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- नयी दिल्ली. सिनेमा घरों में खुले रूप में बिकने वाले पॉपकॉर्न पर रेस्तरां की तरह ही पांच प्रतिशत की दर से माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लगता रहेगा। सरकारी सूत्रों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अगर पॉपकॉर्न को फिल्म टिकट के साथ बेचा जाता है, तो इसे एक समग्र आपूर्ति के रूप में माना जाएगा और चूंकि इस मामले में मुख्य आपूर्ति टिकट है, इसलिए उसकी लागू दर के अनुसार कर लगाया जाएगा। जीएसटी परिषद की 55वीं बैठक में पॉपकॉर्न पर जीएसटी को स्पष्ट किया गया था। दरअसल, नमक और मसालों वाले पॉपकॉर्न पर लागू वर्गीकरण और जीएसटी दर को स्पष्ट करने के लिए उत्तर प्रदेश से अनुरोध मिला था। पॉपकॉर्न पर जीएसटी दर में कोई वृद्धि नहीं की गई है।सूत्रों के अनुसार, पॉपकॉर्न को सिनेमा घरों में खुले रूप में बेचा जाता है, और इसलिए इसपर ‘रेस्तरां सेवा' के समान पांच प्रतिशत की दर लागू होती रहेगी। हालांकि, इसके लिए पॉपकॉर्न की स्वतंत्र रूप से आपूर्ति करनी होगी। जीएसटी के तहत नमक और मसालों वाले पॉपकॉर्न को नमकीन के रूप में वर्गीकृत किया जाता है और इसपर पांच प्रतिशत कर लगता है। जब इसे पहले से पैक और लेबल के साथ बेचा जाता है, तो दर 12 प्रतिशत होती है। कुछ वस्तुओं को छोड़कर सभी चीनी कन्फेक्शनरी पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है, और इसलिए कारमेलाइज चीनी वाले पॉपकॉर्न पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लागू है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि परिषद ने नमक और मसालों वाले पॉपकॉर्न पर वर्गीकरण विवादों के समाधान के लिए स्पष्टीकरण जारी करने की सिफारिश की।
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नयी दिल्ली. वित्त वर्ष 2025-26 का आम बजट अगले साल की एक फरवरी को संसद में पेश किए जाते समय शनिवार होने के बावजूद दोनों प्रमुख शेयर बाजार कारोबार के लिए खुले रहेंगे। बीएसई और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) दोनों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
दोनों शेयर बाजारों ने अलग-अलग परिपत्रों में कहा कि शेयर बाजार 2025-26 का केंद्रीय बजट पेश होने की वजह से एक फरवरी, 2025, शनिवार को कारोबार के लिए खुले रहेंगे। दोनों शेयर बाजारों में सुबह 9.15 बजे से दोपहर 3.30 बजे तक सामान्य कामकाजी दिनों की तरह कारोबार होगा। हालांकि, शेयर बाजार शनिवार और रविवार को बंद रहते हैं। लेकिन विशेष परिस्थितियों में इन्हें खोला जाता है। इसके पहले एक फरवरी, 2020 और 28 फरवरी, 2015 को भी बाजार शनिवार होने के बावजूद बजट के दिन कारोबार के लिए खुले हुए थे। वर्ष 2001 में बजट पेश करने का समय शाम पांच बजे से बदलकर सुबह 11 बजे कर दिए जाने के बाद से ही शेयर बाजार हमेशा सामान्य समय के दौरान खुले रहे हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी, 2025 को अगले वित्त वर्ष के लिए केंद्रीय बजट पेश करेंगी। -
टोक्यो. जापानी वाहन विनिर्माता होंडा और निसान ने विलय योजना की घोषणा की है। इस कवायद के पूरा होने के बाद बिक्री के लिहाज से दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी वाहन कंपनी अस्तित्व में आएगी। गौरतलब है कि वाहन उद्योग इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ यह जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता से दूर जा रहा है, दूसरी ओर इसे चीनी प्रतिद्वंद्वियों से तेज प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है। दोनों कंपनियों ने कहा कि उन्होंने सोमवार को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। निसान के छोटे गठबंधन के सदस्य मित्सुबिशी मोटर्स ने भी अपने व्यवसायों को एकीकृत करने के लिए बातचीत में शामिल होने पर सहमति जताई है। निसान के मुख्य कार्यप़ालक अधिकारी (सीईओ) माकोतो उचिदा ने बयान में कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि अगर यह एकीकरण सफल होता है, तो हम व्यापक ग्राहक आधार को और भी अधिक मूल्य प्रदान करने में सक्षम होंगे।'' जापान में वाहन विनिर्माता इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में अपने बड़े प्रतिद्वंद्वियों से पीछे रह गए हैं और अब वे लागत में कटौती करने और नुकसान की भरपाई करने की कोशिश कर रहे हैं। इस महीने की शुरुआत में संभावित विलय की खबरें सामने आईं थीं। अपुष्ट खबरों में कहा गया था कि निकट सहयोग पर बातचीत आंशिक रूप से ताइवान के आईफोन विनिर्माता फॉक्सकॉन की निसान के साथ गठजोड़ करने की आकांक्षाओं से प्रेरित थी। निसान का फ्रांस की रेनो एसए और मित्सुबिशी के साथ गठबंधन है। तीनों वाहन विनिर्माताओं के बाजार पूंजीकरण के आधार पर विलय से 50 अरब डॉलर से अधिक कीमत की एक बड़ी कंपनी बन सकती है। होंडा और निसान के साथ फ्रांस की रेनो एसए और छोटी वाहन निर्माता मित्सुबिशी मोटर्स कॉर्प के गठबंधन को टोयोटा मोटर कॉर्प और जर्मनी की फॉक्सवैगन एजी के साथ प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी। टोयोटा की जापान की माज्दा मोटर कॉर्प और सुबारू कॉर्प के साथ प्रौद्योगिकी साझेदारी है। प्रस्तावित विलय के बाद भी टोयोटा जापान की अग्रणी वाहन विनिर्माता बनी रहेगी। उसने 2023 में 1.15 करोड़ वाहन बनाए थे। दूसरी ओर निसान, होंडा और मित्सुबिशी मिलकर 80 लाख वाहन बनाएंगी।
निसान, होंडा और मित्सुबिशी ने अगस्त में घोषणा की थी कि वे इलेक्ट्रिक वाहन के लिए बैटरी जैसे कलपुर्जों को साझा करेंगे। -
मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पूर्व गवर्नर शक्तिकान्त दास के नेतृत्व में 2024 में ब्याज दरों में कटौती के दबाव को नजरअंदाज किया और अपना मुख्य ध्यान महंगाई पर केंद्रित रखा। हालांकि, अब नए मुखिया की अगुवाई में केंद्रीय बैंक को जल्द यह फैसला लेना होगा कि क्या वह आर्थिक वृद्धि की कीमत पर मुद्रास्फीति को तरजीह देना जारी रख सकता है। नौकरशाह दास ने 2016 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नोटबंदी के फैसले के बाद पूरे मामले की देखरेख की थी। उन्होंने एक स्थायी विरासत छोड़ी है। उन्होंने छह साल तक मौद्रिक नीति को कुशलतापूर्वक संचालित किया। 2024 के अंत में दास का दूसरा कार्यकाल पूरा होने के बाद सरकार ने राजस्व सचिव संजय मल्होत्रा को नया गवर्नर नियुक्त किया है। दास को कोविड-19 महामारी के समय से भारत के पुनरुद्धार को आगे बढ़ाने का श्रेय जाता है।
इस साल के अंत में एक अन्य नौकरशाह संजय मल्होत्रा को दास का उत्तराधिकारी नियुक्त किया गया। मल्होत्रा को दास का दूसरा तीन वर्षीय कार्यकाल समाप्त होने से मात्र 24 घंटे पहले ही नियुक्त किया गया। दास के नेतृत्व में आरबीआई ने लगभग दो साल तक प्रमुख नीतिगत दर रेपो को यथावत रखा। हालांकि, चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर सात तिमाहियों के निचले स्तर पर आ गई है। नए गवर्नर के कार्यभार संभालने तथा ब्याज दरों में कटौती के पक्ष में ब्याज दर निर्धारण समिति (एमपीसी) में बढ़ती असहमति के कारण अब सभी की निगाहें फरवरी में आरबीआई की मौद्रिक समीक्षा बैठक पर है। सभी इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि फरवरी की बैठक में एमपीसी का क्या रुख रहता है। इसी महीने उनकी नियुक्ति के बाद कुछ विश्लेषकों का मानना था कि मल्होत्रा के आने से फरवरी में ब्याज दरों में कटौती की संभावना मजबूत हुई है, लेकिन कुछ घटनाएं, विशेषकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा 2025 में ब्याज दर में कम कटौती का संकेत दिए जाने, रुपये पर इसके असर के बाद कुछ लोगों ने यह सवाल उठाना शुरू कर दिया है कि क्या यह ब्याज दर में कटौती के लिए उपयुक्त समय है। कुछ पर्यवेक्षक यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या 0.50 प्रतिशत की हल्की ब्याज दर कटौती - जैसा कि मुद्रास्फीति अनुमानों को देखते हुए व्यापक रूप से अपेक्षित है - आर्थिक गतिविधियों के लिए किसी भी तरह से उपयोगी होगी। एक नौकरशाह के रूप में लंबे करियर के बाद केंद्रीय बैंक में शामिल हुए दास ने कहा था कि उन्होंने उन प्रावधानों के अनुसार काम किया, जो वृद्धि के प्रति सजग रहते हुए मुद्रास्फीति पर ध्यान केंद्रित करते हैं। छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति ने अक्टूबर, 2024 में सर्वसम्मति से नीतिगत रुख को बदलकर ‘तटस्थ' करने का फैसला किया था। अपनी आखिरी नीति घोषणा में दास ने जुलाई-सितंबर तिमाही में 5.4 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर और अक्टूबर में मुद्रास्फीति के छह प्रतिशत के संतोषजनक स्तर से ऊपर जाने का हवाला देते हुए कहा था कि वृद्धि-मुद्रास्फीति की गतिशीलता अस्थिर हो गई है। दास ने आधिकारिक जीडीपी वृद्धि आंकड़ों के प्रकाशन के बाद अपने अंतिम संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केंद्रीय बैंकिंग में ‘आकस्मिक' प्रतिक्रिया की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने कहा कि लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण ढांचे की ‘विश्वसनीयता' को आगे भी संरक्षित करना होगा। आरबीआई ने लगातार 11 बार द्विमासिक नीतिगत समीक्षा के लिए प्रमुख दरों को अपरिवर्तित रखा है। - जैसलमेर। जीएसटी परिषद ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) चोरी रोकने के लिए अहम कदम उठाते हुए शनिवार को कर चोरी की आशंका वाले कुछ वस्तुओं के लिए ‘ट्रैक एंड ट्रेस' तंत्र लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसके तहत ऐसी वस्तुओं या पैकेट पर एक विशिष्ट चिह्न लगाया जाएगा, ताकि आपूर्ति श्रृंखला में उनका पता लगाया जा सके। इसका उद्देश्य केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) अधिनियम, 2017 में धारा 148ए के माध्यम से एक प्रावधान शामिल करना है, ताकि सरकार को कर चोरी की संभावना वाले उत्पादों पर नजर रखने और पता लगाने (ट्रैक एंड ट्रेस)के तंत्र को लागू करने के लिए सशक्त बनाया जा सके। वित्त मंत्रालय ने यहां परिषद की 55वीं बैठक में लिए गए निर्णयों की के बारे में जानकारी देते हुए कहा,‘‘यह प्रणाली विशिष्ट पहचान चिह्न पर आधारित होगी, जिसे उक्त वस्तुओं या उनके पैकेट पर चिपकाया जाएगा। इससे ऐसी प्रणाली विकसित करने के लिए कानूनी ढांचा उपलब्ध होगा और आपूर्ति श्रृंखला में निर्दिष्ट वस्तुओं का पता लगाने के लिए तंत्र के कार्यान्वयन में मदद मिलेगी।'' इसमें कहा गया है, ‘‘यह स्पष्ट किया जाता है कि अपंजीकृत प्राप्तकर्ताओं को ऑनलाइन मनी गेमिंग, ओआईडीएआर सेवाओं आदि जैसी ‘ऑनलाइन सेवाओं' की आपूर्ति के संबंध में, आपूर्तिकर्ता को कर चालान पर अपंजीकृत प्राप्तकर्ता के राज्य का नाम अनिवार्य रूप से दर्ज करना आवश्यक है और प्राप्तकर्ता के राज्य का ऐसा नाम आईजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 12(2)(बी) के प्रयोजन के लिए प्राप्तकर्ता के रिकॉर्ड में दर्ज पता माना जाएगा, जिसे सीजीएसटी नियम, 2017 के नियम 46(एफ) के प्रावधान के साथ पढ़ा जाएगा।'' वस्तुओं पर जीएसटी दर के बारे में लिए गए निर्णय के संबंध में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि परिषद ने ‘ फोर्टिफाइड राइस कर्नेल' (एफआरके) पर दर को 18 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने का निर्णय लिया है और जीन थेरेपी पर भी जीएसटी से छूट दी है।
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नई दिल्ली। जीएसटी परिषद की शनिवार को हुई बैठक में स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर कर कम करने का फैसला टाल दिया गया। इस बीच 148 वस्तुओं पर कर की दर में फेरबदल की मंत्रिसमूह की बहुचर्चित सिफारिश परिषद के समक्ष नहीं रखी गई। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता वाली और राज्य सरकारों के वित्त मंत्रियों वाली परिषद के कुछ सदस्यों ने महसूस किया कि बीमा कराधान के संबंध में अंतिम निर्णय पर पहुंचने से पहले और अधिक विचार-विमर्श की आवश्यकता है।
बीमा पर मंत्री समूह की समिति के प्रमुख बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि समूह, व्यक्तिगत, वरिष्ठ नागरिक पॉलिसियों के कराधान पर निर्णय लेने के लिए एक और बैठक की आवश्यकता है। चौधरी ने यहां संवाददाताओं से कहा, “कुछ (परिषद) सदस्यों ने कहा कि इस पर और अधिक चर्चा की आवश्यकता है। हम (जीओएम) जनवरी में फिर मिलेंगे।”इसके अलावा, दरों को तर्कसंगत बनाने पर मंत्री समूह की रिपोर्ट परिषद के समक्ष प्रस्तुत नहीं की गई। रिपोर्ट में 148 वस्तुओं में बदलाव की सिफारिश की गई थी। समिति के संयोजक चौधरी ने कहा, “हम दरों को तर्कसंगत बनाने पर मंत्री समूह की रिपोर्ट परिषद की अगली बैठक में प्रस्तुत करेंगे।”परिषद की चल रही बैठक में विमानन टर्बाइन ईंधन (एटीएफ) को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। केंद्र और राज्यों के जीएसटी विभागों के अधिकारियों वाली फिटमेंट समिति के कई प्रस्ताव परिषद के समक्ष समीक्षा के लिए आएंगे। प्रस्तावों में से एक स्विगी और जोमैटो जैसे खाद्य वस्तुओं के वितरण मंचों पर करों को मौजूदा 18 प्रतिशत (आईटीसी के साथ) से घटाकर पांच प्रतिशत (इनपुट टैक्स क्रेडिट के बिना) करना शामिल है।सूत्रों के अनुसार, इसमें इस्तेमाल की गई इलेक्ट्रिक गाड़ियों के साथ-साथ छोटे पेट्रोल और डीजल वाहनों की बिक्री पर कर की दर को मौजूदा 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया जा सकता है। इस बढ़ोतरी से इस्तेमाल की गई और पुरानी छोटी कारें और इलेक्ट्रिक वाहन पुराने बड़े वाहनों के बराबर हो जाएंगे। इसके अलावा, जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर पर मंत्रियों के समूह (जीओएम) को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए जून, 2025 तक छह महीने का विस्तार मिलने की संभावना है।क्षतिपूर्ति उपकर व्यवस्था मार्च, 2026 में समाप्त हो जाएगी, और जीएसटी परिषद ने उपकर के भविष्य के पाठ्यक्रम को तय करने के लिए केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी के नेतृत्व में मंत्रियों की एक समिति गठित की है। बीमा पर गठित मंत्री समूह ने सावधि जीवन बीमा पॉलिसी के लिए चुकाए जाने वाले प्रीमियम को जीएसटी से छूट देने की सिफारिश की है।साथ ही वरिष्ठ नागरिकों द्वारा स्वास्थ्य बीमा कवर के लिए चुकाए जाने वाले प्रीमियम को भी कर से छूट देने का प्रस्ताव किया गया है। इसके अलावा, वरिष्ठ नागरिकों के अलावा अन्य व्यक्तियों द्वारा पांच लाख रुपये तक के स्वास्थ्य बीमा के लिए भुगतान किए गए प्रीमियम पर जीएसटी से छूट देने का प्रस्ताव है। हालांकि, पांच लाख रुपये से अधिक के स्वास्थ्य बीमा कवर वाली पॉलिसियों के लिए भुगतान किए गए प्रीमियम पर 18 प्रतिशत जीएसटी लागू रहेगा। जीएसटी दर युक्तिकरण पर जीओएम की रिपोर्ट परिषद के समक्ष पेश नहीं की गई और इसे अगली परिषद बैठक में लिया जाएगा।रिपोर्ट में 148 वस्तुओं में दरों में बदलाव का सुझाव दिया गया है। मंत्री समूह ने इसी महीने करीब 148 वस्तुओं पर कर दरों में फेरबदल करने पर व्यापक सहमति बनाई थी, जिसमें ‘हानिकारक’ पेय पदार्थ और तंबाकू उत्पादों जैसी वस्तुओं पर वर्तमान 28 प्रतिशत की तुलना में 35 प्रतिशत अधिक कर लगाना शामिल है।व्यापक रूप से उम्मीद की जा रही थी कि मंत्रिसमूह शनिवार को जीएसटी परिषद की बैठक में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। वर्तमान में, जीएसटी एक चार-स्तरीय कर संरचना है जिसमें पांच, 12, 18 और 28 प्रतिशत की स्लैब हैं। विलासिता और बुरी मानी जाने वाली वस्तुओं पर 28 प्रतिशत की उच्चतम दर से कर लगाया जाता है, जबकि डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ और आवश्यक वस्तुओं पर सबसे कम पांच प्रतिशत की दर से कर लगाया जाता है। जीओएम ने परिधान पर कर दरों को युक्तिसंगत बनाने का प्रस्ताव करने का भी फैसला किया था।निर्णय के अनुसार, 1,500 रुपये तक की लागत वाले तैयार कपड़ों पर पांच प्रतिशत जीएसटी लगेगा, 1,500 रुपये से 10,000 रुपये के बीच के कपड़ों पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। 10,000 रुपये से अधिक की लागत वाले कपड़ों पर 28 प्रतिशत कर लगेगा।वर्तमान में 1,000 रुपये तक के कपड़ों पर पांच प्रतिशत जीएसटी लगता है, जबकि इससे अधिक कीमत वाले कपड़ों पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगता है। जीओएम ने 15,000 रुपये प्रति जोड़ी से अधिक कीमत वाले जूतों पर जीएसटी 18 प्रतिशत से बढ़ाकर 28 प्रतिशत करने का भी प्रस्ताव रखा है। इसने 25,000 रुपये से अधिक कीमत वाली कलाई घड़ियों पर जीएसटी 18 प्रतिशत से बढ़ाकर 28 प्रतिशत करने का भी प्रस्ताव रखा है।मंत्री समूह ने 20 लीटर और उससे ज़्यादा के डिब्बा बंद पेयजल पर जीएसटी को 18 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने और 10,000 रुपये से कम कीमत वाली साइकिलों पर कर की दर को 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा था। साथ ही, कॉपी पर जीएसटी को 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया था। -
नयी दिल्ली. कमजोर वैश्विक रुख के बीच आभूषण विक्रेताओं की सुस्त मांग के कारण बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट आई। अखिल भारतीय सर्राफा संघ ने यह जानकारी दी। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 800 रुपये टूटकर 78,300 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई। बुधवार के पिछले कारोबारी सत्र में यह 79,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। कारोबारियों ने कहा कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक के प्रमुख जेरोम पावेल ने अब वर्ष 2025 के अंत तक ब्याज दर में केवल दो चौथाई प्रतिशत की कटौती का संकेत दिया है। पहले बाजार ने ब्याज दरों में चार कटौतियों का अनुमान लगाया था। बृहस्पतिवार को चांदी भी 2,000 रुपये गिरकर 90,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। पिछले सत्र में चांदी 92,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। बुधवार को 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने का भाव 800 रुपये घटकर 77,900 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया, जबकि इससे पहले इसका भाव 78,700 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। एशियाई कारोबारी सत्र में कॉमेक्स सोना वायदा 19.10 डॉलर प्रति औंस गिरकर 2,634.10 डॉलर प्रति औंस रह गया। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस और मुद्रा) सौमिल गांधी ने कहा, ‘‘फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की बैठक के बाद सोने में भारी गिरावट आई, क्योंकि फेडरल रिजर्व ने अगले साल के लिए पहले के अनुमान की तुलना में ब्याज दरों में कटौती की धीमी गति का संकेत दिया है।'' अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चांदी 2.47 प्रतिशत गिरकर 29.98 डॉलर प्रति औंस पर बोली गई।
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नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की एक रिपोर्ट में राज्यों को चेतावनी देते हुए कहा गया है कि कृषि ऋण माफी, मुफ्त बिजली एवं परिवहन जैसी छूट देने से सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढांचे के लिए उनके महत्वपूर्ण संसाधन खत्म हो सकते हैं। रिपोर्ट कहती है कि कई राज्यों ने चालू वित्त वर्ष के अपने बजट में कृषि ऋण माफी, कृषि और घरों को मुफ्त बिजली, मुफ्त परिवहन, बेरोजगार युवाओं को भत्ते और महिलाओं को नकद सहायता देने की घोषणाएं की हैं। इस तरह के खर्चों से उनके पास उपलब्ध संसाधन खत्म हो सकते हैं और महत्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढांचे के निर्माण की उनकी क्षमता बाधित हो सकती है।
आरबीआई रिपोर्ट के मुताबिक, सब्सिडी पर खर्च में तेज वृद्धि से वित्तीय तनाव पैदा हुआ है जो कृषि ऋण माफी, मुफ्त/सब्सिडी वाली सेवाओं (जैसे कृषि और घरों को बिजली, परिवहन, गैस सिलेंडर) और किसानों, युवाओं एवं महिलाओं को नकद हस्तांतरण की देन है। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यों को अपना सब्सिडी व्यय नियंत्रित करने और तर्कसंगत बनाने की जरूरत है, ताकि ऐसे खर्चों से अधिक उत्पादक व्यय बाधित न हो।आरबीआई के अध्ययन के अनुसार, उच्च ऋण-जीडीपी अनुपात, बकाया गारंटी और बढ़ते सब्सिडी बोझ के कारण राज्यों को विकास और पूंजीगत खर्च पर अधिक जोर देते हुए राजकोषीय मजबूती की राह पर बने रहने की जरूरत है। इसके अलावा व्यय की गुणवत्ता में सुधार भी जरूरी है। हालांकि, राज्यों की कुल बकाया देनदारियां मार्च, 2024 के अंत में 28.5 प्रतिशत पर आ गई हैं, जबकि मार्च, 2021 के अंत में यह जीडीपी का 31 प्रतिशत थीं। लेकिन अब भी यह महामारी-पूर्व के स्तर से ऊपर बनी हुई हैं।आरबीआई की ‘राज्य वित्त: 2024-25 के बजट का एक अध्ययन’ शीर्षक वाली रिपोर्ट कहती है कि राज्य सरकारों ने लगातार तीन वर्षों (2021-22 से 2023-24) के लिए अपने सकल राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के तीन प्रतिशत के भीतर रखकर राजकोषीय मजबूती की दिशा में सराहनीय प्रगति की है। राज्यों ने 2022-23 और 2023-24 में राजस्व घाटे को जीडीपी के 0.2 प्रतिशत पर सीमित रखा है। बृहस्पतिवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, ‘‘राजकोषीय घाटे में कमी से राज्यों को अपना पूंजीगत खर्च बढ़ाने और व्यय की गुणवत्ता में सुधार करने की गुंजाइश पैदा हुई है।’’ -
नयी दिल्ली। भारती एयरटेल जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा, बारामूला और बांदीपुरा जिलों के करीब सात सीमावर्ती गांवों में मोबाइल सेवाएं शुरू करने वाली पहली निजी दूरसंचार कंपनी बन गई है। कंपनी ने बुधवार को यह जानकारी दी। कंपनी ने बुधवार को बयान में कहा, ‘वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम' के तहत एयरटेल ने कच्छल, बलबीर, राजदान दर्रा ताया टॉप, उस्ताद, काठी और चीमा जैसे गांवों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ा है। इसमें कहा गया, ‘‘ ये गांव केरन, मच्छल, तंगधार, गुरेज और उरी घाटी क्षेत्रों में स्थित हैं, जो कुपवाड़ा, बारामूला और बांदीपुरा जिलों में फैले आते हैं। एयरटेल इन क्षेत्रों में संचार सेवाएं प्रदान करने वाली एकमात्र निजी दूरसंचार संचालक है।'' कंपनी ने इन इलाकों में 15 मोबाइल टावर स्थापित किए हैं। इससे स्थानीय लोगों को फायदा मिलेगा और नियंत्रण रेखा पर तैनात सैनिकों को आवश्यक संचार सुविधा मिलेगी। बयान में कहा गया ‘‘ भारती एयरटेल ने उत्तरी कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पास कुपवाड़ा, बारामूला और बांदीपुरा जिलों के गांवों में संपर्क स्थापित करने के लिए भारतीय सेना के साथ साझेदारी की है।'' एयरटेल ने सैन्य ठिकानों के दूरदराज क्षेत्रों में नेटवर्क सेवाओं में सुधार तथा संपर्क बढ़ाने के लिए भारतीय सेना के साथ सहयोग किया है। हाल ही में, कंपनी ने गलवान नदी क्षेत्र और दौलत बेग ओल्डी (बीडीओ) में सफलतापूर्वक संपर्क स्थापित किया था जिसे भारत की सबसे उत्तरी सैन्य चौकी कहा जाता है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कई मौकों पर कहा है कि जून 2025 तक देश के सभी दूरदराज क्षेत्रों में दूरसंचार सुविधाएं पहुंच जाएंगी।
- नयी दिल्ली। स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी पोको इंडिया ने मंगलवार को 7,999 रुपये की कीमत वाला 5 जी स्मार्टफोन ‘पोको सी 75 5 जी’ पेश किया। कंपनी का दावा है कि यह देश का सबसे सस्ता स्मार्टफोन है। इस दौरान पोको इंडिया के प्रमुख हिमांशु टंडन ने कहा कि देश में सभी के लिए सुलभ प्रौद्योगिकी पेश करना ही कंपनी का लक्ष्य है। टंडन ने यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘पोको में हमारा लक्ष्य हमेशा ऐसी प्रौद्योगिकी पेश करना रहा है, जो सभी के लिए सुलभ और उपयोगी हो।’’इन स्मार्टफोन्स में परफॉर्मेंस के लिए स्नैपड्रैगन 4s Gen 2 चिपसेट और मीडियाटेक डाइमेंसिटी 7025 अल्ट्रा चिपसेट इस्तेमाल किया गया है। डेली रूटीन वर्क से लेकर मल्टी टास्किंग में ये चिपसेट आपको तगड़ी परफॉर्मेंस देने वाले हैं। आइए आपको दोनों स्मार्टफोन्स की डिटेल जानकारी देते हैं।Poco M7 Pro 5G को कंपनी ने दो वेरिएंट में लॉन्च किया है। इसमें आपको 6GB रैम और 128GB स्टोरेज और 8GB रैम के साथ 256GB स्टोरेज का ऑप्शन मिलता है। अगर आप 6GB रैम वाले मॉडल को खरीदते हैं तो इसके लिए 14,999 रुपये खर्च करने पड़ेंगे। वहीं अगर 8GB वाले वेरिएंट की तरफ जाते हैं तो 16,999 रुपये खर्च करने पड़ेंगे। इसमें आपको तीन कलर वेरिएंट मिलते हैं जिसमें लैवेंडर फ्रास्ट, लूनर डस्ट और ऑलिव ट्विलाइट कलर ऑप्शन मिलता है।Poco M7 Pro 5G के फीचर्सPoco M7 Pro 5G में आपको 6.67 इंच का फुलएचडी प्लस gOLED डिस्प्ले दिया गया है। डिस्प्ले में 120Hz का रिफ्रेश रेट मिलता है। स्क्रीन की प्रोटेक्शन के लिए इसमें कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास 5 दिया गया है। इसमें आपको मीडियाटेक डाइमेंसिटी 7025 अल्ट्रा दिया गया है। इसमें आपको 8GB तक की रैम और 256GB तक की स्टोरेज ऑप्शन मिलती है। आउट ऑफ द बॉक्स यह स्मार्टफोन एंड्रॉयड 14 पर रन करता है।फोटोग्राफी के लिए स्मार्टफोन में डु्अल कैमरा दिया गया है जिसमें 50MP का प्राइमरी कैमरा मिलता है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए इसमें 20MP का कैमरा मिलता है। स्मार्टफोन को पॉवर देने के लिए 5110mAh की बैटरी दी गई है जो कि 45W की फास्ट चार्जिंग मिलती है।Poco C75 5G की कीमत और फीचर्सPoco C75 5G को कंपनी ने सिर्फ एक सिंगल वेरिएंट के साथ लॉन्च किया है। इसमें आपको 4GB की रैम और 64GB की स्टोरेज मिलती है। पोको ने इस स्मार्टफोन को 8 हजार रुपये से कम कीमत में पेश किया है। इसके लिए आपको 7,999 रुपये खर्च करने पड़ेंगे।अगर आप इन स्मार्टफोन्स को खरीदना चाहते हैं तो बता दें कि इन्हें फ्लिपकार्ट से खरीद सकेंगे। फ्लिपकार्ट में 20 दिसंबर से Poco M7 Pro 5G की सेल शुरू होगी। जबकि वहीं Poco C75 5G की सेल 19 दिसंबर से शुरू होगी।Poco C75 5G को फीचर्सPoco C75 5G में 6.88 इंच का फुल एचडी प्लस डिस्प्ले दिया गया है। डिस्प्ले को लैग फ्री बनाने के लिए 120hz का रिफ्रेश रेट दिया गया है। परफॉर्मेंस के लिए इसमें कंपनी ने स्नैपड्रैगन 4s Gen 2 चिपसेट दिया है। यह स्मार्टफोन एंड्रॉयड 14 पर बेस्ड है। रियर में डुअल कैमरा सेटअप मिलता है जिसमें प्राइमरी लेंस 50MP का है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए इसमें 5MP का सेंसर दिया गया है। स्मार्टफोन को पॉवर देने के लिए इसमें 5160mAh की बैटरी दी गई है जो कि 18W की फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है।
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नयी दि्ल्ली । आयकर विभाग ने कहा है कि 'विवाद से विश्वास योजना, 2024' के लिए 22 जुलाई तक लंबित सभी अपीलें पात्र होंगी, चाहे उनका बाद में निपटान कर दिया गया हो या वापस ले लिया गया हो। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने 'विवाद से विश्वास योजना, 2024' के बारे में 'अक्सर पूछे जाने वाले सवालों' (एफएक्यू) का एक नया समूह जारी करते हुए यह स्पष्टीकरण दिया है। इस विवाद समाधान योजना का लाभ उठाने के इच्छुक करदाताओं को 31 दिसंबर तक एक घोषणा दाखिल करनी होगी।
सीबीडीटी ने कहा है कि उसे 'विवाद से विश्वास योजना (वीएसवी), 2024' योजना के बारे में कई सवाल मिले हैं और यह एफएक्यू "बेहतर जागरूकता और समझ" बनाने में मदद करेगा। इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि किसी करदाता की प्रत्यक्ष कर से संबंधित 22 जुलाई तक लंबित सभी अपीलें इस योजना के लिए पात्र होंगी, चाहे उन अपीलों का बाद में निपटान कर दिया गया हो या वापस ले लिया गया हो। इस योजना की घोषणा वित्त वर्ष 2024-25 के बजट में 23 जुलाई, 2024 को की गई थी और इसे एक अक्टूबर को अधिसूचित किया गया था। कर परामर्श फर्म नांगिया एंड कंपनी में साझेदार सचिन गर्ग ने कहा कि विवादित राशि की कम दर के भुगतान के लिए पात्र होने के लिए 31 दिसंबर, 2024 को या उससे पहले घोषणा दाखिल करना महत्वपूर्ण है, न कि उस तिथि से पहले भुगतान करना। विवादित राशि का भुगतान कर अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र मिलने की तारीख से 15 दिनों के भीतर करना होगा। एकेएम ग्लोबल में प्रमुख (हस्तांतरण मूल्य-निर्धारण और मुकदमा) मनीष गर्ग ने कहा कि नया एफएक्यू मुख्य रूप से पात्रता मानदंड और योजना के तहत देय राशि की गणना के बारे में अस्पष्टता दूर करने की कोशिश है। यदि करदाता 31 दिसंबर, 2024 से पहले घोषणा दाखिल करते हैं, तो उन्हें विवादित कर मांग का 100 प्रतिशत भुगतान करना होगा। ऐसे मामलों में ब्याज और जुर्माना माफ कर दिया जाएगा। जिन मामलों में घोषणा एक जनवरी, 2025 को या उसके बाद की जाती है, उनमें विवादित कर मांग का 110 प्रतिशत करदाता को चुकाना होगा। - नयी दिल्ली। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद इस वित्त वर्ष के पहले आठ माह (अप्रैल-नवंबर) के दौरान भारत का रेडीमेड (तैयार) परिधान निर्यात 11.4 प्रतिशत बढ़कर 9.85 अरब डॉलर का हो गया, जो मेड-इन-इंडिया उत्पादों की मजबूत वैश्विक मांग का संकेत देता है। एईपीसी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) ने कहा कि बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के साथ निकट भविष्य में और अधिक संख्या में कारोबार भारत में स्थानांतरित हो जाएगा। एईपीसी के चेयरमैन सुधीर सेखरी ने कहा, ‘‘भारत की अंतर्निहित ताकत तथा केंद्र एवं राज्यों के मजबूत सहायक नीति ढांचे के साथ, भारत इसके लाभ को प्राप्त करने के लिए पूरी तरह तैयार है। एंड-टु-एंड मूल्य श्रृंखला क्षमता, कच्चे माल का एक मजबूत आधार और टिकाऊ जिम्मेदार व्यावसायिक व्यवहार पर ध्यान केंद्रित करने वाले कारखानों के साथ भारत निश्चित रूप से आने वाले समय में पर्याप्त वृद्धि देखेगा।'' खासकर त्योहारी मौसम की मांग में तेजी को देखते हुए यह वृद्धि ‘मेड-इन-इंडिया' (भारत में बने) उत्पादों के लिए वैश्विक ब्रांड के बढ़ते भरोसे को भी दर्शाती है। सेखरी ने अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से भारत आने और भारत टेक्स एक्सपो 2025 में भाग लेने की अपील की, जो भारत की संपूर्ण कपड़ा मूल्य श्रृंखला को एक ही छत के नीचे देखने का एक बड़ा मंच है। उन्होंने कहा, ‘‘हम भारत टेक्स (टेक्सटाइल) रोड शो के दौरान विभिन्न देशों में गए हैं और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और खुदरा श्रृंखलाओं से हमें अभूतपूर्व प्रतिक्रियाएं मिली हैं। मुझे यकीन है कि यह मंच भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को बढ़ावा देते हुए बेहतर सहयोग और सोर्सिंग नेटवर्क का विस्तार करने में सक्षम होगा।''
- नयी दिल्ली। वाहन विनिर्माता स्टेलेंटिस इंडिया ने जनवरी से जीप तथा सिट्रोन मॉडल की कीमतों में दो प्रतिशत तक की वृद्धि की मंगलवार को घोषणा की। कंपनी के बयान के अनुसार, मूल्य वृद्धि का मकसद कच्चे माल की बढ़ती लागत के प्रभाव को कम करना और उद्योग के अनुरूप टिकाऊ परिचालन सुनिश्चित करना है। स्टेलेंटिस इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) शैलेश हजेला ने कहा, ‘‘ कच्चे माल की लागत और विनिमय दरों में वृद्धि के कारण मूल्य संशोधन आवश्यक था लेकिन हम अब भी अपने ग्राहकों को उचित मूल्य, उच्च गुणवत्ता और शानदार अनुभव प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करने की अपनी प्रतिबद्धता पर अडिग हैं।''
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नयी दिल्ली .शादी-विवाह के सीजन की मांग को पूरा करने के लिए आभूषण विक्रेताओं की मौजूदा स्तर पर ताजा लिवाली से मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में उछाल आया और यह 950 रुपये बढ़कर 79,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। अखिल भारतीय सर्राफा संघ ने यह जानकारी दी। इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की दो दिन की बैठक मंगलवार को शुरू हो रही है। फेडरल रिजर्व के ब्याज दर पर निर्णय से अगले साल सोने के समग्र प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत सोमवार को 78,350 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई थी।
हालांकि, चांदी में लगातार तीसरे दिन गिरावट जारी रही और यह 1,000 रुपये घटकर 91,500 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई, जबकि इसका पिछला बंद भाव 92,500 रुपये प्रति किलोग्राम था। इस बीच, मंगलवार को 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने का भाव 950 रुपये उछलकर 78,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में यह 77,950 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। व्यापारियों ने कहा कि शादी-विवाह के सीजन में आभूषण विक्रेताओं की खरीदारी और सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ने से पीली धातु में तेजी रही। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कॉमेक्स सोना वायदा 15.50 डॉलर प्रति औंस गिरकर 2,654.50 डॉलर प्रति औंस रह गया। अबन्स होल्डिंग्स के मुख्य कार्यपालक अधिकारी चिंतन मेहता ने कहा, ‘‘अमेरिका में मिले-जुले आर्थिक आंकड़ों के कारण भविष्य में ब्याज दरों में कटौती के बारे में अनिश्चितता बढ़ने से सोने की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। विनिर्माण पीएमआई उम्मीद से कमजोर रहा, जबकि सेवा पीएमआई पूर्वानुमानों से अधिक रहा।'' एशियाई कारोबारी घंटों में चांदी 0.99 प्रतिशत गिरकर 30.75 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। -
जमशेदपुर. टाटा स्टील ने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित अपनी नोवामुंडी लौह खदान में पहली बार पूर्ण रूप से महिलाओं की पाली का संचालन शुरू किया है। कंपनी ने बयान में कहा कि यह पहल देश में पहली बार शुरू की गई है। इसमें कहा गया है कि महिला कर्मचारी पाली की सभी खनन गतिविधियों में शामिल हैं, जिसमें भारी मिट्टी हटाने वाली मशीनरी, शॉवल, लोडर, ड्रिल और डोजर का संचालन और पाली की देखरेख शामिल है। कंपनी ने सोमवार को बयान में कहा कि यह भारत में अपनी तरह की पहली पहल है, जिसका मकसद एक समान कार्यस्थल बनाना और पारंपरिक रूप से पुरुष-प्रधान उद्योगों में महिलाओं को सशक्त बनाना है। टाटा स्टील के खान सुरक्षा उप महानिदेशक (एसई क्षेत्र, रांची) श्याम सुंदर प्रसाद ने सोमवार को पूर्ण रूप से महिलाओं की पाली की शुरुआत की। टाटा स्टील के उपाध्यक्ष (कच्चा माल) डी बी सुंदर रामम ने कहा, ‘‘पूरी तरह महिलाओं की पाली न केवल कंपनी के लिए, बल्कि भारतीय खनन उद्योग के लिए भी एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह रुढ़ियों को तोड़ने वाली महिलाओं की क्षमता का प्रमाण है।''
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नई दिल्ली। भारतीय-अमेरिकी राजा कृष्णमूर्ति सहित दो प्रभावशाली अमेरिकी सांसदों ने ‘गूगल’ और ‘एप्पल’ को पत्र लिखकर अपने ऐप स्टोर से ‘टिकटॉक’ को हटाने के लिए कहा है। अप्रैल में राष्ट्रपति जो बाइडन द्वारा हस्ताक्षरित एक विधेयक के अनुसार ‘टिकटॉक’ के मालिकाना हक वाली चीन की ‘बाइटडांस’ (ByteDance) कंपनी को 19 जनवरी तक टिकटॉक से अलग होना होगा, अन्यथा उसे अमेरिकी प्रतिबंध का सामना करना पड़ेगा।
‘चीन मामलों पर प्रतिनिधि सभा की स्थायी समिति’ (सीसीपी) के अध्यक्ष जॉन मूलनार और वरिष्ठ सदस्य कृष्णमूर्ति ने शुक्रवार को एप्पल (Apple) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) टिम कुक, गूगल (Google) के सीईओ सुंदर पिचाई और टिकटॉक के सीईओ शो जी च्यू को पत्र लिखा। सांसदों ने कुक और पिचाई से 19 जनवरी तक अपने ‘प्ले स्टोर’ से टिकटॉक को हटाने के लिए तैयार रहने को कहा।टिकटॉक के सीईओ को लिखे अपने पत्र में उन्होंने च्यू से तुरंत एक विनिवेश का प्रस्ताव देने को कहा, जिसे वे स्वीकार कर सकें। अमेरिकी सांसदों का बयान ऐसे समय आया है जब एक संघीय अपीलीय अदालत ने कांग्रेस द्वारा पारित उस कानून में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है जिसके तहत जनवरी के मध्य तक टिकटॉक को अमेरिका में मौजूद अपने कारोबार को स्थानीय कंपनी को बेचना है या उसे प्रतिबंध का सामना करना पड़ेगा। कंपनी ने अमेरिकी सरकार के फैसले को चुनौती दी थी और फैसले के अमल पर उच्चम न्यायालय का अंतिम निर्णय आने तक रोकने का अनुरोध किया था जिसे संघीय अपीलीय अदालत ने खारिज कर दिया। माना जा रहा है टिकटॉक और इसकी मूल कंपनी बाइटडांस ((ByteDance)) अपीलीय अदालत के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दे सकती है। -
नयी दिल्ली. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बृहस्पतिवार को विश्वास जताया कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद चालू वित्त वर्ष 2024-25 के अंत तक भारत की आर्थिक वृद्धि पटरी पर आ जाएगी। उन्होंने कहा कि इस साल भी भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होगी।
गोयल ने कहा, ‘‘ पहली तिमाही में चुनाव हुए और चुनाव के दौरान जाहिर है कि नीति निर्माण तथा वृद्धि के अगले चरणों या बुनियादी ढांचे पर खर्च के फैसले धीमे हो जाते हैं और इसका ही प्रभाव देखने को मिला।'' गोयल ने यहां टाइम्स नेटवर्क के ‘इंडिया इकोनॉमिक कॉन्क्लेव' में कहा, ‘‘ लेकिन इस तिमाही और तीसरी तिमाही के शुरुआती आंकड़ों से, त्योहारी खर्च, ग्रामीण वृद्धि में वापसी, बैंकों में फिर से सुधार, बुनियादी ढांचे पर खर्च में तेजी....मुझे लगता है कि मार्च में साल के अंत तक हम फिर से पटरी पर आ जाएंगे।'' मंत्री से चालू इस वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में 5.4 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर को लेकर चिंता होने पर सवाल किया गया था। भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष 2024-25 की जुलाई-सितंबर तिमाही में सात तिमाहियों के निचले स्तर 5.4 प्रतिशत पर आ गई थी, जबकि आरबीआई ने स्वयं इसके सात प्रतिशत पर रहने का अनुमान लगाया था। गत वित्त वर्ष 2023-24 की जुलाई-सितंबर तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 8.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। गोयल ने कहा कि भविष्य में आधुनिक प्रौद्योगिकियों और नवाचार के साथ भारत का जुड़ाव देश की विकास की कहानी को परिभाषित करेगा। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के नकारात्मक और झूठे बयान देश की आर्थिक वृद्धि को रोक नहीं पाएंगे। -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने गुरुवार (12 दिसंबर) को संसद के चालू वित्त वर्ष के दौरान 86,730 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च की मंजूरी मांगी है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, शुद्ध अतिरिक्त खर्च 44,183 करोड़ रुपये होगा, जबकि बाकी राशि संसाधनों के पुनः आवंटन से पूरी की जाएगी।
GDP ग्रोथ में बड़ी गिरावटयह मांग ऐसे समय में की गई है जब भारतीय अर्थव्यवस्था में सुस्ती देखी जा रही है। जुलाई-सितंबर तिमाही (Q2) में देश की GDP ग्रोथ 5.4% रही, जो FY23 की तीसरी तिमाही के बाद सबसे निचला स्तर है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के 29 नवंबर को जारी आंकड़ों के अनुसार, यह गिरावट पिछले साल की इसी अवधि के 8.1% और चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1) के 6.7% से काफी कम है।विशेषज्ञों ने GDP ग्रोथ के 6.5% तक गिरने का अनुमान लगाया था, लेकिन वास्तविक आंकड़े उम्मीद से भी कम रहे।गिरावट के प्रमुख कारणमहंगाई का दबाव:अक्टूबर में खुदरा खाद्य महंगाई 10.87% तक पहुंच गई, जिससे उपभोक्ता खर्च में कमी आई। कुल महंगाई दर 6.2% रही, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 2-6% के लक्ष्य से ऊपर है।कमजोर कॉर्पोरेट प्रदर्शन:कंपनियों ने पिछले चार वर्षों में अपनी सबसे खराब तिमाही कमाई दर्ज की, जिससे निवेश धारणा कमजोर हुई।उच्च ब्याज दरें और स्थिर वेतन वृद्धि:ऊंची लोन कॉस्ट और वास्तविक वेतन में बढ़ोतरी न होने से निजी उपभोग पर असर पड़ा, जो GDP का 60% हिस्सा है।ग्रामीण मांग बनी उम्मीद की किरणहालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में मांग में सुधार के संकेत मिले हैं, जो अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक पहलू है।विशेषज्ञों की रायICRA ने GDP ग्रोथ को 6.5% तक गिरने की भविष्यवाणी की थी, जिसमें लंबा मानसून और कमजोर कॉर्पोरेट प्रदर्शन प्रमुख कारण बताए गए। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि महंगाई और निजी खपत में गिरावट से आगे भी आर्थिक सुधार में बाधा आ सकती है। - नयी दिल्ली.कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) ने कानूनी प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और कारोबार के अधिक अनुकूल नियामकीय परिवेश बनाने के लिए ई-अधिनिर्णय और ई-परामर्श मंचों की शुरुआत की है। बुधवार को एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। मंत्रालय में संयुक्त सचिव और निवेशक शिक्षा एवं संरक्षण निधि प्राधिकरण (आईईपीएफए) की मुख्य कार्यपालक अधिकारी अनीता शाह अकेला ने यहां एसोचैम-एसीसीए वैश्विक शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आर्थिक गतिशीलता के साथ कॉरपोरेट अखंडता को संतुलित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ई-अधिनिर्णय और ई-परामर्श मंचों की शुरुआत का उद्देश्य कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बनाना, हितधारकों के अनुभव को बेहतर बनाना और कारोबारी सुगमता में भारत की रैंकिंग को मजबूत करना है। अकेला ने निवेश के अनुकूल माहौल बनाने पर सरकार के फोकस को रेखांकित करते हुए कहा, ‘‘भारत को निवेश और व्यापार वृद्धि के लिए एक वैश्विक गंतव्य के रूप में स्थापित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य वैश्विक खिलाड़ियों को यहां निवेश करने, संचालन करने और स्थायी लाभ उत्पन्न करने के लिए आकर्षित करना है।
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नई दिल्ली। पूर्व राजस्व सचिव संजय मल्होत्रा ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 26वें गवर्नर के रूप में बुधवार को कार्यभार संभाल लिया। केंद्रीय बैंक ने बयान में कहा, उन्होंने 11 दिसंबर 2024 से अगले तीन वर्षों के लिए गवर्नर का कार्यभार संभाला है। उनका तीन साल का कार्यकाल भारतीय बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के लिए नई दिशा तय करेगा। शक्तिकांत दास के कार्यकाल की समाप्ति के बाद संजय मल्होत्रा को इस महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया गया है।
पूर्व राजस्व सचिव मल्होत्रा ने शक्तिकान्त दास का स्थान लिया, जो अपने छह साल के कार्यकाल के बाद मंगलवार को सेवानिवृत्त हो गए।संजय मल्होत्रा ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के तहत राजस्थान कैडर से अपनी सेवा शुरू की थी। वह अब रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में कार्यभार संभाला है।उन्होंने उर्जित पटेल के इस्तीफे के बाद केंद्रीय बैंक की जिम्मेदारियां संभाली थी। संजय मल्होत्रा का कार्यकाल अगले तीन साल के लिए होगा।मल्होत्रा के पास वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में अत्यधिक अनुभव है। उन्होंने भारत सरकार के वित्त मंत्रालय में वित्तीय सेवा विभाग के सचिव के तौर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। इसके अलावा, उन्हें केंद्र और राज्य सरकारों में टैक्स और वित्तीय मामलों का भी गहरा अनुभव है।शक्तिकांत दास का कार्यकाल भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में 2018 में शुरू हुआ था और उनके कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण आर्थिक निर्णय लिए गए। हालांकि, सरकार ने उनके कार्यकाल में कोई विस्तार करने का निर्णय नहीं लिया है। बताया जा रहा है कि संजय मल्होत्रा की नियुक्ति का फैसला वित्तीय सेवा क्षेत्र में उनके अनुभव को देखते हुए लिया गया है। -
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का सबसे महत्त्वपूर्ण काम मुद्रास्फीति और वृद्धि के बीच संतुलन कायम करना है। आरबीआई के निवर्तमान गवर्नर शक्तिकांत दास ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिन यह बात कही। इसके साथ ही उन्होंने नवनियुक्त गवर्नर संजय मल्होत्रा के लिए कुछ प्रमुख मुद्दों का भी उल्लेख किया, जिस पर आरबीआई को ध्यान देने की जरूरत है। पिछले हफ्ते मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा करने हुए दास ने कहा था कि मौद्रिक नीति समिति अर्थव्यवस्था के व्यापक हित में मुद्रास्फीति और वृद्धि में संतुलन बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है।
अक्टूबर में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 6.2 फीसदी पर पहुंच गई थी जबकि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर घटकर 5.4 फीसदी रह गई। यही वजह है कि दास ने इन दोनों के बीच संतुलन कायम करने पर जोर दिया। वृद्धि दर में नरमी और ऊंची ब्याज दरों पर दास ने कहा कि सभी को अपनी राय देने का हक है मगर वृद्धि महज रीपो दर पर नहीं बल्कि कई कारकों पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था सुदृढ़ है और वैश्विक चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपटने में सक्षम है।शक्तिकांत दास ने नवनियुक्त आरबीआई गवर्नर को शुभकामनाएं भी दी। उन्होंने कहा, ‘मैं नवनियुक्त गर्वनर संजय मल्होत्रा को शुभकामनाएं देता हूं। उनके पास काम करने का व्यापक अनुभव है। मुझे पूरा यकीन है कि वह अपना सर्वश्रेष्ठ देंगे।’दास ने कहा कि साइबर सुरक्षा और इससे जुड़े जोखिम के पहलुओं पर केंद्रीय बैंक का ध्यान बना रहेगा। उन्होंने कहा, ‘साइबर सुरक्षा और इससे जुड़े जोखिम हर किसी के लिए बड़ी चुनौती है। इसका सामना केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया कर रही है। और खास तौर पर केंद्रीय बैंक।’दास ने उम्मीद जताई कि यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस के देश भर में लागू होने पर यह व्यापक बदलाव लाने वाला साबित होगा। इस साल अगस्त में दास ने कहा था कि आरबीआई ऋण क्षेत्र में अमूलचूल बदलाव लाने के लिए यूनिफाइट लेंडिंग इंटरफेस लाएगा। इस प्लेटफॉर्म पर ऋणदाताओं को ग्राहकों की वित्तीय और गैर-वित्तीय जानकारी की डिजिटल प्रारूप में उपलब्ध होगी। सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) के बारे में दास ने कहा कि यह भविष्य की मुद्रा है।दास ने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान आरबीआई और सरकार के बीच बेहतर तालमेल रहा। उन्होंने कहा, ‘पिछले 6 साल के दौरान आरबीआई और वित्त मंत्रालय के बीच समन्वय सर्वश्रेष्ठ स्तर का रहा।’दास ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि आरबीआई की टीम के साथ उन्होंने अप्रत्याशित वैश्विक चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया। उन्होंने कामना की, ‘भरोसे और विश्वसनीयता की संस्था के रूप में आरबीआई और ऊंचाइयों को छूएगा। दास ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिन आरबीआई को महत्त्वपूर्ण सुझाव देने वाले वित्तीय क्षेत्र के सभी हितधारकों, विशेषज्ञों, अर्थशास्त्रियों, उद्योग निकायों आदि का शुक्रिया अदा किया।दास ने उन पर भरोसा जताने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और दिवंगत अरुण जेटली (पूर्व वित्त मंत्री) के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘मुझे आरबीआई गवर्नर के रूप में देश की सेवा करने का अवसर देने तथा मार्गदर्शन और प्रोत्साहन के लिए मैं माननीय प्रधानमंत्री का बेहद आभारी हूं। उनके विचारों से हमें बहुत लाभ हुआ।’ इसके साथ ही उन्होंने लिखा, ‘निरंतर समर्थन के लिए वित्त मंत्री को हार्दिक धन्यवाद। राजकोषीय-मौद्रिक समन्वय अपने सर्वोत्तम स्तर रहा और इसने पिछले 6 वर्षों के दौरान हमें कई चुनौतियों से निपटने में मदद की।’ -
नयी दिल्ली. मजबूत वैश्विक रुख के बीच आभूषण विक्रेताओं और स्टॉकिस्टों की ताजा लिवाली से मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोना 820 रुपये बढ़कर 79,780 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। स्थानीय बाजार सूत्रों ने यह जानकारी दी। कारोबारियों ने कहा कि चीन द्वारा अपनी सुस्त अर्थव्यवस्था के लिए कम ब्याज पर ऋण देने और अन्य प्रकार के प्रोत्साहनों का संकेत देने तथा पीपल्स बैंक ऑफ चाइना (पीबीओसी) द्वारा सोने की खरीद फिर से शुरू करने के बाद सर्राफा कीमतों में तेजी आई। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाली सोने की कीमत सोमवार को 78,960 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई थी। मंगलवार को चांदी 1,000 रुपये उछलकर 94,850 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। पिछले सत्र में चांदी की कीमत 93,850 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने का भाव 820 रुपये बढ़कर 79,380 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया। इसका पिछला बंद भाव 78,560 रुपये प्रति 10 ग्राम था। एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष शोध विश्लेषक-जिंस और मुद्रा जतिन त्रिवेदी ने कहा, ‘‘सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, क्योंकि बाजार प्रतिभागी बुधवार के अमेरिका के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं।'' वैश्विक स्तर पर कॉमेक्स सोना वायदा 15.20 डॉलर प्रति औंस बढ़कर 2,701 डॉलर प्रति औंस हो गया। एशियाई बाजार में चांदी 0.19 प्रतिशत गिरकर 32.55 डॉलर प्रति औंस पर बोली गई।
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने संजय मल्होत्रा को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का नया गवर्नर नियुक्त किया है। वह 11 दिसंबर 2024 से यह पद संभालेंगे। वर्तमान में संजय मल्होत्रा राजस्व विभाग में सचिव के रूप में कार्यरत हैं। RBI गवर्नर के रूप में उनके तीन साल के कार्यकाल में देश की आर्थिक और वित्तीय नीतियों में महत्वपूर्ण बदलाव की उम्मीद है।
शिक्षा और करियरसंजय मल्होत्रा राजस्थान कैडर के 1990 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने आईआईटी कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री ली है और प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से पब्लिक पॉलिसी में मास्टर्स किया है। अपने करियर में उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं, जिनमें REC लिमिटेड के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक (CMD) और वित्तीय सेवाओं के सचिव जैसे पद शामिल हैं।महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां-राजस्व सचिव: दिसंबर 2022 में उन्होंने वित्त मंत्रालय के तहत राजस्व सचिव का पद संभाला।-कॉरपोरेट मामलों के सचिव: अप्रैल 2023 में उन्हें कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया।-REC लिमिटेड के CMD: उन्होंने REC लिमिटेड, जो एक महारत्न कंपनी है, में चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में भी काम किया।शक्तिकांत दास का कार्यकाल समाप्तसंजय मल्होत्रा शक्तिकांत दास की जगह लेंगे। जिनका कार्यकाल 10 दिसंबर 2024 को समाप्त हो रहा है। दास के छह साल के कार्यकाल में आरबीआई ने कोविड-19, यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशियाई संकट जैसी कई चुनौतियों का सामना किया। हालांकि, लगातार 11वीं बार ब्याज दरों में कटौती न करने के कारण उन्हें आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा।नई चुनौतियांअब संजय मल्होत्रा के सामने मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने और आर्थिक विकास को तेज करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। आरबीआई की मौद्रिक नीतियों में संतुलन बनाते हुए वह देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएंगे। संजय मल्होत्रा का अनुभव और शिक्षा उन्हें इस भूमिका के लिए एक मजबूत दावेदार बनाता है। अब सभी की नजरें इस पर होंगी कि वह आरबीआई को किस तरह से नई ऊंचाइयों पर ले जाते हैं। - नई दिल्ली। काफी अटकलों के बाद सोमवार को केंद्र सरकार ने राजस्व सचिव संजय मल्होत्रा को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का गवर्नर नियुक्त कर दिया। वर्तमान गवर्नर शक्तिकांत दास का कार्यकाल मंगलवार को समाप्त हो रहा है। मल्होत्रा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर से इंजीनियरिंग में स्नातक हैं और उन्होंने प्रिंसटन विश्वविद्यालय से लोक नीति में स्नातकोत्तर की डिग्री ली है। वह भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1990 बैच के अधिकारी हैं। यह निर्णय दास के कार्यकाल के अनुभवों से प्रेरित हो सकता है। दास के कार्यकाल में सरकार और रिजर्व बैंक के बीच किसी तरह का मतभेद नजर नहीं आया। बहरहाल, बजट निर्माण की प्रक्रिया चल रही है और वित्त मंत्रालय को जल्दी ही मल्होत्रा के स्थान पर किसी को नियुक्त करना होगा।विगत छह वर्षों का दास का कार्यकाल देश की अर्थव्यवस्था और रिजर्व बैंक दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा और इसकी प्रमुख वजह रही कोविड-19 महामारी। रिजर्व बैंक को आपातकालीन उपाय अपनाने पड़े और यह भी सुनिश्चित करना पड़ा कि वित्तीय व्यवस्था मजबूत बनी रहे। रिजर्व बैंक ने महामारी के दौरान और बाद में भी कई कदम उठाए लेकिन नीतिगत और वित्तीय स्थिरता के लिहाज से दो क्षेत्र ऐसे रहे जिन पर चर्चा की जा सकती है।पहली बात तो यह कि रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति को लक्षित करने वाला केंद्रीय बैंक है। हालांकि नीतिगत ब्याज दर तय करने की जिम्मेदारी अब छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की भी है लेकिन किसी भी गवर्नर का कार्यकाल आंशिक तौर पर इस आधार पर भी आंका जाएगा कि उसने मुद्रास्फीति का प्रबंधन किस प्रकार किया। इस संदर्भ में यह तर्क उचित है कि पिछले कुछ वर्षों में रिजर्व बैंक ने मुद्रास्फीति की प्रवृत्ति को कम करके आंका। हालांकि एक बार जब उसने नीतिगत सख्ती आरंभ की तो उसे समय से पहले वापस न लेकर अच्छा किया। एमपीसी की इच्छा है कि इंतजार करके अवस्फीति की प्रक्रिया को पूरा होने दिया जाए।दूसरा है बाहरी क्षेत्र का प्रबंधन। महामारी के दौरान आरंभिक स्थिरता के बाद जब बड़े वैश्विक केंद्रीय बैंकों ने व्यवस्था में नकदी डालना शुरू किया और नीतिगत दरों को शून्य के करीब ले गए तो भारत में भी पूंजी की भारी आवक हुई। रिजर्व बैंक ने अतिरिक्त प्रवाह की खपत करके अच्छा किया। भारी भरकम विदेशी मुद्रा भंडार ने 2022 में उस समय मदद की जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व सहित केंद्रीय बैंकों ने मुद्रास्फीति से निपटने के लिए नीतिगत ब्याज दर में इजाफा कर दिया। वैश्विक मुद्रा बाजारों में भी भारी अस्थिरता देखने को मिली। हालांकि भारतीय रुपये में इस अवधि में काफी गिरावट आई लेकिन उसका असर सीमित रहा क्योंकि रिजर्व बैंक ने समय से हस्तक्षेप किया।
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नई दिल्ली। विभिन्न कार मॉडलों की कीमतें बढ़ने वाली हैं क्योंकि वाहन विनिर्माताओं ने जनवरी से कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की है। कार विनिर्माता अगले महीने से कीमतों में बढ़ोतरी लागू करने का मुख्य कारण इनपुट लागत और परिचालन व्यय में वृद्धि बताते हैं।
हालांकि, उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि यह कवायद हर साल दिसंबर में वाहन विनिर्माताओं द्वारा वर्ष के अंतिम महीने में बिक्री की मात्रा बढ़ाने के लिए की जाती है, क्योंकि ग्राहक नए साल में वाहन खरीदने के लिए बाद के महीनों तक खरीदारी स्थगित कर देते हैं। परामर्श कंपनी डेलॉयट इंडिया के साझेदार रजत महाजन ने कहा, “हमने भारत में कीमतों में बढ़ोतरी के कुछ चक्र देखे हैं। यह कैलेंडर वर्ष और वित्त वर्ष की शुरुआत में होता है, लेकिन कुछ वाहन मूल कलपुर्जा विनिर्माता (ओईएम) अपने नियोजित लॉन्च के आधार पर भी समय चुनते हैं।”रेटिंग एजेंसी इक्रा के उपाध्यक्ष एवं क्षेत्र प्रमुख (कॉरपोरेट रेटिंग) रोहन कंवर गुप्ता ने कहा कि वाहन विनिर्माता कंपनियां आमतौर पर कैलेंडर वर्ष की शुरुआत में कीमतों में वृद्धि करती हैं, ताकि मुद्रास्फीति के दबाव और कमोडिटी की कीमतों आदि के कारण परिचालन लागत में वृद्धि जैसे कारकों की भरपाई की जा सके।उन्होंने कहा, “हाल ही में विभिन्न कार विनिर्माताओं द्वारा घोषित मूल्य वृद्धि इसी कारण से है। ध्यान दिया जाना चाहिए कि यात्री वाहन उद्योग में विभिन्न मॉडलों पर पहले से ही भारी छूट की पेशकश की जा रही है, उद्योग का ध्यान भंडारण के स्तर को कम करने पर है।”प्रवेश स्तर की ऑल्टो के10 से लेकर बहुउपयोगी वाहन इनविक्टो तक के मॉडल बेचने वाली कंपनी ने कहा कि वह बढ़ती इनपुट लागत और परिचालन व्यय के मद्देनजर कीमतों में बढ़ोतरी कर रही है। प्रतिद्वंद्वी हुंदै मोटर इंडिया भी एक जनवरी, 2025 से अपने मॉडल रेंज की कीमतों में 25,000 रुपये तक की वृद्धि करने पर विचार कर रही है। महिंद्रा एंड महिंद्रा जनवरी से अपने एसयूवी और वाणिज्यिक वाहनों की कीमतों में तीन प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करेगी।महिंद्रा एंड महिंद्रा ने कहा कि यह समायोजन मुद्रास्फीति और वस्तुओं की बढ़ी हुई कीमतों के कारण बढ़ती लागत को देखते हुए किया गया है। इसी प्रकार, जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया ने कहा कि वह अगले महीने से अपने संपूर्ण मॉडल शृंखला की कीमतों में तीन प्रतिशत तक की वृद्धि करेगी। कंपनी ने कहा कि कीमतों में यह बढ़ोतरी लगातार बढ़ती इनपुट लागत और अन्य बाहरी कारकों का नतीजा है।होंडा कार्स इंडिया भी कीमतों में बढ़ोतरी पर विचार कर रही है, लेकिन अभी तक इस पर फैसला नहीं हुआ है कि कितनी बढ़ोतरी की जाएगी। लक्जरी कार बाजार की अग्रणी कंपनी मर्सिडीज-बेंज इंडिया जनवरी से कीमतों में तीन प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करने की योजना बना रही है।इनपुट और परिवहन लागत में वृद्धि के कारण ऑडी इंडिया अपने सभी मॉडल रेंज की कीमतों में तीन प्रतिशत तक की वृद्धि करेगी। इसी तरह, बीएमडब्ल्यू इंडिया अगले साल जनवरी से अपने मॉडल रेंज की कीमतों में तीन प्रतिशत तक की वृद्धि करने की योजना बना रही है।:





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