतिक गैस की कीमत तय करने का नया फॉर्मूला लागू करने के बाद किया गया है। प्राकृतिक गैस को मोटर वाहन चलाने के लिए सीएनजी में जबकि खाना पकाने के लिए घरेलू रसोई गैस में बदला जाता है। अडाणी टोटल गैस ने एक बयान में कहा कि पाइपलाइन से आपूर्ति की जाने वाली रसोई गैस (पीएनजी) की कीमतें अहमदाबाद, वडोदरा एवं गुजरात के अन्य शहरों में घटा दी गई हैं। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के खुर्जा और हरियाणा के फरीदाबाद और पलवल में भी पीएनजी की कीमतें कम हो गई हैं। कंपनी ने अपने परिचालन वाले 21 शहरों में सीएनजी की कीमतें भी घटा दी हैं। इनमें गुजरात में वडोदरा से लेकर तमिलनाडु में कुड्डलोर, राजस्थान में उदयपुर और मध्य प्रदेश में भिंड तक शामिल हैं। शनिवार से एटीजीएल ने सीएनजी की कीमतें 8.13 रुपये प्रति किलोग्राम तक जबकि पीएनजी की कीमतें 5.06 रुपये प्रति मानक घन मीटर तक कम कर दी हैं। एटीजीएल ने कहा कि उसने प्राकृतिक गैस की घटी हुई कीमतों का लाभ उपभोक्ताओं को देने का निर्णय लिया है। उसने कहा, “अडाणी टोटल गैस लिमिटेड भारत सरकार के इस ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत करती है।
- नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बृहस्पतिवार को प्राकृतिक गैस की कीमत तय करने के लिए नए फॉर्मूले को मंजूरी दी। इसके साथ ही सीएनजी और पाइप से आपूर्ति की जाने वाली रसोई गैस की कीमतों पर अधिकतम सीमा भी तय की गई है, जिससे इनकी कीमतें 10 प्रतिशत तक घटेंगी। सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडल ने एपीएम गैस के लिए चार डॉलर प्रति एमएमबीटीयू के आधार मूल्य को मंजूरी दी है और अधिकतम मूल्य 6.5 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू रखने पर मुहर लगाई है। उन्होंने बताया कि एपीएम गैस के रूप में जानी जाने वाली पारंपरिक या पुराने क्षेत्रों से उत्पादित प्राकृतिक गैस को अब अमेरिका, कनाडा और रूस जैसे अधिशेष देशों की तरह कच्चे तेल की कीमतों से जोड़ा जाएगा। पहले इनका मूल्य निर्धारण गैस कीमतों के आधार पर होता था। इस फैसले के बाद एक अप्रैल से एपीएम गैस की कीमत भारतीय बास्केट में कच्चे तेल के दाम का 10 प्रतिशत होगी। हालांकि, यह कीमत 6.5 डॉलर प्रति दस लाख ब्रिटिश ताप इकाई (एमएमबीटीयू) से अधिक नहीं होगी। मौजूदा गैस कीमत 8.57 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू है। उन्होंने बताया कि कीमतों का निर्धारण प्रत्येक महीने होगा, जबकि अब तक इनकी साल में दो बार समीक्षा की जाती थी। उन्होंने कहा कि पाइपलाइन वाली रसोई गैस (पीएनजी) की कीमतों में 10 प्रतिशत तक की कटौती की जाएगी, जबकि सीएनजी में थोड़ी कम कमी होगी। पीएनजी और सीएनजी की दरें अगस्त 2022 तक एक साल में 80 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। इनकी कीमतें अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों के आधार पर तय होती हैं। इस फैसले के बाद दिल्ली में सीएनजी की कीमत 79.56 रुपये प्रति किलो से घटकर 73.59 रुपये प्रति किलो और पीएनजी की कीमत 53.59 रुपये प्रति हजार घन मीटर से घटकर 47.59 रुपये प्रति हजार घन मीटर हो जाएगी। मुंबई में सीएनजी की कीमत 87 रुपये की जगह 79 रुपये प्रति किलोग्राम और पीएनजी की कीमत 54 रुपये की जगह 49 रुपये प्रति हजार घन मीटर होगी। भारतीय बास्केट में कच्चे तेल के दाम इस समय 85 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल है और इसका 10 प्रतिशत 8.5 अमेरिकी डॉलर है। हालांकि, मूल्य सीमा के चलते एपीएम गैस के लिए ओएनजीसी और ऑयल इंडिया लिमिटेड को केवल 6.5 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू कीमत मिलेगी। मंत्री ने कहा कि ये मूल्य सीमा दो साल के लिए होगी और उसके बाद हर साल 0.25 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू की दर से बढ़ोतरी होगी। गैस मूल्य निर्धारण फॉर्मूले में बदलाव किरीट पारिख की अगुवाई में गठित एक समिति की सिफारिशों पर आधारित हैं।
- मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ऋण स्वीकृत करते समय ब्याज दरों के खुलासे संबंधी नियमों का पालन नहीं करने के मामले में महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड पर 6.77 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। यहां गुरुवार को जारी एक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई। एक अन्य विज्ञप्ति में आरबीआई ने कहा कि ‘अपने ग्राहक को जानिए' (केवाईसी) के कुछ मानदंडों का उल्लंघन करने पर इंडियन बैंक पर 55 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। एनबीएफसी (रिजर्व बैंक) दिशा-निर्देशों में धोखाधड़ी की निगरानी, 2016 के कुछ प्रावधानों का पालन नहीं करने पर एर्नाकुलम स्थित मुथूट मनी लिमिटेड पर भी 10.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। रिजर्व बैंक ने कहा कि जुर्माना विनियामक अनुपालन में कमियों पर आधारित हैं और ग्राहकों के साथ उनके द्वारा किए गए किसी भी लेनदेन या समझौते की वैधता से इसका संबंध नहीं है। आरबीआई ने कहा कि महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज का वैधानिक निरीक्षण 31 मार्च, 2019 और 31 मार्च, 2020 तक इसकी वित्तीय स्थिति के संदर्भ में किया गया है।
- नयी दिल्ली । अडाणी समूह की खाद्य तेल और अन्य खाद्य कारोबार से जुड़ी कंपनी अडाणी विल्मर ने गुरुवार को कहा कि पिछले वित्त वर्ष यानी 2022-23 में उसकी बिक्री करीब 14 प्रतिशत बढ़ने से उसका राजस्व 55,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया। अडाणी विल्मर की एक साल पहले कुल आय 54,327.16 करोड़ रुपये रही थी।कंपनी ने शेयर बाजारों को दी गई एक सूचना में कहा, ‘‘कंपनी की हाल ही में समाप्त वित्त वर्ष में बिक्री सालाना आधार पर बढ़कर 14 प्रतिशत रही। बिक्री में वृद्धि ने इसके राजस्व को इस वर्ष 55,000 करोड़ रुपये के पार पहुंचाने में मदद की।'' बयान के मुताबिक, कंपनी ने अपने परिचालन को बढ़ाने और खाद्य उत्पादों में बाजार हिस्सेदारी हासिल करने में अच्छी प्रगति की है। कंपनी ने कहा, ‘‘हमने वित्त वर्ष 2022-23 का अंत खाद्य और रोजमर्रा के उपयोग वाली वस्तुओं (एफएमसीजी) की श्रेणी में लगभग 3,800 करोड़ रुपये के राजस्व के साथ किया। इस तरह मात्रा के मामले में हमने सालाना आधार पर लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जबकि राजस्व के मामले में 55 प्रतिशत बढ़त हासिल की।'' अडाणी विल्मर ने कहा कि आयातित खाद्य तेलों की आपूर्ति वर्ष के पहले भाग की तुलना में चौथी तिमाही के दौरान सुचारू रही है। अडाणी विल्मर, भारत के अडाणी समूह और सिंगापुर के विल्मर समूह का एक संयुक्त उद्यम है। यह भारत में सबसे बड़ी उपभोक्ता खाद्य एफएमसीजी कंपनियों में से एक है।
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मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक ने अर्थव्यवस्था में जारी पुनरुद्धार को और गति देने के लिये बृहस्पतिवार को नीतिगत दर रेपो में और वृद्धि नहीं की और इसे 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। साथ ही केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया है। वहीं चालू वित्त वर्ष में मुद्रास्फीति 5.2 प्रतिशत रहने का अनुमान रखा गया है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में मुद्रास्फीति 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की सोमवार से शुरू हुई तीन दिन की बैठक में लिए गए निर्णय की जानकारी देते हुए आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, ‘‘एमपीसी ने अर्थव्यवस्था में जारी पुनरुद्धार को बरकरार रखने तथा उसे और गति देने के लिये आम सहमति से नीतिगत दर को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखने का निर्णय किया है।'' रेपो दर वह ब्याज दर है, जिसपर वाणिज्यिक बैंक अपनी फौरी जरूरतों को पूरा करने के लिये केंद्रीय बैंक से कर्ज लेते हैं। इससे पहले, आरबीआई मुख्य रूप से मुद्रास्फीति को काबू में लाने के लिये पिछले साल मई से लेकर कुल छह बार में रेपो दर में 2.50 प्रतिशत की वृद्धि कर चुका है। - कोलकाता । बंधन बैंक का कुल जमा पिछले वित्त वर्ष यानी 2022-23 की चौथी मार्च तिमाही में 12.2 प्रतिशत बढ़कर 1,08,069 करोड़ रुपये रहा। बैंक ने बुधवार को बयान में कहा कि 31 मार्च को समाप्त तिमाही के दौरान उसका ऋण या अग्रिम सालाना आधार पर 9.8 प्रतिशत बढ़कर 1,09,112 करोड़ रुपये रहा। कोलकाता के इस बैंक ने कहा कि उसका चालू खाता, बचत खाता (कासा) मार्च तिमाही में छह प्रतिशत की वृद्धि के साथ 42,471 करोड़ रुपये रहा। वहीं इस दौरान उसकी थोक जमा 42.2 प्रतिशत बढ़कर 31,125 करोड़ रुपये हो गई। वित्त वर्ष 2021-22 की चौथी तिमाही में यह 21,890 करोड़ रुपये रही थी।
- नयी दिल्ली । विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) ने बुधवार को कहा कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताओं के बीच विश्व व्यापार में वृद्धि 2023 में मामूली 1.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में 1.7 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान पिछले साल अक्टूबर में जताये गये एक प्रतिशत के अनुमान से ज्यादा है। डब्ल्यूटीओ ने कहा कि 2024 में व्यापार में तेजी आने और इसमें 3.2 प्रतिशत की अच्छी वृद्धि का अनुमान है। हालांकि, उसने कहा कि वैश्विक स्तर पर जारी तनाव, खाद्य आपूर्ति समस्याएं और मौद्रिक नीति को कड़ा किये जाने से उत्पन्न प्रभाव को देखते हुए अनुमान ज्यादा अनिश्चित है और इसके नीचे जाने का जोखिम है। पिछली गिरावट के बाद से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुमान में मामूली वृद्धि के बावजूद 2023 में वैश्विक व्यापार में वृद्धि का अनुमान अब भी कम है। डब्ल्यूटीओ ने बयान में कहा, ‘‘यूक्रेन में युद्ध के प्रभाव, उच्च मुद्रास्फीति जारी रहने, सख्त मौद्रिक नीति और वित्तीय बाजार में अनिश्चितता को देखते हुए 2022 में 2.7 प्रतिशत की वृद्धि के बाद, इस वर्ष वैश्विक स्तर पर वस्तु व्यापार की मात्रा 1.7 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है।'' विश्व व्यापार संगठन की महानिदेशक नगोजी ओकोन्जो-इवेला ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में मजबूती के लिये व्यापार लगातार एक ताकत बना हुआ है। लेकिन 2023 में इसपर दबाव होगा। उन्होंने कहा कि यह विभिन्न सरकारों के लिये व्यापार में बाधाओं को पेश करने से बचने की जरूरत को बताता है। बीते वर्ष व्यापार मात्रा में 2.7 प्रतिशत की वृद्धि डब्ल्यूटीओ के अक्टूबर, 2022 के 3.5 प्रतिशत के अनुमान से कम है।
- नयी दिल्ली। देश के सात प्रमुख शहरों में जनवरी-मार्च तिमाही में घरों की बिक्री 20 प्रतिशत बढ़कर 62,040 इकाई रही है। यह पिछले 15 साल में तिमाही बिक्री का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। रियल एस्टेट सलाहकार जेएलएल इंडिया ने बुधवार को यह जानकारी दी। आंकड़ों में केवल घरों की बिक्री शामिल है।जेएलएल इंडिया ने बयान में कहा, ‘‘भारतीय आवास बाजार में सरकार की नीतियों, बुनियादी ढांचे के विकास और मजबूत पेशकशों से इस वर्ष यानी 2023 की पहली तिमाही में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई।'' देश के शीर्ष सात शहरों में जनवरी-मार्च तिमाही के दौरान आवासीय इकाइयों की बिक्री पिछली तिमाही की तुलना में 15 प्रतिशत और जनवरी-मार्च, 2022 की तुलना में 20 प्रतिशत बढ़ी है। इस दौरान 62,000 से अधिक इकाइयां बेची गईं। जेएलएल ने कहा, ‘‘यह पिछले 15 साल में सबसे अधिक तिमाही बिक्री रही। यह उपभोक्ता विश्वास में वृद्धि का संकेत है।'' परामर्शक कंपनी ने कहा कि लोगों के लिए 10 महीने पहले तक घर खरीदना आसान था। लेकिन अब चीजें कठिन हैं क्योंकि आवास ऋण पर ब्याज दरें बढ़ गई हैं। वहीं, शीर्ष सात शहरों में घरों की कीमतें पिछले साल की तुलना में चार से 12 प्रतिशत बढ़ी हैं।
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नयी दिल्ली। इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हरित इस्पात उत्पादन से संबद्ध विभिन्न पहलुओं को लेकर उपायों की पहचान करने और पर्यावरण अनुकूल विनिर्माण प्रक्रिया अपनाने के लिये 13 कार्यबलों के गठन को मंजूरी दी है। मंत्री ने कहा कि ये कार्यबल कच्चे माल, प्रौद्योगिकी और नीतिगत पहल सहित हरित इस्पात उत्पादन के विभिन्न पहलुओं पर गौर करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘हम भारत में पर्यावरण अनुकूल तरीके से इस्पात विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिये प्रतिबद्ध हैं। कार्यबलों की स्थापना इस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।'' सिंधिया के हवाले से आधिकारिक बयान में कहा गया है, ‘‘हमारा मानना है कि हरित इस्पात उत्पादन को अपनाने से न केवल पर्यावरण को लाभ होगा बल्कि नये रोजगार सृजित होंगे और आर्थिक वृद्धि को गति मिलेगी।'' कार्यबल में इस्पात उद्योग से जुड़े विभिन्न पक्ष, शिक्षाविद और सरकारी अधिकारी शामिल होंगे।
मंत्री ने यह भी कहा कि इस्पात उत्पादकों को अपनी कोयले की अशुद्धता दूर करने की इकाइयों (वॉशरीज) की क्षमता बढ़ाने की जरूरत है ताकि कोयले के लिये आयात पर निर्भरता कम की जा सके। उन्होंने कंपनियों को कोयले के आयात के लिये नये स्रोतों की संभावना तलाशने का भी सुझाव दिया। - नई दिल्ली। विश्व बैंक ने कहा है कि वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान मुद्रास्फीति इससे पिछले वित्त वर्ष के छह दशमलव छह प्रतिशत की तुलना में घट कर पांच दशमलव दो प्रतिशत पर आ जाएगी। विश्व बैंक ने अपनी एक रिपोर्ट में यह अनुमान भी व्यक्त किया है कि वर्तमान वित्त वर्ष में देश का चालू खाता घाटा भी इससे पूर्व वित्त वर्ष के लिए अनुमानित तीन प्रतिशत से घटकर सकल घरेलू उत्पाद के दो दशमलव एक प्रतिशत पर आ जाएगा।गौरतलब है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने मई 2022 से लेकर अब तक मुद्रास्फीति घटाने के उपायों के तहत ब्याज दर में दो सौ पचास आधार अंकों की बढोत्तरी की है। हालांकि विश्व बैंक की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बढी ब्याज दर से ऋण लागत ऊंची होगी और घरेलू उपभोक्ता खपत कम हो सकती है जिसका असर सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर में कमी के रूप में दिख सकता है। विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2023-34 के लिए जीडीपी वृद्धि दर में संशोधन करते हुए छह दशमलव तीन प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है जो भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा पूर्वानुमान छह दशमलव चार प्रतिशत के नजदीक है।वैश्विक और घरेलू कारणों से उत्पन्न चुनौतियों के मद्देनजर एशियाई विकास बैंक ने भी इस अवधि के दौरान भारत में सकल उत्पादन वृद्धि दर छह दशमलव चार प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है।वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार अमरीका और यूरोप के वित्तीय बाजारों में ताजा ऊथल-पुथल से भारत में लघु अवधि निवेश प्रवाह में चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं लेकिन भारतीय सेवा क्षेत्र का उछाल बाहरी आशंकाओं से ढाल की तरह काम आ सकता है।
- नई दिल्ली। सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्विटर ने अपने लोगो को बदल दिया है। ट्विटर की ब्लू बर्ड की जगह अब डॉग ने ले ली है। ये डॉग सोशल मीडिया का हीरो है।ट्विटर के मालिक एलन मस्क ने देर रात एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने ट्विटर की ब्लू चिडिय़ा की फोटो की जगह अपने चेहेते डॉग की फोटो शेयर की। इस तरह से ट्विटर में अचानक बदलाव हो गया और ब्लू बर्ड की जगह अब 'डोज़' ने ले लिया है। ये एक 'डोज डॉग है। इसका असली नाम काबोसु है, जिसकी उम्र 17 साल है। ये जापान में पाई जाने वाले शीबा इनु ब्रीड की नस्ल है।2008 में काबोसु जब बेघर हो गई, तब उसे एक शिक्षिका अतसुको सातो ने गोद ले लिया और इसे काबोसु नाम दिया। सातो ने काबोसु की एक फोटो शेयर की, जो काफी पसंद की गई। फिर काबोसु की फोटो को कई ब्रांडस ने इस्तेमाल किया। 2013 में दो प्रोग्रामर्स ने अपनी ऑल्टरनेटिव क्रिप्टोकरेंसी का नाम इसके नाम पर रख दिया। डॉगकॉइन का नाम और इसके लोगो में काबोसु की तस्वीर इस्तेमाल की जाने लगी। 2014 में इसकी कीमत 400 डॉलर के ऊपर पहुंच गई थी। इसके बाद शीबा इनू नाम से भी एक मीम क्रिप्टोकरेंसी बनी थी, जिसमें भी काबोसु की तस्वीर इस्तेमाल हुई।फिर एलन मस्क भी डॉगकॉइन के फैन रहे हैं। मस्क ने 'डोज़ 1 नाम की सैटेलाइट लॉन्च करने की बात कही। उन्होंने कहा कि डोज़ कॉइन से टेस्ला कार खरीद सकेंगे। अब उन्होंने अपने वादे को निभाते हुए ट्विटर के लोगो को बदलकर डोज कर दिया है।
- नयी दिल्ली। भारत की जीडीपी वृद्धि 2023-24 में खपत में कमी आने की वजह से धीमी पड़कर 6.3 प्रतिशत पर आ सकती है जो पहले के 6.6 प्रतिशत के अनुमान से कम है। विश्व बैंक ने मंगलवार को एक रिपोर्ट में यह कहा। विश्व बैंक ने भारत की वृद्धि के अपने ताजा अनुमान में कहा कि खपत में धीमी बढ़ोतरी होने और चुनौतीपूर्ण बाहरी परिस्थितियों की वजह से वृद्धि बाधित हो सकती है। इसमें कहा गया, ‘‘आय में धीमी वृद्धि और कर्ज के महंगा होने का असर निजी उपभोग की वृद्धि पर पड़ेगा। महामारी से संबंधित वित्तीय समर्थन के कदमों को वापस लेने की वजह से सरकारी खपत की रफ्तार भी कम रहने का अनुमान है।’’रिपोर्ट में कहा गया कि चालू खाता घाटा 2023-24 में कम होकर 2.1 प्रतिशत पर आ सकता है, जो तीन प्रतिशत था। मुद्रास्फीति के बारे में अनुमान जताया गया है कि यह 6.6 प्रतिशत से घटकर 5.2 प्रतिशत पर आ सकती है।
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नयी दिल्ली. बीते वित्त वर्ष 2022-23 में शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह संशोधित बजट अनुमान से अधिक यानी 16.61 लाख करोड़ रुपये रहा है। वित्त मंत्रालय ने सोमवार को वित्त वर्ष 2022-23 के लिए कर संग्रह के अस्थायी आंकड़े जारी करते हुए कहा कि हाल ही में समाप्त वित्त वर्ष में प्रत्यक्ष कर संग्रह 16.61 लाख करोड़ रुपये रहा है, जबकि इसका बजट अनुमान 14.20 लाख करोड़ रुपये था। बजट अनुमान को बाद में संशोधित कर 16.50 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया था। इस तरह शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह संशोधित अनुमान से 0.69 प्रतिशत अधिक रहा। वित्त वर्ष 2021-22 की तुलना में शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 17.63 प्रतिशत बढ़ा है। एक साल पहले यह 14.12 लाख करोड़ रुपये था। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, वित्त वर्ष 2022-23 में सकल कॉरपोरेट कर संग्रह एक साल पहले की तुलना में 16.91 प्रतिशत बढ़कर 10.04 लाख करोड़ रुपये हो गया। समाप्त वित्त वर्ष में सकल व्यक्तिगत आयकर संग्रह (एसटीटी समेत) 9.60 लाख करोड़ रुपये रहा। इस तरह इसमें वित्त वर्ष 2021-22 के 7.73 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 24.23 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2022-23 में 3,07,352 करोड़ रुपये का रिफंड भी जारी किया गया जो एक साल पहले के 2,23,658 करोड़ रुपये की तुलना में 37.42 प्रतिशत अधिक है।
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मुंबई. बैंकों की सकल गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में घटकर दशक के निचले स्तर 3.8 प्रतिशत पर आ जाएंगी। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने सोमवार को यह बात कही। रेटिंग एजेंसी का अनुमान है कि हाल में खत्म हुए वित्त वर्ष 2022-23 के अंत में एनपीए घटकर 4.2 प्रतिशत रह जाएगा। इससे एक साल पहले यह आंकड़ा 5.9 प्रतिशत था। इससे पहले अनुमान जताया गया था कि 2023-24 के अंत में एनपीए चार प्रतिशत रहेगा। क्रिसिल ने कहा कि बैंक एनपीए में कमी की एक बड़ी वजह अधिक मूल्य वाले कॉरपोरेट ऋण में सुधार है। इस खंड में सकल एनपीए दो प्रतिशत से कम रह गया है। कॉरपोरेट कई उपायों के जरिये अपने कर्ज में कमी कर रहे हैं। इसके अलावा मजबूत जोखिम प्रबंधन और जांच-पड़ताल से भी बैंकों को एनपीए कम करने में मदद मिली है।
खुदरा खंड में असुरक्षित ऋण को बट्टे खाते में डालने के बारे में पूछने पर एजेंसी के उप मुख्य रेटिंग अधिकारी कृष्णन सीतारमण ने कहा कि कुल ऋण में उनकी बहुत छोटी हिस्सेदारी है। उन्होंने कहा कि बैंकिंग उद्योग के कुल ऋण में खुदरा क्षेत्र की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसमें आधा आवास ऋण और एक चौथाई वाहन ऋण है। बाकी कर्ज, जिसमें असुरक्षित क्रेडिट कार्ड और वैयक्तिक ऋण शामिल हैं, उनकी खुदरा ऋण में एक-चौथाई हिस्सेदारी है। -
नयी दिल्ली. सरकार ने सोमवार को संसद में कहा कि कि भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण (एएआई) को इस साल फरवरी तक अहमदाबाद, जयपुर, लखनऊ, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम और मंगलुरु हवाई अड्डों के निजी भागीदारों से कुल 3,245 करोड़ रुपये मिले हैं। नागर विमानन राज्य मंत्री वी के सिंह ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी।
इन हवाईअड्डों को 50 साल की अवधि के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत परिचालन, प्रबंधन और विकास के लिए दिया गया है। अडाणी समूह ने प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए इन हवाई अड्डों को हासिल किया था।
सिंह ने कहा कि अहमदाबाद, जयपुर, लखनऊ, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम और मंगलुरु हवाई अड्डों के निजी भागीदारों ने फरवरी 2023 तक एएआई को प्रति यात्री शुल्क (पीपीएफ) के रूप में करीब 896 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। उन्होंने बताया कि इन छह हवाई अड्डों पर एएआई द्वारा किए गए पूंजीगत व्यय के लिए शुल्क के रूप में निजी भागीदारों से लगभग 2,349 करोड़ रुपये की राशि मिली है। अहमदाबाद, लखनऊ और मंगलुरु हवाई अड्डों को 2020 में पट्टे पर दिया गया था जबकि शेष तीन हवाई अड्डों को 2021 में पट्टे पर दिया गया था। -
नयी दिल्ली. केंद्र ने सोमवार को कहा कि प्रमुख उत्पादक राज्यों में हाल में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की करीब 8-10 प्रतिशत फसल खराब होने का अनुमान है। लेकिन देर से बुवाई वाले क्षेत्रों में बेहतर उपज की संभावना से उत्पादन में होने वाले नुकसान की भरपाई की उम्मीद है। कृषि आयुक्त पी के सिंह ने कहा कि हाल के खराब मौसम के बावजूद कृषि मंत्रालय के दूसरे अनुमान के अनुसार इस साल देश का कुल गेहूं उत्पादन रिकॉर्ड 11.22 करोड़ टन पर पहुंच जाएगा। भारत गेहूं के प्रमुख उत्पादक देशों में से एक है, जो यहां की एक बड़ी आबादी का मुख्य भोजन है।
पिछले कुछ सप्ताह से पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में पश्चिमी विक्षोभ के कारण गरज, ओलावृष्टि और तेज हवाओं के साथ बेमौसम बारिश ऐसे समय हुई है, जब फसल कटाई के लिए लगभग तैयार थी। प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ फसल क्षति की समीक्षा बैठक के बाद सिंह ने कहा, ‘‘बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से कुछ स्थानों पर फसल को नुकसान हुआ है और साथ ही देर से की गई बुवाई वाले क्षेत्रों में उपज में वृद्धि हुई है।'' उन्होंने कहा कि लगभग ‘‘8-10 प्रतिशत गेहूं की फसल क्षति'' का अनुमान उन क्षेत्रों में लगाया गया है जो ओलावृष्टि, आंधी और तेज़ हवाओं के कारण पौधों के जमीन पर गिरने से हुआ। उन्होंने कहा कि इस साल देश में कुल 3.4 करोड़ हेक्टेयर गेहूं बोए जाने के मद्देनजर गेहूं को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। कृषि आयुक्त ने कहा कि अन्य स्थानों पर जहां ओलावृष्टि और तेज हवाएं नहीं थीं, बेमौसम बारिश ने मिट्टी की नमी में सुधार किया है और गेहूं की फसल की उपज की संभावनाओं को और बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि अनाज में भराव के चरण के दौरान तापमान में गिरावट से उपज में और सुधार होगा।
सिंह ने आगे कहा, ‘‘बेमौसम बारिश से अधिक क्षेत्र में फसल को फायदा हुआ है और देर से बुवाई वाले क्षेत्रों में फसल की पैदावार 10-15 प्रतिशत अधिक होने की संभावना है।'' उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में 80 प्रतिशत गेहूं की फसल कट चुकी है, इसलिए इन दोनों राज्यों में फसल को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में गेहूं का लगभग 25 प्रतिशत क्षेत्र देर से बोया गया था और इन स्थानों पर बेमौसम बारिश से फसल की वृद्धि में मदद मिल रही है। सिंह ने कहा, ‘‘इसलिए फसल के नुकसान की वजह से होने वाली संभावित क्षति की भरपाई बाकी पैदावार में बढ़ोतरी से हो जाएगी। कृषि मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार निस्संदेह हम रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन हासिल करेंगे।'' मंत्रालय ने चालू फसल वर्ष 2022-23 (जुलाई-जून) में रिकॉर्ड 11.22 करोड़ टन गेहूं उत्पादन का अनुमान लगाया है। पिछले साल, बेमौसम बारिश और गर्मी की लू चलने के कारण घरेलू गेहूं के उत्पादन में गिरावट आई, जिससे सरकार को बढ़ती घरेलू कीमतों को रोकने के लिए निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा। राज्यों के आंकड़ों के अनुसार, खराब मौसम के कारण मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में लगभग 5.23 लाख हेक्टेयर गेहूं की फसल खराब होने का अनुमान है। पंजाब और हरियाणा में नुकसान का आकलन किया जा रहा है। गेहूं एक प्रमुख रबी (सर्दियों) की फसल है।
- - नयी दिल्ली। कमजोर वैश्विक रुख के बीच राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोमवार को सोने का भाव 270 रुपये की गिरावट के साथ 59,480 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने यह जानकारी दी। पिछले कारोबारी सत्र में सोना 59,750 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था।चांदी की कीमत भी 320 रुपये घटकर 71,780 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई।एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी ने कहा, ‘‘दिल्ली के बाजार में सोने का हाजिर भाव 270 रुपये की गिरावट के साथ 59,480 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया।'' अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना गिरावट के साथ 1,964 डॉलर प्रति औंस रह गया, जबकि चांदी का भाव भी नुकसान के साथ 23.80 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। रिलायंस सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक, श्रीराम अय्यर ने कहा, ‘‘ओपेक के कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती किए जाने के चौंकाने वाले फैसले से मुद्रास्फीति को लेकर चिंता बढ़ेगी। इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व अपने आक्रामक रुख को बनाए रख सकता है। इसके चलते सोमवार को कॉमेक्स में सोने की कीमतों में एशियाई कारोबार के घंटों में गिरावट देखी गई।'' उन्होंने कहा, ‘‘कारोबार के दौरान, अमेरिकी डॉलर तथा अमेरिकी बॉन्ड आय अधिक बने रहने से भी रुपये में गिरावट आई।'
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नयी दिल्ली. कोयला ब्लॉकों की नीलामी के छठे दौर में इस्पात, बिजली और सीमेंट कंपनियों ने सबसे अधिक खानें हासिल की हैं। एक आधिकारिक नोट के अनुसार, जेएसडब्ल्यू स्टील ने छत्तीसगढ़ में बनई और भालुमुंडा खान, झारखंड में परबतपुर सेंट्रल और सीतानाला खान की है। वहीं जबकि जेएसडब्ल्यू सीमेंट ने मध्य प्रदेश में मारवाटोला - छह खदान हासिल की है। जिंदल पावर ने छत्तीसगढ़ में स्थित गारे पाल्मा सेक्टर-एक, गारे पाल्मा चार/2 और गारे पाल्मा चार/3 कोयला खदानें जीती हैं। रूंगटा संस प्राइवेट लिमिटेड ने ओड़िशा में सखीगोपाल-बी कांकीली और छेंडीपाड़ा (संशोधित) ब्लॉक और झारखंड में चोरिटांड तिलियाया खान हासिल की है। आरसीआर स्टील वर्क्स ने झारखंड में स्थित पाताल ईस्ट (पूर्वी भाग) ब्लॉक जीता है जबकि उड़ीसा मेटलर्जिकल इंडस्ट्री ने पश्चिम बंगाल में कागरा जॉयदेव खदान हासिल की है। सीमेंट कंपनियों...अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड ने महाराष्ट्र में दाहेगांव-गोवारी खान हासिल की है, जबकि अल्ट्राटेक सीमेंट को मध्य प्रदेश में अर्जुनी ईस्ट ब्लॉक मिला है। डालमिया सीमेंट (भारत) ने मध्य प्रदेश में मंडला नार्थ, रामा सीमेंट इंडस्ट्रीज को मध्य प्रदेश में 1 मारवाटोला - सात और श्री सीमेंट ने छत्तीसगढ़ में दतिमा खान हासिल की है। इस सूची के अनुसार, सीजी नैचुरल रिसोर्सेज ने छत्तीसगढ़ में पुरुंगा खदान और एमएच नैचुरल रिसोर्सेज ने महाराष्ट्र में माधेरी खदान नार्थ-वेस्ट हासिल की है। कोल पुल्ज को अरुणाचल प्रदेश का नामचिक नामफुक ब्लॉक मिला है, जबकि महावीर कोल इंडस्ट्रीज ने मध्य प्रदेश में डोंगेरी ताल- दो ब्लॉक हासिल किया है। इसी तरह समलोक इंडस्ट्रीज ने महाराष्ट्र में कलांबी कलमेश्वर (पश्चिमी भाग) और एमपी नैचुरल रिसोर्सेज ने मध्य प्रदेश में गोंडबेरा उझेनी ब्लॉक हासिल किया है। गुजरात खनिज विकास निगम (जीएमडीसी) ने ओड़िशा में बुरापहाड़ और वैतरणी पश्चिम खदानें जीती हैं। झारखंड में श्रीसत्य माइंस ने बुराखाप स्मॉल पैच खान और असम खनिज विकास निगम (एएमडीसी) ने बिंजा कोयला ब्लॉक हासिल किया है। गंगा खनिज को मध्य प्रदेश का अर्जुनी वेस्ट ब्लॉक मिला है। कोयला मंत्रालय ने 29 मार्च को छठे दौर की नीलामी के तहत दी गई 29 कोयला खानों के लिए करार पर हस्ताक्षर किए हैं। इन खानों के परिचालन में आने से एक लाख रोजगार के अवसरों का सृजन होने की उम्मीद है। -
चेन्नई. दक्षिण रेलवे को वित्त वर्ष 2022-23 में अब तक की सर्वोच्च 80 प्रतिशत की राजस्व वृद्धि हुई है। इसने यात्री खंड में 6,345 करोड़ रुपये राजस्व अर्जित किया है। इससे पिछले वित्त वर्ष (2021-22) में 3,539.77 करोड़ रुपये का राजस्व कमाया था। इससे पहले दक्षिण रेलवे का उच्चतम राजस्व वित्त वर्ष 2019-20 में 5,225 करोड़ रुपये था।
एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, समाप्त वित्त वर्ष (2022-2023) में लगभग 64 करोड़ यात्रियों ने दक्षिण रेलवे से यात्रा की। यह आंकड़ा इससे पिछले वित्त वर्ष के 33.96 करोड़ यात्रियों की तुलना में 88.5 प्रतिशत अधिक है। रेलवे जोन ने मालभाड़ा खंड में वित्त वर्ष 2018-19 में 3,059 करोड़ रुपये की तुलना में पिछले वित्त वर्ष के दौरान 3,637.86 करोड़ रुपये का अपना उच्चतम राजस्व दर्ज किया। बयान में कहा गया है कि दक्षिण रेलवे के लिए समाप्त वित्त वर्ष माल और यात्री खंड में उल्लेखनीय उपलब्धि के साथ एक सकारात्मक संख्या पर बंद हुआ। -
शिमला. हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य में लैवेंडर की खेती को बढ़ावा देने के लिए 'अरोमा मिशन' के तहत केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करेगी। एक बयान में रविवार को यह जानकारी दी गयी। 'अरोमा मिशन', लैवेंडर की खेती से संबंधित एक पहल है, जो जम्मू- कश्मीर में किसानों के लिए एक वरदान साबित हुयी है। चंबा सहित हिमाचल प्रदेश के कई क्षेत्रों की जलवायु परिस्थितियों के जम्मू-कश्मीर के समान होने के कारण, राज्य सरकार का लक्ष्य हिमाचल प्रदेश में इस पहल की सफलता को बड़े पैमाने पर दोहराना है। बयान के मुताबिक इस पहल से किसानों के साथ-साथ राज्य की अर्थव्यवस्था को भी बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस संबंध में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह से चर्चा भी की है। जितेंद्र सिंह ने इस परियोजना के लिए किसानों को तकनीकी सहायता प्रदान करने का हिमाचल प्रदेश को आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि इस पहल में किसानों के जीवन को बदलने की क्षमता है तथा राज्य और केंद्र सरकार के सहयोग से ‘अरोमा मिशन' कृषि क्षेत्र के लिए एक परिवर्तनकारी कदम साबित हो सकता है। लैवेंडर की खेती जिसे बैंगनी क्रांति के रूप में भी जाना जाता है, हिमाचल प्रदेश के किसानों के लिए एक आकर्षक विकल्प साबित हो सकती है।
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नई दिल्ली। भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड- सेल ने वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान सर्वाधिक वार्षिक उत्पादन की उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने एक करोड 94 लाख टन से अधिक हॉट मेटल और तकरीबन एक करोड 83 लाख टन क्रूड स्टील का उत्पादन किया है।
इस्पात मंत्रालय ने कहा है कि कंपनी लगातार अपने उत्पादन में सुधार कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सेल की इस उपलब्धि की सराहना की है। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि भारत हर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ा रहा है।






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